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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बंगला खाली करेंगे तेजस्वी

बंगला खाली नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार खाने के बाद आखिरकार आरजेडी नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को शनिवार को कहना पड़ा कि वह इस आदेश का सम्मान करेंगे और बंगला खाली करेंगे।

गौरतलब है कि तेजस्वी ने उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित सरकारी बंगला खाली करने के पटना हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सर्वोच्च अदालत ने तेजस्वी की यह अर्जी खारिज कर दी थी और उन्हें विपक्ष के नेता के लिए आवंटित आवास में जाने का आदेश दिया था। यही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय की दो पीठों से अर्जी खारिज होने के बाद भी अपना मुकदमा शीर्ष अदालत तक लाने के कारण उन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

बहरहाल, तेजस्वी जहां एक ओर सर्वोच्च अदालत से माफी मांग रहे हैं वहीं दूसरी ओर बंगला आवंटन को लेकर राज्य सरकार पर द्वेषपूर्ण व भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप भी लगा रहे हैं और इसके खिलाफ ‘लोकतांत्रिक’ संघर्ष जारी रखने की बात कह रहे हैं। कोर्ट के इतने स्पष्ट आदेश आने, आदेश ही नहीं फटकार लगाने और उसके उपरांत माफी तक मांग चुकने के बाद तेजस्वी के आरोपों का खोखलापन स्वत: उजागर हो जाता है, फिर भी वे इस मुद्दे के राजनीतिकरण से बाज नहीं आ रहे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी को 5, देशरत्न मार्ग का बंगला खाली करने को कहा था ताकि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी वहां रह सकें। जुलाई 2017 में नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के बाद तेजस्वी उपमुख्यमंत्री की कुर्सी गंवा बैठे थे।

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दूध उत्पादन में बिहार टॉप थ्री राज्यों में जल्द होगा शामिल- नीतीश

पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में आयोजित तीन दिवसीय 47वाँ नेशनल डेयरी इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस-2019 का उद्घाटन बिहार के विकास प्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं पशु-मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस आदि उपस्थित थे।

बता दें कि उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसान गोबर के साथ-साथ गो-मूत्र का इस्तेमाल ऑर्गेनिक खेती में करें तो पर्यावरण संरक्षण के साथ उत्पादन भी बढ़ेगा। उन्होंने इंडियन डेयरी एसोसिएशन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा कि इस संगठन के पूर्वी क्षेत्र का मुख्यालय बिहार में खुले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 30 डिसमिल जमीन पर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी की राशि अब 6000 से बढ़ाकर 8000 कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 22 हज़ार 7 सौ दुग्ध समितियों से लगभग 12 लाख लोग जुड़े हैं जिसमें महिलाएं मात्र ढाई लाख हैं। अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने की चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि सरकार की मंशा है कि बिहार दूध उत्पादन में जल्द से जल्द देश के टॉप 3 राज्यों में शामिल हो। इसके लिए बिहार में उन्होंने पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना और पशु विज्ञान केंद्र बनाने की घोषणा की।

यह भी बता दें कि उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि पटना में जब डेयरी प्रोजेक्ट बना तब वर्ष 2005 में जहां कम्फोड द्वारा 4 लाख लीटर दूध प्रतिदिन सप्लाई किया जाता था वहीं यह बढ़कर 20 लाख लीटर हो गया है। मौके पर पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने बिहार सरकार से मांग की कि सुधा स्टाल के आवंटन में आरक्षण लागू हो।

चलते-चलते यह भी बता दें कि जहाँ अमेरिकन नोबेल पुरस्कार विजेता जोसेफ इंस्टुंग्लेट ने बिहारी किसानों द्वारा की जा रही जैविक खेती को देखकर कहा कि बिहार के किसान कृषि वैज्ञानिकों से ज्यादा समझदार हैं वहीं सीएम नीतीश कुमार ने डेयरी क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को भिन्न-भिन्न अवार्ड से सम्मानित किया। अंत में सीएम अपनी टीम के साथ डेयरी से संबंधित लगाई गई प्रदर्शनी का भी परिभ्रमण किया….. और देख-देखकर सबों ने प्रसन्नता जाहिर की।

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अब जापान की बुलेट ट्रेनें भी मिथिला पेंटिंग्स से शीघ्र सजेंगी

