जापान की राजधानी टोक्यो में पैरालंपिक खेल का आयोजन 24 अगस्त से 5 सितंबर तक होने जा रहा है और जापान सरकार ने कोविड-19 से निपटने के लिए 12 सितंबर तक आपातकाल लागू कर दिया है। ऐसा इसलिए कि विश्व के सभी देशों के पैरालंपिक खिलाड़ियों को लेकर जापान सरकार को चिंता बनी हुई है।
बता दें कि जापान के अस्पतालों द्वारा कोविड-19 के मरीजों को लौटाए जाने की शिकायतें आने लगी हैं। एहतियात के तौर पर यह आपातकाल 12 सितंबर तक कड़ाई के साथ लागू रहेगा। विशेष रूप से रेस्तरां और बार को भी रात्रि 8:00 बजे तक काम बंद करने की हिदायत दे दी गई है।
जानिए कि विश्व भर में अब तक कोरोना वायरस से कुल 44.03 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कुल 21 करोड़ से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से प्रभावित हुए हैं। अमेरिका की हाॅपकिंस यूनिवर्सिटी की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार-
“दुनिया के लगभग 200 देशों एवं क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 21 करोड़ से ज्यादा हो गई है। जबकि 44लाख 3 हजार 579 लोग अब तक कोरोना से जान गवां चुके हैं।”
चलते-चलते यह भी जानिए कि अमेरिका में कोरोना वायरस की रफ्तार फिर से तेज हो गई है और संक्रमितों की संख्या 3.72 करोड़ से अधिक हो गई है। और तो और ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर सिडनी में लॉकडाउन 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है। मास्क लगाना अनिवार्य करने के साथ-साथ कई जगहों पर कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।
सुपौल जिले के बलुआ गांव से लेकर पटना के बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान में केंद्रीय मंत्री व कई बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके राजनीतिज्ञ लेखक एवं विचारक डॉ.जगन्नाथ मिश्र की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। डॉ.मिश्र ताजिंदगी बिहार के विकास के लिए समर्पित रहे। लोग तो उन्हें शिक्षकों का मुख्यमंत्री भी कहा करते हैं।
मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी से उनका स्नेहिल संबंध लेखन के चलते ही निरंतर गहराता चला गया। डॉ.मधेपुरी ने कोरोना वायरस के चलते अपने निवास ‘वृंदावन’ में डॉ.मिश्र को याद करते हुए उनकी द्वितीय पुण्यतिथि पर यही कहा- उन्हें याद है 9 मई, 1981 का वह दिन जिस दिन बी.पी.मंडल की अध्यक्षता में डॉ.मिश्र ने रासबिहारी उच्च विद्यालय के मैदान में 135 वर्ष पुराने अनुमंडल रहने के बाद मधेपुरा को जिला का दर्जा दिया था।
डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों से पुनः कहा कि जब मैंने स्वलिखित पुस्तक ‘इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल’ की एक प्रति लेकर उनके पटना निवास पर उन्हें हस्तगत कराया तो वे किस कदर विह्वल हुए उसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। वह पल मेरे जीवन का चिरस्मरणीय पल रहा है। कुछ महीनों बाद जब दर्जनों पुस्तकों के लेखक डॉ.मिश्र से फिर मिला तो डॉ.मिश्र मेरे हाथों व कंधों को थामकर कह रहे थे-
“इस पुस्तक में शोध और संवेदना का दुर्लभ संगम है। इसे पढ़ते समय कभी मैं सुखद विस्मय से भर उठता तो कभी गौरव की अनुभूति आंखों से छलक पड़ती…। कभी-कभी तो यह सोचता कि यदि डॉ.मधेपुरी यह पुस्तक नहीं लिखी होती तो बिहार की आने वाली पीढ़ी अपने इतिहास के इतने गौरवशाली अध्याय से कैसे अवगत हो पाती…।”
अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि उस महान संवेदनशील लेखक डॉ.मिश्र के जज्बातों को मैं उनकी द्वितीय पुण्यतिथि पर बार-बार सलाम करता हूं।
भारत के पीएम मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर टोक्यो ओलंपिक- 2020 से लौटे सभी खिलाड़ियों को विशेष मेहमान बनाकर हौसला बढ़ाया और दो दिन बाद टोक्यो पैरालंपिक खिलाड़ियों को 24 अगस्त से 5 सितंबर तक जापान की राजधानी टोक्यो में ही बेहतरीन प्रदर्शन करने एवं पदक जीतने हेतु प्रोत्साहित किया।
Sharad Kumar.
