ऊंचाई पाने के लिए हर किसी को कठिन परिश्रम करना पड़ता है और समाज को बहुत कुछ देना भी पड़ता है | सफल शिक्षक, बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न एवं समाजसेवी विष्णुदेव एक कुशल प्रशासक के साथ-साथ एक संवेदनशील व्यक्तित्व के धारक रहे हैं |
साधारण गृहस्थ परिवार में जन्म लेने वाले विष्णुदेव बाबू अवकाश ग्रहण करने के बाद अपने माता-पिता के नाम से शहर से दूर ग्रामीण क्षेत्र दोरिक नगर, तुरकाही में बच्चों की पढाई के लिए एक विद्यालय- “दानी दुखनी मेमोरियल उच्च माध्यमिक विद्यालय” की स्थापना की और कार्यरत शिक्षकों को आरम्भ में अपने पेंशन से वेतन देते रहे और दिन-दिन भर स्कूल में मजदूर की तरह काम करते रहे | उनके मनोबल को कायम रखने के लिए पुत्र द्वय भी उनको साया की तरह साथ दिया |
आज विष्णुदेव बाबू नहीं हैं | सभी उनकी जयन्ती मना रहे हैं- जिला परिषद की अध्यक्षा मंजू देवी हों या जिले के विद्यालयों व महाविद्यालयों सहित विश्वविद्यालयों के पदाधिकारीगण हों- गाँव के बच्चे-बूढ़े सभी उत्सव मना रहे हैं | उनकी प्रतिमा लगा रहे हैं |
समाजसेवी डॉ.मधेपुरी ने तो अपने सम्बोधन में यहाँ तक कह दिया कि जो समाज के लिए जीता है, वह कभी नहीं मरता | विष्णुदेव बाबू भी सदा जीवित रहेंगे | अत: उन्हें स्वर्गीय कहना उचित नहीं होगा |
विकास कार्यों को गति देने वाले डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल द्वारा आरबिट्रेटर की मदद लेकर विद्युत रेल इंजन कारखाने को तो गति प्रदान कर दी गयी, परन्तु पुलिस लाईन वाली जमीन के मुआवजे के लिए लगाये गये त्रिदिवसीय शिविर में अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार अपनी टीम के साथ किसानों की बाट जोहते रहे, लेकिन उपस्थिति नगण्य रही |
कारण है – ताली एक हाथ से नहीं बजती ! सरकार उस एरिया की जमीन का निबंधन शुल्क लेते समय दर तय की है – एक लाख बीस हजार रू. प्रति डिसमिल, परन्तु किसान को रेट मिल रही है मात्र बीस हजार रू. प्रति डिसमिल | कुछ किसान तो आरम्भ में ले लिए, परन्तु बहुतों ने उच्च न्यायालय में केश दायर कर दिया है | ऐसी जानकारी किसानों द्वारा प्राप्त हो रही है |
C.O Mithilesh Kumar and C.I Gajendra Singh informing higher officers regarding the poor presence of Land Owners .
