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राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत हैं दिनकर की रचनाएं- डॉ.मधेपुरी

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अंबिका सभागार में डॉ.केके मंडल की अध्यक्षता में साप्ताहिक हिन्दी दिवस मनाया गया। जिसमें हिन्दी के विकास के लिए सृजन दर्पण के सचिव विकास कुमार के मार्गदर्शन में नीरज, संध्या, स्नेहा, शिवानी एवं अभिलाषा कुमारी आदि ने हिन्दी नाटक का मंचन किया। मौके पर छात्रों के बीच हिन्दी में भाषण, निबंध, लेखन, चित्रकला एवं प्रोजेक्ट में तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक सह कौशिकी के उप सचिव श्यामल कुमार सुमित्र के निर्देशन में चारो विधाओं में प्रथम आने वाले चार छात्र- छात्राओं वर्ग दस के पीयूष झा, अमीषा राज ,वर्ग नौ के प्रकृति सुरभि तथा वर्ग छह के विवेक कुमार को अध्यक्ष डाॅ.केके मंडल, मुख्य अतिथि प्रो.सचिंद्र एवं सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को याद करते हुए बीएनएमयू के मानविकी के डीन प्रो.(डॉ.) विनय कुमार चौधरी का कौशिकी द्वारा सारस्वत सम्मान किया गया। जिन्होंने हिन्दी में डी.लिट् की उपाधि ही नहीं प्राप्त की है बल्कि तीन दर्जन पुस्तकों के रचनाकार भी हैं। डॉ.विनय ने अपने संबोधन में राष्ट्रकवि दिनकर को ओज और उत्साह का कवि कहते हुए विस्तार से उनकी काव्य यात्रा का वर्णन किया। मुख्य अतिथि प्रो.सचिंद्र ने कहा कि दिनकर जी विश्व मानवता के विकास में भारत की अग्रणी भूमिका चाहते थे।

मौके पर सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि यशस्वी राष्ट्रकवि दिनकर की लोकप्रियता का कारण उनकी क्रांतिकारी और राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत उनकी रचनाएं हैं। डॉ.मधेपुरी ने दिनकर के खंडकाव्य ‘रश्मिरथी’ की चंद पंक्तियां सुनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और खूब तालियां बटोरी। प्रो.मणिभूषण वर्मा ने कहा कि दिनकर के काव्यों में भावों, अनुभूतियों एवं शिल्प की दृष्टि से विविधताएं दृष्टिगोचर होती रही हैं। मौजूद साहित्यकारों डॉ.अरुण कुमार, केबी वीमेंस कॉलेज के संस्थापक सचिव प्रो. प्रभाष चंद्र, डॉ.सीताराम शर्मा, डॉ.आलोक कुमार, कवि द्विजराज ने भी दिनकर के ओज-शौर्य तथा प्रो.(डॉ.) विनय कुमार चौधरी के सारस्वत सम्मान की भरपूर सराहना की।

अंत में अध्यक्षीय संबोधन में टीएमबीयू के पूर्व प्रति कुलपति एवं सम्मेलन की स्थाई अध्यक्ष डॉ.केके मंडल ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर हिन्दी साहित्य के इतिहास में छायावादोत्तर काल के सशक्त और लोकप्रिय कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए। दिनकर राष्ट्र गौरव का गान करते हुए विदेशी दासता से मुक्त करने का आकुल आह्वान भी करते रहे। दिनकर को ओज, उमंग, अग्नि धर्मा, क्रांति दूत, पौरुष और शौर्य के कवि के रूप में मान्यता मिली।

आरंभ में राष्ट्रकवि दिनकर के तैल चित्र पर सबों ने माल्यार्पण व पुष्पांजलि की एवं उपस्थित अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया । अंत में सम्मेलन के उपसचिव डॉ. श्यामल कुमार सुमित्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए डॉ.केके मंडल व डॉ.मधेपुरी

