कुमारखंड प्रखंड के सिकियाहा गाँव के साधारण किसान दम्पति शम्भू प्रसाद व संजू देवी के सुपुत्र आदित्य आनन्द ने आई.ए.एस. की परीक्षा में सफल होकर जिले का नाम रोशन किया | तुलसी पब्लिक स्कूल द्वारा झल्लू बाबू सभागार में आनन्द के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें उनके प्रारम्भिक शिक्षक भोला शर्मा उपस्थित थे | भोला शर्मा सरीखे गुरु के गुरु डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा आदित्य आनन्द को सम्मानित किया गया |
Students attending felicitation function at Jhallu Babu Sabhagar, Madhepura.
सभागार में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों एवं शिक्षकों की भीड़ थी | सम्मान समारोह का उद्घाटन करते हुए सशक्त व विकासोन्मुखी जिला पदाधिकारी मो.सोहैल ने कहा कि नियमित व ईमानदार अध्ययन से ही छात्रों को सफलता मिलती है | उन्होंने यह भी कहा कि जिले में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की कमी नहीं है, केवल जरुरत है सबको मिलकर कदाचार पर अंकुश लगाने की | इस अवसर पर डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार भी उपस्थित थे |
वहीँ डॉ. मधेपुरी ने उपस्थित छात्र-छात्राओं एवं गणमान्यों से यही कहा कि जिला पदाधिकारी कदाचार मुक्त परीक्षा के लिए तथा आरक्षी अधीक्षक अपराध मुक्त मधेपुरा के लिए संकल्पित हैं | उन्होंने यह भी कहा कि छात्र नकल छोड़कर पढाई करें तथा जिला प्रशासन को सहयोग करें तो निश्चय ही सफलता उनके कदम चूमेगी | केवल इतना ही ख्याल रहे कि आपकी उड़ान में कभी विराम न हो, बाधाएँ तो आती ही रहेंगी |
इस अवसर पर प्रो.श्यामल किशोर यादव व डॉ.आलोक कुमार ने भी छात्रों को संबोधित किया | आदित्य ने घंटों छात्रों को पढाई के गूढ़ बताये, उनके प्रश्नों के जवाब दिए तथा समस्याओं के समाधान दिए | आनन्द-विकास सरीखे सहयोगियों के बीच तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र ने धन्यवाद ज्ञापित किया |
‘महागठबंधन’ ने आज पटना के गांधी मैदान में स्वाभिमान रैली की। इस रैली में जुटी भीड़ ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार में मुकाबला कांटे का है। मुजफ्फरपुर, गया और सहरसा में प्रधाममंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीन बड़ी रैलियां कीं और चौथी रैली 1 सितम्बर को भागलपुर में होने जा रही है। ऐसे में महागठबंधन के लिए इन रैलियों का जवाब देना और अपनी ताकत दिखाना ‘निहायत’ जरूरी हो गया था। तमाम अन्तर्विरोधों के बावजूद इस रैली में जदयू, राजद, कांग्रेस और सपा का एक मंच पर इकट्ठा होना महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इससे पहले महागठबंधन की मौजूदगी बयानों और मीडिया में थी आज वो जमीन और मंच पर दिखी। महागठबंधन के सभी नेता अपने-अपने ‘अभिमान’ को किनारे रख स्वाभिमान रैली में जुटे और ‘महागठबंधन’ ने वास्तविक आकार लिया।
इसमें कोई दो राय नहीं कि इस रैली का सबसे बड़ा आकर्षण लालू और नीतीश का एक बार फिर एक साथ खड़ा होना था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनके साथ मंच साझा कर इस अवसर को और खास बना दिया। मंच पर समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व शिवपाल सिंह यादव ने किया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी (मीसा, तेजप्रताप और तेजस्वी के साथ), पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, सीपी जोशी तथा शकील अहमद, वरिष्ठ राजद नेता व पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे तथा विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी तथा विधायक दल के नेता सदानंद सिंह सहित महागठबंधन के तमाम नेताओं ने रैली में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
