अकेले मियाँ रोएगा कि कब्र खोदेगा ?

प्राथमिक विद्यालय हो या मध्य विद्यालय,  माध्यमिक हो या उच्च माध्यमिक- यहां तक कि चिकित्सालयों से लेकर विश्वविद्यालयों अथवा राज्य सरकार के कई विभागों में कर्मचारियों की घटती संख्या की कौन कहे- वहाँ तो आचार्यों एवं अधिकारियों के भी ढेर सारे पद वर्षों से रिक्त हैं |

मधेपुरा जिला भी अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है | यहां एडीएम, एडीएम (आपदा), डायरेक्टर डीआर डीए, एसिस्टेंट डायरेक्टर सामाजिक सुरक्षा, डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर, जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी आदि कई पद तो रिक्त हैं ही- तुर्रा तो यह है कि वरीय उपसमाहर्ता के आधे दर्जन से अधिक पद रिक्त हैं और सभी कई वर्षो से प्रभार में चल रहे हैं |

यहाँ यह भी जान लेना मौजूँ होगा कि स्थानीय विधायक प्रो.चंद्रशेखर बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री हैं फिर भी यहां एडीएम (आपदा) का पद 1 जनवरी, 2016 से ही प्रभार में चल रहा है जबकि कोसी में जल प्रलय फन फैलाए आपदाओं को आमंत्रित करने हेतु इंतजार में है | ज्ञातव्य है कि प्रतिवर्ष जुलाई आते ही कोसीवासियों को बाढ़ की चिंता सताने लगती है |

बता दें कि जिले के कुल 13 में से 6 प्रखंडों में सीडीपीओ नहीं होने के कारण वहां के सीओ अथवा बीडीओ को प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है जिन्हें स्वयं सांस लेने का समय नहीं होता, फिर भी किसी-किसी सीओ व बीडीओ को यदा-कदा स्वयं 3-4 प्रखंडों के प्रभार में भी रहना पड़ता है | शीर्ष पर सत्तासीन देखनेवाले भले ही आंखे मूंद ले, लेकिन इन सबका असर तो विकास को अवरुद्ध करते हुए साफ-साफ दिखता है |

आपका ध्यान शिक्षा जगत की ओर आकृष्ट करूं तो आप पायेंगे कि सरकार सर्वाधिक घोषणाएं ही करती हैं- पंचायतों में पूर्व से संचालित 28 मिडल स्कूलों को उत्क्रमित कर +2 विद्यालयों का दर्जा तो दे दिया गया, परंतु शिक्षकों के सभी पद खाली पड़े हैं | सरकार बहाली करना भूल गई है | तभी तो एक ओर बिना पढे ही छात्र-छात्राएं लालकेश्वर की कृपा से टॉपर बन रहे हैं जबकि दूसरी ओर विश्वविद्यालयों में फर्जी तरीके से आचार्यों-प्राचार्यों व कुलपतियों की नियुक्तियां तेजी से हो रही हैं |

जब मधेपुरा अबतक द्वारा जिले के विकास के लिए व्याकुल जिलाधिकारी मो.सोहैल से कमेंट करने को कहा गया तो बस इतनी सी बातें उन्होंने कही कि शिक्षकों की बहाली के लिए शिक्षा विभाग कार्ययोजना बनाने में मशगूल है |

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क्यों हैं सलमान बॉलीवुड के ‘सुल्तान’?

‘मैंने प्यार किया’ का शर्मीला-सा प्रेम आज बॉलीवुड का ‘सुल्तान’ है। वो एक बार पूछ ले ‘हम आपके हैं कौन’ तो हिन्दी फिल्मों की सफलता के मापदंड बदल जाते हैं। जी हाँ, कोई ‘दबंगई’ करके भी आपका प्यार पा ले तो वो सलमान ही हो सकते हैं। बॉलीवुड की खान तिकड़ी के इस खान में ना आमिर वाली संजीदगी है, ना शाहरुख वाला जुनून, फिर ऐसा क्या है उसमें कि हर अगली फिल्म के साथ उसकी ‘सल्तनत’ और बड़ी हो जाती है? इस सवाल का जवाब अगर पाना हो तो आपको ‘सुल्तान’ देखनी चाहिए जिसने रिलीज के महज तीसरे दिन 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर इतिहास रच दिया है।

आज के दर्शक जो पहले से ज्यादा व्यस्त और चतुर हैं और जिनके पास मनोरंजन के लिए सैकड़ों चैनल और हजारों साइट्स हैं, उन्हें सिनेमा हॉल तक खींच लाना और उनके पॉकेट से पैसे निकलवा लेना कतई साधारण बात नहीं। ऐसे में सुल्तान ‘सलमान’ की दसवीं फिल्म है जिसने 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया है। 100 करोड़ के क्लब में शामिल उनकी इससे पहले की नौ फिल्में हैं – दबंग (2010), रेडी (2011), बॉडीगार्ड (2011), एक था टाइगर (2012), दबंग-2 (2012), जय हो (2014), किक (2014), बजरंगी भाईजान (2015) और प्रेम रतन धन पायो (2016)।

