‘कबड्डी’ को जगह मिले ओलंपिक में

उत्तर भारत में प्रमुखता से खेले जाने वाले इस सामूहिक खेल ‘कबड्डी’ को दक्षिण भारत में ‘चेडू-गुडू’ कहकर खेला जाता है | वहीं पूर्वी भारत एवं बांग्लादेश में इसी खेल को ‘हा-दो-दो’ कहा जाता है तो पश्चमी भारत में ‘हु-तू-तू’ |

महाभारत काल में अभिमन्यु के द्वारा चक्रव्यूह को भेदने और निकलने वाले प्रसंग में सात-सात शूरमाओं की टुकड़ी की चर्चा प्रतीकात्मक रुप से इसी कबड्डी को दर्शाता है जो वर्तमान भारत में तेजी से प्रसिद्धि प्राप्त करता जा रहा है | उन दिनों गुरुकुलों में भी शिष्यों के शारीरिक व्यायाम के लिए ‘कबड्डी’ खेली जाती थी |

यह कि 1950 में भारतीय कबड्डी महासंघ की स्थापना की गई थी | 1952 में पुरुषों के लिए पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता मद्रास (चेन्नई) में आयोजित की गई जबकि महिलाओं के लिए कबड्डी खेल की पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता 1955 में कलकत्ता (कोलकाता) में हुई थी |

यह भी जानें कि पहली एशियाई कबड्डी प्रतियोगिता 1980 में कलकत्ता में आयोजित की गई वहीं 1990 में बीजिंग में हुए एशियाई खेलों में प्रतियोगी खेल के रूप में कबड्डी को मान्यता दी गई |

बता दें कि रविवार को रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में हिंदुस्तान दैनिक के ब्यूरोचीफ अमिताभ द्वारा आयोजित किए गए कबड्डी लीग समारोह का उद्घाटन बीएन मंडल विश्वविद्यालय के विद्वान कुलपति डॉ विनोद कुमार, समाजसेवी डॉ मधेपुरी, जांवाज एसपी विकास कुमार, सांसद प्रतिनिधि मोहन मंडल आदि ने दीप प्रज्वलित कर किया |

इस अवसर पर कुलपति डॉ विनोद कुमार ने कहा कि कबड्डी को लोकप्रिय बनाने के लिए विगत तीन वर्षों से हिंदुस्तान के ब्यूरोचीफ अमिताभ की टीम के सहयोगियों- मनीष-संजय, बंटी-विभाकर सहित सुभाष-देवेंद्र आदि द्वारा किए जा रहे प्रयास प्रशंसनीय हैं | उन्होंने कहा कि कबड्डी को ओलंपिक में जगह नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है |

समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में यही कहा कि हिंदुस्तान परिवार एवं इसके मुखिया अमिताभ हमेशा नये-नये सामाजिक दायित्वों का बखूबी निर्वहन कर शहर के ही नहीं बल्कि ग्रामीण प्रतिभाओं को भी एक बड़ा मंच दे-देकर आगे बढ़ने का मौका देते रहे हैं | उन्होंने हिंदुस्तान द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सामाजिक कार्यों के माध्यम से नये-नये कीर्तिमान स्थापित करने के लिए अमिताभ की टीम की सराहना की तथा दर्शकों एवं खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया |

जांवाज एसपी  विकास कुमार ने कबड्डी लीग के उद्घाटन पर खिलाड़ियों को खूब प्रोत्साहित किया | उन्होंने कहा कि खेल से मान-सम्मान, धन व शोहरत सबकुछ मिलता है | अच्छे खिलाड़ी अपना नाम तो रोशन करते ही हैं साथ ही देश को भी आगे बढ़ाने का काम करते हैं |

इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि मोहन मंडल, कबड्डी को समर्पित सचिव अरुण कुमार, थानाध्यक्ष मनीष कुमार, पुष्पेंद्र कुमार, SBI  के एस.के.झा आदि ने अपना उद्गार व्यक्त किया तथा खिलाड़ियों को पुरस्कृत किया | मौके पर समन्यवक अजय कुमार, डॉ.अरुण कुमार, स्काउट आयुक्त जय कृष्ण यादव, संदीप शांडिल्य, डॉ.रामकृष्ण तथा वीसी के सचिव शंभू नारायण यादव, राहुल यादव आदि प्रमुख रुप से मौजूद थे |

शोभिता संगीत महाविद्यालय एवं कला मंदिर के बाल कलाकारों ने बीच-बीच में अतिथियों एवं खिलाड़ियों का भरपूर मनोरंजन किया | अंत में धन्यवाद ज्ञापन हिंदुस्तान के संवाददाता प्रो.संजय परमार ने किया |

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फादर्स डे पर इससे बड़ी खुशी क्या होगी एक पिता के लिए..!

