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नशा मुक्ति दिवस पर जाग उठा जज्बाती जिला मधेपुरा !

मधेपुरा जिला मुख्यालय सहित सभी सदर प्रखंडो एवं उदाकिसुनगंज अनुमंडल के आलमनगर, चौसा, पुरैनी, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा व अन्य प्रखंडों में नशामुक्ति दिवस (26 नवंबर) सर्वाधिक उत्साह एवं संकल्प के साथ सवेरे से देर शाम तक यानि दिनभर संकल्पित भाव के साथ मनाया गया |

शहर के उर्दू मध्य विद्यालय, कन्या मध्य विद्यालय से लेकर टी.पी.कॉलेजिएट, SNPM, रास बिहारी, केशव कन्या उच्च माध्यमिक +2 विद्यालयों सहित अन्य सरकारी व प्राइवेट विद्यालयों- कौनवेटों के छात्र-छात्राओं द्वारा बी.एन.मंडल स्टेडियम से रंगारंग ‘नशा मुक्ति दिवस’ के बैनरों एवं नारों के साथ प्रभात फेरी निकाली गई | स्कूली बच्चों ने ‘नशा मुक्ति अभियान’ में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा शहर के बी.पी.मंडल चौक, भूपेन्द्र चौक, मस्जिद चौक, थाना चौक, शिवनंदन चौक, सुभाष चौक, कर्पूरी चौक का भ्रमण करते हुए नशा के खिलाफ नारे लगा-लगाकर लोगों को जागरुक किया |

बता दें कि समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित पदाधिकारियों एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, डीएसपी रहमत अली, शौकत अली, नरेश पासवान, अशोक चौधरी आदि की उपस्थिति में जिले के उच्चाधिकारी द्वय डीएम मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार ने संयुक्त रुप से हरी झंडी दिखाकर स्कूली बच्चों की प्रभात फेरी को रवाना किया |

DM Md.Sohail showing green flag to the students at B.N. Mandal Stadium Madhepura.
DM Md.Sohail showing green flag to the students at B.N. Mandal Stadium Madhepura.

फिर दिन में जिला उत्पाद विभाग के अधीक्षक शैलेन्द्र मिश्रा एवं उत्पाद निरीक्षक राजू मिश्रा की देख-रेख में स्थानीय भूपेन्द्र कला भवन में ‘नशामुक्ति से संबंधित विषयों’ पर आधारित निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम-द्वितीय एवं तृतीय आये प्रतियोगियों क्रमशः निशा कुमारी- आनंद कुमार- कुशल आनंद एवं रूमा कुमारी- आनंद कुमार- मो.मौशिम जिया को डीएम मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार ने पुरस्कृत किया |

यह भी जानिये कि कार्यक्रम के दौरान टीवी के जरिये जिले के वरीय पदाधिकारियों सहित शहर के गणमान्यों ने सीएम, डिप्टी सीएम एवं मुख्यसचिव आदि के सारगर्भित भाषणों को सुना और बाद में मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने अपने संबोधन में यही कहा-

‘नशामुक्ति से समाज में अमन शांति व स्थिरता कायम होने के साथ-साथ विकास का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है | नशा मुक्ति से बहुत बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव हुए हैं- शराब में खर्च होने वाली राशि अब घर-परिवार संभालने में और बच्चे-बच्चियों की शिक्षा पर खर्च होने लगे हैं, जो सूबे के लिए सुखद संकेत है…….!’

इसके अलावे एसपी विकास कुमार ने जहां यह कहा कि शराबबंदी सहित अन्य नशा पर अंकुश लगने से अब रोड दुर्घटनाओं के साथ-साथ अपराधों की दर में कमी आई है वहीं एसडीएम संजय कुमार निराला ने अपने संबोधन में यही कहा कि नशामुक्त समाज बनाने में सरकार ही नहीं आम लोगों का सहयोग भी जरूरी है | इस अवसर पर डीडीसी, एएसपी, उत्पाद अधीक्षक, डीपीआरओ सहित अन्य समाजसेवियों ने भी अपने-अपने विचार रखे |

अंत में शाम 5:00 बजे से भूपेन्द्र कला भवन मंच से कला जत्था एवं स्थानीय कलाकारों सहित नवाचार रंगमंडल के अमित अंशु, सुनीत साना सहित सभी कलाकारों द्वारा ‘बदल रहा है बिहार’ पर दी गई प्रस्तुति आरंभ से समापन तक तालियाँ बटोरती रही और डीएम, एसपी सहित सभी उच्चाधिकारियों व गणमान्यों द्वारा अंत तक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया जाता रहा |

