बी.एस.एन.एल. (B.S.N.L.) यानी Bharat Sanchar Nigam Limited की मोबाइल सेवा लगभग-लगभग प्रत्येक महीने ग्राहकों और उपभोक्ताओं के लिए परेशानियाँ उत्पन्न करती रहती हैं |
विगत वर्षों में तो B.S.N.L के उपभोक्ताओं ने तंग आकर इसका नामकरण नये ढंग से यूँ कर दिया था – BSNL यानी भाई साहब नहीं लगेगा|
जब लोग काफी तंग होने लगे तो भारी संख्या में लोग अपने घर का बेसफोन कनेक्शन कटवाने लगे | तब BSNL के पदाधिकारियों एवं कर्मियों की नींद टूटी और वे इस तरह जगे कि उपभोक्ताओं ने लगे हाथ BSNL का पुनः नया नामकरण कर दिया – भाई साहब निश्चय लगेगा|
इधर फिलहाल छह महीनों से कभी मोबाइल सेवा तो कभी ब्रॉडबैंड सेवा समस्त उपभोक्ताओं को काफी परेशान कर रही है | इतना ही नहीं बी.एस.एन.एल. सेवा बाधित होने से इन्टरनेट आधारित कारोबार भी ठप्प हो जाता है |
बुधवार को सारा दिन सुबह से ही मधेपुरा जिले में बी.एस.एन.एल. की मोबाइल सेवा बाधित रही | मोबाइल सेवा बाधित होने से उपभोक्ताओं को सारा दिन परेशान होना पड़ा तथा बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर भी…….!!
मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव पर भारतीय मूल के अमेरिकी निर्देशक परम गिल बायोपिक फिल्म बनाएंगे। हाल के विधानसभा चुनाव में उन्हें मिले जख़्मों पर ये ख़बर मरहम का काम करेगी। चुनाव से पहले उन्होंने लालू यादव से ‘उत्तराधिकार’ मांगा और इस बेतुकी मांग के बदले राजद से निकाले गए। फिर उन्होंने ‘जन अधिकार पार्टी’ बनाई लेकिन उनकी पार्टी के ‘जन’ को जनता से भी कोई ‘अधिकार’ नहीं मिला। इसके बाद ख़बरों से नदारद थे पप्पू यादव। हाँ, बीच में उन्होंने अपने उस बड़बोले दावे पर माफी जरूर मांगी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर लालूजी के दोनों बेटे चुनाव जीत जाते हैं तो वे राजनीति छोड़ देंगे। बहरहाल, लम्बे अन्तराल के बाद उनकी कोई ख़बर आई है। ख़बर… ‘गैर’राजनीतिक … और वो भी ‘अमेरिकी कनेक्शन’ के साथ।
पप्पू यादव पर बनने वाली फिल्म की कहानी बिहार (Bihar) के अमरनाथ झा की किताब पर आधारित है। उन्होंने ही इसका स्क्रीनप्ले भी लिखा है। पप्पू यादव की आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ में उन्हें ‘फिल्मी’ मैटेरियल दिखा था। किताब में एक ओर पप्पू यादव की ‘हीरो’ जैसी ज़िन्दगी थी तो दूसरी ओर एक खूबसूरत लव स्टोरी जिसमें रॉबिनहुड की छवि वाले राजनेता को एक सिख लड़की से प्यार हो जाता है। वो इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने किताब के राइट्स खरीद लिए।