प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग मधुबनी की चहारदीवारी को लांघकर….. भारतीय सरहद को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय आकाश में उड़ान भरने लगी है। एक समय था जब मधुबनी पेंटिंग से मधुबनी स्टेशन को ही सजा-सजाकर दर्शनीय बनाया गया था। बाद में संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के डब्बों पर बनी मधुबनी की मिथिला पेंटिंग्स दिल्ली के लोगों सहित विदेशियों को भी भाने लगा…. और अब तो जापान की बुलेट ट्रेनें भी मिथिला पेंटिंग से जल्द ही सजने जा रही हैं।

बता दें कि जापान से इस संबंध में भारतीय रेल मंत्रालय को सूचना आई है। जापान सरकार ने भारतीय रेल मंत्रालय से मधुबनी पेंटिंग्स के कलाकारों की टीम भेजने का आग्रह भी किया है। रेल मंत्रालय ने कलाकारों को भेजने की कवायद भी शुरू कर दी है। समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम आर.के.जैन द्वारा इस आशय की जानकारी दी गई कि प्रसिद्धि प्राप्त मिथिला पेंटिंग अब किसी परिचय की मोहताज नहीं है। तभी तो पेंटिंगें जापानी बुलेट ट्रेनों की भी शोभा बढ़ायेंगी।

यह भी बता दें कि भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पहली बार समस्तीपुर मंडल ने “बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस” को मिथिला पेंटिंग्स से सजाकर वाहवाही बटोरी थी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी इसे सराहा था तथा ट्रेनों में उकेरी गई ‘मिथिला पेंटिंग्स’ से सर्वाधिक विदेशी प्रभावित हैं।

यह भी जानिए कि जापान इस धरती पर ऐसा देश है जहाँ “मिथिला म्यूजियम” भी है। इस म्यूजियम को बनाने का श्रेय जापान के महान संगीतकार टोकियो हासेगावा को जाता है। जापान-भारत सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने वाली संस्था के यशस्वी प्रतिनिधि हैं- हासेगावा !

चलते-चलते यह कि जापान ने मिथिला पेंटिंग की खूबसूरती देखकर इस कला से जुड़े चित्रकारों की विभिन्न टीमों को भेजने का अनुरोध भारतीय रेल मंत्रालय से किया है।

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गुप्तेश्वर पांडेय होंगे बिहार के नए डीजीपी

बिहार सरकार ने राज्य के नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के नाम की घोषणा कर दी है। भारतीय पुलिस सेवा के 1987 बैच के अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार का नया डीजीपी बनाया गया है। बिहार के गृह विभाग ने गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी की है। गौरतलब है कि राज्य के वर्तमान डीजीपी केएस द्विवेदी गुरुवार को ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

सरकार से नई जिम्मेदारी मिलने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि अपराध पर नियंत्रण उनकी पहली प्राथमिकता होगी। सभी से सहयोग की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी शख्स अकेले कुछ नहीं कर सकता। आगे उन्होंने कहा, सरकार ने मुझे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हम सभी सिपाही से लेकर अधिकारी तक मिलकर सरकार की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने पुलिसकर्मियों को लोगों के बीच जाने की जरूरत पर बल दिया। बिहार के नए डीजीपी ने कहा, ‘सभी पुलिसकर्मियों को लोगों के बीच जाकर उनसे मिलकर उनकी परेशानियों को जानने का प्रयास करना चाहिए।’

गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार में विशेष और स्मार्ट पुलिसिंग के लिए जाना जाता है। इससे पहले वे राज्य के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपना योगदान दे चुके हैं। संवेदनशील और सामाजिक पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बना चुके पांडेय बिहार में शराबबंदी के बाद शराब से होने वाले नुकसान को लेकर भी बड़ा अभियान चला चुके हैं।

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जॉर्ज फर्नांडिस: बुझ गया भारतीय राजनीति का बेजोड़ सितारा

