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4 दिसंबर को भारत में कोरोना वैक्सीन को लेकर होगी सर्वदलीय बैठक

कोरोना सरीखे महामारी को नियंत्रित करने में दुनिया भर के वैज्ञानिक और लैबोरेट्री लगे हैं। भारत में भी कोरोना वैक्सीन को लेकर तैयारियां जोरों पर है। भारत में तीन वैक्सिन निर्माता कंपनियों के विशेषज्ञों से हाल ही में प्रधानमंत्री ने संवाद भी किया है।

बता दें कि वे कंपनियां हैं-

1. पुणे की जिनोवा बायो फार्मास्यूटिकल लिमिटेड

2.हैदराबाद की बाॅयो लॉजिकल ई. लिमिटेड एवं

3. हैदराबाद की ही डॉक्टर रेड्डी लैबोरेट्रीज लिमिटेड।

संवाद से निकले निष्कर्ष से यह उम्मीद बनती है कि नये साल के शुरुआती तीन-चार महीने में सरकार देश के लोगों को कोरोना-वैक्सीन उपलब्ध करा पाएगी।

जानिए कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यहां तक कहा है कि आगामी जुलाई-अगस्त तक लगभग 25 से 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन देने का प्लान है, जिस दिशा में जोरों की तैयारियां  चल रही है। 4 दिसंबर यानि कल इस बाबत केंद्र सरकार एक सर्वदलीय बैठक करने जा रही है जिसमें प्रधानमंत्री कोरोना टीकाकरण को लेकर हो रही तैयारियों से देश को अवगत कराने हेतु चर्चा भी कर सकते हैं।

चलते-चलते यह भी बता दें कि संसद के दोनों सदनों के सभी पार्टियों के नेताओं को कल यानि शुक्रवार को सुबह 10:30 बजे ऑनलाइन बैठक के लिए आमंत्रित भी किया जा चुका है। इस बैठक का समन्वय केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय कर रहा है। कोरोना काल में कोरोना के हालात पर चर्चा करने के लिए दूसरी बार सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने हेतु संवेदनशील-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने प्रधानमंत्री की पूरी टीम को साधुवाद दिया है।

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डॉ.अजीत को डॉ.कलाम उत्कृष्टता पुरस्कार मिलने से मधेपुरा जिला ही नहीं, बिहार भी हुआ गौरवान्वित- डॉ.मधेपुरी

मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज सदर प्रखंड अंतर्गत मधुबन गांव के एक शिक्षक राज किशोर पंडित के पुत्र हैं डॉ.अजीत कुमार आजाद। डॉ.आजाद विगत कई वर्षों से चिकित्सा के क्षेत्र में हैदराबाद में कार्यरत हैं।

बता दें कि डॉ.अजीत को हैदराबाद के बेस्ट डॉक्टर एवं कोरोना काल में हैदराबाद के मरीजों की उत्कृष्ट सेवा करने के लिए सम्मानित किया गया है। डॉ.आजाद को डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम मेमोरियल एक्सेलेंस अवार्ड- 2020 के तहत डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम स्मारक उत्कृष्टता पुरस्कार दिया गया है। इस सम्मान समारोह का आयोजन वर्चुअल कार्यक्रम के तहत 25 नवंबर को ही किया गया है।

