बुद्ध, विवेकानंद और गांधी के देश में ‘गूगल’ के शीर्ष पर सनी लियोनी

सुबह-सवेरे पार्क में टहलते, अपने बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करते, चार लोगों के साथ चाय पीते, ट्रेन या बस में सफर करते या फिर सभाओं और सेमिनारों में हम चाहे जो कह लें, हमारे आज के भारत की रुचि, जिज्ञासा और खोज का चरम बिन्दु सनी लियोनी है। जी हाँ, गूगल ने साल 2015 में सर्वाधिक सर्च किए गए जिन 10 भारतीयों की सूची जारी की है, वो यही कहती है। इस सूची में लगातार चौथे साल शीर्ष पर सनी लियोनी हैं। शीर्ष पर यानि दीपिका पादुकोण और कटरीना कैफ ही नहीं शाहरुख और सलमान से भी ऊपर। यहाँ तक कि एपीजे अब्दुल कलाम और नरेन्द्र मोदी से भी ऊपर। क्या ऐसी सूची जिसमें कलाम और मोदी भी मौजूद हों, किसी ‘सनी लियोनी’ का शीर्ष पर होना यूं ही नज़रअंदाज कर देने वाली बात है..? क्या ये हमारी ‘गिरावट’ और ‘खोखलेपन’ की पराकाष्ठा नहीं..? क्या ये तथ्य आने वाले कल के लिए आपको आशंकित नहीं करता..?

खैर, आगे बढ़ने से पहले आप अपने देश के उन 10 लोगों को जानें जिन्हें 2015 में गूगल पर सबसे अधिक खोजा गया। क्रमानुसार वे 10 नाम हैं – सनी लियोनी, सलमान खान, एपीजे अब्दुल कलाम, कटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण, शाहरुख खान, यो यो हनी सिंह (रैप गायक), काजल अग्रवाल (तमिल और तेलुगु फिल्म एक्ट्रेस), आलिया भट्ट और नरेन्द्र मोदी। 2014 के टॉप 10 थे – सनी लियोनी, नरेन्द्र मोदी, सलमान खान, कटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, शाहरुख खान, पूनम पांडेय (सनी लियोनी की तरह ‘बोल्ड’ मॉडल और एक्ट्रेस) और विराट कोहली। 2013 का क्रम था – सनी लियोनी, सलमान खान, कटरीना कैफ, दीपिका पादुकोण, शाहरुख खान, यो यो हनी सिंह, काजल अग्रवाल, करीना कपूर, सचिन तेन्दुलकर और पूनम पांडेय। अब एक निगाह 2012 की 10 शख्सियतों पर। वे थीं – सनी लियोनी, राजेश खन्ना, पूनम पांडेय, आलिया भट्ट, निर्मल बाबा, शर्लिन चोपड़ा (‘प्लेब्वॉय’ मैगजीन में न्यूड पोज देनेवाली पहली भारतीय मॉडल और एक्ट्रेस), यश चोपड़ा, सैफ अली खान, डायना पेंटी (शीर्ष इतालवी और भारतीय डिजाइनर्स के लिए रैम्प पर चलनेवाली मॉडल और एक्ट्रेस) और विलासराव देशमुख।

चार सालों की सूची आपके सामने है। ‘भारतरत्न’ कलाम केवल 2015 में इस सूची में हैं यानि जिस साल वे दिवंगत हुए। 2012 में राजेश खन्ना, यश चोपड़ा और विलासराव देशमुख को गूगल पर खोजे जाने का कारण भी उस वर्ष इन हस्तियों का गुजर जाना रहा। मोदी की जगह 2014 में बनी जब वे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हुए और बने भी। लेकिन 2014 में वे दूसरे पायदान पर थे और इस साल दसवें स्थान पर। क्रिकेट के भगवान सचिन तेन्दुलकर भी केवल 2013 की सूची में दिखे जिस साल उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया। 2012 में अगर निर्मल बाबा हैं तो उस वर्ष विवादों और आरोपों में घिरे होने के कारण। भारत में फिल्मों का क्रेज देखते हुए शाहरुख, सलमान, दीपिका, कटरीना जैसों का होना ज्यादा चौंकाता नहीं। लेकिन 2012 में इनमें से किसी की जगह सूची में नहीं बनी। केवल एक नाम है जो ना केवल इन चारों सालों में रहा बल्कि शीर्ष पर रहा – सनी लियोनी। आखिर कौन हैं ये सनी लियोनी..?

