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मधेपुरा के कर्पूरी मेडिकल कॉलेज में लग रहा एक और ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना महामारी से परेशान भारत सांस के लिए ऑक्सीजन की किल्लत से अब तक निपटने में ही लगा है। विदेशों से वायुयान द्वारा भी ऑक्सीजन भारत आ रहा है। कई अस्पतालों में ऑक्सीजन के बिना लोगों की मौतें हो रही है।

मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पूर्व से ऑक्सीजन का एक छोटा प्लांट था जिससे लगभग 20 सिलेंडर की आपूर्ति हो जाती थी। शेष के लिए मुजफ्फरपुर से ऑक्सीजन मंगवाने हेतु जिलाधिकारी श्याम बिहारी मीणा को बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। इस कठिनाई से उबरने के लिए यहां एक और ऑक्सीजन प्लांट बनने जा रहा है जिससे लगभग 50 सिलेंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति होती रहेगी।

चलते-चलते यह भी बता दें कि ऑक्सीजन संकट दूर करने हेतु जिला प्रशासन द्वारा प्लांट निर्माण हेतु काम शुरू कर दिया गया है। डीएम मीणा ने इस काम के लिए डीडीसी विनोद कुमार सिंह को वहां तैनात कर दिया है जिनके द्वारा अस्पताल परिसर में दिन-रात चल रहे प्लांट निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग की जा रही है। प्लांट के लगते ही कोसी-सीमांचल के लोगों को कोरोना से लड़ने के लिए तत्काल ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी।

 

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ऑक्सीजन ‘त्रिदेव’

जबकि सारा भारत कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा है तब भी कुछ लोग मुनाफाखोरों की भूमिका में कोरोना पीड़ितों की सांसे बंद करने में लगे हैं।

त्रिदेव के रूप में थल, जल और नभ के रास्ते से ऑक्सीजन टैंकरों की ढुलाई और विदेशों से भारत के लिए जांच उपकरण आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वायु एवं जल मार्ग से बड़े-बड़े जहाजों में  आवश्यक सारे सामान बंदरगाहों एवं हवाई अड्डों पर उतारे जा रहे हैं और उन्हें थल सेना की मदद से ट्रेन व ट्रक द्वारा कोविड अस्पतालों को उपलब्ध कराये जा रहे हैं तथा मरीजों तक पहुंचाए जा रहे हैं।

जानिए कि देश कोरोना की तीसरी लहर से भयाक्रांत है फिर भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जहां विवाह के अवसर पर भी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लापरवाही की तो इंतेहा हो रही है। बारात में इतनी भीड़ कि तिल रखने की जगह तक नहीं। ऊपर से भोजपुरी गानों का तुर्रा। शादी भी तो विधायक बाबू की लाडली बेटी की है ना,जो स्वयं प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने के लिए मशहूर हैं।

लेकिन, ऐसे कुछ कोरोना वारियर्स तो अभी भी धरती पर हैं जिन्होंने प्राण की बाजी लगाकर मानवता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार हैं। ऐसे कोरोना वरियर्स का संकल्प है-

घर-घर पहुंचेगी ऑक्सीजन

जीतेंगे हम सांसों की जंग।

 

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कोरोना पीड़ितों के लिए 7 करोड़ जुटाने में लगे हैं विराट और अनुष्का

कोरोना काल में मानवता की रक्षा के लिए सभी देशों ने भारत की मदद करनी शुरू की तो भारतीय खिलाड़ी, फिल्म सितारे और उद्योगपति भी मदद को सामने आने लगे। जब तेंदुलकर ने एक करोड़ की घोषणा की तो लगे हाथ विराट और अनुष्का ने दो करोड़ रुपए दान किए और 7 दिनों में 7 करोड रुपए जुटाने की योजना भी बना डाली है। कैंपेन की शुरुआत करते ही 2.5 करोड़ से अधिक राशि जमा हो गई।

बता दें कि 2 सप्ताह पहले भारत में ऑक्सीजन से लेकर वैक्सीन तक की डिमांड जीरो थी और आज 55 गुना बढ़ गई है। यही कारण है कि ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय अपने परिजनों को ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजने में लगे हैं। भारत में ऑक्सीजन की जबरदस्त किल्लत के कारण एनआरआई विदेशों से अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का इंतजाम कर रहे हैं। कईयों के माता-पिता भारत में अकेले हैं और वे चाहकर भी उन तक नहीं पहुंच सकते हैं।