हिन्दी फिल्मों में 100 करोड़ क्लब को सलमान क्लब कह दें तो कोई बड़ी बात नहीं होगी और इसकी वजह बेहद साफ है। सलमान ने जहाँ ये कमाल दस बार दिखाया है वहीं शाहरुख छह, अक्षय कुमार और अजय देवगन पाँच-पाँच, आमिर खान चार और रितिक रोशन केवल तीन ही बार ऐसा कर पाए हैं।

बहरहाल, सलमान की फिल्म ‘सुल्तान’ ने भारत में तीन दिनों में कुल 105 करोड़ की कमाई की है। इसने पहले दिन 36.54 करोड़, दूसरे दिन 37.50 करोड़ और तीसरे दिन 31.50 करोड़ कमाए और इसके साथ ही कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर डाले। ये फिल्म सलमान की ऐसी पहली बड़ी फिल्म बन गई है जिसने तीन दिनों में 105 करोड़ की कमाई की। इससे पहले ‘बजरंगी भाईजान’ ने तीन दिनों में 102 करोड़ और प्रेम रतन धन पायो ने तीन दिनों में 101 करोड़ की कमाई की थी। 2016 की बात करें तो सुल्तान से पहले ‘एयरलिफ्ट’ के नाम तीन दिनों में सबसे ज्यादा कमाई का रिकार्ड था। ‘एयरलिफ्ट’ ने तीन दिन में 83.50 करोड़ कमाए थे।

स्पोर्ट्स पर बनने वाली फिल्मों की बात करें तो उस लिस्ट में भी ‘सुल्तान’ सबसे ऊपर दर्ज हो गई है। फरहान अख्तर की ‘भाग मिल्खा भाग’ ने पहले तीन दिन में 52.44 करोड़ की कमाई की थी और प्रियंका चोपड़ा की ‘मैरी कॉम’ की पहले तीन दिन की कमाई 12.7 करोड़ थी।

सबसे खास बात ये कि इस फिल्म को केवल सलमान के प्रशंसक ही नहीं आम दर्शक और फिल्म समीक्षकों ने भी अच्छा बताया है। ऐसे लोगों की भी कमी नहीं जो इसे सलमान खान के कैरियर की सबसे बेहतरीन फिल्म मान रहे हैं। इसमें बहुत मेहनत से बनाई गई सलमान की बॉडी है, थिरकने को मजबूर कर दने वाले गाने हैं, आकर्षक अनुष्का हैं, रणदीप हुड्डा की ट्रेनिंग है, सांस रोक देने वाले फाइट सीन्स हैं, पर बॉलीवुड के सारे मसालों के बीच भी जो चीज आपको सबसे ज्यादा छूती है वो है सलमान का अभिनय। ‘बजरंगी भाईजान’ से सलमान ने जो सफर शुरू किया वो ‘सुल्तान’ से आगे बढ़ा है। इस फिल्म ने तीन दिन में कितने कमाए उससे अधिक महत्व सलमान के प्रशंसकों के लिए इस बात का है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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साईं बाबा की दिव्य-देवप्रतिमा की स्थापना एवं लक्ष्मीवती पुस्तकालय का उद्घाटन

इसी जिले के कुमारखंड प्रखंड का एक गांव है टेंगराहा, जहां गरीबों के मसीहा समाजवादी चिंतक बाबू भूपेन्द्र नारायण मंडल ने अंतिम सांस ली थी और हाल-फिलहाल उसी धरती के बेटे आदित्य आनंद ने आइ.ए.एस. करके इलाके को गौरवान्वित किया है | वहीँ के “देवेन्द्र धाम” में समाजसेवी, प्रखर साईं भक्त व शिक्षाविद परिवार के अग्रज दिगंबर प्रसाद यादव एंड ब्रदर्स द्वारा संयुक्त रुप से श्रद्धा एवं सबूरी के प्रतीक शिर्डी के साईं बाबा की भव्य-दिव्य  देवप्रतिमा की स्थापना एवं अलौकिक प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम स्वामी दुर्गानंद सरस्वती के मंत्रोचार व पूर्णिया से आये समस्त-समर्पित साईं भक्तों सहित उपस्थित सुधिजनों के दरमियान भजन-कीर्तन के बीच संपन्न हुआ |

बाबा साईं के प्रिय ‘प्रसाद’ पाने के बाद सभी शिक्षाविदों एवं सुधि जनों के अगणित पग चल पडे “लक्ष्मीवती पुस्तकालय” के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित होने | यहाँ यह भी जान लेना मौजूँ होगा कि हाल ही में माउंटेन मैन दशरथ मांझी सरीखे हिम्मतवाले इसी धरती के सपूत शिवनाथ यादव ने अपनी माताश्री स्मृतिशेष उमदावती की माँ बैकुंठवासिनी लक्ष्मीवती (यानि नानीश्री) की स्मृति में “लक्ष्मीवती  पुस्तकालय” का दिलोजान से निर्माण किया है |