मधेपुरा अबतक को पूर्व वार्ड आयुक्त विष्णु देव उर्फ़ विक्रम कुमार एवं समाजसेवी आभाष झा द्वारा यह जानकारी दी गयी कि अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार का कहना है कि विकास कार्यों में सहयोग कीजिए और प्रोटेस्ट के साथ मुआवजा ले लीजिए | बाद में उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार शेष भुगतान कर दिया जायेगा |
विगत पन्द्रह वर्षों से निरन्तर यानी अबाध गति से अनुशासनप्रिय एवं निष्ठावान शिक्षक-पिता एवं प्रधानाचार्य ‘शिवकुमार’ की दो बेटियाँ प्रो.रीता एवं अध्यापिका रीना, उनकी स्मृति को तरोताजा बनाये रखने के लिए शहर के बुद्धिजीविओं एवं उनके योग्य शिष्यों को 16 फरवरी को सदैव आमंत्रित करती रही हैं | गुरु के तैल चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि के साथ-साथ ‘गुरु का प्रसाद’ पाने का अवसर भी प्रदान करती रही है |
गुरु की महिमा जितनी है उससे कहीं आगे हैं ये दोनों गुरु बहना ! गुरु ने बेटे-बेटी में अंतर नहीं माना तो ये दोनों बेटियाँ भी बहुत बेटों से आगे बढ़-चढ़कर अपने पिताश्री को उनके किये गये विशिष्ट कर्मों में जिन्दा रखने का जी भर कर प्रयास करती रही हैं | गुरु शिवकुमार की अनेक कहानियाँ प्रसिद्धि प्राप्त कर चुकी हैं जिनमें उनके कठोर अनुसाशन, समय निष्ठ्ता और कर्तव्यबोध की झलक मिलती हैं | इनकी ही तरह निष्ठावान शिक्षक को ये बेटियाँ प्रतिवर्ष सम्मानित भी करती हैं | बच्चों में क्विज़ कॉम्पीटिशन, पेंटिंग, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित कर पुरस्कार के माध्यम से प्रोत्साहित भी करती है |
गुरु स्मृति में आयोजित इस संध्या भजन में श्रधांजलि/पुष्पांजलि करने वालों में प्रमुखता से उपस्थित डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.आलोक कुमार, बी.एन.एम.यू.– पी.जी. भौतिकी के डॉ.अशोक कुमार, डॉ.नरेश कुमार, साहित्यकार दशरथ प्र. सिंह, प्रो.चन्द्रशेखर, प्रो.राजकुमार आदि ने कहा– माँ की छांव और पिता का स्वाभिमान होती हैं बेटियाँ ! शुभकामनाएँ और दुआएँ होती हैं बेटियाँ |
विगत चन्द महीनों से श्रीपुर-चकला गाँव में भारत सरकार द्वारा विद्युत् रेल इंजन फैक्ट्री के निर्माण के लिए किये गये भू-अर्जन के मुआवजा भुगतान को लेकर जिला कलक्टर मो.सोहैल सहित भू-अर्जन विभाग के पदाधिकारी व कर्मचारीगण व्यस्त रहे |
और अब बारी है मधेपुरा के वार्ड न.-1 में पुलिस लाइन के लिए किये गये भू-अर्जन के बाबत भू-स्वामियों को मुआवजा देने की | विकास कार्यों में गहरी अभिरुचि रखनेवाले जिला कलक्टर मो.सोहैल के निदेश पर पुलिस लाइन के लिए भू-अर्जन के बाबत मुआवजा वितरण को लेकर संत अवध बिहारी इंटर कॉलेज, पथराहा के निकट त्रि-दिवसीय (17-18 एवं 19 फरवरी तक) शिविर लगाया जायेगा- जहाँ पर भू-अर्जन विभाग के कर्मचारी एवं पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे |
जिला प्रशासन द्वारा निदेश जारी किया गया है कि सम्बन्धित भू-स्वामी वांछित कागजातों के साथ शिविर में उपस्थित होकर अपनी-अपनी जमीन के बाबत निर्धारित मुआवजा प्राप्त कर विकास के कार्यों में गति प्रदान करने हेतु आवश्यक श्रम करें |
बिहार पुलिस के अपर महानिदेशक के निदेशानुकुल जिला स्तर पर पुलिस सप्ताह (22-27 फरवरी) मनाने हेतु समाजहित व राष्ट्रहित पर आधारित लगभग एक दर्जन कार्यक्रमों के साथ तत्पर दिख रहे हैं मधेपुरा के युवा किन्तु कुशल प्रशासनिक क्षमता से लैस आरक्षी अधीक्षक कुमार आशीष |
पुलिस केंद्र/ वाहिनी मुख्यालय एवं जिले के सभी पुलिस प्रतिष्ठानों में बिहार पुलिस का झंडा फहराने से लेकर वृक्षारोपन/ फुटबॉल मैच – मैराथन दौड़ | कबड्डी – ट्रैफिक जागरूकता कार्यशाला/बालीबॉल – पुलिस-पब्लिक सम्बंध पर वि.वि./ महाविद्यालय के छात्रों के बीच वाद-विवाद-बाल कलाकारों द्वारा पेंटिंग व हास्य कवि सम्मलेन / देशभक्त शहीद पुलिस कर्मियों की याद में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों को पुरस्कृत करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आगाज 22 फरवरी 2016 से, जिले के विकासोन्मुखी कार्यों पर नजर रखने वाले डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल के मूल्यवान सुझावों के साथ, करेंगे एस.पी. कुमार आशीष |
From Left to Right Dr.Madhepuri, S.P Kumar Ashish & Commentator Mahtab observing the final match of Maitri Cup Cricket Tournament at B.N.Mandal Stadium, Madhepura .
