भारतीय राजनीति में भूकंप के झटके

भाजपा के वरिष्ठ नेता व भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने आपातकाल पर टिप्पणी क्या कर दी भारतीय राजनीति में ऐसा लग रहा है मानो भूकम्प के झटके आ रहे हों। आप के साथ-साथ जदयू और कांग्रेस की ओर से जो बयान इस बीच आए हैं वे भविष्य के लिए कई संकेत कर रहे हैं। बताना जरूरी होगा कि श्री आडवाणी ने आपातकाल को लेकर कहा कि इसे खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें लोकतंत्र को कुचल सकती हैं वे मजबूत हुई हैं। उनके इस बयान पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पर केन्दित है।

गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल ने श्री आडवाणी द्वारा आपातकाल पर की गई टिप्पणी का जोरदार समर्थन किया है। जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली उनकी टिप्पणी के बाद ये एक और मौका है जब दिग्गज राजनेता श्री आडवाणी को लेकर भाजपा खुद को असहज पा रही है।

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मन के पार, चेतना के द्वार जाने की तैयारी का नाम है योग

21 जून को केवल मधेपुरा ही नहीं बल्कि दिल्ली स्थित रायसीना हिल सहित सम्पूर्ण भारत योगमय वातावरण से आच्छादित हो जाएगा। आजू-बाजू के जिले के भी सभी प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक योग सिखाएंगे। विगत कुछ वर्षों से योगगुरू स्वामी रामदेव द्वारा योग को विश्व में अनवरत प्रचारित-प्रसारित करते रहने एवं हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ की महासभा में योग एवं भारतीय संस्कृति को बुलंदी के साथ रखने के फलस्वरूप 21 जून को घोषित अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस को धूम-धाम से मनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है।

इस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार कॉलेजों में शिक्षकों, कर्मचारियों सहित छात्र-छात्राओं एवं एन.सी.सी. के जवानों को योग से होनेवाले लाभ की जानकारी दी जाएगी। भूपेन्द्र नारायण मंडल वि.वि., मधेपुरा के एन.एस.एस. समन्वयक डॉ. अब्दुल लतीफ ने कहा कि इस क्षेत्र में योग के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए भारत सरकार ने वि.वि. मुख्यालय में केन्द्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा रिसर्च सेंटर खोलने का फैसला किया है।

जहाँ एक ओर महाविद्यालयों में पूर्वाभ्यास कार्यक्रमों के लिए प्रो. नन्दकिशोर एवं महिला प्रभारी प्रो. रीता कुमारी ने मधेपुरावासियों का आह्वान करते हुए कहा कि योगाभ्यास के सभी कार्यक्रमों में भाग लेकर अपने जिला को एक जागरुक जिला के तौर पर पेश करें, वहीं दूसरी ओर देश के दूसरे हिस्सों में कुछ स्वार्थी तत्वों ने इसे धर्म से जोड़कर राजनीति करना शुरू कर दिया है। विरोध करनेवालों को यह जानकारी होनी चाहिए कि योग हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई देखकर फायदा या नुकसान नहीं पहुँचाता अपितु यह एक शारीरिक व मानसिक क्रिया है। योग से आन्तरिक शक्ति ही नहीं आत्मप्रकाश में भी वृद्धि होती है। योग से व्याधि और व्यवधान मिटते हैं। अन्तरात्मा को जाग्रत करना ही योग है। मन के पार, चेतना के द्वार जाने की तैयारी का नाम है योग, जो अन्दर की आँखें खोलता है।

विश्व के सभी जातियों, धर्मों व सम्प्रदायों के लोग यदि संकीर्णता से ऊपर उठकर योग को स्वास्थ्य से जोड़कर देखें तो सम्पूर्ण मानव-जाति का कल्याण होगा। हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. के कुलपति जमीरूद्दीन शाह ने कहा कि योग यहाँ की संस्कृति में समाया हुआ है। उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि योग एक राष्ट्रीय खजाना है जिसे धार्मिक रंग देने की जगह शारीरिक एवं मानसिक व्यायाम की प्राचीन कला के रूप में स्वीकारना ही श्रेयस्कर है।

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गुदरी के लाल सुजीत ने बढ़ाया मधेपुरा का गौरव

