बिना पसीना बहाये शोध में सुगन्ध नहीं आता !

भूपेन्द्र नारायण मंडल वि.वि.  मधेपुरा के केन्द्रीय लाइब्रेरी में आज स्नातकोत्तर गणित विभाग के छात्रों , उपाचार्यों एवं प्राचार्यों की उपस्थिति में गणित के शोधार्थी विजय कुमार विमल के viva  की परीक्षा माननीय कुलपति डॉ. विनोद कुमार की सहमति से की गई | श्री विमल के शोध निदेशक रहे हैं – डॉ. मनोज कुमार मनोरंजन , एसोसिएट प्रोफेसर गणित , टी.पी.कालेज | शोध का टॉपिक है –

“ Algebraic Structure of Regular Rings , Strongly Regular Rings&Regular Rack Rings”

प्रारम्भ में शोधार्थी विमल द्वारा तैयार किये गये शोध आलेख की चार प्रतियाँ वि.वि. के परीक्षा विभाग में जमा की गयी | परीक्षक द्वय द्वारा जांच कर सकारात्मक अनुशंसा प्रेषित किये जाने के बाद ही पूछताछ (viva) परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें तिलका मांझी वि.वि. भागलपुर के गणित विभाग के वि.वि. प्रोफेसर एवं डी.एस.डब्लयू. रह चुके डॉ.यमुना प्रसाद यादव परीक्षक के रूप में पधारे और काफी देर तक सवाल-जवाब के दरमियान शोधार्थी विमल द्वारा इस गर्मी में खूब पसीना बहाया गया | अंत में संतुष्ट होकर शोध-परीक्षक डॉ. यादव द्वारा शोधार्थी विमल को पी-एच.डी. की उपाधि से अलंकृत करने की सिफारिश की गई और शुभकामनाएं दी गयी |

शुभकामना देनेवालों में मंडल वि.वि. के स्नातकोत्तर गणित के विभागाद्यक्ष डॉ.के.के.सिंह , टी.पी.कालेज के गणित के विभागाद्यक्ष डॉ.एम.एस.पाठकसहित डॉ.दिलीप कुमार, डॉ.पी.एन.पीयूष, डॉ. अतुल कुमार मल्लिक, प्रो.श्यामल किशोर यादव , डॉ. मधेपुरी , पी. यदुवंशी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे |

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बसपा ने बढ़ाया बिहार का चुनावी तापमान, जारी की 49 उम्मीदवारों की पहली सूची

रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 49 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। बिहार के अन्य दल जहां गठबंधन, तालमेल और सीटों के बंटवारे में उलझे हुए हैं वहीं बसपा ने उम्मीदवारों की सूची जारी करने में तेजी दिखाई और बिहार का चुनावी तापमान और बढ़ा दिया। इस पहली सूची में 11 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित व सवर्ण बिरादरी को भी साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है।

जारी की गई सूची के अनुसार बसपा के 49 प्रत्याशी इस प्रकार हैं – भरत बिंद (भभुआ), मंजू सिंह (नवीनगर), दिनेश्वर यादव (सासाराम), प्रमोद कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह (रामगढ़), सुरेश यादव (राघोपुर),

पूनम राय (अमनौर), डॉ. सुनीता कुमारी सिंह (हाजीपुर), अजीत कुमार सिंह (बांका), सत्यनारायण राम (वनमनखी), अजीत कुमार कुशवाहा (कसबा), रामपदारथ यादव (मटिहानी), त्रिभुवन रविदास (फुलवारी सुरक्षित), सुरेश मुखिया (कल्याणपुर), सरोज राजभर (बक्सर), राजकुमार राम (मसौढ़ी), राजपति देवी (मनेर), पृथ्वीराज हेम्ब्रम (चकाई), अशोक महतो (पूर्णिया), विद्यानंद मंडल (कदवा), शैलेश कुशवाहा (नौतन), आनंद कुमार महतो (मुजफ्फरपुर), फूलदेव सहनी (पारू), नजमुलदोहा (वरुराज), डॉ. संतोष कुशवाहा (मधुबन), शमीम अहमद (करगहर), हीरालाल (हिसुआ), राजरतन यादव (नवादा), रामकृपाल पासवान (पातेपुर), मो. अलाउद्दीन (रफीगंज), राजेश त्यागी (मांझी), कौशल सिंह (औरंगाबाद), डॉ. रामराज भारती (मोहनियां), शिवकुमार सिंह (बेलहर), रामसागर हाजरा (महनार), अलख निरंजन पाल (पाली), शबाना परवीन (परिहार), परवल आलम (रघुनाथपुर), राजेन्द्र सिंह (नोखा), रविन्द्र राम (चेनारी सुरक्षित), जयसिंह प्रसाद (गोपालगंज), इम्तियाज अहमद (हथुआ), अल्ताफ अहमद (वाल्मिकीनगर), मो. कामरान अजीज (बगहा), नेयाज अहमद (बरौली), सीताराम गुप्ता (मोतीहारी), मो. जमां खां (चैनपुर), लालजी राम (बक्सर) तथा डॉ. नौशाद आलम (नरकटियागंज)।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भरत बिंद ने सूची जारी करते हुए कहा कि प्रत्याशियों की यह सूची पार्टी के सभी जिम्मेदार लोगों, विधानसभा व जिला समिति की अनुशंसा तथा पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देर्शों के अनुरूप है। बहरहाल, अब देखना ये है कि उम्मीदवारों की घोषणा करने में बसपा की पहल के बाद बाकी दलों में कैसी सुगबुगाहट होती है और अगली सूची किस दल की आती है।