मोहना सिंह, अवनी चतुर्वेदी और भावना कंठ – ये तीनों देश की पहली तीन बेटियां हैं जिन्हें भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में शामिल किया गया। बता दें कि भारतीय वायुसेना सेना का पहला अंग है जिसने महिलाओं को बराबरी का दर्जा देते हुए इन तीन महिला अधिकारियों को लड़ाकू विमान उड़ाने वाले दस्ते में शामिल किया। इसके साथ ही भारत दुनिया का 21वां देश हो गया जिसके फाइटर पायलट की टुकड़ी में महिलाएं शामिल हैं।

देश को गौरव से भर देने वाली इन तीन बहादुर बेटियों में मोहना राजस्थान के झुनझुन की, अवनी मध्य प्रदेश के सतना की और भावना बिहार के दरभंगा की रहने वाली हैं। गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय ने महिला पायलटों को लड़ाकू विमान उड़ाने के दस्ते में शामिल करने की मंजूरी पिछले वर्ष दी थी। इसके बाद इन तीन कैडेटों ने लड़ाकू पायलट का प्रशिक्षण लेने की सहमति प्रकट की थी। इन तीनों को पहले चरण में डेढ़ सौ घंटे से भी अधिक समय तक विमान उड़ाने का प्रशिक्षण दिया गया है। अब अगले छह महीनों में इन्हें उन्नत लड़ाकू विमान हॉक पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बहरहाल, अब बात बिहार की बेटी भावना की जिसने टॉपर घोटाले का दंश और अपमान झेल रहे इस राज्य को एक बार फिर सिर उठाने का स्वर्णिम मौका दिया। ऐसे में उस पिता की खुशी का अंदाजा लगाइए जिसकी बेटी को सिर्फ बिहार ही नहीं पूरा देश पलकों पर बिठा रहा हो। और उस पर भी जब दिन आज का यानि फादर्स डे का हो तो सोचिए कि वो खुशी कितनी बड़ी हो जाएगी। खास तौर पर उस पिता के लिए जो कभी स्वयं वायुसेना में जाना चाहता हो और आज उसकी बेटी वहाँ पहुँच जाए और वो भी देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर। क्या किसी पिता के लिए आज के दिन इससे बड़ा उपहार हो सकता है?

भावना का जन्म 1 दिसंबर 1992 को दरभंगा के बाउर गांव में हुआ था। उनके पिता तेज नारायण कंठ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में अधिकारी हैं। उन्होंने 1986 में अपनी नौकरी की शुरुआत बरौनी रिफाइनरी से की थी। माँ राधा कंठ घरेलू महिला हैं।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी भावना ने 10वीं की परीक्षा बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप से पास करने के बाद 12वीं करने कोटा का रुख किया और वहाँ इंजीनियरिंग की तैयारी की। 2014 में उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग किया और टाटा कंसलटेंसी में उनका कैंपस प्लेसमेंट भी हो गया पर नियति ने भावना के लिए कुछ और तय कर रखा था। उनका इंतजार तो भारतीय वायुसेना को था। तभी तो भावना वायुसेना के शॉर्ट सर्विस कमीशन यानि एसएससी के लिए चुन ली गईं और फ्लाइंग ऑफिसर बन गईं। उसके बाद की कहानी तो खैर अब भारतीय वायुसेना के इतिहास में नया अध्याय जोड़ चुकी है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बेबस-लाचार मरीजों की जिन्दगी में भर रहे रंग

निर्धन एवं जरूरतमंद मरीजों, जिनके लिए कोई पैरवी करने वाला नहीं होता, की सेवा करना डॉ.बरुण कुमार एवं डॉ.रश्मि भारती अपना चिकित्सीय धर्म मानते हैं | पीड़ितों की सेवा को सर्वोपरि धर्म मानने वाले एवं चिकित्सीय कार्यो को जुनून व उत्साह के साथ करते रहने वाले इस दंपति का मुख्य लक्ष्य ही है कि वह पैसे की तंगी में रहने वाले गंभीर से गंभीर मरीजों को अपने क्लीनिक से वापस लौटने नहीं देते हैं | वैसे मरीजों की सेवा करने से इस दंपत्ति को संतुष्टि मिलती है | तभी तो 50 वर्ष की एक गरीब दलित महिला के पेट से इस दंपति ने 5 किलो का ट्यूमर निकालकर परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त किया |

Dr.Barun operating a female patient Smt.Jaso Devi having more than 5Kgs cancerous tumor along with Dr.Rashmi Bharti at Vrindavan Nursing Home Madhepura .
Dr.Barun operating a female patient Smt.Jaso Devi having more than 5Kgs cancerous tumor along with Dr.Rashmi Bharti at Vrindavan Nursing Home Madhepura .

