नालंदा विश्वविद्यालय : पूरा हुआ कलाम का सपना

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना का जो सपना पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने देखा था, वह पूरा हुआ। नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के साथ करीब आठ सदी के बाद नालंदा के गौरवशाली इतिहास ने एक बार फिर करवट लिया। काश कि ‘मिसाईलमैन’ जीवित होते और इस ऐतिहासिक समारोह की शोभा बढ़ाते! खैर, वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बीते शनिवार को आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में 12 छात्रों को सम्मानित किया और इसके साथ ही युगपुरुष डॉ. कलाम की परिकल्पना हकीकत में तब्दील हो गई।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीक्षांत समारोह में इस विश्वविद्यालय के निमित्त डॉ. कलाम के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि आज भले ही नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह का आयोजन हो रहा हो परन्तु इसको पुनर्जीवित करने की परिकल्पना का श्रेय कलाम साहब को जाता है। बता दें कि 28 मार्च 2006 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने अपने बिहार दौरे के क्रम में इस प्राचीन विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने की सलाह दी थी। यह विचार उन्होंने बिहार विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए रखा था।

गौरतलब है कि पाँचवीं सदी में बने नालंदा विश्वविद्यालय में करीब दस हजार छात्र पढ़ते थे, जिनके लिए 1500 अध्यापक हुआ करते थे। छात्रों में अधिकांश एशियाई देशों चीन, कोरिया, जापान से आने वाले बौद्ध भिक्षु होते थे। इतिहासकारों के मुताबिक चीनी भिक्षु ह्वेनसांग ने भी सातवीं सदी में नालंदा में शिक्षा ग्रहण की थी। उन्होंने अपनी पुस्तक में नालंदा विश्वविद्यालय की भव्यता का उल्लेख किया है।

एक समय नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा शिक्षण-केन्द्र था, परन्तु 1200 ई. में बख्तियारपुर खिलजी के आक्रमण के दौरान यह विश्वविद्यालय पूर्णत: धरती के गर्भ में समा गया। हाल ही में यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर को विश्व धरोहर (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) में शामिल किया है। 446 एकड़ में बनने जा रहे वर्तमान विश्वविद्यालय का निर्माण-स्थल प्राचीन विश्वविद्यालय के इस खंडहर से करीब 10 किलामीटर दूर राजगीर में है। दीक्षांत समारोह में भाग लेने आए राष्ट्रपति ने राजगीर के पिल्खी गांव में विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर की आधारशिला भी रखी। अभी यह विश्वविद्यालय एक सरकारी भवन में चलाया जा रहा है।

विश्वविद्यालय की कुलपति गोपा सबरवाल ने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय के पहले सत्र में दो विषयों में तीन देशों के 12 छात्र थे, जबकि वर्तमान सत्र में तीन विषयों में 13 से अधिक देशों के 130 छात्र-छात्राएं हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहाँ आठ से ज्यादा विषयों की पढ़ाई होगी और 1600 छात्र नामांकित होंगे। दीक्षांत समारोह के मौके पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जॉर्ज यीओ, पूर्व कुलाधिपति अमर्त्य सेन एवं सदस्य लॉर्ड मेघनाद देसाई समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे ।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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समाजसुधारक, राष्ट्रभक्त व शिक्षाशास्त्री रासबिहारी लाल मंडल से मधेपुरा गौरवान्वित !

रासबिहारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के बैनर तले उसी के सभागार में राष्ट्रभक्त रासबिहारी जैसी शख्सियत की 98वी पुण्यतिथि समारोह पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनायी गयी जिसमें ‘आवाज़’ की भूमिका प्रशंसनीय रही |

समारोह के उदघाटनकर्ता बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने इस अवसर पर कहा कि रासबिहारी बाबू अपनी मिट्टी के लिए सदा संघर्ष करते रहे, शिक्षा के लिए आजीवन अलख जगाते रहे तथा स्वाधीनता आंदोलन में रवीन्द्र नाथ टैगोर, मो.मजहरुल हक एवं गोखले के साथ कार्य करते रहें | मंत्री ने कहा कि ऐसी शख्सियत की जीवनी को बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए |

यह भी बता दें कि जहां पुण्यतिथि समारोह को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्षा मंजू देवी एवं विद्यालय की प्रधानाचार्या रंजना कुमारी ने कहा कि रासबिहारी बाबू शिक्षा के उन्नयन हेतु किये गये कार्यों के लिए सदा याद किये जाते रहेंगे वहीं विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष वह समारोह की अध्यक्षता कर रहे डॉ.सुलेंद्र कुमार एवं विद्यालय के सदस्य रह चुके प्रो.प्रभाष चंद्र एवं डॉ.ए.के.मंडल ने पारिवारिक सदस्य होने के कारण कुछ रोचक पारिवारिक चर्चाएं की |

