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इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में चौंकाने वाले खुलासे

टाटा ट्रस्ट के द्वारा जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक आम नागरिकों को न्याय मुहैया कराने के मामले में महाराष्ट्र राज्यों की सूची में शीर्ष पर है। वहीं, केरल दूसरे, तमिलनाडु तीसरे, पंजाब चौथे और हरियाणा पांचवें स्थान पर है। ये तो हुई बड़े राज्यों की बात। छोटे राज्यों की बात करें तो एक करोड़ से कम जनसंख्या वाले राज्यों में गोवा पहले, सिक्किम दूसरे और हिमाचल प्रदेश तीसरे स्थान पर है।

बता दें कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2019 विभिन्न सरकारी संस्थाओं जैसे पुलिस, न्यायपालिका, कारागार और कानूनी सहायता पर आधारित है। टाटा ट्रस्ट ने इस रिपोर्ट को सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, कॉमन काउज, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव समेत कई संस्थानों की मदद से तैयार किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 18,200 जज हैं और करीब 23% सीटें खाली हैं। रिपोर्ट से यह तथ्य भी सामने आया कि जेलों में क्षमता से अधिक 114% कैदी हैं जबकि इनमें से 68% कैदी अंडरट्रायल हैं।

टाटा ट्रस्ट की यह रिपोर्ट हमें बताती है कि विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निम्न स्तर पर रहा है। देशभर में न्याय और कानून व्यवस्था में महिलाओं की संख्या काफी कम है। जेल कर्मचारियों में 10% महिलाएं हैं। हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट के सभी जजों में महिला जज 26.5% हैं।

इस रिपोर्ट को जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एमबी लोकुर ने कहा कि रिपोर्ट में हमारी न्यायिक व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गई हैं। न्यायिक व्यवस्था के समक्ष मुख्यधारा के मुद्दों पर न्याय देने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ये मुद्दे हमारी सोसाइटी, सरकार और अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।

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संगठन चुनाव के बाद बिहार जदयू की पहली बड़ी बैठक

पटना स्थित बिहार प्रदेश जदयू मुख्यालय में बुधवार 6 नवंबर 2019 को नवनियुक्त पार्टी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता जदयू के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह ने की। इस बैठक में पार्टी के सभी क्षेत्रीय संगठन प्रभारी, जिलों के संगठन प्रभारी, सभी जिलाध्यक्ष, सभी प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में विभिन्न स्तरों पर संगठन को और अधिक मजबूत, धारदार व चुस्त-दुरुस्त बनाने के मद्देनज़र आरसीपी सिंह ने पार्टी पदाधिकारियों को कई निर्देश दिए। संगठन चुनाव के बाद हुई इस पहली बड़ी बैठक में कई निर्णय लिए गए जिनमें सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का मनोनयन तथा सभी विधानसभा क्षेत्रों में सम्मेलन का आयोजन किया जाना शामिल है।
पार्टी की इस महत्वपूर्ण बैठक में विधानपार्षद संजय कुमार सिंह उर्फ गांधीजी, प्रो. रामवचन राय, ललन कुमार सर्राफ, डॉ. रणवीर नंदन, तनवीर अख्तर, डॉ. रंजू गीता, अभय कुशवाहा, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चंदन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, राज्य निर्वाचन पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार सिंह, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, जदयू मीडिया सेल के अध्यक्ष व क्षेत्रीय संगठन प्रभारी डॉ. अमरदीप, महिला जदयू अध्यक्ष श्वेता विश्वास, अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संतोष महतो आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर अपने संबोधन में आरसीपी सिंह ने पार्टी के सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि हमें गर्व होना चाहिए कि हमलोग उस पार्टी के सिपाही हैं जिसका नेतृत्व नीतीश कुमार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने संगठन को बूथ स्तर तक पूरी मजबूती से स्थापित करना है और बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर श्री नीतीश कुमार ने जितने कार्य किए हैं, उन्हें जन-जन तक पहुँचा देना है; बिहार की महान जनता का आशीर्वाद हमें जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कौन क्या कह रहा है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें केवल अपने काम पर ध्यान देना है। 2020 में एक बार फिर नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनेगी। श्री सिंह ने कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का परिणाम इस बार के लोकसभा चुनाव से भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि हर सीट पर हमें विजय हासिल हो, सभी साथियों को इस संकल्प के साथ चुनाव में जाना है।
इस बैठक में आरसीपी सिंह ने संगठन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। 15 नवंबर 2019 से 05 दिसंबर 2019 के बीच उन्होंने सभी बूथों पर बूथ अध्यक्ष एवं बूथ सचिव का चयन अनिवार्य रूप से कर लेने को कहा। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार 15 दिसंबर 2019 से 05 जनवरी 2020 तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का सम्मेलन किया जाना है। आरसीपी सिंह ने कहा कि इसके पूर्व प्रखंड व जिला कमिटियों का गठन अवश्य कर लें।