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चुनाव की तैयारी : तरीका अपना अपना

मजबूती के साथ मधेपुरा में ही नहीं बल्कि बिहार के कतिपय शहरों में पप्पू यादव की जन आधिकार पार्टी के एलान पर एक तरफ बिहार बन्द किया जा रहा है जिसमें सहयोगी पार्टी के रूप में “हम” भी शरीक रही है | यह बन्द सरकार द्वारा मौलिक समस्याओं के साथ-साथ जन सुरक्षा की अनदेखी करने के विरुद्ध चुनाव की तैयारी का अपना तरीका है |

तो दूसरी तरफ सरकार पुनः अपनी वापसी को लेकर चुनाव की तैयारी के मददेनजर “विकास मित्रों” का मानदेय सात हजार से बढ़ाकर एक बारगी दस हजार ही नहीं बल्कि अप्राकृतिक मौत पर उनके परिजनों को चार लाख रू. देने की घोषणाएँ भी कर दी है | तुर्रा तो यह है कि सरकार उन्हें स्मार्टफोन ही नहीं एक विशेष किस्म के सिम भी दे रही है |

यह भी जानें कि कल तक गाँव-गाँव मेंशराब की दूकानें एवं शराब की भट्टियाँ खोलने हेतु लायसन्स बाँटने वाली सरकार आज अपनी चुनावी तैयारी को लेकर सत्ता में वापसी के लिए उसी शराब पर पूरी बन्दिश लगाने की घोषणाएं कर रही हैं |

परन्तु ,प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की बदहाल और जर्जर स्थिति पर न तो कोई पार्टी ध्यान दे रही है और ना हीं सरकार | यदि इस पर चिंतन-मंथन करने हेतु विरोधी पार्टियाँ और सरकार मिल-बैठकर कुछ ठोस निर्णय ली होती तो बिहार की विभिन्न समस्याओं का स्वत: निदान हो गया होता और बिहार आगे बढ़ रहा होता | तब लोग बोलते भी – फिर एक बार : नीतीश कुमार !!

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एक फर्जी दूसरे फर्जी का मुहँ देखता रहा. . . . .

हर इंसान के जीवन में सुख-दुःख का आना-जाना हमेशा बना रहता है | हमेशा उतार-चढ़ाव आता ही रहता है | कभी जीत एक के पाले में तो कभी दूसरे के पाले में होती ही रहती है | इन सबके बीच कुछ लोगों को जीत का अहसास तब हुआ होगा जब फर्जी प्रमाण-पत्रों पर शिक्षक की नौकरी मिल गयी होगी | और हार का अहसास तब हुआ जब उच्च न्यायालय द्वारा इन फर्जी शिक्षकों को स्वेच्छा से इस्तीफा देने हेतु 9 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया | तब एक फर्जी दूसरे फर्जी शिक्षक का मुहँ देखता रह गया | आहिस्ता-आहिस्ता इस्तीफा देने का सिलसिला आरम्भ होने लगा और संख्या हजार से दो हजार की ओर बढती चली गई |

