भारतीय महिला टीम को हॉकी वर्ल्ड लीग में पांचवां स्थान

भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल्स में पांचवां स्थान हासिल किया। इस जीत से भारत ने रियो ओलंपिक में क्वालिफाई करने की उम्मीदों को कायम रखा है। शनिवार को पांचवे और छठे स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में भारतीय टीम ने जापान को 1-0 से पराजित किया। भारत के लिए एकमात्र विजयी गोल रानी ने मैच के 13वें मिनट में किया।

उधर भारत की पुरुष टीम का मुकाबला रविवार को कांस्य पदक के लिए ब्रिटेन से होना है। बता दें कि भारतीय टीम सेमीफाइनल में मेजबान बेल्जियम से हार गई थी।

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बीएनएमयू में पीजी की परीक्षा अगस्त के पहले सप्ताह से

बीएनएमयू प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार पीजी प्रथम एवं अंतिम वर्ष (2014) की परीक्षा आगामी छह अगस्त से होने जा रही है। परीक्षा नियंत्रक डा. नवीन कुमार ने बताया कि प्रत्येक परीक्षा दिन की पहली पाली में पीजी प्रथम वर्ष एवं दूसरी पाली में पीजी अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी। पीजी परीक्षा के लिए मात्र दो परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं। कोसी क्षेत्र के छात्रों के लिए टीपी कालेज, मधेपुरा एवं पूर्णिया क्षेत्र के छात्रों के लिए एमएल आर्य कालेज, कसबा परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं।

बीएनएमयू ने बीएड परीक्षा (2015) के परीक्षा-प्रपत्र भरने की तिथि भी घोषित कर दी है। परीक्षा नियंत्रक ने जानकारी दी है कि बीएड (2015) के छात्र बिना विलंब शुल्क के सात से 15 जुलाई तथा विलंब शुल्क के साथ 16 से 22 जुलाई तक अपना फार्म भर सकते हैं।

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31 अगस्त को खुलेगी रेल इंजन कारखाना की वित्तीय निविदा

मधेपुरा की बहुप्रतीक्षित ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाना को केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार मूर्त रूप देने जा रही है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने रेल मंत्री रहते हुए इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। केंद्र सरकार मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट में इसे प्राथमिकता देकर बिहार का मॉडल प्रोजेक्ट बनाना चाहती है। उम्मीद की जा रही है कि परियोजना का शुभारंभ शीघ्र ही होगा।

बता दें कि वर्तमान में यह परियोजना 1300 करोड़ रुपये की है। यहां प्रतिवर्ष 12 हजार हॉर्सपावर का 800 विद्युत रेल इंजन का निर्माण होगा। इनमें से चार सौ इंजन से देश की जरूरतें पूरी होंगी और शेष चार सौ इंजन को विदेशों में बेचा जाएगा। कारखाना से लेकर इंजन निर्माण का काम अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कम्पनियों में से कोई एक करेगी। तकनीकी निविदा में चार अन्तरराष्ट्रीय कम्पनियां सीमेन्स, बोमबार्डियर्स, जीई और आरस्ट्रांग चुनी गई हैं। वित्तीय निविदा खोलने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई है। इसके उपरान्त किसी एक कंपनी का अंतिम रूप से चयन किया जाएगा।

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नागपुर का पंचगांव देश का पहला वाई-फाई युक्‍त गांव  

नागपुर का पंचगांव भारत का पहला ऐसा गांव बन गया है जो वाई-फाई की सुविधा से लैस है। यह सुविधा पूरी तरह से निशुल्क होगी। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत इस गांव को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गोद लिया था। शनिवार को इस गांव में विधिवत मुफ्त वाई-फाई योजना को शुरू कर दिया गया।

श्री गडकरी ने इस गांव को देश का पहला वाई-फाई गांव बनने पर बधाई देते हुए मौजूदा दौर में इन्फोरमेशन टेक्नोलाजी को घर-घर तक पहुंचाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वे इस बात से बेहद खुश हैं कि पीएम द्वारा शुरू किए गए डिजिटल इंडिया के सपने को इस गांव से एक नया आधार मिला है। उन्होंने अपने सहयोगी और अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का भी धन्यवाद किया। इस मौके पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री बब्बनराव लोनीकर भी मौजूद रहे।

पंचगांव के बाद डिजिटल इंडिया का सपना सचमुच सच होता दिख रहा है। देश के अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी इसमें कोई संदेह नहीं।

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बिहार के सुहर्ष को यूपीएससी 2014 में पांचवां स्थान, लड़कों में टॉपर

शनिवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा घोषित किए गए सिविल सेवा परीक्षा 2014 के परिणाम में समस्तीपुर के सुहर्ष ने पांचवां स्थान लाकर बिहार का सिर ऊँचा किया है। वे लड़कों में टॉपर हैं। शीर्ष चार स्थानों पर लड़कियों ने बाजी मारी। दिल्ली की शारीरिक रूप से निशक्त आइआरएस अधिकारी इरा सिंघल ने पहला स्थान हासिल किया। टॉप 100 में बिहार के सात होनहार हैं। कुल सफल उम्मीदवारों में बिहार के 83 उम्मीदवारों को सफलता मिली है।

सुहर्ष भगत ने आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। 2011 में उनका भारतीय लेखा सेवा में चयन हुआ था। 2012 में उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और उन्हें भारतीय सूचना सेवा के लिए चुना गया। 2013 में उन्हें आईआरएस मिला और वर्तमान में वे नागपुर में आयकर अधिकारी हैं। सुहर्ष का कहना है कि मैंने पहली दो बार सफलता हासिल करने के बाद भी नौकरी ज्वाइन नहीं की। तीसरी बार में आईआरएस बना तो ज्वाइन कर लिया। लेकिन मैं ज्यादा दिन इस नौकरी को करने वाला नहीं था। यही वजह है कि लगातार प्रयास करता रहा और परिणाम आपके सामने है। जब आप किसी चीज की चाहत रखते हैं तो असफलता के बाद भी उसके लिए प्रयास करते रहना चाहिए।

समस्तीपुर शहर के बहादुरपुर मोहल्ला स्थित वार्ड 27 निवासी डॉ. फुलेन्द्र भगत के दो बेटों में सुहर्ष बड़े हैं। पिता डॉ. फुलेन्द्र भगत पेशे से चिकित्सक हैं और मनोविज्ञान से एमए माँ यहाँ के पेपर मिल कैम्पस में ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल चलाती हैं। सुहर्ष की शुरुआती पढ़ाई शहर के निजी स्कूल ग्रीनलैंड में हुई थी। दसवीं तक की पढ़ाई आर.के. मिशन, देवघर में हुई। वर्ष 2003 में सुहर्ष का दाखिला दिल्ली के डीपीएस, आर.के. पुरम में हुआ और 2010 में आईआईटी, मुंबई के लिए सेलेक्शन हुआ।

बहरहाल, यूपीएससी के अनुसार विभिन्न केन्द्रीय सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के लिए कुल 1,236 सफल उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। इनमें 590 सामान्य, 354 अन्य पिछड़ा वर्ग, 194 अनुसूचित जाति और 98 अनुसूचित जनजाति के हैं। सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से कुल 1,364 पद भरे जाएंगे। 254 अन्य उम्मीदवार प्रतीक्षा सूची में हैं।

बताते चलें कि टॉप 100 में शामिल बिहार के सात उम्मीदवारों में अन्य छह उम्मीदवार हैं – आयुष प्रसाद (रैंक 24), नेहा कुमारी (रैंक 26), हर्ष सिंह (रैंक 52), अनन्या झा (रैंक 57), राजू मिश्रा (रैंक 65) और रोहन कुमार झा (रैंक 95)।

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‘द प्राइड ऑफ अमेरिका’ से नवाजे गए चार भारतवंशी

कार्निज कॉर्पोरेशन ऑफ न्यूयार्क की ओर से अमेरिकी समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की उन्नति में योगदान देने के लिए 38 प्रवासियों को ‘ग्रेट इम्मीग्रांट्स : द प्राइड ऑफ अमेरिका’ से नवाजा जा रहा है। इन 38 प्रवासियों में चार भारतवंशी भी हैं। कार्निज कॉर्पोरेशन ने इन प्रवासियों को सलाम करते हुए कहा कि अमेरिका को मजबूत बनाने में इनका योगदान सराहनीय है और ये देश में लोकतंत्र की ताकत की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उल्लेखनीय है कि आज यानि 4 जुलाई को अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है।

ये विशिष्ट सम्मान पानेवाले चार भारतवंशी हैं – अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा, हावर्ड कॉलेज से जुड़े राकेश खुराना, मिक (भारत) की उपाध्यक्ष एवं कार्यकारी संपादक मधुलिका सिक्का तथा चिकित्सक, प्राध्यापक व लेखक अब्राहम वर्गीज। सम्मानित किए जाने वाले 38 प्रवासी भिन्न-भिन्न पेशों से जुड़े हुए हैं तथा 30 से अधिक देशों से ताल्लुक रखते हैं।

बताते चलें कि कार्निज कॉर्पोरेशन ऑफ न्यूयार्क की स्थापना एंड्रयू कार्निज ने 1911 में की थी जिसका उद्देश्य उन्नतिशीलता को बढ़ावा देना तथा ज्ञान का प्रसार करना था। कार्निज गरीब प्रवासी के बेटे के रूप में अमेरिका आए थे। वे यहां पले-बढ़े तथा अमेरिकी उद्योग और मानव-कल्याण के लिए बड़ा योगदान दिया। कार्निज कॉर्पोरेशन ऑफ न्यूयार्क के वर्तमान अध्यक्ष वार्तन जार्जियन हैं।

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