भारतीय राजनीति के सार्वकालिक महान शख्सियतों में शुमार जॉर्ज फर्नांडिस नहीं रहे। भारत के पूर्व रक्षामंत्री, प्रख्यात समाजवादी नेता, प्रखर वक्ता एवं समता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष जॉर्ज साहब के निधन से राजनीतिक चेतना से सम्पन्न हर व्यक्ति शोकाकुल है चाहे उसकी प्रतिबद्धता किसी भी दल के लिए क्यों न हो। बात जहाँ तक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की है तो उनके लिए यह व्यक्तिगत क्षति है। जॉर्ज साहब को श्रद्धांजलि देते हुए उनका गला रूंध गया और वे रो पड़े। पटना स्थित जदयू मुख्यालय में आयोजित शोकसभा में उनके साथ पूरा जदयू परिवार मर्माहत दिखा। शोकसभा के बाद जॉर्ज साहब को श्रद्धांजलि देने व उनके अंतिम संस्कार में भाग लेने नीतीश कुमार तत्काल दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
जॉर्ज साहब के निधन की खबर मिलते हुए जदयू के पटना में उपस्थित तमाम नेता, पदाधिकारी व कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय में जुटने लगे। यहां आयोजित शोकसभा में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह, विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधऱी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जयकुमार सिंह, शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, गन्ना उद्योग मंत्री खुर्शीद आलम, विधानपार्षद व पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद प्रो. रामवचन राय, संजय गांधी, ललन सर्राफ, राष्ट्रीय सचिव रविन्द्र सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार, मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप समेत बड़ी संख्या में पार्टी के नेतागण एवं कार्यकर्तागण मौजूद रहे।
शोकसभा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जॉर्ज साहब के निधन से हम सभी मर्माहत हैं। उनका जो योगदान इस देश की राजनीति में रहा है और जो कुछ भी उन्होंने समाज के लिए किया है वह सदैव याद रखा जाएगा। सिद्धांत के प्रति, समाजवादी विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव रही। संसद में या रक्षा, रेल आदि मंत्रालयों में भी उनकी भूमिका भुलायी नहीं जा सकती। मुख्यमंत्री ने कहा कि जॉर्ज साहब हमलोगों के न सिर्फ नेता थे बल्कि वे अभिवावक भी थे। 1994 में उन्हीं के नेतृत्व में नई पार्टी बनी। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में जो कुछ भी सीखने का अवसर मिला और आज जो कुछ भी लोगों की सेवा करने की कोशिश करते हैं इसमें उनका ही योगदान रहा है। मैं उनके चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।
जॉर्ज साहब के निधन पर दिल्ली स्थित जदयू के राष्ट्रीय कार्यालय में भी शोकसभा का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, सांसद रामनाथ ठाकुर, सांसद कहकशां परवीन, राष्ट्रीय महासचिव संजय झा समेत कई राष्ट्रीय पदाधिकारी, दिल्ली के प्रदेश पदाधिकारी व कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, आरसीपी सिंह व अन्य नेतागण दिल्ली के पंचशील पार्क स्थित स्व. जॉर्ज फर्नांडिस जी के आवास पर भी गए और उनके पार्थिव शरीर के दर्शन कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनकी पत्नी व परिजनों से मिले। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जॉर्ज साहब के पुत्र अमेरिका में रहते हैं। अंतिम संस्कार के लिए उनकी प्रतीक्षा की जा रही है। चलते-चलते बता दें कि जॉर्ज साहब के निधन पर बिहार में दो दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया है।

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फरवरी में होगा सभी प्रमंडलों में सम्मेलन करेगी जदयू

फरवरी में जदयू सभी प्रमंडलों में भव्य सम्मेलन का आयोजन करेगी जिसमें जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल होंगे। जदयू के इस प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन में संबंधित प्रमंडल के पार्टी के सभी सांसद, मंत्री, विधायक, विधानपार्षद, प्रदेश पदाधिकारी, प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, सभी सक्रिय साथी एवं नीतीश कुमार की नीतियों एवं आदर्शों में आस्था रखने वाले लोग मौजूद रहेंगे।

बता दें कि जदयू के प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन की शुरुआत शनिवार 9 फरवरी 2019 को तिरहुत प्रमंडल से होगी। इसके उपरान्त रविवार 17 फरवरी को दरभंगा प्रमंडल, शनिवार 23 फरवरी को कोसी प्रमंडल, रविवार 24 फरवरी को पूर्णिया प्रमंडल, सोमवार 25 फरवरी को भागलपुर प्रमंडल, मंगलवार 26 फरवरी को मुंगेर प्रमंडल, बुधवार 27 फरवरी को मगध प्रमंडल एवं गुरुवार 28 फरवरी को सारण प्रमंडल में सम्मेलन का आयोजन होगा।

