कौशिकी द्वारा आयोजित की गई लोकगीतों के विभिन्न आयामों पर परिचर्चा

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अम्बिका सभागार में आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की | उन्होंने विस्तार  से कोसीतट के निवासियों के हर्ष-विषाद के श्वेत-श्याम चित्र के साथ-साथ आत्मा से निकले विदग्ध स्वरों को बखूबी परोसा और दर्शकों की तालियाँ बटोरी |

सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने लोकगीत पर डी.लिट. प्राप्त मुख्यवक्ता  डॉ.विनय कुमार चौधरी के शोधकार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि कोसी अंचल में ब्रजेश्वर मल्लिक, नन्द किशोर लाल नन्दन एवं हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ आदि कोसी गीत के नायक माने जाते हैं |

मुख्यवक्ता डॉ.विनय कुमार चौधरी ने विस्तार से कोसी गीत में करुण रस की चर्चा करते हुए कहा कि भाषा और छंद के बन्धनों से मुक्त है कोसी गीत | उन्होंने कहा कि कोसी गीतों में कोसीवासियों की जीवन वेदना की सरल,सहज एवं सौम्य अभिव्यक्ति है और यह भी कि कोसी गीत कोसी अंचल की अनमोल धरोहरें है |

पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के. मंडल, डॉ.अमोल राय, रघुनाथ प्र.यादव, प्राण मोहन यादव एवं वार्ड पार्षद ध्यानी यादव ने कहा कि कोसी के झाँझर, झूमर, पूजा गीत एवं सोहान गीत सहित अन्य गीतों से कोसी तट का ग्राम्य परिवेश सदा गूंजता रहा है और भविष्य में भी गूंजता रहेगा |

द्वितीय सत्र में सुकवि परमेश्वरी प्रसाद मंडल ‘दिवाकर’ की स्मृति में आयोजित काव्य गोष्ठी का संचालन डॉ.अलोक कुमार एवं उल्लास मुखर्जी ने किया जिसमें संयोजक द्वय सहित संतोष सिन्हा, मणिभूषण वर्मा, द्विजराज, राजूभैया, रतन स्वरुप, राकेश कुमार, आशीष कुमार, चन्दन कुमार, सिया राम यादव मयंक, डॉ.अरविन्द श्रीवास्तव, आस्था प्रिया, विकास कुमार, सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ आदि ने काव्य पाठ किया|

अंत में मुख्यवक्ता डॉ.विनय कुमार चौधरी को कौशिकी की ओर से अंगवस्त्रम से अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ द्वारा सम्मानित किया गया |

Director of Tulsi Public School Shyamal Kumar Sumitra, the grand performer, receiving honour by former PVC Dr.K.K.Mandal, Kaushiki President Hari Shankar Shrivastav Salabh .
Director of Tulsi Public School Shyamal Kumar Sumitra, the grand performer, receiving honour by former PVC Dr.K.K.Mandal, Kaushiki President Hari Shankar Shrivastav Salabh and Sachiv Dr.Madhepuri .

साथ ही आयोजित पुलिस सप्ताह के समापन समारोह में तुलसी पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा विकास कुमार के निर्देशन में प्रदर्शित किये गये सांस्कृतिक  कार्यक्रमों में प्रथम आने के उपलक्ष्य में निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र को मोमेंटो देकर कौशिकी के सचिव डॉ.मधेपुरी द्वारा सम्मानित किया गया |

धन्यवाद् ज्ञापन कौशिकी के संस्थापक पं. युगल शास्त्री प्रेम की पुत्रवधू तारा शरण ने किया |

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लालूजी, ‘मानसिक आज़ादी’ की ये ‘लड़ाई’ अभी और इस तरह क्यों..?

बिहार में गरीबों को मानसिक आज़ादी 1990 के बाद मिली यानि लालू के मुख्यमंत्री बनने पर। जी हाँ, ये कहना है स्वयं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का। वे केवल इतना ही कहते तो एक बात थी, उन्होंने साथ में ये भी कहा कि उनके उलट भाजपा के लोग आरएसएस के गुरु गोलवलकर की विचारधारा पर चलते हैं। उनकी विचारधारा दलितों और गरीबों का दमन करने की है। उनका आरोप है कि उनके बार-बार कहने पर भी केन्द्र जातीय जनगणना से भागता रहा।

पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए लालू ने कहा कि हम और नीतीश अलग थे इसलिए भाजपा का दांव लोकसभा चुनाव में चल गया। संसद में जिस तरह केन्द्र के मंत्री भाषण दे रहे हैं, उसे देख अफसोस होता है कि हम वहाँ नहीं हैं। हम वहाँ होते तो उनको जवाब मिलता। उन्होंने कहा कि जेएनयू में कन्हैया ने मेरे और नीतीश कुमार के सवालों को उठाया तो केन्द्र सरकार उसे देशद्रोही कह रही है, जबकि वह खुद देशद्रोही है। नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में ही जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान का झंडा फहराया गया।

लालू के अनुसार भाजपा राज्य सरकार को ‘अस्थिर’ करने का मौका खोज रही है। भाजपा के लोग कहते हैं कि लालू प्रसाद सरकार नहीं चलने देंगे। उन्होंने कहा कि लोगों में गलत संदेश ना जाय इसीलिए वे और नीतीश कुमार फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं।

नीतीश के साथ अपनी एकजुटता बताने और जताने के लिए लालू ये कहना भी नहीं भूले कि राज्य सरकार का ‘सात निश्चय’ हमारा संकल्प है जिसे पूरा करना है। उक्त कार्यक्रम में कला-संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम, सहकारिता मंत्री आलोक मेहता, एससी-एसटी मंत्री संतोष निराला, पूर्व मंत्री श्याम रजक, विधायक चंदन राम, राजेन्द्र राम, मुंद्रिका सिंह यादव आदि उपस्थित थे।

बिहार की राजनीति में लालू की अहमियत जितना उनके समर्थक मानते हैं, शायद उससे कहीं अधिक उनके विरोधी। इसमें भी कोई दो राय नहीं कि बिहार में जब भी ‘सामाजिक न्याय’ की बात होगी, वो लालू के बिना पूरी नहीं होगी। पर जहाँ तक गरीबों को मानसिक आज़ादी दिलाने के दावे का प्रश्न है, बेहतर यह होता कि लालू ये औरों को कहने देते। अगर उनका ‘अवदान’ सचमुच इतना बड़ा है तो समय उसका ‘मूल्यांकन’ हर हाल में करेगा। ‘मानसिक आज़ादी’ की ये ‘लड़ाई’ अभी और इस तरह क्यों..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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… और लालू ने दी अपने उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी को चेतावनी..!

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने छोटे बेटे और महागठबंधन सरकार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भरी सभा में चेतावनी दे डाली। ‘प्यार’ और ‘अधिकार’ भरी ये चेतावनी बिहार के नौजवानों को बेरोजगारी भत्ता दिलाने के लिए थी।

मौका सहकारिता सम्मेलन का था। लालू ने उपमुख्यमंत्री तेजस्वी को अपने ख़ास अंदाज में चेतावनी देते हुए कहा कि “तेजस्वी, अगर बेरोजगारों को भत्ता नहीं मिला तो तुम समझ लेना, क्या हाल होगा।” लालू के मुँह से अचानक ऐसी बात सुन सम्मेलन में एकबारगी सन्नाटा छा गया।

लालू ने इस अवसर पर केन्द्र सरकार पर भी हमला बोला। ‘मेक इन इंडिया’ नारे को ढकोसला करार देते हुए उन्होंने कहा कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। देश का दिवाला निकल रहा है और मोदी सरकार बुलेट ट्रेन की बात कह जनता को गुमराह कर रही है।

लालू ने आज जिस तरह तेजस्वी को चेतावनी दी, ठीक उसी तरह उनके समधी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भी अपने बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ‘ख़बर’ लेते हैं। आए दिन कार्यकर्ताओं के बीच और यहाँ तक कि सरकारी सभाओं में भी उनके द्वारा अखिलेश को ‘फटकार’ लगाने की ख़बरें आती हैं। ऐसा कर ये दिग्गज जहाँ अपनी अगली पीढ़ी को राजनीति का ‘पाठ’ पढ़ा रहे होते हैं वहीं आम लोगों के बीच उनकी ‘छवि’ भी बन रही होती है।

हाल के दिनों में बिहार में आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ है और विपक्ष इसके लिए लगातार लालू को ‘घेरने’ की कोशिश में लगा हुआ है। ऐसे में लालू ने तेजस्वी को चेतावनी दे एक तीर से कई निशाना साधने की कोशिश की है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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महागठबंधन का पहला बजट : क्या सचमुच बिहार में शिक्षा के दिन बहुरेंगे..?

वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आज महागठबंधन सरकार का पहला बजट पेश किया। 2016-17 के इस बजट के केन्द्र में नीतीश के ‘सात निश्चय’ हैं। बजट में सभी तबकों का ध्यान रखा गया है और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग दुहराई गई है। सबसे ख़ास बात ये कि इस बजट में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। अब उम्मीद की जा सकती है कि बिहार में शिक्षा के दिन बहुरेंगे।

बिहार के वित्त मंत्री ने 2016-17 के लिए पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 24,491 करोड़ रुपये अधिक का बजट पेश किया। बीते वर्ष का कुल बजट 1,20,185 करोड़ था जबकि इस वर्ष का बजट 1,44,696 करोड़ है। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि बिहार का विकास दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। पिछले दस सालों में बिहार का विकास दर 10.50 प्रतिशत रहा है।

सिद्दीकी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा पर सबसे अधिक जोर दिया है। इस कारण सरकार ने शिक्षा के लिए सर्वाधिक 21,897 करोड़ की राशि आवंटित की है। यह राशि योजना एवं गैर योजना मद, दोनों को मिलाकर है। शिक्षा के बाद बजट में सरकार का जोर ऊर्जा पर है। ऊर्जा के लिए 14,370.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। तीसरे नंबर पर स्वास्थ्य विभाग है। स्वास्थ्य के लिए इस बजट में 8,234.70 करोड़ का प्रावधान है।

बजट में उपरोक्त क्षेत्रों के अतिरिक्त पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सिंचाई एवं आधारभूत संरचना विकास, कृषि क्षेत्र में उत्पादकता एवं तकनीकी प्रशिक्षण, युवाओं के लिए कौशल विकास, नारी-सशक्तिकरण और पंचायती व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण का भी ध्यान रखा गया है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि महागठबंधन सरकार अपने पहले बजट से उम्मीद बंधाती नज़र आती है। सरकार ने बजट तैयार करने में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नज़र रखी है। बजट में ऐसी कई बातें हैं जो सुनने और पढ़ने में अच्छी लगती हैं लेकिन बात तो तब बनेगी जब सपने ज़मीन पर उतरेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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Madhepura में ‘हिन्दुस्तान’ द्वारा किया गया हास्य कवि सम्मलेन का आयोजन

शहर के बीच शहीद चुल्हाय मार्ग पर स्थित चन्द्रिका यादव के माया विद्या निकेतन के परिसर में ‘हिंदुस्तान’ के ब्युरोचीफ ‘अमिताभ’ की टीम के जाँवाजों की मेहनत से मंगलवार की शाम ‘यादगार’ तब बन गई जब हास्य कवियों के तीखे व्यंगवाणों  एवं कटाक्षों के बीच बुद्धिजीवी श्रोतागण देर रात तक हँसते रहे, ठहाके पर ठहाके लगाते रहे और लोट-पोट होते रहे | सबों ने कहा हिंदुस्तान का ब्युरोचीफ़ अमिताभ ने किया कमाल और मध्य-प्रदेश से आये हास्य कवि सम्राट शशि कान्त यादव की प्रस्तुति रही बेमिसाल !

VIP Guests Sitting from L to R- Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi, DPO Md.Q.Ansari, DM Md.Sohail, ASP Rakesh Kumar, Registrar Dr.B.N.Viveka and Samajsevi Dr.Madhepuri .
VIP Guests Sitting from L to R- Zila Parishad Adhyaksha Manju Devi, DTO Md.Q.Ansari, DM Md.Sohail, ASP Rakesh Kumar, Registrar Dr.B.N.Viveka and Samajsevi Dr.Madhepuri .

हास्य कवि सम्मलेन का उद्घाटन जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल द्वारा जिला परिषद् अध्यक्षा मंजू देवी, ऑल राउंडर ए.एस.पी. राजेश कुमार, बी.एन.एम.यू.कुलपति डॉ.विनोद कुमार द्वारा ईम्पावर्ड प्रभारी कुलसचिव डॉ.विश्वनाथ विवेका एवं हमेशा कुछ नया करने वाले ‘हिन्दुस्तान’ के ब्युरोचीफ़ अमिताभ की गरिमामयी उपस्थिति में संयुक्तरूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया | स्वागतगान के बाद अतिथियों एवं कवियों को बुके व मोमेंटो देकर अमिताभ द्वारा अभिनंदन किया गया– जो समाज को जोड़ते हैं, तनाव को तोड़ते हैं और हर शब्द में हँसी का रंग भरते हैं |

हमेशा घरों से बाहर रहने वाले चर्चित कवियों– डॉ.विष्णु सक्सेना, कवियित्री डॉ.भुवन मोहिनी, हास्य कवि सम्राट शशिकांत यादव, मुकुल महान, डॉ.अनिल चौबे, राम बाबू सिकरवार एवं क्षितिज उमेन्द्र मधेपुरा के लोगों को निरंतर ठहाके लगाने के लिए अपने-अपने गीतों एवं कला कौशलों से नई-नई ऊर्जा प्रदान करते रहे |

Minister Prof.Chandrashekhar enjoying the moment along with Dr.Madhepuri, Registrar, ASP, DTO, Zila Parishad Adhyaksha and others .
Minister Prof.Chandrashekhar enjoying the moment along with Dr.Madhepuri, Registrar, ASP, DTO, Zila Parishad Adhyaksha and others .