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मधेपुरा के लिए अच्छी खबर- खुलेगा ट्रॉमा सेंटर

मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने बताया कि मधेपुरा सदर अस्पताल में कोसी क्षेत्र का पहला ‘ट्रॉमा सेंटर’ बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है वहीं मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ.गदाधर प्रसाद पांडे ने यह जानकारी दी कि ट्रॉमा सेंटर निर्माण हेतु 4 करोड़ 44 लाख 95 हज़ार 643 रुपया बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड को निर्गत कर दी गई है तथा प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही ट्रॉमा सेंटर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा |

बता दें कि मधेपुरा में कोसी का पहला ट्रॉमा सेंटर निर्माण की सरकारी स्वीकृति पर खुशी जाहिर करते हुए समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि कोसी के लोगों के लिए वरदान साबित होगा ट्रॉमा सेंटर | डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि कोसी प्रमंडल के तीनों जिलों में ट्रॉमा सेंटर नहीं होने के कारण सड़क दुर्घटना में गंभीर रुप से जख्मी मरीजों को पटना, पूर्णियाँ या दरभंगा….. आदि जगहों के लिए रेफर किया जाता है और अधिकतर मरीजों की जान अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही हो जाती है | यहाँ ट्रॉमा सेंटर खुलने पर गंभीर रुप से जख्मी मरीजों को भी बाहर रेफ़र नहीं करना पड़ेगा | सर्वाधिक जख्मी मरीजों की जान बचाई जा सकेगी |

यह भी जानिए कि भीषण दुर्घटनाग्रस्त तथा गोली लगने पर गंभीर रुप से जख्मी मरीजों की जान, समय पर इलाज नहीं होने के कारण चली जाती है- वह अब नहीं होगा बल्कि बेहतर इलाज अब संभब हो पायेगा क्योंकि सिविल सर्जन डॉ.पांडे ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में मौजूद रहेगा- सी आर्म मशीन, सीटी स्कैन, भेंटीलेटर, एक्स-रे, आईसीयू, ओटी…… सहित जनरल सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरो सर्जन, जनरल फिजिशियन…….. एनेस्थिसियोलॉजी……. रेडियोलोजी सहित आपातकालीन चिकित्सा से संबंधित अन्य आवश्यक सभी सुविधाऍ |

यह भी बताया गया कि राज्य के 6 जिले- रोहतास, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, पूर्णिया और मधेपुरा में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने हेतु तकनीकी रूप से अनुमोदित प्राकुलन उपलब्ध कराये गये थे, परंतु सूबे के स्वास्थ समिति के उप सचिव आर.किशोर ने प्रस्तावित छह ट्रॉमा सेंटरों में से मात्र दो- दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं मधेपुरा सदर अस्पताल का निर्माण की स्वीकृति दी है |

चलते-चलते यह भी बता दें कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही ट्रॉमा सेंटर निर्माण कार्य निर्धारित 8 शर्तो सहित समय सीमा के अंदर पूरा कर लिया जाएगा | हाँ ! इसका निर्माण अग्नि आपदा से निपटने के लिए फायर सेफ्टी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा | कार्य के भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट के बाद ही राज्य स्वास्थ्य समिति भुगतान करने की कार्यवाई हेतु निदेश जारी करेगी |

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और 2 रन पर पूरी टीम आउट !

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है। पर क्या ये अनिश्चितता इस हद तक भी हो सकती है कि पूरी टीम, और वो भी राज्य स्तर की मान्यताप्राप्त टीम, महज 2 रन पर आउट हो जाए? सुनकर आप दांतों तले उंगली दबा लें, मगर ये सच है। क्रिकेट के मैदान का ये अजीबोगरीब रिकॉर्ड बीसीसीआई महिला अंडर 19 क्रिकेट मैच के दौरान बना। केरल के खिलाफ अंडर 19 वनडे लीग मैच खेलते हुए नगालैंड की टीम महज 2… जी हां केवल 2 रन बनाकर आउट हो गई।