उक्त आशय की विस्तृत विवरणी– “तारीख-समय-आयोजन स्थल एवं कार्यकारी एजेंसियों के नाम के साथ”– विभिन्न माध्यमों से प्रचारित-प्रसारित किये जा रहे हैं जिसका श्री गणेश बी.एन.मंडल स्टेडियम के मंच से 14 फरवरी रविवार को तब से किया गया जब पुलिस एकादश एवं पूर्व क्रिकेटरों के बीच मैत्री कप क्रिकेट टूर्नामेंट का फाइनल खेला जा रहा था | मैत्री कप तो जीते मधेपुरा के पूर्व क्रिकेटर, परन्तु पुलिस एकादश के कप्तान एस.पी. कुमार आशीष एवं उप-कप्तान ए.एस.पी. राकेश कुमार की टीम ने जीता दर्शकों का दिल |
जहाँ विजेता टीम को एस.पी.कुमार आशीष, उपविजेता टीम को जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी ने ट्रॉफी दी वहीं शिक्षाविद-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने मैदान में खिलाड़ियों का परिचय लेते हुए मधेपुरा थानाध्यक्ष मनीष कुमार से हैंडसेक करते हुए बेहतर प्रदर्शन की कामना की, वहीं मंच पर उन्होंने आलराउंडर ए.एस.पी.राकेश कुमार को कप प्रदान किया |
Dr.Madhepuri elevating all-rounder ASP Rakesh Kumar, Thanadhyaksh Manish Kumar and other players in the ground & also on the stage of B.N.Mandal Stadium Madhepura .
डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में खेल की महत्ता व विशेषता पर यही कहा कि दो-चार लोगों की गलतफहमियों के कारण उत्पन्न सामाजिक विद्वेष को खेल के माध्यम से खिलाड़ियों द्वारा सौहार्दपूर्ण वातावरण में परिणत कर दिया जाता है | ऐसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगे रहने वाले समाज के शुभचिंतकों- हिन्दुस्तान के व्युरोचीफ़ अमिताभ, जागरण के धर्मेन्द्र भरद्वाज एवं प्रभात खबर के रुपेश कुमार सहित राकेश सिंह, ध्यानी यादव, संतोष कुमार झा, किशोर कुमार, संदीप शांडिल्य, महताब, प्रदीप श्रीवास्तव, रोहन सिंह, प्रशांत यादव, संजीव कुमार, अरुण कुमार, संतकुमार, त्रिदीप गांगुली, अमित कुमार, गुलजार, आशुतोष, पुष्पेन्द्र आदि एवं मीडिया मैन- मनीष सहाय, संजय परमार, व सुभाष सुमन आदि महत्वपूर्ण सदस्यों को डॉ.मधेपुरी ने हृदय से शुभकामनाएँ दी |
भारतवासियों को गौरव से भर देने वाली ख़बर..! अगर अन्तिम क्षणों में कोई उलटफेर ना हो तो भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक श्रीकांत श्रीनिवासन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के अगले जज होंगे। 