डॉ.बरुण को गरीब मरीजों के ध्यान रखने का सबक दादी सुरती देवी ने दिया था जिसे वे आज तक अमल करते आ रहे हैं | डॉ. रश्मि भी वैसे गरीब मरीजों की सेवा में आगे रहती है और हर तरह से मदद कर अपने पिता-माता एवं दादा-दादी से पाए संस्कारों को ऊंचाई दे रही है | इन्हीं सेवा संस्कारों के कारण आज यह दैनिक जागरण का स्टार जोड़ी शहर की शान के रूप में वृंदावन नर्सिंग होम को लोकप्रिय बना रही है |

भूपेंद्र चौक के निकट पूर्वी बाईपास रोड पर वृंदावन नर्सिंग होम खोल कर मरीजों की सेवा में जुटे चिकित्सक दंपति का एक ही लक्ष्य है कि कोई गरीब रोगी पैसे के अभाव में बिना इलाज के वृंदावन से नहीं लौटे | यहां के गरीबों की सेवा उनकी पहली प्राथमिकता है |

Dr.Barun and Dr.Rashmi Bharti successfully operated many rare cases at Vrindavan Nursing Home Madhepura .
Dr.Barun and Dr.Rashmi Bharti successfully operated many rare cases at Vrindavan Nursing Home Madhepura .

पूछे जाने पर जनरल सर्जन डॉक्टर वरुण बताते हैं कि वे मूलतः मुंगेर जिले के वरियारपुर के निवासी हैं | इन्होंने पिता बी.प्रसाद माता लक्ष्मी देवी एवं बड़े भाई अरुण कुमार के सहयोग से रिम्स रांची से 2003 में एमबीबीएस की डिग्री ली और वहीं से एमएस की डिग्री लेकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में कुछ दिनों तक काम किया | फिर झारखंड के झुमरीतिलैया में कार्यरत रहे | 2009 में आजाद नगर मधेपुरा निवासी समाजसेवी डॉ मधेपुरी की चिकित्सक पुत्री डॉ.रश्मि भारती के साथ पावन परिणय में बंधने के बाद से वे स्थाई रूप से वृंदावन नर्सिंग होम में मरीजों की सेवा में जुड़ गए | तब से ये दोनों सेवा भावना के साथ लोगों की चिकित्सा सेवा करते आ रहे हैं | डॉ.बरुण ने अपनी दादी की बात- “गरीबों की मदद करना” को गांठ बांध ली जो आज भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है |

डॉ.रश्मि भारती महिला चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में 3 वर्षों तक सदर अस्पताल मधेपुरा में और उससे पूर्व दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल एवं अपने पैतृक चिकित्सा महाविद्यालय एमजीएम में कुछ दिनों तक काम करने के बाद निजी क्लीनिक में पति के साथ का काम करने लगी | डॉ.रश्मि भारती ने बताया कि वह मधेपुरा की रहने वाली है उन्होंने कहा कि समाज सेवी साहित्यकार पिता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं माता रेनू चौधरी ने बेहतर तरीके से समाज सेवा करने की प्रेरणा दी |

चिकित्सकद्वय ने यह भी बताया कि समाजवादी मनीषी बाबू भूपेन्द्र नारायण मंडल के जन्मदिन पर निर्धन लोगों एवं गरीब मरीजों के बीच भीषण ठंड में कंबल वितरित कर एवं एक दिवसीय मुफ्त चिकित्सा शिविर आयोजित कर वर्षों से लाचारों की जिंदगी में रंग भर रहे हैं  |