पिता कुली और माँ मजदूर… दोनों के दोनों अनपढ़… और बेटा देश की प्रतिष्ठित आईआईटी की परीक्षा में सफलता का परचम फहरा दे तो क्या कहेंगे आप..! जब लगन सच्ची हो तो आपको सफलता के पीछे नहीं चलना पड़ता… सफलता आपको ढूंढ़ कर आपके घर का दरवाजा खटखटा देती है। “मधेपुरा अबतक” अपार हर्ष के साथ आपको बताना चाहता है कि वो दरवाजा मधेपुरा के पुरैनी प्रखंड में रहनेवाले प्रमोद मेहता और मीरा देवी का है और गौरव से सर ऊँचा कर देनेवाली सफलता ने दस्तक दी है उनके बेटे सुजीत के लिए।

पैसे के घोर अभाव के बीच और मूलभूत सुविधाओं तक से वंचित रहने वाले परिवार के बेटे सुजीत ने आईआईटी की परीक्षा में देशभर में ओबीसी कैटेगरी में 1329वां रैंक लाकर ना केवल अपने माता-पिता और घर-परिवार बल्कि पूरे मधेपुरा को ऐसी खुशी दी है जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। सुजीत के सपनों को पंख देने में गणितज्ञ आनंद के सुपर 30 का योगदान अविस्मरणीय है। सुजीत जैसी प्रतिभाओं को मुकाम तक पहुँचाने के कारण ही आज सुपर 30 की विश्वस्तरीय प्रतिष्ठा है।

बताते चलें कि सुजीत के पिता प्रमोद मेहता पुरैनी बाजार में ही कुली का काम करते हैं और माँ मीरा देवी गाँव के खेतों में मजदूरी करती है। दो भाई और दो बहनों में एक भाई और एक बहन से छोटा है सुजीत। बड़ा भाई अजीत कलकत्ता से बीटेक करने के बाद टीसीएस में इंजीनियर है। दो बहनों में बड़ी अंजली इन्टर कर चुकी है और छोटी ने इस बार मैट्रिक की परीक्षा दी है।

सुजीत ने पुरैनी प्रखंड के ही श्री वासुदेव उच्च विद्यालय से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक करने के बाद सुपर 30की तैयारी शुरू कर दी थी। सुपर 30 में चयनित होने के बाद उसने अपने दूसरे प्रयास में 1329वां रैंक हासिल किया और अब उसकी इच्छा है आईआईटी, खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने की।

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फर्जी कारोबार से कब मुक्त होगा भारत..?

चाहे दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री का मामला हो या मधेपुरा के मंडल विश्वविद्यालय के अन्तर्गत डी.एस. कॉलेज, कटिहार के प्राचार्य डॉ. पवन कुमार झा की फर्जी पी-एच.डी. डिग्री का मामला। बात दूध में मिलावट की हो या फिर नकली दवाओं की। यहाँ तक कि कुछ मामले फर्जी आई.ए.एस. अफसरों के भी देखने को मिले हैं। देखा जाय तो इन सबके पीछे कारण बस एक है – वह ये कि आदमी जन्म से मृत्यु पर्यन्त षट्विकार यानी काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या, द्वेष से ग्रसित रहता है। देखा जाय तो इन विकारों से संघर्ष के क्रम में वह इन पर जितनी अच्छी तरह विजय पाता है मनुष्यता की कसौटी पर वह उतना ही खरा उतरता जाता है और अगर इन विकारों से वह पूर्णत: मुक्त हो जाय तो देवत्व को प्राप्त कर ले। जो कि हो नहीं पाता। इन षट्विकारों से मुक्त होने के लिए विवेक, वैराग्य एवं निष्काम कर्मयोग की जरूरत होती है जो आज के भौतिक युग में दुर्लभ सी हो गई चीजें हैं।

प्राचीन काल के शिक्षक समाज के सिरजनहार हुआ करते थे। वे मान-मूल्यों के रक्षक, रहवर और रखवाला की भूमिका में थे। वे सच्चे अर्थों में विद्यादानी हुआ करते, सपने में भी उन्हें धन लूटने की चाहत नहीं होती। परन्तु, वर्तमान में शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में से वैसी तमाम चीजें निकाल दी गई हैं जिनसे चरित्र-निर्माण होता, जो इन षट्विकारों पर नियन्त्रण रखने में मददगार होतीं। आज पाठ्यक्रमों से ऋषि-मुनियों, तपस्वियों, साधकों, समाजसेवी संतों सहित आजादी के दीवानों की जीवनियां बेरहमी से निकाल दी गई हैं। इनकी जगह शिक्षा को केवल और केवल व्यावसायिक और प्रतिस्पर्द्धी बनाने पर बल दिया जा रहा है। फल यह है कि समाज में सत्कर्मों को छोड़ आज सारे कर्म हो रहे हैं।

सच है कि ये फर्जी कारोबार कभी निर्मूल नहीं हो सकते परन्तु इन्हें नियन्त्रित और संतुलित करने के लिए हम सबको जगना होगा और अपनी-अपनी भूमिका में लगना होगा – सरकार को, समाज को और खासकर शिक्षकों को। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने देश के नाम संदेश में कभी कहा था – “भारत तभी भ्रष्टाचारमुक्त होगा जब माता-पिता एवं प्राईमरी स्कूल के शिक्षक – ये तीनों ह्रदय से इस काम में जुटे रहेंगे। ”

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जब सौ फीट की सड़क सिमटकर सात फीट की रह जाय..!