किसी फर्जी ने अपना इस्तीफा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को सौंपा तो किसी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को हस्तगत कराया | कुछ तो अपने विद्यालय प्रधान के हाथों में ही अपना इस्तीफा सौंपकर अपने पैतृक घर की ओर कदम बढाया | कुछ फर्जी शिक्षकों को मानसिक रूप से तैयार होते-होते 9 जुलाई भी गुजर गया | जो थोड़े से फर्जी रह गये वे उसी डेट में इस्तीफा सौंपने का मन बना रहे हैं जिनकी पुष्टि फर्जी शिक्षकों द्वारा विद्यालय प्रधान के पास की जा रही है | चन्द दिनों में कुछ और इस्तीफा सौंपे जाने की संभावना जतायी जा रही है |

इस सबके बावजूद कुछ ऐसे भी फर्जी शिक्षक हैं जो यह सोच रहें हैं कि देंखे आगे हाईकोर्ट किस तरह का रुख अख्तियार करता है , उसे देखकर ही निर्णय लिया जायेगा | हालांकि जानकारों की मानें तो हाईकोर्ट के कड़े रुख के बावजूद भी हजारों के आस-पास फर्जी शिक्षक अभी भी विद्यालयों में जमे हुए हैं जिन्हें न तो सरकार का भय है , न निगरानी विभाग और ना सामाजिक प्रतिष्ठा का | यूँ निगरानी द्वारा जांच चल रही फिर भी अपेक्षित सफलता इसलिए भी नहीं मिल पा रही है कि निगरानी टीम को जिला परिषद , नगर परिषद एवं प्रखंडों से कागजात उपलब्ध हो जाते हैं लेकिन पंचायतों द्वारा धीमी गति के समाचार की तरह उपलब्ध कराने में बिलम्ब हो रहा है |

आखिर ऐसा होता क्यों है ? केवल इसलिए कि इस फर्जी बहाली में रुपए का लेन-देन बेजोड़ हुआ है | इसलिए स्वेच्छा से त्यागपत्र तो वे ही देते हैं जो विवेकशील प्राणी हैं , जो कानून के दायरे में जीवन जीना चाहते हैं | यहाँ अधिकांश लोग तो वासना और व्यसनों को अंगीकार करने में लगे हैं जबकि यह सच है कि वासना कभी निर्मूल नहीं हो सकती | अत: सभी फर्जी शिक्षक स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं सौपेंगे …. कदाचित नहीं …… फिर भी उन्हें हरदम कोशिश तो करनी ही होगी क्योंकि कोशिश का दुनिया में कोई विकल्प नहीं है |

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इसरो की ऐतिहासिक उड़ान : अंतरिक्ष में भेजे पांच उपग्रह

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में शुक्रवार की रात इतिहास रच दिया। इसरो के उपग्रह वाहन पीएसएलवी-सी 28 ने कल रात 9 बजकर 58 मिनट पर पांच ब्रिटिश व्यावसायिक उपग्रहों के साथ सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से उड़ान भरी। उड़ान भरने के 20 मिनट के अन्दर उसने 1,440 किलोग्राम वजन के इन पांचों उपग्रह को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो की इस सफलता पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है। बता दें कि यह इसरो का अब तक का सबसे बड़ा व्यावसायिक मिशन था।

ये उपग्रह पृथ्वी की सतह पर रोजाना किसी भी लक्ष्य की तस्वीर लेने में सक्षम हैं। लगभग सात वर्षों तक चलनेवाले इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी पर संसाधनों और उसके पर्यावरण का संरक्षण, शहरी अवसंरचना का प्रबंधन और आपदा प्रबंधन है। पीएसएलवी की इस 30वीं उड़ान में तीन एक समान डीएमसी3 ऑप्टिकल पृथ्वी निगरानी उपग्रह थे जिनका निर्माण ब्रिटेन ने किया है। इसके साथ ही दो सहायक उपग्रह भी थे।

इस मिशन की कामयाबी इस लिए भी खास है कि ये उपग्रह उस ब्रिटेन के थे जिसने कभी हमें गुलामी की जंजीड़ों में जकड़ कर रखा था। क्या इस उपलब्धि में हमारी आज़ादी का असली जश्न छिपा नहीं है..? वास्तव में भारत की ये उपलब्धि गर्व करने के लायक है। बधाई, इसरो..!