बहुत विलम्ब से पहुंचे बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर सहित शहर के प्रतिष्ठित जनों डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.शांति यादव, अधिवक्ता धीरेन्द्र कुमार झा, कृतनारायण यादव, डॉ. विनय कुमार चौधरी, डॉ.पूनम यादव, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.जवाहर पासवान, डॉ.मुस्ताक, डॉ.नायडू, श्वेतकमल उर्फ़ बौआ जी, प्रशांत कुमार के अलावे जिला प्रसाशन, पुलिस प्रसाशन, व्यापार संघ, छात्र संघ के पदाधिकारियों के साथ-साथ सुधी श्रोताओं की बड़ी भीड़ को देर रात तक बाँधे रखने में हास्य कवि सम्राट शशिकान्त यादव की महारत केवल दर्शनीय ही नहीं बल्कि सर्वाधिक प्रशंसनीय भी बनी रही | श्री यादव ने सुधीश्रोताओं को यह सिद्ध कर दिखा दिया कि गीत के शब्दों को परोसने की कला मात्र से ही लोगों के मानसिक तनाव का हरण करना उनके लिए बायें हाथ का खेल है | सच है कि शशिकांत ने योग की चर्चा किये बगैर स्वामी रामदेव से कहीं ज्यादे तालियाँ श्रोताओं से बजवा ली | मधेपुरा अबतक हास्य कवि शशिकांत यादव को और ब्युरोचीफ़ अमिताभ के इस कार्यक्रम को सदा याद करता रहेगा |

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केन्द्र से अधिक ‘स्मार्ट’ होने का दावा नीतीश का ‘असंयम’ या ‘आत्मविश्वास’..?

बिहार चुनाव में महागठबंधन की जीत के कई कारण गिनाए गए हैं लेकिन सच ये है कि जिस चीज ने नीतीश की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई वो है नीतीश का ‘संयम’ जिसे उन्होंने तमाम ‘वार’ झेलते हुए भी पूरे चुनाव में निभाया। दूसरी ओर शुरुआती हवा एनडीए के पक्ष में दिखने के बावजूद मोदी और उनकी टीम का ‘असंयमित’ व्यवहार उनकी हार का कारण बना। लेकिन लालू और कांग्रेस का साथ लेकर सरकार चला रहे नीतीश के संयम की डोर शायद थोड़ी ‘ढीली’ पड़ रही है..! अब ये उनका ‘असंयम’ है या ‘आत्मविश्वास’ ये तो आने वाला वक्त बताएगा, बहरहाल आज उन्होंने ये बयान दिया है कि केन्द्र केवल ‘बातों’ में स्मार्ट है, जबकि ‘हम’ काम करने में स्मार्ट हैं।

आज सीएम सचिवालय के संवाद कक्ष में विभिन्न योजनाओं की शुरुआत एवं लोकार्पण करते हुए स्मार्ट सिटी के मुद्दे पर केन्द्र को आड़े हाथ लेते हुए नीतीश ने कहा कि हमें स्मार्ट सिटी की चिन्ता नहीं है। केन्द्र सरकार प्रत्येक स्मार्ट सिटी को हर वर्ष सौ करोड़ रुपये देगी। इससे क्या होगा..? कोई शहर कितना स्मार्ट बनेगा..? पाँचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के तहत हम आठ हजार करोड़ रुपये देंगे।

नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार ने सौ शहरों को स्मार्ट बनाने की बात की थी, जबकि चयन केवल बीस का ही किया गया। बिहार को छोड़ दिया गया। अब हम अपने प्रयासों से शहरों को मजबूत बनाएंगे। इसके लिए शहरी अभियंत्रण संगठन बनाया जा रहा है जो निकायों के लिए इंजीनियरिंग क्षेत्र में लाभप्रद होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री ने अपने सात निश्चयों को मिशन मोड में पूरा करने का संकल्प जताया। उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांव तक हमें हर हाल में नल का पानी उपलब्ध कराना है। पेयजल योजनाओं को नगर निकायों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सात निश्चयों में शामिल ‘हर घर में शौचालय’ के लिए भी उन्होंने प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि केन्द्र से इसके लिए सिर्फ चार हजार रुपये दिए जाते हैं। राज्य सरकार ने इसमें अपनी ओर से आठ हजार रुपये जोड़े हैं ताकि शौचालय निर्माण में कोई कमी ना रह जाय। उन्होंने नाली निर्माण और हर घर में बिजली के मुफ्त कनेक्शन की बात भी दुहराई।