क्या गाँव क्या शहर सड़कों का अतिक्रमण अब सामान्य-सी बात हो गई है। लोग खुद तो ऐसा कर ही रहे हैं, बड़ी तकलीफ होती है जब वे अपने स्वार्थ में कई बार देवी-देवताओं को ढाल बना लेते हैं ताकि मन्दिर की आड़ में उनका कारोबार चलता रहे। यहाँ तक कि कई जगहों पर सौ फीट की सड़क सिमटकर सात फीट की रह गई है। चलिये बतायें कैसे..!

सबसे पहले तो हवाई चप्पल से लेकर रूई तक की दूकानवाले फुटपाथ छेककर दस फीट तक अपना सामान बिछा देते हैं। उनके आगे तिरपाल व प्लास्टिक आदि से बनाई गईं फल-सब्जी की दूकानें लगभग बीस फीट तक पहुँच जाती हैं। शाम होते-होते ठेलावाले दूकानदार अपनी-अपनी चीजों के साथ विराजमान हो जाते हैं। अब बारी होती है क्रेताओं की। वे जैसे-तैसे बाईक व गाड़ी खड़ी कर दूकानदारी करते हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए तो शाम में दो कदम चलना भी खतरे से खाली नहीं होता क्योंकि सड़क पर मवेशियों की हिस्सेदारी भी तो होती है और दूसरी ओर आज के युवक इन सिकुड़ती सड़कों पर भी धीमी रफ्तार में बाईक चलाना अपनी तौहीन समझते हैं। आश्चर्य तो ये होता है कि ये हाल मधेपुरा की मुख्य सड़कों का है और सड़क की ये कहानी प्रत्येक दिन दुहराई जाती है। फिर भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दीखती..! क्या अब जाग जाने की जरूरत नहीं है..!

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रसीद के अभाव में अब किसान आत्महत्या करेंगे..!

रजिस्ट्री ऑफिस में हर होज लाखों रुपये निबन्धन शुल्क के रूप में जमा होते हैं। सालाना करोड़ों रुपये का टारगेट सरकार निर्धारित करती है लेकिन खरीद की गई जमीन का दाखिल-खारिज मालगुजारी रसीद के अभाव में पिछले छह महीने से ठप्प है। राजस्व रसीद नहीं कटने से किसानों को कई तरह के कष्ट और नुकसान से गुजरना पड़ रहा है। रसीद के अभाव में किसानों को आपदा नुकसान व खाद-बीज सब्सिडी एवं फसल-बीमा आदि से वंचित रहने की मजबूरी बनी रहती है। किसान क्रेडिट कार्ड तो सपना बनता जा रहा है। स्पेशल मेसेन्जर भी सरकारी तंत्र के पास से खाली हाथ लौट आते हैं तो ऐसी स्थिति में मालगुजारी रसीद के अभाव में क्या अब यहाँ के किसान भी आत्महत्या करेंगे..!

अंचलाधिकारी श्री उदयकृष्ण यादव ने कहा कि कई माह से राजस्व रसीद उपलब्ध नहीं होने पर जिला कार्यालय में पड़े सड़े-गले रसीद से ही फिलहाल काम चलाए जाने का आदेश दिया गया है।

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सांसद की बेटी, सड़क किनारे बेच रही हैं आम

आम बेचने वाली यह महिला आम नहीं है। लगातार आठ बार सांसद व लोकसभा के डिप्टी स्पीकर रह चुके कड़िया मुंडा की बेटी हैं। नाम है चंद्रावती सारू, ये पेशे से शिक्षिका हैं। बगीचे में जरूरत से ज्यादा आम हुए हैं तो उन्हें सड़क किनारे बैठकर बेचने में यह बात आड़े नहीं आई कि वे झारखंड के बड़े नेता की बेटी हैं।
आठ बार सांसद, चार बार केंद्रीय मंत्री और दो बार विधायक रहे कड़िया का जीवन आज के राजनेताओं के लिए एक मिसाल है। व्यक्तिगत जीवन बिल्कुल वैसा ही जैसा अब से चार दशक पहले था, जब वह पहली बार सांसद चुने गए थे। झारखंड के आदिवासियों के संसद में अकेले प्रतिनिधि। आज भी गांव आते हैं तो वैसे ही खेतों में हल-कुदाल चलाते हैं, तालाब में नहाते हैं। नक्सली हिंसा के लिए देश के सबसे खतरनाक खूंटी जिले में मामूली सुरक्षा के साथ घूमते हैं।