23 फरवरी 1967 को जन्मे 48 वर्षीय श्रीनिवासन इस पद पर पहुँचने वाले पहले भारतवंशी होंगे। जस्टिस एंटोनिन स्कैलिया की संदिग्ध अवस्था में अचानक मृत्यु के बाद यह पद रिक्त हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार संभावित जजों की सूची में श्रीकांत श्रीनिवासन का नाम सबसे ऊपर है। श्रीनिवासन अभी कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट सर्किट की अपीलीय अदालत के जज हैं। बता दें कि कोलंबिया डिस्ट्रिक्ट सर्किट को आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के लिए नामांकित होने वाले जजों के लिए ‘लांचिंग पैड’ माना जाता है।
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद स्कैलिया के उत्तराधिकारी को नामांकित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करने की बात कही है। स्कैलिया रूढ़िवादियों में लोकप्रिय थे। ऐसे में ओबामा इस बात को भलीभाँति जानते हैं कि उन्हें ऐसे उम्मीदवार की तलाश करनी है जिसे रिपब्लिकन भी स्वीकार करें। इस कसौटी पर श्रीनिवासन खरे उतरते हैं क्योंकि कांग्रेस में जबरदस्त राजनीतिक गतिरोध के बावजूद सीनेट में श्रीनिवासन को फेडरल जज बनाने के नामांकन को 97-0 से स्वीकार किया गया था और रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की दावेदारी हासिल करने में जुटे टेड क्रूज और मार्को रूबियो ने भी उनके पक्ष में वोट किया था। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में उनका पहुँचना तय माना जा रहा है।
श्रीकांत श्रीनिवासन की ना केवल जड़ भारत में है बल्कि वे दक्षिण और उत्तर भारत के बीच बड़ा दिलचस्प संतुलन भी साधते हैं। वो यूँ कि उनके पिता तिरुनेलवेली के थे और माँ चेन्नई की लेकिन श्रीनिवासन का जन्म चंडीगढ़ में हुआ था। श्रीनिवासन के माता-पिता 1960 में अमेरिका आए थे और पेशे से दोनों शिक्षक थे। पिता कान्सास यूनिवर्सिटी में मैथ्स के प्रोफेसर थे तो माँ कान्सास सिटी आर्ट इंस्टीट्यूट में पढ़ाती थीं।
कठिन परिश्रमी और स्वभाव से उदारवादी श्रीनिवासन ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और स्टैनफोर्ड लॉ स्कूल और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से लॉ और बिजनेस में मास्टर्स किया। वे ओबामा के मुख्य उपमहाधिवक्ता रह चुके हैं। 2013 में उन्हें कोलंबिया सर्किट की अपीलीय अदालत का जज नियुक्त किया गया था। इस पद पर भी पहुँचने वाले वे पहले भारतवंशी हैं। अमेरिका के ‘सिलिकॉन वैली’ से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक भारतवंशियों का जलवा… सचमुच ‘असाधारण’ है ये उपलब्धि..!