सोनिया गांधी ने जहाँ ये कहा कि बिहार में “नीतीशजी के नेतृत्व में अच्छा काम हुआ है”, वहीं ये कहना भी नहीं भूलीं कि “लालूजी का भी इसमें सराहनीय योगदान रहा है।“ नीतीश ने डीएनए के मुद्दे पर मोदी को घेरने की हर सम्भव कोशिश की और कहा – “बिहार का इतिहास केवल देश का नहीं बल्कि पूरी मानव सभ्यता का इतिहास है और हमारा डीएनए खराब है..?” मोदी के दिए पैकेज को उन्होंने “पुराने पैकेज की रिपैकेजिंग” बताया और ‘जंगलराज’ का जवाब देते हुए कहा कि “भाजपा के दफ्तर से मुख्यंमंत्री की छाती तोड़ने की धमकी दी जाती है और लालू जी का नाम लेकर आप जंगलराज की बात करते हैं। बिहार में जंगलराज नहीं कानून का राज है।“ ‘जंगलराज’ पर लालू से पहले नीतीश का जवाब देना बदले हालात में बदलती राजनीति की बड़ी बानगी है। शरद यादव ने कहा कि “देश को बदलने का काम बिहार से शुरू होता है और इस बार भी ये काम बिहार से ही होगा।“
रैली के अन्तिम वक्ता लालू प्रसाद यादव थे। भाषण के लिए उनके आने पर और पूरे भाषण के दौरान लोगों में जो उमंग और उत्साह था उसने बता दिया कि बिहार में उनका जादू आज भी बरकरार है। उन्होंने अपने अंदाज में कहा – “दो पिछड़ों का बेटा साथ आया तो कहते हैं जंगलराज आ गया..! ये जंगलराज पार्ट – 2 नहीं, मंडलराज पार्ट – 2 है।“ यादव वोट बैंक को अपना बताने से भी वे नहीं चूके और अपनी रौ में कह डाला – “यादवों को जब भैंस नहीं पटक सकी तो नरेन्द्र मोदी क्या पटकेंगे..!“
इस रैली से बिहार का ‘स्वाभिमान’ जितना भी जुड़ा हो महागठबंधन का अस्तित्व और भविष्य बेशक जुड़ा था। लालू और नीतीश के साथ-साथ कांग्रेस को भी इसका एहसास था। ये तीनों अपने-अपने तरीके से अपनी-अपनी ‘साख’ बचाना चाहते थे। कहना पड़ेगा कि इस रैली के बाद इन सबने राहत की सांस ली होगी। अब बारी भाजपा की है। आज महागठबंधन के सारे नेताओं ने जी भर कर नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है। देखना है कि भागलपुर में भाजपा हिसाब कितना चुकता कर पाती है।
1975 से 2001 तक मधेपुरा प्रखंड के प्रथम प्रमुख रहे स्मृतिशेष कपिलदेव प्रसाद मंडल की प्रतिमा का अनावरण प्रखंड कार्यालय परिसर में बुधवार को राष्ट्रीय नेता शरद यादव द्वारा किया गया | इस अवसर पर पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, आई.एम.ए. के अद्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार सहित शहर के गणमान्यों एवं ग्रामीण किसान-मजदूर-नौजवानों की अच्छी खासी उपस्थिति रही |
प्रतिमा अनावरण के बाद राष्ट्रीय अद्यक्ष जदयू शरद यादव ने अपने संबोधन में कहा कि जब तक पंचायती राज का विकास नहीं होगा तब तक भारतीय लोकतंत्र सफल नहीं होगा | पूर्व सांसद डॉ.रवि ने कहा कि आजीवन समाजवादी राह के राही बने रहे कपिलदेव बाबू |
कपिलदेव बाबू को अभिभावक मानने वाले विजय कुमार वर्मा ने कहा कि वे सामाजिक संतुलन कायम रखने में आजीवन निर्भीकता का परिचय देते रहे | पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला ने कहा कि बाढ़ के दिनों में वे खुद कुदाल लेकर ग्रामीणों के साथ नदी का रुख मोड़ने का काम करते रहे |