मजे की बात यह कि नगालैंड की टीम के दोनों रन पारी के शुरुआती पांच ओवर में बने, जबकि टीम ने खेले पूरे 17 ओवर। यानि अंतिम 12 ओवर में एक भी रन नहीं बना। अरे रुकिए जनाब, अभी बात पूरी कहां हुई। अभी आपने ये कहां जाना कि इन 2 रनों में भी 1 रन अतिरिक्त (वाइड) के तौर पर टीम के खाते में जुड़ा और शेष 1 रन से खाता सिर्फ 1 ही खिलाड़ी – सलामी जोड़ी के रूप में उतरी मुस्कान –  का खुला। बाकी 9 बल्लेबाजों का खाता तक नहीं खुला और टीम का रनरेट 0.12 रहा। उधर केरल की ओर से कप्तान मिन्नू मानी ने 4 विकेट झटके, जबकि सौरभी को 2 और सांद्रा सुरेन और बीबी सेबेस्टियन को 1-1 सफलता हाथ लगी।

और जब लक्ष्य का पीछा करने की बात आई, केरल की ओर से बेहद साधारण लक्ष्य का पीछा करते हुए सलामी बल्लेबाज अंशू ने पारी की पहली ही गेंद पर चौका लगाकर टीम को जीत दिला दी। ये ऐसी जीत थी, जिसकी कल्पना खुद केरल भी नहीं कर सकती थी। और हां अपनी इस जीत के साथ केरल की टीम ने सबसे कम गेंद में लक्ष्य हासिल करने का नेपाल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। नेपाल ने वर्ष 2006 में म्यांमार के खिलाफ मैच में लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए केवल दो गेंदें ली थीं।

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यूं उड़ाया ‘शत्रु’ ने मोदी के मंत्रियों का मजाक

भाजपा नेता और बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा अपनी पार्टी के लिए बीते दिनों की बात होते जा रहे हैं। इधर पार्टी के किसी कार्यक्रम, किसी अभियान में न तो वे शिरकत करते हैं और न ही पार्टी फोरम पर उनकी जरूरत ही महसूस की जाती है। लेकिन वे ठहरे ‘शॉटगन’। अपनी ओर लोगों का ध्यान खींचना उन्हें खूब आता है। ‘खामोश’ उनका प्रिय डायलॉग जरूर है, लेकिन खामोश रहना उनकी फितरत में नहीं। जब भी उन्हें मौका मिलता है, अपनी पार्टी का मजाक तक उड़ाने से वे बाज नहीं आते। पर इस बार तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूरी कैबिनेट को ही निशाने पर ले लिया है। जी हां, गुरुवार को मोदी के मंत्रियों का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने कहा, “कैबिनेट के 90 प्रतिशत मंत्रियों को कोई नहीं जानता, जबकि बचे हुए 10 प्रतिशत मंत्रियों की कोई इज्जत नहीं करता”।

बता दें कि शत्रुघ्न ने अभी दो दिन पहले ‘पद्मावती’ फिल्म के मुद्दे पर बॉलीवुड की नामी हस्तियों को  कठघरे में खड़ा करते हुए सूचना प्रसारण मंत्री और प्रधानमंत्री को लेकर भी सवाल उठाए थे। मंगलवार को उन्होंने कहा था कि अमिताभ बच्चन, आमिर खान, शाहरुख खान, सूचना और प्रसारण मंत्री के साथ इस पर हमारे सबसे लोकप्रिय पीएम चुप किसलिए हैं? उन्होंने ट्वीट किया, “जैसा कि ‘पद्मावती’ ज्वलंत मुद्दा बन गई है। लोग पूछ रहे हैं कि महानायक अमिताभ बच्चन, बेहद बहुमुखी आमिर खान और सबसे मशहूर शाहरुख खान के पास बोलने के लिए इस पर कुछ नहीं है। कैसे हमारी सूचना और प्रसारण मंत्री या फिर सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री (अमेरिकन थिंक टैंक पोल पीईडब्ल्यू के मुताबिक) इस पर मौन क्यों धारण किए हुए हैं। हाई टाइम!”