‘बिग बॉस 5’ में आने से पहले शायद ही कोई आम भारतीय करेनजीत कौर वोहरा उर्फ करेन मल्होत्रा उर्फ सनी लियोनी नाम की इस 34 वर्षीया इंडो-कनाडाई पॉर्न एक्ट्रेस से वाकिफ होगा। कभी ‘सारांश’ जैसी फिल्म देनेवाले और अब ‘राह’ भटक चुके निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट को सनी लियोनी में ‘संभावना’ दिखी और उन्होंने बिग बॉस शो के दौरान ही सनी से बाकायदा मुलाकात की और फिल्म का ऑफर दिया। ‘जिस्म-2’ से इस एडल्ट स्टार का बॉलीवुड करियर शुरू हुआ और आगे चलकर ‘रागिनी एमएमएस-2’, ‘जैकपॉट’ और ‘एक पहेली लीला’ जैसी फिल्में आईं। सनी ने टीवी शो ‘स्पिलट्सविला’ भी होस्ट किया। उनकी ताजा फिल्म ‘मस्तीजादे’ रिलीज होने से पहले ही चर्चा और विवादों में है।

आज भले ही सनी लियोनी फिल्म और टेलीविजन की दुनिया का पहचाना हुआ नाम हो लेकिन उनकी ‘ख्याति’ की असली ‘वजह’ कुछ और है। आज हर वो शख़्स उस ‘वजह’ को जानता है जो सनी लियोनी के नाम से वाकिफ है। वही ‘वजह’ सनी लियोनी के लगातार चार सालों से गूगल के शीर्ष पर रहने की ‘वजह’ भी है। आप  अगर सनी लियोनी की ‘तलाश’ को ‘मनोरंजन’ का नाम देना चाहते हैं तो जान लीजिए कि किसी भी समय किसी भी समाज में किसी ‘सनी लियोनी’ ने किसी का ‘मनोरंजन’ नहीं किया है। वास्तव में वे हमारी ‘कुंठा’ या ‘भूख’ का प्रतिबिम्बमात्र होती हैं। इसी ‘कुंठा’ और ‘भूख’ को मिटाने के लिए पुरुषों ने हर युग में स्त्री को ‘प्रोडक्ट’ बनाने की कोशिश की है। बदलते समय के साथ वो बड़ी चालाकी से उस प्रोडक्ट की पैकेजिंग और उसे पेश करने का तरीका बदल देता है। आप गौर से देखिए, आज वही ‘प्रोडक्ट’ सनी लियोनी के रूप में सामने है और उसे पेश करने के लिए इंटरनेट और गूगल जैसे नए माध्यम हैं।

हाँ, सदियों से चले आ रहे इस सिलसिले में एक बड़ा फर्क ये आया है कि अब वो ‘प्रोडक्ट’ खुद भी अपनी ‘मार्केटिंग’ करने लगा है और संचार-क्रांति के दौर में उसका असर पहले से कहीं अधिक व्यापक और गहरा हो चला है। 2015 को छोड़ पीछे के तीन सालों की टॉप 10 सूची में सनी लियोनी के अतिरिक्त पूनम पांडेय की मौजूदगी इसी ‘मार्केटिंग’ का परिणाम है। कभी ‘शून्य’ को खोजने वाला देश आज भोगवाद के ‘शून्य’ में खोता जा रहा है। बुद्ध, विवेकानंद और गांधी अपने ही देश में बिसराए जा रहे हैं। हम जब तक अपनी जड़ों की ओर नहीं लौटेंगे गूगल पर हमारी ‘खोज’ में एपीजे अब्दुल कलाम और नरेन्द्र मोदी किसी ना किसी ‘सनी लियोनी’ से पिछड़ते रहेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में सुपर थर्टी के तर्ज पर सुपर सिक्सटी का शुभारम्भ

Madhepura को मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र द्वारा 9 मई 1981 को जिला घोषित किया गया था – जिला के प्रथम डी.एम. श्री एस.पी.सेठ एवं प्रथम एस.पी. श्री अभयानंद के साथ रासबिहारी उच्च विद्यालय के मंच से | वही अभयानंद कालान्तर में बिहार के डी.जी.पी. तो बने ही, परन्तु उनकी ख्याति “सुपर थर्टी” को लेकर आकाश तक पहुँच गयी |

लगभग पैंतीस वर्षों के बाद भी अभयानंद का असर यहाँ बरक़रार है जिसके तर्ज पर वर्तमान शिवनंदन प्र.मंडल (एस.एन.पी.एम.) उच्च माध्यमिक विद्यालय मधेपुरा  के एच.एम. डॉ.निरंजन कुमार के नेतृत्व में स्कूल के शिक्षकों ने ‘सुपर सिक्सटी’ के चयन हेतु नवमी कक्षा के 200 छात्रों की परीक्षा ली | एक घंटे की परीक्षा में विभिन्न विषयों से सम्बंधित सवाल पूछे गये |

इन परीक्षार्थियों में से बिना किसी विभेद के सिक्सटी प्रतिभावान छात्र/छात्राओं को चयनित कर स्कूल के शिक्षकों द्वारा स्पेशल क्लास लिया जायगा | अब इन छात्रों को कहीँ टयूशन पढ़ने की जरुरत नहीं पड़ेगी | वे सुपर थर्टी में भी जगह पा लेंगे |

Madhepura Abtak द्वारा जब समाजसेवी–शिक्षाविद Dr.B.N. Madhepuri से इस बाबत कुछ प्रतिक्रिया माँगी गयी तो उन्होंने कहा कि पूर्व डी.जी.पी. अभयानंद, पूर्व डी.एम. गोपाल मीणा एवं वर्तमान डी.एम. मो.सोहैल के शिक्षा के उन्नयन के प्रति कटिबद्धता का असर अब दिखने लगा है |

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डी.एम. मो. सोहैल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर किया एक दिवसीय चिन्तन शिविर का आयोजन

