अब टिकते नहीं बिहार में नीतीश के पैर..!

इधर लोग नीतीश कुमार के पीएम मैटेरियल होने ना होने पर बहस ही कर रहे हैं और उधर नीतीश बड़ी खामोशी से एक के बाद एक कदम रखते जा रहे हैं। जी हाँ, जेडीयू की कमान विधिवत सम्भालने के बाद वे मिशन 2019 को भी विधिवत शुरू करने जा रहे हैं। शुरुआत आगामी 7 मई को केरल से होगी जहाँ वो जनसभा को संबोधित करेंगे।

केरल के बाद नीतीश झारखंड का रुख करेंगे। वहाँ 10 मई को धनबाद में वो शराबबंदी अभियान के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। बता दें कि बिहार की तर्ज पर वहाँ भी महिलाओं ने उन्हें शराबबंदी के कार्यक्रम को संबोधित करने के लिए बुलाया है।

झारखंड के बाद नीतीश अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र यूपी में दस्तक देंगे। 12 मई को बनारस तो 15 मई को वो लखनऊ में होंगे। इस दौरे में नीतीश यूपी को लेकर अपनी रणनीति को ठोस रूप देने की कोशिश करेंगे।

बता दें कि अभी हाल ही में एनसीपी के नेता शरद पवार ने नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल बताया था। इधर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी ने भी उन्हें इस मुद्दे पर ‘नैतिक’ समर्थन दिया है। कहने की जरूरत नहीं कि अपनी बढ़ती स्वीकार्यता से 2019 को लेकर नीतीश के हौसले इधर और बुलंद हुए हैं। अब हाल ये है कि उनके पैर बिहार में टिक ही नहीं रहे। भाजपा और मोदी के विकल्प के तौर पर खुद को देश भर में पेश करने की खातिर उन्होंने पूरी ताकत झोंक देने की ठान ली है। नीतीश के ‘भारत-दौरे’ पर किसी ने कमाल की चुटकी ली कि मोदी (अपने विदेश-दौरों के कारण) भारत में नहीं दिखते और अब नीतीश बिहार में नहीं दिखेंगे..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा सात अगस्त को

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा हेतु ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। इस साल सिविल सर्विसेज के लिए 1079 पद हैं जिनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा सहित 24 वर्ग हैं तथा भारतीय वन सेवा के लिए 110 पद हैं। इस तरह दोनों सेवाओं को मिलाकर कुल 1189 पद हैं।

बता दें कि प्रत्येक वर्ग के लिए अभ्यर्थी 27 मई 2016 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। याद रखें कि यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा (पीटी) 7 अगस्त 2016 को होगी। इस बार परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण ‘फर्स्ट अप्लाई, फर्स्ट अलॉट’ के आधार पर होगा जिसकी अधिसूचना यूपीएससी ने कर दी है।

जहाँ तक उम्र की बात है, 1 अगस्त 2016 तक जिनकी उम्र 32 वर्ष नहीं हुई है, वे परीक्षा दे सकते हैं। जबकि पूर्व में उम्र सीमा 30 थी और चार बार ही परीक्षा में भाग लिया जा सकता था। परन्तु अब सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी छह बार सिविल सेवा की परीक्षा में भाग ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केन्द्र सरकार की ये बड़ी पहल है।

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चार श्रेणी में बंटेंगीं शहर की सड़कें

एक तो जनसंख्या का दिशाहीन विस्फोट और दूसरा लोगों का गांवों से शहरों की ओर पलायन। ऊपर से प्रत्येक शहर में प्रतिदिन सौ से लेकर हजारों की संख्या में मोटर साईकिल एवं अन्य सवारियों का रोड पर आना। इसके अतिरिक्त बेरोजगारों को बहुत कुछ करने के लिए सड़क ही तो सहारा होता है।

फिर भी इतनी परेशानियों के बावजूद सरकारी दफ्तरों से अधिक अनुशासन सड़कों पर ही नज़र आता है। लेकिन इस सत्य को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि हर शहर में सुबह या शाम – जाम ही जाम एक कहावत बनता जा रहा है।

तभी तो नीतीश सरकार द्वारा बिहार अर्बन रोड पॉलिसी-2016 में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य के शहरों की सड़कें कम-से-कम दस मीटर और चौड़ी होंगी और न्यूनतम 30 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेंगी।

