भाजपा ने किया रथ से ‘परिवर्तन’ का शंखनाद

‘परिवर्तन’ के 160 रथों को रवाना करने के साथ एनडीए ने बिहार में अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया। गुरुवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान, रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा तथा हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा प्रमुख जीतनराम मांझी की मौजूदगी में पटना के गांधी मैदान से भाजपा के परिवर्तन रथों को रवाना करते हुए चुनाव का शंखनाद किया। इस अवसर पर एनडीए के साथियों के साथ-साथ भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी अनंत कुमार, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय, केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद व राधामोहन सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर आदि बिहार भाजपा के तमाम दिग्गज मौजूद रहे।

इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की जनता और जनादेश के साथ धोखा किया है। उन्हें वोट मांगने का कोई अधिकार नहीं है। लालू और नीतीश फिर से बिहार में जंगलराज लाना चाहते हैं। अमित शाह ने कहा कि एनडीए बिहार को एक मजबूत सरकार देगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 जुलाई को मुजफ्फरपुर आएंगे और बिहार के विकास की रूपरेखा पेश करेंगे।

बता दें कि भाजपा का बहुचर्चित परिवर्तन रथ अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। सभी रथों में ऑडियो-वीडियो तथा जीपीएस की सुविधा है। इनमें 56 इंच की एलइडी लगी है जिस पर फिल्म भी दिखाई जाएगी। अभी 83 रथ और रवाना किए जाने हैं। बिहार में 243 विधानसभा क्षेत्र हैं इसीलिए रथों की संख्या भी उतनी ही (160+83=243) रखी गई है। भाजपा के रथ प्रत्येक विधानसभा में तीन-तीन राउंड लगाएंगे और हर दिन एक हजार से अधिक सभाएं होंगी। इस तरह सौ दिनों में एक लाख से अधिक सभाओं के आयोजन का लक्ष्य है। कहा जा सकता है कि भाजपा ने अपने तरीके से नीतीश कुमार के घर-घर दस्तक कार्यक्रम का जवाब ढूंढ़ा है।

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ऐसा लगा रहा जाम : दिन बीता हो गई शाम !

चौंकिए नहीं, यह है मधेपुरा ! मधेपुरा के मेन मार्केट का सुभाष चौक | न जाने कितने दिनों से आस-पास के लोग नरक में जी रहे हैं | यातनाएं भोग रहे हैं | सड़क के दोनों ओर पूर्व से नाले बने हैं, जहाँ मच्छरों का खाना और दुर्गन्ध का खजाना है | फिर एक तरफ पाँच फीट गहरा गढ्ढा खोदकर आधी सड़क पर जमा कर दिया है मिट्टी का ढेर बिल्कुल पहाड़ी की तरह | ऊपर से बरसात का मौसम और कछुए की गति से चल रहा नाला निर्माण का काम | अनगिनत वाहनों की संख्या और ऊपर से जनसंख्या वृद्धि का दिशाहीन विस्फोट | इस सबके बावजूद पढ़े-लिखे लोगों द्वारा सड़क चवाने की लत तो दिन दुनी रात चौगुनी बढती जा रही है | शेष बची हुई संकीर्ण सड़क पर नाला निर्माण हेतु गिराए गये बालू, ईट, गिट्टी, छड-तखते | कहीं मिक्सचर मशीन तो कहीं JCB मशीनें |

रात में मुसलाधार बारिश से नाला भर जाता और दिन भर पम्पिंग सेट से उसे सड़क पर बहाया जाता | दुर्गंध भरा बाजार बन सकता है महामारी का शिकार | चाय-पान की दुकानों पर खड़े लोग यह भी बोलते हुए सुने जाते हैं कि बरसात में ऐसे निर्माण कार्य इसलिए भी चलाये जाते हैं कि बहुत कुछ पानी में “बह गया का बिल” भी स्वीकार कर लिया जा सकता है |

फिलहाल रमजान के महीने में चारो ओर पुरे शहर में खुदा ही खुदा है | यहाँ खुदा है , वहाँ खुदा है | जिधर जिस सड़क या गली में जाइए वहाँ खुदा ही खुदा है | सड़क के अंतिम किनारे पर गढ्ढा नहीं खुदा है बल्कि जहाँ जो जितना मैनेज कर लिया वहाँ उतनी जगह छोड़ कर खुदा है |

तुर्रा तो यह है कि प्रोफ़ेसर कॉलनी में सड़क से लगभग तीन फीट ऊँचा नाला बन जाने से दस फीट की सड़क सिकुडकर कहीं-कहीं पाँच फीट रह गयी है , जहाँ एक छोटी कार और सामने से आ रहे रिक्शा या साईकिल तक को क्रॉस करने में कठिनाई होती है | पल-पल भोग रहे इन यातनाओं से शहरवासियों को कौन मुक्ति दिलाएगा जबकि ज़िलापधाधिकारी गोपाल मीणा थर्ड फेज की ट्रेनिंग में मसूरी गये हुए हैं | फिर भी लोगों की आशा भरी नजरें नगर परिषद , जिला-परिषद या जिला के अन्य प्रशासनिक पदाधिकारियों की ओर टिकी हुई हैं कि आज नहीं तो कल . . . . . . !

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