जानिए कि कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के लिए भारत सरकार ने फिलहाल मेडिकल इक्विपमेंट पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है, लेकिन एक घर के लिए सिर्फ दो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर को आयात करने की इजाजत दी है।

चलते-चलते यह भी कि भारत की राजनीतिक विपक्षी पार्टियों ने कोरोना की तीसरी लहर को रोकने हेतु जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दे रही है। साथ ही यह भी कि कोरोना के सभी म्यूटेशन पर जल्द से जल्द सभी उपलब्ध वैक्सीन का टेस्ट अविलंब करने की प्रक्रिया आरंभ की जाए।

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कोरोना के कारण माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों का चाइल्ड केयर रखेगा ख्याल

बिहार सरकार के कल्याण विभाग के निदेशक-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने सभी जिले के जिलाधिकारियों को कोविड महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा हेतु आदेश जारी किया है।

नीतीश सरकार के समाज कल्याण विभाग ने कोरोना महामारी की दूसरी लहर से उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर बेहतर स्वास्थ सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु गंभीरता दिखाई है। साथ ही कल्याण विभाग को कहा गया है कि वंचित समूहों को जिला स्तर पर पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु तैयार रहें। कोरोना संक्रमण की स्थिति में यदि कोई बच्चा अनाथ होता है तो प्रभावित बालक और बालिका को अविलंब ‘चाइल्ड केयर होम’ में रखने हेतु जरूरी व्यवस्था की जाए।

बता दें कि सरकारी स्तर पर जहाँ ऐसी परिस्थितियों में ऐसे अनाथ बच्चों के ट्रैफिकिंग में वृद्धि होने की आशंका पर नियमित अनुश्रवण की आवश्यकता जताई गई है वहीं कोरोना संक्रमित माता-पिता की संतान को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने वाली ‘छत्रछाया’ और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने वाले ‘प्रांगण’ जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं देश के प्रत्येक राज्य के प्रायः जिलों में क्रियाशील हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि आस-पास के लोग भी ऐसे परिवार से दूरी बना लेते हैं। इस प्रकार की स्वयंसेवी संस्थाओं में जितने भी कोरोना वरियर्स समर्पित होकर मानवता की सेवा में लगे हुए हैं, उनके जज्बे को समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी  सैल्यूट करते हैं तथा कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करने हेतु अनुरोध करते हैं।

 

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मधेपुरा में कवींद्र रवींद्र की 161वीं जयंती मनी

आज 7 मई का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है जिस दिन जन्म ग्रहण करने वालों में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का भी जन्म हुआ था। यह वही शख्स है जिन्हें 1913 में प्रथम भारतीय के रूप में नोबेल पुरस्कार मिला था। यह वही शख्स है जिन्होंने 2 देशों भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान की रचना की है। भारत का राष्ट्रगान जन गण मन… और बांग्लादेश का आमार सोनार बांग्ला..  तो संपूर्णता में उनकी ही रचनाएं हैं। गुरुदेव ने अपने जीवन में 2200 से अधिक गीतों की रचनाएं की है।

वैसे युगपुरुष कवींद्र रवींद्र की 161वीं जयंती कौशकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कोरोना की दूसरी लहर के बीच अपने निवास वृंदावन में ऑनलाइन मनाई है। विश्व विख्यात कवि साहित्यकार एवं दार्शनिक युग द्रष्टा की जयंती पर डॉ.मधेपुरी ने छात्रों एवं शिक्षकों से गुरुदेव के भावों को उद्धृत करते हुए बस इतना ही कहा-

महाविद्यालय और विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण का कारखाना है और सारे के सारे शिक्षक उन्हें बनाने वाले कारीगर हैं।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि इस कोरोना काल में सभी लोग कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें और सरकार तथा जिला प्रशासन को अनुशासित होकर सहयोग करें ताकि कोरोना की तीसरी लहर को रोका जा सके।

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कोरोना की तीसरी लहर की ओर बढ़ता भारत

भारत में पहली, दूसरी और अब तीसरी लहर… कब तक चलेगा यह कोरोना का कहर ! सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी लहर पर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि जब भारत कोरोना की दूसरी लहर नहीं संभाल पा रहा है तो तीसरी लहर कैसे संभालेगा ?

