आप जानिये क्या हैं ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ?

डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम यानी अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम | और आगे जानिये- अवुल हुए परदादा, पकीर दादा जी एवं जैनुलाब्दीन वालिद (पिता) | इन सबों के अन्त में सबकुछ कलाम पर जाकर ठहर जाता है क्योंकि उसे ना बेटा है न बेटी…. और ना….. | फिर भी यह कारवाँ रुकने वाला नहीं है | भारत के समस्त बेटे-बेटियों द्वारा बड़े-बड़े सपने देखने और उन्हें अमलीजामा पहनाने हेतु हमारा कलाम हमेशा जिन्दा रहेगा | कलाम केवल भारत को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को अमन के लिए प्रेरित करता रहेगा | गीता-कुरान के तर्ज पर कर्मयोग का पाठ पढाता रहेगा तथा निरन्तर कबीरवाणी – काल करे सो आज कर…… एवं ढाई आख़र प्रेम का….. गुनगुनाता रहेगा | कलाम की इन्हीं भावनाओं को पंक्तिबद्ध कर आपका मधेपुरी हमेशा आपके साथ गुनगुनाता रहेगा – विशेष रूप से……

युवजनों के नाम  डॉ. कलाम का संदेश :-

हों कर्मठ तेरे हाथ

सृजन तब करूं मैं सुख से

तुम्हारे लिए !

एक बेहतर कल के लिए

मैं दौड़ने को  अब भी तैयार

तुम्हारे लिए !

इस महान पुण्य-भूमि में मैं

खोदा गया एक कुआँ हूँ

तुम्हारे लिए !

देखो सपना विकसित भारत का

उठो ! खाक हो जाऊंगा मैं

तुम्हारे लिए !

यही बस अन्दर में है आग

सुलगती दिल में बारम्बार

तुम्हारे लिए !तुम्हारे लिए !!

  डॉ. मधेपुरी की कलम से …..

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उच्चशिक्षा के प्रति संवेदनशील बालमुकुंद बाबू की प्रतिमा का अनावरण

रासबिहारी लाल मंडल,  शिवनन्दन प्रसाद मंडल एवं भूपेन्द्र नारायण मंडल के सपने को साकार करने के लिए साहुगढ़ मधेपुरा में बी.एन.मंडल वाणिज्य महाविद्यालय को जमीन देकर कालेज स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी बालमुकुंद मंडल ने | उसी बालमुकुंद बाबू की प्रतिमा अनावरण समारोह का उद्घाटन करते हुए भू.ना.मंडल वि.वि. के प्रभारी कुलपति डॉ. जे.पी.एन.झा ने कहा कि कॉलेज पूरी तरह स्थापित हो गया है | अब इसके सर्वांगीन विकास हेतु छात्र-छात्राओं को बी.सी.ए. , एम.बी.ए. आदि रोजगारोन्मुखी शिक्षा देकर तरासने की जरुरत है |

समारोह की अद्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य डॉ.हीराकान्त मंडल ने कहा कि वे रात-दिन एक कर समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र बाबू एवं प्रखर समाजसेवी बालमुकुंद बाबू के सपनों को साकार करने में लगे हैं |

महाविद्यालय की स्थापना व निर्माणारम्भ की न्यू की ईट बने डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने सर्वप्रथम समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज जो यह कॉलेज विशाल वट वृक्ष सा दिखता है वह 2 अक्टूबर 1975 को नन्हा सा बीज मात्र था, जिसमें पानी डालने का काम यहाँ के अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों, गुरुओं ने पूरे मनोयोग से किया | साथ ही दूर-दराज के गांवों के गरीब किसान-मजदूर भी अपना भगवान मानने वाले मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल के नाम वाले कॉलेज बनाने में अपना अंतर्कोष लुटाते रहे – जिसका गवाह है – त्रिमूर्ति : सचिव बालमुकुंद मंडल, प्रो. श्यामल किशोर यादव और डॉ. मधेपुरी | यह त्रिमूर्ति महीनों पदयात्रा पर निकल, बापू के गावों में जा-जाकर शिक्षा के इस मंदिर के लिए मदन मोहन मालवीय की तरह रुपए-आठ आने जमा करते रहे और आज सब कुछ आपके सामने है |

Balmukund Babu Pratima Anawaran Samaroh BNMV .
Balmukund Babu Pratima Anawaran Samaroh BNMV .

