मनीषियों की तपोभूमि है मधेपुरा- मंत्री प्रो. चंद्रशेखर

जिला स्थापना के 35वें वर्षगांठ पर बी.एन.मंडल स्टेडियम में भव्य समारोह का आयोजन किया गया | यूँ तो 9मई को दिन भर तेरहो प्रखंड में उत्सवी माहौल रहा | शाम में स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर सम्मिलित रूप से बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, अपर जिला न्यायाधीश मिथिलेश कुमार दिवेदी, जिलाधिकारी मो.सोहैल एवं समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने किया|

मंत्री प्रो.चंद्रशेखर ने दर्शकों से अपील की कि जातिवाद एवं छुवाछूत से हटकर विकास को गति प्रदान करें | उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज विश्वकर्मा बनकर बिहार को सजा रहे हैं, उनके सात निश्चयों को मंजिल तक ले जाने में सहयोग करें |

विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा ने पूर्ण नशामुक्त एवं विकसित बिहार बनाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राष्ट्रीय नेता शरद यादव को हृदय से बधाई दी |

जिला के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि अब मधेपुरा ‘रोशनी ’ की नई इबारत लिखने लगा है- रेल फैक्ट्री, मेडिकल-इंजिनीयरिंग – पारा मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ दो आई टी आई एवं एएनएम- जेएनएम स्कूल……. के लिए जमीन हो गई है तथा सरकारी स्वीकृति भी मिल चुकी है | शीघ्र निर्माण कार्य आरम्भ होगा |

डॉ.मधेपुरी ने 135 वर्षो तक सबडिविजन रहने के बाद मधेपुरा को जिला का दर्जा देने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र को मधेपुरा वासियों की ओर से तथा सामाजिक न्याय की धरती की ओर से धन्यवाद् ज्ञापित करते हुए जिला बनने की विस्तृत जानकारियाँ दर्शकों को दी|

Cultural Programs being performed by students of schools and colleges .
Cultural Programs being performed by students of schools and colleges .

स्थानीय स्कूली कलाकारों के भव्य प्रदर्शन का रसास्वादन लेते रहे- विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव, आरक्षी अधीक्षक विकास कुमार, एडीएम अबरार अहमद कमर सहित जिलाप्रशासन के समस्त पदाधिकारी गण व समाजसेवी शौकत अली, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, डॉ.शांति यादव, प्रो.योगेन्द्र ना.यादव, प्रो.रविरंजन, प्रो.रीता आदि |

कार्यक्रम का शुभारम्भ शशि प्रभा एवं समापन रेखा यादव ने किया | सांस्कृतिक कार्यक्रम में हॉली क्रॉस, माया विद्या निकेतन, स्वर शोभिता, मधेपुरा महिला कॉलेज, कला मंदिर मधेपुरा एवं सिंहेश्वर के बच्चे-बच्चियों ने मनमोहक प्रदर्शन प्रस्तुति की |

Audience enjoying the Cultural Program .
Audience enjoying the Cultural Program .

मंच संचालन सीडीपीओ जयश्रीदास एवं भारत स्काउटएंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने संयुक्तरूप से किया | धन्यवाद् ज्ञापन डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार ने किया |

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मधेपुरा में पूर्ण नशा मुक्ति पर कार्यशाला आयोजित

जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की अध्यक्षता में जिला के सरकारी एवं प्राइवेट सभी डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं ड्रग एशोसिएशन के अध्यक्ष – सचिव सहित सभी दवाइयों के थौक विक्रेताओं को सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पांडेय द्वारा झल्लूबाबू सभागार में बुलाया गया |

अध्यक्षता करते हुए डी.एम. सोहैल ने नीतीश सरकार के पूर्ण नशाबंदी कार्यक्रमों को आन्दोलन का स्वरुप देने हेतु अनुरोध किया तथा दवा दूकानदारों को वैसे दवाइयों को बिना रजिस्टर्ड डॉक्टरों के पुर्जे के नहीं बेचने की हिदायत दी जिसमें अलकोहल या निकोटीन रहता है |