सभा की अद्यक्षता शिवनारायण और मंच का संचालन मुखिया रामचन्द्र दास ने किया | निर्धन ग्रामीण महिलाओं के बीच साड़ियाँ बाँटने की व्यवस्था उनके पुत्र त्रय यशवंत, बलवंत एवं मनीष ने किया जिसे शरद यादव द्वारा बांटी गई |
मौके पर डॉ. डी.के.सिंह, डॉ.अरुण कुमार, प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, के.बी.क्रांति, मदन सिंह, अमलेश कुमार, गुड्डी देवी, अशोक चौधरी, महेंद्र पटेल, एवं जदयू ज़िलाद्यक्ष सियाराम यादव आदि उपस्थित थे |
18 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरा में ‘बिहार पैकेज’ की घोषणा की। चुनावी ‘सावन’ में एक लाख पैंसठ हजार करोड़ बरसे बिहार पर। अभी ‘सावन’ बीतने ही वाला था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘निश्चय’ कर दो लाख सत्तर हजार करोड़ और बरसा दिये बिहार पर। इस खासमखास ‘सावन’ को शायद ही भूले बिहार। जब मोदी का पैकेज आया तो कहा गया ‘चुनावी रिश्वत’ है… ‘जुमला बाबू’ बहुत बड़ा ‘झांसा’ दे रहे हैं… बिहार की बोली लगाई जा रही है और ना जाने क्या-क्या। अब जो नीतीश ने दो लाख सत्तर हजार करोड़ की ‘बरसात’ की है, उसे क्या कहेंगे – ‘रिश्वत’, ‘झांसा’ या ‘बोली’..? सौ बात की एक बात ये है कि कुछ भी कह लें मोदी और कुछ भी दे दें नीतीश, जनता जानती है कि लक्ष्य दोनों का एक है। ये दोनों जो भी दे रहे हों, जिस भी तरह दे रहे हों, बदले में लेना उन्हें एक ही चीज है और वो है आनेवाले चुनाव में जीत का आंकड़ा। बहरहाल, हम किसी भी तरह जोड़, घटाव, गुणा या भाग करके देख लें, कम हो या ज्यादा बिहार का भला तो तय है। अब इससे क्या फर्क पड़ता है कि कौन दे रहा है और क्यों दे रहा है। महत्वपूर्ण ये है कि मिल बिहार को रहा है।
बहरहाल, 28 अगस्त को नीतीश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस करके ‘व्यक्तिगत चिन्तन’ के आधार पर बिहार के लिए दो लाख सत्तर हजार करोड़ की भविष्य की योजना का प्रारूप सामने रखा। इस विज़न डॉक्यूमेंट को नाम दिया गया है – “नीतीश निश्चय : विकास की गारंटी, विकसित बिहार के सात सूत्र”। ये सात सूत्र हैं – 1. महिलाओं को सरकारी नौकरी में 35% आरक्षण, 2. युवाओं के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, 3. स्वयं सहायता भत्ता जिसके तहत युवाओं को एक साल के नौ महीने के लिए एक-एक हजार रुपये दिये जाएंगे जिसका उपयोग वे फॉर्म भरने, इंटरव्यू के लिए जाने आदि में कर सकते हैं, 4. विश्वविद्यालय तथा कॉलेजों में मुफ्त वाई-फाई की सुविधा, 5. हर घर तक स्वच्छ जल की आपूर्ति, 6. हर गांव को पक्की सड़क और 7. 2016 के बाद पाँच साल में हर घर को मुफ्त बिजली कनेक्शन।
बकौल नीतीश ये पैकेज नहीं कमिटमेंट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ना तो सीएम और ना ही जदयू के नेता के रूप में कोई घोषणा कर रहे हैं। उऩ्हें व्यक्तिगत तौर पर लगता है कि अगले पाँच साल में यही काम होने चाहिएं। अगर उन्हें फिर से मौका मिला तो वे इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाएंगे। साथ ही पुरानी योजनाओं को भी अपडेट करेंगे। हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि इतने पैसे कहाँ से आएंगे।
एक तरीके से नीतीश ने अपना ‘घोषणापत्र’ जारी कर दिया। अच्छी बात है कि इस मामले में वे औरों से आगे निकल गए। लेकिन इस ‘हड़बड़ाहट’ में वे लालू को ‘भूल’ गए। उन्हें ये पता होना चाहिए कि ‘महागठबंधन’ में मिली सौ की सौ सीटें भी वे जीत जाएं तो भी बगैर लालू के उनका ‘विज़न’ जमीन पर नहीं उतर सकता।