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नीतीश सरकार द्वारा भूमि विवाद निबटाने हेतु पुलिसवालों को विशेष ट्रेनिंग की व्यवस्था

देशभर में भूमि विवाद से संबंधित मामले थाने से लेकर भिन्न-भिन्न स्तर के न्यायालयों में करोड़ों की संख्या में वर्षों से लंबित हैं | प्रतिदिन अखबार में जितनी भी हत्याओं के समाचार छपते हैं, उनमें आधे से अधिक भूमि विवाद से संबंधित हुआ करते हैं |

बता दें के सूबे बिहार में लंबित पड़े मुकदमों की संख्या करीब डेढ़ लाख है जिसमें 60% से अधिक मामले जमीन विवाद से जुड़े हैं | इन विवादों की संख्या को कम करने के लिए तथा सज्जन लोगों को सहज जीवन जीने के निमित्त नीतीश सरकार ने पुश्तैनी जमीन के लिए पारिवारिक बंटवारे हेतु रजिस्ट्री-फी लाख-करोड़ रुपये की जगह मात्र ₹100 कर दी | साथ ही यह भी नियम बना दिया कि बिना जमाबंदी अब जमीन की खरीद-बिक्री नहीं होगी, परन्तु हाईकोर्ट ने तत्काल इस नियम पर रोक लगा दी है |

यह भी बता दें कि भूमि विवादों को कम करने हेतु पुलिस मुख्यालय के स्तर से एक विशेष पहल की गई है | इसमें सहायक पुलिस निरीक्षक से लेकर पुलिस निरीक्षक स्तर के पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम जरूरी कानून की ट्रेनिंग दी जाएगी | चरणबद्ध तरीके से दी जाने वाली ट्रेनिंग के लिए गृह विभाग ने 1 करोड़ 47 लाख 31 हज़ार रूपये की स्वीकृति भी दे दी है |

जानिए कि गृह विभाग के सभी उच्चाधिकारियों को हिदायत के साथ यह आदेश निर्गत किया है कि इन रुपये को एक महीने के अंतर्गत ट्रेनिंग पर खर्च करें, न कि रुपये की निकासी करके बैंक एकाउंट में रख दें | आदेश में इस बात की भी जानकारी दे दी गई है कि ट्रेनिंग स्थल ए.एन.सिन्हा शोध संस्थान प्रस्तावित है जहाँ पुलिस इंस्पेक्टर रैंक तक के सभी पदाधिकारियों को जमीन से जुड़े तमाम कानूनों की विस्तार से जानकारी दी जाएगी | यहाँ तक की जमीन रिफॉर्म से जुड़े कानूनों की भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी |

 

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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त