शत्रुघ्न यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक उनकी बात है, तो वे इस मसले पर महान फिल्मकार और प्रोड्यूसर संजय लीला भंसाली के चुप्पी तोड़ने के बाद बोलेंगे। वे सिर्फ तब बोलेंगे, जब उन्हें बोलना होगा और वे फिल्मकार की अभिरुचियों के साथ मामले की संवेदनशीलता, राजपूतों की वीरता और निष्ठा को ध्यान में रखकर बोलेंगे।”

बहरहाल, जैसे ही सोशल मीडिया पर मोदी के मंत्रियों को लेकर शत्रुघ्न की तल्ख टिप्पणी आई, लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कई टि्वटर यूजर्स इस पर उल्टा उन्हीं का मजाक उड़ाते दिखे। उनमें से एक ने कहा, “आपने कितनी इज्जत दी। जिस पार्टी ने बढ़ाया, उसी को अपशब्द कहे।” तो दूसरे ने उनकी टिप्पणी का कारण उनकी कुंठा को बताया। कहा, “शुक्र है कि वह मंत्री नहीं हैं, वरना वे कहां फिट होते? कुंठा में।” वहीं, एक यूजर ने पूछा कि वे भाजपा छोड़ क्यों नहीं देते? तो किसी ने उनके लिए सिर्फ ‘खामोश’ शब्द का इस्तेमाल किया। पर शत्रु तो ‘शत्रु’ ठहरे, वे भला क्यों किसी से कुछ सुनें? क्यों खामोश रहें??

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तो उपमुख्यमंत्री को घर में घुसकर मारेंगे तेज प्रताप !

आज की राजनीति का स्तर गिर गया है, यह कहने में कोई नई बात नहीं। लेकिन एक युवा नेता अपने पिता की उम्र के नेता के लिए, जो पद और अनुभव में भी अत्यंत वरिष्ठ हों, अपशब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें घर में घुसकर मारने की बात करें तो क्या कहेंगे आप? क्या शर्म से सिर झुक नहीं जाएगा आपका? क्या राजनीतिक विरोध की ऐसी अभिव्यक्ति सभ्य समाज में किसी भी तरह स्वीकार्य हो सकती है? नहीं ना? लेकिन, बिहार की राजनीति में हो कुछ ऐसा ही रहा है।

जी हां, आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक बयान दिया है। औरंगाबाद में एक सभा में बोलते हुए तेज प्रताप ने कहा है कि वे सुशील मोदी के घर में घुसकर उन्हें मारेंगे। उन्होंने कहा कि वे अगर सुशील मोदी के बेटे की शादी में जाते हैं तो वहां उनकी पोल खोल देंगे।

जनसभा में तेज प्रताप ने कहा कि सुशील मोदी ने फोन पर बेटे की शादी का निमंत्रण दिया है। बकौल  तेज यह निमंत्रण उऩके परिवार को शादी में बुलाकर बेइज्जत करने के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि “हम डरते नहीं हैं। हम वहीं सभा करेंगे और शादी में तोड़फोड़ करेंगे। घर में घुसकर मारेंगे।”

तेज के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुशील मोदी ने उन्हें कुंठित करार दिया। सुशील मोदी ने कहा, ‘तेज प्रताप कुंठित हैं। वे मेरे बेटे की शादी में बाधा डालना चाहते हैं। मुझे समझ नहीं आ रहा कि इस मामले में वे राजनीति क्यों कर रहे हैं। मैं तो लालू प्रसाद यादव के बच्चों की शादी में सम्मानपूर्वक जाता रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि लालू यादव इस मामले में तेज से जरूर बात करेंगे।’

गौरतलब है कि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बेटे उत्कर्ष मोदी की शादी तीन दिसंबर को है। मोदी ने बेटे की शादी में कोई भी तामझाम नहीं करने का ऐलान किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस शादी में ना तो बैंड बजेगा और ना ही मेहमानों और बारातियों का स्वागत किया जाएगा। यही नहीं, खाने और नाश्ते की बजाय भगवान का भोग लगाया हुआ ‘प्रसाद’ दिया जाएगा। विवाह आदि आयोजनों में विरल हो चुकी ऐसी सादगी की घोषणा से यह शादी स्वाभाविक तौर पर पहले से चर्चा में थी। अब अपने विवादित बयान से तेज ने इस आयोजन को और चर्चा में ला दिया है।

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राहुल के नेतृत्व को तैयार कांग्रेस

जैसी कि उम्मीद थी, कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी की ताजपोशी का दिन तय हो गया। सोमवार सुबह सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के सांगठनिक चुनावों और राहुल के अध्यक्ष पद पर ताजपोशी को लेकर चर्चा हुई। बैठक के ठीक बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की विधिवत घोषणा कर दी गई।