सभा में अधिकांश डॉक्टरों ने जिसमें आई.एम.ए. के अध्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार, सचिव डॉ. डी.के.सिंह, प्रमंडलीय सचिव डॉ.सच्चीदानंद यादव, डॉ.धीरेन्द्र कुमार यादव, डॉ.नायडू, डॉ.बी.एन. भारती, डॉ.उजित राजा, डॉ.मधुकर, डॉ.अशोक वर्मा, डॉ.आर.के पप्पू आदि ने अपने विचार रखे | थौक दवा विक्रेता संघ के सचिव मनीष सर्राफ, शिक्षाविदों में डॉ.शांति यादव, डॉ.मधेपुरी, प्रो.श्यामल किशोर यादव, शौकत अली, सुधा संध्या आदि ने अपने विचार विस्तार से रखे | जहाँ डॉ.शांति यादव ने क्वेक के पुर्जे पर दवा नहीं देने की बात कही, वहीँ श्यामल किशोर ने क्वेक के पक्ष में बातें रखी | समाजसेवी शौकत अली ने बच्चों द्वारा सुलेशन से नशा बनाने की बातें कही |

डॉ. मधेपुरी ने कहा जैसे घड़ी की सभी सुइयाँ बारह बजे एक साथ हो जाती है, वैसे ही यदि प्रशासन-चिकित्सक-शिक्षक एक साथ हो जांये तो नशा खोरों का बारह बज जाएगा और पूर्ण नशामुक्ति का प्रयास सफल होगा |

अंत में डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार ने धन्यवाद् ज्ञापित करते हुए कहा कि पूर्ण नशा मुक्त समाज बनाने के लिए सभी का सहयोग जरुरी है |

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अब भारत में होगा सिंगल इमरजेंसी नंबर

वर्तमान में आपको पुलिस के लिए 100 नंबर डायल करना होता है, फायरब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102 और आपात आपदा प्रबंधन के लिए 108 नंबर। पर अब देशभर में इन तमाम सेवाओं के लिए आपको बस एक सिंगल इमरजेंसी नंबर 112 डायल करना होगा। ये सुविधा एक जनवरी 2017 से लागू होगी। दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी आपात सेवाओं के लिए एकल नंबर के प्रावधान को मंजूरी दे दी है। यह अमेरिका में सभी आपात सेवाओं के एक नंबर 911 की तर्ज पर है।

खास बात है कि यह सेवा उन सिम या लैंडलाइन पर भी उपलब्ध होगी जिनकी आउटगोइंग सुविधा रोक दी गई। परेशानी में फंसा कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल करेगा तो उसकी कॉल तत्काल संबंधित विभाग को स्थानांतरित की जाएगी। 112 नंबर शुरू होने के बाद अन्य सभी मौजूदा आपात नंबर धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। यह इस नई सुविधा को लेकर जागरूकता पर निर्भर करेगा।

यह भी बता दें कि लोग इस 112 नंबर को पैनिक बटन प्रणाली में फीड कर सकेंगे। कानून के तहत पैनिक बटन सुविधा भी सभी मोबाइल फोनों पर एक जनवरी से उपलब्ध होगी। पैनिक बटन के जरिए आप सिर्फ एक बटन दबाकर कई नंबरों पर इमरजेंसी कॉल कर सकेंगे या अलर्ट भेज सकेंगे।

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केजरीवालजी, आप ही क्यों नहीं खोल देते कांग्रेस-मोदी रिश्ते का ‘राज’?

दिल्ली के मुख्यमंत्री आदत से मजबूर हैं या सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसा करते हैं पर कई बार वो कुछ ऐसा बोल जाते हैं जिसके निहित अर्थ और गंभीरता को वो या तो समझते ही नहीं या फिर तब समझते हैं जब देर हो चुकी होती है। अगस्ता वेस्टलैंड मुद्दे पर अरविन्द केजरीवाल का आज का ट्वीट कुछ ऐसा ही है जिसमें उन्होंने कहा है कि “गांधी परिवार के पास मोदीजी के कुछ राज हैं। इसलिए मोदीजी कभी गांधी परिवार के खिलाफ कदम नहीं उठाते।”

इससे पहले अरविन्द केजरीवाल अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए सोनिया को गिरफ्तार करने की चुनौती प्रधानमंत्री मोदी को दे चुके हैं। उनकी पार्टी (आप) ने बीते शनिवार को सोनिया गांधी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था।