सौजन्य:- दैनिक जागरण

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“आईजी अंकल” की कहानी

कौन जानता था कि 9 मई, 1981 को पदभार ग्रहण करनेवाले मधेपुरा जिले के प्रथम एसपी अभयानंद, जिन्हें स्थानीय टी.पी.कॉलेज के फिजिक्स के लोकप्रिय प्रो.भूपेन्द्र मधेपुरी द्वारा सम्मानित किया गया था, आगे चलकर सुपर-30 एवं रहमानी सुपर-30 के आईजी अंकल बनेंगे तथा देश के बच्चों को मोबाइल पर फिजिक्स के सवाल सॉल्व कराएंगे |

First SP of Madhepura Mr.Abhayanand is being garlanded by the then Vice-Chairman Prof.Bhupendra Madhepuri in presence of First DM S.P.Seth and Sri Bholi Pd.Mandal First Chairman, Madhepura Municipality.
First SP of Madhepura Mr.Abhayanand is being garlanded by the then Vice-Chairman Prof.Bhupendra Madhepuri in presence of First DM S.P.Seth and Sri Bholi Pd.Mandal First Chairman, Madhepura Municipality.

बिहार के 28वें डी.जी.पी. पिता जगदानंद के योग्य पुत्र 48वें डीजीपी अभयानंद केवल IPS ऑफिसर ही नहीं बल्कि एडूकेशनिष्ट एवं सोशल एक्टिविस्ट के रूप में उस ऊंचाई को प्राप्त कर लिए हैं कि समस्त भारत के मेधावी छात्रों के बीच वे आज भी ‘आईजी अंकल’ कह कर ही पुकारे जाते हैं |

यह भी बता दें कि लगभग 15 वर्ष पूर्व आईपीएस अभयानंद का तबादला बीएमपी में हुआ था जहां व्यस्तता कम रहने की वजह से उन्होंने अपने बेटे को फिजिक्स पढाया और उसने आईआईटी क्रैक कर लिया | लगे हाथ उनके अंदर यह पवित्र विचार आया कि बेटे के अतिरिक्त अन्य बच्चों को क्यों न पढ़ाकर आईआईटीयन बनने में मदद करूं !

यहीं से जन्म हुआ आनंद कुमार के नाम चर्चित सुपर-30 में फिजिक्स पढाने वाले ‘आईजी अंकल’ का | बता दें कि एडीजी और फिर बिहार के डीजीपी बनने के बाद भी भारत के प्रतिभासंपन्न छात्र अभयानंद को सदैव ‘आईजी अंकल’ ही कहते रहे |

जब अवकाश ग्रहण करने के बाद IPS अभयानंद ने मुस्लिम बच्चों को पढ़ाने की योजना बनाई कि रहमानी सुपर थर्टी ने जन्म ग्रहण किया | इस वर्ष रहमानी सुपर-30 के 300 में से 270 बच्चों ने आईआईटी क्रैक किया जिसे बिहार ही नहीं, समस्त भारत द्वारा “आईजी अंकल” का कमाल करार दिया गया |

आज भी सरस्वती पुत्र अभयानंद के पढ़ने और पढ़ाने का सिलसिला जारी है |  बच्चों के पास उनका मोबाइल नंबर है | बच्चे जब चाहें प्रॉब्लम पूछते हैं और वे मोबाइल पर ही प्रॉब्लम सॉल्व करा देते हैं |

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बेहतर स्वास्थ्य सेवा कार्य योजना बने- विधानसभा अध्यक्ष

एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (ADRI) और सेंट्रल कैटेलाइजिंग चेंज (3C) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “बिहार में स्वास्थ्य एवं पोषण को प्राथमिकता” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने किया | उन्होंने बिहार में बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए केवल सामाजिक कार्यकर्ताओं को ही नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी एक साथ मिलकर काम करने का आह्वान विगत मंगलवार को पटना में किया |

विधानसभा अध्यक्ष श्री चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के विकास के केंद्र में स्वास्थ्य है | बेहतर स्वास्थ्य रखने वाला समाज ही आगे बढ़ता है | उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति के स्वस्थ रहने से ही समाज, प्रदेश और देश में उत्पादकता एवं आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ती है | हर क्षेत्र में बेहतर आउटपुट प्राप्त होता है |

महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर सरकार द्वारा विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं का स्वस्थ रहना विशेष जरूरी है क्योंकि एक स्वस्थ पुरुष बेहतर वर्तमान दे सकता है जबकि एक स्वस्थ महिला देश का भविष्य सुधारती है और परिवार एवं समाज में खुशहाली लाती है | उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के कंपोनेंट्स को बढ़ाया जाना चाहिए |

