मधेपुरा सदर हस्पताल में 22 दिनों से एक एम्बुलेंस – 1099 और शव वाहन का संचालन बंद है क्योकि इसके संचालनकर्ता “ सम्मान फाउंडेशन ” द्वारा चालक और टक्निसिएन को 10 महीनो से वेतन नहीं दिया गया है | फलस्वरूप इस संस्था के एम्बुलेंस चालक व टक्निसिएन हड़ताल पर चले गये हैं | इस बात की सुचना सी . एस डॉ. जे. पी. मंडल ने राज्य स्वस्थ्य विभाग को दे दी है | यह भी जानें की “ एम्बुलेंस – 108 “ विगत 120 दिनों से बंद है | इस बीच कई जिन्दिगियाँ मौत को गले लगा लीं हैं |
Monthly Archives: June 2015
विभागीय अनदेखी के कारण कुसहा त्रासदी का पुनः कोसी में आगमन की आहट !
जल वाहक पूर्वी कोसी के 3 आर.डी से 8 आर .डी के बीच एक पायलट चैनल काफी बिलम्ब से 15 जून से बीरपुर सिंचाई प्रमंडल द्वारा आरम्भ किया गया जिसकी लम्बाई 1500 मीटर ,चौड़ाई 20 मीटर और गहराई 3 मीटर होनी है जबकी 25 जून से कोसी की नहरों में पटवन के लिए किसानों को पानी देने का लक्ष्य विभाग द्वारा निर्धारित किया गया |
पायलट चैनल की खुदाई पोकलेन मशीन से करने का प्रावधान है , परन्तु विभागीय मिलीभगत के कारण ट्रेक्टर से ही इसे अंजाम दिया जा रहा है , और वह भी कछुए की तरह धीमी गति से | इतना ही नहीं , कटी गयी मिट्टी एक किलोमीटर दूर रखने के बजाय इसे बैंक पर ही रखा जा रहा है जिसे बारिश में अपनी पूर्ब अस्थिति मे आने में सर्वाधिक सहूलियत हो |
तुर्रा तो यह है की विभागीय अभियंता यह जानते हुए की 24 जून तक यह काम पूरा नहीं हो पायेगा को नजरअंदाज करते हुए 25 जून को पानी खुलने का बेसब्री से इन्तिज़ार कर रहे हैं ताकि सब किया-धिया पानी-पानी हो जाए और कुसहा त्रशादी का एन-केन-प्रकरेण पुनः द्विरागमन हो जाए |
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मधेपुरा सदर अस्पताल का प्राण संकट में
300 वेड वाले मधेपुरा सदर अस्पताल में 375 स्टाफ की जगह मात्र 50 का होना अस्पताल के लिए प्राण घातक है |एक स्टाफ को आठ के बदले कार्य करना पड़ता है | यदि कभी वह छुट्टी में होता तो खून जाँच से लेकर ब्लड बैंक के बीच मरीज भटकते रहते हैं | शिकायत करे भी तो किससे ? सी० एस० से लेकर डी० एस० सभी तो प्रभार में ही हैं | फिजिशियन के 4 पद हैं, चारो खाली | जेनरल सर्जन के 4 पदो में 3 खाली तथा स्त्री रोग विशेषज्ञों के 7 पदों में 5 खाली ….|

यह क्षेत्र है जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव का, सांसद पप्पू यादव का एवं मंत्री नरेंद्र ना० यादव का | माननीय पार्षद विजय कुमार वर्मा ही नहीं, माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अभिन्न मित्र विधान पार्षद ललन सर्राफ का, तो फिर 800 करोड़ में बन रहे कर्पूरी मेडिकल कॉलेज एण्ड होस्पिटल का हाल क्या होगा ? ज्ञातव्य हो कि जिले में 310 की जगह 68 चिकित्सक एवं 2880 स्वास्थ्य कर्मियों की जगह 287 मात्र के सहारे पैदा हुई स्थिति स्वास्थ्य सेवा के दावे की पोल ही तो खोल रही हैं |
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भूमि अधिग्रहण बिल लटका तार पर