प्रस्तावित फिल्म में पप्पू के जीवन के हर पहलू को दिखाने की कोशिश होगी। फिल्म के निर्देशक परम गिल का मानना है कि पप्पू यादव ने अपनी ज़िन्दगी में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्होंने पिछड़ी जातियों के अधिकार के लिए संघर्ष किया है जिसे दुनिया के सामने आना चाहिए। गिल के अनुसार उनकी कहानी काफी ‘दिलचस्प’ है जिसे पर्दे पर उतारना ‘व्यावसायिक’ तौर पर भी ‘फायदेमंद’ होगा। फिलहाल वो फिल्म के लिए कलाकारों के चयन में जुटे हैं। बता दें कि परम गिल अपनी हॉलीवुड फिल्म ‘गोइंग टू अमेरिका’ के लिए जाने जाते हैं।
बिहार (Bihar) के कोसी और सीमांचल के इलाके में पप्पू यादव की अच्छी पैठ है पर विधानसभा चुनाव में वो सीधे “मैं बदलूँगा बिहार” के नारे के साथ उतर गए। एक तो उन्होंने एकदम से अपना ‘कैनवास’ बहुत बड़ा कर लिया, दूसरा उनके नारे का ‘मैं’ ज्यादातर लोगों के गले नहीं उतरा और तीसरा बीजेपी से उनकी ‘सांठगांठ’ छिपी ना रह सकी। सीधे मुकाबले में तो पप्पू वैसे भी नहीं थे पर वो ‘असर’ छोड़ेंगे ये उम्मीद जरूर थी। चुनाव के नतीजे आने पर इसके उलट पप्पू खासे ‘बेअसर’ साबित हुए। वो जान गए कि अपने लिए वोट मांगना और अपने नाम पर औरों के लिए वोट जुटाना दो अलग बातें हैं। यहाँ तक कि जिस इलाके पर वो अपनी ‘मुहर’ लगाकर चल रहे थे वहाँ से भी उन्हें यही सबक मिला। जाहिर है कि इतना सब कुछ होने के बाद पप्पू के लिए स्थितियां सहज नहीं रहीं और उन्होंने सुर्खियों से दूर रहना ही ठीक समझा। अब जबकि उनके ऊपर फिल्म बनने की ख़बर सामने आई है, पप्पू को नए सिरे से लोगों का सामना करने में ‘सहूलियत’ होगी।
राजनेताओं के सार्वजनिक जीवन को लेकर इससे पहले भी कई फिल्में बनी हैं। इससे नाम और चर्चा जो मिले लेकिन ये नहीँ भूलना चाहिए कि बायोपिक बनाना लोगों को किसी के निजी जीवन में झाँकने के लिए खुला आमंत्रण देना है। बशर्ते कि वो ईमानदारी से बने। जीवन को ज्यों का त्यों दिखा देना बहुत साहस और जोखिम का काम होता है। ये देखने की बात होगी कि पप्पू यादव इस पैमाने पर कितना खरा उतरते हैं। अभी उन्हें एक लम्बा राजनीतिक जीवन जीना है। ऐसे में वो निर्देशक को किस हद तक ‘रचनात्मक स्वतंत्रता’ देते हैं, इस पर आलोचकों की निगाह होगी। उनके साथ ‘बाहुबली’ का टैग क्यों जुड़ा, फिल्म इस पर क्या और कैसे कहती है, यह देखना दिलचस्प होगा और सांसद पत्नी रंजीत रंजन के संग उनके प्रेम-प्रसंगों को लेकर भी उत्सुकता रहेगी। सम्भवत: उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलू भी दुनिया के सामने आएं।
पप्पू यादव की आत्मकथा ‘द्रोहकाल का पथिक’ पहले ही प्रकाशित हो चुकी है और अब उनके जीवन पर फिल्म बनने जा रही है। उनसे बड़ी विनम्रता के साथ एक सवाल करने को जी चाहता है कि क्या उन्हें स्वयं को थोड़ा और वक्त नहीं देना चाहिए था..? तब शायद उनके जीवन में बताने और साझा करने लायक कुछ और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ जाते..!