जहां एस.डी.एम. संजय कुमार निराला ने अपने संबोधन में कहा कि मधेपुरा की धरती ने समय-समय पर ऐसी विभूतियों को जन्म दिया जिन्होंने अपने समय का इतिहास रच डाला- जिनमें अव्वल थे रासबिहारी बाबू, वहीं प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, अवकाश प्राप्त शिक्षक राजेंद्र प्रसाद यादव एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ.सुरेश भूषण ने उनके सामाजिक परिवर्तन की दिशा में किये गये कार्यो की चर्चाएं की |

अंतिम वक्ता के रूप में समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने संबोधित करते हुए कहा कि रासबिहारी बाबू ने अपने ननिहाल “रानीपट्टी” में नानाश्री के घर जन्म लिया था और काशी-वाराणसी की पुण्य भूमि पर अंतिम सांस ली थी | जनजीवन के कल्याण हेतु उन्होंने सारा जीवन लगा दिया | लोगों को दहेज नहीं लेने, फिजूलखर्ची पर रोक लगाने तथा केश-मुकदमों की जगह पंचायत के जरिये न्याय हासिल करने की सीख देते रहे | अंग्रेजों के दांत खट्टे करते रहे | “भारत माता का संदेश” पुस्तक लिखकर उन्होंने आजादी का बिगुल फूंका | वे आजीवन औरों के लिए जीते रहे | जो औरों के लिए जीता है वह कभी नहीं मरता | रासबिहारी बाबू भी कभी नहीं मरेंगे | डॉ.मधेपुरी ने सबों से आग्रह किया कि वे आज से कभी उनके नाम के आगे स्वर्गीय नहीं लिखेंगे और ना बोलेंगे |

यह भी बता दें कि समारोह का श्रीगणेश मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर, जिप अध्यक्षा, विद्यालय प्राचार्या तथा विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया | स्वागत गान संगीत शिक्षक उपेन्द्र प्रसाद यादव की टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया | कबड्डी संघ के जिला सचिव अरुण कुमार की टीम को मेडल देकर तथा शहर में शांति व्यवस्था कायम रखने वाले विपीन कमांडो मोबाइल टीम के सदस्यों सहित जिला खेल प्रशिक्षक संत कुमार को मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने मोमेंटो-प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया |

इस अवसर पर रमेशचंद्र यादव, उपेंद्र प्रसाद यादव, चंद्रशेखर कुमार, मनमोहन यादव, बीरबल प्रसाद, रघुनाथ प्रसाद यादव, परमेश्वरी प्रसाद यादव आदि शहर के गणमान्य सहित छात्रों की अच्छी खासी उपस्थिति अंत तक रही | समापन भाषण के साथ प्राचार्या रंजना कुमारी ने सबों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया |

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मेडिकल पढ़ाई हेतु अपनी देह-दान करेंगे शिक्षक रमेश बाबू

समाजसुधारक व राष्ट्रभक्त रासबिहारी लाल मंडल के नाम वाले स्थानीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक रह चुके रमेश चन्द्र यादव उर्फ नागेन्द्र बाबू ने रासबिहारी बाबू के जीवन से सामाजिक सेवा की प्रेरणा पाकर एवं बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु के पदचिन्हों पर चलने का निर्णय लेकर ही मृत्यु के बाद अपना शव मधेपुरा के कर्पूरी मेडिकल कॉलेज अथवा भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई के लिए दान देने का संकल्प लिया है |

ऐसा निर्णय लेने के पीछे रमेश बाबू की सोच से आम लोगों को अवगत कराने के लिए मधेपुरा अबतक को उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत के लिए मृत देह अमूल्य है | सिर्फ जनरल पढ़ाई लिखाई ही नहीं, आगे के शोध एवं जटिल ऑपरेशन में दिग्गज सर्जन्स के लिए भी यह देह रोशनी का काम कर कई जिन्दगियाँ बचाती हैं | भविष्य में भी देहदान ही बनाता रहेगा बेहतर डॉक्टर |

यह भी जानें कि उनके बड़े बेटे शिक्षक अशोक कुमार ने बताया कि उनका संपूर्ण परिवार पिताश्री के इस संकल्प को सम्मान के साथ सहमति प्रदान किया है | पुत्र अशोक ने यह भी कहा कि पिताश्री की मृत्यु के बाद या तो मधेपुरा के मेडिकल कालेज या भागलपुर मेडिकल कालेज के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के लिए पिताश्री के शव को हस्तगत कराने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी |

बहरहाल शिक्षक रमेश चन्द्र यादव मधेपुरा नगर परिषद के वार्ड नंबर 14 के स्थाई निवासी हैं | हमेशा छात्रों के बीच लोकप्रिय रहे हैं तथा अंतर्कोष लुटाते रहे हैं | यूँ 2005 में ही सेवानिवृत्त होने के बावजूद आज भी छात्रों से घिरे रहते हैं |

यह भी जान लेना जरुरी है कि इस देह दान की बाबत रमेश बाबू ने बिहार के मुख्य सचिव, डीएम मधेपुरा तथा सिविल सर्जन मधेपुरा को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने हेतु आवेदन भी दिया है जिसमें उन्होंने यही भाव भरा है कि यदि उनकी मृत्यु के बाद मेडिकल छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों के लिए उनकी देह का उपयोग हो तो सदैव उनकी आत्मा को महान दानवीर होने की अनुभूति होती रहेगी |

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राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र मधेपुरा में मनी दादी प्रकाशमणी की 9वीं पुण्य-तिथि

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के बैनर तले भारतीय संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों को उजागर करने वाले तथा अनेक आध्यात्मिक रहस्यों को प्रकाश में लानेवाले इस कृष्णाष्टमी के दिन पुण्यात्मा दादी प्रकाशमणि की 9वीं स्मृति-दिवस को राजयोग प्रशिक्षण केंद्र, मधेपुरा द्वारा समारोह पूर्वक राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी रंजू दीदी की अध्यक्षता में मनाया गया |

इस अवसर पर मुख्य अतिथि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने विशिष्ट अतिथियों- चैतन्य कुमार वर्मा, डॉ.गदाधर पांडेय. डॉ.अजय, अविनाश आशीष, डॉ.अभय कुमार, डॉ.एन.के.निराला, ओमप्रकाश सहित श्रेष्ठ व्यापारी दिनेश सर्राफ आदि की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर दादी प्रकाशमणि की 9वी पुण्य-तिथि समारोह का उद्घाटन किया |

मौके पर श्रद्धा सिक्त भावनाओं के साथ श्रद्धालु नर-नारियों ने पुण्यात्मा दादी प्रकाशमणि के तैल-चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया और उनके आदर्शों को जीवन में शामिल करने का दृढ़ संकल्प भी लिया |

Dr.Madhepuri delivering speech
Dr.Madhepuri delivering Shradhanjali Speech at Rajyog Parikshan Kendra Madhepura .

यह भी बता दें कि इस उष्मीय संध्या में पसीने से भीगने के बावजूद भी आस्था एवं विश्वास से लबालब भरी आत्माएं सेवा केंद्र की संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी की निर्मल वाणी को ग्रहण करती रही | उन्होंने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि त्याग और तपस्या की मूरत बनी दादी प्रकाशमणि द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय को संसार के पाचों महाद्वीपों में प्रकाशमय बनाकर पहुंचाने का काम किया गया | ऐसी अटूट, अटल एवं अथक सेवा के यू.एन.ओ.  द्वारा उन्हें 1985 में ही शांतिदूत पदक से सम्मानित किया गया |

इस अवसर पर मुख्यअतिथि डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि दादी प्रकाशमणि ममता, करुणा एवं मातृत्व शक्ति से इस कदर ओत-पोत रही कि हर श्रद्धालु नर-नारी द्वारा उन्हें स्मरण करते ही अपने अंदर नारी शक्ति की अनुभूति होने लगती है | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि दुनिया में लोगों की चाहत क्या होती है ? प्रायः लोग यही चाहते हैं कि उन्हें शक्ति हो, विद्या हो और धन हो- जो आदिकाल से मातृशक्ति को ही उपलब्ध है | तभी तो दुर्गा-सरस्वती-लक्ष्मी की स्तुति…… या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रुपेण संसृता…… या फिर विद्या रूपेण संसृता…… अथवा लक्ष्मी रूपेण संसृता……. युग युग से चला आ रहा है | आपके सामने ताजा उदाहरण है- रियो ओलंपिक जहां भारत की दो बेटियों सिंधु एवं साक्षी ने हीं 125 करोड़ भारतवासियों की इज्जत बचाई जबकि हम सब मिलकर भी बेटियों की इज्जत नहीं बचा पाते हैं | आज बेटियों को बाजार से सब्जी भी लानी पड़ती है और ओलंपिक से मेडल भी | भारत की बेटी संतोष यादव को एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराने के लिए सारी शक्ति लगानी पड़ती है | कितनी विडंबना है कि तब भी समाज बेटियों को बोझ ही मानता आ रहा है |