दीपावली पर फोड़े गए पटाखों और पंजाब-हरियाणा में लगातार जलाई जा रही पराली के कारण राजधानी दिल्ली और इससे सटे गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद जैसे दर्जन भर शहरों में वायु गुणवत्ता स्तर (Air Quality Index) 800 से 1000 के आसपास बना हुआ है।
गौरतलब है कि वायु गुणवत्ता मापने के लिए शहर में लगाई गई मशीनें 500 तक AQI माप सकती हैं, जबकि रविवार सुबह दिल्ली और आसपास के शहरों में AQI 1200 के पार चले जाने के कारण मशीनें तक जवाब दे गईं। ऐसे में स्थिति भयावह हो चली है। आँखों में जलन और सांस संबंधी दिक्कतें आम हो गई हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इससे ज्यादा प्रभावित हैं। एहतियातन दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 5 नवंबर तक सारे स्कूल बंद कर दिए गए हैं। खराब मौसम और स्मॉग के कारण वायु सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
उधर केन्द्र सरकार लगातार प्रदूषण से बने हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रदूषण के लिए जिम्मेदार तमाम कारकों मसलन निर्माण कार्यों, कूड़ा जलाने और पराली जलाने पर सख्ती की तैयारी की जा रही है। प्रदूषण से निपटने के लिए 300 टीमें लगातार काम कर रही हैं। राज्य सरकारों को प्रदूषण में कमी लाने के लिए सारे संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकारी स्तर पर जो भी प्रयास हो रहे हैं, वे अपनी जगह हैं; जरूरत इस बात की है कि इस विकट स्थिति के लिए हम सबको आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी और कुछ संकल्प लेने होंगे ताकि हम अपनी प्रकृति और परिवेश की रक्षा कर सकें। बिहार सरकार द्वारा हाल ही में शुरू किया गया जल-जीवन-हरियाली अभियान वास्तव में इन्हीं भयावह स्थितियों से निपटने और हमारी भावी संततियों को सुरक्षित रखने की कोशिश है। देखा जाए तो ऐसे अभियान की जरूरत पूरे देश में है।

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सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ

शुचिता, स्वच्छता और समर्पण का महापर्व है छठ। घर-घर में महिलाएं अपने परिवार व बच्चों की कुशलता की कामना लेकर पूरी निष्ठा से करती हैं इस व्रत को। कुछ घरों में तो पुरुष भी रखते हैं यह व्रत। गौर करने की बात है कि छठ ही एकमात्र पर्व है जिसमें बिना किसी कर्मकांड या पंडितों की सहायता के ही श्रद्धालु व्रती चार दिनों तक चलने वाला व्रत करते हैं।
लोकआस्था का यह महापर्व छठ सामाजिक एकता का अद्वितीय प्रतीक है। तभी तो बिहार के कटिहार, नालंदा आदि जिलों के कुछ मुस्लिम परिवार भी वर्षों से इस व्रत को करते आ रहे हैं। भला क्यों नहीं, सूर्यदेव सबसे जुड़े जो हैं और साथ ही जोड़ते भी हैं सबको। बिना किसी भेद-भाव के विभिन्न घाटों पर सभी एक साथ मिलकर सूर्य देव को प्रणाम करते हैं। सभी जानते और मानते हैं कि सूर्य से ही जीवन है और सूर्य से ही प्रकृति और पर्यावरण का अस्तित्व संभव है। तभी तो इस महापर्व में डूबते सूर्य की भी पूजा समान श्रद्धा से होती है।
धार्मिक आस्था से जुड़े महापर्व छठ का आर्थिक पक्ष भी है। जी हाँ, हमें जानना चाहिए कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जीवित रखने में इस पर्व का बड़ा योगदान रहा है। यदि बाजार में इस पर्व में उपयोग में लाई जाने वाली चीजों पर नज़र डालें तो 90 से 95 प्रतिशत सामान गांवों के छोटे-छोटे किसानों के खेत से या फिर कास्तकारों के हाथों के हुनर से बनकर आते हैं। इस पर्व में इस्तेमाल होने वाली चीजों – हल्दी, अदरख, केला, अमरूद, अल्हुआ, सुथनी आदि – का करोड़ों का कारोबार हो जाता है। मधेपुरा की ही बात करें तो केवल इस जिले में ही हल्दी-अदरख का कारोबार तीन से चार करोड़ तक पहुँच जाता है। छठ पूजन की अन्य सामग्रियों को जोड़ दें तो जिले का कुल कारोबार 90 से 95 करोड़ तक पहुँच जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितनी मजबूती मिलती है।
कुल मिलाकर कहना गलत न होगा कि समाज के हर वर्ग को एक समान लाभ और महत्व देने वाला यह पर्व समाजवाद की सच्ची परिभाषा प्रस्तुत करता है। इस तरह से सम्पूर्ण समाजवादी महापर्व है छठ।