बता दें कि अध्यक्ष पद के लिए अधिसूचना 1 दिसंबर को जारी होगी, जबकि 11 दिसंबर नाम वापसी का आखिरी दिन होगा। अगर राहुल के अलावा कोई और उम्मीदवार हुआ तो 16 दिसंबर को मतदान होगा और वोटों की गिनती 19 दिसंबर को होगी। ऐसे में राहुल के अध्यक्ष बनने का ऐलान 19 दिसंबर को होगा। हालांकि राजनीति के थोड़े जानकार भी जानते हैं कि राहुल की उम्मीदवारी को कोई चुनौती नहीं मिलने जा रही और वे 11 दिसंबर को ही कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएंगे।

गौरतलब है इस चुनावी प्रक्रिया से पहले ही तमाम राज्यों में कांग्रेस के सदस्यों का चयन करने के लिए मतदान हो चुका है। लगभग सभी राज्यों ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी का नाम सर्वसम्मति से पारित किया है। उधर कार्यसमिति में भी सबने एक स्वर से राहुल के नेतृत्व में आस्था जताई है। कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी ने कहा कि गुजरात में चुनावी प्रचार की सफलता का श्रेय और नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दे पर विपक्ष की सफल अगुवाई का श्रेय कांग्रेस उपाध्यक्ष को जाता है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के शब्द भी कुछ ऐसे ही थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर अगुवाई की है और वे बहुत ही क्षमतावान नेता हैं। आजाद ने आगे कहा कि ये कुछ ही दिनों की बात है, जब पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा और राहुल आगे बढ़कर पार्टी का नेतृत्व करेंगे। लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि हम सब पार्टी अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी के नेतृत्व के लिए तैयार हैं।

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बीएनएमयू के वीसी डॉ.ए.के.राय ने वो किया जो किसी ने नहीं किया

बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के 23वें कुलपति डॉ.अवध किशोर राय द्वारा विश्वविद्यालय की रजत जयन्ती वर्ष पर…….. स्थापना काल से ही अपनी जवानी के 25 वसंतों को पतझड के हवाले करने वाले वैसे 85-86 कर्मचारियों के घर में खुशी की लहर पैदा कर दी जिसे पूर्व के कुलपतियों द्वारा नहीं किया जा सका | वर्तमान कुलपति डॉ.ए.के.राय ने जहाँ एक ओर ‘कारसेवक’ नाम से प्रसिद्धि प्राप्त इन अस्थाई कर्मियों की विधि संगत नियुक्ति कर मंडल विश्वविद्यालय के इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज कराने की हिम्मत जुटाई वहीं दूसरी ओर 25 वर्षों से रिटायर्ड शिक्षकों व कर्मियों के पेंशन बकाये वेतनादि भुगतान के निमित्त 2 महीने कबल दिन-दिनभर पानी पी-पीकर एफओ, एफए आदि को बैठाकर सारी समस्याओं के निदान हेतु ‘पेंशन अदालत’ लगाते रहे और सभी दु:खी आत्माओं से शुभाशीर्वचन पाते रहे, शुभकामनाएं बटोरते रहे |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri giving a Bouquet to the Hon'ble V.C. Dr.A.K.Ray for his courageous act in favour of so called "Karsewak" to get them sitted on the permanent post.....!
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri giving a Bouquet to the Hon’ble V.C. Dr.A.K.Ray for his courageous act in favour of so called “Karsewak” to get them sitted on the permanent post…..!

यह भी जानिए कि मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने पूरी तन्मयता के साथ उच्च वर्गीय लिपिक, निम्नवर्गीय लिपिक, पुस्तकालय लिपिक, कैटलागर, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के पदों पर 86 लोगों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी करने की स्वीकृति दी | इसी के साथ स्थायीकरण हेतु धरना-प्रदर्शन, आंदोलन पर अब लगा विराम और दूर-दराज से आनेवाले छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों का अब होगा कल्याण……… कुलपति ने अपनी पहली प्राथमिकता को अमलीजामा पहनाने के बाद यही कहा-

पूरी पारदर्शिता के साथ विधि संगत ढंग से नियमानुसार चयन समिति ने अस्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति की है | जो बच गये हैं सीट रिक्त होते ही उनकी बहाली भी कर ली जायेगी- जिसकी चर्चा संचिका में कर दी गई है |