अंत में सबों ने राधा-कृष्ण की जोड़ियों को मक्खन खिलाया और राजयोगिनी दीदी रंजू ने सबों को टीका लगाया | प्रसाद ग्रहण करने से पूर्व प्रजापिता को समर्पित किशोर ने सभी श्रद्धालुओं को धन्यवाद ज्ञापित किया |

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मधेपुरा जिला उत्साहपूर्वक मनाया बी.पी. मंडल राजकीय जयंती समारोह

25 अगस्त भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण तारीखों में शुमार होने लगा है | आज ही के दिन सोशल इंजीनियरिंग के वैज्ञानिक बी.पी.मंडल का जन्म काशी (उत्तर प्रदेश) की पवित्र धरती पर हुआ था | तब कौन जानता था कि यही बालक आगे चलकर मुरहो गांव के समाजसुधारक-क्रांतिवीर रासबिहारी लाल मंडल सरीखे योग्य पिता के योग्यतम पुत्र बनकर दुनिया में मुरहो-मधेपुरा को हर पल गौरवान्वित करता रहेगा |

मुरहो में आयोजित राजकीय जयंती समारोह-2016 के अवसर पर सर्वप्रथम समाधि स्थल पर माल्यार्पण के बाद बिहार सरकार के प्रतिनिधि मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर सहित उपस्थित जन प्रतिनिधियों पूर्व मंत्री व विधायक नरेंद्र नारायण यादव, विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव, विधायक निरंजन मेहता, पूर्व विधायक ओम बाबू, विजय कुमार वर्मा, जिप अध्यक्ष मंजू देवी सहित अन्य उपस्थित मान्यजनों का अभिनंदन करते हुए अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी मो.सोहैल ने कहा कि पिछड़ों के लिए मक्का और मंदिर है मुरहो | साथ ही यह भी घोषणा की डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल ने कि मधेपुरा के निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम का नाम- बी.पी. मंडल इंडोर स्टेडियम होगा तथा मुरहो में बी.पी. मंडल संग्रहालय बनेगा |

Minister Prof.Chandrashekhar , DM Md.Sohail, SP Vikas Kumar , Samajsevi Dr.Madhepuri , Prof.S.K. Yadav and others enjoying the performances of small kids at B.P.Mandal Townhall , Shahid Chulhai Marg , Madhepura
Minister Prof.Chandrashekhar , DM Md.Sohail, SP Vikas Kumar , Samajsevi Dr.Madhepuri , Prof.S.K. Yadav and others enjoying the performances of small kids at B.P.Mandal Townhall , Shahid Chulhai Marg , Madhepura

यह भी बता दें कि राजकीय जयंती समारोह की अध्यक्षता कर रहे डी.एम. मो.सोहैल ने मुरहो एवं आस-पास के गांव से आये हुए नर-नारियों का गर्मजोशी से अभिनंदन करते हुए समारोह में उपस्थित समाजसेवी डॉ.मधेपुरी को बी.पी. मंडल साहब के संबंध में विस्तार से बोलने के लिए आमंत्रित किया-

और हुआ भी वैसा ही…. डॉ.मधेपुरी ने तमाम अनछुए पहलुओं को विस्तार से उजागर करते हुए उपस्थित बच्चों से बस यही कहा- इस संसार में प्रतिदिन अनगिनत बच्चे जन्म लेते हैं, लेकिन कुछ ही बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने साहस भरे सतकर्मों के चलते दुनियावालों को मजबूर करते हैं कि वे उसे याद करें कि वह बच्चा किस दिन जन्म ग्रहण किया था ? कहां जन्मा था ? और देश व समाज के लिए क्या-क्या किया था उसने ? और अंत में अपने संबोधन में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित जनसमूह से यही कहा कि अगडे-पिछडे के भेद को मिटाने वाले मंडल एवं मंडेला का नाम विश्व में सदैव गूंजता रहेगा |

Small kids performing on the eve of Krishnastmi too at B.P.Mandal Townhall
Small kids performing on the eve of Krishnastmi  at B.P.Mandal Townhall

आगे राजकीय जयंती समारोह के अध्यक्ष के  निर्देशानुसार मंच संचालन किया स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव ने | श्री यादव ने आरंभ में सर्वधर्म प्रार्थना के बाद बिहार सरकार के प्रतिनिधि मंत्री प्रो.चंद्रशेखर सहित उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, पार्टी अध्यक्षों एवं मान्यजनों को उद्गार व्यक्त करने हेतु आमंत्रित किया | माननीय मंत्री प्रो.चंद्रशेखर सहित सभी मान्यजनों ने लगभग-लगभग यही भावनाएं व्यक्त की कि युवाओं को बी.पी. मंडल के पदचिंहों पर चलने की जरुरत है | साथ चलने पर ही वे सारे सपने साकार होंगे जिसे मंडल साहब ने देखा था, फिलहाल मंडल पूरी तरह लागू होना बाकी है |

