समाप्त हो मृत्युदंड : कलाम ने विधि आयोग को भेजी अपनी राय

मृत्युदंड समाप्त करने के बारे में विधि आयोग को भेजी गई अपनी राय में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि हम सभी ईश्वर की कृति हैं और हमें किसी भी आधार पर किसी की जान लेने का हक नहीं है। उन्होंने इस सजा का स्पष्ट विरोध किया है। हालांकि विधि आयोग को अब तक मिली करीब 400 लोगों की राय में ज्यादातर लोग मृत्युदंड बनाए रखने के पक्ष में हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अलावा राय भेजने वाले विशिष्ट लोगों में डीएमके सांसद कनीमुई भी शामिल हैं।

बता दें कि विधि आयोग मृत्युदंड पर विचार कर रहा है। इसी संदर्भ में आयोग ने पिछले वर्ष परामर्श पत्र जारी कर लोगों से मृत्युदंड पर राय मांगी थी। भले ही अब तक मिली राय में ज्यादातर लोग इसे बनाए रखने के पक्ष में हों लेकिन पूर्व राष्ट्रपति का अपनी राय में मृत्युदंड का विरोध करना अलग महत्व रखता है। उन्होंने अपनी किताब टर्निंग प्वाइंट का हवाला देते हुए उन क्षणों का जिक्र किया है जब राष्ट्रपति के तौर पर उनके सामने मृत्युदंड की सजा पुष्टि के लिए आती थी। कलाम के अनुसार उनके लिए यह काम सबसे ज्यादा मुश्किल होता था। उनका कहना है कि जब उन्होंने मामलों को अपराध की गंभीरता तथा अपराधी के सामाजिक और आर्थिक पहलू के नजरिये से खंगाला तो पाया कि मृत्युदंड की पुष्टि के लिए आए लगभग सारे मामलों मे सामाजिक और आर्थिक पक्षपात था।

उम्मीद की जा सकती है कि कलाम के कद के विचारक व्यक्तित्व की इन टिप्पणियों और मृत्युदंड के स्पष्ट विरोध के बाद मृत्युदंड पर पुनर्विचार की सम्भावना बनेगी। ना केवल मानवीय आधार पर बल्कि जैसा कि पूर्व राष्ट्रपति ने संकेत किया है इसकी सजा पाए अपराधियों के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को भी ध्यान में रख इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर पूरी गम्भीरता से विचार किया जाना चाहिए।

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मधेपुरा के मिनी चम्बल से निकला आई.ए.एस.

प्रायः कीचड़ से ही कमल निकलता है और कोयले के बीच से हीरा | लेकिन मरुभूमि में गुलाब बहुत मुश्किल से खिलता है और मिलता है | मधेपुरा का मिनी चम्बल कहा जाने वाला टेंगराहा-सिकियाहा पंचायत के परती-पर्रांट मरुभूमि से जिस किसान दंपत्ति “शम्भु-संजू” ने एक गुलाब पैदा किया – उसी कमल का, उसी हीरा का और उसी गुलाब का नाम है- आदित्य आनन्द |

किसान पिताश्री श्री शम्भु प्र. यादव और गृहिणी ममतामयी माताश्री संजू देवी का यह गुलाब आज इस मरुभूमि में हर पल अपना सुगन्ध फैला रहा है तथा सौरभ बिखेर रहा है |

यू.पी.एस.सी. की 2014 की परीक्षा में 980वां रैंक हासिल करने वाला वह आदित्य बगल के रौता गाँव के “सौरभ शिशु शिक्षा निकेतन” से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा शुरू की और अपनी लगन व मिहनत का सौरभ फैलाते हुए मुरलीगंज प्रखंड के बी.एल.उच्च वि. होते हुए टी.एन.बी.कालेज से स्नातक किया | इतिहास में एम.ए. कर इन्होंने अपनी मातृभाषा “मैथिलि” के साथ यू.पी.एस.सी. की ऊंचाई तक पहुंचे | फ़िलहाल वे आल इंडिया रेडियो में ऑफिसर हैं |

आई.ए.एस.आदित्य आनन्द की तमन्ना है कि इस टेंगराहा-सिकियाहा की बंजर भूमि में कृषि को सर्वाधिक बढ़ावा मिले | ग्रामीण प्रतिभा को ऊंचाई तक ले जाने के लिए एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था कायम हो और जिसका श्री गणेश शीघ्र हो |

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क्या थम जाएगी चीन के आर्थिक सुधारों की रफ्तार..!

बीजिंग से प्राप्त खबरों के अनुसार चीन के शेयर बाजार में लगातार गिरावट जारी है। इससे ना केवल अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है बल्कि सरकार के आर्थिक सुधारों पर भी इसका असर पड़ सकता है। 12 जून से शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में 29 फीसदी की गिरावट आई है। इससे निवेशकों की संपत्ति के मूल्य को तीन हजार अरब डॉलर (1,80,000 अरब रुपये से अधिक) का नुकसान हुआ है।

2013 में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की कमान संभालने के बाद प्रधानमंत्री ली कछ्यांग ने टेक्नोलॉजी स्टार्टअप की खातिर पूंजी बाजार को आकर्षक बनाया लेकिन शेयर बाजार ने जिस तरह का अप्रत्याशित बर्ताव किया है उससे ये उम्मीद ध्वस्त हो गई है कि शेयर बाजार नई कंपनियों (स्टार्टअप) के लिए फंड जुटाने के मामले में प्रभावी जरिया बन सकते हैं। चीन के शेयर बाजार नियामक ने बाजार में जोड़तोड़ की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है। अब यदि चीनी नीतिकारों को प्रधानमंत्री ली कछ्यांग की धीमी, मजबूत आर्थिक विकास की नई सामान्य वृद्धि की योजना पर फिर से गौर करने को मजबूर होना पड़ा तो यह उनके लिए एक बड़ा झटका होगा।

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