यह भी बता दें कि जहाँ एक ओर नियुक्ति की आस में कई एक तो दुनिया से चले गये, कुछ रिटायर हो गए और इसके अलावा भी कई कर्मचारी हैं जिन्हें यह सौभाग्य नहीं प्राप्त हो सका….. वहीं दूसरी ओर इस स्थायीकरण की दौर में पिता-पुत्र और पति-पत्नी ने एक साथ ज्वाइन कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है | कुलसचिव कुमारेश प्रसाद सिंह द्वारा जारी अधिसूचना में जिन 86 कर्मियों की नियुक्ति की गयी है उनमें- दशरथ यादव व पुत्र शंभू यादव, मो.इरशाद व पिता मो.सईद तथा पति गौरीशंकर पोद्दार व पत्नी शांति देवी ने एक साथ चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के रूप में योगदान कर विश्वविद्यालय के इतिहास में नया कीर्तिमान कायम किया है जिसकी वजह बने हैं सुलझे सोच के नेक इंसान कुलपति डॉ.ए.के.राय और इसकी जड़ में है- पूर्व में परीक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारी डॉ.राजेश्वर राय जिसकी कर्मठता से प्रभावित होकर तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एवं विश्वविद्यालय के विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे लोहिया-भूपेन्द्र-कर्पूरी के अनुयायी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी जिन्होंने एक नहीं कई बार उनकी जयंती के अवसर पर विशेषरूप से राजेश्वर राय से यही कहते सुने गये-

गिरो उठो फिर चलना सीखो |

हक की खातिर लड़ना सीखो ||

और श्रीराय ने बहाली को लेकर कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़ी और कभी डिगे नहीं, बल्कि सदा यही गुनगुनाते देखे जाते रहे-

भय जिसे शूल चुभ जाने का, वह फूल भला कब पाता है |

जो ज्वार देख घबड़ाता है, वह इसी पार रह जाता हैं ||

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मधेपुरा की छवि बनने लगी है देश व दुनिया में बेहतर

जहाँ एक ओर मधेपुरा के बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय में ‘हिन्दी-उर्दू एक विरासत’ पर कुलपति डॉ.ए.के. राय के नेतृत्व में राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा हो एवं राज्य स्तर पर संचालित ‘कौशल विकास कार्यक्रम’ में बेहतर प्रदर्शन के लिए मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) को सीएम नीतीश कुमार द्वारा सम्मानित किया जा रहा हो और मधेपुरा में भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश वाला विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री का निर्माण निर्धारित समय से छह माह पूर्व ही पूरा कर लिया गया हो……… तो बेशक, मधेपुरा की छवि देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से बेहतर होती चली जा रही है और आगे भी होती चली जायेगी……|

जानिये कि फिलहाल मधेपुरा के ग्रीन फील्ड रेल इंजन फैक्ट्री में मात्र 70 पदाधिकारी एवं कर्मचारी कार्यरत हैं जिनके रहने के लिए कारखाना कैंपस में ही ‘ब्लॉक हॉस्टल भवन(वन)’ का उद्घाटन 1 दिन पूर्व किया गया है | कारखाने में इंजन निर्माण की गति बढ़ने के साथ ही कर्मचारी-पदाधिकारी की संख्या 500 तक पहुंच जायेगी | जहाँ तक स्थानीय लोगों के रोजगार का सवाल है तो जानिए कि कारखाना निर्माण के दौरान प्रतिदिन 1500 लोग यहाँ कार्यरत रहे हैं |

Block Hostel Building (One) ready for officers & other employees inside the campus of Green Field Electric Engine Factory Madhepura.
Block Hostel Building (One) ready for officers & other employees inside the campus of Green Field Electric Engine Factory Madhepura.

बता दें कि एल्सटॉम द्वारा अपने स्प्लायर को सप्लाई चेन बरक़रार रखने की दिशा में तेज कदम उठाने के लिए यह कहा जा रहा है कि सभी सप्लायर इसी कारखाने के आस-पास अपना-अपना कारखाना लगायें ताकि यहाँ के लोगों को और अधिक रोजगार मिलता रहे |