 

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बिहार बंद में पप्पू यादव ने झोंकी ताकत, समर्थकों के साथ गिरफ्तार

सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के नेतृत्व में जन अधिकार पार्टी का बिहार बंद राज्य के कई हिस्सों में असरदार दिख रहा है। इस बंद का आह्वान पटना विश्वविद्यालय के छात्रावास में रहने वाले छात्र श्याम नारायण उर्फ सीकू राज की मौत व राज्य में बिगड़ती विधि व्यवस्था के खिलाफ किया गया था। बता दें कि सीकू राज की मौत किशनगंज पुलिस की पिटाई के कारण हुई थी।

बंद के दौरान हंगामा व तोड़फोड़ को देखते हुए सैकड़ों बंद समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव को भी पटना के डाकबंगला चौराहे पर धरना देते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। बंद को जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा समेत कई अन्य विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है लेकिन सड़कों पर जन अधिकार पार्टी व युवा शक्ति के कार्यकर्ता ही दिख रहे हैं।

आज सबसे पहले पप्पू यादव पटना के राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां उनके समर्थकों ने रेल ट्रैक जाम कर दिया। इसके बाद वे पटना के डाक बंगला चौराहे पर पहुंचे। उनके समर्थकों ने वहां भी सड़क जाम कर दिया। पटना के पंडारक स्थित लेमुआबाद, बाढ़ के गुलाबबाग चौक, नौबतपुर व मनेर में भी बंद का असर दिख रहा है। आरा में स्टेशन रोड पर भी बंद समर्थकों ने हंगामा किया। पप्पू यादव के प्रभाव वाले कोशी के इलाके की बात करें तो मधेपुरा में बंद समर्थकों ने रेल रोकी। सहरसा, खगडि़या व पूर्णिया में भी बंद का असर है। कटिहार में शहीद चौक पर टायर जलाकर बंद समर्थकों ने सङक जाम कर दिया। भागलपुर में भी ट्रेंनें रोकी गईं और कई गाडि़यों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हालांकि बंद को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के इंतजाम भी देखने को मिले हैं।

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लालू-नीतीश को छोड़ प्राय: सभी नेता रंगबाज हैं

सामने जहाँ तक नजर जाती है वहाँ लालू-नीतीश को छोड़ खड़ा कोई भी राजनेता हो या फिर राजनेत्री, चाहे सांसद हो या विधायक, चाहे शिक्षक हो या प्रोफेसर अथवा लोक-सेवक से लेकर ग्राम-सेवक तक प्राय: सभी अपने-अपने सफ़ेद बालों को रंग-रंग कर आये दिन रंगबाजों की संख्या बढ़ाते ही जा रहे हैं | सभी राजनेता खुद को आम लोगों के बीच कच्चे उम्र वाले जैसा दिखने का धोखा ही तो दिया करते हैं |

वहीँ दूसरी ओर बेरोजगारों की खड़ी फ़ौज उन्ही रंगबाजों से रंगदारी तहसिलने के लिए कभी-कभी बच्चों के खेलने वाला काला प्लास्टिक का रिवाल्वर हाथ में लेकर बस-ट्रेन या प्लेन के पैसेंजर को धोखा ही तो दिया करते हैं तभी तो सभी हाथ उठाकर और सिर झुकाकर खड़े हो जाते हैं | लेकिन हाँ ! हर हमेशा नकली कारोबार ही नहीं होता |

इधर कुछ दिनों से बिहार में रंगदारों की धूम मची हुई है | पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से 10 लाख की रंगदारी मांगी गई तो वर्तमान मंत्री बीमा भारती से 5 लाख की | मधेपुरा के विधायक प्रो. चन्द्रशेखर हो या जद यू के बागी विधायक छातापुर के नीरज कुमार बबलू हो – दोनों को मोबाइल पर मेसेज भेजकर सेंट्रल बैंक के खाता नंबर- 3160610546 में 5-5 लाख रंगदारी जमा करने का फरमान दिया गया अन्यथा सपरिवार जान से मारने की धमकी | इतना ही नहीं , त्रिवेणीगंज की विधायिका अमला देवी हो या अल्प संख्यक आयोग के ओ.एस.डी. मो.दीवान जाफ़र हुसैन खां या फिर मधेपुरा का अंचल अधिकारी उदयकृष्ण यादव हो अथवा सहरसा कमिश्नरी का डॉ. भारत भूषण – यानी राजधानी पटना से लेकर अंचल तक सबों से मोबाइल पर 5 – 5 लाख रुपए की रंगदारी जिसने मांगी थी वही तो है – गिरोह का सरगना – निरंजन भगत , जो 15 दिन पहले जेल से बाहर निकला ही है | आलमनगर क्षेत्र का वह निरंजन हमेशा साथ में मोबाइल का 25 सिम रखता है | प्रभारी प्रधानाध्यापक ही नहीं वह बी.एल.ओ. भी है | निरंजन पर 30 लाख से अधिक का गवन का मामला दर्ज है जिसमें जेल भी गया था | रंगदारी मांगने के बाबत निरंजन पर पटना, मधेपुरा, पूर्णिया , सहरसा, त्रिवेणीगंज के थानों में दर्जनों प्राथमिकी दर्ज की गई है |