बता दें कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के शासनकाल में खरीदे गए थे और पिछले महीने इस सौदे पर इटली की एक अदालत के फैसले में सोनिया गांधी का नाम आया था। जिसके बाद से वो निशाने पर हैं। हालांकि संसद में इस हेलीकॉप्टर घोटाले पर कांग्रेस ने कहा है कि टेंडर के मापदंड में जो बदलाव किए गए थे वो भाजपा की अटल बिहारी सरकार के समय हुए थे।

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड से वर्ष 1999 में 12 हेलीकॉप्टर खरीदने की बात शुरू हुई थी और विभिन्न चरणों से गुजरने के बाद 2005 में ये सौदा हुआ था। लेकिन 2012 में जब इस सौदे में रिश्वत दिए जाने की ख़बर आई तो तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने माना कि ऐसा हुआ है और इसकी जांच सीबीआई और ईडी को सौंप दी।

बहरहाल, समय के साथ सत्य सामने आ ही जाएगा। लेकिन क्या केजरीवाल ये बताने का कष्ट करेंगे कि मोदीजी के तथाकथित ‘राज’ के बारे में ऐसी कौन सी ‘आकाशवाणी’ हुई जो पूरे देश में केवल उन्होंने सुनी और अब उसे ‘नि:शुल्क’ प्रसारित कर रहे हैं..? एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का बिना किसी ‘तथ्य’ के इस तरह की बात करना अत्यन्त आपत्तिजनक और निन्दायोग्य है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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ये क्या, उपमुख्यमंत्री के सरकारी विज्ञापन से मुख्यमंत्री ही गायब..!

केन्द्र के किसी भी विभाग का विज्ञापन हो और उसमें विभागीय मंत्री के साथ प्रधानमंत्री की तस्वीर ना हो। या फिर किसी भी राज्य का विभागीय विज्ञापन हो और उसमें मुख्यमंत्री मौजूद ना हों ऐसा अमूमन नहीं होता। परम्परा के साथ-साथ शिष्टाचार का तकाजा भी यही है कि ऐसे विज्ञापनों में प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की मौजूदगी हो। सच यही है कि काम चाहे किसी भी विभाग का क्यों ना हो उस विभाग के मंत्री प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर वो काम कर रहे होते हैं। ऐसे में ये मर्यादा से कहीं आगे लगभग बाध्यता है या होनी चाहिए कि उस विभाग के विज्ञापन या प्रचार-प्रसार में सरकार के मुखिया की तस्वीर हो। पर बिहार में ऐसा नहीं हो रहा।

जी हाँ, बिहार में एक सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर ही गायब है। सरैया-मोतीपुर सड़क परियोजना के लोकार्पण से संबंधित पूरे पेज वाले इस विज्ञापन में तेजस्वी की बड़ी तस्वीर छपी है जबकि नीतीश इससे नदारद है। बता दें कि इस विभाग के मंत्री लालू के सुपुत्र और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव हैं।

बहरहाल, तेजस्वी के इस विज्ञापन ने विपक्ष को महागठबंधन सरकार पर तंज कसने का एक बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व में इसी विभाग के मंत्री रहे नंद किशोर यादव बिना देर किए पूछ बैठे कि क्या सरकार ने नई विज्ञापन नीति अपना ली है?  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को वस्तुस्थिति स्पष्ट करना चाहिए।

बहरहाल, राजनीति से अलग हटकर बात करें तो भी जो हुआ उसे हजम करना मुश्किल है। ये ऐसी भूल है जो किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए थी। बात विभागीय या सरकारी मर्यादा की हो, पद और अनुभव की वरिष्ठता की हो या फिर गठबंधन धर्म की तेजस्वी को ऐसा नहीं करना चाहिए था। और चाहे जिस भी कारण से ऐसा हुआ हो अनुभवी लालू को स्वयं पहल कर तेजस्वी से भूल-सुधार करने को कहना चाहिए। देखा जाय तो लालू ना केवल तेजस्वी बल्कि वर्तमान सरकार के भी ‘अभिवावक’ हैं। उन्हें ये समझना और समझाना ही होगा कि बिहार और सरकार की स्थिरता के लिए ‘महत्वाकांक्षा’ के असमय, अभद्र और अस्वस्थ प्रदर्शन पर रोक लगाना जरूरी है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब लालू को ‘क्रीम’ क्यों लगा रहे बाबा रामदेव..?