पुस्तकालय उद्घाटनकर्ता विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा ने विस्तार से पुस्तकालय की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लक्ष्मीवती पुस्तकालय इस इलाके के विकास में मील का पत्थर साबित होगा | मुख्य अतिथि की भूमिका का निर्वहन करते हुए शिक्षाविद साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने उपस्थित विद्वतमण्डली से कहा कि अच्छी पुस्तकें ज्ञान का भंडार होती हैं तथा उन्हें पढ़ने से जीवन की दिशा बदल सकती है | उन्होंने भारतरत्न डॉ.कलाम एवं नोबेल पुरस्कार प्राप्त डॉ.ए.कैरौल की कई पुस्तकों की चर्चा भी की | डॉ.मधेपुरी ने युवा वर्गों से यही कहा कि पुस्तक ज्ञान का सागर है तथा उनका अध्ययन कर आप ज्ञान अर्जित कर ऊंचाई प्राप्त कर सकते हैं |

यह भी बता दें कि इस अवसर पर डॉ.मधेपुरी ने कहा कि साईं बाबा आध्यात्मिक गुरु हैं जिन्हें भक्तजन संत, फकीर, सद्गुरु, व मुरशीद भी कहते हैं | साईं बाबा भक्तों को “डिवाइन कांशसनेस” के रास्ते पर चलना सिखाते हैं |

अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव एवं वयोवृद्ध समाजसेवी दीनेश प्रसाद यादव ने कहा कि कल तक जो गाँव बदनाम था वही गांव आज अपने दाग को तेजी से धोकर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है |

समारोह में भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में महाविद्यालय निरीक्षक एवं कुलसचिव रह चुके प्रो.वीरेंद्र प्रसाद मंडल, अवकाश प्राप्त शिक्षक महेंद्र प्रसाद यादव, इंजीनियर सत्येंद्र कुमार, इंजीनियर चन्दन कुमार, मुखिया अरविन्द कुमार, जयप्रकाश यादव, ओमप्रकाश यादव, इंजीनियर ब्रह्मानंद मंडल, पंचायत समिति सदस्य माँगो देवी, डॉ.अमोल राय, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.विजय कुमार, डॉ.किशोर कुमार, सुशील कुमार यादव, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.विजेंद्र कुमार आदि गण्यमान्य अंत तक विराजमान रहे |

अंत में लक्ष्मीवती पुस्तकालय के प्राण-प्रतिष्ठापक व निर्माता शिवनाथ यादव ने उपस्थित सभी जनों को हृदय से धन्यवाद ज्ञापन किया तथा इस मरुभूमि पर जो ज्ञान का पौधा ‘लक्ष्मीवती पुस्तकालय’ लगाया है उसे सींचते रहने हेतु युवाजनों का आह्वान किया |

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“मुझसे बड़ा एक्टर और कौन है”: लालू प्रसाद यादव

मौजूदा दौर के मंझे हुए अभिनेता इरफान खान कल ईद के दिन अपनी फिल्म ‘मदारी’ के प्रमोशन के लिए पटना में थे। इस दौरान उन्होंने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की। अपने खास अंदाज के लिए मशहूर लालू ने इस मौके पर इरफान को ईद की बधाई देने के साथ-साथ उन्हें फिल्म हिट करने के ‘टिप्स’ भी दिए और आखिर में अपने इस दावे से इरफान को लाजवाब कर दिया कि मुझसे बड़ा एक्टर और कौन है?

बहरहाल, फिल्म में अपने किरदार को ध्यान में रख इरफान लालू से मिलने डमरू के साथ आए थे। मजे की बात यह कि लालू ने उस डमरू को बजाया भी। एक तो ईद का माहौल और उस पर मस्तमौला लालू। उन्होंने ये भी कह ही डाला कि मुझ पर अगर फिल्म बनी तो मैं ही मेन रोल में रहूँगा। मुझसे अच्छी एक्टिंग कोई नहीं कर सकता। हाँ, अभिनेत्री कौन रहेगी, इसका फैसला इरफान कर सकते हैं।

लालू ने इरफान को ‘टिप्स’ देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने इरफान को सलाह देते हुए कहा कि आम आदमी को फोकस करती हुई फिल्मों में काम करिए, फिल्म सुपर हिट हो जाएगी। देश में आम आदमी सबसे ज्यादा परेशान है। इतने कानून बने, लेकिन आम आदमी को न्याय नहीं मिला। केन्द्र सरकार ने भी उनकी उपेक्षा की है। जातीय जनगणना रिपोर्ट में हर तरह से ‘पिछड़े’ आम आदमी का खुलासा नहीं किया गया है, जबकि गाय-भैंस-बकरी सबकी संख्या बता दी गई है।