बसंत पंचमी यानि माघ महीने की शुक्ल पंचमी यानि ऋतुओं के राजा बसंत के आगमन का उद्घोष। इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है और प्रकृति नवयौवना-सी सजना-संवरना शुरू करती है। पेड़ों के पुराने पत्तों की जगह आप नई कोंपलों को देखते हैं और प्रकृति में जैसे नए जीवन का संचार हो उठता है। बसंत सच्चे अर्थों में प्रकृति का उत्सव है जिसका आगाज उसकी पंचमी से होता है। पर केवल इतनी ही नहीं है बसंत पंचमी। इस बसंत पंचमी को देखने की खातिर कई खिड़कियाँ हैं। चलिए उनमें से इन पाँच खिड़कियों को खोलें।
पहली खिड़की…
बसंत पंचमी से जुड़ी एक रोचक कथा है। भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना तो कर दी लेकिन वो स्वयं अपनी रचना से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें अपनी ही रची सृष्टि मलिन और उदास लगती थी। हर तरफ बस मौन ही मौन छाया रहता था। उन्हें लगा कहीं कुछ कमी रह गई है। बहुत सोचने के बाद उन्होंने विष्णु से आज्ञा लेकर पृथ्वी पर अपने कमंडल से जल छिड़का। जलकण के पड़ते ही पृथ्वी में कम्पन होने लगा और वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। वह एक चतुर्भुजी सुन्दर स्त्री थी जिसके एक हाथ में वीणा थी और दूसरा हाथ वर की मुद्रा में था। शेष दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी। जी हाँ, वो शक्ति माँ सरस्वती थी। ब्रह्मा ने उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही माँ सरस्वती ने वीणा का मधुर नाद किया पूरी सृष्टि गुंजायमान हो गई। संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को ‘वाणी’ प्राप्त हो गई। तभी तो उन्हें वीणावादिनी और वाग्देवी जैसे नामों से पुकारते हैं। इस तरह बसंत पंचमी माँ सरस्वती का जन्मोत्सव भी है जिसे हम सरस्वती पूजा के रूप में मनाते हैं।
दूसरी खिड़की…
बसंत पंचमी हमें त्रेता युग और रामकथा से भी जोड़ती है। सीताहरण के बाद श्रीराम उन्हें खोजते हुए दक्षिण की ओर बढ़े और जिन स्थानों पर वो गए उनमें एक दंडकारण्य भी था। यहीं शबरी नाम की भीलनी रहती थी जिसने राम की भक्ति में विभोर होकर उन्हें अपने जूठे बेर खिलाए थे। वह स्थान वर्तमान गुजरात के डांग जिले में है जहाँ शबरी का आश्रम था। आपको बता दें कि श्रीराम बसंत पंचमी के दिन ही शबरी के यहाँ गए थे।
तीसरी खिड़की…
बसंत पंचमी का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं। ये दिन हमें इतिहासप्रसिद्ध पृथ्वीराज चौहान की भी याद दिलाता है। पृथ्वीराज ने मोहम्मद गोरी को सोलह बार पराजित किया और हर बार उदारता दिखाते हुए उसे छोड़ दिया। पर जब सत्रहवीं बार वो स्वयं पराजित हुए तब गोरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ अफगानिस्तान ले गया और उनकी आँखें फोड़ दीं। इसके बाद की घटना जगतप्रसिद्ध है। मोहम्मद गोरी ने मृत्युदंड देने से पूर्व पृथ्वीराज के शब्दभेदी बाण का कमाल देखना चाहा और पृथ्वीराज ने इस बार कोई भूल नहीं की। अपने साथी चंदबरदाई की मदद से उन्होंने पहले अपने बाण को गोरी के सीने में पहुँचाया और इसके बाद पृथ्वीराज और चंदबरदाई ने एक-दूसरे के पेट में छुरा भोंक आत्मबलिदान दे दिया। 1192 में ये ऐतिहासिक घटना बसंत पंचमी के दिन ही हुई थी।
चौथी खिड़की…