Madhepura  जिले के डायनेमिक जिला पदाधिकारी जनाव मो.सोहैल साहब के निदेशानुसार गुणवत्तापूर्ण प्रारम्भिक शिक्षा हेतु रविवार को बी.एन.मंडल स्टेडियम में जिले के तेरहो प्रखंड के सभी प्राथमिक, मध्य एवं नवसृजित स्कूलों के एच.एम. की बैठक आयोजित की गयी | इस एक दिवसीय चिंतन शिविर का मुख्यअतिथि कहिए, उद्घाटनकर्ता या सर्वेसर्वा सब कुछ डी.एम. मो.सोहैल थे और शिक्षा विभाग से जुड़े सारे पदाधिकारीगण |

इस चिन्तन शिविर में केवल एक ही शिक्षाविद् व जनसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी को मुख्यवक्ता के रूप में आमन्त्रित किया गया था जिन्होंने अपने लम्बे तकरीर में भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को जीवन्त कर दिया और प्रधानाध्यापकों को जगा-जगा कर खूब तालियाँ बटोरी |

शिविर में डी.एम. मो. सोहैल ने प्रारम्भिक शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने एवं विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण पुनर्स्थापित करने को लेकर एक दर्जन ठोस निर्देश देते हुए यह भी चेतावनी दी कि या तो शिक्षक निर्देशों का अक्षरश: पालन करें व अपनी कार्यशैली में सुधार लायें या फिर कठोर कारवाई के लिए मानसिक रूप से अपने को तैयार करने में लग जायें |

Interaction between DM and HM regarding the problems of the Schools .
Interaction between DM and HM regarding the problems of the Schools .

डी.एम. ने तन्मयतापूर्वक शिक्षकों की समस्याओं से रु-ब-रु होते हुए एक-एक का समाधान दिया और यह भी कहा कि समस्याएं कहाँ नहीं हैं | उन्हीं समस्याओं के बीच से ठोस रास्ता निकालना ही तो आपकी शैक्षणिक योग्यता की पहचान कराती है | उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि हजार से अधिक शिक्षकों के पास स्कूल भवन निर्माण की राशि है किन्तु निर्माण कार्य अब तक अधुरा है | कई स्कूलों में घंटियाँ नहीं बजती | दस फीसदी एच.एम. को छोड़ शेष क्लास लेते ही नहीं |

डी.एम. मो. सोहैल ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि आप शिक्षक की गरीमा को वापस लायें | उन्होंने डॉ.मधेपुरी का नाम लेते हुए शिक्षकों को डॉ.कलाम एवं डॉ.मधेपुरी के बीच घटित संस्मरण की ओर इशारा करते हुए कहा कि शिक्षक का संसार में कितना सम्मान है- उसे सच्चा शिक्षक बनने के बाद ही आप महसूसेंगे |

DM Md.Sohail, Dr.Madhepuri and others standing in a Shapathgrahan Ceremony .
DM Md.Sohail, Dr.Madhepuri and others standing in a Shapathgrahan Ceremony .

भला क्यों नहीं, जब डॉ.मधेपुरी ने तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम से पहली बार पटना हवाई अड्डे पर (9 बजे रात, 30 दिसम्बर-2005) अपने मिलने की चर्चा की और यह कहा कि मेरे नाम के किनारे ‘शिक्षक’ लिखा देखते ही डॉ.कलाम खड़े होकर मेरा अभिवादन किये और लम्बे समय तक बैठे नहीं…… बल्कि यही बोले कि शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है और उन्हें सम्मान दे रहा हूँ | यह सुनकर न जाने कितने प्रध्यानाध्यापकों की आँखें नम हो गई |

आरम्भ में शिविर का श्री गणेश करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल द्वारा एक-एक बुके देकर मुख्यअतिथि मो.सोहैल एवं मुख्यवक्ता डॉ.मधेपुरी का स्वागत किया गया | मंच संचालन जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं स्काउट गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने संयुक्त रूप से किया | शिविर की सफलता के लिए शिक्षा विभाग के पदाधिकारीगण- सुरेन्द्र प्रसाद, शिवशंकर राय, चंद्र्शेखर राय, हरि झा, आदित्य प्रकाश एवं डॉ.यदुवंश सहित प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रसाद यादव आदि को सदैव मुस्तैद देखा गया |

All the Primary and Middle Schools HM attending Shapathgrahan Samaroh .
All the Primary and Middle Schools HM attending Shapathgrahan Samaroh .