बता दें कि इरफान की फिल्म ‘मदारी’ 22 जुलाई को रिलीज होने वाली है। इरफान ने बताया कि इस फिल्म में एक व्यक्ति के ‘जमूरा’ से ‘मदारी’ बनने की कहानी दिखाई गई है, जिसमें एक आम आदमी के संघर्ष की झलक देखी जा सकती है। इसमें किसी राज्यविशेष पर फोकस नहीं है बल्कि यह फिल्म सिस्टम की खामियों को दिखाती है।

चलते-चलते:

अब ये लालूजी से कौन पूछे कि जब अपने ऊपर बनने वाली फिल्म में हीरो वो खुद रहेंगे तो अभिनेत्री का फैसला उन्होंने इरफान पर क्यों छोड़ा? राबड़ीजी राज्य चला सकती हैं तो क्या उनकी सरपरस्ती में अभिनेत्री का किरदार नहीं निभा सकतीं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप  

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इंसानियत का पैगाम है रमजान ! सबको मुबारक हो ईद !!

इस्लाम में रमजान का महीना सर्वाधिक मुबारक माना जाता है क्योंकि इसी महीने में अल्लाह-तआला ने तमाम इंसान की रहनुमाई के लिए अपनी सबसे मुकद्दस किताब “कुरआन-ए-मजीद” को नाजिल किया था | रमजान के महीने में रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज करार दिया गया, यानी सभी मुसलमान रमजानुल मुबारक के पूरे माह के दौरान भूखे-प्यासे रहने के बाद ईद जैसी नेअमत से सरफराज होते हैं | तभी तो आज 7 जुलाई 2016 को हर्षोल्लास के साथ चतुर्दिक ईद मनाई जा रही है | बीते रात क्या अमीर, क्या गरीब, सभी ईद की खरीदारी में मस्त दिखे, व्यस्त दिखे |

Eid Nawaj at Eidgaah Madhepura.
Delivering Eid Namaz at Eidgaah Madhepura this pleasant morning .

यहां यह भी जान लेना बेहद जरूरी है कि रमजान के पाक माह के 30 दिनों को तीन आसारे में बांटा गया है | पहले 10 को रहमत व बरकत के लिए एवं दूसरे 10 दिनों मगफिरत के लिए तथा आखरी के 10 दिनों को जहन्नुम से छुटकारा पाने के लिए बांटा गया है |

Huge Crowd after Eid Nawaj at Eidgaah Madhepura
Huge Crowd coming out after Eid Namaz at Eidgaah Madhepura

हां ! इस तीसरे और अंतिम आसारे में रोजेदार को गुनाहों की माफी मिलनी शुरू हो जाती है | बता दें कि इस महीने में 1-1 फर्ज का सबाब 70 गुणा कर दिया जाता है | रोजा ही एक ऐसी इबादत है कि अल्लाह खुद उसके बदले बहुत कुछ देता है | पाक़ दिल से मांगी गई दुआएं भी कबूल होती हैं |

From Left to Right- Vidhan Parshad Vijay Kumar Verma, Dr.Madhepuri, Samajsevi Shaukat Ali, MLA Prof.Ramesh Rishidev and Ex-MLA Parmeshwari Parshad Nirala wishing Eid Mubarak at Eidgaah Madhepura.
From Left to Right- Vidhan Parshad Vijay Kumar Verma, Dr.Madhepuri, Shaukat Ali, MLA Prof.Ramesh Rishidev and Ex-MLA Prameshwari Parsad Nirala wishing Eid Mubarak at Eidgaah Madhepura.

और खास बात यह भी जानें कि आखिरी आसारे की पाक पांच रातों में से किसी एक रात को शब-ए-कद्र करार दिया जाता है जिस घड़ी जागकर यदि कोई रोजेदार खुद को अल्लाह-तआला में मसगुल कर ले तो उसकी मुराद पूरी हो जाती है |

शाम में चांद देखने के बाद 7 जुलाई के सुबह ईदगाह में नमाज पढ़ने के लिए रोजेदारों की भीड़ लगी रही | समापन के बाद सभी धर्मों के लोग रोजेदारों से गले मिलकर ईद मुबारक करते रहे तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग उस क्षण को कैमरे में कैद करते रहे |

इसी बीच अचानक जिले के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल भी सामने मीडिया मैन से घिरे दिखे- सबसे ईद मुबारक करते हुए, गले मिलते हुए…| इस अवसर पर अनेक लोग अपने मोबाइल में फोटो उठाते नजर आते रहे, उस ऐतिहासिक क्षण को यादगार बनाते रहे |

Samajsevi Md.Shaukat Ali, Madhepura SHO Manish Kumar and Samajsevi Sahityakaar Dr.Bhupendra Madhepuri at Eidgaah
Samajsevi Md.Shaukat Ali, Madhepura Thanadhyaksh Manish Kumar and Samajsevi Sahityakaar Dr.Bhupendra Madhepuri at Eidgaah