बता दें कि वैज्ञानिकों ने उद्घोषणा की है कि प्रथम लहर में 10 से 14 दिनों का समय मिलता था और इसमें प्राय: 45 से ऊपर के बुजुर्गों को ज्यादातर अपने गिरफ्त में लेता रहा करोना। दूसरी लहर में कोरोना ने 5 से 7 दिनों में प्रायः युवाओं को अपना शिकार बनाने लगा है।

अब कोरोना की तीसरी लहरा आने ही वाली है। वह लहर नहीं…. सुनामी होगी ! वैज्ञानिकों के अनुसार इस तीसरी लहर में कोरोना द्वारा प्राय: बच्चों को ही शिकार बनाया जाएगा। बकौल वैज्ञानिक इसमें कोरोना द्वारा 2 दिनों में ही बच्चों को गंभीर हालत में पहुंचा दिया जाएगा और डॉक्टरों को इलाज करने का समय तक नहीं मिलेगा। दो से तीन दिनों में मरीज को आईसीयू में पहुंचा देगी यह तीसरी लहर। कुछ-कुछ देश तो तीसरी लहर की तैयारी के तहत बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार करने में भी जुट गए हैं।

समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विनम्र अनुरोध करते हुए देशवासियों से यही कहा कि कोरोना की दूसरी लहर तो जारी है और आगे तीसरी की बारी है। अभी भी देशवासी कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों को लेकर बिल्कुल लापरवाह है। सरकार और जिला प्रशासन को जैसा सहयोग मिलना चाहिए वैसा नहीं मिल पा रहा है। जानिए कि कोरोना वायरस अब तेजी से अपना व्यवहार बदलने लगा है। तीसरी लहर में अधिक वेरिएंट होगा और कौन वैरीएंट किसे कब दबोचेगा, उसकी जानकारी किसी को नहीं होगी।

चलते-चलते यह भी बता दे कि भारत के लोग अब तक गलती पर गलती करते जा रहे हैं और इन्हीं गलतियों के कारण हम तीसरी लहर को भी आमंत्रित करने जा रहे हैं। जिस-जिस देश के लोगों ने गलती नहीं की उन्हें कोरोना ने माफ भी कर दिया है।

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भारतरत्न डाॅ.कलाम के अभिन्न मित्र रक्षा वैज्ञानिक डॉ.मानस बिहारी वर्मा नहीं रहे

बिहार के रहने वाले पद्मश्री डॉ.मानस बिहारी वर्मा 35 वर्षों तक DRDO में एक वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे। वे लंबे समय तक मिसाइल मैन डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम किए। वे एयरक्राफ्ट ‘तेजस’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी थे । भारतीय वायु सेना में तेजस का योगदान अविस्मरणीय है और रहेगा।

उन्हें दर्जनों पुरस्कार से नवाजा गया। साइंटिस्ट ऑफ द ईयर, टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड…. आदि के संग-संग पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया। वे रिटायर्ड करने के बाद से बिहार के दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के छोटे से पैतृक गांव बाऊर में रह रहे थे। पिताश्री ए.के.एल दास व माताश्री यशोदा के घर 29 जुलाई 1943 को जन्मे ऋषि (बचपन का नाम) सहित तीन भाई व चार बहनें हैं। बिहार को अपनी कर्मभूमि बनाकर बच्चों के प्रायोगिक ज्ञान को विकसित करने हेतु कई संस्थाओं का निर्माण भी उन्होंने किया।

अंतिम दिनों में वे दरभंगा-लहेरिया सराय में अपनी बहन के घर में रहने लगे। वहीं 78 वर्ष की उम्र में उन्होंने 3 मई (सोमवार) की देर रात अंतिम सांस ली। समस्त भारत एवं विदेशों में उनके चाहने वालों के बीच उनके निधन से शोक की लहर दौड़ गई है। चारों तरफ लोग उनकी आत्मा की चिर शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।