डॉ. मधेपुरी ने भावुक होकर कहा कि यहाँ के संस्थापक प्रधानाचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.के.के.मंडल एवं डॉ.हीराकान्त मंडल आदि ने ग्रामीण इलाके के बच्चों को आगे बढ़ाने हेतु सर्वाधिक प्रोत्साहन दिया तथा दे भी रहे हैं |

तिलका मांझी वि.वि. के प्रतिकुलपति रहे डॉ.के.के.मंडल, टी.पी.कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो.सच्चिदानंद, शशिशेखर यादव, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, सिंडिकेट सदस्य विद्यानंद यादव, डॉ.परमानन्द यादव, डॉ.शवीर सहित डॉ.जौहरी, डॉ.अशोक, डॉ. के.पी. आदि प्राचार्यों एवं शिक्षाविदों ने कॉलेज स्थापना में योगदान देने वाली हस्तियां – लोकअभियोजक शिवनेश्वरी प्रसाद, लक्ष्मी नारायण मंडल, नंदकिशोर मंडल, गोविन्द प्र. यादव, परमेश्वरी प्र. दिवाकर, शिवनन्दन राय, सुरेन्द्र प्र. यादव, गजेन्द्र ना. यादव, दीप ना. मंडल आदि को स्मरण करते हुए शेष बचे वेदानन्द यादव, महेंद्र प्र. यादव, प्रधान जी  सहित अन्य सबों की निष्ठा एवं लगन की विस्तृत चर्चा की जिनके कारण यह महाविद्यालय मूर्तरूप ले सका |

मौके पर डॉ.अलोक कुमार, पारो यादव, मनोज भटनागर सहित कॉलेज के शिक्षक-शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं साहुगढ़ निवासी की उपस्थिति समारोह को भव्यता प्रदान करता रहा | अन्त में डॉ. नवीन कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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करें तस्वीरों में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के अंतिम दर्शन

president pranav mukherjee paying homage to bharat-ratna-dr-apj-kalam-mortal-2भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के पार्थिव शरीर पर श्रधांजलि अर्पित करते हुए !
prime minister modi paying homage to dr kalam
प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी नम आँखों से श्रधांजलि देते हुए !
bharat-ratna-dr-Sachin Tendulkar paying homage to apj-kalam-mortal-image-1
एक भारतरत्न दूसरे भारतरत्न के चरणों में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए !
chief minister nitish kumar paying homage to bharat-ratna-dr-apj-kalam-mortal-image-4
मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने भी  भारतरत्न कलाम को श्रधासुमन अर्पित किया !
indian army giving guard of honour to Ex president kalam
सेना ने भारत रत्न डॉ. कलाम को गार्ड ऑफ ऑनर से नवाजा !
last-journey-from-delhi-to-rameshwaram-apj-kalam-mortal-remains-8
तिरंगे में लिपटा हुआ भारत रत्न कलाम का पार्थिव शरीर रामेश्वरम की अंतिम  यात्रा पर , जहाँ उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को होगा !

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कलाम, कलाम थे… सिर्फ कलाम..!