इसके अतिरिक्त बिहार शहरी अभिकरण एवं इंडियन रोड कांग्रेस आदि के मद्देनज़र रोड पॉलिसी के मौजूदा प्रारूप के अनुसार चार श्रेणियों में बंटेंगी शहर की सड़कें – पहली श्रेणी – 50 से 60 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 80 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे, दूसरी श्रेणी – 30 से 40 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 60 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे, तीसरी श्रेणी – 20 से 30 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 50 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे और चौथी श्रेणी – 10 से 20 मीटर चौड़ी होंगी सड़कें जिस पर 30 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन दौड़ेंगे।

इसके अतिरिक्त वन वे के लिए भी नियम बनाए गए हैं। नियम चाहे जितने बना दिए जाएं परन्तु उनको सफल बनाना तो जनमानस पर ही निर्भर होता है। एक भारतीय जापान में होता है तो रद्दी कागज के एक टुकड़े को सड़क पर चलते रहने के बाद डस्टबिन में ही फेंकता है, परन्तु वही जब भारत की धरती पर उतरता है तो सब कुछ भूल कर सड़क को गन्दा करने में लग जाता है।

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किरण पब्लिक स्कूल ने धूमधाम से मनाया अपना स्थापना दिवस

मधेपुरा में विद्या की किरण फैलाने  में लगे किरण पब्लिक स्कूल ने समारोहपूर्वक अपना स्थापना दिवस मनाया। ये स्कूल का दसवां स्थापना दिवस था जिसका उद्घाटन उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने किया। समारोह के मुख्य अतिथि जिला मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार और विशिष्ट अतिथि मधेपुरा कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अशोक कुमार व बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आर.के.पी. रमण थे।

उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने अपने संक्षिप्त संबोधन में स्कूल के छात्र-छात्राओं के अनुशासन की प्रशंसा की और कहा कि पंचायत चुनाव के बाद मौका मिला तो मैं इस स्कूल में अवश्य आऊँगा। जिला मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश कुमार ने स्कूल की व्यवस्था की सराहना की। डॉ. अशोक कुमार व बीएनएमयू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक आर.के.पी. रमण ने स्कूल के संस्थापक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए उनके योगदान की चर्चा की।

मौके पर अतिथियों ने स्कूल द्वारा प्रकाशित स्मारिका ‘प्रकाश-पुंज’ का विमोचन भी किया। सभी अतिथियों ने मुक्त कंठ से स्कूल की निदेशिका किरण प्रकाश और प्रबंध निदेशक अमन प्रकाश की सराहना की।

Students of Kiran Public School, Madhepura attending the Cultural Program.
Students of Kiran Public School, Madhepura attending the Cultural Program.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सभी अतिथियों ने मिलकर दीप प्रज्वलित किया। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया। छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।

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बी.पी.एस.सी. मुख्य परीक्षा की तिथि बढ़ी

बिहार लोक सेवा आयोग (बी.पी.एस.सी.) की मुख्य परीक्षा अब 15 जुलाई 2016 से होगी। पूर्व में यह परीक्षा 11 जून से 30 जून तक होने की अधिसूचना जारी की गई थी।

बता दें कि मुस्लिम समुदाय के अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा आयोग के अधिकारियों से परीक्षा की तिथि बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि जून का महीना पाक रमजान का महीना होगा। अप्रैल में ही जब ऐसी प्रचंड गर्मी है तो जून का हाल क्या होगा? बेहाल कर देने वाली गर्मी में मुस्लिम समुदाय के परीक्षार्थियों को परीक्षा देने में काफी परेशानियाँ होंगी।

इस मांग के आलोक में बिहार सरकार एवं बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा संयुक्त रूप से विचार मंथन के बाद बी.पी.एस.सी. मुख्य परीक्षा की तिथि बढ़ाने का फैसला लिया गया। अब बी.पी.एस.सी. की मेंस परीक्षा 15 जुलाई 2016 से होगी। इसकी अधिसूचना अविलम्ब जारी कर दी जाएगी।

परीक्षा विशेषज्ञों ने इसे छात्रों के हित में सराहनीय फैसला बताते हुए ‘मधेपुरा अबतक’ से कहा कि इससे अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को ना केवल प्रचंड गर्मी से राहत मिलेगी बल्कि रमजान के बाद परीक्षा में उनके बेहतर करने की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।

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मो. कुदरतुल्लाह ने बनाया था मधेपुरा को ताड़ी-शराबबंदी का अगुआ..!