यह भी जानें कि समारोह को डॉ.शांति यादव, प्रो.श्यामल किशोर यादव, डॉ.अरुण कुमार मंडल, प्रमोद प्रभाकर, सियाराम यादव, देव किशोर यादव आदि ने भी संबोधित किया तथा मंडल आयोग की रिपोर्ट हु-ब-हु लागू करने पर ही विकास को गति मिलने की बातें कही | मौके पर एस.पी. विकास कुमार, डी.डी.सी. मिथलेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला, सी.एस. डॉ.गदाधर पांडे, डी.आई.ओ. बद्री नारायण मंडल, डी.पी.आर.ओ.कयूम अंसारी, बी.डी.ओ. दिवाकर कुमार सहित प्रो.विजेंद्र नारायण यादव, तेज नारायण यादव, अशोक चौधरी, मो.शौकत अली, राजीव जोशी, डॉ.आलोक कुमार, कामरेड रमण आदि प्रमुख रूप से समारोह में शामिल थे | सवेरे जिले के सभी स्कूली बच्चों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई | फिर मेराथन रेस मधेपुरा बी.पी. मंडल चौक से मुरहो बी.पी.मंडल स्मारक तक | सभी प्रतिभागी को समारोह की ओर से गंजी पर “बी.पी.मंडल राजकीय जयंती समारोह 2016” अंकित करा कर दिया गया था | चतुर्दिक बी.पी. मंडल साहब का कटआउट लगाया गया था | मुरहो पीएचसी शिविर में 400 मरीजों की जाँच हुई |

अंत में धन्यवाद ज्ञापन जिला परिषद उपाध्यक्ष रघुनंदन दास ने किया | स्वागत-सत्कार डॉ.अरुण कुमार मंडल द्वारा किया गया |

शाम में मधेपुरा के बी.पी.मंडल नगर भवन में स्कूली बच्चों एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर, विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव, डॉ.मधेपुरी, जिलाधिकारी मो.सोहैल, एस.पी.विकास कुमार एवं एएसपी राजेश कुमार आदि द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया | साथ ही मंत्री महोदय द्वारा मैराथन विजेताओं को ट्रकसूट देकर पुरस्कृत किया गया |

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मोदीविरोध के ‘तवे’ पर पाकिस्तान की ‘रोटी’

सच से पुराना बैर है पाकिस्तान का। भारत के खिलाफ अपनी भोली जनता की भावनाएं भड़का कर ‘रोटी’ सेकना कोई उससे सीखे। हालांकि पाकिस्तान के लिए ये कोई नई बात नहीं, पर ताजा मामले में तो ‘मर्यादा’ की हर सीमा ही लांघ दी उसने। जी हाँ, पाकिस्तान की पंजाब असेंबली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। चौंक गए ना? अब जरा कारण भी जान लें। शायद आपको स्मरण हो कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण के दौरान बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि वहाँ और पीओके के लोगों ने उनकी समस्या उठाने के लिए उनको धन्यवाद ज्ञापित किया है। बस यही बात पाकिस्तान को चुभ गई। वहाँ की पंजाब असेंबली को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उसने पाकिस्तान की संघीय सरकार से इस मामले को संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की है।

गौरतलब है कि पंजाब प्रांत की असेंबली में वहाँ के कानून मंत्री राणा सनाउल्लाह ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया और यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास भी हो गया। प्रस्ताव में कहा गया कि सदन बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान पर मोदी के बयानों की कड़ाई से निन्दा करता है। सदन ने कहा कि पाकिस्तान की संघीय सरकार को चाहिए कि इस मामले को संयुक्त राष्ट्र समेत दूसरे अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाए। विश्व को यह बताने की जरूरत है कि मोदी सरकार पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के विधायक खुर्रम वाट्टू ने तो दो कदम आगे बढ़कर सदन से यहाँ तक कहा कि भारत से व्यापारिक संबंध तोड़ने के लिए संघीय सरकार से गुजारिश की जाए। वहीं पंजाब असेंबली में विपक्ष के नेता राशिद ने आरोप लगाया कि मोदी का बयान उनकी असहिष्णुता की नीति और दूसरे राज्यों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को दर्शाता है।