अंत तक सिंहेश्वर के विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव, पूर्व विधायक परमेश्वरी प्रसाद निराला, विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा, समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, नगर परिषद के मुख्य पार्षद डॉ.विशाल कुमार बबलू, नगर के जनसेवी पार्षद ध्यानी यादव, जिला जदयू अध्यक्ष प्रो.विजेन्द्र नारायण यादव, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सत्येन्द्र प्रसाद सिंह, डॉ.अरुण कुमार, प्रवीण कुमार पारो आदि अपनी उपस्थिति बनाये रखे |

पूरे एपिशोड में मज़ेदार बातें तो ये रही कि वहां सभी मांगनेवाले ही पहुंचे थे | जहां सभी रोजेदार ईदगाह के अंदर झुककर खुदा से दुआएं मांग रहे थे वही बाहर में भिखारी रोजेदारों से पैसे- इसलिए कि ईद के नमाज के बाद जकात (वार्षिक आमदनी का 40 वां भाग) बांटने की परंपरा सदा से चली आ रही है |

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मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल: किसका बढ़ा कद, किससे छिना पद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल अपने मंत्रिमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल करते हुए कैबिनेट में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया। इसके साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल किया गया। स्मृति ईरानी से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कार्यभार लेकर उन्हें कम महत्व वाले कपड़ा मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी गई वहीं अब तक पर्यावरण मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का कद बढ़ाते हुए उन्हें यह अहम मंत्रालय सौंपा गया।
कैबिनेट में उठापटक के बाद संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद भी ताकतवर बनकर उभरे हैं। सदानंद गौड़ा से लेकर उन्हें कानून मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। गौड़ा अब सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय का काम देखेंगे। वहीं शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है। हालांकि उनसे संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। यह जिम्मेदारी अब रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार संभालेंगे।
एक अन्य बदलाव के तहत नरेन्द्र सिंह तोमर को ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया है। इस विभाग को अब तक हरियाणा के जाट नेता चौधरी बीरेन्द्र सिंह देख रहे थे। अब बीरेन्द्र सिंह इस्पात मंत्रालय देखेंगे। पहले यह मंत्रालय तोमर के पास था। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा के पुत्र जयंत सिन्हा को वित्त मंत्रालय से हटाकर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री बनाया गया है। इस पद पर अब तक महेश शर्मा थे। शर्मा अब सिर्फ संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।
मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए चेहरों में विजय गोयल, एमजे अकबर, एसएस अहलूवालिया, अनुप्रिया पटेल (अपना दल) और रामदास अठावले (आरपीआई) के नाम महत्वपूर्ण हैं। विजय गोयल को युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय में स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया गया है। असम का ‘सिंहासन’ मिलने से पहले इस मंत्रालय को सर्वानंद सोनोवाल सम्भाल रहे थे। एमजे अकबर को विदेश राज्य मंत्री बनाया गया है। बता दें कि विदेश मंत्रालय में वीके सिंह एक अन्य राज्य मंत्री हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी ने दलित चेहरों को खास तवज्जो दी है। आरपीआई के अठावले (महाराष्ट्र) के अतिरिक्त कल शामिल किए गए मंत्रियों में अजय टम्टा (उत्तराखंड), अर्जुन राम मेघवाल (राजस्थान), कृष्णा राज (उत्तर प्रदेश) और रमेश सी जीगाजिनगी (कर्नाटक) भी दलित समुदाय से आते हैं। वैसे इस विस्तार में मोदी की नज़र उन राज्यों पर भी रही है जहाँ आगे चुनाव होने हैं। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश से जहाँ तीन-तीन वहीं राजस्थान से चार मंत्री कैबिनेट में शामिल किए गए हैं।
कल के फेरबदल में पाँच मंत्रियों को बाहर का रास्ता भी देखना पड़ा है। कैबिनेट से बाहर किए गए पाँच मंत्री हैँ – रसायन और उर्वरक मंत्री निहाल चंद, मानव संसाधन राज्य मंत्री रामशंकर कठेरिया, आदिवासी कल्याण राज्य मंत्री मनसुख भाई वसावा और जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर लाल जाट। वहीं हटाए जाने की तमाम अटकलों के बावजूद नजमा हेपतुल्ला, कलराज मिश्र और गिरिराज सिंह अपना मंत्रीपद बचाने में सफल रहे।
अन्त में एक बार फिर बात स्मृति ईरानी की। ‘महत्वहीन’ कपड़ा मंत्रालय दिए जाने के बाद जहाँ ये माना जा रहा है कि उनका कद घटा दिया गया है, वहीं ये कयास लगाने वालों की भी कमी नहीं है कि स्मृति को 2017 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में भाजपा के प्रचार का चेहरा बनाया जा रहा है और इसी कारण उन्हें यह ‘महत्वहीन’ मंत्रालय दिया गया है ताकि वो प्रचार के लिए ज्यादा वक्त निकाल सकें।
मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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विकास के लिए व्याकुल डीएम