अन्त में डी.एम. मो. सोहैल ने सभी प्रधानाध्यापकों को अपने शैक्षिक क्रियाकलापों के उन्नयन के बाबत शपथ दिलाई |

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एक साथ मिलकर भी इस शख़्स से पीछे हैं मोदी, राहुल, नीतीश और बॉलीवुड के तीनों ‘खान’

साल 2015 का सबसे बड़ा न्यूज मेकर कौन है..? अगर इस सवाल के जवाब में आप देश-विदेश में छाए रहने वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लेना चाहते हैं तो आप गलत हैं। कांग्रेस में नई जान फूंकने की कोशिश में लगे राहुल गांधी और बिहार चुनाव में करिश्माई जीत हासिल करने वाले नीतीश कुमार भी सही जवाब नहीं हैं। हो सकता है अब आप अपना जवाब करोड़ों दिलों पर राज करने वाले बॉलीवुड के तीनों ‘खान’ में ढूंढ़ना चाहें। तो जनाब जान लीजिए कि शाहरुख, सलमान और आमिर अलग-अलग तो क्या एक साथ मिलकर भी मुकाबले में नहीं ठहरेंगे। आपका दिल करे तो इन तीनों खान के साथ ऊपर के तीनों दिग्गज नेताओं के नाम भी जोड़ लें, फिर भी इन सबका पलड़ा हल्का पड़ेगा। हैरत में तो आप तब पड़ जाएंगे जब दूसरे पलड़े पर साधारण कद-काठी और सांवले रंग वाले महज 22 साल के एक अकेले शख़्स को देखेंगे। जी हाँ, साल 2015 के सबसे बड़े न्यूज मेकर हैं हार्दिक पटेल। गुजरात के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता।

देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल एबीपी न्यूज़ पर 2015 के न्यूज़ मेकर यानि ‘व्यक्ति विशेष’, जिन्होंने आपको झकझोरा और जो पूरे साल सुर्खियों में रहे, को चुनने के लिए ऑन लाइन वोटिंग चल रही है जिसमें 32.56% वोट के साथ हार्दिक पटेल सबसे आगे चल रहे हैं। 20.23% वोट के साथ दूसरे स्थान पर हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। अपने भड़काऊ बयानों से लगातार चर्चा में रहने वाले एमआईएम के नेता असदउद्दीन ओवैसी तीसरे स्थान पर हैं। उन्हें 16.54% वोट मिले हैं। 11.76% वोट हासिल कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल चौथे पायदान पर हैं। पाँचवें, छठे और सातवें स्थान पर क्रमश: संघप्रमुख मोहन भागवत (7.58%), ‘दिलवाले’ शाहरुख खान (4.6%) और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी (3.35%) हैं।

लालू के साथ गठबंधन कर बिहार की सत्ता पर पाँचवीं बार काबिज होने वाले नीतीश कुमार आठवें पायदान पर हैं। उन्हें आश्चर्यजनक रूप से मात्र 1.41% वोट मिले हैं। उनसे भी बुरा हाल है सलमान खान और आमिर खान का। सलमान ने इस साल ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘प्रेम रतन धन पायो’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं तो आमिर ‘असहिष्णुता’ के मुद्दे को लेकर चर्चा में रहे लेकिन न्यूज़ मेकर बनने की दौड़ में दोनों बहुत पीछे रह गए। सलमान को मात्र 1.27% मत मिले हैं और आमिर अभी तक 1% मत भी हासिल नहीं कर पाए हैं। उन्हें मात्र 0.69% मत मिले हैं।

अब थोड़ी बात सबसे बड़े न्यूज मेकर की। 20 जुलाई 1993 को चंदन नगरी, गुजरात में भरत और उष पटेल के घर जन्मे हार्दिक पटेल अहमदाबाद के सहजानन्द कॉलेज से बी.कॉम. पास हैं। कॉलेज छात्र संघ के वो निर्विरोध महासचिव रहे और साल 2012 में सरदार पटेल समूह से जुड़े। जुलाई 2015 में हार्दिक की बहन मोनिका राज्य सरकार की छात्रवृत्ति पाने में विफल हुई और इसी घटना ने उन्हें पाटीदार आरक्षण आंदोलन के लिए प्रेरित किया। जी हाँ, इसी घटना के बाद हार्दिक ने पाटीदार अनामत आरक्षण समिति की नींव रखी और गुजरात के ‘सवर्ण’ व ‘सम्पन्न’ पटेल समाज को पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने की ऐसी अलख जगाई कि कुछ ही दिनों में उसकी चकाचौंध ना केवल पूरे गुजरात बल्कि देश भर में फैल गई। इस युवक की एक आवाज पर लाखों लोगों का जुट जाना बड़ी बात ना रही। इस आंदोलन का भविष्य जो भी हो, मोदी के गुजरात में मोदी के रहते दूसरे शेर ने ऐसी ‘दहाड़’ लगा दी ये बहुत बड़ी बात है। यही कारण है कि उन्हें इस साल का सबसे बड़ा न्यूज़ मेकर माना जा रहा है।

बता दें कि एबीपी न्यूज़ ने पहले दौर में 20 लोगों की सूची जारी की थी। वोटों के आधार पर उन 20 में से 10 लोग चुने गए। जो हस्तियां अन्तिम 10 में जगह नहीं बना पाईं उनमें प्रधानमंत्री मोदी से अपनी नजदीकियों के कारण सुर्खियों में रहने वाले उद्योगपति गौतम अडाणी, फ्लिपकार्ट के संस्थापक सचिन बंसल, रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, बिहार में शानदार वापसी करने वाले आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, बिहार चुनाव में नीतीश के ‘चाणक्य’ रहे प्रशांत किशोर, योगगुरू बाबा रामदेव और खेल जगत के तीन बड़े नाम विराट कोहली, सानिया मिर्जा और साइना नेहवाल शामिल हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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चारो पहर हवा में घुल रहा जहर