अभी जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ ही दिन शेष हैं, जदयू के इन सम्मेलनो का महत्व और भी बढ़ जाता है। प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह ने इन सम्मेलनों को ऐतिहासिक बनाने के लिए दल के सभी साथियों को अभी से जुट जाने को कहा है। उन्होंने इस संदर्भ में जारी अपने बयान में कहा है कि पार्टी की कोशिश है कि आगामी लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए की जीत हो।

गौरतलब है कि पिछले लगभग एक वर्ष से पंचायत, प्रखंड, जिला व प्रदेश स्तर पर लगातार कार्यक्रम कर जदयू ने जिस तरह जमीन से जुड़ने और आमलोगों के बीच जाने का प्रयास किया है वह अपने आप में अभूतपूर्व है। चाहे सभी जिलों में जदयू का अतिपिछड़ा सम्मेलन और रोड शो हो, जिला व प्रमंडल स्तर पर दलित-महादिलत सम्मेलन हो, सभी जिलों में अल्पसंख्यक कार्यकर्ता सम्मेलन एवं महिला समागम हो या फिर विभिन्न प्रकोष्ठों द्वारा चलाया जा रहा प्रशिक्षण कार्यक्रम और सभी संगठन प्रभारियों का पंचायत, प्रखंड व जिला स्तर पर लगातार बैठकों का दौर, जदयू ने हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं और समाज-सुधार अभियानों को जन-जन तक पहुँचाने की प्रशंसनीय कोशिश की है।

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मुख्यमंत्री ने किया सहरसा विद्युत उपकेन्द्र का शिलान्यास

शनिवार, 19 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड के सिंहौल में 300 करोड़ की लागत से बनने वाले 400/220/132 केवी विद्युत उपकेंद्र का शिलान्यास किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करने के बाद अपने संबोधन में सर्वप्रथम केन्द्रीय विद्युत और नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह को सहरसा में पावर ग्रिड निर्माण करवाने के लिए बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर काम किया गया है। जहां वर्ष 2005 में 24 लाख उपभोक्ता थे और मात्र सात सौ मेगावाट बिजली की खपत थी, वहीं वर्ष 2017 में 4,535 मेगावाट बिजली की खपत हुई और अभी 5,139 मेगावाट बिजली की खपत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 2012 के भाषण के दौरान मैंने कहा था कि अगर बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कराउंगा तो वर्ष 2015 के चुनाव में वोट मांगने नहीं जाऊॅगा। तब से बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए। 2015 में सात निश्चय के अंतर्गत हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को समय से पूर्व ही 25 अक्टूबर 2018 को प्राप्त कर लिया गया। अब हर इच्छुक व्यक्ति जिसने बिजली का कनेक्शन लेना चाहा, उन तक बिजली पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार भी राष्ट्रीय स्तर पर इस योजना पर काम कर रही है और केन्द्र सरकार के सहयोग से हमें इस लक्ष्य को प्राप्त करने में और सहुलियत हुई। समय से पूर्व लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्होंने राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव के योगदान की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि 31 दिसंबर 2019 तक सभी जर्जर तारों को बदलने का नया लक्ष्य रखा गया है। हर किसान के खेतों तक सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये 31 दिसंबर 2019 तक अलग कृषि फीडर के निर्माण का भी लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगले तीन साल में बिहार में सभी बिजली कनेक्शन प्रीपेड हो जाएगा। इससे लोगों को बिल भुगतान में सुविधा होगी। बिजली बिल में गड़बड़ी संबंधी शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिक बिल आने पर लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायत करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम के आधार पर वोट मांगते हैं, न्याय के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। हर तबके और हर इलाके के विकास में लगे हैं। बिहार की जनता जब तक मौका देगी हमारी प्रतिबद्धता बिहार की जनता के प्रति एवं काम के प्रति रहेगी। उन्होंने कहा कि बिजली के आने से अंधेरा, भूत का डर खत्म हो गया है और ढिबरी और लालटेन की उपयोगिता समाप्त हो गयी है।

