काट-काट रे मच्छर ………!!

न जाने कितनी नन-बैंकिंग कम्पनियां भारत के सीधे-सादे नर-नारीयों को मच्छरों की तरह दिन-रात काटती रही हैं और उनकी मिहनत की कमाई को लालच दे-देकर बार-बार भागती रहीं हैं | पकड़े जाने पर उसी में से कुछ देकर कंपनी चालक अपना कल्याण तो कर ही लेते हैं, परन्तु हाथ मलते रह जाते हैं तथा मीटिंग करते रह जाते हैं अपने-अपने एजेंटों के साथ स्थानीय रासविहारी उच्च विद्यालय मधेपुरा के मैदान में प्रयाग इन्फोटेक लिमिटेड के विर्रुद्ध ,वे मासूम जिनके करोड़ों रूपये लेकर हाल ही में फरार हो गये हैं – वे सभी चालक लोग जो अब कभी लौटकर नहीं आयेंगे  !!

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पीकर कौन आया है यहाँ आबेहयात …………! प्रधानाध्यापक हलधर बाबू नहीं रहे ………….!!

कुछ दिन पहले तक मध्य वि. भिरखी में प्रधानाचार्य के पद पर काम कर चुके 66 वर्षीय हलधर प्रसाद आज पञ्च तत्त्व में विलीन हो गये | प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रतिनिधि रह चुके हलधर बाबू के पुत्र रुपेश ने मुखाग्नि दी | प्राथमिक शिक्षक संघके राज्य प्रतिनिधिरहे हलधर बाबू संघ के कई महत्वपूर्ण पदों पर यथा परीक्षा विभाग के अध्यक्ष आदि भी रहे थे |

जानकारी मिलते ही शोक व्यक्त करने वालों की भीड़ लग गयी | वे लम्बे समय से बीमार चल रहे थे | उनकी विदाई के वक़्त डॉ. मधेपुरी ने पड़ोसी सिया राम यादव “मयंक” एवंम अन्य परिजनों से यही कहा –   पीकर कौन आया है यहाँ आबेहयात !बनी है ये दुनिया एक रोज जाने के लिए  !!

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एम्बुलेंस सेवा बंद होने से जिंदगी मौत को गले लगा रही है …

मधेपुरा सदर हस्पताल में 22 दिनों से एक एम्बुलेंस – 1099 और शव वाहन का संचालन बंद है क्योकि इसके संचालनकर्ता “ सम्मान फाउंडेशन ” द्वारा चालक और टक्निसिएन को 10 महीनो से वेतन नहीं दिया गया है | फलस्वरूप इस संस्था के एम्बुलेंस चालक व  टक्निसिएन हड़ताल पर चले गये हैं | इस बात की सुचना सी . एस डॉ. जे. पी. मंडल ने राज्य स्वस्थ्य विभाग को दे दी है | यह भी जानें की “ एम्बुलेंस –  108 “ विगत 120 दिनों से बंद है | इस बीच कई जिन्दिगियाँ मौत को गले लगा लीं हैं |

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विभागीय अनदेखी के कारण कुसहा त्रासदी का पुनः कोसी में आगमन की आहट !

जल वाहक पूर्वी कोसी के 3 आर.डी से 8 आर .डी के बीच एक पायलट चैनल काफी बिलम्ब से 15 जून से बीरपुर सिंचाई प्रमंडल द्वारा आरम्भ किया गया जिसकी लम्बाई 1500 मीटर ,चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 3 मीटर होनी है जबकी 25 जून से कोसी की नहरों में पटवन के लिए किसानों को पानी देने का लक्ष्य विभाग द्वारा निर्धारित किया गया |

पायलट चैनल की खुदाई पोकलेन मशीन से करने का प्रावधान है , परन्तु विभागीय मिलीभगत के कारण ट्रेक्टर से ही इसे अंजाम दिया जा रहा है , और वह भी कछुए की तरह धीमी गति से | इतना ही नहीं , कटी गयी मिट्टी एक किलोमीटर दूर रखने के बजाय इसे बैंक पर ही रखा जा रहा है जिसे बारिश में अपनी पूर्ब अस्थिति मे आने में सर्वाधिक सहूलियत हो |

तुर्रा तो यह है की विभागीय अभियंता यह जानते हुए की 24 जून तक यह काम पूरा नहीं हो पायेगा को नजरअंदाज करते हुए 25 जून को पानी खुलने का बेसब्री से इन्तिज़ार कर रहे हैं ताकि सब किया-धिया पानी-पानी हो जाए और कुसहा त्रशादी का एन-केन-प्रकरेण पुनः द्विरागमन हो जाए |

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