फिलहाल मधेपुरा के आरक्षी अधीक्षक आशीष भारती के गिरफ्त में है निरंजन भगत और उसका सहयोगी असगर अली अंसारी | गिरोह के अन्य रंगबाजों की खोज जारी है |

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भव्य, करिश्माई और भारतीय सिनेमा की नई ऊँचाई : ‘बाहुबली’

भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे महंगी और बिना संदेह सबसे भव्य फिल्म बाहुबली आज दुनिया भर में बड़े परदे पर रिलीज कर दी गई। लगभग 200 करोड़ में बनी इस बहुभाषी और बहुप्रतीक्षित फिल्म को एक साथ 4000 थियेटरों में रिलीज किया गया है। इस पीरियड एक्शन-ड्रामा में प्रभास, राणा दग्गुबती, राम्या कृष्णा, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना भाटिया की मुख्य भूमिका है। फिल्म के डायरेक्टर एसएस राजमौली हैं, जिनका ये ड्रीम प्रोजेक्ट था। तीन सालों में बनकर तैयार हुई इस फिल्म को दो पार्ट में रिलीज किया जाएगा। पहला पार्ट आज रिलीज होने के बाद दूसरा पार्ट सितंबर के अंत तक रिलीज होगा। राजमौली की पिछली फिल्मों ‘मगाधीरा’ और ‘ईगा (मक्खी)’ की तरह ये फिल्म भी भीड़ से कितनी अलग है इसे केवल देखकर महसूस किया जा सकता है।

फिल्म की कहानी हजारों साल पहले के एक काल्पनिक नगर माहेष्मती की है। यहाँ की राजमाता (राम्या कृष्णन) को फैसला करना है कि यहाँ का सिंहासन दो भाईयों में से किसको दे। इनमें एक भाई अमरेन्द्र बाहुबली (प्रभास) की राज्य के लोग पूजा करते हैं जबकि उसके उलट है उसका दूसरा भाई भल्लाल (राना दग्गुबती)। साजिशों के चलते राज भल्लाल को मिलता है और बाहुबली मारा जाता है । इन सबके बीच उसके बेटे को राजमाता बचा लेती है और वह उस नगर से दूर किसी और मां के हाथों पलता है। सालों बाद उसकी किस्मत उसे फिर से माहेष्मती लाती है जहाँ उसे अपने पिता की मौत का बदला लेकर सिंहासन हासिल करना है।

देखा जाय तो इस तरह की कहानी भारतीय सिनेमा के इतिहास में सैकड़ों मिल जाएंगी लेकिन इसकी जैसी प्रस्तुती बाहुबली में हुई है वह कल्पनीत है। विजुअल इफेक्ट्स यहाँ रोमांच और अनोखे अनुभव से भरा एक अलग संसार रच देते हैं और आप उसमें खो जाते हैं। इस फैंटेसी एक्शन फिल्म में कथानक और स्क्रिप्ट में खामियों के बावजूद जबरदस्त स्पेशल इफेक्ट्स और खासतौर पर युद्ध के दृश्यों का फिल्मांकन करिश्माई है।

अपनी भव्यता में ‘ग्लैडिएटर’ की याद दिलानेवाली बाहुबली से तकनीकी स्तर पर भारतीय सिनेमा को एक नई ऊँचाई मिली है, इसमें कोई संदेह नहीं। डायरेक्टर राजमौली ने जैसे हर फ्रेम में इतिहास रच दिया है और उस इतिहास को जीवंत कर देने में सिनेमैटोग्राफर के.के. सेंथिल कुमार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस फिल्म की भव्यता में उनका योगदान कहीं से कम नहीं है।

दुनिया भर में बाहुबली को 5 भाषाओं – तमिल, तेलगु, मलयालम और हिन्दी के अलावा फ्रेंच में भी –रिलीज किया गया है। अमिताभ बच्चन समेत फिल्म जगत की जानी मानी हस्तियों और समीक्षकों ने फिल्म की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। टिकट की एडवांस बुकिंग की व्यवस्था फिल्म की रिलीज से पहले गड़बड़ा जाए, ऑनलाइन बुकिंग कराने वाले इतनी संख्या में हों कि कम्प्यूटर सर्वरों ने काम करना बंद कर दिया हो, सिनेमाघरों एवं मल्टीप्लेक्सों के बाहर लोगों की कतारें इतनी लम्बी हों कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़े – फिल्म की तरह उसे मिला रिस्पांस भी उतना ही भव्य है।