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मधेपुरा के डॉ.कलाम पार्क में डॉ.मधेपुरी ने “लौहपुरुष” को समर्पित किया ‘रन फॉर यूनिटी’

जिला मुख्यालय के मध्य में अवस्थीत डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम पार्क में भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती का आयोजन 31 अक्टूबर को किया गया | सरदार पटेल की जयंती का आयोजन समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी के नेतृत्व में किया गया |

इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी सहित पार्क में नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज कराने वाले डॉक्टर, अधिवक्ता, बैंक कर्मी एवं अन्य बुद्धिजीवियों ने सरदार पटेल को उनके साहसिक कार्यों के लिए याद किया | मौके पर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा करते हुए डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि भारतीय एकता व अखंडता का पर्याय बन गए हैं- सरदार बल्लभ भाई पटेल जिन्हें दुनिया लौह पुरुष के नाम से ससम्मान पुकारती है |

डॉ.मधेपुरी ने खेद प्रकट करते हुए अंत में यही कहा कि भारत को एक करने वाले सरदार तथा स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री बल्लभ भाई पटेल की मृत्यु के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने में 40 वर्ष लगा दिए थे | जिनके साहसिक कार्यों से प्रसन्न होकर महात्मा गांधी ने उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि से नवाजा था |

इसीलिए उनके जन्म दिन को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाया जाने लगा है तथा पूरे देश को एकजुट करने के लिए ‘रन फॉर यूनिटी’ का भी आयोजन किया गया है | इस आयोजन में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.बी.एन.भारती उनकी नन्ही पुत्री, डॉ.अर्जुन, मो.महताब, मो.राशिद, मो.इम्तियाज, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, निर्मल कुमार तिवारी एवं मो.मिस्टर की पूरी टीम समेत बच्चे , बुजुर्ग एवं युवाओं ने विशेष रूप से शामिल होकर देश की एकता और अखंडता बनाए रखने की शपथ ली तथा ‘रन फॉर यूनिटी’ में भी सम्मिलित हुए |

 

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बिहार के सभी जिलों में बनाए जाएंगे परमानेंट हेलीपैड

बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने सूबे के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को स्थाई हेलीपैड निर्माण हेतु 100 मीटर लंबा एवं 100 मीटर चौड़ा स्थल चयन करने को कहा है। श्री कुमार ने जिलों को भेजे गए संदेश में कहा है कि संभव हो तो स्थाई हेलीपेड हेतु चयन किए जाने वाले स्थल पुलिस लाइन, स्टेडियम या किसी हाई स्कूल के मैदान में हो ताकि स्थाई हेलीपैड की समुचित देखभाल व सुरक्षा की जा सके।

बता दें कि स्थाई हेलीपैड निर्माण की बात नीतीश सरकार को इसलिए कुरेदती रहती है कि बिहार में प्रायः प्राकृतिक एवं कृत्रिम आपदाएं आती रहती हैं। सभी जानते हैं कि बाढ़, सुखाड़, भूकंप, चक्रवाती तूफान, अगलगी या शीतलहरी के मामले में बिहार एक संवेदनशील राज्य रहा है।