यहाँ गौर करने की बात ये है कि भारत-विरोध के नाम पर पाकिस्तान की तमाम पार्टियां कुल मिलाकर एक ही राग अलापती हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल हो चुके पाक के जिस्म पर ना जाने कितने ‘पैबंद’ लगे हैं, जिन्हें जनता की नज़रों में जाने से रोकने के लिए पाक का राजनीतिक और सैनिक नेतृत्व प्रारम्भ से बस भारत-विरोध का झंडा उठाता आया है। वैसे सच कहा जाय तो जहाँ ‘हाफिज सईद’ जैसों को पलकों पर रखा जाता हो वहाँ नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रस्ताव पारित होने पर हमें आश्चर्य होना ही नहीं चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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आप ‘कृष्ण’ को कितना जानते हैं?

कृष्ण को सभी जानते हैं, पर महत्वपूर्ण यह है कि कितना जानते हैं। आप ही बताएं कि क्या हैं कृष्ण? देवकीसुत, यशोदानंदन या राधाकांत? सुदामा के सखा, अर्जुन के सारथि या द्वारका के अधिपति? महाभारत की धुरी, गीता के उपदेशक या विष्णु के अवतार? कृष्ण के अनंत रूप हैं और हर रूप की अनगिनत छवियां हैं। हम अपने मिथक से लेकर इतिहास तक खंगाल लें, कृष्ण से अधिक पूर्ण, कृष्ण से अधिक जीवंत, कृष्ण से अधिक विराट व्यक्तित्व ना तो हुआ है, ना होगा।

कृष्ण को जानने के लिए हमें श्रीमद्भागवत का ये प्रसंग जरूर जानना चाहिए। कृष्ण की इच्छा थी कि उनके देह-विसर्जन के पश्चात् द्वारकावासी अर्जुन की सुरक्षा में हस्तिनापुर चले जाएं। सो अर्जुन अन्त:पुर की स्त्रियों और प्रजा को लेकर जा रहे थे। रास्ते में डाकुओं ने लूटमार शुरू कर दी। यह देख अर्जुन ने तत्काल गाण्डीव के लिए हाथ बढ़ाया। पर यह क्या! गाण्डीव तो इतना भारी हो गया था कि प्रत्यंचा खींचना तो दूर, धनुष को उठाना तक संभव नहीं हो पा रहा था। महाभारत के विजेता, सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी विवश होकर अपनी आँखों के सामने अपना काफिला लुटता देख रहे थे। विश्वास कर पाना मुश्किल था कि ये वही अर्जुन हैं जिन्होंने अजेय योद्धाओं को मार गिराया था। अर्जुन अचरज में डूबे थे कि तभी कृष्ण के शब्द बिजली की कौंध की तरह उनके कानों में गूंजे – “तुम तो निमित्त मात्र हो पार्थ।”

श्रीमद्भागवत का ये प्रसंग अकारण नहीं है। यहाँ अर्जुन को माध्यम बना हमें इस अखंड सत्य से अवगत कराया गया है कि जीवन में जब-जब ‘कृष्ण तत्व’ अनुपस्थित होता है, तब-तब मनुष्य इसी तरह ऊर्जारहित हो जाता है। कृष्ण के ना रहने का अर्थ है – जीवन में शाश्वत मूल्यों का ह्रास। प्राणी हो या प्रकृति, ‘प्राणवायु’ कृष्ण ही थे, कृष्ण ही हैं, कृष्ण ही रहेंगे।

कृष्ण का अवतरण मानवता के लिए एक क्रान्तिकारी घटना थी। वे हुए तो अतीत में लेकिन हैं भविष्य के। इतना अनूठा था उनका व्यक्तित्व कि हम आज भी उनके समसामयिक नहीं बन सके हैं। मनुष्य अभी भी इस योग्य नहीं कि उसकी सोच और समझ में कृष्ण अंट जाएं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कृष्ण अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो धर्म की परम गहराइयों और ऊंचाइयों पर होकर भी गंभीर नहीं हैं। किसी भी बिन्दु पर रत्ती भर भी और पल भर के लिए भी उदास नहीं होते कृष्ण। उन्हें आप हमेशा हंसते हुए, नाचते हुए, जीवन का गीत गाते हुए पाएंगे। कृष्ण को छोड़ दें तो अतीत का सारा धर्म दुखवादी था। उदास और आँसुओं से भरा था। हंसता हुआ धर्म, जीवन को समग्र रूप से स्वीकार करने वाला धर्म अभी पैदा होने को है। जाहिर है कि वैसा जीवंत धर्म कृष्ण-तत्व से ही संभव है।