बसंत पंचमी का एक सूत्र ‘कूका पंथ’ की स्थापना करने वाले गुरु रामसिंह कूका से भी जुड़ा है। 1816 ई. में उनका जन्म बसंत पंचमी के दिन ही हुआ था। गुरु रामसिंह ने उस युग में ना केवल नारी उद्धार, अन्तर्जातीय विवाह, सामूहिक विवाह, स्वदेशी और गोरक्षा के लिए आवाज बुलंद की थी बल्कि अंग्रेजों से लड़ते हुए अपनी शहादत भी दी थी।
पाँचवीं खिड़की…
बसंत पंचमी के ही दिन 1899 में सरस्वती के वरदपुत्र महाकवि निराला का जन्म भी हुआ था। अपनी रचनाओं से हिन्दी को उन्होंने जैसा गौरव दिया उसकी कोई सानी नहीं। इस ‘महाप्राण’ को जाने बिना तो ‘सरस्वती’ की पूजा भी पूरी ना होगी।
बसंत पंचमी को चाहे प्रकृति में देखें चाहे पुराणों में… त्रेतायुग में ढूंढ़ें या आधुनिक भारत में… इतिहास की नज़र से देखें या साहित्य में गोते लगाकर… अन्त में हम बस यही पाएंगे कि यौवन हमारे जीवन का बसंत है और बसंत इस ‘सृष्टि’ और हमारे ‘संस्कार’ का यौवन।
लांसनायक हनुमंथप्पा कोप्पाड़ हमारे बीच नहीं रहे। सियाचिन ग्लेशियर में माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच छह दिन तक कई टन बर्फ के नीचे दबे रहने के बाद भी सियाचिन को जीत लेने वाला हनुमंथप्पा ज़िन्दगी की जंग हार गया। बीस हजार फुट ऊँची चोटी पर डेढ़ सौ घंटों तक बर्फ के नीचे दबे रहने के बावजूद हनुमंथप्पा का जिन्दा रहना ‘चमत्कार’ था। मानवता के सम्पूर्ण इतिहास में अदम्य जिजीविषा की ऐसी दूसरी बानगी नहीं। वे तो हनुमंथप्पा के शरीर के अहम अंग थे जिन्होंने इलाज के दौरान काम करना बंद कर दिया वरना ‘मन’ से तो उस जवान ने मौत को भी मात दे ही दी थी।
Hanumanthappa’s Rescue Operation at Siachen.
आज जबकि हममें से ज्यादातर ऐशो-आराम के लिए ‘मरे’ जा रहे हैं, इस 33 साल के जांबाज ने अपनी 13 साल की नौकरी में शांति वाले क्षेत्रों की जगह आगे बढ़-बढ़कर कठिन और संघर्ष वाले क्षेत्रों को चुना और पूरे दस साल हम सबके लिए ‘लड़ने’ में बिता दिए। सियाचिन पोस्ट पर हनुमंथ्प्पा की तैनाती पिछले साल चार अक्टूबर को हुई थी। यहाँ दिन का तापमान माइनस 15 डिग्री होता है और रात में माइनस 55 डिग्री तक गिर जाता है लेकिन हनुमंथप्पा की मुस्तैदी में कभी रत्ती भर भी कमी नहीं देखी गई। तीन फरवरी को जब 800 फुट लम्बी और 400 फुट चौड़ी बर्फ की दीवार टूटकर दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र सियाचिन के उत्तरी ग्लेशियर में सेना के शिविर पर आ गिरी, उस वक्त भी ये जवान अपनी ‘ड्यूटी’ पर तैनात था और इस कदर तैनात था कि नौ साथियों के बर्फ की कब्र में शहीद हो जाने के बावजूद हमें ‘फर्ज’ और ‘साहस’ की सच्ची परिभाषा समझा देने तक खुद को जिन्दा रख पाया।
PM Modi & Army Chief Suhag Paying a visit to Hanamanthappa at Army Hospital in Delhi.
कर्नाटक में धारवाड़ के छोटे से गांव बेटूर के रहने वाले हनुमंथप्पा के गांव में ज्यादातर लोग किसान हैं। चार भाइयों में सबसे छोटे हनुमंथप्पा का परिवार भी खेती करता है। हनुमंथप्पा ने गांव के स्कूल में ही शुरुआती पढ़ाई की थी और रिटायर होने के बाद वहीं बच्चों को पढ़ाना चाहते थे। हनुमंथप्पा की शादी चार साल पहले हुई थी। अपनी पत्नी की गोद में वो एक बेटी छोड़ गए जो पिछले साल ही पैदा हुई। बेटी का नाम उन्होंने ‘नेत्रा’ रखा था।
Hanumanthappa’s Mother, Wife & Daughter ‘Netra’.
