मधेपुरा के जजेस कॉलोनी एवं शहीद पार्क के सामने सादगी एवं सुचिता के साथ पर्णकुटी में मधेपुरा के विद्युत विभागीय कार्यालय के कार्यपालक अभियंता के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद 1996 से निरंतर रह रहे गिरिधर प्रसाद मंडल ने 15 मार्च की रात्रि में 9:05 पर अंतिम सांस ली। इस उम्र में भी वे अंतिम सांस लेने से चंद मिनट पूर्व तक बिल्कुल स्वस्थ जीवन जीते रहे। अंतिम क्षण तक सबों से बातें की और यह कहते हुए कि तबीयत ठीक नहीं लग रही है उनके प्राण पखेरू उड़ गए।
ऐसे संत स्वरूप गिरिधर बाबू के निधन का समाचार सुनकर उनके अंतिम दर्शन करने वालों में मैथिली के डॉ. जगदीश नारायण प्रसाद, समाजसेवी-साहित्यकार व भौतिकी के यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, बीएनएमयू के जंतु स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष डॉ.अरुण कुमार एवं भौतिकी स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष डॉ.नवीन कुमार, बीएनएमयू के एन एस एस ऑफिसर डॉ.अभय कुमार, समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी दिनेश प्रसाद मंडल, शिक्षानुरागी बालमुकुंद मंडल के पुत्रद्वय नंदन कुमार, देव कुमार एवं पुत्र पैक्स अध्यक्ष दीपक कुमार, स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव, डॉ.(मेजर) उपेंद्र नारायण मंडल के सुपुत्र अशोक कुमार, सुभाष, विनोद आदि सहित माताएं-बहनें भी मौजूद देखी गई।
उनके पार्थिव शरीर को 16 मार्च को लगभग 11:00 बजे अपराहन में एंबुलेंस से उनके पैतृक गांव चामगढ़ ले जाया गया। जहां के लगभग दो दर्जन इंजीनियर देश एवं प्रदेश की सेवा में लगे रहे हैं और जिनमें अधिकांश नेतरहाटीयन रहे हैं। वहां लोग उनके अंतिम दर्शन करेंगे। तीन पुत्र अंजनी, अजय और संतोष तथा एक पुत्री बेबी है, परंतु वर्षों पूर्व उनकी धर्मपत्नी एवं जेष्ठ पुत्र अंजनी का बिछोह उन्हें मर्माहत किया वरना खान-पान, वाणी-विचार एवं आचरण में सादगी व सुचिता रखने वाले कार्यपालक अभियंता गिरिधर बाबू शतकीय पारी खेलकर ही दुनिया को अलविदा कहते। उनके पुत्र संतोष कुमार ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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