आज भी एक दिन है बाकी दिनों की तरह… कमोबेश सबकी दिनचर्या भी आम दिनों की तरह ही होगी… हम, हमारा घर, पास-पड़ोस, गांव-शहर, राज्य, देश और दुनिया अपनी परिधि और परिवेश में अपने-अपने हिस्से की भूमिका निभा रहे होंगे। नंगी आंखों से देखें तो सब कुछ वही है जो कल था। हाँ, सब कुछ वही है… सिवाय एक परिवर्तन के। और वो परिवर्तन बस इतना है कि हमारे-आपके जैसा एक हाड़-मांस का व्यक्ति, दो हाथ, दो पैर, दो आँखों वाला व्यक्ति कल शाम तक खड़ा था और आज लेटा हुआ है। लेटता तो वो 84 साल से रहा था लेकिन इस बार उसे नींद जरा गहरी आ गई। “पृथ्वी को रहने लायक कैसे बनाया जाय” इस पर सोचते-सोचते उसने ये पृथ्वी ही छोड़ दी। क्या ये पृथ्वी उसके रहने लायक नहीं रह गई थी..? या फिर इसे रहने लायक कैसे बनाया जाय ये सोचने को एक आत्मा ने अपनी वर्तमान काया को छोड़ना ही मुनासिब समझा..? मित्रो, यही वो बिन्दु है जहाँ किसी के भी ना रहने और एपीजे अब्दुल कलाम के ना रहने का फर्क समझ में आता है। और इस फर्क को समझकर ही हम समझ पाएंगे कि कल और आज में क्या फर्क है..? कल क्या था जो आज हमने खो दिया..?

हाँ मित्रो, कलाम नहीं रहे। कौन थे कलाम..? महान वैज्ञानिक..? बेमिसाल शिक्षक..? मिसाईलमैन..? पोखरण के नायक..? भारतरत्न..? भारतीय गणतंत्र के भूतपूर्व राष्ट्रपति..? ईमानदारी से बतायें, क्या ये सारे जवाब मिलकर भी एक कलाम को पूरा परिभाषित कर पाएंगे..? नहीं… बिल्कुल नहीं। सच तो ये है कि इनमें से कोई एक विशेषण भी किसी को गौरवान्वित करने के लिए काफी है और जब ये सारे विशेषण मिलकर भी किसी एक व्यक्ति को परिभाषित ना कर पा रहे हों तो उसके कद और उसकी हद की कल्पना क्या की जा सकती है..?

बुद्ध, गांधी, मार्क्स, आईंस्टाईन और कलाम जैसे महामानव रोज-रोज नहीं आते। इन रत्नों को ईश्वर सहेज कर रखते हैं और बड़े मौके पर इन्हें धरती पर भेजते हैं। ऐसे लोग आते हैं और सदियों का अंधेरा दूर कर जाते हैं। बल्कि कहना तो ये चाहिए कि कलाम जैसे लोग रोशनी को भी रोशनी दिखा जाते हैं। आज जहाँ ‘मनुष्यता’ दिन-ब-दिन अपनी शर्मिन्दगी के बोझ तले दबती जा रही है वहाँ किसी ‘कलाम’ की ही बदौलत एक मनुष्य के रूप में हम सिर उठा पाते हैं।

कलाम अब सशरीर हमारे बीच नहीं होंगे लेकिन हमारी सोच, हमारे सपनों से उन्हें भला कौन दूर कर सकता है। हमारी आनेवाली पीढ़ियां जब अपना लक्ष्य तय करेंगी, तब कलाम ही टोक रहे होंगे कि “छोटा लक्ष्य एक अपराध है”… और जब-जब हम आँखे बन्द कर सपने देखेंगे, तब कलाम ही हमें बता रहे होंगे कि “सपने वो नहीं जो हम बंद आँखों से देखते हैं, सपने तो वो हैं जो हमें सोने नहीं देते”। फेल (FAIL) को फर्स्ट अटेम्प्ट इन लर्निंग, एंड (END) को एफर्ट नेवर डाइज और नो (NO) को नेक्स्ट अपॉर्चुनिटी कहने का जीवन-दर्शन हमें कलाम से ही मिल सकता है और सफलता की गूढ़ पहेली कलाम ही इतनी आसानी से सुलझा सकते हैं कि “सफलता का रहस्य सही निर्णय है, सही निर्णय अनुभव से आता है और अनुभव गलत निर्णय से मिलता है।”