कार्यक्रम को केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आरके सिंह, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, लघु जल संसाधन मंत्री दिनेश चंद्र यादव, एससी-एसटी कल्याण मंत्री रमेश ऋषिदेव, सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, प्रधान सचिव ऊर्जा प्रत्यय अमृत एवं अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक पावर ग्रिड आईएस झा ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू, विधायक डॉ. अब्दुल गफूर, विधायक रत्नेश सदा, विधायक अनिरुद्ध प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, नॉर्थ बिहार कॉरपोरेशन के एमडी संदीप कुमार, कोसी प्रमंडल की आयुक्त सफीना एन., मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, सहरसा की जिलाधिकारी शैलजा शर्मा, पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सहित अन्य अधिकारीगण, पावर ग्रिड इंडिया लिमिटेड के अधिकारीगण, अभियंतागण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

चलते-चलते बता दें कि सहरसा विद्युत उपकेन्द्र 300 करोड़ रूपये की लागत से 36 माह में बनकर तैयार होगा। इसके अलावा राज्य सरकार इसके संचरण के लिए रिंग नेटवर्क के निर्माण में 354 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च करेगी। यह भी जानें कि केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में तीन पावर ग्रिड का शिलान्यास किया गया है। बकौल मुख्यमंत्री इससे बिजली आपूर्ति में काफी सहूलियत होगी और बढ़ी हुई बिजली की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा। लोगों को पूरी गुणवत्ता के साथ बिजली मिलेगी। बात जहां तक कोसी की है, यह सुखद संयोग है कि केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री और राज्य सरकार के विद्युत मंत्री दोनों इसी कोसी क्षेत्र के हैं। इससे इस क्षेत्र में ऊर्जा संबंधी समस्याओं का समाधान और आसानी से हो सकेगा।

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तो इस बात पर रामविलास का घेराव करेंगे तेजप्रताप ?

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम लिये बगैर उन्हें कथित रूप से अंगूठाछाप करार देने संबंधी केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के बयान पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री व लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने उन्हें आड़े हाथों लिया और इस मामले में उनका घेराव करने की बात कही।
गौरतलब है कि नरेन्द्र मोदी सरकार के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने के निर्णय को आरजेडी ने गलत करार दिया था, जिसके बाद पासवान ने शुक्रवार को राबड़ी देवी का नाम लिए बिना कथित रूप से कहा था कि बिहार में कोई भी अनपढ़ (अंगूठाछाप) मुख्यमंत्री बन जाता है। इस पर तेजप्रताप ने कहा, “रामविलासजी को इस तरह का अपशब्द एक महिला को लेकर बोलना शोभा नहीं देता।”
तेजप्रताप ने नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट के जरिए भी रामविलास पर प्रहार किया और कहा, ‘‘नारी जन्म देती है, ममता देती है और माफ भी कर देती है लेकिन इतिहास साक्षी है कि नारी का अपमान करने वाले बड़े-बड़े रावण और दुर्योधन भी नहीं बचे तो इन मौकापरस्त नेताओं की क्या औकात है।’’
बहरहाल, एक पुत्र के रूप में तेजप्रताप की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन क्या राबड़ी देवी अनपढ़ नहीं थीं? और क्या उनका मुख्यमंत्री बनना लोकतंत्र के साथ मजाक नहीं था? उसी लोकतंत्र के साथ जिसकी आरजोडी वाले इन दिनों दुहाई दे रहे हैं?

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चूड़ा-दही भोज के बहाने मीठी और मजबूत राजनीति

बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज के बहाने एनडीए ने अपनी एकजुटता का परिचय दिया। गौरतलब है कि इस दिन एनडीए के तीनों घटक दलों के द्वारा चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष बशिष्ठ नारायण सिंह पिछले 21 वर्षों से मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही भोज देते आ रहे हैं और धीरे-धीरे यह पूरी पार्टी का आयोजन हो गया है। अब तो आलम यह है कि इस दिन भोज में दस हजार से भी ज्यादा लोग जुटते हैं। वहीं, लोजपा की ओर से उसके प्रदेश कार्यालय में चूड़ा-दही भोज का आयोजन होता है तो भाजपा की ओर से विधानपार्षद रजनीश कुमार भोज देते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन तीनों आयोजनों में शामिल होते हैं और स्वाभाविक तौर पर शुरुआत जदयू के भोज से करते हैं।