स्थानीय राजकीयकृत रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय में अमर स्वतंत्रता सेनानी बाबू रासबिहारी लाल मंडल की 97 वीं पुण्य तिथि सादगीपूर्वक मनाई गई | मुख्य अतिथि के रूप में विधायक प्रो. चंद्रशेखर ने छात्रों एवं गणमान्यों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में महती भूमिका निभाने वाले रासबिहारी लाल मंडल समतामूलक समाज के निर्माता थे | आज़ादी के लिए लड़नेवाले आन्दोलनकारियों को उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया और फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिये |
Students attending Death Anniversary Meets at Ras Bihari Uchh Vidalaya
डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि रासबिहारी बाबू हिन्दी, उर्दू, बंगला, फारसी, अंग्रेजी एवं संस्कृत आदि कई भाषाओं के विद्वान थे | उन दिनों जब मीडिया आज की तरह सशक्त नहीं थी तक उनके मुरहो निवास पर हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू एवं बंगला का समाचार पत्र नियमित रूप से आता था |
डॉ. मधेपुरी ने अन्य बातों की चर्चा करते हुए जोर देकर यह भी कहा कि यदि समाजसुधारक रासबिहारी न हुए होते तो यादव समुदाय आज शूद्रों की कोटि में ही रह गया होता | उन्होंने ही कृषि एवं दुग्ध-उत्पादन को व्यापार बताकर गोप समुदाय को शुद्र से वैश्य बनाने की पुरजोर कोशिश की थी – जबकि आज की तारीख़ में उच्चकोटि के लोग भी शूद्र व दलित बनने के जुगाड़ में लगे दिखते हैं |
अपने संबोधन में डॉ.ऐ.के. मंडल, प्रतिकुलपति डॉ.के.के. मंडल, प्राचार्य श्यामल किशोर यादव एवं विद्वान प्रो. प्रभाष चंद्रा ने उनकी निर्भीकता और ईमानदारी की चर्चाएँ की | कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या रंजना कुमारी तथा मंच संचालन प्राध्यापक राजेन्द्र प्र. यादव ने किया | इस अवसर पर डॉ. आलोक कुमार, प्राण मोहन यादव, डॉ. श्याम सुन्दर यादव, नवीन कुमार, गोपाल आदि मुख्यरूप से मौजूद थे |
सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के राजकीय जयन्ती समारोह- 2015 की अद्यक्षता कर रहे थे मधेपुरा के जिला पदाधिकारी मो.सोहैल | बिहार सरकार के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित केबिनेट मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव और विशेष रूप से उपस्थित राष्ट्रीय नेता शरद यादव सहित विधायक द्वय प्रो.चंद्रशेखर, प्रो.रमेश ऋषिदेव, पार्षद विजय वर्मा, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्र. निराला एवं मणिन्द्र कुमार मंडल आदि गणमान्यों से डॉ.मधेपुरी ने उद्गार व्यक्त करने के क्रम में कहा कि विगत वर्षों में विश्व में केवल दो ही नाम होठों पर गूंजते रहे – एक मंडल और दूसरा मंडेला |
मंडेला को तो भारतरत्न से सम्मानित कर दिया गया लेकिन मंडल को भारतरत्न अबतक नहीं दिया गया है जिसके लिए डॉ.मधेपुरी द्वारा विगत कई वर्षों से लगातार आवाज उठाई जा रही है |
इस बार भी डॉ.मधेपुरी ने राष्ट्रीय अद्यक्ष जदयू शरद यादव, मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव आदि के समक्ष मंच से कहा कि मंडल आयोग के अद्यक्ष बी.पी.मंडल 01 वर्ष 8 महीना 22 दिनों तक घड़ी की सूई की तरह बिना रुके व बिना विश्राम किये कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से बंगाल की खाड़ी तक चलते रहे तथा भिन्न-भिन्न संस्थानों में जा-जाकर उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णों के 3743 जातियों के सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े लोगों को रेखांकित किया और उन्हें आरक्षण दिए जाने के लिए सिफारिशें की | सम्पूर्ण भारत के लिए ऐसी सम्यक दृष्टि रखने वाले बी.पी. मंडल को भारतरत्न दिए जाने की मांग बिलकुल जायज है |