कृष्ण अकेले हैं जो समग्र जीवन को पूरा ही स्वीकार कर लेते हैं। जीवन की समग्रता की स्वीकृति उन्हीं के व्यक्तित्व में फलित हुई है। इसीलिए इस देश ने सभी अवतारों को आंशिक अवतार कहा है और कृष्ण को पूर्ण अवतार। राम भी अंश ही हैं परमात्मा के लेकिन कृष्ण पूरे ही परमात्मा हैं। पुरानी मनुष्य-जाति के इतिहास में वे अकेले हैं जो दमनवादी नहीं हैं। उन्होंने जीवन के सब रंगों को स्वीकार कर लिया है। वे प्रेम से भागते नहीं। वे पुरुष होकर स्त्री से पलायन नहीं करते। वे करुणा और प्रेम से भरे होकर भी युद्ध में लड़ने की सामर्थ्य रखते हैं। अमृत की स्वीकृति है उन्हें लेकिन विष से कोई भय भी नहीं है।

हम जब-जब ‘पूर्णता’ की बात करेंगे, हमारे सामने ‘कृष्ण’ ही होंगे, क्योंकि पूर्णता के पूर्ण प्रतिमान केवल वही हैं, और जिसे हम ‘जन्माष्टमी’ कहते हैं, वो वास्तव में उसी पूर्णता का प्रतीक पर्व है। वर्ष में एक बार ये दिन आता है तो हमें ये एहसास दिलाने कि ‘अधूरेपन’ से लड़ने की ताकत हममें से हर किसी में है और जब तक कृष्ण हैं ‘पूर्णता’ की हर संभावना शेष है। मजे की बात तो यह कि पूर्णता की ये यात्रा ‘कृष्ण’ के साथ है और ‘कृष्ण’ तक ही पहुँचने के लिए है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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खेल के माध्यम से याद किए गये  बी.पी.मंडल

25 अगस्त को पटना-मधेपुरा-मुरहो में वर्षों से बी.पी.मंडल की राजकीय जयंती मनाई जाती रही है, परन्तु इस बार मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल की अध्यक्षता में 24 अगस्त को भी मधेपुरा के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न खेलों व भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से  बी.पी.मंडल को याद करते हुए प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पुरुष एवं महिला खिलाड़ियों को मेडल, कप व शिल्ड देकर पुरस्कृत किया गया समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं जिला नजारत उपसमाहर्ता मुकेश कुमार द्वारा |

दोनों वर्गों के चैंपियन खिलाड़ियों को जिलाधिकारी मो.सोहैल द्वारा चैंपियन ट्रॉफी दिया गया | इस अवसर को जहां अखबार नबीसों ने कैमरों में कैद किया वहीं दर्शकों एवं खिलाड़ियों की तालियों की गूंज से बी.एन.मंडल स्टेडियम हिल गया | लड़कियों का इटालियन साइकिल रेस दर्शकों को खूब भाया जिसे पहली बार खेलगुरु संत कुमार एवं अरुण कुमार द्वारा बी.पी. मंडल जयंती पर आयोजित किया गया था |

The President of B.P.Mandal Rajkiya Jayanti cum DM Madhepura Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri giving prizes and encouraging the girl players at BN Mandal Stadium Madhepura on 24th August 2016
The President of B.P.Mandal Rajkiya Jayanti cum DM Madhepura Md.Sohail along with Dr.Bhupendra Madhepuri giving prizes and encouraging the girl players at BN Mandal Stadium Madhepura on 24th August 2016

यह भी बता दें कि इस बार मधेपुरा को जिलाधिकारी मो.सोहैल द्वारा 24 अगस्त को ही बी.पी. मंडलमय कर दिया गया | बी.एन.मंडल स्टेडियम व कला भवन से लेकर शहीद चुल्हाय मार्ग स्थित बी.पी. मंडल नगर भवन में भी खेल ही खेल- कहीं शतरंज तो कहीं टेबल टेनिस, कहीं लड़कियों का भोलीबाल तो कहीं लड़कों का | कहीं स्कूली लड़कियों की दौड़ तो कहीं भाषण प्रतियोगिता…… कहीं कोच प्रदीप श्रीवास्तव तो कहीं रेफरी अनिल राज…… कहीं संचालक संजीव कुमार तो कहीं मंच संचालक अरुण कुमार…… और खेल को समर्पित संत कुमार की नजर तो सब तरफ समान रूप से |

Dr.Bhupendra Madhepuri after giving prizes to winner Riyanshi-Hansraj & Runner Riya and Ankit along with T.T. Coach Pradeep Shrivastava
Dr.Bhupendra Madhepuri after giving prizes to winner Riyanshi-Harshraj & Runner Riya and Ankit along with T.T. Coach Pradeep Shrivastava

