तेरी उड़ान में कभी विराम न हो…..!

कवि, साहित्यकार, संगीतकार के साथ-साथ बेमिसाल शिक्षक एवं महान वैज्ञानिक डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम का निधन 27 जुलाई, 2015 को तब हुआ जब उन्होंने शिलांग में- “पृथ्वी को रहने लायक कैसे बनाया जाय” विषय पर बोलते हुए अचानक पृथ्वी को ही अलविदा कह दिया |

उसी भारतरत्न डॉ.कलाम की पुण्यतिथि के अवसर पर मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसका विषय था- ‘ग्रामीण क्षेत्र के विकास में तकनीकी शिक्षा का योगदान’ तथा आयोजनकर्ता थे इसी कॉलेज के बी.सी.ए. एवं बी.बी.ए. के छात्रगण एवं बी.सी.ए. के शिक्षक प्रो.संदीप शांडिल्य |

गणमान्यों का परिचय कराते हुए प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार ने छात्र-छात्राओं से कहा कि इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी करेंगे जिन्होंने महामहिम राष्ट्रपति डॉ.कलाम की जीवनी तो लिखी ही है साथ ही राष्ट्रनिर्माता शिक्षक के रूप में उनका सानिध्य भी पाया है | मुख्य अतिथि उपकुलसचिव डॉ.नरेंद्र श्रीवास्तव व विशिष्ट अतिथि डॉ.शैलेश्वर प्रसाद, प्राचार्य डॉ.पूनम यादव आदि द्वारा उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी व अध्यक्ष डॉ.अशोक कुमार के साथ सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया गया |

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Bharatratna Dr APJ Abdul Kalam at Madhepura College Madhepura .
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri paying tribute to Bharatratna Dr APJ Abdul Kalam at Madhepura College Madhepura .

यह भी बता दें कि सर्वप्रथम डॉ.कलाम के तैलचित्र पर माल्यार्पण करते हुए उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतिदिन शाम में रामेश्वरम के गली वाली मस्जिद में नमाज पढ़ने के बाद वह नन्हा बालक कलाम रामेश्वरम की शिव मंदिर की परिक्रमा करता और लगे हाथ समुद्र के किनारे जाकर बालू के ढेर पर बैठकर आकाश में उड़ते पंछियों से यही कहता- ऐ पंछियों ! तेरी उड़ान में कभी विराम नहीं हो तुम झील के पानी की तरह रूकना नहीं….! डॉ.मधेपुरी ने उनके साथ बिताए अविस्मरणीय क्षणों का विस्तार से चर्चा करते हुए छात्रों को ढेर सारे संदेश दिए |

मुख्य अतिथि डॉ.श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डॉ.प्रसाद, प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार एवं प्राचार्या डॉ.पूनम यादव, प्रो.संदीप शांडिल्य ने छात्र-छात्राओं को कलाम के बताए गए मार्ग पर चलने के बहुतेरे संदेश दिये | सबों ने एक स्वर से यही कहा कि जब तक युवजन मानसिक रुप से विकसित नहीं होंगे तब तक गांव- शहर, प्रदेश और देश विकसित नहीं होगा |

सेमिनार में प्रो.विभाष चंद्र, प्रो.मनोज भटनागर, प्रो.मुस्ताक अहमद सहित गरिमा, उर्वशी व अन्य कई छात्र-छात्राओं ने भी अपना उद्गार व्यक्त किया | अंत में डॉ.कलाम की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया |

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