डीआरडीए के झल्लू बाबू सभागार में डीडीसी मिथिलेश कुमार की उपस्थिति में डायनेमिक डीएम मो.सोहैल द्वारा नवनिर्वाचित जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी एवं उपाध्यक्ष रघुनंदन दास (अधिवक्ता) को सत्य व निष्ठा के साथ शपथ दिलाने के बाद क्षेत्र की नली-गली और शौचालय निर्माण को प्राथमिकता देकर जिले के विकास में योगदान निभाये जाने की सलाहियत देना या फिर जिले के दूर-सुदूर गांवों में एएनएम ट्रेनिंग कॉलेज, पारामेडिकल, आईटीआई आदि-आदि आरंभ कराने या फिर विद्युत रेल इंजन फैक्ट्री के लिए किसानों से जमीन मुहैया कराने में दिन-रात लगे रहकर काम आरंभ कराने अथवा जिले के गांवों को शहर जैसी सुविधाएं प्रदान करने के लिए भारत एवं बाहर के 65 निवेशकों को आमंत्रण देकर बुलाना और उनके लिए जमीन उपलब्ध कराने हेतु छोटे-बड़े जमीन मालिकों जैसे मुरहों के डॉ.अरुण कुमार मंडल, प्रो.प्रभाष चंद्र यादव, साहूगढ़ के के.बी.यादव, टेंगराहा के प्रो.श्यामल किशोर यादव, मधेपुरा के डॉ.मधेपुरी व नरेंद्र नारायण निराला, सिंघेश्वर के हरि टेकरीवाल आदि के साथ उसी झल्लू बाबू सभागार में 4 जुलाई 2016  यानी रमजान के महीने में 5:00 बजे शाम में विमर्श करने को डी.एम. मो.सोहैल के विकास के लिए व्याकुलता नहीं तो और क्या कहेंगे |

DM Md.Sohail discussing with L&T authorities regarding quick consruction of Karpuri Medical College buildings at the new campus of B.N.M.U Madhepura.
DM Md.Sohail discussing with L&T authorities regarding quick consruction of Karpuri Medical College buildings at the new campus of B.N.M.U Madhepura.

हाल ही में डी.एम.मो.सोहैल भूपेंद्र नारायण मंडल विश्व विद्यालय परिसर में बन रहे कर्पूरी मेडिकल कॉलेज को अगले मार्च तक पूरा कर हस्तांतरित करने के निमित्त एक समीक्षात्मक बैठक बुलाई और एल एण्ड टी कंपनी के सभी जवाबदेह पदाधिकारियों से यही जाना कि ढाई हजार मजदूर चाहिए लेकिन प्रतिदिन 1000 मजदूर उपलब्ध हो रहे हैं यह जानकर डी.एम.  मो.सोहैल ने लेबर विभाग के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क करने में जुट गए और समाधान निकाल ही लिए  |

चाहे खेल का मैदान हो या फिर महिलाओं के विभिन्न संगठनों का ट्रेनिंग कैंप अथवा शिक्षक अधिकारियों की कोई बैठक ही क्यों ना हो डी.एम.  मो.सोहैल सभी प्रशिक्षुओं, शिक्षकों एवं अधिकारियों से विकास में योगदान देने की अपील कर ही देते हैं और उन्हें स्वस्थ, स्वच्छ एवं सुंदर मधेपुरा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत की चंद बातें बोल ही देते हैं |

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‘ओपन विंग फाउंडेशन’ द्वारा कार्यक्रम आयोजित

प्रखंड मधेपुरा के ‘सुखासन’ ग्राम पंचायत अंतर्गत वार्ड न.-9 (मुरलीधाम) में ‘ओपन विंग फाउंडेशन’ की ओर से “नशामुक्ति: सुनहरे भविष्य की आधारशिला” विषय पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें सुखासन-चकला के ग्रामीणों और मधेपुरा के बुद्धिजीवियों ने अधिकाधिक संख्या में भाग लिया |

पावस के सुहावने फुहारों के बीच सर्वप्रथम फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ.शांति यादव एवं संचालक डेंटल सर्जन डॉ.नीरव निशांत द्वारा-उद्घाटनकर्ता जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी, अध्यक्षता कर रहे डॉ.मधेपुरी, शिक्षाविद् ज्योतिषाचार्य ब्रजमोहन सिंह उर्फ़ लालबाबा, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष डॉ.अरुण कुमार मंडल, डी.एस.पी.  मुख्यालय योगेंद्र नारायण सिंह, स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल आदि अतिथियों का फूल मालाओं आदि के साथ स्वागत किया गया | लगे हाथ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया तथा अतिथियों व उपस्थित जनों द्वारा ‘डॉ.मुरलीधर’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा शिक्षक रामनारायण यादव द्वारा उनके जीवन वृत्त का वाचन किया गया |