इस अवसर पर जहां आद्री के सचिव शैलाब गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि केरल के बाद बिहार देश का दूसरा राज्य होगा जहां आज सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है वहीँ 3C की कार्यपालक निदेशिका अपराजिता गोगोई ने विषय प्रवेश करते हुए कहा कि महिलाओं का शिक्षित होना अत्यंत जरुरी है, तभी वह स्वस्थ रह सकती है और उसका परिवार आगे बढ़ सकता है |

सेमिनार में बिहार जन स्वास्थ्य अभियान के संयोजक डॉ.शकील, आद्री के डॉ.पी.पी.घोष ने स्वास्थ्य को सड़क, बिजली और पानी की तरह अति महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और यह भी कहा कि बिहार में स्वास्थ्य पर प्रतिव्यक्ति 211 रूपया खर्च होता है जबकि राष्ट्रीय औसत 400 रुपया  है |

मौके पर विधान पार्षद अरुण सिन्हा एवं किरण घई, विधायक गीता कुमार एवं रंजू गीता सहित निवेदिता झा, तिलकराज गौरी, पुष्पराज, अजय कुमार आदि ने अपनी बातें रखीं और सबों ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए उचित बजटीय प्रावधान होना चाहिए |

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सलाम साइना

बैडमिंटन में भारत को नई ऊँचाईयां देने वाली साइना नेहवाल ने एक बार फिर पूरे देश का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया। बीते रविवार को शानदार खेल दिखाते हुए उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज अपने नाम कर लिया। सिडनी में खेले गए फाइनल मैच में साइना ने चीन की सुन यू को 11-21, 21-14, 21-19 से हराया। बता दें कि साइना ने इस खिताब पर दूसरी बार कब्जा किया है और ऐसा करने वाली वो पहली खिलाड़ी हैं। रियो ओलंपिक से पहले हासिल की गई ये जीत उनके लिए निश्चित रूप से मोरल बूस्टर का काम करेगी।

7.5 लाख डॉलर की इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला अत्यंत रोमांचक रहा। तमाम भारतीय दर्शक उस वक्त बेहद निराश हुए जब साइना ने अपना पहला सेट गंवा दिया था। लेकिन जबरदस्त वापसी करते हुए उन्होंने दूसरा सेट अपने नाम कर लिया। हालांकि, तीसरे सेट में सुन यू ने उन्हें कड़ी टक्कर दी लेकिन साइना ने अंतत: खिताब अपने नाम कर लिया। सुन यू के खिलाफ साइना का पलड़ा वैसे भी भारी रहा है। इससे पहले खेले गए छह मुकाबलों में साइना को पाँच बार जीत मिली थी। पिछली बार साइना ने चाइना ओपन में सुन यू के खिलाफ जीत हासिल की थी।

साइना की ये जीत महज एक खिलाड़ी की जीत नहीं है। उनकी ये जीत हरियाणा के उस समाज को चुनौती है जो महिलाओं को पुरुषों से कम समझता है। ये हरियाणा ही है जहाँ सबसे ज्यादा कन्या भ्रूण हत्यायें होती हैं। यहीं के एक जाट परिवार में जब साइना का जन्म हुआ था तो उनकी दादी ने अपनी पोती का चेहरा देखने से इंकार कर दिया था। कई महीनों तक उन्होंने साइना से खुद को दूर रखा। लेकिन, साइना के माता-पिता ने उन्हें हमेशा अपनी शक्ति समझा। बैडमिंटन खिलाड़ी माता-पिता ने शुरू से ही साइना को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रेरित किया। साइना के साथ उन्होंने भी जी-तोड़ मेहनत की और एक दिन वो आया जब साइना विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में शीर्ष स्थान तक पहुँचीं।

ये साइना ही थीं जिन्होंने बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ियों के वर्चस्व को खत्म कर भारतीय चुनौती को जिंदा किया। ओलंपिक खेलों में महिला एकल क्वार्टर फाइनल तक पहुंच कर कांस्य पदक जीतने वाली वो देश की पहली महिला खिलाड़ी बनीं। अपनी बेजोड़ उपलब्धियों के कारण 26 वर्षीया साइना ‘पद्मभूषण’ और ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित हो चुकी हैं।