भाई साब ! ठहरिये !! आप ही से कुछ कहना चाहता हूँ| आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि अपने बिहार राज्य की राजधानी ‘पटना’ तो वायु प्रदूषण के मामले में देश की राजधानी ‘नई दिल्ली’ के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है ! अब तो पटनावासियों के साथ-साथ पटना आने-जाने वालों को भी प्रदूषण कम करने के उपायों पर गंभीरतापूर्वक चिंतन-मनन शुरू कर देना होगा |

प्रदूषणों से मुक्ति के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी प्रार्थना के वक्त ही प्रदूषण की भयावह स्थितियों से अवगत कराना होगा ताकि वे घर जाकर अपने माता-पिता एवं अभिभावकों से सारी बातें बोले और समाज को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का माहौल हर घर में बनने लगे |

समस्त शिक्षकवृन्द अपने-अपने छात्रों को वायु प्रदूषण के बारे में बतायें कि दीपावली के बाद वायु प्रदूषण का विश्लेषण किये जाने पर पता चला कि पटना में जान लेवा प्रदूषित धुल-कण 400 माइक्रोन/घन मीटर तक पहूँच गया है जबकि वह 100 माइक्रोन/घन मीटर से ऊपर होना ही प्राणघातक माना जाता है |

सरकार दीपावली के अवसर पर मात्र यही अपील करके अपनी जवाबदेही का इतिश्री कर लेती है- बच्चों को पटाखों से दूर रखें ! सरकार गाँव से लेकर जिला स्तर तक बाल संरक्षण समिति बनाने को उत्सुक है परन्तु, पटाखे निर्माता कंपनियों के लायसेंस रद्द करना नहीं चाहती – जबकि चिकित्सकों के अनुसार वायु प्रदूषण से बच्चों के फेफड़ों में तेजी से संक्रमण हो रहा है | इसके साथ ही ब्रोंकाइटिस-अस्थामा जैसी बीमारियाँ, कान व नाक में कई प्रकार की खराबियों के साथ-साथ बच्चों के सुनने की शक्ति भी कमजोर पड़ने लगी है |

सड़कों पर अहर्निश धुआं उगलते सर्वाधिक वाहनों के बीच बच्चों का प्रतिदिन स्कूल आना-जाना और वैसे वाहनों के फिटनेस चेक करने के लिए परिवहन विभाग को फुर्सत का सर्वथा अभाव होना- भला बच्चों के फेफड़ों को खोखला नहीं तो क्या करेगा ?

भाई साहब ! क्या ये सब कुछ सरकार के भरोसे छोड़ देना उचित है ? जिस तरह महिलाएँ दवाब डालकर ‘शराबबंदी’ कराई उसी तरह सचेतन मर्दों को सरकार पर दवाब डालकर ‘पटाखेबन्दी’ के लिए कोशिश करनी होगी | स्वामी रामदेव महाराज को भी राष्ट्रनिर्माण के साथ स्वास्थ्यनिर्माण के लिए चर्चा आरम्भ करनी होगी | राष्ट्रीय समस्याओं से हम तभी निजात पा सकेंगे जब सारा राष्ट्र चारो पहर सजग रहेगा, लगा रहेगा और जगा रहेगा |

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‘अच्छे दिन’ जाएंगे बीत मोदीजी..! ‘भय’ बिन होगी ना ‘प्रीत’ मोदीजी..!!

अटल बिहारी वाजपेयी की ऐतिहासिक ‘सद्भावना यात्रा’ के 11 साल बाद एक बार फिर किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की धरती पर कदम रखा लेकिन जिस तरह रखा उससे कई सवाल उठ खड़े हुए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूस का दौरा समाप्त कर कल सुबह काबुल (अफगानिस्तान) पहुँचे और फिर काबुल से ही दिल्ली लौटते समय उन्होंने अचानक पाकिस्तान का रुख कर लिया। बता दें कि मोदी की अफगानिस्तान यात्रा की भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई थी। पाकिस्तान का कार्यक्रम तो खैर कल्पनातीत था ही। गृहमंत्री राजनाथ सिंह के शब्दों में ये ‘इनोवेटिव डिप्लोमेसी’ है। लेकिन ये ‘इनोवेसन’ सवा सौ करोड़ भारतीयों से जुड़ा है इसीलिए इसकी पड़ताल होनी ही चाहिए।

उद्देश्य चाहे जो हो, वो बहुत पवित्र और बहुत बड़ा ही क्यों ना हो, एक प्रधानमंत्री का एकदम फिल्मी अंदाज में किसी देश की यात्रा करना हैरान करेगा। उसमें भी जब पाकिस्तान सामने हो तो ये हैरानी और बढ़ जाएगी। पाकिस्तान की अनगिनत वादाखिलाफियां, सीमा पर हर दिन नापाक हरकतें, क्रिकेट तक के संबंध मधुर ना हों और अतीत के युद्धों की परछाईयां अब भी पीछा कर रही हों तो भला हमारे प्रधानमंत्री की इस अप्रत्याशित यात्रा पर सवाल कैसे ना उठें..? देश क्यों ना पूछे कि ‘सद्भावना’ की यात्रा को ‘गोपनीय’ रखने की जरूरत क्यों आन पड़ी..? सार्वजनिक तौर पर भले स्वीकार ना करें लेकिन सच ये है कि उनके कट्टर प्रशंसकों और उनकी पार्टी तक को ये बात हजम नहीं होगी। उनकी सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज चाहे लाख कह लें लेकिन ये व्यवहार एक ‘स्टेट्समैन’ का तो हरगिज नहीं कहा जा सकता। वैसे राजनीति के गलियारों में कांग्रेस का ये आरोप भी चर्चा में है कि मोदी की ‘सद्भावना’ के मूल में एक व्यापारिक घराना था और ये यात्रा उसी को ‘फायदा’ पहुँचाने के लिए थी।