आज की ‘फेसबुक पीढ़ी’ की रुचि और आदर्श पल-पल बदला करते हैं लेकिन कलाम इस पीढ़ी के लिए भी कितने बड़े आदर्श थे और वो भी कितनी रुचि के साथ इसे सोशल मीडिया में उनके लिए उद्गारों की बाढ़ से सहज समझा जा सकता है। ये जानने के लिए कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह ही जलना होगा, इस पीढ़ी के पास कलाम से बड़ा आदर्श कोई दूसरा था भी तो नहीं। यू.एन.ओ. ने कलाम के जन्मदिवस 15 अक्टूबर को ‘इंटरनेशनल स्टूडेन्ट्स डे’ घोषित कर एक भविष्य के ‘द्रष्टा’ और ‘निर्माता’ शिक्षक को बहुत सही श्रद्धांजलि दी है।

कलाम को किसी भी कोण से देख लें, देखने वाले का धन्य हो जाना तय है। गीता का कर्मयोग समझना हो तो कलाम के जीवन में एक बार झांक लेना काफी होगा। ‘स्थितप्रज्ञ’ होना क्या होता है इसे समझने के लिए कलाम से बेहतर उदाहरण हो नहीं सकता। सादगी और सहजता कितनी बड़ी पूंजी है गांधी के बाद किसी ने समझाया तो वो कलाम ही थे। जीवन का हर पल कैसे साधना का पर्याय हो सकता है इसकी गवाही तो उनके जीवन का आखिरी पल भी दे गया।

कलाम ‘महा’मानव थे, इसके अधिक मायने ये रखता है कि कलाम ‘पूर्ण’ मानव थे। और मानव जब पूर्णता को छूता है, देवत्व भी झुक जाता है। सच तो ये है कि कलाम हर ‘विशेषण’ से ‘विशेष’ थे। कलाम, कलाम थे… सिर्फ कलाम..!

– मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सपने देखो जो नींद उड़ा दे – डॉ. मधेपुरी

हिन्दुस्तान” दैनिक के ब्यूरो चीफ अमिताभ की टीम के बांकुड़े हैं – मनीष सहाय, सुभाष सुमन, संजय परमार, देवेन्द्र कुमार आदि जिन्होंने एक सप्ताह से जिले के तेरहो प्रखंडों में जा-जाकर, कड़ी धुप में पसीना बहा-बहाकर, “हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान 2015” का भव्य एवं सफल आयोजन भू.ना.मंडल वि.वि. के आडिटोरियम में किया जिसमें मुख्य रूप से एस.पी. आशीष भारती, अद्यक्ष मंजू देवी, समाजसेवी डॉ. मधेपुरी , प्राचार्य द्वय डॉ.अशोक कुमार, डॉ. माधवेन्द्र झा, वि.वि. पदाधिकारीगण कुलसचिव डॉ. कुमारेश प्र. सिंह, सम्पदा पदाधकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार, कुलानुशासक डॉ. विश्वनाथ विवेका आदि का भरपूर सहयोग रहा | जिले के सभी प्रखंडो के बिहार एवं सी.बी.एस.सी. बोर्ड में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले सैकड़ों प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को इन्हीं हस्तियों ने मेडल एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया और हौसला आफजाई की |

डॉ. मधेपुरी ने “हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान 2015” के अवसर पर समस्त उपस्थित प्रतिभावान जिज्ञासुओं से कहा कि हर किसी के अन्दर दैवीय शक्ति छिपी है | आप कभी निराश न हों | जी भर कर मेहनत करें और हौसलों को पंख लगावें जिसकी बदौलत आप उड़ान भरते रहेंगे | कोशिश करते रहें | प्रत्येक दिन नये तरीके से मंजिल पाने की कोशिश में लगे रहें | दुनिया में कोशिश का कोई विकल्प नहीं है |