यह भी बता दें कि ऐसी विकट आपदाओं के समय लोगों को राहत दिलाने के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किया जाता है। उस घड़ी जिलाधिकारी को तुरंत अस्थाई हेलीपैड बनाने में सर्वाधिक परेशानी होती है। ऐसी स्थितियों की पुनरावृति रोकने के लिए तथा राजस्व के अपव्यय के साथ-साथ जल्दबाजी में हेलीपैड निर्माण में कई त्रुटियां रह जाने को ध्यान में रखते हुए स्थाई हेलीपैड निर्माण का निर्णय लिया गया है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि किसी भी प्रकार की आपदाएं आने पर खाद्य सामग्री या अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति हेतु या वीआईपी के सर्वेक्षण अथवा निरीक्षण हेतु आने-जाने को लेकर बार-बार जिला प्रशासन को मशक्कत नहीं करनी पड़े…… इसलिए प्रत्येक जिले में स्थाई हेलीपैड की सराहना सबों ने की है।

 

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जीवनदायी सूर्यदेव के प्रति श्रद्धा का पर्व है छठ

पृथ्वी पर जीवन का आधार है सूर्य क्योंकि सूर्य, को जगत की आत्मा कहा गया है। सूर्य के आलोक से पृथ्वी पर जीवन प्रकाशित हो उठता है। छठ व्रत इसी जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है। ऐसा महापर्व जिसमें बिना किसी भेदभाव के समस्त समाज सामूहिक रूप से डूबते एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देता है।

बता दें कि छठ एक अति प्राचीन महोत्सव है जिसे दिवाली के बाद छठे दिन मनाया जाता है। बिहार झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश… सहित देश के विभिन्न महानगरों में श्रद्धालुओं द्वारा इस प्रकृति प्रेम के प्रतीक छठ पर्व को सर्वाधिक निष्ठा पूर्वक मनाया जाता है। छठ में सभी श्रद्धालु नर-नारी जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। जल तो प्रेम का प्रतीक है चाहे नदी का हो या तालाब का या घर का ही क्यों ना हो।

यह भी जानिए कि यह पर्व सूर्य को आभार व्यक्त करने की परंपरा है। इस पर्व का उद्देश्य सूर्यदेव से अपनेपन को महसूस करना है। सूर्य देव को दूध या जल का अर्घ्य अर्पित किया जाना इस तथ्य को दर्शाता है कि श्रद्धालुओं का मन और हृदय दोनों पवित्र और स्वच्छ बना रहे। फिलहाल पद्मश्री शारदा सिन्हा का छठ गीत वातावरण को सरस बनाने में लग गया है।

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बिहार प्रदेश जदयू की नई कार्यकारिणी का गठन

बिहार प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन किया। कार्यकारिणी में 12 उपाध्यक्ष, 19 महासचिव, 11 सचिव, 01 कोषाध्यक्ष, 38 संगठन प्रभारी और 59 सदस्य शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का भी मनोनयन किया।
प्रदेश जदयू के 12 उपाध्यक्ष हैं: नवल किशोर राय, विश्वनाथ सिंह, एनएन शाही, लखन ठाकुर, रंजीत सिन्हा, श्यामबिहारी राम, रुदय राय, राजन मिश्रा, अंजली सिन्हा, मौलाना उमर नूरानी, प्रो. महेन्द्र प्रसाद सिंह और नरेन्द्र सिंह। जिन 19 नेताओं को महासचिव का दायित्व सौंपा गया है, वे हैं: डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, परमहंस कुमार, चन्दन कुमार सिंह, कामाख्या नारायण सिंह, मंजीत सिंह, अजय पासवान, प्रदीप सिंह, अरुण कुशवाहा, निहोरा प्रसाद यादव, अशोक कुमार बादल, अशोक कुमार सिंह, डॉ. सुहेली मेहता, डॉ. आसमां परवीन, दुर्गेश राय, विभूति गोस्वामी, आसिफ कमाल, डॉ. विपिन कुमार यादव और रामगुलाम राम। विधानपार्षद ललन कुमार सर्राफ को एक बार फिर कोषाध्यक्ष बनाया गया है।
बशिष्ठ नारायण सिंह ने राज्य कार्यकारिणी का गठन करते हुए पार्टी के 30 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष का भी मनोनयन किया। अभय कुशवाहा को एक बार फिर युवा प्रकोष्ठ, तन्वीर अख्तर को अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ, प्रो. रामवचन राय को बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ, डॉ. अमरदीप को मीडिया प्रकोष्ठ एवं सुनील कुमार को प्रशिक्षण प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दूसरी ओर आधे से अधिक प्रकोष्ठों के अध्यक्ष बदले गए हैं। जिन प्रकोष्ठों में नए चेहरे सामने लाए गए हैं, उनमें महिला प्रकोष्ठ (श्वेता विश्वास), व्यावसायिक प्रकोष्ठ (मूलचन्द गोलछा), दलित प्रकोष्ठ (रामप्रवेश पासवान), महादलित प्रकोष्ठ (रुबेल रविदास) और शिक्षा प्रकोष्ठ (डॉ. कन्हैया सिंह) प्रमुख हैं।
चार जिलों में नए जिलाध्यक्ष भी मनोनीत किए गए हैं। सोनेलाल मेहता को खगड़िया, दामोदर रावत को जमुई, सलमान रागिब को नवादा और राकेश कुमार उर्फ पुतुल को आरा (नगर) की जिम्मेदारी दी गई है।