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शिक्षा-शिक्षक के गिरते स्तर पर विराम लगे – कुलपति

“वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और भविष्य” विषय पर मधेपुरा महाविद्यालय में शिव-राजेश्वरी क्लब द्वारा आयोजित विचार-गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए भू.ना. मंडल वि.वि. के माननीय कुलपति डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि शिक्षा की इस दशा के लिए छात्र, शिक्षक एवं अभिवावक के साथ-साथ सामाजिक एवं राजनीतिक हालात भी जिम्मेवार है। इतिहास से प्रेरणा लेकर हम भविष्य को बेहतर बना सकेंगे तथा शिक्षा के गिरते स्तर पर विराम लगा सकेंगे।

इस अवसर पर माननीय कुलपति महोदय को उनके प्रशंसनीय कार्यों के लिए शिव-राजेश्वरी क्लब के सचिव श्री हर्षवर्द्धन सिंह राठौर एवं अध्यक्षता कर रहे प्रो. निखिल सिंह द्वारा सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि प्रतिकुलपति डॉ. जयप्रकाश ना. झा, मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. रामनरेश सिंह सहित पूर्व कुलसचिव प्रो. शच्चीन्द्र, पूर्व विधायक श्री संजीव झा एवं श्री सुरेन्द्र यादव, स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार चौधरी आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। वक्ताओं की राय थी कि शिक्षा-व्यवस्था का गिरता स्तर एक दिन का परिणाम नहीं है, फिर भी शिक्षक जब निर्लोभ होकर विद्यादान करेंगे तभी भविष्य में उजाला लाया जा सकेगा।

विशेष उपस्थिति में प्रमुख थे – श्री सुरेश कुमार भूषण, श्री संजय परमार, श्री आनन्द, श्री संदीप शांडिल्य, श्री चन्द्रिका यादव, कुलपति के निजी सचिव श्री शंभू नारायण यादव, सुश्री पायल, सुश्री सोनी राज आदि। अन्त में राष्ट्रीय खो-खो खिलाड़ी सुश्री खुशबू कुमारी को क्लब द्वारा गोद लिया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जवाहर पासवान ने किया। मंच संचालन क्लब के सचिव श्री हर्षवर्द्धन सिंह राठौर नेकिया।

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श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का एकदिवसीय आयोजन

हाल ही में बी.एन. मंडल स्टेडियम में नौ दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ सम्पन्न हुआ ही था कि पुनः श्रीकृष्ण मंदिर परिसर, गौशाला, मधेपुरा में एकदिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन 15 जून को हुआ। कथाव्यास विद्वान, अध्यात्म ज्ञाता एवं भागवत कथा के मर्मज्ञ पूज्य गुरु श्री संजयजी महाराज की अमृतवाणी के रसास्वादन हेतु श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। इस भव्य आयोजन की सफलता में श्रीकृष्ण मंदिर के अध्यक्ष अवकाशप्राप्त प्रधानाध्यापक श्री परमेश्वरी प्रसाद यादव जी की अहम भूमिका रही।

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भूकम्प के बाद बाढ़ की त्रासदी का अंदेशा

48 घंटे बाद मानसून के आने की सूचना दी जा रही है। इस बीच नेपाल और आसपास के इलाके में किसी के पैर चाहे जिस भी कारण थरथराएं लगता यही है कि कहीं भूकम्प तो नहीं हो रहा है। सामने देखिये तो ऐसा लगता है कि कोसी ने मानसून की आहट पाकर अंगराई लेनी शुरू कर दी हो। कल से ही कोसी के इलाके के गांवों में अचानक पानी का दबाव बढ़ने लगा है। सरायगढ़ प्रखंड के कई गांवों में पानी ने अपना डेरा डाल दिया है। अचानक पानी के बढ़ने और मानसून के आने की सूचना से लोगों के चेहरे पर नेपाल के भूकम्प के बाद 2008 की कुसहा बाढ़ जैसी त्रासदी का अंदेशा स्वाभाविक रूप से दिखने लगा है।

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