प्रखर गांधीवादी, अमर स्वतंत्रतासेनानी एवं बारह वर्षों तक एम.एल.सी. रहे मो. कुदरतुल्लाह काजमी मधेपुरा की उस अजीम शख्सियत का नाम है जिन्होंने बापू के आह्वान पर नशाबंदी के लिए मधेपुरा की धरती पर सत्याग्रह किया था और इसकी शुरुआत उन्होंने अपने ही पिता की ताड़ी-शराब की दूकान बन्द करवा कर की थी। जी हाँ, अपने ही पिता की दूकान के आगे कई दिनों तक अनशन पर वे बैठे रहे और उठे तो पिता को राजी करने के बाद ही। आगे चलकर मधेपुरावासियों ने उनकी स्मृति को कायम रखने के लिए कुदरतुल्लाह यूनानी दवाखाना का निर्माण किया जो आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है और अपने पुनरुद्धार के लिए सरकार की ओर टुकुर-टुकुर देख रहा है।

लगता है बिहार की वर्तमान नीतीश सरकार ने मो. कुदरतुल्लाह सरीखे गांधीवादियों एवं स्वतंत्रतासेनानियों की आत्मा की आवाज सुनकर ही बिहार के गरीबों की दशा सुधारने हेतु राज्य में पूर्ण नशाबन्दी का संकल्प और साहस दिखाया है। सभी तबके के लोगों ने दिल खोल कर सराहना भी की है इस कदम की परन्तु शराब छोड़ने के बाद लोग अक्सर अल्कोहल विड्राल सिंड्रोम से पीड़ित हो जाते हैं। हाल ही में आयोजित ऑल इंडिया यूनानी तिब्बी कॉन्फ्रेंस में उपस्थित विशेषज्ञों ने इस पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे लोगों के लिए सौंफ का अर्क लाभप्रद होता है।

उक्त कॉन्फ्रेंस में मौजूद बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. अब्दुल गफूर ने कहा कि यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की जरूरत है। प्राचीन काल से ही इस विधि द्वारा उपचार होता आ रहा है। शराब छोड़ने के बाद नींद ना आना, हाथ काँपना, भूख ना लगना आदि शिकायत होने लगती है। सौंफ का अर्क पीने के बाद लोगों को शराब पीने जैसी अनुभूति होती है जिससे वह शान्त हो जाता है।

बता दें कि कुछ समय पूर्व कुदरतुल्लाह साहब की 48वीं पुण्यतिथि समारोह के दरम्यान बिहार सरकार के आपदा-प्रबंधन मंत्री प्रो. चन्द्रशेखर ने समाजसेवी डॉ. मधेपुरी, राजद नेता मो. खालिद, बिजेन्द्र प्रसाद यादव व मो. शौकत अली आदि कि उपस्थिति में मधेपुरा के यूनानी दवाखाना को नवजीवन देते हुए यहाँ आयुष चिकित्सालय निर्माण कराने की बात कही थी। समाजसेवी लोग लगे रहेंगे और कोसी के मंत्री जगे रहेंगे तो क्षेत्र का विकास देर-सवेर होगा ही।

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मिशन 2019 में अभी से क्यों जुटे नीतीश..?

लोकसभा चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं लेकिन जेडीयू ने नीतीश कुमार को अभी से मैदान में उतार दिया है। पटना में पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में एक ओर अध्यक्ष के तौर पर नीतीश की ताजपोशी की गई तो दूसरी ओर गैरभाजपा दलों का एका करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। संदेश स्पष्ट है कि नीतीश अब औपचारिक रूप से राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल जैसे प्रधानमंत्री पद के दावेदार नेताओं के क्लब में शामिल हो गए।

ये स्पष्ट है कि बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस गैरभाजपा विकल्प के तौर पर कभी नीतीश के नाम पर सहमत नहीं हो सकती और ना ही राजद समेत अन्य दलों ने अभी इस संबंध में अपनी राय खुलकर जाहिर की है। (हाँ, नीतीश को ‘पीएम मैटेरियल’ बताना अलग बात है।) लेकिन नीतीश और उनकी टीम जल्दी में दिख रही है। इस जल्दबाजी से उन्हें दो कारण दिख रहे हैं। पहला यह कि राष्ट्रीय स्तर पर अभी जैसा ‘मोदीमय’ माहौल है उसमें उनके विकल्प के तौर पर आक्रामक होकर आने का साहस और तैयारी किसी के पास नहीं दिख रही और इसका फायदा नीतीश और उनकी टीम उठाना चाहती है। दूसरा ये कि बिहार चुनाव के परिणाम के बाद नीतीश की जैसी करिश्माई छवि बनी है उस पर वक्त की धूल-मिट्टी पड़ने से पहले ही उसे भुना लेने की कोशिश की जा रही है।