उद्घाटनकर्ता जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी ने अपने उद्घाटन भाषण में नशा मुक्ति, मेधावी छात्रों को मुरलीधर मेमोरियल अवार्ड तथा उनके नाम द्वार की स्थापना आदि की चर्चा करते हुए यही कहा कि प्रगतिशील गांव की यही निशानी है |

शिक्षाविद् ब्रज मोहन सिंह एवं कई संगठनों की अध्यक्षा रही डॉ.शांति यादव ने ग्रामीण परिवेश के प्रतिभा संपन्न छात्र-छात्राओं के लिए ओपन विंग फाउंडेशन की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की | समाजसेवी डॉ.अरुण कुमार मंडल, डी.एस.पी. योगेंद्र नारायण सिंह एवं मंच संचालक जय कृष्ण यादव एवं शिक्षक रघुनाथ प्रसाद यादव, रामानंद यादव आदि ने अपना उद्गार व्यक्त करते हुए आयोजित कार्यक्रमों की सराहना की |

दूसरे सत्र में जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री मंडल, लालबाबा, डी.एस.पी. मुख्यालय,  डॉ.शांति यादव एवं डॉ.मधेपुरी द्वारा पांच सर्वाधिक अंकप्राप्त छात्र-छात्राओं को मोमेंटो-मानपत्र के साथ 1000रु. की राशि, डॉ.नीरव निशांत के सौजन्य से, दी गई | इसी बीच जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी द्वारा “डॉ.मुरलीधर यादव” गेट का शिलान्यास किया गया |

Intermediate District Topper- 2106 Ms.Mayuree receiving Prize & Honour from Physics Stalwart Dr.Bhupendra Madhepuri.
Intermediate District Topper- 2016 Ms.Mayuree receiving Prize & Honour from Physics Stalwart Dr.Bhupendra Madhepuri.

अंत में अपने अध्यक्षीय भाषण में साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने कहा कि गांव ही तो असली हिंदुस्तान है-जहाँ टूटे-फूटे कुल कच्चे घर होते हैं | खेतों में हल चलते हैं…..| वहां के बच्चे खूब पढे, आगे बढे और पुरस्कृत होनेवाली छात्रा “मयूरी” बने- यही कामनाएं और शुभकामनाएं उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं को दी और संदेशस्वरूप यही कहा-

“परिंदों को नहीं दी जाती, तालीम उड़ानों की |
वो खुद ही तय करते हैं, मंजिले आसमानों की….||”

मौके पर सेवानिवृत्त शिक्षक उमाशंकर, मकेश्वर प्रसाद, अरविंद कुमार-रामचंद्र प्रसाद, सत्यनारायण यादव तथा ग्रामीण जनार्दन यादव, जगदीश यादव, मुस्तकीम, मोहन ऋषिदेव आदि अन्त तक अपनी गरिमामयी उपस्थिति बनाये रखे | अंत में पंचायत के मुखिया जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया |

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ढाका के हमलावरों को ‘इस्लामी आतंकी’ कहें : तस्लीमा नसरीन

अपने निर्भीक लेखन के लिए दुनिया भर में खास पहचान रखने वाली बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने ट्विटर के माध्यम से ढाका हमले को लेकर कई अहम सवाल उठाए हैं। ढाका के हमलावरों को लेकर उन्होंने सीधा सवाल किया कि मीडिया उन्हें ‘गनमैन’ क्यों लिख रहा है? उन्हें ‘इस्लामी आतंकी’ क्यों नहीं कहा जा रहा? उन्होंने लोगों को मारने और उनमें दहशत फैलाने से पहले ‘अल्लाहू अकबर’ का नारा लगाया था। क्या उन्हें ‘इस्लामी आतंकी’ नहीं कहा जाना चाहिए था?

तस्लीमा ने इस तर्क को भी खारिज किया कि गरीबी किसी को आतंकवादी बना देती है। तस्लीमा ने अपने ट्वीट में लिखा कि ढाका हमले का आतंकी निब्रस इस्लाम तुर्की होप्स स्कूल, नार्थ साउथ और मोनाश यूनिवर्सिटी में पढ़ा था। उसका ब्रेन वॉश इस्लाम के नाम पर किया गया और वह आतंकी बन गया। ढाका हमले के सभी आतंकी अमीर परिवार से थे और सभी ने अच्छे स्कूलों में पढ़ाई की थी। कृपया यह मत कहिए कि गरीबी और निरक्षरता लोगों को इस्लामिक आतंकवादी बनाती है – “All Dhaka terrorists were from rich families, studied in elite schools. Please do not say poverty & illiteracy make people Islamic terrorists.”

तस्लीमा ने आगे बड़ी बेबाकी से कहा कि इस्लामिक आतंकवादी बनने के लिए गरीबी, निरक्षरता, तनाव, अमेरिकी विदेश नीति और इस्राइल की साजिश की जरूरत नहीं है। आपको इस्लाम की जरूरत है। ढाका की नृशंस घटना से आहत तस्लीमा ने यहाँ तक कहा कि इस्लाम को शांति का धर्म कहना बंद करें – “For humanity’s sake please do not say Islam is a religion of peace. Not anymore.”