समय और सत्ता की महिमा अपरम्पार है। ‘रा’ज-योग’ सचमुच भारी है हर ‘योग’ पर। तभी तो एक-दूसरे के विरोधी रहे योगगुरु बाबा रामदेव और बिहार की सत्ता में भागीदार आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के करीब आ गए हैं। अब ना केवल दोनों गले मिल रहे हैं बल्कि बाबा रामदेव को लालू में अपना ‘ब्रांड एम्बेसेडर’ भी दिखने लगा है।

जी हाँ, चौंकिए नहीं। बीते बुधवार की बात है कि बाबा रामदेव दिल्ली में अचानक और वो भी सुबह-सुबह लालू के मौजूदा आवास (शकुंतला फार्महाउस) पर ‘प्रकट’ हुए, उनसे अकेले में बातचीत की और यहाँ तक कि सबके बीच उनके चेहरे पर क्रीम भी लगा डाली। बातचीत का विषय क्या था इस पर दोनों भले ही मौन रहें लेकिन इसके ‘राजनीतिक’ और ‘व्यावसायिक’ दोनों मायने निकाले जा रहे हैं। चलिए बताते हैं कैसे।

बाबा रामदेव के हृदय में ये लालू-प्रेम यूँ ही नहीं उमड़ पड़ा। इसका पहला और स्पष्ट कारण तो ये है कि लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप बिहार के स्वास्थ्य मंत्री हैं। जाहिर है कि बाबा रामदेव के ब्रांड ‘पतंजलि’ के लिए संभावनाओं के कई द्वार वो खोल सकते हैं। बता दें कि पिछले दिनों बाबा रामदेव मुलायम के छोटे भाई और यूपी की अखिलेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री शिवपाल यादव के साथ भी एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

बहरहाल, अब दूसरे कारण पर गौर करें। दरअसल कुछ दिनों पहले दिल्ली में हुए श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी मौजूद थे और उनकी ये मौजूदगी योगगुरु को नागवार गुजरी। कारण ये कि दो साल पहले मोदी के चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने पर बाबा रामदेव ने दिल्ली में एक कार्यक्रम रखा था और मोदी को खास तौर पर आमंत्रित किया था लेकिन मोदी उस कार्यक्रम में नहीं गए थे।

रामदेव-लालू की मुलाकात पर भाजपा का कहना है कि बाबा रामदेव ना तो भाजपा के सदस्य हैं और ना ही सहयोगी। वो किसी से भी मिल सकते हैं। पर सच यह है कि इस मुलाकात ने योगगुरु और भाजपा के संबंधों में आई खटास को उजागर करने का काम तो किया ही है। जहाँ तक पूरी सच्चाई का प्रश्न है तो इसके बारे में अपने-अपने फन में माहिर दोनों धुरंधर – बाबा रामदेव और लालू – ही कुछ बोल सकते हैं। बाबा रामदेव का लालू के चेहरे पर ‘क्रीम’ लगाना अकारण तो खैर हरगिज नहीं हो सकता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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इंजिन फैक्ट्री बनाने वाली फ़्रांसीसी कंपनी ने किया भूमि पूजन

वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद द्वारा की गई घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए फ्रांस की ‘एल्स्ट्राम’ कम्पनी के कंट्री हेड मिस्टर सल्होत्रा, प्रोजेक्ट हेड प्रीतम कुमार, मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी बी.राय, पी.वर्द्धराजन सहित अन्य पदाधिकारियों ने बुधवार को भूमिपूजन सहित प्रथम चरण में चार-दीवारी के साथ-साथ कॉलोनी निर्माण का कार्यारम्भ भी किया |

मौके पर उपस्थित सूबे के वरिष्ठ व अनुभवी ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव एवं जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने परियोजना के उप मुख्य अभियंता के.के. भार्गव से विमर्श के क्रम में कहा कि प्रथम चरण में आवासीय भवन निर्माण और बाद में तत्परता के साथ फैक्ट्री निर्माण पर फोकस किया जाय |