तुलसी पब्लिक स्कूल द्वारा विश्व के महान शिक्षक व दार्शनिक डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में समारोह पूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर टीपीएस के निदेशक डॉ.श्यामल कुमार सुमित्र द्वारा टीपी कॉलेज के दो वरीय शिक्षकों एवं कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं सचिव डॉ.केके मंडल व डॉ.भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी को अंगवस्त्रम, पाग, बुके, कलम आदि देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों द्वारा डॉ.राधाकृष्णन के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की गई। तत्पश्चात स्कूल के छात्र-छात्राओं एवं अतिथियों द्वारा केक काटकर विश्व गुरु डॉ.राधाकृष्णन का जन्मदिन मनाया गया। लगे हाथ शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर भौतिकी के लोकप्रिय प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि शिक्षक समाज का सृजनहार होता है, रक्षक-रहवर और रखवाला होता है। डॉ.कलाम को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है और भविष्य द्रष्टा भी होता है। साधारण जीवन जीने वाले वाला शिक्षक ही असाधारण प्रतिभा वाले छात्रों को जन्म देता है। डॉ.मधेपुरी ने अपने गुरुओं को याद करते हुए यही कहा कि भारत के तीन राष्ट्रपति ऐसे हुए जो राष्ट्रपति होने से पहले शिक्षक के रूप में भारत रत्न से सम्मानित किए गये। वे हैं- डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ.जाकिर हुसैन एवं डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम। वैसे शिक्षक प्रणम्य ही नहीं प्रातः स्मरणीय रहेंगे।

अंत में अध्यक्ष डॉ. केके मंडल ने बापू को संदर्भित करते हुए अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि शिक्षक को चरित्रवान होना चाहिए तभी वह छात्रों में संस्कार भरने में सक्षम हो सकते हैं। अनुशासित शिक्षक ही अनुशासन का पाठ पढ़ा सकता है। अंत में अतिथियों के हाथों स्कूल के शिक्षकों का सम्मान करते-कराते निदेशक डॉ.श्यामल कुमार सुमित्र ने अतिथियों के स्वस्थ जीवन की कामना की और संयुक्त रूप से यही कहा कि शिक्षक दिवस पर आने वाली पीढ़ियां को आपका आशीर्वचन इसी तरह मिलता रहे, यही ईश्वर से मेरी प्रार्थना है।

मौके पर शिक्षक वरुण कुमार, सोनू निगम, मनोज कुमार सौरभ कुमार एवं शिक्षिका काजल कुमारी, सोनी कुमारी, शिवानी कुमारी, पूजा कुमारी आदि मौजूद थे।

 

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रासबिहारी बाबू मधेपुरा के पूर्ण परिचय के लिए बेहद जरूरी- डॉ.मधेपुरी

स्थानीय रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में समाज-सुधारक रासबिहारी लाल मंडल की 106वीं पुण्यतिथि मनाई गई। सर्वप्रथम उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि की- उनके प्रपौत्र डॉ.ए.के.मंडल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी जयशंकर ठाकुर, विद्यालय के प्राचार्य अनिल कुमार चौहान एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी डॉ.अरुण कुमार यादव व राजेंद्र प्रसाद यादव आदि ने।

प्रधानाध्यापक की अध्यक्षता में कार्यक्रम को सर्वप्रथम मशहूर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.ए.के.मंडल एवं मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी जयशंकर ठाकुर ने संबोधित किया।

मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि रासबिहारी लाल मंडल वह नाम है जो मधेपुरा के पूर्ण परिचय या इसके अस्तित्वबोध के लिए बेहद जरूरी है। वे उच्च कोटि के समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। वे बने बनाए पद चिन्हों पर कभी नहीं चले बल्कि स्वयं के द्वारा पद चिन्हों को तैयार करते रहे। वे जीवन भर गरीबों और वंचितों की राह सजाते रहे। अंग्रेजों के सामने कभी नहीं झुके। उन्हें सभी मिथिला का शेर भी कहा करते थे। समारोह का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन पूर्व विज्ञान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव ने किया।

समारोह में शिक्षक राम नरेश प्रसाद, श्याम सुंदर यादव, प्रभाष चंद्र यादव, कुमारी माधवी, कुमारी उर्वशी एवं सुभद्रा रानी आदि सहित स्कूल के छात्र भारी संख्या में मौजूद थे।

 

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23 अगस्त, 2023 के दिन भारत चाँद पर

भारत विश्व का पहला देश बन गया जब भारत का सबसे महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान- 3 का लैंडर शाम 6:04 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा। करोड़ों-करोड़ भारतीय उस पल को देखकर रोमांचित हुए। सारे विश्व में तिरंगा की शान अचानक बढ़ गई।

जैसे-जैसे चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा की सतह के निकट हो रहा होता कि इसरो के वैज्ञानिकों की तालियों की गड़गड़ाहट चतुर्दिक सुनाई देने लगती। 140 करोड़ देशवासियों ने ऐसा इतिहास बनते हुए देखकर देश के वैज्ञानिकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की।

फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उस पल का गवाह बनकर यही कहा कि यह घटना राष्ट्र के जीवन की चेतना बन गई है। साथ ही यह पल भारत के जय घोष का पल बन गया है। डॉ. मधेपुरी ने कहा- हर मुश्किल फाँदकर पहुंच गया भारत चाँद पर। दक्षिण अफ्रीका से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा लहराकर इसरो के निदेशक एस.सोमनाथ सहित सभी वैज्ञानिकों को हृदय से बधाई दी और यही कहा कि साइंस एंड टेक्नोलॉजी देश के उज्जवल भविष्य का आधार बनेगा।

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पद्मभूषण डॉ.बिंदेश्वर पाठक अपने कर्मों में सदैव जीवित रहेंगे- डॉ.मधेपुरी

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक 80 वर्षीय पद्मभूषण डॉ.बिंदेश्वर पाठक नहीं रहे। मंगलवार 15 अगस्त को नई दिल्ली में सुलभ इंटरनेशनल के केंद्रीय कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और एम्स में इलाज के दौरान करीब दो बजे अपराह्न में उनका निधन हो गया। बुधवार को नई दिल्ली के लोदी गार्डन शवदाह गृह में उनका शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। पुत्र कुमार दिलीप ने उन्हें मुखाग्नि दी। बिहार के वैशाली जिला ने अपना ऐसा लाल खोया जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी सोच के बूते विश्व में भारत का नाम रोशन किया था। उनके निधन से बिहार ही नहीं देश की अपूरणीय क्षति हुई है।

समाजसेवी डॉ भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि 80 के दशक में मैं भी मधेपुरा नगर पालिका का उपाध्यक्ष हुआ करता था। डॉ.पाठक के कार्यों से प्रभावित होने के कारण अपने मित्र पटना के पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता विनोदानंद यादव के साथ उनसे मिलने उनके निवास पर गया था। कुछ ही देर की बातचीत में उनकी सोच से हम दोनों सर्वाधिक प्रभावित हुए थे, क्योंकि उन दिनों मधेपुरा नगरपालिका में भी मैला सिर पर ढोया जाता था।  डॉ.पाठक ने उन दिनों सुलभ शौचालय को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बना दिया था। उनके इस मुहिम से देश में मनुष्यता की गरिमा सर्वाधिक बढ़ी। उनके इन्हीं कार्यों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से भी इन्हें नवाजा गया था। डॉ.बिंदेश्वर पाठक अपने पर्यावरणीय सुरक्षा एवं स्वच्छता अभियान के कार्यों में सदैव जीवित रहेंगे। ईश्वर उनकी आत्मा को चिर शांति प्रदान करें।

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मधेपुरा जिला जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा भाईचारा कार्यक्रम आयोजित

मधेपुरा जदयू जिला अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ द्वारा भूपेंद्र स्मृति कला भवन में “कारवाने-इत्तेहाद व भाईचारा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन की अध्यक्षता अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष मोहम्मद मुर्शीद आलम ने की और मंच संचालन मोहम्मद नईम साहब ने की।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विधान परिषद सदस्य डॉ.खालिद अनवर, आलमनगर विधायक व पूर्व मंत्री नरेंद्र नारायण यादव, बिहारीगंज विधायक निरंजन मेहता, जदयू जिलाध्यक्ष व पूर्व मंत्री डॉ.रमेश ऋषिदेव, आलम नगर प्रभारी सुभानंद मुकेश, प्रवक्ता निखिल मंडल, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.नीरज कुमार, पूर्व अध्यक्ष गुड्डी देवी, प्रो. विजेंद्र नारायण यादव, महेंद्र पटेल, अशोक चौधरी, नरेश पासवान, प्रभु नारायण मेहता  अश्फाक आलम, रामकृष्ण मंडल, श्मशाद आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अतिथियों के सम्मान के पश्चात सबों ने नीतीश कुमार के किए गए कार्यों का विस्तार से वर्णन किया और कहा कि अबकी बार पीएम बने नीतीश कुमार।

डॉ.मधेपुरी ने कुछ अलग हटकर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का अंतिम संदेश-  “पृथ्वी को रहने योग्य कैसे बनाया जाए” को संदर्भित कर वृक्षारोपण करने पर बल दिया और सभी धर्म के लोगों से यही कहा-