यहां तक कि मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार एवं डॉ.कलाम के अत्यंत करीबी रहे भौतिकी के प्रोफेसर डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने उस ऋषि तुल्य वैज्ञानिक मानस बिहारी के प्रति शोक व्यक्त करते हुए कहा- “आज 2005 के दिसंबर महीने का अंतिम सप्ताह मेरी नजर के सामने से गुजरने लगा है। महामहिम राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के बिहार आगमन को लेकर उनके साथ दसकों तक एक लैब में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ.अरुण कुमार तिवारी का फोन आता है मुझे। डॉ.तिवारी साहब मुझसे कहते हैं…. मधेपुरी साहब आपको दरभंगा नजदीक है या पटना….. महामहिम को 30 दिसंबर को दरभंगा में उद्घाटन कार्यक्रम है, साथ ही उन्हें डॉ.मानस बिहारी वर्मा साहब से भी मिलना है…. चाहें तो आप वहीं आकर महामहिम से मिल लें या फिर पटना में राजभवन, एसके मेमोरियल हॉल, महावीर कैंसर संस्थान या वापस दिल्ली जाते समय रात में हवाई अड्डे पर भी मिल सकते हैं…. मिला तो रात के लगभग 9:00 बजे पटना हवाई अड्डे के विशाल प्रसाल में जहां महामहिम की गरिमामय उपस्थिति का आलोक पूरे परिवेश में फैला हुआ था। वहां मौजूद थे महामहिम के साथ उनके प्रिय शिष्य व सहयोगी डॉ.अरुण तिवारी, वरुण मित्रा और मैं। बस एक शख्स की कमी महसूस हुई मुझे…. और वे थे डॉ.मानस बिहारी वर्मा।

 

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कोरोना वायरस आया, गिद्धों को साथ लाया

कोरोना काल में इंसानों के नाम पर बड़े-बड़े गिद्धों का आगमन हो गया है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जहां सारा देश चुनौतियां को चित करने में लगा है वहीं पूरे देश में कोरोना-प्राणरक्षक दवाइयों के निर्माण के नाम पर नकली दवा फैक्ट्रियाँ हर गली में काम करने लगी हैं।

सारा देश यह तमाशा देख रहा है कि जो जहां है वहीं पर लूट का बाजार गर्म कर रहा है। एंबुलेंस वाले भागलपुर से पटना तक कोरोना मरीजों को पहुंचाने के लिए 40000 तक ऐंठ लेता है। रेमडेसीवियर जैसी दवा के नाम पर 10 गुना ऑनलाइन पेमेंट लेकर लुटेरों का फोन बंद हो जाता है। वही हाल ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर लूटने वालों का है, जो आधा भरा ऑक्सीजन 10 गुने दाम तक में बेच लेता है, परंतु सरकार अब तक कोई ऐसा कानून नहीं बना पाई है जिससे लुटेरों में दहशत पैदा हो सके। अब तो वैक्सीन भी ब्लैक में मिलने के रास्ते साफ नजर आने लगे हैं। हॉस्पिटल में बेड मिलने से लेकर श्मशान में दफनाने तक में दलालों और लुटेरों का ही चारों ओर बोलबाला है।

फिर भी कोरोना कर्मवीरों की कमी नहीं जो अपना सब कुछ न्योछावर कर कोरोना मरीजों की जान बचाने में लगे हैं। उन कर्मवीरों को सारा देश सलाम करता है और उन लुटेरों पर अंकुश लगाने हेतु देश के सारे रहनुमाओं से आह्वान करता है।

अंत में बकौल समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, रावण की तरह कोरोनावायरस भी अपने रूपों को बदलता रहता है। मौजूदा नया कोरोना वेरिएंट 15 गुना ज्यादा खतरनाक है। दो से तीन दिनों में ही मरीज को संक्रमित कर मौत के घाट उतार देता है। कई वेरिएंट तो हजार गुना खतरनाक होता है। ये डॉक्टरों को इलाज तक का समय नहीं देता है। इसलिए उन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें और प्रशासन को सहयोग दें।

 

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लॉकडाउन में बच्चे कभी ना होवें डाउन, एकलव्य की तरह स्वाध्याय में लगे रहें- डॉ.मधेपुरी

विगत 2020 से आज तक बाल विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में कोरोना के चलते ताले लटकते रहे। बीच-बीच में बड़े-बड़े शहरों में या तो लाॅकडाउन या सेमी-लॉकडाउन लगता रहा। इस अवधि में कहीं-कहीं ऑनलाइन क्लासेज भी होते रहे।