जानिए कि डॉ.अजीत को दिए गए इस सम्मान से मधेपुरा जिला ही नहीं बल्कि संपूर्ण बिहार गौरवान्वित हुआ है। डॉ.अजीत को मिला यह सम्मान बिहार के चिकित्सीय क्षेत्र में काम करने वाले सभी डाक्टरों व कर्मियों का सम्मान है। भला क्यों नहीं, डॉ.अजीत ने कोरोना काल में बिना 1 दिन भी छुट्टी लिए तथा बिना परिजनों की परवाह किए अपनी जान को जोखिम में डालकर हजारों कोविड-19 के मरीजों का इलाज कर उन्हें नई जिंदगी दी है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी सदा ही मधेपुरा को  गौरवान्वित करने वालों को सम्मानित करने में लगे रहते हैं। डॉ.अजीत ने भारतवासियों को यह संदेश दिया है- जब तक कोरोना के लिए वैक्सीन नहीं…. तब तक मास्क ही वैक्सीन है। मास्क लगभग 90% तक कोरोना वायरस को रोकता है….. चार सप्ताह तक यदि प्रत्येक व्यक्ति अहर्निश मास्क पहने तो कोरोना को पूरी तरह रोका जा सकता है। आप सभी इसमें सहयोग करें तो जल्द ही वह अवसर आ जाएगा जब डॉ.मधेपुरी कोरोना वारियर डॉ.अजीत कुमार आजाद को मधेपुरा जिला को गौरवान्वित करने के उपलक्ष में जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला (भाप्रसे) की उपस्थिति में सम्मानित कर पाएंगे।

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सूबे बिहार के निराश्रितों व बुजुर्गों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाने में देर न करें- डॉ.मधेपुरी

सूबे बिहार के 38 जिलों में से मात्र 5 जिले में ही वृद्धाश्रम चल रहा है। वे जिले हैं- पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया। राजधानी पटना में चल रहे वृद्धाश्रम मंगल विहार कॉलोनी में अवस्थित है जहां कुल 25 वृद्धिजन रह रहे हैं, जिनमें 17 महिलाएं हैं। फिलहाल 75 लोग वेटिंग लिस्ट में लटक रहे हैं।

बता दें कि राजधानी के इस वृद्धाश्रम में एक वृद्ध पर 1500 रुपए महीने में आवंटित किए जाते हैं यानि एक शाम के भोजन के लिए ₹25 व्यय किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त कोई सुविधा नहीं बल्कि कार्यरत कर्मियों को तीन-चार वर्षों से मानदेय तक नहीं मिला है। कभी-कभी मामला लोकायुक्त तक पहुंच जाने के बाद राशि मिलती है। कभी-कभी बिजली बिल अधिक होने पर बिजली काट दी जाती है। सोचिए कि अंधेरे में बुजुर्गों को बुढ़ापा काटना कितना मुश्किल होता होगा। अब बिहार सरकार निराश्रितों, लाचारों एवं नि:संतान वृद्धजनों के लिए बुनियाद केंद्रों में 25 नए वृद्धाश्रम खोलने का मन बना रही है। राज्य के 90 बुनियाद केंद्रों को अपना आकर्षक भवन है। ये वृद्धाश्रम उन्हीं बुनियाद केंद्रों में संचालित होंगे। बुनियाद केंद्र के परिसर को ही आश्रम के रूप में तब्दील करने का निर्णय लिया गया है।

परंतु, लाचारों एवं निराश्रितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी का राज्य सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध है कि बिहार में जितने भी बड़े-बड़े संपन्न मंदिर हैं, जिनकी आमदनी लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में है….. वहां के जिला प्रशासक व समिति से जनहित में एक आकर्षक वृद्धाश्रम चलाने की स्वीकृति/सहमति/आदेश/निदेश देकर सूबे के लाचारों एवं बुजुर्गों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाने में देर न करें।

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भारत में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या हुई 94 लाख के पार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजे आंकड़े के अनुसार देश में कोरोना संक्रमिततों  की संख्या बढ़कर हो गई है 94 लाख 31 हजार तथा मरने वालों की संख्या अब तक 1 लाख 37 हजार 140 हो गई है।

बता दें कि अब तक पूरे देश में 88 लाख 47 हजार कोरोना संक्रमित लोगों ने कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं। जानिए कि पिछले 24 घंटे में कुल 45 हजार 333 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं।

