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केवल 10 सेकंड काफी है कोरोनावायरस वेरिएंट से संक्रमित होने के लिए

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महामारी एवं संक्रमण रोग के विशेषज्ञ रमण गंगा खेड़कर ने कोरोनावायरस के डेल्टा प्लस को भी चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि डेल्टा वेरिएंट का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, क्योंकि यह वैरीअंट ऑफ कंसर्न है और डेल्टा प्लस को भी वैरीअंट ऑफ कंसर्न मानना होगा।

बता दें कि खेड़कर ने आगे यही कहा कि डेल्टा प्लस शरीर की एक कोशिका से दूसरी कोशिका में आसानी से जा सकता है। यदि डेल्टा प्लस हमारे मस्तिष्क में प्रवेश कर जाता है तो परिणाम कितने घातक होंगे उसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है।

जानिए कि कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट से संक्रमित मरीज के साथ मात्र 10 सेकंड की नजदीकी भी आपको इसकी चपेट में ला सकती है। भारत में मिले इस डेल्टा वेरिएंट के पूर्व में दुनिया के 95 से अधिक देशों में बड़े पैमाने पर फैल जाने के कारण एक बार फिर से विश्व तालाबंदी की ओर बढ़ने लगा है।

चलते-चलते डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सावधानी की अपील के साथ ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य विभाग ने यह दावा किया है कि यह संक्रमण इंडोर शॉपिंग मॉल में एक-दूसरे के पीछे चलने वाले लोगों के बीच लगभग 10 सेकंड की नजदीकी पर ही तेजी से फैल जाता है। मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने दुनिया के लोगों से विनम्र निवेदन करते हुए यही कहा है कि “दो गज दूरी, मास्क है जरूरी” को जीवन का कवच-कुंडल मानें।

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पेरिस में हो रहे आर्चरी वर्ल्ड कप में भारत को मिला तीन गोल्ड मेडल

पेरिस में चल रहे आर्चरी (तीरंदाजी) के वर्ल्ड कप स्टेज 3 टूर्नामेंट में भारत ने रविवार को 3 गोल्ड मेडल जीते । भारत के नाम अब तक 4 गोल्ड मेडल हो गये हैं।

बता दें कि दीपिका ने एक दिन में भारत को तीन गोल्ड मेडल दिलाए । दीपिका ने पहले पति अतनु दास के साथ मिलकर तीरंदाजी के मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड पर निशाना साधा। साथ ही पति-पत्नी की जोड़ी ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी कर चुकी है तथा दोनों से प्रत्येक भारतीय टोकियो ओलंपिक में गोल्ड जीतने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

पुन: । दीपिका के नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने एक गोल्ड जीता। इस टीम में अंकिता  और कोमोलिका शामिल रही। टीम इवेंट में भारत ने मेक्सिको को पराजित कर गोल्ड जीता।

अंत में दीपिका ने व्यक्तिगत इवेंट में भी एक गोल्ड पर कब्जा कर लिया। इस बार दीपिका रूस की एलिना को शिकस्त दी। इस तरह एक दिन में ही तीन गोल्ड मेडल भारत के लिए जीतने वाली दीपिका से ओलम्पिक में भी ऐसे ही अद्भुत प्रदर्शन की उम्मीद हमें है।

चलते चलते यह भी जानिए कि एक दिन बाद यानि 30 जून को अतनु-दीपिका अपना प्रथम मैरिज एनिवर्सरी मगाएँगे और सभी भारतवासी यही कहेंगे—
“यह अतनु- दीपिका की जोड़ी एक दूसरे के लिए बनी है। ईश्वर इस जोड़ी को लम्बी आयु का वरदान दें।”

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भारत अब डेल्टा प्लस वाले खतरे के घेरे में

भारत में अन्य कोरोना वायरसों से साठ प्रतिशत ज्यादा संक्रामक म्युटेंट  ‘ डेल्टा प्लस ‘ के लगभग 50 मामले पहचान लिए गए हैं। परन्तु, दवाओं से लेकर टीकों के साथ – साथ सतकर्ता के पैरामीटर्स के बारे में अभी भी वैज्ञानिक अंधेरे में है। इसका करण यही है कि डेल्टा प्लस बिलकुल नया म्युटेट है ।