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बिहार चुनाव का सेमीफाइनल भाजपा के नाम

बिहार में चुनाव का सेमीफाइनल भाजपा ने जीत लिया। राज्य 24 सीटों पर हुए विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने अकेले 12 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि एक सीट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार की जीत हुई। महागठबंधन का आगे जो हो, कम-से-कम इस चुनाव में वो फेल रहा। जदयू को पांच सीटों पर सफलता मिली जबकि राजद महज तीन सीटों पर अपनी उपस्थिति बना सकी। वहीं कांग्रेस को एक सीट मिली तो एक सीट पर एनडीए के घटक दल एलजेपी ने जीत दर्ज की। पटना की सीट निर्दलीय रीतलाल यादव की झोली में गई।

भाजपा के 12 विजयी उम्मीदवार ये हैं – सच्चिदानंद राय (छपरा), राजन सिंह (औरंगाबाद), आदित्य नारायण (गोपालगंज), सुनील सिंह (दरभंगा), दिलीप जायसवाल (पूर्णिया), संतोष सिंह (सासाराम), हरीनारायण चौधरी (समस्तीपुर), सुमन महासेठ (मधुबनी), टुन्नाजी पांडेय (सिवान), रजनीश (बेगूसराय), बबलू गुप्ता (मोतीहारी) एवं अविनाश विद्यार्थी (मुंगेर)। जदयू के जीत दर्ज करने वाले 5 प्रत्याशी हैं – रीना देवी (नालंदा), दिनेश सिंह (मुजफ्फरपुर), मनोरमा देवी (गया), सलमान रागिव (नवादा) एवं मनोज यादव (भागलपुर)। राजद से चुने गए 3 उम्मीदवार हैं – सुबोध राय (हाजीपुर), राधाचरण (भोजपुर) तथा राधाचरण साह (आरा-बक्सर)। अन्य सफल प्रत्याशी हैं – पटना से निर्दलीय रीतलाल यादव, बेतिया से कांग्रेस के जीतन राम, कटिहार से भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी अशोक अग्रवाल और सहरसा से एलजेपी की नूतन सिंह।

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मोदी-शरीफ मुलाकात : हाथ नहीं, दिल मिले तो बात बने

रूस के शहर ऊफा में आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच हुई बातचीत कई मायनों में सकारात्मक रही। नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री मोदी को 2016 में पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। अगले साल मोदी सार्क शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पाकिस्तान जाएंगे।

दोनों नेताओं के बीच बातचीत स्थानीय समयानुसार सुबह 9.20 बजे शुरू हुई जो लगभग डेढ़ घंटे तक चली। पहले ये मुलाकात केवल 45 मिनट के लिए रखी गई थी। इस दोतरफा बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने मुंबई के 26/11 हमलों के आरोपियों के वॉयस सैंपल साझा करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही आतंकवाद पर दोनों देशों के NSA बात करेंगे। बीएसएफ के डीजी और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच भी बातचीत होगी। आज की इस मुलाकात में हाफिज सईद और लखवी पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के मछुआरों और उनकी नौकाओं को छोड़ने का निर्णय भी लिया।

वार्ता प्रतिनिधिमंडल में भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और विदेश सचिव एस. जयशंकर शामिल थे। पाकिस्तान की ओर से विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज सहित अन्य अधिकारी थे।

मोदी और शरीफ की इस मलाकात पर ना केवल भारत और पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया की नज़रें टिकी थीं। वार्ता से पहले दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाकर एक-दूसरे का अभिवादन किया, लेकिन बात तो तब बनेगी जब दिल भी इसी तरह मिलेंगे। मुलाकात से ठीक एक दिन पहले पाकिस्तानी सेना द्वारा उत्तरी कश्मीर के नौगाम सेक्टर (कुपवाड़ा) में संघर्ष विराम का उल्लंघन कर अग्रिम भारतीय चौकियों को निशाना बनाना जिसमें बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया, मन में संदेह का बीज छोड़ गया। जब भी भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आपस में मिलते हैं, लगता है रिश्तों में सुधार होगा लेकिन हर बार उम्मीदों पर पानी फिरता रहा है। आज की यह मुलाकात बुनियादी स्तर पर दोनों देशों के रिश्तों में कितना बदलाव ला पाएगी, यह तो समय ही बताएगा।

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