इस पैरालंपिक के लिए 54 सदस्य भारतीय खिलाड़ियों के दल में बिहार के भी दो खिलाड़ी शामिल हैं। इन दोनों के प्रति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आशा व्यक्त की है कि पदक जीतकर ये दोनों अवश्य बिहार को गौरवान्वित करेंगे।
Pramod Bhagat.
बता दें कि इस भारतीय टीम में मुजफ्फरपुर के शरद कुमार पैराएथलेटिक्स टीम- 42 कैटेगरी के हाई जंप में और वैशाली के प्रमोद भगत एसएल-3 कैटेगरी के पैरा बैडमिंटन में दमखम दिखाएंगे। आशा है कि नीरज चोपड़ा की तरह ये भी भारत के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त करने में कामयाब होंगे। बिहार के खेल निदेशक संदीप कुमार ने बताया है कि बिहार के इन दोनों खिलाड़ियों की विश्व रैंकिंग में नंबर वन है।
चलते-चलते यह भी बता दें कि कोरोना वायरस के तहत टोक्यो के लिए प्रस्थान करने से पहले शरद कुमार को भोपाल में और प्रमोद भगत को लखनऊ में क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। अंत में यह भी कि समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी को ही नहीं बल्कि संपूर्ण बिहार को भी शरद और प्रमोद से पदक की उम्मीद है।
चार करोड़ की जनसंख्या वाला अफगानिस्तान बड़ी आसानी से तालिबान के कब्जे में आ गया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी चंद रोज कबल यही कहते रहे कि हम अंत तक लड़ेंगे और जीतेंगे। परंतु, तालिबानी लड़ाकों के राजधानी काबुल में घुसने से पहले ही राष्ट्रपति गनी परिवार सहित देश छोड़कर चले गए। अब गनी कहते हैं कि खून-खराबा रोकने के लिए ऐसा किया।
बता दें कि राष्ट्रपति गनी एक कार में 50 लाख अमेरिकी डॉलर लेकर एयरपोर्ट तक गए तो थे, परंतु तालिबानी धमकियों से भयभीत होकर कैश वहीं छोड़ गए। और तो और गनी के जाते ही पूरी अफगान सेना ही गायब हो गई। ऑफिस में महिलाओं का जाना बंद और बिना बुर्के में दिखने वाली महिलाओं की हत्या का तालिबानी ऐलान। 30 वर्ष से कम आयु की लड़कियों, महिलाओं की खोज जारी जिनके साथ तालिबानी लड़ाके ऐश करेंगे…।
जानिए कि एयरपोर्ट पर जान बचाने की जानलेवा दौड़ जारी है। चारों ओर चीख-पुकार ! बड़ी संख्या में लोग हवाई अड्डे की ओर भाग रहे। जल्दी से देश से निकलने की होड़ के कारण तीन अफगानी विमान के पहिए में छिप गए थे जो विमान के उड़ान के वक़्त ही जमीन पर गिरे और मौत को गले लगा लिए।
यह भी कि भारत सरकार ने हालात बेकाबू देखकर वहां के दूतावास अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वापस बुला लिया। फिर भी हजारों फंसे भारतीयों को लाने के लिए एयर इंडिया से कहा कि दो विमान काबुल के लिए रिजर्व रखे जाएं।
मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस ऐलान के वास्ते हृदय से कृतज्ञता ज्ञापित किया है कि उन्होंने देश को ताकतवर और प्रभावशाली बनाने के लिए 75वें स्वतंत्रता दिवस पर कहा- “देश के सभी सैनिक स्कूल बेटियों के लिए भी खोल दिए जाएंगे यानि अब सभी सैनिक स्कूल में बेटियां भी पढ़ेंगी।”
अंत में डॉ.मधेपुरी ने कहा कि राष्ट्र का मजबूत होना जरूरी है अन्यथा अफगानिस्तान की ही तरह घर-द्वार, सारा व्यापार एवं बैंक बैलेंस आदि छोड़कर भागना पड़ेगा और रिफ्यूजी बनकर पड़ोसी देश की शरण में जाना पड़ेगा।
इसी अगस्त महीने की 8 तारीख को टोक्यो- 2020 ओलंपिक का समापन हुआ और भारतीय खिलाड़ियों को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष मेहमान के रूप में आमंत्रित किया और सम्मानित भी। पीएम ने सभी खिलाड़ियों की जमकर सराहना की।