आजादी के बाद भारत की विदेश-नीति का ताना-बाना जवाहरलाल नेहरू ने बुना और उसे नया कलेवर देने में अटल बिहारी वाजपेयी ने बड़ी भूमिका निभाई। आज चीन से लेकर पाकिस्तान तक के साथ जिस ‘व्यावहारिक’ विदेश-नीति पर मोदी अमल कर रहे हैं उसकी बुनियाद वाजपेयी ने रखी थी। वैसे भी पड़ोसियों के साथ अच्छे सबंध को लेकर मोदी कितने गंभीर हैं इसकी झलक उनके शपथ-ग्रहण के दिन ही मिल गई थी। लेकिन पाकिस्तान शुरू से ही ‘टेढ़ी खीर’ रहा है। अपनी बात से पलटने का उसका लम्बा इतिहास है। अभी हाल ही में दोनों देशों के प्रधानमंत्री ऊफा (रूस) में मिले। फिर पेरिस (फ्रांस) में भी दोनों की संक्षिप्त मुलाकात हुई। लेकिन रिश्तों की बर्फ पिघलते-पिघलते फिर जमने लगी और कारण सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान ही था।

पिछले दिनों विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस्लामाबाद दौरे से रिश्तों की बर्फ एक बार फिर पिघली और मोदी शायद अपनी इस यात्रा से उस बर्फ के फिर से जमने की हर गुंजाइश खत्म करना चाहते थे। दिन भी उन्होंने बहुत खास चुना। 25 दिसम्बर को अटल बिहारी वाजपेयी और नवाज शरीफ दोनों का जन्मदिन था। साथ ही नवाज की नवासी का निकाह भी। मोदी ने नवाज की माँ के पाँव छुए और नवाज मोदी को छोड़ने एयरपोर्ट तक आए। हर तरफ ‘फील गुड’ का माहौल था। लेकिन दो देशों का संबंध अन्तर्राष्ट्रीय मामला है और उसकी कुछ निहायत जरूरी औपचारिकताएं होती हैं। अगर आनन-फानन में यात्रा हो भी गई तो उसका हासिल क्या है, प्रधानमंत्री मोदी को इसका जवाब देना ही होगा। क्या वो देश को आश्वस्त कर सकते हैं कि अब सीमा पर पाक कोई नापाक हरकत नहीं करेगा..? इस यात्रा के बाद वो मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को उपहार-स्वरूप सौंप देगा या फिर मुंबई हमलों के मास्टर माइंड हाफिज सईद पर हमेशा के लिए लगाम कस देगा..?

ये हम सभी जानते हैं कि इनमें से कोई ‘चमत्कार’ नहीं होने जा रहा। वाजपेयी भी पाकिस्तान गए थे और कुछ समय बाद हमें ‘कारगिल’ का जख़्म मिला था। ‘अच्छे दिन’ बीत जाएं उससे पहले मोदी को तुलसीदास के कहे “भय बिन होय ना प्रीत” को समझना होगा। अगर सिर्फ ‘प्रेम’ से बात बननी होती तो कश्मीर उस कगार पर नहीं होता जहाँ अभी खड़ा है। हम आज भी ये कह रहे होते कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो वो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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आम जनों के स्वास्थ्य के लिए मुख्यमंत्री सहित अन्य अधिकारी व जिलापदाधिकारी भी चौकस

जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव द्वारा हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के क्रम में सूबे के मधेपुरा , पूर्णिया, समस्तीपुर, छपरा एवं बिहटा आदि स्थानों पर पाँच नये मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा के साथ-साथ अगले सत्र से पढ़ाई आरम्भ करने की कवायद भी शुरू की गयी वहीं दूसरी ओर मधेपुरा के डायनेमिक जिलापदाधिकारी मो.सोहैल द्वारा सदर अस्पताल मधेपुरा का औचक निरीक्षण आरम्भ कर विभिन्न वार्डों का जायजा लिया गया तथा दिए गये आवश्यक निर्देशों को पालन करने के लिए हिदायत भी की गयी |

जिलापदाधिकारी मो.सोहैल ने कई ख़ास मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए उपस्थित चिकित्सकों के बीच यह कहते हुए नाराजगी जताई कि आई.सी.यू. भवन निर्माण को पांच वर्ष पूरा होने के बावजूद भी उसे शुरू नहीं किया जाना – जनमानस के स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं तो क्या कहेंगे इसे ?