एक साल की मासूम ‘नेत्रा’ अब अपने पिता को अपनी माँ के सूने नेत्रों में ही देख पाएगी लेकिन वो बड़ी होगी देश के करोड़ों नेत्रों के बीच जिनमें उसके पिता के लिए श्रद्धा का अथाह जल उमड़ रहा होगा। बड़ी होकर वो जान पाएगी कि उसके पिता ने अपनी बेटी का नाम ‘नेत्रा’ यूं नहीं रखा था… उसने अपने ‘बलिदान’ से उस नाम को परिभाषित भी किया था। नमन हनुमंथप्पा… शत्-शत् नमन।
Army chief Gen. Dalbir Singh Suhag, Air Chief Marshal Arup Raha and Navy chief, Admiral Robin K. Dhowan paying last respects to Lance Naik Hanumanthappa.
डॉ.शांति यादव जहाँ प्रदेश स्तर पर नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक स्थापित नाम है वहीं राष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात शिक्षाविद, कवयित्री एवं लेखिका के रूप में शुमार की जाती है | इसके अलावे संस्कृति व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी डॉ.यादव कई संस्थाओं से जुड़कर समाज सेवा में संलग्न रही हैं | स्त्री-विमर्श एवं सामाजिक-विमर्श पर इनके द्वारा कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की रचनाएं भी की गई हैं |
मधेपुरा जिला शिक्षक संघ की अध्यक्षा एवं शिवनंदन प्रसाद मंडल प्लस टू विद्यालय में प्राचार्य रह चुकी उसी डॉ.शांति यादव को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रयालय द्वारा- जिला महिला सम्मान 2014 के लिए चयनित किया गया था, परन्तु प्रमाण-पत्र देने में अकारण विलम्ब हो गया |
मधेपुरा के डायनेमिक जिला पदाधिकारी मो.सोहैल ने शांति यादव को ‘जिला महिला सम्मान 2014’का प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया और उन्होंने यह भी कहा कि डॉ.शांति यादव को बुनियादी स्तर पर महिला सशक्तिकरण के बाबत उनके नि:स्वार्थ असाधारण कार्यों के लिए जिला महिला सम्मान-2014 से सम्मानित किया जा रहा है |
शहर में कुछ स्कूल तो ऐसे हैं जो रात-दिन छात्रों को ऊँचाई प्रदान करने में लगे रहते हैं- जिसे कोई ऊँगली पर गिनने लगेगा तो प्राय: यहीं से शुरू करेगा- हॉली क्रॉस, किरण पब्लिक, माया विद्या निकेतन, वेलडन फ्यूचर, दार्जीलिंग पब्लिक, तुलसी पब्लिक, साउथ पॉइंट, ज्ञानदीप, जीतेन्द्र पब्लिक………आदि, आदि, परन्तु किरण पब्लिक स्कूल के प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश को इस नव वर्ष में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से आई.आई.टी. दिल्ली में इंस्पायरिंग बेस्ट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया जिसे शहर के शिक्षाविदों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा मधेपुरा के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण कोसी अंचल के लिए गौरव की बात कही जा रही है |
मधेपुरा अबतक को मौके पर अमन प्रकाश ने कहा कि इससे पूर्व किरण पब्लिक स्कूल की निदेशिका किरण प्रकाश को वर्ष 2014 में शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्य न्यायमूर्ति पी.एन.भगवती एवं पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जी.वी.जी.कृष्णनमूर्ति द्वारा “शिक्षकश्री” सम्मान से सम्मानित किया गया था |
इस अवसर पर किरण पब्लिक स्कूल के समस्त शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं में खुशियाँ व्याप्त हैं और सबों ने स्कूल में एक सम्मान समारोह आयोजित कर उप-प्राचार्य किशोर कुमार ठाकुर की अध्यक्षता में प्रबन्ध निदेशक अमन प्रकाश को स्मारिका-गुलदस्ता से सम्मानित किया |