मंदिरों में बटे अब यही प्रसाद- एक पौधा, थोड़ी सी खाद। मस्जिदों में हो अब यही अजान- दरख्त लगाएं एक-एक इंसान। गुरुद्वारों में गूंजे यह वाणी- हर बंदा दे पौधों को पानी। गिरजाघरों में दें यह शिक्षा- वृक्षारोपण प्रभु यीशु की इच्छा।

अंत में लंच पैकेट बांटने के बाद जिलाध्यक्ष डॉ. रमेश ऋषिदेव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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एसपी राजेश कुमार को मिले राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए बधाई दी डॉ.मधेपुरी ने

शालीनता एवं प्रखर दृढ़ता के साथ मेधावी जनसेवा के लिए मधेपुरा के एसपी राजेश कुमार (आईपीएस) को महामहिम राष्ट्रपति के पुलिस पदक से सम्मानित किया जाना है। इस बाबत बिहार सरकार द्वारा अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।

समाजसेवी- साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बताया कि मधेपुरा के तत्कालीन डायनेमिक डीएम मो.सोहैल के कार्यकाल में डिप्टी एसपी के रूप में उन्होंने सामाजिक सौहार्द के लिए एसपी विकास कुमार के साथ जागरूकता लाने हेतु मधेपुरा की सड़कों पर अधिकारियों एवं मुझ जैसे समाजसेवियों के साथ पैदल मार्च भी किया है। उनकी यह सोच रही है कि सामाजिक जागरूकता से भी अपराध पर कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकता है। तभी तो वे सदैव जनसंवाद के लिए तत्पर रहते हैं। मुख्यालय में रहने पर वे आम लोगों के लिए सदैव उपलब्ध रहते हैं। मामला कितना भी उलझा क्यों ना हो, उसकी तह तक जाकर उद्भेदन करना उनकी प्राथमिकता में सदैव शामिल रहता है।

ऐसे ही कतिपय सराहनीय सेवाओं एवं अविस्मरणीय योगदानों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होने वाले चयनित पुलिस पदाधिकारियों में मधेपुरा के एसपी राजेश कुमार (आईपीएस) भी शामिल है। डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा जिला को गौरवान्वित करने वाले एसपी राजेश कुमार को हृदय से बधाई दी है।

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15 अगस्त, 1942 के हीरो थे सुखासन के सेनानी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल- डॉ.मधेपुरी

बम्बई में कांग्रेस का अधिवेशन 8 अगस्त, 1942 को संपन्न हुआ। अधिवेशन के निर्णय के अनुसार महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का निश्चय किया गया। गांधी ने देश को ‘करो या मरो’ का मंत्र दिया और उसी दिन से अगस्त क्रांति का सूत्रपात हो गया।

मधेपुरा भी अगस्त क्रांति से अछूता नहीं रहा। 13 अगस्त, 1942 को भूपेंद्र नारायण मंडल (रानीपट्टी), वीरेंद्र नारायण सिंह (सरोपट्टी) तथा देवता प्रसाद सिंह (धबौली) के नेतृत्व में एक विशाल जुलूस मधेपुरा कचहरी पहुंचा। भूपेंद्र नारायण मंडल जन समूह एवं सरकारी पदाधिकारियों के सामने कांग्रेस के कार्यक्रमों को पढ़कर सुनाया।  जुलूस भूपेंद्र नारायण मंडल की अगुवाई में थाना और रजिस्ट्री ऑफिस भी गया, जहां तिरंगा लहराया गया।

वहीं 14 अगस्त, 1942 को ब्रिटिश पुलिस ने मधेपुरा के स्वराज ऑफिस को घेर कर अपना अधिकार जमा लिया, परंतु  15 अगस्त, 1942 को मनहरा-सुखासन के क्रांतिवीर कमलेश्वरी प्रसाद मंडल एवं जगबनी के प्रेम नारायण मिश्र के नेतृत्व में हजारों-हजार सत्याग्रहियों के साथ स्वराज ऑफिस पर धावा बोलकर ब्रिटिश पुलिस को खदेड़ दिया और भवन पर पुनः अपना कब्जा जमा लिया। इसी दिन मधेपुरा में कमलेश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में एक विशाल सभा हुई जिसमें यह घोषणा कर दी गई कि अंग्रेजी राज समाप्त हो गया और राष्ट्रीय सरकार की स्थापना हो गई। संपूर्ण अगस्त महीने भर आंदोलनकारियों द्वारा अगस्त क्रांति की धार को तेज किया जाता रहा। ऐसे ही मनहरा-सुखासन के तीन क्रांतिवीरों के जीवन वृत्त से रू-ब-रू कराने हेतु जल्द ही समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की एक पुस्तक- “मनहरा-सुखासन की त्रिमूर्ति-  शहीद चुल्हाय, कमलेश्वरी और कीर्ति” आपके हाथों में होगी।