फिलहाल भू.ना.मंडल वि.वि. में दर्जनों बी.एड.कॉलेज चल रहे हैं- मधेपुरा-सहरसा में 3-3 तथा शेष पूर्णिया, कटिहार आदि अन्य जगहों पर | बी.एड.परीक्षा 2015 की प्रैक्टिकल परीक्षा देने से जो परीक्षार्थी वंचित रह गये उनकी यानी छूटे हुए परीक्षार्थियों की पुनर्परीक्षा हेतु तिथियाँ घोषित कर दी गयी हैं |
मंडल वि.वि. के परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि तमाम बी.एड.कॉलेजों के 2015 की प्रैक्टिकल परीक्षा से वंचित रह गये परीक्षार्थियों की पुनर्परीक्षा हेतु वि.वि. में केवल एक केन्द्र पर दो दिनों के लिए परीक्षाएं आयोजित की गई हैं | वह केंद्र है- पार्वती विज्ञान महाविद्यालय, मधेपुरा तथा दो दिनों की तिथियाँ होंगी-17 एवं 18 दिसम्बर | परीक्षार्थीगण अपना परीक्षा प्रवेश पत्र साथ में अवश्य लायेंगे |
आरजेडी में आजकल ‘आवाज़’ खूब उठ रही है और लालूजी बड़ी तन्मयता से उन आवाजों को सुन भी रहे हैं। कार्यकर्ताओं की ‘आवाज़’ इतने दिल से निकलती है कि कई बार तो लालूजी तक बिना बोले ही पहुँच जाती है। पहले उनकी पार्टी में ‘आवाज़’ उठी कि दोनों ‘तेज’ को राजनीति में लाओ, लालूजी ले आए। फिर ‘आवाज़’ उठी कि दोनों को सरकार में लाओ और तेजस्वी को डिप्टी सीएम बनाओ, लालूजी ने बहुत ध्यान से सुना और बिल्कुल ऐसा ही किया। ‘आवाज़’ आने का सिलसिला और तेज हुआ। इस बार ‘आवाज़’ उठी कि तेजस्वी को विधायक दल का नेता भी बना दो और साथ में माँ राबड़ी को विधान मंडल दल की कमान सौंप दो, लालूजी ने दरियादिली दिखाते हुए ये दोनों काम भी कर दिया। पर ‘आवाज़’ है कि रुकती ही नहीं। लालूजी करें तो क्या करें..? अब फिर ‘आवाज़’ उठने लगी है कि बेटी मीसा के हाथ में पार्टी की बागडोर दे दो। लगता है लालूजी को इस बार भी ‘आवाज़’ सुननी ही पड़ेगी।
वैसे राजनीति में इस तरह की ‘आवाज़’ उठना कोई नई बात नहीं। नेहरू-गाँधी परिवार को तो ऐसी आवाज़ सुनने में महारत हासिल है। कई पीढ़ियों से वो ऐसी ‘आवाज़’ सुनता आ रहा है। देखा जाय तो आज़ादी से लेकर अब तक इस तरह की ‘आवाज़’ सुनने वालों की लम्बी फेहरिस्त है। जो अब नहीं हैं उनकी बात ना भी करें, तो भी सूची छोटी होने से रही। जो ‘आवाज़’ लालूजी सुन रहे हैं, ठीक वैसी ही ‘आवाज़’ मुलायम सिंह यादव, प्रकाश सिंह बादल, ओमप्रकाश चौटाला, वसुंधरा राजे सिंधिया, करुणानिधि, फारूख अब्दुल्ला, मुफ्ती मोहम्मद सईद, शिबू सोरेन, रामविलास पासवान, यशवंत सिन्हा जैसे कितने ही नेताओं ने सुनी हैं। ना तो कोई दल अपवाद है, ना कोई राज्य।
बहरहाल, सूत्रों की मानें तो लालू प्रसाद यादव अपनी बड़ी बेटी मीसा भारती को बिहार आरजेडी का अध्यक्ष बनाने जा रहे हैं। पार्टी के अन्दर ये मांग ‘जोरशोर’ से उठने लगी है कि उन्हें ‘बड़ी’ भूमिका में लाया जाय। लालू के खासमखास रहे इलियास हुसैन ने बाकायदा आरजेडी सुप्रीमो से मांग की है कि मीसा को प्रदेश का नेतृत्व सौंपा जाय। युवाओं को जिम्मेदारी देने का अभी ‘सही’ वक्त है। यही नहीं, मीसा को जिम्मेदारी देने से पार्टी ‘सही’ दिशा में काम करेगी। गौरतलब है कि इलियास हुसैन आरजेडी सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में वे विधायक हैं और साथ में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी।
मीसा भारती पिछले लोकसभा चुनाव में पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव (बीजेपी) के हाथों चुनाव हार गई थीं। इसके बावजूद पार्टी के तमाम कार्यक्रमों में वो लगातार सक्रिय रहीं। इस बार के विधानसभा चुनाव में तो वो ‘स्टार प्रचारक’ थीं। सोशल मीडिया पर भी उनकी भरपूर मौजूदगी देखी जा सकती है। अभी बीते चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ‘बेचारी’ क्या कह दिया था, मीसा ने विरोध में पूरा अभियान छेड़ दिया।