भारत सरकार के भूमि अधिग्रहण के खिलाफ केवल मधेपुरा में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण जिले के सभी प्रखंडों में जद (यू) कार्यकर्ताओं ने जमकर दिन भर धरना कार्यक्रम को सफल करने में जिलाध्यक्ष सियाराम यादव के साथ- साथ डॉ० विजेन्द्र कुमार, महेन्द्र पटेल, नरेश पासवान, अशोक चौधरी, डॉ० नीरज सहित विधायक एवं अन्य अनुभवी नेताओं का भी सक्रिय समर्थन देखा गया जिनमें प्रमुख हैं- सियाशरण यादव, राज किशोर यादव, विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्र० निराला, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, डॉ० भूपेन्द्र मधेपुरी, जय किशोर- प्रसन्न जी सहित पवन केडिया, जय प्रकाश सिंह, राजनिति चौधरी आदि I घैलाढ़ प्रखंड के दुर्गा उच्च वि० कला मंच पर प्रो० शंभु कुमार की अध्यक्षता में, ग्वालपाड़ा प्रखंड कार्यालय के सामने प्रखंड अध्यक्ष ललन यादव की अध्यक्षता में, बिहारीगंज में प्रखंड अध्यक्ष वीरेंद्र आजाद की अध्यक्षता में, आलम नगर में प्रखंड अध्यक्ष राजेश्वर राय की अध्यक्षता में, पुरैनी प्रखंड में प्रखंड अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में एवं सिंहेश्वर प्रखंड में हरेन्द्र मंडल की अध्यक्षता में भारी संख्या में जदयू कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दी और प्राय: सबों ने यही कहा कि किसानो की जमीन औने-पौने भाव में खीरदकर केन्द्र सरकार उघोगपतियो को देने की साजिश रच रही है | कुछ कार्यकर्ताओं ने तो इस बिल के विरूद्ध सी० एम० नीतीश कुमार एव राजद सुप्रीमो लालू यादव के आह्वान पर भूमि बचाओ आंदोलन चलाने की भी सलाह दे डाली, जबकि पूर्व उप मुख्य मंत्री सुशील मोदी ने इसे नीतीश का नाटक कहा | सुशील मोदी ने उन्हें कहा कि विकास कार्यों यथा वि०वि० निर्माण, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नए जिला निर्माण आदि के लिए जमीन अधिग्रहण करना तो राज्य सरकार का काम है, न कि केन्द्र सरकार का | उन्होंने कहा कि इस भूमि अधिग्रहण बिल में ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए तो जमीन के बाजार मूल्य का चार गुणा राशि एव प्रभावित परिवारों को नौकरी देने का प्रावधान भी किया गया है तो इसका विरोध क्यों ? भू- अर्जन नहीं होने के कारण अभी भी बिहार में अनेक परियोजनाएं अधर में अटकी हुई हैं, जिससे विकास बाधित हो रहा है |
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सिवीक सेन्स कपूर की तरह उड़ता जा रहा है
प्रत्येक दिन सैकड़ाें नये वाहन यथा- साईकिल-रिक्शा, बाईक-टैम्पू, कार-जीप, बस-टªक एवं टैªक्टर आदि सड़क पर आ जाते हैं। और उसी र¶तार में हर रोज बेरोजगारों की फौज भी बढ़ती जा रही है। वही फौज किसी-न-किसी रूप में सड़क पर अपना दखल कायम कर लेती है। कुछ तो दुकान लगाकर या कुछ ठेला में लादकर फल-सब्जी, मा¡स-मछली, चाय-पान या बच्चों के खेलने का सामान बेचकर परिवार के भरण-पोषण में लग जाते हैं। फल यह होता है कि सड़क घटती चली जाती है और दुर्घटना बढ़ती चली जाती है। जब बुद्धिजीवियों का दबाव प्रशासन पर प्रेस के माध्यम से इस कदर पड़ने लगता है कि आये दिन प्रशासनिक पदाधिकारियों का दम घुटने लगता है।
तब कहीं आलाधिकारी के निर्देश पर एस.डी.एम., बी.डी.ओ., सी.ओ., डी.सी.एस.आर., थाना प्रभारी सहित पुलिस बल आदि सड़क पर उतरते हैं और सड़क अतिØमण मुक्त हो पाता है। यदाकदा टकराव की -िस्थति में बल प्रयोग भी करना पड़ता है और कभी-कभी वि-िभé संगठनों से वाÙाार् करने पर भी मजबूर होना पड़ता है। आजकल मधेपुरा एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, अंचलाधिकारी उदय Ñष्णा यादव, थानाध्यक्ष मनीष कुमार एवं वार्ड पार्षद ध्यानी यादव के अलावा प्रशासन के कर्मचारीगण अतिØमण मुक्ति अभियान में लगे हैं।
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राजपथ पर योग के दौरान मोदी पर लगा तिरंगे के अपमान का आरोप, शिकायत दर्ज !