यूँ तो डॉ.मधेपुरी समाजवादी चिन्तक राम मनोहर लोहिया, भूपेन्द्र नारायण मंडल व कर्पूरी ठाकुर सहित होमी जहाँगीर भाभा को भी भारतरत्न दिए जाने के लिए आवाज उठाते रहे हैं |
हार्दिक पटेल… महज 22 साल का यह युवक गुजरात समेत पूरे देश के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। गुजराती समाज और राजनीति में खासा महत्व रखने वाला पटेल समुदाय आज इस युवक के पीछे खड़ा है। पटेल समुदाय के लिए आरक्षण की मांग कर रहे इस युवक ने 25 अगस्त को जबरदस्त रैली कर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तमाम सुर्खियां अपने नाम कर ली हैं। गुजरात सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक की नींद उड़ गई दिखती है। चंद दिनों में इस शख्स़ ने हैरत में डाल देनेवाली चर्चा हासिल की है… जैसे रातोंरात चमत्कार हो गया हो कोई। हार्दिक के आन्दोलन का असर इतना व्यापक और गहरा है कि भारतीय राजनीति के तमाम दिग्गज विवश हैं अपनी राय देने को। आज या तो पटेल समुदाय को आरक्षण का समर्थन किया जा सकता है या फिर विरोध… तटस्थ रहने के सारे मार्ग इस युवक ने बंद कर दिये हों जैसे।
हालात ऐसे हैं कि इस मुद्दे पर अब एक दल में भी दो तरह की राय दिखने लगी है। जी हाँ, लगता है कि हार्दिक पटेल ने बिहार की राजनीति में भी हाहाकार मचाने की ठान ली है..! कारण ये कि पटेल समुदाय को आरक्षण देने के मुद्दे पर जदयू के दो शीर्ष नेता शरद यादव और नीतीश कुमार की राय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहाँ हार्दिक पटेल के आन्दोलन का समर्थन किया है वहीं दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव पटेल समुदाय के आरक्षण के पक्ष में नहीं हैं। नीतीश एक ओर हार्दिक पटेल को महाक्रांति रैली के लिए बधाई देते हुए उनकी मांग को जायज बताते हैं और तर्क देते हैं कि दूसरे राज्यों में पटेल समुदाय के समकक्ष समुदायों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है। वहीं शरद की राय में पटेल समुदाय सक्षम और सम्पन्न है तथा उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। जब उनसे कहा गया कि नीतीश इस आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि नीतीश की बात नीतीश जानें। 26 अगस्त को मधेपुरा में प्रेस से बात करते हुए उन्होंने दो टूक अपनी बात कही। उनके अनुसार हार्दिक के नेतृत्व में हंगामा कर यह समुदाय अपनी बात मनवाना चाहता है जो सही नहीं है।
भले ही इस मुद्दे का बिहार की राजनीति से सीधे तौर पर कोई लेना-देना ना हो, भले ही ये महज शरद और नीतीश का सैद्धांतिक मतभेद भर हो लेकिन बिहार के आसन्न चुनाव को देखते हुए जदयू के इन दो शीर्ष नेताओं का इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकदम दो छोर पर खड़ा होना हल्के में लेने वाली बात नहीं है। खास तौर पर तब तो हर्गिज नहीं जब हार्दिक गुजरात में खड़े होकर पटेल समुदाय की मौजूदगी पूरे देश में बता रहे हों और यह विशेष तौर पर चिह्नित कर रहे हों कि बिहार में नीतीश कुमार हमारे हैं ।