आज प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो पैरालंपिक में भाग लेने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया और कहा कि देश आपके साथ खड़ा है और आपसे उम्मीदें लगाए हुए है। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि आप अपना 100% देंगे तो देश आप से प्रेरित होकर अपने अन्य संकल्पों को भी पूरा करेगा।
बता दें कि पैरालंपिक- 2020 भी कोविड-19 के कारण स्थगित कर दिया गया था जो अब 24 अगस्त से 5 सितंबर 2021 तक जापान की राजधानी टोक्यो में खेला जाएगा। जहां भारत के 43 दिव्यांग एथलीट 9 गेमों में भाग लेंगे। जबकि वहां कुल गेमों की संख्या 28 है।
जानिए कि जिस 9 स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ी भाग लेंगे, वे हैं- 1. जैवलिन थ्रो 2.हाई जम्प 3. शॉट पुट 4. डिस्कस थ्रो 5. तीरंदाजी 6.बैडमिंटन 7.टेबल टेनिस 8.शूटिंग 9.तैराकी
आप इन खेलों का प्रसारण डीडी स्पोर्ट्स पर भी देख सकते हैं।
बता दें कि मंत्री बनने के बाद 16 अगस्त को पहली बार बिहार पहुंच रहे केंद्रीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह के भव्य स्वागत की तैयारी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पूरी कर ली है। पटना एयरपोर्ट से जदयू मुख्यालय तक के हर रास्ते को पोस्टरों से पाट दिया गया है।
जानिए कि आरसीपी के पूर्व में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहने के कारण बिहार के हर जिले से उनके स्वागत में जदयू कार्यकर्ताओं के पटना आने की तैयारी है। सभी कार्यकर्तागण मंत्री आरसीपी की एक झलक पाने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में लगे हैं। क्योंकि, लगभग सप्ताह भर आरसीपी के बिहार प्रवास पर रहने की उम्मीद की जा रही है।
यह भी कि संपूर्ण स्वागत समारोह पार्टी के आधिकारिक सोशल साइट पर लाइव प्रसारित किया जाएगा और इसको लेकर प्रदेश मीडिया सेल की टीम द्वारा व्यापक प्रसारण का इंतजाम पूरा कर लिया गया है। यह भी कि 17 एवं 18 अगस्त को केंद्रीय इस्पात मंत्री पटना, नालंदा और शेखपुरा जिलों के कार्यकर्ता-संपर्क एवं आभार कार्यक्रम में भी भाग लेंगे।
चलते-चलते यह भी कि मधेपुरा के समाजसेवी-शिक्षाविद् एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता व मार्गदर्शक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने माननीय इस्पात मंत्री आरसीपी सिंह से अनुरोध किया है कि इसी तरह जब-जब मौका मिले तो वे बिहार के शेष सभी जिलों में भी बारी-बारी से पहुंच कर कार्यकर्ता-संपर्क एवं आभार कार्यक्रमों में भाग लेते रहेंगे ताकि किसी भी जिले के कार्यकर्ता को निराशा ना हो।
आज जहां भारत आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है वहीं मधेपुरा भी कोरोना के कारण बिना बच्चों की सहभागिता के आजादी का जश्न विद्यालय व महाविद्यालय के प्रधान से लेकर भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण के नेतृत्व में मना रहा है। एनसीसी के जवानों की उपस्थिति में जन-गण-मन की धुन बजते रहे और काले-काले बादलों की टुकड़ियों के बीच बूंदा-बूंदी का लुत्फ लेते हुए सभी उपस्थित नर-नारी व युवा आजादी के इतिहास का रसास्वादन करते रहे। इस अवसर पर टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.केपी यादव के द्वारा 10 श्रेष्ठ छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया।
Educationist Dr.Bhupendra Narayan Yadav Madhepuri giving certificate & medal to the best NCC Cadet on the occasion of 75th Independence Day in cordial presence of Principal Prof.(Dr.)K.P.Yadav and Senator Dr.Jawahar Paswan at T.P.college Madhepura.