वैसे एक सम्भावना ऐसी भी है कि मीसा को आरजेडी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाय। ऐसा करने से ना केवल उनकी भूमिका और बड़ी हो जाएगी, बल्कि प्रदेश स्तर पर किसी को ‘एडजस्ट’ भी किया जा सकेगा। लालू ने अपने दोनों ‘लाल’ को बिहार ‘सम्भालने’ के लिए तैनात कर ही दिया है। अब बच जाता है केन्द्र। तो उसके लिए मीसा ‘पापा’ की पहली पसंद होंगी। राजनीति के जानकार निकट भविष्य में मीसा का राज्यसभा जाना तय मान रहे हैं।
बिहार में पहली बार 16वीं विधानसभा चुनाव में राजद-जदयू एवं कांग्रेस समन्वित महागठबंधन की सरकार बनी है जो लालू-शरद-सोनिया के ताकतवर धर्मनिरपेक्ष विचारों का फल है | इस महागठबंधन की सरकार में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में पाँचवीं बार शपथ ग्रहण किया है तथा पहली बार उपमुख्यमंत्री बने हैं तेजस्वी यादव और आपदा प्रबंधन के कबीना मंत्री बने हैं- प्रो.चन्द्रशेखर |
यूँ तो मधेपुरा जिले के प्रथम कबीना मंत्री (विधि मंत्री) बने शिवनंदन प्रसाद मंडल परन्तु मधेपुरा विधानसभा क्षेत्र से प्रथम कबीना मंत्री बनने वाले बी.पी.मंडल के बाद प्रो.चन्द्रशेखर को ही कबीना मंत्री के रूप में जनता-जनार्दन की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है |
Dr.Bhupendra Madhepuri blessing the honourable minister Prof. Chandrashekhar.
6 दिसम्बर 2015 को स्थानीय रासविहारी उच्च विद्यालय का वह ऐतिहासिक मंच और दर्शकों-सम्मानकर्ताओं से खचाखच भरा वह मैदान माननीय मंत्री प्रो.चंद्रशेखर के अद्वितीय एवं अपूर्व नागरिक महाअभिनंदन का गवाह बना- जिसे देखकर समाजसेवी एवं साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विगत कालखंडों में इस मंच पर पधारे समाजवादी चिंतकों डॉ.लोहिया, भूपेन्द्र नारायण मंडल, चौधरी चरण सिंह, लोकनायक जयप्रकाश………. कर्पूरी ठाकुर आदि की चर्चा करते हुए अपने संबोधन के अन्त में अपने अनुज प्रो.चन्द्रशेखर को आशीर्वचन के रूप में यही कहा-
शिवनंदन-भूपेन्द्र बने रे, जिस कोसी तट की हरियाली ! शेखर उसी चमन का तुम भी, बन जा एक यशस्वी माली !!
Massive gathering for felicitating Cabinet Minister Prof.Chandrashekhar.
11 बजे दिन से 5 बजे शाम तक चले मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर के इस महानागरिक सम्मान समारोह में विशिष्ठ अतिथियों के रूप में शरीक हुए- पूर्व पर्यटन मंत्री अशोक कुमार सिंह, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, वयोवृद्ध राजद नेता जगदीश प्रसाद यादव एवं राजद के जिला अद्यक्ष प्रो.खालिद, जदयू के सियाराम यादव, कांग्रेस के सत्येन्द्र सिंह, पूर्व प्रमुख सियाशरण यादव, डॉ.विजेंद्र, नरेश पासवान, डॉ.शांति यादव, गुड्डी देवी, प्रधान जी, डॉ.अरुण, पारो जी सहित जिले के कोने-कोने से आये महागठबंधन के सभी प्रखंडों के अद्यक्ष, विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारीगण, किसान-मजदूर-छात्र-नौजवान तथा माता-बहनों की उपस्थिति में सम्मानित होनेवाले सभी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ-साथ समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को भी माननीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने शाल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर केवल सम्मानित ही नहीं किया बल्कि अपने सामाजिक ऋण को हल्का भी किया और आगे भी इस ऋण को अपनी सरकार के माध्यम से चुकाते रहने का संकल्प बार-बार दुहराया भी |
Renowned Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri being honoured by Minister Prof.Chandrashekhar at Madhepura .
माननीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने भ्रष्टाचार-अनाचार-दुराचार के संवाहकों को कठोर दण्ड देने का संकल्प लेते हुए उपस्थित जनमानस के माध्यम से क्षेत्र के लोगों के बीच यह पैगाम प्रेषित किया कि-
मेरा घर खुला है, खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए !
मोबाइल भी खुला ही रहेगा, तुम्हारी सेवा के लिए !!
आज कोसी के लोग शुद्ध जल के लिए तरस रहे हैं | कुशहा त्रासदी 2008 में आई प्रलयंकारी बाढ़ के बाद आर्सेनिक का खतरा कोसी क्षेत्र में बढ़ गया है | कई स्थानों पर तो जांच के दौरान 100 पीपीएम तक आर्सेनिक पाए गये हैं जबकि इस बाबत सरकारी विभाग (पी.एच.ई.डी.) अभी भी अनभिज्ञ है |
एक तो कोसी क्षेत्र के पानी में आयरन की प्रचुर मात्राऔर अब ऊपर से आर्सेनिक की उपस्थिति- जानलेवा सिद्ध हो रही है | आर्सेनिक के शरीर में जाने से कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियाँ हो रही हैं |
महावीर कैंसर संस्थान पटना के निदेशक किशोर कुणाल को जब इस तरह की जानकारी मिली तो उन्होंने संस्थान के जांचकर्ताओं की एक टीम के द्वारा पानी की जांच भी कराई | रिपोर्ट में त्वचा कैंसर, गोलब्लाडर कैंसर जैसी अन्य जानलेवा रोग होने की संभावनाएँ अंकित की गयी है |
मधेपुरा अबतक द्वारा जब कोसीवासियों से इस बाबत चर्चा की गई तो उन्होंने कहा- कोसी में जल जीवन नहीं, बल्कि जहर है | कोसी की लगभग 60 लाख की आबादी इस कुदरती कोप को झेलने के लिए मजबूर है | सरकारी स्तर पर गंभीर पहल नहीं किया जा सका है | जबकि एक ओर जल-स्तर में जिस तरह गिरावट हो रही है उसी अनुपात में दूसरी ओर मौजूद जहरीले रसायनिक तत्वों की मात्रा में वृद्धि हो रही है | इतना ही नहीं आर्सेनिक, आयरन, फ्लोराइड, सीसा आदि जहरीले रसायनों के चलते आंत का कैंसर, मानसिक तनाव, किडनी, एमीविएसिस एवं दन्त-रोग आदि के घातक परिणामों से हमें कब तक रु-ब-रु होना पड़ेगा तथा कब हमें शुद्ध पेय जल मिलेगा- कहो बादशाह ??