साइना ने जितनी मेहनत अपने इस मुकाम को हासिल करने के लिए की है, उससे ज्यादा त्याग उनके माता-पिता ने उन्हें इस मंजिल तक पहुंचाने में किया है। उन्होंने जाट समुदाय की बेटियों के कमतर होने की बात को गलत साबित करके दिखाया है। आज साइना की दादी को भी उन पर गर्व है। देश का गुरूर बन चुकी इस बेटी को दिल से सलाम।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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पूर्णिया में खुलेगा विश्वविद्यालय

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय क्षेत्राधीन फिलहाल दो कमिश्नरी है एक कोसी और दूसरा पूर्णिया | मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि पूर्णिया में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सभी कानूनी अड़चने जल्द ही दूर कर ली जाएंगी | सीएम ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो विधानसभा के अगले सत्र यानि मानसून सत्र में विधेयक भी लाए जाएंगे | यह सुनकर सीमांचल के छात्र, शिक्षक एवं बुद्धिजीवियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई | परंतु मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय का क्या नाम होगा इस बाबत कुछ नहीं कहा |

मधेपुरा अबतक द्वारा जब बी.एन.एम.यू के पूर्व परीक्षा नियंत्रक व विश्वविद्यालय विभागाध्यक्ष फिजिक्स डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से पूछा गया तो उन्होंने कोसी अंचल के महान साहित्यकार एवं स्वतंत्रता सेनानी फणीश्वर नाथ रेणु के नाम की चर्चा की |

आप यह भी जाने की तत्काल बिहार में कुल 18 विश्वविद्यालय हैं- 2 सेंट्रल यूनिवर्सिटी 15 स्टेट यूनिवर्सिटी एवं एक डीम्ड विश्वविद्यालय | पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ बिहार को कुल 19 विश्वविद्यालय हो जाएंगे |

भारत में कुल मिलाकर हर तरह की यूनिवर्सिटीज की संख्या 754 है,  जिसमें 237 प्राइवेट यूनिवर्सिटी हैं |  वही विश्व में विश्वविद्यालयों की कुल संख्या 23364 हैं | यह भी जानिए की अमेरिका में सबसे अधिक विश्वविद्यालय है जिसकी संख्या- 3280 दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर कनाडा, ब्राजील और रूस आता है |

यदि विश्व के टॉप 100 विश्वविद्यालयों की सूची बने तो अकेले अमेरिका का 59, ब्रिटेन-कनाडा का 5-5 चीन- ऑस्ट्रेलिया का 4-4 और जर्मनी का 3…….. और मेक्सिको का एक विश्व विद्यालय होगा | प्राचीन काल में विश्वगुरु कहलाने वाले भारत के पास आज एक भी विश्वविद्यालय वैसा नहीं है जिसे विश्व के टॉप 100 में स्थान मिल सके |

इसके लिए छात्र-शिक्षक-अभिभावक सबों का संयुक्त प्रयास अनिवार्य है- अकेले पीएम-सीएम-डीएम के चाहने से संभव नहीं होगा | सोचिए तो सही टॉपर घोटाले करते कौन है ?

मुख्यमंत्री द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के नाते सीमांचल के अल्पसंख्यक छात्रों के लिए मदरसा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की आवश्यकता महसूस की गई और उन्होंने विश्वविद्यालय के साथ-साथ पूर्णिया कमिश्नरी की झोली में दोनों सौगातें डाल दी |

इन्हें अमली जामा पहनाने के लिए सीएम ने उपस्थित सांसदों एवं विधायकों से सहयोग करने का अनुरोध किया और जिला पदाधिकारी सहित सभी पदाधिकारियों को अविलंब जमीन चिन्हित करने का आदेश भी दिया |

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क्या तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए होगा ?

टी.वी. के विभिन्न चैनलों पर खासकर Zee News में सुधीर चौधरी के DNA  (डेली न्यूज़ एनालिसिस) के तहत लातूर एवं दिल्ली सहित लगभग-लगभग देश-दुनिया के सर्वाधिक स्थानों पर जल के वास्ते जीवन की आहुति भी देने की आशंकाएं जताई जाती हैं- जबकि कहावत यही है कि जल ही जीवन है यानी जल है तो जीवन है |

फिलहाल दैनिक जागरण द्वारा चलाए जा रहे अभियान- “तलाश तालाबों की” की चर्चाएं शीर्ष पर है | जल संकट की समस्याओं से निजात पाने के लिए देश-प्रदेश के युवाओं द्वारा तालाबों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया गया है तथा तेजी से लिया भी जा रहा  है |