नीतीश कुमार मंझे हुए नेता हैं और राजनीति की बिसात पर गोटियां बिठाना उन्हें खूब आता है। उन्हें पता है कि बड़े लक्ष्य के लिए केवल नारेबाजी से काम नहीं चलता, धरातल पर भी बहुत कुछ कर के दिखाना होता है। यही कारण है कि एक ओर वो संघमुक्त भारत का नारा दे रहे होते हैं तो दूसरी ओर शराबबंदी को राष्ट्रीय अभियान बनाने की बात करते हैं। महिला आरक्षण और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसे फैसलों को नीतीश अब राष्ट्रीय फलक पर अपने विकास मॉडल के तौर पर पेश करना चाहते हैं।

यूपी चुनाव से पहले अजित सिंह के रालोद और बाबूलाल मरांडी के जेवीएम को मिलाकर अपना ‘कैनवास’ बड़ा करने की कोशिश नीतीश के मिशन 2019 का ही हिस्सा है। यूपी में उनकी सफलता या असफलता से भारत की भावी राजनीति की तस्वीर बहुत हद तक साफ हो जाएगी, इसमें कोई दो राय नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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नए अवतार में नीतीश का तीन सूत्री कार्यक्रम

आज होने वाली जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के लिए पटना का श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल सज कर तैयार है और राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बधाई देने वाले बैनर, पोस्टर और होर्डिंग से पूरा पटना पटा हुआ है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में 350 डेलीगेट्स भाग लेंगे जिनके रजिस्ट्रेशन का काम कल ही पूरा कर लिया गया। इस बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नीतीश कुमार की ताजपोशी होगी और नए अवतार में नीतीश जेडीयू की राष्ट्रीय राजनीति का शंखनाद करेंगे।

यूँ तो इस ‘मह्त्वाकांक्षी’ बैठक में कई बातें होनी हैं लेकिन जिन तीन मुद्दों पर पार्टी की आगे की रणनीति केन्द्रित होगी, वे हैं – बिहार में सफल शराबबंदी को अन्य राज्यों तक पहुँचाना, नीतीश के संघमुक्त भारत बनाने के आह्वान को राष्ट्रीय मुद्दा बनाना और समान विचारधारा वाले ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों से गठबंधन कर जेडीयू को बड़े फलक पर लाना। इन तीनों मुद्दों को आप एक साथ जोड़ दें तो साफ-साफ दिखेगा कि नीतीश 2019 की तैयारी में कितनी शिद्दत से जुटे हैं।

बहरहाल, इस बैठक को मुख्य रूप से नीतीश कुमार और निवर्तमान अध्यक्ष शरद यादव संबोधित करेंगे। आज इस बात की झलक भी मिल जाएगी कि आने वाले दिनों में पार्टी अपने पूर्व अध्यक्ष से कितना ‘मार्गदर्शन’ लेगी। यूपी चुनाव के मद्देनज़र अजित सिंह के रालोद व अन्य दलों के जेडीयू में होने जा रहे विलय के बाद शरद के हिस्से में क्या आएगा ये भी देखने की बात होगी ।

देखा जाय तो पहले समता पार्टी और फिर जेडीयू के गठन से लेकर आज तक पार्टी चलती तो रही नीतीश के इशारों पर लेकिन अगुआई पहले जॉर्ज फर्नांडिस और बाद में शरद यादव ने की। अब नीतीश घोषित तौर पर ‘सर्वेसर्वा’ होंगे। अब नीतीश जिस ‘प्लेटफॉर्म’ पर होंगे उस पर उनके सारे एजेंडे के मूल में बस एक एजेंडा होगा कि 2019 की लड़ाई मोदी बनाम नीतीश के तौर पर सामने आए। अगर राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस ने तब तक बड़ी ‘करवट’ ना ली तो ये होना असंभव भी नहीं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा को मिला आठ करोड़ का ऑडिटोरियम

यहाँ वर्षों से क्रियाशील हैं कई सभा भवन और एक ऑडिटोरियम – बी.पी. मंडल टाउन हॉल, टी.पी. कॉलेज सभा भवन, बी.एन. मंडल कला भवन, झल्लू बाबू सभागार, मधेपुरा कॉलेज मीटिंग हॉल और मंडल वि.वि. का एक विशाल ऑडिटोरियम। परन्तु, किसी में जगह की कमी तो कहीं आवाज गूंजने की समस्या। ए.सी. की सुविधा तो कदाचित् कहीं भी नहीं। लेकिन अब बहुत जल्द मधेपुरा को एक भव्य ऑडिटोरियम मिलने जा रहा है और वो भी उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त।