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मधेपुरा में राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव की भव्य तैयारी अंतिम चरण में

मधेपुरा के श्री कृष्ण गौशाला में द्वितीय राजकीय गोपाष्टमी महोत्सव का आयोजन आगामी 5 से 7 नवंबर तक करने का निर्णय डीडीसी सह प्रभारी डीएम विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में लिया गया। यह निर्णय जिला प्रशासन की स्थाई समिति के सदस्यों एवं अन्य गणमान्य की उपस्थिति में किया गया।

बता दें कि बैठक में मुख्य रूप से प्रचार-प्रसार के साथ-साथ कलाकारों के चयन के लिए वरीय एडीएम शिव कुमार शैव की अध्यक्षता में एक कलाकार चयन समिति बनाई गई, जिसे समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, पृथ्वीराज यदुवंशी, डॉ.रवि रंजन, शशिप्रभा जायसवाल एवं हर्षवर्धन सिंह राठौर को जोड़ते हुए राजकीय स्तर से लेकर स्थानीय कलाकारों के चयन व सफल आयोजन हेतु जिला की कला संस्कृति की अस्थाई प्रशासनिक समिति का दर्जा दिया गया।

यह भी बता दें कि निर्णय अनुसार गोपाष्टमी महोत्सव के उद्घाटन के लिए सर्वप्रथम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया जाएगा। स्वीकृति नहीं प्राप्त होने पर कला संस्कृति या पर्यटन मंत्री या फिर स्थानीय मंत्री नरेंद्र नारायण यादव या डॉ.रमेश ऋषिदेव या फिर जिला प्रभारी मंत्री बिहार के ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को उद्घाटन हेतु अनुरोध किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि समयाभाव के कारण स्मारिका प्रकाशन हेतु आने वाले वर्ष में पहले से ही तैयारी की जाएगी।

बैठक में एसडीएम शिव कुमार शैव, एनडीसी रजनीश कुमार राय, एएसपी, सदर बीडीओ, नगर परिषद कार्यालय पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी सामान्य शाखा, शौकत अली, कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार, पत्रकार प्रो.प्रदीप झा एवं तुर्वसू आदि उपस्थित थे।

बैठक के अंत में यह तय किया गया कि 5 नवंबर को विनोद ग्वार और मैथिली ठाकुर, 6 नवंबर को सपना अवस्थी और नालंदा संगीत अकादमी तथा 7 नवंबर को राधा कृष्ण की झांकी संग पूर्णिमा श्रेष्ठ की प्रस्तुति प्रतिदिन संध्या 7:00 बजे से 10:00 बजे रात तक होगी। वरिष्ठ सदस्य डॉ.मधेपुरी द्वारा को प्रदर्शनी वाले प्रस्ताव को भी शामिल कर स्वीकृति प्रदान की गई।

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