नीतीश-राज में जनप्रतिनिधि आमतौर पर ‘अफसरशाही’ से त्रस्त रहे हैं। लेकिन आज नीतीश ने कहा कि निर्णय जनप्रतिनिधि को लेना है। अफसर का काम उन्हें क्रियान्वित करना है। उन्होंने अफसरों को काम के जरिए ‘पावरफुल’ होने की नसीहत दी और कहा कि काम से ही किसी के दिल में जगह बनती है।

नीतीश काम करने के लिए जाने जाते हैं। बिहार की जनता ने उन्हें पाँचवीं बार चुना भी इसीलिए है। नीतीश जैसे ‘मैच्योर्ड’ राजनेता को अच्छी तरह पता है कि केन्द्र से ‘सकारात्मक’ संबंध के बिना किसी राज्य का ‘निर्बाध’ विकास सामान्यतया संभव नहीं है। उन्हें चाहिए कि राज्य के हित के लिए ‘राजनीति’ से ऊपर उठें और जनता के विवेक पर भरोसा करें। सूचना-क्रांति के इस युग में जनता तक सही-गलत पहुँचने में वैसे भी देर नहीं लगती। और हाँ, अपना ‘संयम’ और अपनी ‘शालीनता’ तो वो हर हाल में बना कर रखें क्योंकि ये उनकी या किसी भी सफल व्यक्ति की सबसे बड़ी ‘पूंजी’ होती है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा कॉलेज में ‘भ्रष्टाचार’ पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार

यू.जी.सी. नई दिल्ली द्वारा निर्धारित “भ्रष्टाचार: कारण व निवारण” विषय पर  मधेपुरा कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार एवं सेमिनार के सह-संयोजक डॉ.पूनम यादव ने बड़े ही मनोयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया जिसमें बी.एन.एम.यू. के प्रतिकुलपति डॉ.जयप्रकाश ना.झा, बलिया उत्तर प्रदेश के जिला न्यायाधीश डॉ.रामलखन सिंह यादव, झारखण्ड के सिद्धू कानू वि.वि. के ख्यातिप्राप्त अर्थशास्त्री डॉ.नागेश्वर शर्मा, मंडल वि.वि. के शिक्षाविद डॉ.ब्रह्मदेव साह, डॉ.अशोक कुमार आलोक, डॉ.नरेन्द्र श्रीवास्तव, प्रो.शचीन्द्र, प्रो.सच्चिदानन्द, डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित स्नातकोत्तर विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्री डॉ.आर.के.पी.रमण, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.विनय कुमार चौधरी, समाजशास्त्री डॉ.आलोक कुमार, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.मुस्ताक, प्रो.मनोज भटनागर, डॉ.भगवान् कुमार मिश्र, प्रो.मणिभूषण वर्मा, प्रो.अजय कुमार, आदि द्वारा भ्रष्टाचार को समाज के लिए कैंसर करार देते हुए उसके कारण एवं निवारण पर दो दिनों यानी 20 एवं 21 फरवरी को कई सत्रों में विस्तार से चर्चाएँ हुई | अलग-अलग हॉल में शोधार्थियों द्वारा आलेख प्रस्तुत/वाचन किये गये |

Grand Success of National Seminar on- "Corruption- Causes & Remedies" at Madhepura College Madhepura .
Grand Success of National Seminar on- “Corruption- Causes & Remedies” at Madhepura College Madhepura .

इस राष्ट्रीय सेमिनार में पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज,  मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, अररिया, खगड़िया जिले के अतिरिक्त सम्पूर्ण बिहार के शोधार्थी, शिक्षक एवं इच्छुक छात्र-छात्राएँ भी भाग लिए | सौ से अधिक शोधार्थियों की भागीदारी हुई | सबों ने अपने आलेख के माध्यम से यही कहा कि भ्रष्टाचार घुन की तरह समाज को निष्प्राण कर रहा है | भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सबों को मिलकर संघर्ष करना होगा |

Research Scholars, Teachers & Audience present in the Seminar Hall of Madhepura College Madhepura .
Research Scholars, Teachers & Audience present in the Seminar Hall of Madhepura College Madhepura .