यह भी जानिये कि मधेपुरा का नाम इतनी तेजी से देश और दुनिया के रंगमंच पर इसलिए रोशन होने लगा है कि मधेपुरा और छपरा दोनों जगहों पर रेल कारखाना के लिए लगभग एक साथ एग्रीमेंट हुआ था | परंतु, जहाँ छपरा में रेल कारखाना आज तक आकार भी ग्रहण नहीं किया है वहीं मधेपुरा का रेल कारखाना जिला प्रशासन से सहयोग प्राप्त कर समय से 6 माह पूर्व ही तैयार हो गया तथा फरवरी 2018 के अंतिम सप्ताह में पहला इंजन बनकर तैयार होने जा रहा है- जिसे राष्ट्र को समर्पित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के स्वप्नदृष्टा पीएम नरेन्द्र मोदी के आगमन का इंतजार है |

Honourable Member of Railway Board Mr.Ghanshyam Singh and The Authority of Alstom Company Mr.B.Salhotra jointly inaugurating Block Hostel Building (One) along with DRM Mr.R.K.Jain, Senior DEN Mr.Sanjay Kumar , D.O.M. Mr.Parmodh Kumar D.S.T.E. Saurabh Kumar, T.E. Mr.Kunwar Jha, P.W.I. Mr.Sunil Kumar & others in the campus of Rail Engine Factory at Madhepura.
Honourable Member of Railway Board Mr.Ghanshyam Singh and The Authority of Alstom Company Mr.B.Salhotra jointly inaugurating Block Hostel Building (One) along with DRM Mr.R.K.Jain, Senior DEN Mr.Sanjay Kumar , D.O.M. Mr.Parmodh Kumar D.S.T.E. Saurabh Kumar, T.E. Mr.Kunwar Jha, P.W.I. Mr.Sunil Kumar & others in the campus of Rail Engine Factory at Madhepura.

चलते-चलते बता दें कि पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा उद्घाटन करने हेतु मधेपुरा आगमन से पूर्व सारी तैयारियां पूरी करने के लिए पदाधिकारियों की एक टीम 2 दिन  कबल यहां पधार चुकी है जिनमें रेलवे (ट्रैक्शन) बोर्ड के सदस्य श्री घनश्याम सिंह और एल्सटॉम कंपनी के अधिकारी श्री भारत सल्होत्रा ने कारखाने के अंदर स्थापित ‘पावर ग्रिड’ एवं ‘हॉस्टल ब्लॉक भवन(वन)’ का उद्घाटन भी किया | दोनों अधिकारियों ने कार्य की प्रगति पर संतोष जताते हुए निम्नांकित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्देश भी दिये- पहला यह कि मानसी-सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया रेल लाइन विद्युतीकरण में तेजी लायें और दूसरा यही कि देश का सर्वश्रेष्ठ हाई स्पीड लोकोमोटिव इलेक्ट्रिक इंजन निर्धारित समय से पूर्व बना लेने का लक्ष्य तय करें- क्योंकि मधेपुरा का विद्युत रेल इंजन कारखाना भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है |

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बीएनएमयू में हिन्दी-उर्दू एक विरासत पर हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

मधेपुरा के बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर उर्दू विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के ‘हिन्दी-उर्दू एक विरासत’ विषय का उद्घाटन करते हुए माननीय कुलपति डॉ.अवध किशोर राय ने कहा कि हमारी सभी भाषाएं साझी संस्कृति का वाहक है तथा भारत की साझी संस्कृति अत्यन्त प्राचीन और समृद्ध है | सभी भाषाएं सगी बहनें जैसी हैं और एक दूसरे की पूरक भी हैं | डॉ.राय ने अपने संबोधन में बड़ी ही पवित्र बातें कहीं, वह यह कि जैसे कई नदियाँ मिलकर गंगा को समृद्ध करती हैं, वैसे ही सभी भारतीय भाषाएं मिलकर हिन्दी को समृद्ध करती हैं | उन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है | सभी मिलकर हिन्दी को पूर्ण बनाती है, सभी भाषाएं हमारी साझी विरासत है | किसी भी भाषा का किसी से कोई बैर नहीं है बल्कि हरेक के बीच सुमधुर समन्वय है |

Vice-Chancellor Dr.AK Ray inaugurating seminar along with other officers at B.N. Mandal Auditorium Madhepura.
Vice-Chancellor Dr.A.K. Ray inaugurating Seminar along with other officers at B.N. Mandal Auditorium Madhepura.

इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ.फारुख अली ने कहा कि आजादी की लड़ाई में हिन्दी और उर्दू दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया | उन्होंने कहा कि हिन्दी और उर्दू जहाँ एक ओर भारत माता की दो खूबसूरत आंखें हैं वहीं दूसरी ओर सभी भाषाओं के चेहरे भले ही अलग-अलग हों लेकिन दिल एक है | मुख्य अतिथि मो.अली जौहर ने उर्दू को उपेक्षित बताते हुए सम्मान दिलाने की चर्चा की |

ज्ञातव्य हो कि वहीं बिहार सरकार उर्दू निदेशालय की ओर से जिले में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए विविध प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है | सभी प्रारंभिक विद्यालयों का नाम हिन्दी एवं उर्दू में लिखने का आदेश सभी प्रधानों एवं पदाधिकारियों को दिया जा रहा है |

बता दें कि इस आयोजन की अध्यक्षता डॉ.फसीह उद्दीन अहमद ने की और कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में डॉ.अबुल फजल द्वारा शानदार तरीके से संपन्न किया गया | भारी संख्या में छात्र-शिक्षक एवं बुद्धिजीवियों की उपस्थिति अन्त तक बनी रही |

यह भी जानिये कि सेमिनार के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के पी.जी. उर्दू विभाग एवं बिहार उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में तकनीकी सत्र के दरमियान अध्यक्षता करते हुए डॉ.एहसान ने जहाँ कहा कि उर्दू का भविष्य उज्जवल है, वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली के डॉ.सैफुल्लाह सैफी ने कहा कि उर्दू सद्भावना की भाषा है |
सेमिनार में डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.अबुल फजल, सहनवाज आलम, मो.अशरफ, साहिल कौशर डॉ.के.सुल्ताना आदि ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये |

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नहीं रहे कुंवर नारायण

हिन्दी साहित्य को कई कालजयी कृतियां देने वाले अप्रतिम कवि कुंवर नारायण का निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। मूलरूप से फैजाबाद के रहने वाले कुंवर पिछले 51 साल से साहित्यरत थे। बुधवार को दिल्ली के सीआर पार्क में उन्होंने अंतिम सांसें लीं। यहां वे अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते थे और पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे।
साहित्य, सिनेमा और संगीत में लगभग समान दखल रखने वाले कुंवर नारायण की मूल प्रतिष्ठा कवि की थी। अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के कवियों में शामिल रहे  कुंवर ने ‘चक्रव्यूह’, ‘परिवेशः हम तुम,  ‘इन दिनों’, ‘कोई दूसरा नहीं’,  ‘आत्मजयी’, ‘वाजश्रवा के बहाने’ और ‘कुमारजीव’ जैसी अविस्मरणीय रचनाओं के रूप में हिंदी के साहित्य और समाज को एक बड़ी विरासत सौंपी है।
कुंवर नारायण को उनकी साहित्य-साधना के लिए देश के लगभग सभी महत्वपूर्ण सम्मान मिले। 1995  में उन्हें कविता संग्रह ‘कोई दूसरा नहीं’ के लिए साहित्य अकादमी सम्मान मिला तो 2005  में उऩ्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजा गया। 2009 में उन्हें ‘पद्मभूषण’ से विभूषित किया गया। इसके अलावा कुमार आशान सम्मान,  प्रेमचंद पुरस्कार और व्यास सम्मान भी उन्हें मिले। इन सबके अलावे उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी मिले थे।

कुंवर नारायण लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक थे। पढ़ाई के तुरंत बाद उन्होंने पुश्तैनी ऑटोमोबाइल बिजनेस में काम करना शुरू कर दिया था। पर आगे चलकर आचार्य कृपलानी,  आचार्य नरेंद्र देव और सत्यजीत रे से प्रभावित होकर साहित्य में उनकी गहरी रुचि हो गई।
कुंवर नारायण की रचनाशीलता के कई आयाम रहे। उन्होंने कई पौराणिक आख्यानों को आधुनिक और समकालीन अर्थों और संदर्भों के साथ पुनर्परिभाषित किया। इस संदर्भ में ‘आत्मजयी’,  ‘वाजश्रवा के बहाने’ जैसी रचनाओं का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। एक तरह की ‘उजली’ मनुष्यता कुंवर की कविता का मुख्य स्वर रही। आधुनिक समय के तनावों-दबावों के बीच यह कविता बड़ी सहजता से प्रेम और सहिष्णुता का पाठ रचती है। अपने कृतित्व एवं व्यक्तित्व के लिए कुंवर नारायण हमेशा याद किए जाएंगे। आधुनिक हिन्दी कविता के इस महाकवि को हमारा शत् शत् नमन।

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