पुड्डुचेरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मंगलवार को पुड्डुचेरी पुलिस स्टेशन में एक दलित एक्टिविस्ट ने शिकायत दर्ज कराई है। उन पर राष्ट्रीय झंडे के अपमान का आरोप लगाया गया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर 21 जून (रविवार) को राजपथ पर योग करते हुए पीएम के गले में तीन रंगों वाली एक चुनरी थी। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मोदी ने अपने गले में तिरंगा लपेटा था और उन्होंने राष्ट्रीय झंडे का अपमान किया है।
क्या है आपत्ति
आपत्ति दर्ज कराने वाले का दावा है कि मोदी ने योग करते हुए तिरंगा गले में लपेट रखा था। उससे कई बार अपना मुंह पोंछा था। वह जब योग कर रहे थे, तो जमीन पर कई बार तिरंगा छू भी गया था। कई बार उनके पैर से भी तिरंगा सटा था। इस तरह उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया।

पुलिस का बयान
पुलिस ने कहा, ”दलित सेना के स्टेट जनरल सेक्रेटरी सुंदर ने मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि उन्हें वाट्सऐप पर ऐसी तस्वीरें मिली हैं, जिनमें लग रहा है कि मोदी राष्ट्रीय ध्वज का अपमान कर रहे हैं। गले में अगर तिरंगा झुलाया जा रहा है और उससे योग करते हुए पसीना पोंछा जा रहा है तो यह ध्वज का अपमान है।” शिकायतकर्ता की मांग पर मोदी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
हाल ही में अमिताभ-अभिषेक के खिलाफ हुआ है मुकदमा
तिरंगे के अपमान से जुड़ी शिकायतों में राष्ट्रीय गौरव अपमान रोकथाम अधिनियम 1971 और फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के तहत धाराएं लगती हैं। अमिताभ बच्चन और उनके बेटे अभिषेक बच्चन पर भी शरीर पर तिरंगा ओढ़ने के मामले में इन्हीं दो कानूनों के तहत गाजियाबाद कोर्ट में 18 जून को मुकदमा दायर किया गया है।
क्या कहते हैं नियम?
फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के सेक्शन-4 में राष्ट्रध्वज के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधान हैं। इसमें कहा गया है कि किसी भी स्थिति में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि राष्ट्रध्वज जानबूझकर जमीन पर न गिराया जाए। शहीदों के अंतिम संस्कार के अलावा राष्ट्रध्वज को ओढ़ा या लपेटा भी नहीं जा सकता। वहीं, राष्ट्रीय गौरव अपमान रोकथाम अधिनियम 1971 की धारा 2 कहती है कि कमर के नीचे पहने वाले जाने वाले ड्रेस में भी राष्ट्रध्वज का इस्तेमाल नहीं हो सकता। राष्ट्रध्वज को जानबूझकर जमीन या पानी से छूने देना अपमान की श्रेणी में आएगा। कानून में पहली बार के अपराध के लिए सजा का प्रावधान स्पष्ट नहीं है। यह जरूर कहा गया है कि दूसरी बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम एक साल की सजा हो सकती है।
उमा भारती को देना पड़ा था इस्तीफा
राष्ट्रध्वज के अपमान के एक मामले के चलते उमा भारती को 2004 में मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उमा के खिलाफ हुबली में तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रध्वज का अपमान करने का मामला दर्ज हुआ था। एक मैगजीन में उनकी तिरंगे साथ तस्वीर छपी थी। हुबली की कोर्ट ने उनके नाम अरेस्ट वारंट जारी कर दिया था। हालांकि, अप्रैल 2015 में उन्हें हुबली के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने बरी कर दिया।
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“मीडिया: सत्ता और स्वायत्तता” पर विचार-गोष्ठी
रविवार, 21 जून 2015 को डी.आर.डी.ए., मधेपुरा के झल्लू बाबू सभागार में युवा पत्रकार विनय तरुण की स्मृति में “मीडिया : सत्ता और स्वायत्तता” विषय पर देश के विभिन्न राज्यों के मीडियाकर्मियों के संगठन ‘दस्तक’ की ओर से एकदिवसीय गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। गोष्ठी के मुख्य वक्ता थे वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता श्री अनिल चमड़िया। श्री चमड़िया ने विस्तार से मीडिया की स्वायत्तता और मीडिया के ऊपर सत्ता के विभिन्न रूपों के महीन अंकुशों पर प्रकाश डाला। उपस्थित प्रबुद्धजन एवं मीडियाकर्मी देर तक उन्हें सुनते रहे।