यह भी जानिए कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार देश में 29 नवंबर तक कोरोना वायरस के लिए कुल 14 करोड़ सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना से देश में 496 मरीज की मौत हो चुकी है। इनमें लगभग 71 फ़ीसदी मामले 8 राज्यों व केंद्र शासित राज्यों जिनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, बंगाल, हरियाणा, पंजाब, केरल, यूपी और राजस्थान शामिल हैं। दिल्ली में जहां 89 मरीजों की मौतें हुई है वहीं महाराष्ट्र में 88 की। नवंबर महीने में प्रतिदिन कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या 600 पार नहीं कर पाई है जबकि पूरे देश में अब तक मृतकों की संख्या 1 लाख 36 हजार 696 हो गई है।

चलते-चलते बिहार में भी कोरोना की स्थिति जान लीजिए। रविवार को बिहार में 606 नये कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है और इलाज के दौरान 6 की मौत हो गई। इसके साथ ही सूबे बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2 लाख 35 हजार 159 एवं मृतकों की संख्या बढ़कर 1259 हो गई है। बिहार में अब तक 1 करोड़ 45 लाख 47 हजार 988 सैंपल की कोरोना जाँच पूरी की जा चुकी है।

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भारतीय संविधान की जब भी चर्चा होगी, मधेपुरा सदा याद आता रहेगा- डॉ.मधेपुरी

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद दिल्ली में कांस्टीट्यूएंट असेंबली यानि भारतीय संविधान सभा की बैठक बुलाई गई, जिसमें मधेपुरा जिले के चतरा-ग्राम निवासी कमलेश्वरी प्रसाद यादव भी संविधान सभा के सदस्य के रूप में उपस्थित थे। तीन विषयों में एमए ‘यादव जी’ विधायक बनकर समाजसेवी बने। अनेक विद्यालयों व महाविद्यालयों के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले यादवजी संविधान सभा के सदस्य चुने गए और अपनी विद्वता व अनुभव से संविधान निर्माण वाली बहस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे।

जानिए कि सर्वाधिक वरिष्ठ सदस्य होने के चलते डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा को प्रोटेम अध्यक्ष बनाया गया था, जिनकी अध्यक्षता में डॉ.राजेंद्र प्रसाद स्थाई अध्यक्ष चुने गए तथा भीमराव अंबेडकर को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बनाया गया।  भारतीय संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 महीना 18 दिन लगे। 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया था- भारत का संविधान।  भारतीय संविधान में एकता, अखंडता और आम लोगों के अधिकारों… का विस्तृत वर्णन है।

कुछ समय बाद डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा पटना में बीमार चल रहे होते हैं। प्रथम अध्यक्ष होने के नाते संविधान की मूल प्रति पर उनका भी हस्ताक्षर होना अनिवार्य था। बीमारी के कारण उनका दिल्ली पहुंचना संभव नहीं था। जब यह सुना गया कि भारतीय संविधान की मूल प्रति ट्रेन से पटना आ रहा है तो कल्पना कीजिए वहां कैसा कुतूहल रहा होगा। जिस समय रोग-शैय्या पर डॉ.सच्चिदानंद सिन्हा 13 जनवरी 1950 को भारत के नए संविधान पर हस्ताक्षर कर रहे थे तो वहां पर विशिष्ट लोगों में से एक थे- मधेपुरा जिले के प्रखर स्वतंत्रता सेनानी व बिहार के प्रथम विधि मंत्री शिवनंदन प्रसाद मंडल।

अंत में यह भी कि टीपी कॉलेज मधेपुरा के संस्थापक प्राचार्य रतन चंद व उनकी धर्मपत्नी गार्गी चंद के निकटतम संबंधी व संस्कृत के उद्भट विद्वान  डॉ.मंगलदेव शास्त्री भारत के संविधान को संस्कृत में अनुवाद कर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत भी हुए हैं।  बकौल, समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, उपर्युक्त तथ्यों के साथ-साथ उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान की जब कभी चर्चाएं होंगी तो मधेपुरा सदा याद आता रहेगा और मधेपुरा के लोग सदैव गौरवान्वित होते रहेंगे।

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कोरोना को लेकर दिसंबर- 2020 के लिए दिशा-निर्देश

भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पुनः तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर माह दिसंबर-2020 के लिए राज्यों के वास्ते दिशा-निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों में राज्यों से कोरोना के कहर की रोकथाम के उपायों का कड़ाई से पालन करने, कांट्रेक्ट ट्रेसिंग, टैस्टिंग एवं भीड़ को नियंत्रित करने को कहा गया है।

बता दें कि इस दिशा-निर्देश में राज्यों को रात्रिकालीन कर्फ्यू लागू करने तथा खेल, मनोरंजन, धार्मिक एवं सामाजिक समारोहों में लोगों की उपस्थिति को 200 से कम रखने का अधिकार प्रदान किया गया है। परंतु, लॉकडाउन लगाने के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी लेनी होगी जैसे पूर्व में ली जाती थी। जानिए कि यह दिशानिर्देश 1 दिसंबर से 31 दिसंबर तक के लिए फिलहाल लागू किया गया है

यह भी बता दें कि कंटेंनमेंट जोन के अंदर केवल आवश्यक सेवाओं की ही इजाजत होगी जबकि कंटेंनमेंट जोन के बाहर सभी तरह की छूटें जो वर्तमान में दी जा रही हैं, वही दी जाती रहेंगी। बताया गया है कि 2 गज की दूरी और मास्क पहनना अभी भी है जरूरी।

चलते-चलते जानिए कि भारत सरकार ने दिसंबर माह के लिए सतर्कता, निगरानी, रोकथाम एवं सावधानी को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते हुए यही कहा है कि निर्देश का मुख्य उद्देश्य कोविड-19 के खिलाफ मुकाबले में मिली कामयाबी को कायम रखना है। इस हेतु स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। कई राज्यों ने तो रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाना आरंभ कर दिया है। पंजाब में भी 10:00 बजे रात्रि से 5:00 बजे सुबह तक रात्रिकालीन कर्फ्यू 1 दिसंबर से लगाया जाएगा। नियम तोड़ने वालों को ₹1000 का दंड चुकाने होंगे।

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बिहार में पहली बार भाजपा स्पीकर विजय को विजय श्री

17वीं बिहार विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव बुधवार को विधानसभा के विस्तारित भवन के सेंट्रल हॉल में भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच प्रोटेम स्पीकर जीतन राम मांझी ने संपन्न कराया। वोटिंग के आधार पर स्थाई विधानसभा अध्यक्ष के रूप में एनडीए के उम्मीदवार एवं भाजपा के विधायक विजय कुमार सिन्हा के नाम की घोषणा श्री मांझी ने की। यह सुखद संयोग कहिए कि बिहार विधानसभा के निवर्तमान अध्यक्ष व जदयू विधायक एवं वर्तमान संसदीय कार्य मंत्री का नाम भी विजय कुमार…. ही है।

बता दें कि महागठबंधन प्रत्याशी राजद नेता अवध बिहारी चौधरी को 114 मत पड़े वहीं एनडीए प्रत्याशी विजय कुमार सिन्हा के पक्ष में 126 मत पड़े। 2 सदस्य अनुपस्थित रहे और एक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। इस चुनाव में नया इतिहास भी रचा गया है। पहली बार 51 साल बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ और तुर्रा तो यह है कि प्रोटेम स्पीकर को महज आधे घंटे के अंदर दो बार वोटिंग की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी। पहली बार एनडीए प्रत्याशी विजय कुमार सिन्हा के पक्ष में 127 वोट पड़े वहीं दूसरी बार में 126 वोट ही मिले।

जानिए कि पाँच  दशक बाद पहली बार बिहार विधान सभा अध्यक्ष पद के लिए मत विभाजन में जीत के बाद नवनिर्वाचित एनडीए प्रत्याशी विजय कुमार सिन्हा को अध्यक्ष के पद पर आसीन करने हेतु मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव आसन तक ले गए। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आसन तक चलने के लिए आमंत्रित किया। भाजपा सदस्य विजय कुमार सिन्हा के अध्यक्षीय आसन पर बैठते ही भाजपा सदस्यों ने भारत माता की जय कारे लगाने लगे।