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग आयोग-2 यानी मंडल आयोग के अद्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बी.पी.मंडल यानी विन्धेश्वरी प्रसाद मंडल एक ऐसा नाम है जो मधेपुरा की समाजवादी धरती के सम्मान को शिखर तक पहुंचा दिया | उसी सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के मंडल कमीशन की रिपोर्ट को वी.पी.सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में संसद के पटल पर रखवाने, बहस कराने और उसे लागू कराने में जदयू के राष्ट्रीय अद्यक्ष शरद यादव ने कितनी कुर्वानियाँ दी यह सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं |
25 अगस्त 1992 को मंडल के समाधि-स्थल से मंडल रथ पर सवार होकर यही शरद लगभग तीन महीने तक बिना रुके, बिना थके और बिना झुके- देश के छोटे-बड़े किसी-किसी शहर में छिटपुट वारदातों को झेलते हुए 07 नवम्बर 1992 को दिल्ली पहुँचकर सबों को मंडल आरक्षण का गूढ़ तत्व समझाते हैं | रास्ते से लेकर घर तक उन्हें कितनी यातनाएं सहनी पड़ी यह किसी से छिपी नहीं है | आरक्षण की आग में यह शरद केवल झुलसकर ही निकल गया यही क्या कम है | उनके शरीर का पोर-पोर तोड़ दिया गया – ये सारी बातें डॉ.मधेपुरी ने मुरहो में आयोजित बी.पी.मंडल राजकीय जयन्ती समारोह में मंडल मसीहा शरद यादव के बाबत कही |
डॉ. मधेपुरी ने यह भी कहा – “भारत में प्रतिदिन लाखों बच्चे जन्म ग्रहण करते हैं, लेकिन कुछ ही बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने पौरुष-पुरुषार्थ एवं संकल्प व् ईमानदारी की बदौलत कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि लोग यह जानने को उत्सुक हो जाते हैं कि वह बच्चा कहाँ जन्म लिया और बड़ा होकर समाज और देश को क्या दिया ? ऐसे ही बच्चों में एक हुए – बी.पी.मंडल जिनका नाम लेते ही श्रद्धा से सिर झुक जाता है | कालान्तर में वही मंडल रिपोर्ट तैयार करने में 01 वर्ष 08 महीना 22 दिनों तक घड़ी की सुई की तरह चलते रहे, कभी रुके नहीं | कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घूम-घूम कर उन्होंने सभी धर्मों एवं सभी वर्णो के 3743 जातियों को रेखांकित किया जो सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े थे | उन्हें विशेष अवसर दिए जाने की सिफारिश कर 31 दिसम्बर 1980 को तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी के समक्ष समर्पित कर मधेपुरा आ गये |”
नगरपालिका के तत्कालीन वाईसचेयरमेन डॉ. मधेपुरी द्वारा अद्यक्ष की अनुपस्थिति में भव्य नागरिक अभिनन्दन समारोह की अद्यक्षता करने से सकुचाने पर बी.पी.मंडल ने उनसे यही कहा था – “जब मैं आनरेरी मजिस्ट्रेट हुआ करता था तो एक बार म्युनिसिपल एक्ट पढने का मौका मिला, जिसमें लिखा है- Even in the temporary absence of the chairman, vice-chairman is entitled to discharge all the duties of the chairman .” तभी डॉ. मधेपुरी ने उस बी.पी.मंडल-अभिनन्दन समारोह की अद्यक्षता की |
इस समारोह के अद्यक्ष जिला पदाधिकारी मो.सोहैल ने बिहार सरकार के प्रतिनिधि मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, राष्ट्रीय अद्यक्ष जदयू शरद यादव सहित विधायक, पार्षद एवं गण्यमान्य का स्वागत किया | सबों ने मंडल जी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया | सर्व धर्म प्रार्थना की गई |
मंडल मसीहा शरद यादव ने अपनी कबीर वाणी का उद्घोष करते हुए कहा कि आगे जो कोई सिविल सर्विसेज में चुनकर जिला का नाम रोशन करेगा उसे यहाँ बुलाकर सम्मानित करना ही मंडल की सच्ची श्रद्धांजलि होगी | परीक्षा में नक़ल बन्द करो तभी देश और समाज आगे बढेगा वरना शरद यादव को यहाँ बुलाने का क्या फायदा !