मुख्य प्रशासनिक पदाधिकारी बी.राय ने मधेपुरा अबतक को बताया कि जिलापदाधिकारी मो.सोहैल की टीम के प्रयास से ही इंजिन फैक्ट्री निर्माण का कार्य इतनी जल्दी आरम्भ हो रहा है | जमीन दाताओं की हर परेशानी को कैंप लगाकर दूर करनेवाले डी.एम. मो.सोहैल ने बिजली विभाग के वरीय पदाधिकारी को कारखाना स्थल पर बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और कहा कि आपकी तत्परता से ही शीघ्रातिशीघ्र हर वर्ष 200 रेल विद्युत इंजिन निर्माण में सफलता मिलेगी |

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुनने आयी जीविका से जुडी हजारों-हजार महिलाएं

कोसी प्रमंडलीय मुख्यालय के विकास भवन में कोसी के तीनों जिले मधेपुरा-सहरसा-सुपौल यानी इनमें से जुड़े मंत्रियों-जनप्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने क्षेत्र की समस्याएँ सुनी एवं तदनुरूप उपस्थित उच्चाधिकारियों को निर्देश दिये |

जनप्रतिनिधियों ने बैजनाथपुर पेपर मिल, मत्स्यगंधा झील को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ एक एम्स निर्माण की भी मांग की | विपक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं में हो रही वृद्धि का मामला उठाया गया तो सी.एम. ने बैठक में मौजूद आई.जी. से मामले को गंभीरता से लेने की बात कही तथा दरभंगा पहुँचने से पहले कार्रवाई करने का निर्देश दिया |

जहाँ बैठक में उपस्थित मंत्रीत्रय विजेन्द्र प्र.यादव, प्रो.चन्द्रशेखर एवं डॉ.अब्दुल गफूर ने नीतीश सरकार की शराबबंदी जैसे कठोर निर्णय की सराहना की तथा जीविका से जुड़ी महिलाओं की भूमिकाओं की प्रशंसा की, वहीँ भाजपा के नीरज कुमार बबलू, विधान पार्षद नूतन सिंह एवं सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रशासनिक शिथिलता एवं अस्पतालों में डाक्टरों की कमी की पूर्ति का मामला उठाया |

नयी सरकार के गठन के बाद पहली बार सहरसा पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोसी के तीनों जिले से आयी जीविका से जुडी महिलाओं को विस्तार से सम्बोधित किया | जनप्रतिनिधियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा की |

बैठक में विधायक नरेन्द्र ना.यादव, अनिरुद्ध प्रसाद यादव, निरंजन कुमार मेहता, रमेश ऋषिदेव, वीणा देवी, रघुनन्दन यादव, ललन सर्राफ, विजय कुमार वर्मा सहित मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, डीजीपी,……दरभंगा रेंज के आईजी सहित कई डी.एम, एस.पी एवं कमिश्नर व उच्चाधिकारियों मौजूद थे |

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मधेपुरा में बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में नामांकन शीघ्र

2006 के 18 सितम्बर को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंडल वि.वि. के नये परिसर में इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण हेतु 10 एकड़ जमीन के साथ घोषणा की थी जिसके निर्माण हेतु सरकार ने राशि आवंटित कर दी है |

फिलहाल बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ.मनोरंजन कुमार झा ने मधेपुरा अबतक को बताया कि एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग कॉलेज को चार विषयों यानी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल एवं कंप्यूटर में 60-60 नामांकन लेने हेतु ई-मेल के जरिये स्वीकृति भेज दी है जिसमें यह अंकित है कि सत्र शुरू होने के पहले टीम आधारभूत संरचनाओं की जाँच कर लेगी |

मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने मधेपुरा अबतक द्वारा यह पूछे जाने पर कि सत्रारम्भ कहाँ होगी – के जवाब में कहा कि तत्काल शिवनंदन प्र.मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के नये मॉडल भवन में पढाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है | उन्होंने कहा कि यह जिले के विकास के लिए मिल का पत्थर साबित होगा | यह भी कि बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए तत्कालीन भवन पर उसका नाम भी लिख दिया गया है | मुख्य मार्ग के किनारे कॉलेज का नेम प्लेट भी लगा दिया गया है तथा परिसर में प्रवेश हेतु एक भव्य गेट भी बनाया जा रहा है |

बुद्धिजीवियों में इस बात की खुशी है कि इसी एस.एन.पी.एम. स्कूल में शुरू हुआ था – टी.पी.कॉलेज, बी.एन.एम. भी कॉलेज और आज बी.पी.मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू होने जा रहा है |