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोपहर लगभग एक बजे बशिष्ठ नारायण सिंह के हार्डिंग रोड स्थित आवास पहुँचे जहां बिहार के हर कोने से आए हजारों कार्यकर्ता और नेता उनकी प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके आगमन पर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने सर्वप्रथम बुके से उनका स्वागत किया। नीतीश कुमार ने इस मौके पर केवल तिलकुट का स्वाद लिया। जदयू के इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केन्द्रीय मंत्री व लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा में दल के नेता आरसीपी सिंह, विधानसभा अध्य़क्ष विजय चौधरी, विधान परिषद के उपाध्यक्ष हारून रशीद, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नित्यानंद राय, सांसद रामनाथ ठाकुर, कहकशां परवीन, कौशलेन्द्र कुमार, चिराग पासवान, राष्ट्रीय महासचिव व विधायक श्याम रजक, विधानपार्षद व पूर्व मंत्री अशोक चौधरी, विधानपार्षद संजय गांधी, नीरज कुमार, रणवीर नंदन, विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी, मुख्य प्रवक्ता संजय कुमार सिंह, प्रदेश महासचिव व मुख्यालय प्रभारी डॉ. नवीन कुमार आर्य व अनिल कुमार, जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

लोजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित दही चूड़ा के भोज में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष एवं एनडीए के अन्य नेताओं के साथ ही राज्यपाल लालजी टंडन भी शामिल हुए। लोजपा प्रमुख व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने वहां मुख्यमंत्री को गले लगाकर मकर संक्रांति की बधाई दी। लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मंत्री पशुपति कुमार पारस एवं सांसद व लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पार्टी के तमाम नेता मौजूद रहे। उधर भाजपा के विधानपार्षद रजनीश कुमार के जवाहरलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर भी चूड़ा-दही भोज का आयोजन हुआ जिसमें मुख्यमंत्री समेत कई नेता सम्मिलित हुए। मेजबान रजनीश कुमार ने बुके भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनन्दन किया। नीतीश कुमार तीनों आयोजनों में एक समान गर्मजोशी से शामिल हुए और बिहार व देश के सभी लोगों के लिए अपनी मंगलकामना व्यक्त की।

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बिहार में दो विश्व धरोहर हैं- नालंदा विश्वविद्यालय और बोधगया मंदिर

यूँ तो बिहार में विरासतों की भरमार है…. आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया द्वारा सूचीबद्ध 110 साइटें हैं बिहार में…. जिनमें से दो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली है… वे दोनों हैं- बोधगया का महाबोधि मंदिर और नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष। इन दोनों के अतिरिक्त बिहार में दर्जनों ऐसी साइटें हैं जिन्हें विश्व विरासत स्थलों में शामिल किया जा सकता है।

बता दें कि महाबोधि मंदिर 27 जून 2002 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में सूचीबद्ध किया गया था। जानिए कि विश्व धरोहर के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद से बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है…… क्योंकि महाबोधि मंदिर का प्राचीन स्वरूप अशोक कालीन माना जाता है जिसके जीर्णोद्धार के समय गर्भगृह में अशोक कालीन ईंटे मिली थी। कहा जाता है कि वर्तमान मंदिर चीनी यात्री ह्वेनसांग के भारत आगमन से पूर्व ही बन चुका था।

यह भी जानिए कि बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय 15 जुलाई 2016 को यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया गया है। विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह बिहार का दूसरा और भारत का 33वां धरोहर है। बता दें कि इसके विकास,सुरक्षा व संरक्षण की जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार की है।

पुरातात्विक और साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. के आसपास हुई…. जिसकी स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी। पाल शासकों ने इसे संरक्षण दिया था। 476 ई. में बिहार में ही जन्मे विश्व विख्यात खगोलविद् एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। इतना ही नहीं, जब संसार अज्ञानता के समंदर में भटक रहा था तब आर्यभट्ट का गणितीय विमल ज्ञान प्रकाश सात समंदर पार रोशनी बिखेरता हुआ पहुुँच गया था। आर्यभट्ट भी हमारा विश्व धरोहर ही है जिनके बाबत आइंस्टाइन ने टिप्पणी की है- “दुनिया आर्यभट्ट का आभारी है जिन्होंने संसार को गणितीय ज्ञान दिया जिसके बगैर कोई भी वैज्ञानिक खोज नामुमकिन होता।”

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