बिहार सरकार के भूमि सुधार व विधि मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, विधायक रमेश ऋषिदेव, प्रो.चंद्रशेखर, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, पूर्व विधायक मणीन्द्र कुमार मंडल, परमेश्वरी प्र.निराला, डॉ.ए.के.मंडल, पूर्व मुखिया सुभाष चन्द्र यादव, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.आलोक कुमार, मुखिया नीलम देवी आदि ने बी.पी.मंडल के विशाल व्यक्तित्व की चर्चा की और गागर में सागर भरने का प्रयास किया |
People attending B.P.Mandal Jayanti Samaroh
अंत में अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला द्वारा पुलिस कप्तान कुमार आशीष सहित जिला एवं अनुमंडल के सभी उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभा समाप्ति की घोषणा की गई |
जदयू के राष्ट्रीय अद्यक्ष शरद यादव रविवार की शाम में मधेपुरा पहुँचे | स्वाभिमान रैली की तैयारी को लेकर वे 27 अगस्त तक कोसी के भ्रमण पर रहेंगे | सोमवार को सहरसा में और मंगलवार को मधेपुरा में रहेंगे शरद यादव | बी.पी.मंडल की राजकीय जयन्ती समारोह में भाग लेने वे मुरहो जायेंगे | बुधवार को सुपौल जिला का दौरा करेंगे |
इस दौरान कई लंबित योजनाओं का शिलान्यास करेंगे और कुछ जो पूरी हो चुकी है उसका उद्घाटन भी करेंगे | वे इस इलाके में 27 अगस्त तक रहकर 30 अगस्त को पटना गाँधी मैदान में होने वाली महागठबंधन की महारैली में सर्वाधिक भागीदारी सुनिश्चित करेंगे |
मंडल मसीहा शरद यादव को अपने मधेपुरा निवास से निकलकर मुरहो मंडल जयन्ती में दस मिनट बिलम्ब से पहुँचने का कारण यह हुआ कि वित्तरहित शिक्षकों ने उनके मेन गेट को जाम कर दिया था |
कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अम्बिका सभागार में तुलसी जयन्ती का एक दिवसीय समारोह आयोजित किया गया, जिसकी अद्यक्षता तिलका मांझी वि.वि. में प्रतिकुलपति रह चुके डॉ.के.के.मंडल ने किया | डॉ.मंडल ने अपने अद्यक्षीय भाषण में तुलसीकृत रामायण के सुन्दरकाण्ड को सुन्दरकाण्ड क्यों कहा जाता है – की सारगर्भित व्याख्या कर सुधि श्रोताओं का मन मोह लिया |
इस अवसर पर समारोह का उद्घाटन करते हुए भू.ना.मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद तथा दर्जनों पुस्तक के रचनाकार साहित्यकार डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने तुलसीकृत रामचरितमानस सहित विनय पत्रिका, कवितावली, दोहावली व अन्य ग्रंथों की पंक्तियों को करीने से उद्धृत करते हुए उपस्थित साहित्यनुरागियों एवं स्कूली बच्चों के बीच तथ्यों को इस तरह परोसा कि लगा जैसे तुलसी दास आज भी प्रासंगिक हैं | डॉ.रवि ने रामचरितमानस को समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा मनोविज्ञान सहित जीवन दर्शन का भंडार सिद्ध करते हुए दर्शकों के बीच देर तक जैसे अमृत वर्षाते रहे और तालियाँ बटोरते रहे |
Tulsi Das Jayanti at Madhepura
सम्मेलन के सचिव डॉ.मधेपुरी ने तुलसी साहित्य के सहारे भौतिकी में “दर्पण” की परिभाषा समझाने के अदभुत इल्म से श्रोताओं को हैरत में डाल दिया | डॉ. मधेपुरी द्वारा स्कूली बच्चों के बीच “तुलसी आज भी प्रासंगिक है” विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित कराया गया, जिसमें चयनित तीन प्रतिभागियों आस्था प्रिया, अदिति परमार एवं आर्चि परमार को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में रामचरितमानस, विनय पत्रिका आदि क्रमशः उद्घाटनकर्ता, अद्यक्ष एवं सचिव द्वारा दिया गया | इस अवसर पर विचार व्यक्त करने वालों में प्रमुख हैं – माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव रहे रघुनाथ यादव, अवकाशप्राप्त शिक्षक प्राण मोहन यादव एवं सियाराम यादव मयंक आदि |
द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का संचालन उपसचिव उल्लास मुख़र्जी द्वारा किया गया | देर शाम तक चले गोष्ठी में अपनी प्रतिनिधि कविताओं के साथ सस्वर पाठ किया- सुकवि सियाराम यादव मयंक ने | साथ ही राजू भैया, उल्लाष मुखर्जी, डॉ.मधेपुरी, राकेश कुमार द्विजराज आदि ने भी कविताओं का पाठ किया | अन्त में उपसचिव उल्लाष मुखर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया |