शिक्षा जगत के विश्वकर्मा :- कीर्ति नारायण मंडल (1916-1997) : जन्म शताब्दी वार्षिक समारोह – 2015-2016

18 मार्च 1916 को मधेपुरा जिले के मनहरा गाँव में शिक्षानुरागी कीर्ति नारायण मंडल का जन्म पिता ठाकुर प्रसाद मंडल एवं माता पार्वती देवी के घर होता है | कीर्ति बाबू में लोग कभी कबीर और नानक का स्वरुप देखते तो कभी विश्वकर्मा का रूप | यूँ उन्हें विश्वकर्मा कहना ही ज्यादा लोग पसंद करते क्योंकि जहाँ-जहाँ उनके कदम पड़े , वहीँ एक महाविद्यालय बनकर तैयार खड़ा हो गया |

1953 में सर्वप्रथम उन्होंने 50 बीघे जमीन और 25 हजार रूपये दान देकर मधेपुरा में टी.पी.कॉलेज की स्थापना कर पिताश्री को अमरत्व प्रदान किया | वहीँ शहर के मध्य में ही करोड़ों की संपत्ति दान देकर माताश्री के नाम पार्वती विज्ञान महाविद्यालय बनाकर मातृशक्ति को भव्य स्वरुप प्रदान किया |

कोसी एवं पूर्णिया प्रमंडल के सात जिलों में तीन दर्ज़न कालेजों की स्थापना कर दधिची की तरह अपना सबकुछ उन्होंने लगा दिया | उनकी स्मृति को तारोताजा बनाये रखने के लिए ये चार पंक्तियाँ- श्रधांजलि स्वरुप:-

धन आदमी की नींद हरपल हराम करता ,

जो बाँटतादिल खोल उसे युग सलाम करता !

मरने के बाद मसीहा बनता वही मधेपुरी ,

जो ज़िन्दगी में अपना सबकुछ नीलाम करता है !!

                                             (प्रस्तुति :- डॉ मधेपुरी)

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श्रमदीप मगर वह सर्वोत्तम जो फूल खिलाते रेतों में !!

मधेपुरा जिले के उत्तर-पूरब सीमा से सटा है अररिया जिला | वहाँ के नढ्की, तमघट्टी एवं पहुंसरा गाँव जो कल तक मधेपुरा जिले के टेंगराहा-सिकियाहा गाँव की तरह मिनी चम्बल के नाम से मशहूर था , वही आज सब्जी उत्पादन का केन्द्र बन गया है | जिस जमीन पर कभी बंदूकों की आवाज़ गूंजती थी वहीँ के खेतों में आज हरी-भरी सब्जियां लहलहा रही है | दर्जनों दिगभ्रमित युवक बन्दूक-गोली का परित्याग कर अपनी मिहनत की बदौलत सोना उपजा रहे हैं | भटक रहे युवाओं को राह दिखाने के लिए अपने श्रमदीप का प्रकाश फैला रहे हैं | एक हजार एकड़ जमीन में आधुनिक तरीके से सब्जी ही नहीं बल्कि मक्का-गेहूं, सूर्यमुखी, दलहन, तेलहन, आदि नगदी फसलों की खेती कर रिकॉर्ड उत्पादन कर रहे हैं |

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रानीगंज दौरे के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिन मौसम उगाई गोभी की टोकरी भेंट किये जाने पर उन्होंने किसानों को सरकारी सहयोग का भरोसा दिया जिसके तहत मुख्य-सचिव ने दो-दो पोली हाउस बनवाकर बीज से पौधे उगाने में किसानों की मदद की |

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Sansad Madhepura Sharad Yadav

काश ! राष्ट्रीय नेता शरद यादव यदि डॉ मधेपुरी की सलाह पर टेंगराहा के इर्द-गिर्द की हजारों एकड़ परती-परांट जमीन को सरकार के “बंजर भूमि सुधार आयोग” की टीम लाकर दिखा दिए होते तो आज वह बंजर भूमि भी सोना उगलता , जहाँ के दिगभ्रमित युवाओं द्वारा लोकनायक के समक्ष हथियार समर्पित किया जा चुका था |

अररिया के गांवों की समृद्धि के लिए धन्यवाद के पात्र हैं – शिक्षित बड़े किसान मलय कुमार सिंह , रामकुमार मेहता, शिवदयाल मेहता, जिनके श्रम के फलस्वरूप गाँव में शहर की सारी सुविधाएँ उपलब्ध होती जा रही है और साधुवाद के पात्र हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ! अररिया के गांवों के लोग अब गुनगुनाने लगे हैं –

कुछ दीप जलाते हैं छत पर ,

कुछ दीप जलाते खेतों में !

श्रमदीप मगर वह सर्वोत्तम ,

जो फूल खिलाते रेतों में !!

Dr. Madhepuri
Dr. Madhepuri

टेंगराहा के बाबत मधेपुरा अबतक द्वारा पूछे जाने पर डॉ मधेपुरी ने कहा कि मैं अभी भी पूर्णरुपेन आशावान हूँ कि कभी-न-कभी श्रमदीप के पुजारी टेंगराहा निवासी श्री दिगम्बर प्र. यादव (अवकाश प्राप्त कृषि पदाधकारी ,पूर्णिया सरकारी कृषि फार्म) जो बार-बार बिहार सरकार द्वारा पुरस्कृत होते रहे हैं – को एक-न-एक दिन “देवेन्द्र धाम ” से प्रेरणा मिलेगी और प्राचार्य श्यामल किशोर द्वारा स्थापित देवेन्द्र उच्च माध्यमिक विद्यालय से दूर-दूर तक परती-परांट दिखने वाला वह वंजर भूमि आज नहीं तो कल, सब्जी उत्पादन केन्द्र बनने के साथ-साथ मक्का,गेहूं,सूर्यमुखी,दलहन-तेलहन आदि नकदी फसलों से लहलहा उठेगा और इस कारनामे को देखने के बहाने भी “देवेन्द्र धाम ” में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती चली जाएगी | कल्याणकारी शिव इलाके के लोगों का शोक हरण कर एक नया “अशोक नगर” स्थापित करेगा |

devendra dham tengraha
Devendra Dham Tengraha

 

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