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके पटना स्थित आवास पर मिले। 7, सर्कुलर रोड पर हुई दो दिग्गजों की ये मुलाकात बेहद खास रही। मिलते ही नीतीश ने गेट्स को ‘वेलकम’ कहा और गेट्स ने कहा ‘कांग्रेचुलेशन मिस्टर कुमार’। बिहार चुनाव में मिली बड़ी जीत और नई सरकार के गठन के बाद गेट्स और नीतीश की यह पहली मुलाकात थी। इस मुलाकात के बाद नीतीश सरकार और ‘बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ के बीच शीघ्र ही नए समझौते होने के आसार हैं।
गर्मजोशी और आत्मीयता भरे माहौल में दोनों शख्सियतों ने स्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिल गेट्स को बिहार में चल रही स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव-विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं से गेट्स काफी प्रभावित दिखे। उन्होंने इन योजनाओं की तारीफ ही नहीं की बल्कि हर संभव सहयोग की बात भी कही। नीतीश ने इस अवसर पर गेट्स को भगवान बुद्ध का स्मृति-चिह्न और सुप्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग की कढ़ाई वाली शॉल भेंट की।
बिहार में सामाजिक और महिला सुधार के क्षेत्र में ‘बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ की कई योजनाएं पहले से ही चल रही हैं। यह फाउंडेशन विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य और प्रसव के साथ-साथ नवजात बच्चों के स्वास्थ्य के लिए उल्लेखनीय काम करता आ रहा है। यही नहीं, गेट्स का फाउंडेशन महिलाओं को परिवार नियोजन को लेकर जागरुक करने का कार्य भी करता है। नीतीश और गेट्स की ये मुलाकात इन तमाम योजनाओं के लिहाज से अहम मानी जा रही हैं।
बिहार की जनता ने ढेर सारी अपेक्षाओं के साथ नीतीश को पाँचवीं बार राज्य की बागडोर सौंपी है। नीतीश अच्छी तरह जानते हैं कि इस बार उनके सामने पहले से अधिक और पहले से अलग चुनौतियां हैं। वे विभिन्न मंचों पर बड़े आत्मविश्वास के साथ बिहार के विकास मॉडल की वकालत करते रहे हैं। अपने नए कार्यकाल में उन्हें इस मॉडल पर पूरे देश की मुहर लगवानी है। जाहिर है कि इसके लिए आज जैसी मुलाकात और बिल गेट्स जैसे सहयोगी बहुत अहम साबित होंगे।
देश और समाज हमेशा विधि द्वारा नियंत्रित होता रहा है | आरम्भ में व्यक्ति न्यायालय में अपना पक्ष स्वयं निवेदित करते रहे, परन्तु विधि के स्वरुप में जटिलता आने एवं व्यक्ति की निजी कठिनाइयों में वृद्धि होने के कारण अपनी अनुपस्थिति में किसी अन्य को न्यायालय के समक्ष उपस्थित करने की मजबूरियों ने अधिवक्ताओं को जन्म दिया |
आज जहाँ 1916 ई. में स्थापित पटना उच्च न्यायालय अपना शतक पूरा करने जा रहा है वहीँ मधेपुरा व्यवहार न्यायालय में क्रियाशील कुछ अधिवक्तागण अपने कार्यकाल का अर्द्धशतक पूरा कर चुके हैं | उन्हीं में से चार वरीय एवं कर्मनिष्ठ अधिवक्ताओं – मो.अमान उल्लाह, शशिधर सिंह, गजेन्द्र ना.यादव एवं सरयुग साह को पूर्णिया के कला भवन में आयोजित भव्य समारोह में उच्च न्यायालय पटना के मुख्य न्यायमूर्ति इकबाल अहमद अंसारी के कर्मठ कर-कमलों द्वारा प्रशस्ति-पत्र एवं शाल ओढाकर सम्मानित किया गया |
Madhepura Abtak से इन चारो जनों ने कहा कि हमारे सम्मानित होने से मधेपुरा जिला अधिवक्ता संघ सर्वाधिक सम्मानित एवं गौरवान्वित हुआ है | संघ के अध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार झा , सचिव कृतनारायण यादव सहित रणधीर सिंह, जवाहर झा, आर्यादास, संध्याकुमारी, अभय कुमार, सदानंद यादव आदि ने सम्मानित सदस्यों को स्वस्थ रहने एवं दीर्घायु होने की शुभकामनाएं दी और यह भी कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा उत्साहवर्धन हेतु यह सम्मान आगे भी जारी रहे……!
सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार ‘हिन्दुस्तान’ आने वाले नये वर्ष में शहरी प्रतिभाओं के साथ-साथ ग्रामीण प्रतिभाओं को भी नई पहचान एवं बेहतर प्लेटफार्म देने की तलाश में कदम बढ़ा चुका है | “हिन्दुस्तान ओलंपियाड-2016” का यह आयोजन 19 जनवरी को हिन्दुस्तान अखबार- मधेपुराके ब्युरो चीफ अमिताभ के बांकुड़ों द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किये जाने का निश्चय किया गया है | इस ओलंपियाड में तीसरी कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी अलग-अलग चार ग्रुपों में भाग ले सकते हैं जहाँ उन प्रतिभागियों को अग्नि-परीक्षाओं से गुजरकर मंजिल को पाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ेगा | संघर्षपूर्ण सीढ़ियों को चढ़कर उन्हें खुद को राज्यस्तरीय प्रथम पुरस्कार 30 हजार रु., द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रु. एवं तृतीय पुरस्कार 10 हजार का हकदार साबित करना होगा |
इन पुरस्कारों के अतिरिक्त प्रिन्ट यूनिट स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र/छात्राओं को प्रथम पुरस्कार 5100 रु., द्वितीय पुरस्कार 3100रु. एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 2100रु. की नगद राशि दी जायेगी |
यदि आप प्रतिभावान छात्र हैं और बेहतर प्लेटफार्म की तलाश में रहते हैं तो हिन्दुस्तान अख़बार में छपे फार्म के प्रारूप के अनुसार आवेदन को भरकर 200/-रु. निबंधन शुल्क के साथ अपना निबंधन अपने विद्यालय प्रधान के माध्यम से शीघ्रातिशीघ्र करा ही लीजिए |
Madhepura Abtak को डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से यह जानकारी मिली कि विगत वर्ष भी “हिन्दुस्तान प्रतिभा सम्मान-2015” का भव्य एवं यादगार आयोजन भू.ना.मंडल वि.वि. आडिटोरियम में आयोजित किया गया था | डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा- स्पर्धा के इस युग में प्रतिभा को पग-पग पर नई पहचान दिलाने एवं ऊँचाई तक ले जाने के लिए हिन्दुस्तान का यह नायाब आयोजन- “हिन्दुस्तान ओलंपियाड-2016” अनोखा भी है और सर्वाधिक प्रशंसनीय भी |
भूपेन्द्र नारायण मंडल वि.वि.के अन्तर्गत चार मेडिकल कॉलेज हैं | एम.जी.एम.मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल किशनगंज, कटिहार मेडिकल कॉलेज दोनों पुराना मेडिकल कॉलेज है जहाँ कई विषयों में पी.जी.की भी पढ़ाई हो रही है | एक नया है बुद्धा मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल, बैजनाथपुर सहरसा जिसमें एक बार एडमिशन हुआ है, बाद बाँकी एम्.सी.आई. द्वारा जांच प्रक्रिया के अधीन है | और चौथा सरकारी कॉलेज है- कर्पूरी मेडिकल कॉलेज एण्ड हास्पिटल जो निर्माणाधीन है और नीतीश सरकार के तहत तीव्र गति से प्रगति पथ पर अग्रसर है |
बहरहाल, कटिहार एवं किशनगंज दोनों मेडिकल कॉलेजों के विभिन्न वर्गों के छात्रों द्वारा परीक्षा फार्म भरने की तिथि अपरिहार्य कारण से स्थगित करनी पड़ी |
निम्नांकित चार वर्गों के छात्रों जिनके फार्म भरने की तिथि तत्काल स्थगित रहेगी- वे हैं- बी.एन.एम.यू. के- 1.फर्स्ट प्रोफेशनल एम.बी.बी.एस.परीक्षा-2015(1), 2.सेकेंड प्रोफेशनल एम.बी.बी.एस.परीक्षा-2015(2),फर्स्ट प्रोफेशनल एम.बी.बी.एस.परीक्षा-2016(1) एवं थर्ड एम.बी.बी.एस. पार्ट-2 परीक्षा के फार्म भरने की तिथि अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है |
मधेपुरा अबतक को इस आशय की जानकारी परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने दी | उन्होंने कहा कि माननीय कुलपति डॉ.विनोद कुमार से वार्ताकर शीघ्र ही तिथि की घोषणा पुन: कर दी जायेगी |