जिलापदाधिकारी मो.सोहैल ने प्रभारी सी.एस. से कहा कि तत्काल दो बेड को ही सुसज्जित कर आक्सीजन सिलेंडर के माध्यम से ही आई.सी.यू. शुरू करें | उन्होंने यह भी निदेश दिया कि आई.सी.यू. संचालन के लिए यदि एम.डी. डिग्रीधारी प्रशिक्षित डाक्टर का होना जरूरी है तो उसकी भी व्यवस्था तुरत कर ली जाय |

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पुनः बढ़ाई गयी एल.एल.बी. व प्री लॉ परीक्षा फार्म भरने की तिथि

भूपेन्द्र ना. मंडल वि.वि. के माननीय कुलपति डॉ. विनोद कुमार के निर्देश पर परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक  को बताया कि छात्र संगठन के शिष्टमंडल द्वारा परीक्षा प्रपत्र भरने की तिथि बढ़ाने की माँग पर पुनः एल.एल.बी. व प्री लॉ परीक्षा फॉर्म भरने की पूर्व निर्धारित तिथि को बढ़ा दी गई है |

अब एल.एल.बी. व प्री लॉ के छात्र बिना विलम्ब शुल्क के 04 जनवरी 2016 तक परीक्षा प्रपत्र भर सकते हैं, वहीं विलम्ब शुल्क के साथ 11 जनवरी 2016 तक इच्छुक छात्र परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे |

ज्ञातव्य है कि छात्रहित में अवकाश के दिनों में भी फॉर्म जमा करने की सुविधा प्रदान की गयी है |

 

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आतंकवाद नहीं इस्लाम का विरोध करेंगे अमेरिका के अगले राष्ट्रपति..?

2008 में जब बराक हुसैन ओबामा को दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका ने अपना राष्ट्रपति चुना तब से पूरी दुनिया ने अमेरिका को एक अलग नजरिये से देखना शुरू किया। ओबामा ना केवल अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति थे बल्कि उनके नाम के ‘बराक’ और ‘ओबामा’ के बीच ‘हुसैन’ भी मौजूद था। ओबामा को चुनकर अमेरिकी जनता ने सचमुच एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। अब अमेरिका की छवि केवल वैभवशाली गोरी चमड़ी वाले देश की नहीं रही। ओबामा के रूप में उसने अपना उदारवादी चेहरा दुनिया के सामने रखा और ओबामा ने लगातार दो कार्यकाल में अपने अत्यन्त सहज आचरण से अमेरिकी जनता के उस फैसले को सही साबित किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सम्पूर्ण विश्व की दिशा और दशा को प्रभावित करने की ताकत और क्षमता रखने के बावजूद ओबामा ने ना तो अपनी वाणी का संयम खोया ना अपने व्यवहार का। यहाँ तक कि ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अपने बड़े और सफल अभियान के बाद भी उनकी ‘छवि’ नहीं बदली। उन्होंने जो किया वो आतंक का पर्याय बन चुके ओसामा के खिलाफ था। उसका इस्लाम से कोई लेना-देना ना तो होना चाहिए था, ना था। लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। कल का ओसामा आज आईएसआईएस के रूप में सामने है और ओबामा का दूसरा कार्यकाल पूरा होने को है। अमेरिकी संविधान के अनुसार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं हुआ जा सकता इसीलिए तय है कि ओबामा की जगह कोई और आएगा। ऐसे में ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि ओबामा का उत्तराधिकारी उनकी नीति और छवि को विस्तार देगा या उसे किसी नई दिशा में मोड़ेगा..?

ओबामा के ‘उत्तराधिकारी’ के तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी से हिलेरी क्लिंटन और रिपब्लिकन पार्टी से डोनाल्ड ट्रंप के नाम खास तौर पर उभर कर सामने आए हैं। जहाँ तक हिलेरी की बात है उनके सौम्य पर सशक्त व्यक्तित्व से दुनिया पहले से वाकिफ है। हिलेरी की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व आर्थिक नीतियां कमोबेश ओबामा की तरह ही रहेंगी। पर रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप अगर सत्ता में आते हैं तब अमेरिका वो हरगिज नहीं रह जाएगा जो अभी है। आप पूछेंगे ऐसा क्यों..? चलिए जानने की कोशिश करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप… न्यूयॉर्क रियल एस्टेट की दुनिया में ये नाम स्टेटस का पर्याय माना जाता है। अगर आप न्यूयॉर्क में हैं और आपके पते में ‘ट्रंप टावर’, ‘ट्रंप प्लेस’, ‘ट्रंप प्लाजा’ या ‘ट्रंप पार्क’ लिखा है तो आप ‘खुशनसीब’ हैं। न्यूयॉर्क समेत अमेरिका के कई शहरों की शानदार गगनचुंबी इमारतें डोनाल्ड ट्रंप की सफलता की कहानी कहती हैं। साइंस ग्रेजुएट और कॉलेज के दिनों में छात्र नेता रहे 69 वर्षीय डोनाल्ड को रियल एस्टेट का कारोबार अपने पिता फ्रेडरिक ट्रंप से 40 साल पहले विरासत में मिला और आज वो करीब 100 कम्पनियों के मालिक हैं। फ्लोरिडा के पाम बीच पर बने बेहद आलीशान ‘ट्रंप पैलेस’ में रहने वाले डोनाल्ड की नज़र अब ‘व्हाइट हाउस’ पर है। डोनाल्ड अमेरिका की रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदार हैं और चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही अपने बयानों की वजह से अमेरिका समेत पूरी दुनिया में जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं।