चलते-चलते यह भी बता दें कि सीएम, अशोक चौधरी व मुकेश साहनी (मंत्री द्वय) के सदन में मौजूद रहने को लेकर तेजस्वी की सेना ने हंगामा खड़ा कर दिया। प्रोटेम स्पीकर श्री मांझी ने कहा कि सीएम सदन के नेता हैं, उन्हें सदन में रहने का अधिकार है भले ही वे इस सदन के सदस्य नहीं है। और दो अन्य सदस्य मंत्री की हैसियत से सदन में बैठने के अधिकारी हैं।

अंत में आसन ग्रहण करने के बाद नवनिर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सभी सदस्यों को साथ लेकर चलूंगा। सदस्यों की अपेक्षाओं पर खड़ा उतरने का प्रयास करूंगा। जन समस्याओं को दूर करने तथा उनके बेहतर कल के लिए हमेशा कुछ बेहतर करते रहने का सतत प्रयास करता रहूंगा।

 

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सूबे बिहार में कोरोना को लेकर पुनः 10 दिनों का हाई अलर्ट

बिहार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने जहां सभी जिलों के डीएम-एसपी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 को लेकर जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मेडिकल कॉलेज अस्पतालों के प्राचार्यों एवं अधीक्षक सहित सिविल सर्जनों व प्रभारी चिकित्सकों के साथ बैठक कर अगले 10 दिनों तक कोरोना से बचाव कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतने की हिदायत दी है तथा सबों को हर तरह से मुस्तैद रहने की हिदायत भी दी है।

बता दें कि नीतीश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सभी जिलों के सिविल सर्जनों से कोरोना मरीजों की जांच व इलाज को लेकर उपलब्ध सुविधाओं व डाक्टरों एवं कर्मियों की उपलब्धता आदि की जानकारियां भी मांगी गई है। कोविड केयर सेंटर एवं सूबे के सारे मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जांच व इलाज की सुविधाओं को सक्रिय किया गया है। सभी पीएचसी सेंटरों में  एंटीजन टेस्ट एवं अस्पतालों में आरटीपीसीआर टेस्ट बढ़ाने को लेकर कार्यवाही करने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं।

यह भी जानिए कि मुख्य सचिव ने सभी जिलों के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों एवं माॅल व बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने तथा मास्क लगाने हेतु हिदायत भी दी है। लोगों की आवाजाही वाले स्थानों पर शिविर लगाकर जांच करने का निर्देश भी दिया गया है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि दीवाली और छठ महापर्व के दौरान बिहार आने वालों एवं वापस दूसरे प्रदेशों की ओर लौटने वालों की कोरोना जांच किए जाने का निर्देश जारी किया गया है।

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बिहार विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों ने 5 भाषाओं में शपथ ली

17वीं बिहार विधानसभा चुनाव में 243 नवनिर्वाचित विधायकों में से शपथ ग्रहण करने वाले सदस्यों की संख्या 174 रही, जिन्होंने पहले सत्र के पहले दिन 5 भाषाओं में तैयार शपथ-पत्र के अनुसार शपथ ली।

बता दें कि शपथ लेने वाले कुल 174 सदस्यों में सबसे अधिक 144 विधायकों ने हिन्दी में शपथ ली, इसके अलावा मैथिली में 15, उर्दू में 6, संस्कृत में 5 तथा अंग्रेजी में 4 सदस्यों ने शपथ ली।

प्रोटेम अध्यक्ष जीतन राम मांझी की अध्यक्षता में शपथ ग्रहण समारोह चल रहा था। चौंकाने वाली बात तो तब हुई जब डॉ.शकील अहमद खान ने संस्कृत में शपथ ली। संस्कृत में शपथ लेने वाले शेष 4 सदस्य हैं- मिथिलेश कुमार, रत्नेश सादा, संजय कुमार सिंह एवं वीरेंद्र कुमार सिंह। जिन 4 सदस्यों ने अंग्रेजी में शपथ ली, वे हैं- महबूब आलम, युसूफ सलाउद्दीन, चेतन आनंद एवं सिद्धार्थ सौरभ।