बता दें कि मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ.आलोक कुमार, सतीश कुमार, अधिवक्ता सुधांशु रंजन, आनंद कुमार आदि को संबोधित करते हुए यही कहा कि 75 वर्ष में केवल 74 बार 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया गया और देश को संबोधित भी किया गया।
बस केवल एक बार 1947 में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आजादी का जश्न 16 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से मनाया था और देशवासियों को संबोधित किया। ऐसा इसलिए हुआ था कि 15 अगस्त 1947 को राष्ट्रपति भवन, संसद भवन एवं बोट क्लब स्थित इंडिया गेट पर ध्वजारोहण का जश्न मनाते-मनाते ही शाम हो गई थी।
इस अवसर पर डॉ. मधेपुरी ने ध्वजारोहण और झंडोत्तोलन में अंतर की जानकारी भी दी और आजादी के दीवानों को हृदय से नमन किया, बंदन किया। कर्पूरी चौक पर पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला ने ध्वजारोहण किया, जदयू जिला अध्यक्ष गुड्डी देवी ने भी तिरंगे को सलामी दी।
यह भी जानिए कि बीएन मंडल स्टेडियम में मधेपुरा के डीएम श्याम बिहारी मीणा, एसपी योगेंद्र कुमार सहित सभी पदाधिकारियों ने कोरोना वायरस के नियमों का पालन करते हुए राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दिया और जिले के विकास की बातें की। समाजसेवी शौकत अली एवं सीताराम पंडित ने भी तिरंगे को सलामी दी।
टीपी कॉलेज के प्रधानाचार्य, मधेपुरा के विधायक, सांसद व बिहार के शिक्षा मंत्री रहे डॉ.महावीर प्रसाद यादव की 25वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ.)आरकेपी रमण, प्रति कुलपति प्रो.(डॉ.)आभा सिंह, कुलसचिव डॉ.मिहिर कुमार ठाकुर, समाजसेवी-साहित्यकार प्रो.(डॉ.)भूपेद्र नारायण यादव मधेपुरी, सिंहेश्वर के युवा विधायक चंद्रहास चौपाल, डॉ.शिवनारायण यादव, पूर्व कुलानुशासक सहित सीनेटर व बीएन मुस्टा के महासचिव प्रो.(डॉ.) नरेश कुमार, विकास पदाधिकारी डॉ.ललन अद्री, पीए टू वीसी शंभू नारायण यादव एवं विश्वविद्यालय अधिकारी-पदाधिकारी व कर्मचारीगण द्वारा उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। सबने यही कहा कि महावीर बाबू की तरह हम सबों को भी अपने-अपने स्वधर्म का पालन करना चाहिए यानि हमें कर्तव्यनिष्ठ बनना चाहिए।
बकौल डॉ.मधेपुरी भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के 5वें कुलपति रह चुके महावीर बाबू अत्यंत विनोदी स्वभाव के थे और हंसते-हंसते उनकी आंखों से आंसू टपक पड़ते थे। आजकल तो लोग हंसना ही भूलते जा रहे हैं। हंसने के लिए लाफ्टर शो का सहारा लेते हैं।
पुष्पांजलि करने के बाद उनके चारों पुत्रों- इंदु भूषण, डॉ.अरुण कुमार, मनोज कुमार और उमेश कुमार ने पिता द्वारा दी गई नसीहत को याद करते हुए कहा कि अनुशासन को जीवन का आधार बनाकर दूसरों की इज्जत करना- हमें ताजिंदगी सीखते रहना है। मौके पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उद्घोषक पृथ्वीराज यदुवंशी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
सिंहेश्वर में नवनिर्मित “शिव शक्ति भवन” के गृह-प्रवेश को लेकर भव्य स्नेह मिलन समारोह का आयोजन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। इस भवन के लिए भूूू-दाता बने डॉ.सच्चिदानंद चौधरी और मुख्य निर्माता हुए मनोहर लाल द्वारिका प्रसाद के वंशज इंजीनियर शिवप्रसाद टेकरीवाल और उनकी धर्मपत्नी गायत्री देवी व अन्य सभी दान-दाताओं को समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.मधेपुरी ने ह्रदय से धन्यवाद किया और जमकर सराहना भी की।
MLA Chandrahas Chaupal, BK Deepak, Educationist Dr.B.N.Yadav Madhepuri, BK Bhagwati, BK Ranju, BK Kaushyalya, Arvind Pransukhka, Dilip Khandelwal and others unfurling Brahmakumari flag on the occasion of Shiv Shakti Bhawan Griha- Pravesh at Singheshwar.