न्यायविद डॉ.रामलखन सिंह यादव ने न्यायिक सन्दर्भ के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक व शैक्षिक सन्दर्भों आदि की भी विस्तार से चर्चाएँ की और कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ में राजनेताओं की सोच है | वहीं डॉ.नागेश्वर शर्मा द्वारा आजादी के बाद से अबतक के तमाम अनगिनत घोटालों का विस्तार से चर्चाएँ की गयी | प्रतिकुलपति डॉ.जयप्रकाश ना.झा ने भ्रष्टाचार की चर्चा करते हुए ट्रेन में चेन पुल करने की भी बातें कही | संपादक चंदन शर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार की जड़ में जनता है जो हर जुल्म को सहते आ रही है जबकि देश में भ्रष्टाचार की स्थिति विस्फोटक है |

स्थानीय शिक्षा शास्त्रियों- प्रो.शचीन्द्र, अर्थशास्त्री प्रो.सच्चिदानन्द ने विस्तार से क्रमशः धार्मिक एवं आर्थिक संदर्भों की व्याख्या करते हुए भ्रष्टाचार के छोटे-बड़े उदाहरणों को प्रस्तुत किया |

Dr.Madhepuri addressing the audience in the Seminar Hall .
Dr.Madhepuri addressing the audience in the Seminar Hall .

समाजसेवी व भौतिकी के विद्वान् डॉ.मधेपुरी ने समाजवादी मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल एवं भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के साथ बिताये गये मार्मिक क्षणों को उद्घाटित किया और कहा कि ऐसे सहज जीवन के धारकों की जीवनी स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किये जाँय | उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के पूर्व न जाति थी और न पार्टी, बल्कि आजादी जैसे ऊँचे उद्देश्य की प्राप्ति के समक्ष- भ्रष्टाचार भी विलीन हो गया था | आजादी के बाद हमारे राजनेताओं द्वारा ऐसे किसी उद्देश्य के लिए देश को जगाया नहीं जा सका जिसके कारण लोगों ने खुद को आंतरिक विकारों के अधीन करके भ्रष्टाचार को गले लगा लिया | निवारण के लिए आर्थिक असमानता को दूर करना होगा तथा त्याग व आत्म नियंत्रण को गले लगाना होगा | डॉ.मधेपुरी ने इस सेमिनार में आयोजित कविगोष्ठी एवं मुशायरा में अपनी जिन पंक्तियों के माध्याम से तालियाँ बटोरी- वे हैं :-

आजादी मिल गई हमें, पर हम अपनी पहचान भुलाये |
ऊपर से हम कहें बुरा, पर लूट हमें अन्दर से भाये ||
लो मिली मुल्क को आजादी, सचमुच हम आजाद हो गये |
पूर्वज की गौरव समाधि पर, लेकिन हम सौ बार रो गये ||

कविगोष्ठी में रांची के मो.अनवर, सैयद अख्तर, मनीभूषण वर्मा, जयश्री, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.इन्द्र ना.यादव, मनोज झा, भारती-आरती-अपर्णा आदि ने भाग लिया तथा मंच संचालन डॉ.काश्यप एवं डॉ.विनय कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से किया | सुधि श्रोता के रूप में डॉ.अमोल राय, डॉ.नूतन आलोक, डॉ.वीणा कुमारी, डॉ.अर्जुन, प्रो.एन.के.सिंह, प्रो.शोभा कुमारी, प्रो.अभय कुमार, डॉ.बद्री नारायण यादव, प्रो.आशा शर्मा, नन्द किशोर यादव, सचिव सच्चिदानन्द, डॉ.अरुण कुमार आदि अंत तक जमे रहे |

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पप्पू की मानें तो “90% सांसद और विधायक नहीं रह सकते शराब और शबाब के बिना”..!

इसमें कोई दो राय नहीं कि हम सब ‘गिरावट’ के दौर से गुजर रहे हैं। निजी या सार्वजनिक जीवन में संस्कार, विचार, चरित्र और व्यवहार की जैसी गिरावट अभी देखने को मिल रही है वैसी मानव-सभ्यता के सम्पूर्ण इतिहास में शायद ढूंढे ना मिले। पर वो ‘गिरावट’ क्या इस कदर ‘गिर’ गई है कि सौ में नब्बे उसकी गिरफ्त में दिखने लगें। अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाले जन अधिकार पार्टी के नेता और मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव की मानें तो राजनीति के क्षेत्र में गिरावट का आंकड़ा यही ठहरता है। जी हाँ, पप्पू ने अपने एक सनसनीखेज बयान में कहा है कि 90% सांसद और विधायक शराब और शबाब के बिना नहीं रह सकते।