बता दें कि उर्दू में शपथ ग्रहण करने वाले 6 सदस्य हैं- मोहम्मद अंजार नईम, शाहनवाज, सउद आजम, इज़हार अली, अख्तरुल इमान एवं सैयद रुकनुद्दीन अहमद। मैथिली में जिन विधायकों ने शपथ ली, वे हैं- मंत्री रामप्रीत पासवान, सुधांशु शेखर, विनोद नारायण झा, अरुण शंकर प्रसाद, हरी भूषण ठाकुर, समीर कुमार महासेठ, नीतीश मिश्रा, चंद्रहास चौपाल, आलोक रंजन, स्वर्णा सिंह, विनय कुमार चौधरी, मिश्री लाल यादव, संजय सरावगी, रामचंद्र प्रसाद और मुरारी मोहन झा ।

यह भी जानिए कि हिन्दी में उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद एवं रेणु देवी, विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव,… सहित शेष 140 सदस्यों  व मंत्रियों ने शपथ ली।

 

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भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं श्री कृष्ण

बरसों तक गोपाष्टमी के दिन नंद महाराज द्वारा गायों और श्रीकृष्ण के लिए एक समारोह किया जाता रहा था। भगवान श्री कृष्ण के साथ-साथ गौ पूजा देशभर में धूमधाम से मनाई जाती है। इस बार कोरोना के कहर के कारण लोग समारोह में सम्मिलित होने के बजाय घर में ही गोपाष्टमी मना कर संतोष करते नजर आ रहे हैं। समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने अपने ‘वृंदावन’ निवास पर ही ऑनलाइन गोपाष्टमी मनाया।

बता दें कि इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने बताया कि बलराम एवं कृष्ण द्वारा गायों को पहली बार चराने के लिए ले जाने का दिन गोपाष्टमी के नाम से जाना जाता है। गोपाष्टमी दीपावली के दौरान आने वाला प्रसिद्ध त्योहार गोवर्धन पूजा के सात दिन बाद मनाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान विष्णुु के आठवें अवतार माने जाने वाले श्री कृष्ण का नाम कृष्ण कैसे पड़ा ?  डॉ.मधेपुरी ने कहा कि  आचार्य गर्ग ने नंंद-यशोदा केेेे लाडले का नामकरण  कंस के भय से गौशाला में जाकर किया और भी बोल उठे कि आपके इस बेटे के कई नाम होंगे….. जैसे-जैसे कर्म करते जाएंगे वैसे-वैसे नाम होते जाएंगे। तत्काल इसके सांवले रंग के कारण इसका नाम कृष्ण होगा…… लोग इसे कान्हा, कन्हैया, किशन आदि नामों से भी पुकारेगा।

आगे डॉ.मधेपुरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए यही कहा कि कृष्ण बचपन में गायों व ग्वालों की रक्षा में लगे रहे। कृष्ण जब आठ दिनों तक गोवर्धन पर्वत के नीचे गाय व ग्वालों को रखे थे तब इंद्र को झुकना पड़ा था। जहां श्री कृष्ण अपने बाल सखाओं से यही कहा करते कि गौ सबकी माता है वहीं डॉ.मधेपुरी लोगों से कहते हैं कि गौ, गंगा और गायत्री का भारत में आदिकाल से ही सम्मान होता रहा है क्योंकि माता के बाद मानवता की सेवा के लिए गाय का दूध ही सर्वसुलभ है। पंचगव्य के रूप में प्राप्त गाय का गोबर कीटाणुओं का नाशक ही नहीं बल्कि विषैले विकिरणों का शोषक व मानवता का पोषक भी है। हिरोशिमा-नागासाकी में बम के विषैले विकिरणों से मुक्ति पाने के लिए आज भी जापान के लोग घर-आंगन को गाय के गोबर से लिपते हैं।  गोमूत्र से कई प्रकार केे रोग दूर होते हैं।

 

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