यह भी जानें कि जहां बी.पी.मंडल नगर भवन में टेबल टेनिस को समर्पित प्रदीप श्रीवास्तव की उपस्थिति में लड़कियों के सिंगल में विनर के रूप में रियांशी और रनर के रूप में रिया को तथा लड़कों के सिंगल के विनर हर्षराज एवं रनर अंकित को डॉ.मधेपुरी ने कप देकर पुरस्कृत किया वही बी.एन.मंडल स्टेडियम में संजीव कुमार की देखरेख में लड़कियों के शतरंज में विजेता बनी केशव कन्या की जयश्री को और दूसरे नंबर पर बनी रहने वाली जूही कुमारी (पी.एस.कॉलेज) को भी डॉ.मधेपुरी ने कप देकर हौसला बढ़ाया | सभी विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार से नवाजा गया |

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पी.जी. परीक्षाएं शुरु होंगी अगस्त के अंतिम सप्ताह में

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर 2015 के सभी विषयों की परीक्षाएं अगस्त 2016 के अंतिम सप्ताह में शुरू होने जा रही है |

यह  भी जान लें कि पी.जी. प्रीवियस-2015 एवं पी.जी. फाइनल-2015 की परीक्षाएं 29 अगस्त 2016 से आरम्भ होंगी जबकि पी.जी. सेमेस्टर की परीक्षाएं 26 अगस्त 2016 से ही आरम्भ होगी |

यहाँ यह भी बता दें कि विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग द्वारा केवल 2 केंद्रों पर ही परीक्षाएं ली जाएंगी | कोसी प्रमंडल के सभी पी.जी. छात्रों के लिए भूपेन्द्र नारायण मंडल वाणिज्य महाविद्यालय (बी.एन.एम.वी. सहुगढ़ मधेपुरा) को केंद्र बनाया गया है वहीं पूर्णिया प्रमंडल के सभी पी.जी. छात्रों के लिए एम.एल. कॉलेज, कसबा पूर्णिया को केंद्र बनाया गया है |

यह भी जान लें कि पी.जी. सेमेस्टर की परीक्षाएं भी 26 अगस्त से इन्हीं दोनों केंद्रों पर उसी अनुरूप आरंभ होगी यानी कोसी के परीक्षार्थी बी.एन.एम.वी. कालेज केंद्र पर और पूर्णिया प्रमंडल के परीक्षार्थी एम.एल. कालेज कसबा केंद्र पर परीक्षा देंगे |

विशेष जानकारी के लिए परीक्षा विभाग से संपर्क करेंगे |

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‘आपदा’ में ‘एक’ हुए दो दिग्गज

बिहार के 38 में से 20 जिले बाढ़ से बेहाल हैं। पिछले तीन दिनों में 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 5 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। दिन-ब-दिन बिगड़ती स्थिति के मद्देनज़र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री को हालात से अवगत कराया और प्रधानमंत्री ने उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने फरक्का बांध का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ की यह स्थिति फरक्का बांध बनने के बाद गंगा में जमा हो रहे गाद के कारण बनी है। बिहार में गंगा की स्थिति पर उन्हें ‘रोने’ का मन करता है। हर साल बाढ़ से बचने का एकमात्र समाधान गंगा के तलछट की सफाई करना है। उन्होंने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना को बिहार में तलछट प्रबंधन से जोड़ते हुए कहा कि अगर स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस परियोजना की सफलता पर भी प्रश्नचिह्न लगेगा। नीतीश ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि उनकी मांगों पर तुरंत और सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी जिसमें राष्ट्रीय तलछट प्रबंधन नीति बनाना शामिल है।

गौरतलब है कि बिहार में अभी तक 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके बावजूद राज्य में बाढ़ की भयावह स्थिति है। दरअसल दूसरे राज्यों में बारिश के कारण बिहार को बाढ़ की विभीषिका झेलना पड़ रहा है। नेपाल और झारखंड के बाद अब मध्य प्रदेश में बारिश से बिहार में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस ओर भी प्रधानमंत्री का ध्यान आकृष्ट किया।

बता दें कि केन्द्र सरकार ने बिहार और उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में मदद करने के लिए एनडीआरएफ की 10 टीमें सोमवार को भेजी थीं। बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित राज्यों में एनडीआरएफ की कुल 56 टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश की स्थिति पर नज़र रखने के लिए दो डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल रैंक के अधिकारियों को लगाया गया है। इस मानसून सीजन में एनडीआरएफ की टीमें पूरे देश में 26,400 लोगों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकाल चुकी हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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