बता दें कि बीते शुक्रवार को आतंकियों ने ढाका के एक रेस्टोरेन्ट में हमला कर 20 विदेशी नागरिकों की हत्या गला रेतकर कर दी थी जिनमें भारत की बेटी तारिषी जैन भी शामिल थी। गौरतलब है कि इन हमलों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आइएस) और अलकायदा ने ली है और इस लोमहर्षक घटना के पीछे जिन दो स्थानीय आतंकी संगठनों का हाथ होने की बात कही जा रही है उनमें से एक ‘अंसार-अल-सलाम’ को अलकायदा का समर्थन प्राप्त है और दूसरा ‘जमात-उल-मुजाहिद्दीन’ आइएस से जुड़ा हुआ है। वैसे  बांग्लादेश के अनुसार इस नृशंस घटना को अंजाम देने में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भी शामिल है।

यह भी जानें कि पिछले कुछ समय से बांग्लादेश में धार्मिक चरमपंथियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। लेखकों, प्रकाशकों, धार्मिक अल्पसंख्यकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वहाँ काम कर रहे विदेशी मूल के लोगों पर लगातार हमले हो रहे हैं। बीते दो दिनों में ही दो हिन्दू पुजारियों पर भी हमला हुआ और एक पुजारी की हत्या भी कर दी गई। दुख और हैरत की बात तो यह है कि ये सब कुछ ‘इस्लाम’ के नाम पर हो रहा है। क्या ‘इस्लाम’ की इससे बड़ी तौहीन भी कुछ हो सकती है?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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नीतीश और मांझी को क्यों करीब ला रहे लालू..?

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कल अपने बड़े बेटे और स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप के आवास पर इफ्तार पार्टी दी जिसमें भाजपा को छोड़ बिहार की तमाम पार्टियों के दिग्गज शामिल हुए। वैसे तो इस पार्टी में हाई प्रोफाइल लोगों की कोई कमी ना थी लेकिन सबकी निगाह लगी थी एकदम पास-पास बैठे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी पर। इसमें भी खास बात यह कि इन दोनों दिग्गजों को एक साथ बिठाकर इनके रिश्तों पर जमी बर्फ को हटाने का काम स्वयं लालू ने किया। जाहिर है कि यह हल्के में लेने की बात नहीं हो सकती।

बता दें कि नीतीश और मांझी की केवल कुर्सियां ही साथ-साथ नहीं थीं बल्कि दोनों बातचीत करते भी दिखे। यही नहीं इस मौके पर मांझी ने नीतीश की तारीफ भी कि और यहाँ तक कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूँ वो उन्हीं की वजह से हूँ। हालांकि बाद में उन्होंने यह कहकर बचने की कोशिश की कि राजनीति अपनी जगह है और शिष्टाचार अपनी जगह। इसका कोई और मतलब ना निकाला जाए। नीतीश ने भी कहा कि ऐसे आयोजनों में लोग एक-दूसरे से मिलते रहते हैं और बातें भी होती हैं। बात-मुलाकात पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

एक तरफ नीतीश और मांझी थोड़ा बच-बचाकर बोल रहे थे, जो स्वाभाविक भी था, तो उधर लालू अपने अंदाज मे बोल रहे थे कि जीतनराम मेरे पुराने सहयोगी और भाई हैं। हमलोग खुद इनकी इफ्तार पार्टी में गए थे और इन्हें आमंत्रित किया था। गौरतलब है कि मांझी ने रविवार को इफ्तार पार्टी दी थी जिसमें लालू अपने उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी के साथ पहुँचे थे। यहाँ याद दिला देना जरूरी है कि विधान सभा चुनाव के समय भी लालू मांझी को साथ लेना चाहते थे लेकिन नीतीश के ऐतराज के कारण ये सम्भव नहीं हो सका था।

कहने की जरूरत नहीं कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। स्वयं लालू और नीतीश की दोस्ती इसका एक बड़ा उदाहरण है। आज अगर लालू मांझी और नीतीश को करीब ला रहे हैं तो ये अकारण हरगिज नहीं। फिलहाल इसके तीन कारण तो स्पष्ट दिख रहे हैं। पहला यह कि मांझी को महागठबंधन का हिस्सा बनाकर लालू भाजपाविरोधी राजनीति में अपनी ‘प्रासंगिकता’ बनाए चाहते हैं। दूसरा, इससे महादलितों के बीच उनकी पैठ बढ़ेगी और तीसरा कि नीतीश से रिश्ता बिगाड़े बिना वे महागठबंधन के भीतर की राजनीति में खुद को और मजबूत कर सकेंगे। बहरहाल, सुलझे-अनसुलझे रिश्तों का ये ताना-बाना आगे क्या शक्ल अख्तियार करता है, ये देखना सचमुच दिलचस्प होगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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