वरिष्ठ पत्रकार श्री अखलाख की अध्यक्षता में पटना की पत्रकार सायना सहित भागलपुर, राँची, मुजफ्फरपुर एवं अन्य शहरों से आए हुए मीडियाकर्मियों के साथ-साथ मधेपुरा के मीडियाकर्मियों ने विस्तार से अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इनके अतिरिक्त बी.एन. मंडल विचार मंच के अध्यक्ष प्रो. श्यामल किशोर यादव, सचिव डॉ. आलोक कुमार एवं कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सचिव व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित गजलगो शंभूशरण भारतीय, सिंडिकेट सदस्य (बीएनएमयू) डॉ. जवाहर पासवान, मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार, हर्षवर्द्धन, आनन्द, राहुल आदि उपस्थित थे।
अध्यक्ष मंडल के सदस्य डॉ. मधेपुरी ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में सूचना क्रांति एवं तकनीकी विस्तार के चलते मीडिया की व्यापकता में वृद्धि तो हुई है परन्तु भूमंडलीकरण के इस दौर में बाजारीकरण की प्रक्रिया भी उसी अनुपात में तेज हुई है। उन्होंने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया सामाजिक सरोकारों से दूर होता जा रहा है और इस उपभोक्तावादी युग में खबरों को भी उत्पाद बना दिया गया है। अन्त में डॉ. मधेपुरी ने विनय तरुण को स्मरण करते हुए उन्हें जन्म देनेवाले माता-पिता को नमन किया। श्रद्धांजलिस्वरूप उनकी एक गजल – कहाँ जन्मे सुनो हम नहीं जानते, कब मरेंगे कहाँ हम नहीं जानते – सुनकर कितनी आँखें नम हो गईं इसे सायना ने रोकर बता दिया।
भोजनोपरान्त दूसरे सत्र में इस कार्यक्रम हेतु स्थल तथा इसके विस्तारीकरण सहित अन्य सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यवस्थापक के रूप में प्रभात खबर के ब्यूरो चीफ श्री रूपेश कुमार सभी के प्रशंसापात्र बने रहे। अध्यक्षीय भाषण के साथ अखलाख साहब ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की।
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बिहार : योग और राजनीति का रोग
विश्व योग दिवस पर पटना के मोइनुल हक स्टेडियम में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में योग अभ्यास का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। 35 मिनट तक चले कार्यक्रम में पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय और सीपी ठाकुर सहित अन्य भाजपा नेता भी स्टेडियम में मौजूद रहे। भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा योग समारोह से नदारद थे।
बहरहाल प्रणवगान और प्रार्थना से योग अभ्यास की शुरुआत हुई। इस दौरान शिथिलिकरण के अभ्यास में कटी चालन, घुटना संचालन, प्राणासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकासन, भद्रासन, अर्द्धउष्ट्रासन, शशकासन, मकरासन, सेतु बंधासन, पवन मुक्तासन, शवासन, कपालभारती, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, ध्यान और अंत में संकल्प पाठ और शांति पाठ के बाद योग समारोह समाप्त हो गया। इस दौरान सूर्य नमस्कार का अभ्यास नहीं कराया गया। ध्यातव्य है कि मुस्लिम समुदाय ने इसका विरोध किया था।
योग अभ्यास समाप्त होने के बाद अमित शाह ने कहा कि आज भारत विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बनने जा रहा है। भारतीय संस्कृति के धरोहर और इस विचार को अब पूरी दुनिया ने स्वीकारा है। यूएनओ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे 175 देशों ने स्वीकार किया। संपूर्ण विश्व में 21 जून को योग दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। अमित शाह ने कहा कि योगाचार्यों के मंथन के बाद इस दिन को विश्व दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। आज का दिन सबसे लंबा होता है। सूरज से हमें आज के दिन सबसे अधिक ऊर्जा मिलती है, इसलिए इस दिन को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की सहमति बनी। भाजपा अध्यक्ष ने कहा व्यक्ति को जोड़ने वाला योग अब क्रिया को जोड़ेगा। हालांकि इस अवसर पर शाह ने योग क्रिया नहीं की। उपस्थित भीड़ ने उन्हें योग करने को कहा भी लेकिन उन्होंने योग नहीं किया।
इस अवसर पर स्टेडियम में करीब 15 हजार लोग मौजूद थे। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। पूरे स्टेडियम और आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया गया था।
जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योग दिवस के आयोजन को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था और इसके लिए उन्होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों और नेताओं के बड़े दिलचस्प बयान सुनने को मिल रहे हैं। योग दिवस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि भाजपा शरीर का योग कर रही है, लेकिन वे राजनीत का योग कर रहे हैं। शरद यादव रविवार को पटना में लालू प्रसाद से बातचीत के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। योग दिवस पर हो रहे कार्यक्रमों पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं का शरीर योग करने लायक स्थिति में नहीं है।
योग को लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने अपने अंदाज में कहा कि फूली तोंद वाले योग का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने आज 22 मिनट के दरम्यान एक के बाद एक सात ट्वीट किए। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैं योग का विरोधी नहीं, पर लोगों को बेवकूफ बनाने के पाखंड का धुर विरोधी हूं। उन गरीबों और कामगार वर्गों को योग की जरुरत नहीं, जो मेहनत की रोटी खाते है। जो सुख प्राप्ति का जीवन जी रहा है, पूंजीपतियों को गरीबों का खून चुसवा रहा है, किसानों की जमीन निगल रहा है, वह योग करेगा और करवाएगा।
इससे पूर्व जदयू ने बिहार में विधान परिषद् चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग से योग दिवस कार्यक्रम पर रोक की मांग की थी। पार्टी का तर्क था कि चुनाव के दौरान भाजपा अध्यक्ष समेत विभिन्न केन्द्रीय मंत्रियों का जमावड़ा आदर्श आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।
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हाय रे गिरगिटिया मानसून..!
जहाँ देश के दक्षिणी भाग मुंबई में बारिश से जन-जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं देश के उत्तरी किनारे के राज्य बिहार के कोशी प्रमंडल के जिलों खासकर मधेपुरा में किसान कमजोर मानसून को लेकर बेहद चिन्तित हैं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि नदियां सिमटकर नाले का रूप ले चुकी हैं। नहरें या तो क्षतिग्रस्त हैं या उनमें बालू और गाद भरे हैं। नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं इसके बावजूद वे इस लायक नहीं कि उनसे सामान्य सिंचाई की जा सके। ज्यादातर राजकीय नलकूप भी दयनीय स्थिति में हैं। ऐसे में इस इलाके के किसानों के पास फसल की सिंचाई के लिए प्रकृति पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
आज 21 जून है पर बारिश की बूँदों की जगह आसमान से आग बरस रही है। मौसम विभाग के अनुसार बिहार में मानसून के दर्शन 24 तारीख से हो सकते हैं। इस बीच सरकार ने सभी जिलों के डी.एम. को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दे दिया है। फलस्वरूप नहर, कुएँ, नलकूप आदि स्रोतों से पानी उपलब्ध कराने की कवायद शुरू कर दी गई है।
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प्रतिभाओं की भूमि है बिहार
विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित आई.आई.टी. में प्रवेश के लिए जे.ई.ई. एडवांस परीक्षा में बिहार के लगभग एक हजार छात्र-छात्राओं ने सफलता हासिल की है। इनमें बिहार बोर्ड के छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग पाँच सौ है। दूसरी ओर यू.पी. बोर्ड के सफल छात्रों की संख्या चार सौ के करीब ही ठहर गई है और केरल बोर्ड तो अन्तिम पायदान पर है। गौरतलब है कि यू.पी. बोर्ड के छात्रों की संख्या बिहार बोर्ड से बहुत अधिक है और केरल तो पूर्ण साक्षर राज्य है। इस लिहाज से बिहारी छात्रों की ये सफलता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
बिहार की राजधानी पटना के आयुष रंजन एवं आकाश सिन्हा बिहार राज्य के ही टॉपर और सेकेंड टॉपर नहीं हैं बल्कि दोनों पूरे गुवाहाटी जोन के भी टॉपर और सेकेंड टॉपर हैं। सम्पूर्ण भारत के लगभग पन्द्रह हजार सफल छात्रों में इन्होंने क्रमशः 94वां और 101वां रैंक प्राप्त किया है।
बिहारी छात्रों की सफलता इस बात के लिए आश्वस्त करती है कि आर्यभट्ट से लेकर वशिष्ठ नारायण सिंह तक की जन्मभूमि बिहार प्रतिभाओं से ना तो कभी खाली हुई है और ना आगे कभी होगी।
