जानिए कि इस नये म्युटेंट ‘डेल्टा प्लस’ के कारण ब्रिटेन एवं अमेरिका में तबाही चरम पर है। इसकी टेस्ट बहुत महंगी है। प्रति टेस्ट 10,000/- दस हजार रुपये लगते हैं। यही कारण है कि भारत में अब तक 40 हजार टेस्ट हो पाई है।

बता दें कि डेल्टा प्लस वायरस का कोई कारगर उपचार अब तक नहीं मिला है लिहाजा सामाजिक दूरी ही निदान बताया गया है। हाॅ ! इस दूरी के लिए पारामीटर्स क्या होंगे यह तय नहीं हो पाया है। क्योंकि पूर्व में वैज्ञानिक राय यही रही है कि नया म्युटेंट पहले वाले से कम घातक होता जाता है जो इस बार उल्टा हो रहा है। अब तो वैज्ञानिकों को यह भी सोचना और शोध कराना होगा कि कोरोना वायारस के लगातार बदलते स्वरूप पर रोक कैसे लगे  !

मौके पर समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने सबों से यही विनम्र अनुरोध किया है कि तब तक सभी “दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी ” को सख्ती से पालन करें और बार-बार हाथ धोते रहें जब तक प्रशासनिक स्तर पर और कोई दूसरा ऐलान नहीं हो ।

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कोरोना पीड़ितों के लिए 7 करोड़ जुटाने में लगे हैं विराट और अनुष्का

कोरोना काल में मानवता की रक्षा के लिए सभी देशों ने भारत की मदद करनी शुरू की तो भारतीय खिलाड़ी, फिल्म सितारे और उद्योगपति भी मदद को सामने आने लगे। जब तेंदुलकर ने एक करोड़ की घोषणा की तो लगे हाथ विराट और अनुष्का ने दो करोड़ रुपए दान किए और 7 दिनों में 7 करोड रुपए जुटाने की योजना भी बना डाली है। कैंपेन की शुरुआत करते ही 2.5 करोड़ से अधिक राशि जमा हो गई।

बता दें कि 2 सप्ताह पहले भारत में ऑक्सीजन से लेकर वैक्सीन तक की डिमांड जीरो थी और आज 55 गुना बढ़ गई है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय अपने परिजनों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजने में लगे हैं। भारत में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत के कारण एनआरआई विदेशों से अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम कर रहे हैं। कईयों के माता-पिता भारत में अकेले हैं और वे चाहकर भी उन तक नहीं पहुंच सकते हैं।

जानिए कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत सरकार ने फिलहाल मेडिकल इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, लेकिन एक घर के लिए सिर्फ दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को आयात करने की इजाजत दी है।

चलते-चलते यह भी कि भारत की राजनीतिक विपक्षी पार्टियों ने कोरोना की तीसरी लहर को रोकने हेतु जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दे रही है। साथ ही यह भी कि कोरोना के सभी म्यूटेशन पर जल्द से जल्द सभी उपलब्ध वैक्सीन का टेस्ट अविलंब करने की प्रक्रिया आरंभ की जाए।

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कोरोना की तीसरी लहर की ओर बढ़ता भारत

भारत में पहली, दूसरी और अब तीसरी लहर… कब तक चलेगा यह कोरोना का कहर ! सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी लहर पर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब भारत कोरोना की दूसरी लहर नहीं संभाल पा रहा है तो तीसरी लहर कैसे संभालेगा ?

