बिहार : योग और राजनीति का रोग

विश्व योग दिवस पर पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में योग अभ्यास का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। 35 मिनट तक चले कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय और सीपी ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेता भी स्टेडियम में मौजूद रहे। भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा योग समारोह से नदारद थे।

बहरहाल प्रणवगान और प्रार्थना से योग अभ्यास की शुरुआत हुई। इस दौरान शिथिलिकरण के अभ्यास में कटी चालन, घुटना संचालन, प्राणासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकासन, भद्रासन, अर्द्धउष्ट्रासन, शशकासन, मकरासन, सेतु बंधासन, पवन मुक्तासन, शवासन, कपालभारती, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ध्यान और अंत में संकल्प पाठ और शांति पाठ के बाद योग समारोह समाप्त हो गया। इस दौरान सूर्य नमस्कार का अभ्यास नहीं कराया गया। ध्यातव्य है कि मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया था।

योग अभ्यास समाप्त होने के बाद अमित शाह ने कहा कि आज भारत विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बनने जा रहा है। भारतीय संस्कृति के धरोहर और इस विचार को अब पूरी दुनिया ने स्वीकारा है। यूएनओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे 175 देशों ने स्वीकार किया। संपूर्ण विश्व में 21 जून को योग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। अमित शाह ने कहा कि योगाचार्यों के मंथन के बाद इस दिन को विश्व दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज का दिन सबसे लंबा होता है। सूरज से हमें आज के दिन सबसे अधिक ऊर्जा मिलती है, इसलिए इस दिन को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की सहमति बनी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा व्यक्ति को जोड़ने वाला योग अब क्रिया को जोड़ेगा। हालांकि इस अवसर पर शाह ने योग क्रिया नहीं की। उपस्थित भीड़ ने उन्हें योग करने को कहा भी लेकिन उन्होंने योग नहीं किया।

इस अवसर पर स्टेडियम में करीब 15 हजार लोग मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। पूरे स्टेडियम और आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया था।

जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योग दिवस के आयोजन को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था और इसके लिए उन्होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों और नेताओं के बड़े दिलचस्प बयान सुनने को मिल रहे हैं। योग दिवस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि भाजपा शरीर का योग कर रही है, लेकिन वे राजनीत का योग कर रहे हैं। शरद यादव रविवार को पटना में लालू प्रसाद से बातचीत के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। योग दिवस पर हो रहे कार्यक्रमों पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं का शरीर योग करने लायक स्थिति में नहीं है।

योग को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने अंदाज में कहा कि फूली तोंद वाले योग का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने आज 22 मिनट के दरम्यान एक के बाद एक सात ट्वीट किए। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैं योग का विरोधी नहीं, पर लोगों को बेवकूफ बनाने के पाखंड का धुर विरोधी हूं। उन गरीबों और कामगार वर्गों को योग की जरुरत नहीं, जो मेहनत की रोटी खाते है। जो सुख प्राप्ति का जीवन जी रहा है, पूंजीपतियों को गरीबों का खून चुसवा रहा है, किसानों की जमीन निगल रहा है, वह योग करेगा और करवाएगा।

इससे पूर्व जदयू ने बिहार में विधान परिषद् चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग से योग दिवस कार्यक्रम पर रोक की मांग की थी। पार्टी का तर्क था कि चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष समेत विभिन्न केन्द्रीय मंत्रियों का जमावड़ा आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।

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हाय रे गिरगिटिया मानसून..!

जहाँ देश के दक्षिणी भाग मुंबई में बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं देश के उत्तरी किनारे के राज्य बिहार के कोशी प्रमंडल के जिलों खासकर मधेपुरा में किसान कमजोर मानसून को लेकर बेहद चिन्तित हैं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि नदियां सिमटकर नाले का रूप ले चुकी हैं। नहरें या तो क्षतिग्रस्त हैं या उनमें बालू और गाद भरे हैं। नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं इसके बावजूद वे इस लायक नहीं कि उनसे सामान्य सिंचाई की जा सके। ज्यादातर राजकीय नलकूप भी दयनीय स्थिति में हैं। ऐसे में इस इलाके के किसानों के पास फसल की सिंचाई के लिए प्रकृति पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

आज 21 जून है पर बारिश की बूँदों की जगह आसमान से आग बरस रही है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून के दर्शन 24 तारीख से हो सकते हैं। इस बीच सरकार ने सभी जिलों के डी.एम. को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दे दिया है। फलस्वरूप नहर, कुएँ, नलकूप आदि स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।

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प्रतिभाओं की भूमि है बिहार

विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित आई.आई.टी. में प्रवेश के लिए जे.ई.ई. एडवांस परीक्षा में बिहार के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने सफलता हासिल की है। इनमें बिहार बोर्ड के छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग पाँच सौ है। दूसरी ओर यू.पी. बोर्ड के सफल छात्रों की संख्या चार सौ के करीब ही ठहर गई है और केरल बोर्ड तो अन्तिम पायदान पर है। गौरतलब है कि यू.पी. बोर्ड के छात्रों की संख्या बिहार बोर्ड से बहुत अधिक है और केरल तो पूर्ण साक्षर राज्य है। इस लिहाज से बिहारी छात्रों की ये सफलता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

बिहार की राजधानी पटना के आयुष रंजन एवं आकाश सिन्हा बिहार राज्य के ही टॉपर और सेकेंड टॉपर नहीं हैं बल्कि दोनों पूरे गुवाहाटी जोन के भी टॉपर और सेकेंड टॉपर हैं। सम्पूर्ण भारत के लगभग पन्द्रह हजार सफल छात्रों में इन्होंने क्रमशः 94वां और 101वां रैंक प्राप्त किया है।

बिहारी छात्रों की सफलता इस बात के लिए आश्वस्त करती है कि आर्यभट्ट से लेकर वशिष्ठ नारायण सिंह तक की जन्मभूमि बिहार प्रतिभाओं से ना तो कभी खाली हुई है और ना आगे कभी होगी।

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भारतीय राजनीति में भूकंप के झटके

भाजपा के वरिष्ठ नेता व भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी ने आपातकाल पर टिप्पणी क्या कर दी भारतीय राजनीति में ऐसा लग रहा है मानो भूकम्प के झटके आ रहे हों। आप के साथ-साथ जदयू और कांग्रेस की ओर से जो बयान इस बीच आए हैं वे भविष्य के लिए कई संकेत कर रहे हैं। बताना जरूरी होगा कि श्री आडवाणी ने आपातकाल को लेकर कहा कि इसे खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो ताकतें लोकतंत्र को कुचल सकती हैं वे मजबूत हुई हैं। उनके इस बयान पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पर केन्दित है।

गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार और दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल ने श्री आडवाणी द्वारा आपातकाल पर की गई टिप्पणी का जोरदार समर्थन किया है। जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली उनकी टिप्पणी के बाद ये एक और मौका है जब दिग्गज राजनेता श्री आडवाणी को लेकर भाजपा खुद को असहज पा रही है।

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