डॉ मधेपुरी ने उपस्थित अभिभावकों से कहा कि बच्चों को बड़े-बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित करें , परन्तु वो वाले सपने नहीं जो नींद में देखे जाते हैं बल्कि वैसे सपने जो नींद उड़ा दें |

बीच-बीच में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन विभिन्न स्कूली बच्चों द्वारा किया जाता रहा जो दिनभर दर्शकों को बांधे रहा | मानव जी की उद्दघोषणा और संजय परमार का धन्यवाद ज्ञापन भी लोगों को खूब भाया |

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गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ. कलाम नहीं रहे  !

शिलांग में अपने अंतर्कोष लुटाते हुए भारतरत्न डॉ. कलाम ने अंतिम सांस ली | वे भारत के राष्ट्रपति हुआ करते थे जब मुझे उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ | मैंने उस ऋषि को करीब से देखा जो गीता और कुरान में समभाव रखता था | जो हर पल मानवता को नई ऊंचाई पर ले जाने के बारे में सोचता था | जिसके फलस्वरूप मैंने उनकी जीवनी लिखी –स्वप्न ! स्वप्न !! और स्वप्न !!!बाद के वर्षों में मैंने उनके सवाल-जबाब पर आधारित दूसरी किताब लिखी छोटा लक्ष्य एक अपराध है !

और कुछ तो इस समय नहीं कह सकता | बस इतना ही कि उन्होंने जो मुझसे कहा था – वह सबों के लिए एक संदेश के रूप में कह रहा हूँ –

  • ये आँखें दुनिया को दोबारा नहीं देख पायेंगीं ! तुम्हारे अन्दर जो बेहतरीन है उसे दुनिया को देकर जाना . . . !!

 डॉ. मधेपुरी की कलम से ,

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अब भी संघ के पदाधिकारियों का चुनाव सर्वसम्मत हो जाता है  !

पी.एच.ई.डी. के मधेपुरा जिलाशाखा (गोप गुट) के कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के चुनाव हेतु हरिनारायण मंडल की अद्यक्षता में एक बैठक आहुत की गयी | राज्य एवं जिला संघ के गण्यमान सुरेश शर्मा, रामचन्द्र यादव, मो.इजहार, सत्येन्द्र कुमार आदि की उपस्थिति में नई कमिटी के पदाधकारियों का चयन सर्वसम्मति से इस प्रकार किया गया –

अध्यक्ष चुने गये हरिनारायण मंडल जिनके सहयोग के लिए तीन उपाध्यक्ष हुए – वीरेन्द्र सिंह, सत्यनारायण साह एवं यांत्रिकी के अशोक कुमार सिंह | सचिव चुने गये शिबू पासवान जिनके कार्यों के शीघ्र निष्पादन हेतु तीन संयुक्त सचिव बनाये गये – रीतेश कुमार सिंह, सोहन राम एवं संजय नवीन | इसके अतिरिक्त दो संगठन सचिव – कृष्णमोहन कुमार व मो. ताहिर और एक कार्यालय सचिव – ब्रह्मदेव रजक | नरेश कुमार यादव को सर्वसम्मति से कोषाध्यक्ष चुना गया |

यह भी जानें कि सर्वसम्मत चुनाव के अन्त में संगठन को निष्ठापूर्वक पारदर्शी तरीके से चलाने के लिए सभी सदस्यों को राज्य महासचिव द्वारा शपथ दिलाई गई | बाद में दिवंगत हुए जिला सचिव रत्नेश्वर कुमार सिंह के लिए एक मिनट की मौन श्रधांजलि अर्पित की गयी | मधेपुरा समेत कुछ अन्य जिलों के सदस्य भी श्रधांजलि सभा में उपस्थित थे | जिला सचिव शिबू पासवान द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया |

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विभागाद्यक्ष की पुस्तक लोकार्पित

भू.ना.मंडल वि.वि.स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाद्यक्ष डॉ.विनय कुमार चौधरी की नई रचना – “कोशी अंचल के लोक साहित्य का विश्लेषणात्मक अध्ययन” का लोकार्पण बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के पूर्व हिन्दी विभागाद्यक्ष एवं प्रख्यात समीक्षक डॉ. चौथीराम यादव द्वारा किया गया |

इस पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने कहा कि विभागाद्यक्ष डॉ. चौधरी रचनात्मक एवं आलोचनात्मक प्रतिभा-संपन्न लेखक व कवि हैं | दर्ज़नों काव्य कृतियों के  रचयिता डॉ. चौधरी में कोशी की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक चेतना की पहचान ही नहीं बल्कि बेहतरीन परख की शक्ति भी है | इन्हीं गुणों के कारण वे कोशी लोकसाहित्य का मूल्यांकन प्राय: प्रगतिशील मूल्यों के आलोक में करते हैं |

बी.एच.यू. विभागाद्यक्ष डॉ.चौथीराम यादव ने कहा कि डॉ. चौधरी लोकसाहित्य एवं लोकसंस्कृति के व्याख्याता आलोचक हैं जो इस पुस्तक से प्रमाणित होता है |

लोकार्पण के इस सादगीपूर्ण समोराह में रास्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानेवाले भूगोल के विभागाद्यक्ष डॉ.शिवमुनि यादव सहित डॉ.रेणुका मल्लिक, डॉ. के.एस.ओझा, डॉ.अनिल कुमार, डॉ.विमल सिंह, डॉ.मनोज, डॉ. कपिलदेव यादव के अतिरिक्त वंकटेश्वरनाथ, राजकिशोर, कौशल किशोर, सुशील-अभिनव-संजीव-सुनील आदि उपस्थित थे |

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डॉ. मधेपुरी ने नीतीश सरकार को दिया साधुवाद और दे डाली एक सलाह…!

नीतीश सरकार द्वारा बिहार की महिलाओं के नाम से भूमि-भवन के अतिरिक्त अन्य चल-अचल संपत्ति के निबंधन में लगने वाले स्टाम्प व निबंधन शुल्क में 5% की छूट दिए जाने के फैसले का टी.एन.बी. ट्रस्ट , मधेपुरा के सचिव डॉ. मधेपुरी सहित सभी सदस्यों द्वारा हार्दिक स्वागत किया गया एवं भूरि-भूरि प्रशंसा भी की गयी |

डॉ. मधेपुरी ने केबिनेट की गुरुवार को हुई बैठक में महिला सशक्तिकरण नीति 2015 के तहत सरकार के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान करने के बाबत नीतीश सरकार के सारे केबिनेट सदस्यों को मधेपुरा की जनता की ओर से साधुवाद देते हुए कहा कि हमलोग राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा महिलाओं के स्वामित्व व नियंत्रण में बढ़ोतरी होने वाले ऐसे प्रस्ताव का हृदय से बारम्बार सराहना करते हैं |

CM Nitish Kumar with his cabinet .
CM Nitish Kumar with his cabinet .