एक निजी कार्यक्रम के सिलसिले में सीवान पहुँचे पप्पू यादव ने पिछले दिनों राजद विधायक राजबल्लभ यादव पर लगे एक ‘नाबालिग’ से दुष्कर्म के आरोप की पृष्ठभूमि में कहा कि अब ठेकेदार, रंगदार, अपराधी, बिल्डर और अपहरणकर्ता सांसद और विधायक बन रहे हैं। ऐसे में राजनीति में ‘नैतिकता’ और ‘स्वच्छता’ आ ही नहीं सकती। राजबल्लभ प्रकरण में उन्होंने यह भी कहा कि जिस महिला ने विधायक तक ‘नाबालिग’ को पहुँचाया था, उसने खुद कहा है कि वह कई सांसदों-विधायकों को लड़कियां ‘सप्लाई’ करती है। ऐसे तमाम नेताओं की जाँच होनी चाहिए।

बीते विधानसभा चुनाव में अपने तमाम दावों के धाराशायी होने के बाद पहली बार आक्रामक दिख रहे पप्पू ने राज्य की वर्तमान स्थिति पर बड़ी तल्ख टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि यहाँ अपराध और अपराधी बेलगाम हो गए हैं। उनके अनुसार ये स्थिति इसलिए है कि तीन-तीन सीएम मिलकर राज्य की सरकार चला रहे हैं। नीतीश कुमार राजनीतिक सीएम हैं, प्रशांत किशोर टेक्निकल सीएम और लालू सर्वेसर्वा सीएम, जो अपराधियों को संचालित करते हैं। ऐसे में राज्य में अपराध बढ़ना लाजिमी है।

स्वयं पप्पू यादव के साथ उनके राजनीतिक जीवन के आरंभ से ही ‘बाहुबली’ का टैग लगा हुआ है। सच ये है कि इस ‘टैग’ से उन्हें ‘नुकसान’ कम और ‘लाभ’ अधिक हुआ है। ऐसे में वो अगर आज की राजनीति को बदलने की बाद करते हैं तो ये बात चौंकाने के साथ-साथ कहीं-ना-कहीं थोड़ी उम्मीद भी बंधाती है। लेकिन ये कैसे भूला जा सकता है कि पप्पू जिस लालू को आज अपराधियों का ‘संचालक’ बता रहे हैं, हाल तक उन्हीं की राजनीतिक विरासत पर वो अपना दावा ठोक रहे थे।

लेकिन हाँ, पप्पू के इस दावे पर जरूर लम्बी और बड़ी बहस होगी कि 90% सांसद और विधायक शराब और शबाब के बिना नहीं रह सकते। जो व्यक्ति स्वयं तकरीबन ढाई दशक से विधायक और सांसद रहता आया हो उसका ऐसा दावा करना कतई हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कन्हैया कुमार : ‘देशद्रोही’ या बिहार के बीहट से निकली बड़ी ‘संभावना’?

कन्हैया कुमार… पिछले दस दिनों से देश की सारी सुर्खियाँ बस इस एक नाम के इर्द-गिर्द हैं। टीवी, अख़बार और सोशल मीडिया की सारी बहसें मंझोले कद के, दुबले-पतले-से, दाढ़ी वाले इस शख़्स को लेकर हो रही हैं। फिलहाल दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद इस शख़्स की रिहाई के लिए जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय ही नहीं गुजरात के वडोदरा विश्वविद्यालय और आंध्रप्रदेश की हैदराबाद सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी तक के छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। एक ओर उसके नाम पर पटना की सड़कों पर झड़पें हो रही हैं तो दूसरी ओर उसका नाम केरल की विधानसभा में गूंज रहा है। गुआहाटी में पूरब के बुद्धिजीवी और कलाकार सड़कों पर उतर आए हैं तो चेन्नई में तमिल लोकगायक कोवान कन्हैया के लिए ‘गीत’ गाते हुए हिरासत में लिए जा रहे हैं। एक ओर अपार समर्थन मिल रहा है उसे तो दूसरी ओर गृहमंत्री उसे देश के लिए ‘खतरा’ बता रहे हैं और उस पर ‘देशद्रोह’ का मुकदमा चलाने की बात हो रही है। आखिर कौन है ये कन्हैया कुमार..? और उससे भी बड़ा सवाल ये कि क्यों है उसके नाम पर इतना बड़ा विरोधाभास..?