बता दें कि जहां समारोह की अध्यक्षता ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी भगवती दीदी कर रही थी वहीं समारोह की निदेशिका की भूमिका में ब्रम्हाकुमारी राजयोगिनी रंजु दीदी देखी गई। दोनों के द्वारा आध्यात्मिक व नैतिक शिक्षा से समाज में मानवीय मूल्यों के विकास के बारे में विस्तार से बातों को रखी गई। स्थानीय केंद्र संचालिका कौशल्या दीदी ने अतिथियों का सत्कार किया, स्वागत किया। मधेपुरा, सहरसा और सुपौल सहित नेपाल से भी ब्रम्हाकुमारी दीदियाँ समारोह में सम्मिलित हुई थी। उनका भी सम्मान किया गया।
Er.Shiv Prasad Tekriwal, Gyatri Devi, Jawahar Navoday Vidyalaya Principal B.K.N.Singh, Samajsevi Dr.B.N.Yadav Madhepuri, MLA Chandrahas Chaupal, Brahmakumari Bhagwati and others in celebration gesture at Shiv Shakti Bhawan, Singheshwar.
जानिए जहां गृह प्रवेश समारोह के उद्घाटनकर्ता थे सिंहेश्वर के विधायक माननीय चंद्रहास चौपाल, वहीं मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किए गए थे शिक्षाविद प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी। डॉ.मधेपुरी ने विधायक चंद्रहास चौपाल से ‘शिव शक्ति भवन’ तक सड़क निर्माण एवं सिंहेश्वर में वृद्धाश्रम निर्माण की मांग की जिसे विधायक द्वारा शीघ्रातिशीघ्र पूरा करने की सहमति जताई गई। मौके पर विधायक के दिल में शिक्षक के प्रति सम्मान की सराहना डॉ.मधेपुरी ने खूब की। साथ ही विधायक चंद्रहास चौपाल ने यह भी कहा कि युवाओं को आध्यात्मिकता द्वारा ही नई दिशा मिलेगी।
आरंभ में अतिथियों को पाग, अंगवस्त्रम आदि से सम्मानित किया गया। बाद में अतिथियों की के साथ-साथ नेपाल से आए ब्रह्मा कुमार दीपक, बबीता दीदी, हरी टेकरीवाल, दिलीप खंडेलवाल, विनय वर्धन (खोखा बाबू), अरविंद प्राणसुखका, जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य बीकेएन सिंह, ओम प्रकाश यादव आदि भी ने भी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मंच संचालन किया ब्रह्माकुमार किशोर भाई ने। साथ ही बाहर से आए ब्रम्हाकुमार एवं ब्रम्हाकुमारियों सहित निखिल, सुरेश, अभिषेक, नवीन, सुमित के अलावे मटुकधारी चौधरी व अन्य सबों का स्वागत भी किया गया ब्रह्माकुमार किशोर द्वारा।
कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते अपने निवास वृंदावन में भौतिकी के प्रो.(डॉ.)भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बच्चों व युवाओं को इसरो के संस्थापक डॉ.विक्रम अंबालाल साराभाई की 102वीं जयंती पर उन्हें स्मरण व नमन करते हुए ये बातें कही-
आज ही के दिन 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद (गुजरात) में माता सरला व पिता अंबालाल के घर एक बालक का जन्म हुआ जो आगे विक्रम अंबालाल साराभाई के नाम से लोक विश्रुत हुआ। उनकी शुरुआती शिक्षा गुजरात में तथा उच्च शिक्षा कैंब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड में हुई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान में भारत को सर्वोच्च स्थान दिलाया।
डॉ.मधेपुरी ने बच्चों से यह भी कहा कि 28 वर्ष की उम्र में ही साराभाई ने आजादी मिलने के बाद ही 11 नवंबर 1947 को अहमदाबाद में फिजिकल रिसर्च लैबोरेट्री की स्थापना की। कालांतर में वे एटॉमिक एनर्जी कमिशन के चेयरमैन भी बने। डॉ.साराभाई को 76 वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन एवं 40 वैज्ञानिक शोध संस्थाओं की स्थापना करने का श्रेय प्राप्त हुआ। इसलिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण एवं मृत्योपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
अंत में डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे डा.मधेपुरी ने युवाओं से कहा कि एक बार महामहिम राष्ट्रपति डॉ.कलाम ने उनसे यही कहा था- “डॉ.विक्रम अंबालाल साराभाई भारत को वैज्ञानिक बुलंदियों तक ले जाने के लिए अहर्निश काम किया करते थे….. तभी तो उन्होंने मुझे दिल्ली के अशोका होटल में एक बार मिलने का समय रात्रि के 3:30 बजे दिया था।”