तभी तो कहीं पर पोखर से जलकुंभी निकालते हुए युवजनों को देखा जा रहा है तो कहीं जागरूक ग्रामीणों द्वारा सफाई अभियान शुरु करते हुए अवलोकन किया जा रहा है | जीविका से जुड़ी महिलाएं भी तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर लगातार पहल कर रही हैं |

कुसहा त्रासदी के दरमियान कोसी अंचल के पोखरों एवं तालाबों की दुर्दशा से निपटने के लिए ग्रामीणों ने मधेपुरा अबतक को बताया कि हम लोगों की मेहनत के साथ-साथ यदि “मनरेगा योजना” से कुछ मदद मिल जाए तो पोखोरों का जीर्णोद्धार जल्द संभव हो जाएगा | ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बरसात के बाद भी यदि तालाब में पानी जमा रहता है तो आजू-बाजू के कुँए एवं चापाकलों में पानी का लेवल सदा बरकरार रहेगा, कभी सुखेगा नहीं | भला क्यों नहीं, अब तो युवा वर्ग भी अनुपम मिश्र की पुस्तक- “आज भी खरे हैं तालाब” का अध्ययन करने लगे हैं |

यह भी बता दें कि नावार्ड के जिला विकास प्रबंधकों द्वारा गोष्ठी आयोजित कर जल संरक्षण के संबंध में आम लोगों को विस्तार से जानकारी दी जा रही है |

फ़िलहाल जल को लेकर विभिन्न देशों एवं प्रदेशों के बीच संघर्ष एवं टकराहट की स्थिति देखी जा रही है | समय रहते यदि हम जागरुक नहीं होते हैं तो निकट भविष्य में धरती के अन्य हिस्सों की तरह हमें भी जल संकट का सामना करना पड़ेगा | यदि जल ही जीवन है तो तीसरा विश्वयुद्ध इसी के लिए होना अवश्यंभावी है | कई दिग्गज नेताओं ने इस बाबत भविष्यवाणी भी की है |

इसे टालने के लिए विश्व स्तर पर जल संचय को लेकर प्राचीन व्यवस्थाओं को जीवन्त करने के लिए जन-जन को “बूंद-बूंद पानी बचाओ” आंदोलन से जोड़ना होगा तथा पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की तरह हर किसी के मन में यह विश्वास पैदा करना  होगा- हम होंगे कामयाब एक दिन ……..!!

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राष्ट्रपति पद के लिए खुलकर हिलेरी के समर्थन में आए ओबामा

हिलेरी क्लिंटन की अमेरिका की महिला राष्ट्रपति बनने की सम्भावना को उस वक्त पर लग गए जब मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा खुलकर उनके पक्ष में आ गए। अमेरिका में राष्ट्पति पद के लिए होने जा रहे चुनाव में ये बड़ा मोड़ बीते गुरुवार को आया। ओबामा ने ट्विटर पर शेयर किए गए एक विडियो संदेश में कहा कि “मैं उनके साथ हूँ और मैं उत्साहित हूँ। मैं उनके साथ अभियान में जुड़ना चाहता हूँ।” बता दें कि ओबामा ने अपने समर्थन का ऐलान हिलेरी क्लिंटन के डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवार बनने के लिए जरूरी जादुई आँकड़े को पार करने के ठीक बाद किया है। अपने संदेश में उन्होंने हिलेरी को राष्ट्रपति की भूमिका के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार बताया है। सबसे बड़ी बात यह कि हिलेरी के लिए ओबामा का दिया गया संदेश कहीं से भी ‘राजनीति’ से प्रेरित नहीं लगता, इसमें हिलेरी के प्रति उनकी खुशी साफ तौर पर देखी जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी हासिल करने के लिए महीनों चले प्राइमरी चुनावों के दौरान ओबामा ने चुप्पी साधे रखी थी। सम्भवत: इसकी एक वजह डेमोक्रेटिक पार्टी से ही उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल बर्नी सैंडर्स थे। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि ओबामा ने हिलेरी को समर्थन की आधिकारिक घोषणा सैंडर्स से मुलाकात के बाद की। ओबामा से मुलाकात के बाद सैंडर्स ने भी कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को हराने के लिए वे अपनी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी के साथ मिलकर काम करेंगे। हिलेरी के ‘व्हाइट हाउस’ पहुँचने की संभावनाओं के लिहाज से ये एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है।