आप यह भी जानें कि जब नीतीश सरकार द्वारा बालिकाओं के बीच पोशाक एवं साइकिल वितरण योजनाओं का श्री गणेश किया गया था तो बिहार के गाँवों की बेटियों में गजब का उत्साह देखने को मिला था | खेत-खलिहान से गुजरते हुए उड़ते पंछियों की तरह कतारबद्ध होकर स्कूल जाती बच्चियों को देखकर समाज के हित चिंतकों का मन जिस तरह झूम उठा था उसी तरह इस योजना के लागू होने से पुनः बिहार के गाँवों की आधी आबादी जाग उठेगी और शेष के चेहरे खिल उठेंगे | जो महिला कभी शहर तक नहीं पहुँची थी वही अब रजिस्ट्री ऑफिस तक पहुंचेगी | जो कभी अपना नाम तक लेने में संकोच करती थी वही अब पति का नाम भी बेहिचक बताएगी |

डॉ. मधेपुरी ने निज संवादाता से कहा कि सरकार यदि हस्ताक्षर करने वाली महिलाओं को 3% की और अतिरिक्त छूट देने की घोषणा तथा ग्रामीण क्षेत्र के अन्तर्गत शौचालय सहित घर की महिलाओं को 2% और स्पेशल छूट (मुखिया जी के प्रमाण-पत्र पर) देने की घोषणा कर दे तो निश्चय ही गाँधी-कस्तूरबा का गाँव शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण साक्षर होने के साथ-साथ शौचालययुक्त होने की दिशा में भी तेज कदम बढ़ायेगा |

मधेपुरा अबतक के अनुसार डॉ. मधेपुरी के ऐसे प्रस्तावों को यदि नीतीश सरकार द्वारा प्राथमिकता के आधार पर स्वीकार कर लिए जाँय तो निश्चय मानें कि चाँद जैसी शीतल ग्रामीण महिलायें तत्कालिक प्रभाव से ही जागरुकता की सीढियां चढ़ती हुई सूरज से ऊर्जा प्राप्त कर ऐसी बन जाएगी कि उन्हें घूरने से पहले ही सबकी नजरें झुक जाया करेंगी |

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बी.एच.यू. के डॉ. चौथीराम ने किया पुस्तक का लोकार्पण

भू.ना.मंडल वि.वि.स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाद्यक्ष डॉ.विनय कुमार चौधरी की अद्यक्षता में लोकार्पण संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें बी.एच.यू. के पूर्व हिन्दी  विभागाद्यक्ष एवं ख्यातिप्राप्त आलोचक डॉ.चौथीराम यादव ने हिन्दी विभाग के प्राध्यापक डॉ.सिद्देश्वर काश्यप की पुस्तक “नव्यवादी हिन्दी लेखक”का लोकार्पण किया |

डॉ.काश्यप ने पुस्तक परिचय देते हुए कहा कि इस पुस्तक में वैसे लेखकों की समीक्षा दृष्टि पर प्रकाश डाला गया है जो साहित्य की विविध विधाओं में कथ्य, भाषा और शिल्प को नव्यता प्रदान करने में समर्थ हैं | उक्त कथन के प्रमाण हैं – भारतेन्दु, बालकृष्ण भट्ट, उग्र जी, बेनीपुरी, अमृत लाल नगर, श्री लाल शुक्ल, विद्या निवास मिश्र |

Pustak vimochan ceremony at BNMU
Pustak vimochan ceremony at BNMU

डॉ. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि डॉ. काश्यप की आलोचनात्मक दृष्टि मूल्यपरक है और साहित्य की नव्यता और मानवधर्मिता का उद्घाटन इनकी आलोचना का मर्म है | हिन्दी पत्रकारिता पर प्रकाशित इनकी कई पुस्तकें चर्चित हैं |

डॉ.चौथीराम यादव ने इस पुस्तक की विभिन्न विधाओं की नव्यता को उद्घाटित किया और कहा कि लेखक की आलोचना दृष्टि मूल्यपरक एवं मानवीय है | इस अवसर पर डॉ.नरेश कुमार, डॉ.मोहित घोष, डॉ.पी.एन.सिंह, डॉ.ओम प्रकाश, डॉ.विमला, अंतरा, कल्पना, अभिनव, सुनील, संजीव, मनोज, विद्या सागर, फर्जी कवि डॉ. अरुण कुमार, डॉ.सीताराम शर्मा आदि मौजूद थे |

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