बता दें कि बिहार की नीतीश सरकार ने मधेपुरा में लगभग एक बीघे के क्षेत्रफल में आठ करोड़ एक लाख की लागत से बनने जा रहे इस ऑडिटोरियम हेतु राशि भी आवंटित कर दी है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री एवं मधेपुरा के विधायक प्रो. चन्द्रशेखर ने ‘मधेपुरा अबतक’ को जानकारी दी कि युवा एवं खेल मंत्रालय से इसकी स्वीकृति मिल गई है और जिला मुख्यालय में इसके लिए 18 कट्ठा जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। अन्य तकनीकी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर एक वर्ष के अन्दर निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

प्रो. चन्द्रशेखर ने कहा कि जिला मुख्यालय में बड़े आयोजन हेतु पर्याप्त जगह और सुविधा वाले ऑडिटोरियम के अभाव में काफी कठिनाई होती थी। इसे ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने यहाँ अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक विशाल ऑडिटोरियम बनाने का निर्णय लिया। वैसे वर्तमान में यहाँ जो भी सभा व कला भवन मौजूद हैं उन्हें डी.एम. मो. सोहैल द्वारा और बेहतर बनाया जा रहा है।

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मधेपुरा में बिहार के प्रथम विधिमंत्री शिवनंदन बाबू की जयंती मनी

स्थानीय शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में 18 अप्रैल को बिहार के प्रथम विधिमंत्री, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी व प्रज्ञापुरुष बाबू शिवनंदन प्रसाद मंडल की भव्य जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जयंती समारोह के उद्घाटनकर्ता डायनेमिक डी.एम. मो. सोहैल ने कहा कि मधेपुरा में शिक्षा का अलख जगाने वाले इतिहासपुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल के बताए गए मार्ग पर युवाओं को चलने की जरूरत है।

समारोह के मुख्य वक्ता समाजसेवी व साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने विस्तार से आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में शिवनंदन बाबू के जीवन-वृतान्त के विभिन्न पहलुओं से श्रोताओं को रू-ब-रू कराया। डॉ. मधेपुरी ने कहा कि कृष्ण के ज्ञान एवं अर्जुन के कर्मों से अपनी जीवन-गीता को संवारने वाले प्रज्ञापुरुष शिवनंदन बाबू के जीवन-दर्शन की ऊँचाई को मापा नहीं जा सकता। वे लोगों के बीच यही कहा करते – “No soul should remain uneducated on the Earth”.

जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि के रूप में एम.एल.टी. कॉलेज, सहरसा के प्रधानाचार्य डॉ. के.पी. यादव एवं प्रो. श्यामल किशोर यादव, संस्थापक प्राचार्य वाणिज्य महाविद्यालय, साहुगढ़, मधेपुरा ने शिवनंदन बाबू के जनसेवा के प्रति समर्पण एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रति त्याग की विस्तृत चर्चा की।

अध्यक्षीय भाषण में उद्गार व्यक्त करते हुए शिवनंदन प्रसाद मंडल उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डॉ. निरंजन कुमार ने कहा कि शिवनंदन बाबू इसी स्कूल के छात्र थे, इसी स्कूल में उन्होंने शिक्षण-कार्य भी किया और आजादी के आंदोलन में सक्रिय होने पर निष्काषित भी हुए। उन्होंने कहा कि वे सौभाग्यवान हैं कि आज वे उसी स्कूल के प्राचार्य हैं। उन्होंने जिला पदाधिकारी मो. सोहैल, जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल, डॉ. मधेपुरी एवं विशिष्ट अतिथिद्वय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कोसी के विभिन्न जिलों से वीक्षण कार्य के लिए आए शिक्षकों व सुकवि राजन बालन, स्काउट गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव, डॉ. सुरेश भूषण, डॉ. अरुण कुमार आदि को साधुवाद दिया।

समारोह का श्रीगणेश स्कूली छात्राओं द्वारा अतिथियों को बुके देकर सम्मानित करते हुए किया गया। जिला पदाधिकारी सहित सभी अतिथिगण द्वारा शिवनंदन बाबू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। समारोह का संचालन शिक्षक मो. शकील अहमद ने किया।

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