उधर रिपब्लिकन पार्टी के सम्भावित उम्मीदवार और अपने बड़बोले और भड़काऊ बयानों व भाषणों से चर्चा में आए धनकुबेर डोनाल्ड ट्रंप ओबामा के इस कदम को पचा नहीं पाए। उन्होंने हिलेरी के लिए अमर्यादित शब्द ‘Crooked’  (कुटिल) का प्रयोग करते हुए तुरंत ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी कि “Obama just endorsed Crooked Hillary. He wants four more years of Obama – but nobody else does!” (ओबामा ने अभी-अभी कुटिल हिलेरी का समर्थन किया है। उन्हें अपने लिए चार साल और चाहिए, लेकिन कोई और ऐसा नहीं चाहता)। एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा – “Crooked Hillary Clinton will be a disaster on jobs, the economy, military, guns and just about all else. Obama plus!” (कुटिल हिलेरी क्लिंटन नौकरियों, अर्थव्यवस्था, व्यापार, स्वास्थ्य, सैन्य, बंदूकों और अन्य सभी चीजों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होंगी और साथ होंगे ओबामा)।

इसमे कोई दो राय नहीं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘खास’ अंदाज और ‘आक्रामक’ बयानों से कम ही समय में अपने लिए अच्छा-खासा समर्थन जुटाया है लेकिन हिलेरी की उम्मीदवारी ‘स्पष्ट’ हो जाने के बाद ट्रंप का ‘ग्राफ’ गिरना शुरू हो गया है। उनके उपरोक्त ट्वीट में इससे उपजी उनकी ‘झुंझलाहट’ स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। उधर ओबामा और सैंडर्स के साथ खड़े हो जाने के बाद हिलेरी ‘इतिहास’ रचने के बहुत करीब दिख रही हैं। बहरहाल, भविष्य के गर्भ में क्या है, ये तो हम नवंबर में ही जान पाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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सिब्बल, वैंकेया, अमर, ऑस्कर और एमजे अकबर राज्य सभा पहुँचे

आज सात राज्यों में राज्य सभा की 27 सीटों के लिए हुए चुनाव में भाजपा के 11, सपा के 7, कांग्रेस के 6, बसपा के 2 और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। यूपी में तमाम आशंकाओं को दरकिनार करते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने जीत हासिल की। उनकी जीत की राह बसपा के समर्थन से आसान हुई। सिब्बल के अलावे आज संसद के उच्च सदन पहुँचने वाले अन्य प्रमुख उम्मीदवार हैं – राजस्थान से केन्द्रीय मंत्री वैंकेया नायडू, यूपी से सपा के अमर सिंह और बेनी प्रसाद वर्मा तथा बसपा के सतीश चंद्र मिश्र, मध्य प्रदेश से भाजपा के एमजे अकबर, झारखंड से केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, हरियाणा से केन्द्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह, कर्नाटक से केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण तथा कांग्रेस उम्मीदवार ऑस्कर फर्नांडीस और जयराम रमेश एवं उत्तराखंड से कांग्रेस के प्रदीप टम्टा।

कांग्रेस की निगाह यूपी पर टिकी हुई थी। भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा के मैदान में आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिंब्बल की लड़ाई मुश्किल हो गई थी। पर मायावती के समर्थन से सिब्बल ने ये मुश्किल लड़ाई जीत ली। प्रीति महापात्रा की हार से भाजपा को यहाँ झटका लगा। बता दें कि कांग्रेस के सिब्बल के अतिरिक्त यूपी से सत्तारूढ़ सपा के सभी सात उम्मीदवार तथा बसपा के दो और भाजपा के एक उम्मीदवार ने जीत हासिल की।

प्रीति महापात्रा को लेकर भाजपा को यूपी में जहाँ मुँह की खानी पड़ी, वहीं हरियाणा और झारखंड में वो उलटफेर करने में कामयाब रही। हरियाणा में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी व जी टीवी के संस्थापक सुभाष चन्द्रा ने जीत हासिल की। इन्होंने प्रसिद्ध अधिवक्ता तथा कांग्रेस और आईएनएलडी समर्थित उम्मीदवार आरके आनंद को हराया। उधर झारखंड में भाजपा ने दोनों सीटें जीत लीं। यहाँ भाजपा के पहले उम्मीदवार मुख्तार अब्बास नकवी तो आसानी से जीते ही, इसके दूसरे उम्मीदवार महेश पोद्दार ने भी जेएमएम के बसंत सोरेन को हरा दिया। जबकि बसंत सोरेन को कांग्रेस का समर्थन भी हासिल था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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