बता दें कि वैज्ञानिकों ने उद्घोषणा की है कि प्रथम लहर में 10 से 14 दिनों का समय मिलता था और इसमें प्राय: 45 से ऊपर के बुजुर्गों को ज्यादातर अपने गिरफ्त में लेता रहा करोना। दूसरी लहर में कोरोना ने 5 से 7 दिनों में प्रायः युवाओं को अपना शिकार बनाने लगा है।

अब कोरोना की तीसरी लहरा आने ही वाली है। वह लहर नहीं…. सुनामी होगी ! वैज्ञानिकों के अनुसार इस तीसरी लहर में कोरोना द्वारा प्राय: बच्चों को ही शिकार बनाया जाएगा। बकौल वैज्ञानिक इसमें कोरोना द्वारा 2 दिनों में ही बच्चों को गंभीर हालत में पहुंचा दिया जाएगा और डॉक्टरों को इलाज करने का समय तक नहीं मिलेगा। दो से तीन दिनों में मरीज को आईसीयू में पहुंचा देगी यह तीसरी लहर। कुछ-कुछ देश तो तीसरी लहर की तैयारी के तहत बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार करने में भी जुट गए हैं।

समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विनम्र अनुरोध करते हुए देशवासियों से यही कहा कि कोरोना की दूसरी लहर तो जारी है और आगे तीसरी की बारी है। अभी भी देशवासी कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों को लेकर बिल्कुल लापरवाह है। सरकार और जिला प्रशासन को जैसा सहयोग मिलना चाहिए वैसा नहीं मिल पा रहा है। जानिए कि कोरोना वायरस अब तेजी से अपना व्यवहार बदलने लगा है। तीसरी लहर में अधिक वेरिएंट होगा और कौन वैरीएंट किसे कब दबोचेगा, उसकी जानकारी किसी को नहीं होगी।

चलते-चलते यह भी बता दे कि भारत के लोग अब तक गलती पर गलती करते जा रहे हैं और इन्हीं गलतियों के कारण हम तीसरी लहर को भी आमंत्रित करने जा रहे हैं। जिस-जिस देश के लोगों ने गलती नहीं की उन्हें कोरोना ने माफ भी कर दिया है।

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भारतरत्न डाॅ.कलाम के अभिन्न मित्र रक्षा वैज्ञानिक डॉ.मानस बिहारी वर्मा नहीं रहे

बिहार के रहने वाले पद्मश्री डॉ.मानस बिहारी वर्मा 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे। वे लंबे समय तक मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम किए। वे एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी थे । भारतीय वायु सेना में तेजस का योगदान अविस्मरणीय है और रहेगा।

उन्हें दर्जनों पुरस्कार से नवाजा गया। साइंटिस्ट ऑफ द ईयर, टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड…. आदि के संग-संग पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया। वे रिटायर्ड करने के बाद से बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के छोटे से पैतृक गांव बाऊर में रह रहे थे। पिताश्री ए.के.एल दास व माताश्री यशोदा के घर 29 जुलाई 1943 को जन्मे ऋषि (बचपन का नाम) सहित तीन भाई व चार बहनें हैं। बिहार को अपनी कर्मभूमि बनाकर बच्चों के प्रायोगिक ज्ञान को विकसित करने हेतु कई संस्थाओं का निर्माण भी उन्होंने किया।

अंतिम दिनों में वे दरभंगा-लहेरिया सराय में अपनी बहन के घर में रहने लगे। वहीं 78 वर्ष की उम्र में उन्होंने 3 मई (सोमवार) की देर रात अंतिम सांस ली। समस्त भारत एवं विदेशों में उनके चाहने वालों के बीच उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है। चारों तरफ लोग उनकी आत्मा की चिर शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।