बिहार के बेगूसराय जिला स्थित बीहट गांव के बेहद गरीब परिवार से आते हैं कन्हैया कुमार। बीहट से निकलकर मोकामा और फिर पटना के कॉमर्स कॉलेज होते हुए जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद तक पहुँचना कतई आसान नहीं था उनके लिए। क्रांतिकारियों-सा जज्बा और कम्यूनिस्ट विचारधारा के प्रति ‘नि:स्वार्थ’ समर्पण उन्हें विरासत में मिला। कभी मजदूर रहे और अब लकवाग्रस्त हो चुके पिता का पुत्र जिसका घर आंगनबाड़ी सेविका माँ की नाममात्र कमाई से चल रहा हो उसका ना तो ‘संघर्ष’ झूठा हो सकता है और ना ही उसके कुछ कर गुजरने की ‘ललक’ में लेशमात्र छलावा हो सकता है। फिर क्यों इस कन्हैया के नाम पर ‘राजनीति’ की रोटियां सेकी जा रही हैं..?

सौ आने ‘सच्ची’ है कन्हैया के भीतर की ‘आग’ पर जब आग की लपटें ज्यादा तेज हों और उसे ‘आवारा’ हवा की थोड़ी भी संगत मिल जाए तो ‘दिशा’ भटक जाना कोई बड़ी बात नहीं। बस यही और इतना ही ‘कसूर’ था कन्हैया कुमार का। करीब 22 मिनट के उस विवादित दिन के वीडियो को गौर से देखें। इसमें कन्हैया संविधान, लोकतंत्र और तिरंगे के सम्मान की बात कर रहे हैं। व्यवस्था से शिकायत है उन्हें और बदलाव की जरूरत बता रहे हैं वो। हाँ, उन्होंने आरएसएस, भाजपा और मनुवाद की मुखालफत की बात भी की लेकिन क्या इसके लिए उन पर ‘देशद्रोह’ का मुकदमा ठोक दिया जाय..? नहीं, हरगिज नहीं। बात यहीं तक रहती तो ठीक था। पर अपनी ‘रौ’ में कन्हैया ये भी कह गए कि कौन है कसाब..? कौन है अफजल गुरु..? कौन हैं ये लोग जो अपने शरीर में बम बांधकर हत्या करने को तैयार हैं..? इन पर यूनिवर्सिटी में बहस होनी चाहिए।

अगर कन्हैया का विरोध “फांसी’ के लिए था और वो इस पर ‘बहस’ चाहते थे तो उन्हें बस वहीं तक रहना चाहिए था। उनके प्रति पूरी सहानुभूति होने के बावजूद कसाब या अफजल तक उनका पहुँचना अखरता है। वो बेजोड़ और जोशीले वक्ता हैं इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन जोश के साथ होश का ख्याल उन्हें हर हाल में रखना चाहिए था। तब तो और भी ज्यादा जब मुद्दा इतना संवेदनशील हो, कैंपस जेएनयू का हो और वो स्वयं छात्रसंघ के अध्यक्ष की हैसियत से बोल रहे हों। उस वक्त किसी भी तरह के ‘अतिवाद’ से बचने की नैतिक जिम्मेदारी बनती थी उनकी। माना कन्हैया से ‘भूल’ हुई लेकिन उस ‘भूल’ को ‘अपराध’ कहना और ‘देशद्रोह’ करार देना उससे भी बड़ी ‘भूल’ होगी। ऐसी कोशिश करने वालों को आँखें खोलकर देखना और सोचना चाहिए कि कन्हैया के समर्थन में हो रहे प्रदर्शनों में ‘भगत सिंह’ और ‘रोहित वेमुला’ की तस्वीरों वाली तख्तियां क्यों हैं..?

जेएनयू कैंपस में हुए 9 फरवरी के उस विवादित कार्यक्रम के ‘अलग-अलग’ विडियो सामने लाए जा रहे हैं। तस्वीरों से ‘छेड़छाड़’ की जा रही है। ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि कन्हैया ने देशविरोधी नारे लगाए और वो ‘देशद्रोही’ हैं। ये सारी कवायद तकलीफदेह है। जरूरत इस बात की है कि कन्हैया जैसे छात्रों की ‘धार’ से बदहाल व्यवस्था के ढाँचे और साँचे को तराशा जाय। उनके भीतर की ‘आग’ से देश के लिए ‘ऊर्जा’ पैदा की जाय। वामपंथ या दक्षिणपंथ का चश्मा लगाकर हम किसी ‘कन्हैया’ को करीब से नहीं जान पाएंगे। पहले हम ऐसे किसी भी चश्मे को उतारें, फिर देखें कि बिहार के बीहट से कितनी बड़ी ‘संभावना’ ने जन्म लिया है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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