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नहीं रहे जनसंघ और एबीवीपी के संस्थापक प्रोफेसर बलराज मधोक

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ जनसंघ की नींव रखने वाले और अखिल भारतीय छात्र संघ (एबीवीपी) के संस्थापक प्रोफेसर बलराज मधोक नहीं रहे। प्रोफेसर मधोक कुछ समय से बीमार चल रहे थे और पिछले एक महीने से एम्स में भर्ती थे जहाँ आज सुबह नौ बजे उनका निधन हो गया। वक्त की विडंबना देखिए कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के राजनीति में सक्रिय होने से पहले दक्षिणपंथ के सबसे बड़े नेता रहे प्रोफेसर मधोक की मृत्यु की जानकारी मीडिया को केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के ट्वीट से मिली..! प्रोफेसर बलराज मधोक के कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके जनसंघ के अध्यक्ष रहते हुए ही पं. दीनदयाल उपाध्याय पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रहे थे और 1967 में प्रोफेसर मधोक के निवर्तमान होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। ये और बात है कि आज की तारीख में ये बात गिनती के लोगों को पता होगी।

25 फरवरी 1920 को जम्मू-कश्मीर के स्कार्दू इलाके में जन्मे प्रोफेसर बलराज मधोक अपने समय के बड़े शिक्षाविद, विचारक, इतिहासवेत्ता, लेखक और राजनीतिक विश्लेषक थे। 1961 और 1967 में क्रमश: नई दिल्ली और दक्षिण दिल्ली से लोकसभा के सदस्य रहे प्रोफेसर मधोक एबीवीपी के संस्थापक सचिव थे। 1951 में वे भारतीय जनसंघ के प्रथम समन्वयक बने और उन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। 1966 में वे भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। प्रोफेसर मधोक नई दिल्ली के पीजीडीएवी कॉलेज में इतिहास विभाग के प्राध्यापक थे। आरएसएस के लम्बे समय तक प्रचारक रहे प्रो. मधोक ने एक दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी थीं और 1947-48 में ‘ऑर्गेनाइजर’ तथा 1948 में ‘वीर अर्जुन’ का सम्पादन भी किया था।

ये जानना दिलचस्प होगा कि प्रोफेसर मधोक के जनसंघ के अध्यक्ष रहते पार्टी अपनी कामयाबी के शीर्ष पर थी। उस समय लोकसभा में जनसंघ के गठबंधन के पास 50 से ज्यादा सीटें थीं। यही नहीं पंजाब में जनसंघ की संयुक्त सरकार बनी थी और उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित देश के आठ प्रमुख राज्यों में जनसंघ मुख्य विपक्षी दल बनने में कामयाब हुआ था।

ये प्रोफेसर मधोक ही थे जिन्होंने सदन में पं. जवाहरलाल नेहरू के सामने बिना किसी लाग-लपेट के पुर्तगालियों से गोवा को आजाद कराने और श्रीराम जन्मभूमि, काशी विश्वनाथ और मथुरा के श्रीकृष्ण मन्दिर को हिन्दुओं को सौंपने जैसे मुद्दों को उठाया था। उस दौर की राजनीति में प्रो. मधोक सम्भवत: एकमात्र ऐसी शख्सियत थे जो पं. नेहरू को राष्ट्रवाद और हिन्दुत्व जैसे विषय पर अपनी बात सुनने को बाध्य कर देते थे। लोकसभा के अस्थायी अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने कई बार यादगार भूमिका निभाई थी और देश की सुरक्षा सलाहकार समिति के वे सदस्य भी रहे थे।

आज भाजपा प्रशस्त राजपथ पर खड़ी है पर पार्टी की मौजूदा पीढ़ी लगभग भूल चुकी है कि इस राजपथ का रास्ता जनसंघ की पगडंडियों से निकला है। डालियाँ और शाखाएं लाख इतरा लें पर उनका अस्तित्व तभी तक है जब तक वो अपनी जड़ से जुड़ी हैं। आज जिस ‘वटवृक्ष’ का नाम भाजपा है उसकी जड़ में प्रोफेसर मधोक के जीवन के कई बहुमूल्य वर्ष भी हैं, इसे हरगिज भुलाया नहीं जा सकता।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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