यहां तक कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार एवं डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उस ऋषि तुल्य वैज्ञानिक मानस बिहारी के प्रति शोक व्यक्त करते हुए कहा- “आज 2005 के दिसंबर महीने का अंतिम सप्ताह मेरी नजर के सामने से गुजरने लगा है। महामहिम राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के बिहार आगमन को लेकर उनके साथ दसकों तक एक लैब में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ.अरुण कुमार तिवारी का फोन आता है मुझे। डॉ.तिवारी साहब मुझसे कहते हैं…. मधेपुरी साहब आपको दरभंगा नजदीक है या पटना….. महामहिम को 30 दिसंबर को दरभंगा में उद्घाटन कार्यक्रम है, साथ ही उन्हें डॉ.मानस बिहारी वर्मा साहब से भी मिलना है…. चाहें तो आप वहीं आकर महामहिम से मिल लें या फिर पटना में राजभवन, एसके मेमोरियल हॉल, महावीर कैंसर संस्थान या वापस दिल्ली जाते समय रात में हवाई अड्डे पर भी मिल सकते हैं…. मिला तो रात के लगभग 9:00 बजे पटना हवाई अड्डे के विशाल प्रसाल में जहां महामहिम की गरिमामय उपस्थिति का आलोक पूरे परिवेश में फैला हुआ था। वहां मौजूद थे महामहिम के साथ उनके प्रिय शिष्य व सहयोगी डॉ.अरुण तिवारी, वरुण मित्रा और मैं। बस एक शख्स की कमी महसूस हुई मुझे…. और वे थे डॉ.मानस बिहारी वर्मा।

 

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पश्चिम बंगाल में जीत हुई तृणमूल व बीजेपी की और हार हुई सीपीएम व कांग्रेस की

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पूर्व और बाद में भी हिंसा का तांडव देश देखता रह गया। चुनाव आयोग तक को न्यायालय ने दोषी करार कर दिया। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में पीएम और सीएम से लेकर गृह मंत्री तक की सभाओं व रोडशोज में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती हुई दुनिया देखती रही। देश के सभी न्यायमूर्तिगण भी देखते रह गए। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मुंह खोला।

कुल 292 विधानसभा वाले बंगाल विधानसभा की सभी सीटों के रिजल्ट दे दिए गए। ममता बनर्जी का तृणमूल 213 सीटों पर और बीजेपी 77 सीटों पर विजयी हुई। अन्य के खाते में 2 सीटें गई।

बता दें कि इस चुनाव में इन्हीं दोनों मुख्य पार्टियों टीएमसी व बीजेपी की जीत हुई। जीत इस मायने में कि तृणमूल कांग्रेस एंटीइंकम्वेंसी को पीछे छोड़ एक जोड़ा सीटों पर अपना जोड़ा फूल खिलाया, वहीं बीजेपी ने 3 सीटों से चलकर 74 अधिक सीटों पर कमल खिलाने में सफलता पाई। यदि इस चुनाव में हार हुई है तो केवल इन दो पार्टियों- सीपीएम और इंडियन नेशनल कांग्रेस की। ये दोनों पार्टियां तो पतन की अंधेरी खाई में गिर गई पश्चिम बंगाल में। भला इतने लंबे अर्से तक पश्चिम बंगाल और पूरे देश में राज करने वाला सीपीएम और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलना ही तो इनकी शर्मनाक हार है।

चलते-चलते महामहिम डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी व साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने पश्चिम बंगाल के रिजल्ट पर यही कहा कि कलाम साहब तो बराबर यही कहते रहे कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को दो प्रमुख दलों में एकाकार होकर चुनाव में उतरना चाहिए, जिसमें एक ओर कर्म पर आधारित सभी पार्टियां हो तो दूसरी ओर धर्म पर। यदि ऐसा हुआ होता तो सीपीएम और कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा नहीं होती।

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कोरोना सरीखे राष्ट्रीय आपदा के समय मूकदर्शक बन नहीं बैठा सुप्रीम कोर्ट

भारत को कोरोना की दूसरी लहर के दरमियान खतरनाक दौर से गुजरते देख सुप्रीम कोर्ट चुप नहीं रह सका। शीर्ष अदालत ने कहा कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकते। शीर्ष अदालत ने कहा-

“कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन बैठे नहीं रह सकते। राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना महत्वपूर्ण है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी जानकारी देने की बात कही कि देश की जनता को दिए जाने वाली मेडिकल सुविधाएं, ऑक्सीजन सप्लाई और वैक्सीनेशन प्रोग्राम आदि की विस्तृत जानकारियां सार्वजनिक की जाए। कोविड टीकों की अलग-अलग कीमतों के तर्क के बारे में भी जानकारी मांगी। राज्यों से भी इस महामारी से निपटने हेतु बुनियादी व्यवस्था की रूपरेखा के बारे में अविलंब बताने को कहा। जानिए कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि इस कोरोना महामारी से निपटने के लिए आपकी राष्ट्रीय योजना क्या है ? सुनवाई की शुरुआत में ही न्यायालय ने कहा कि हमें लोगों की जिंदगी बचाने की जरूरत है। जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसआर भट्ट ने यह भी कहा कि सेना एवं रेलवे के डॉक्टर्स जो केंद्र के अंतर्गत आते हैं, को क्वारंटीन, वैक्सीनेशन व अन्य कार्यो में इस्तेमाल में लिया जा सकता है। इस पर कोई राष्ट्रीय योजना होने की जानकारी भी मांगी कोर्ट ने। अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

अंत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्यों के लिए वैक्सीन की कीमतें अलग-अलग रखने पर सवाल उठाने एवं कोविड प्रबंधन मामले में मदद करने हेतु वरिष्ठ एडवोकेट जयदीप गुप्ता एवं मीनाक्षी अरोड़ा को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त करने पर मधेपुरा के अदालत में कार्यरत एडवोकेट सुधांशु शेखर एवं मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने देश के सुप्रीम अदालत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।

चलते-चलते यह भी घोषणा अदालत ने की कि कोरोना ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मार्च- 2021 तक समाप्त हो रहे “पीरियड ऑफ लिमिटेशन” को अगले आदेश तक बढ़ाया जाता है।

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भारत में पीएम रहे मनमोहन के कोरोना संक्रमित हुए, सुनते ही ब्रिटिश प्रधानमंत्री का भारत दौरा रद्द

आरबीआई के गवर्नर तथा अर्थशास्त्र के ज्ञाता भारत में लंबे अर्से तक प्रधानमंत्री रह चुके मनमोहन सिंह कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित हो गए हैं। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को सोमवार को एम्स में भर्ती कराया गया।

बता दें कि 88 वर्षीय श्री सिंह को बेहतर इलाज हेतु एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। ट्राॅमा सेंटर को “कोविड उपचार केंद्र” के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। आरंभ में उन्हें हल्का बुखार था, बाद में जांच के क्रम में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि की गई। यह भी कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने की जानकारी दुनिया को दी।

जानिए कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर आने की सहमति दी जा चुकी थी। परंतु, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ऐसे दिग्गज नेताओं के कोरोना संक्रमित होने के मद्देनजर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन फिलहाल भारत यात्रा पर नहीं आएंगे।

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रमजान है इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना

चांद का हुआ दीदार, पहला रोजा आज। 14 अप्रैल से शुरू हुआ रोजा। इस पर्व में इबादत से राजी होकर खुदा बेपनाह रहमते बरसाता है। यह पर्व मुस्लिम समुदाय के लिए अहम माना जाता है। इसे उपवास और इबादत करने का एक पवित्र महीना माना जाता है।

बता दें कि रमजान को माह-ए-रमजान भी कहा जाता है। इस पूरे महीने अल्लाह की सच्चे मन से इबादत की जाती है। इस महीने में रोजे रखने के अलावा रात में तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। सुबह सेहरी करके रोजा शुरू किया जाता है तथा शाम को इफ्तार के साथ रोजा खोला जाता है। जानिए कि सेहरी और इफ्तार का समय निश्चित होता है।

चलते-चलते यह भी जानिए कि रमजान के महीने को तीन भागों में बांटा गया है। प्रथम 10 रोजों में रहमतों का दौर होता है और दूसरे 10 रोजों में माफी का एवं अंतिम 10 रोजे जहन्नुम की आग से बचाने के लिए होता है। परंतु, इस बार कोरोना की नई लहर के कारण सामूहिक नमाज- इफ्तार से सभी परहेज कर रहे हैं…. क्योंकि कुरान-ए-पाक में वतन से मोहब्बत करने का हुक्म है।

 

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