वैसे तो डोनाल्ड ट्रंप के कई बयान इन दिनों चर्चा में हैं पर जिस बयान ने पूरी दुनिया में हंगामा बरपा दिया वो है मुसलमानों को अमेरिका आने से रोकने वाला बयान। उन्होंने कहा कि अगर वो सत्ता में आए तो अमेरिका में मुसलमानों के आने पर प्रतिबंध लगा देंगे। देश को आतंकवाद से बचाने के लिए अमेरिका में मुसलमानों के डेटाबेस की व्यवस्था लागू की जाएगी। ट्रंप के अनुसार अमेरिका के मुसलमानों पर अभूतपूर्व निगरानी जरूरी है। यहाँ तक कि वो मस्जिदों पर भी निगाह रखने की बात कर रहे हैं।

डोनाल्ड जिस एजेंडा को लेकर मैदान में उतरने जा रहे हैं उसमें अमेरिका और मैक्सिको के बीच एक बड़ी दीवार बनाना भी शामिल है ताकि प्रवासी और सीरियाई शरणार्थी अमेरिका में ना घुस सकें। इसके अलावा वो अमेरिका में रह रहे लगभग एक करोड़ ‘अवैध’ प्रवासियों को भी वापस भेजना चाहते हैं। उनका दावा है कि अगर वो अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो आतंकी संगठन आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट) पर इतनी कड़ी कार्रवाई करेंगे जितनी अब तक किसी ने नहीं की है।

आतंकवादियों का कोई ‘धर्म’ नहीं होता। उनके खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप चाहे जैसी कार्रवाई करें पर मुसलमानों को लेकर दिया गया उनका बयान अमेरिकी मूल्यों और संविधान के खिलाफ है। उनके बयान वैसे ही हैं जैसे भारत में ‘योगी आदित्यनाथ’ या ‘असदउद्दीन ओवैसी’ के होते हैं। हैरानी तो इस बात से होती है कि ऐसे बयानों से वो अमेरिका के एक बड़े तबके का भरोसा जीतने में सफल हो चुके हैं। इसकी पुष्टि हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण से होती है जिसमें 39% लोकप्रियता के साथ 11 अंक हासिल कर वो अपने बाकी प्रतिद्वंदियों टेड क्रूज, मार्को रूबियो और बेन कार्सन से काफी आगे निकल चुके हैं। उनकी बढ़ती लोकप्रियता के मूल में अमेरिका का वो कामकाजी तबका है जिसे मुसलमानों का ‘भय’ दिखाकर उन्होंने अपने पक्ष में कर लिया है। कट्टर विचारों वाले डोनाल्ड ट्रंप अत्यन्त कुशल वक्ता भी हैं और इसका उन्हें भरपूर लाभ मिल रहा है।

अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा, राष्ट्पति पद के लिए सम्भावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग, गूगल के सुंदर पिचाई समेत विश्व की कई जानी-मानी हस्तियों ने डोनाल्ड ट्रंप के बयानों की कड़ी आलोचना की है। अमेरिका की डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के प्रमुख डेबी वासेरमैन शुल्ट्ज ने बिल्कुल सही कहा है कि यह एक खतरनाक और ‘गैरसमावेशी’ सोच है जिससे सात दशक पहले अमेरिका की महानतम पीढ़ी लड़ी और जीती थी। हो सकता है डोनाल्ड ट्रंप द्वारा मुसलमानों का विरोध चुनाव जीतने का ‘ट्रिक’ मात्र हो लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसी सोच का फिर से पनपना और अमेरिकी आवाम को इस्लाम-विरोध के रास्ते पर डालना अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बी.एन.एम.यू. के स्नातक तीनों पार्ट के फार्म भरने की तिथि घोषित

परीक्षा नियंत्रक डॉ.नवीन कुमार ने मधेपुरा अबतक  को बताया कि डिग्री पार्ट वन-2015 का परीक्षा-फार्म बिना विलम्ब शुल्क के 8 जनवरी 2016 तक भरा जाएगा तथा विलम्ब शुल्क के साथ 15 जनवरी 2016 तक |

डिग्री पार्ट टू का परीक्षा-फार्म बिना विलम्ब शुल्क के 4 फरवरी 2016 से 16 फरवरी 2016 तक तथा विलम्ब शुल्क के साथ 17 फरवरी 2016 से 23 फरवरी 2016 तक फार्म भरने की तिथि रखी गई है |

डिग्री पार्ट थर्ड का परीक्षा फार्म 18 जनवरी 2016 से 28 जनवरी 2016 तक तथा विलम्ब शुल्क के साथ 29 जनवरी 2016 से 3 फरवरी 2016 तक भरा जाएगा |

इसके साथ ही मेडिकल, लॉ, वोकेशनल कोर्सेस आदि की परीक्षाओं के फार्म भरने की तिथियाँ भी घोषित कर दी गयी हैं |

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