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भारतीय सांसदों को देश के भविष्य की चिंता नहीं- डॉ.मधेपुरी

आये दिन विश्व भर में बच्चों द्वारा मोबाइल देखते रहने की और उससे होने वाले हानिकारक दुष्प्रभावों की प्रायः हर महकमें में चर्चाएं होती रहती हैं। प्रिंट मीडिया से लेकर सोशल मीडिया द्वारा एवं कथा वाचकों से लेकर लेखकों व कवि सम्मेलनों द्वारा मोबाइल देखते रहने से बच्चों में हो रहे डिप्रेशन, उन्माद, रेडिएशन के खतरे, ध्यान नहीं लगने तथा विभिन्न प्रकार के प्रॉब्लम इन चाइल्ड बिहेवियर आदि की चर्चाएं सभी मंचों से किए जा रहे हैं।

वर्षों से ऐसी चर्चाएं चारों ओर हो रही हैं फिर भी भारत के सांसदों को अपने देश के भविष्य की चिंता नहीं है। सत्तापक्ष हो अथवा विरोधी पक्ष उन्हें केवल चिंता है 2024-25 के चुनाव जीतने की। गांधीयन मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के करीबी समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने देश के रहनुमाओं एवं सांसदों को स्मरण दिलाते हुए यही कहा कि वर्ष 2002 में डॉ.कलाम ने राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में विभिन्न राज्यों के सौ किशोर-किशोरी छात्रों को पहली पंक्ति में बैठाकर शपथ ग्रहण संवाद के आरंभ में यही कहा था- “ये बच्चे भारत के भविष्य हैं इसीलिए इन्हें सबसे आगे जगह दी गई है।” आज उस संपूर्ण भारतीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की रूह कीआवाज सुनकर डॉ.मधेपुरी ने भारतीय सांसदों को देश के भविष्य की चिंता करने हेतु अनुरोध किया है।

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डॉ.महेंद्र नारायण पंकज को सीएम के हाथों मिला मोहन लाल महतो वियोगी सम्मान

साहित्यकार डॉ.महेंद्र नारायण पंकज जिले के कुमारखंड प्रखंड के भतनी गांव के रहने वाले हैं। संप्रति मधेपुरा नगर परिषद के डॉ.मधेपुरी मार्ग, वार्ड नंबर- 1 में स्थायी रूप से रहकर साहित्य साधना में लगे रहते हैं। वर्तमान में जन लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ.महेंद्र नारायण पंकज को मंत्रिमंडल सचिवालय राजभाषा विभाग की ओर से पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों सम्मानित किया गया। 31 जुलाई को सत्र 2021-23 के लिए हिन्दी सेवी सम्मान योजना के तहत डॉ.पंकज को मोहनलाल महतो वियोगी सम्मान मिला। जिसके तहत ताम्रपत्र पर अंकित सम्मान पत्र एवं ₹50000 पुरस्कार राशि के रूप में चेक द्वारा प्रदान किया गया। साथ ही मेडल और अंगवस्त्रम भी दिया गया।

डॉ.महेंद्र नारायण पंकज शिक्षक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत हुए हैं। डॉ.पंकज को बिहार के शिक्षा मंत्री से भी पुरस्कार मिला है। डॉ.महेंद्र को यह सम्मान मिलने से कोसी अंचल के साहित्यकारों में सर्वाधिक खुशी है। उनके इस उपलब्धि पर कौशिकी श्रेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं टीएमबीयू के पूर्व प्रति कुलपति डॉ.केके मंडल, सम्मेलन के सचिव एवं समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.सीताराम शर्मा, बीएनएमयू के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो.(डॉ.) विनय कुमार चौधरी, बीएनएमयू स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, जिला माध्यमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं रेडक्रास की वर्तमान अध्यक्ष डॉ.शांति यादव, प्रो.मणिभूषण वर्मा, गजलकार सियाराम यादव मयंक सहित मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, त्रिवेणीगंज आदि के साहित्यकारों ने भी बधाई एवं शुभकामनाएं दी है।

 

 

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