परंतु, कोरोना की दूसरी लहर ने तो स्कूल के अधिकांश शिक्षकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। फलस्वरूप ऑनलाइन क्लासेज भी आधा-अधूरा ही चल पाता है।

भला क्यों नहीं मजदूर दिवस के दिन तो विश्व में 1 दिन में 9 लाख कोरोना संक्रमितों की बढ़ोतरी के साथ कोरोना पीड़ितों का वैश्विक आंकड़ा 15 करोड़ के पार पहुंच गया और लगातार हर दूसरे दिन 15,000 से अधिक पीड़ितों की जानें भी जाती रही। फिलहाल सभी स्कूल-कॉलेजों को 31 मई तक पुनः बंद कर दिए गए हैं।

फिलहाल जो भी छात्र-छात्राएं घर में रह रहे हैं, वे कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करते रहें और “Do Yourself” को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर स्वाध्याय को अपनाएं और पढ़ाई से सदैव जुड़े रहें।

यह भी कि घर बैठे सभी छात्र-छात्राएं शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित स्वंय एवं स्वंय प्रभा प्लेटफार्म के जरिए भी पढ़ाई करें। बच्चे “अटल इन्नोवेशन मिशन” के तहत विभिन्न प्रकार के नि:शुल्क ऑनलाइन कोर्सेज की पढ़ाई भी करें। बकौल डॉ.मधेपुरी नौ एवं दस के छात्र किसी भी विषय की पढ़ाई जारी रखने हेतु भारत सरकार के वेबसाइट पर खोजी बनकर एक नहीं अनेक ऑनलाइन कोर्सेज का फायदा उठा सकते हैं। अंत में शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बच्चों को यही सलाह दी है कि आप टीवी एवं मोबाइल से अनावश्यक रिश्ता ना बनाएं। एकलव्य की तरह स्वाध्याय को अपनाएं। शाम होते ही फ्रेश होकर पढ़ने बैठ जाएं। सवेरे उठें। फ्रेश होकर कुछ व्यायाम कर लें। पुनः स्वाध्याय में लग जाएं। घर के बड़े-बुजुर्ग से सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखें और कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करते रहें।

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पश्चिम बंगाल में जीत हुई तृणमूल व बीजेपी की और हार हुई सीपीएम व कांग्रेस की

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पूर्व और बाद में भी हिंसा का तांडव देश देखता रह गया। चुनाव आयोग तक को न्यायालय ने दोषी करार कर दिया। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में पीएम और सीएम से लेकर गृह मंत्री तक की सभाओं व रोडशोज में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती हुई दुनिया देखती रही। देश के सभी न्यायमूर्तिगण भी देखते रह गए। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मुंह खोला।

कुल 292 विधानसभा वाले बंगाल विधानसभा की सभी सीटों के रिजल्ट दे दिए गए। ममता बनर्जी का तृणमूल 213 सीटों पर और बीजेपी 77 सीटों पर विजयी हुई। अन्य के खाते में 2 सीटें गई।

बता दें कि इस चुनाव में इन्हीं दोनों मुख्य पार्टियों टीएमसी व बीजेपी की जीत हुई। जीत इस मायने में कि तृणमूल कांग्रेस एंटीइंकम्वेंसी को पीछे छोड़ एक जोड़ा सीटों पर अपना जोड़ा फूल खिलाया, वहीं बीजेपी ने 3 सीटों से चलकर 74 अधिक सीटों पर कमल खिलाने में सफलता पाई। यदि इस चुनाव में हार हुई है तो केवल इन दो पार्टियों- सीपीएम और इंडियन नेशनल कांग्रेस की। ये दोनों पार्टियां तो पतन की अंधेरी खाई में गिर गई पश्चिम बंगाल में। भला इतने लंबे अर्से तक पश्चिम बंगाल और पूरे देश में राज करने वाला सीपीएम और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलना ही तो इनकी शर्मनाक हार है।

चलते-चलते महामहिम डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी व साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने पश्चिम बंगाल के रिजल्ट पर यही कहा कि कलाम साहब तो बराबर यही कहते रहे कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को दो प्रमुख दलों में एकाकार होकर चुनाव में उतरना चाहिए, जिसमें एक ओर कर्म पर आधारित सभी पार्टियां हो तो दूसरी ओर धर्म पर। यदि ऐसा हुआ होता तो सीपीएम और कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा नहीं होती।

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