संस्थापक कुलपति डॉ.रवि ने किया लोकार्पित- ‘उजाले का सफर’

बी.एन.मंडल वि.वि. के संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप के गीत-संग्रह ‘उजाले का सफर’ का लोकार्पण किया | लोकार्पणकर्ता डॉ.रवि ने कहा कि अंधेरे की त्रासदी में ‘उजाले का सफर’ करनेवाले सिद्धहस्त कवि डॉ.सिद्धेश्वर परिवर्तन के मार्ग को प्रशस्त करने में सक्षम हैं| उन्होंने कहा कि डॉ.काश्यप की मानवीय प्रतिबद्धता और मूल्यपरकता  सराहनीय है |

मुख्य अतिथि के रुप में प्रधानाचार्या डॉ.रेणु सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ.काश्यप रचनात्मक धर्म को नया स्वर देते हैं | उन्होंने यह भी कहा कि डॉ.सिद्देश्वर मानवीय जिजीविषा और मुक्ति चेतना को अभिव्यक्त करने में सिद्धहस्त है और सक्षम भी |

लोकार्पण समारोह के संचालक डॉ.विनय कुमार चौधरी ने कहा कि डॉ.काश्यप रचनात्मक प्रतिभा के साथ-साथ आलोचनात्मक प्रतिभा से भी संपन्न हैं | उन्होंने कहा कि निरंतर रचनात्मक लेखन सुकवि सिद्धेश्वर की मूल पहचान है |

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.इंद्र नारायण यादव ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि डॉ.सिद्धेश्वर समय का साक्षात्कार करते हैं और अनुभूत सत्य का उद्घाटन भी | उन्होंने संस्थापक कुलपति एवं मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी का श्रीगणेश किया | काव्य गोष्ठी में डॉ. रवि, डॉ.रेणु एवं डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप सहित संचालक डॉ.चौधरी ने अपनी प्रतिनिधि कविता का पाठ किया |

जिले के उद्यान पदाधिकारी राजन बालन ने अपनी कविता से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और बटोर ली तालियां भी | काव्य पाठ करने वालों में डॉ.सीताराम शर्मा, प्रो.गीता यादव, डॉ.आलोक कुमार, सियाराम यादव मयंक, डॉ.प्रवीण, रश्मि-प्रीति-विकास आदि प्रमुख रहे | सुधी श्रोताओं के रुप में सोमनाथ, सियाराम, कृष्ण मुरारी, राम कृष्ण, सुनील, आनंद जी आदि अंत तक कविता का रसास्वादन करते रहे |प्रो.इंद्र नारायण यादव के धन्यवाद के साथ ही समारोह के समापन का उद्घोष किया गया |

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अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने

स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने मधेपुरा अबतक को चंद रोज पूर्व ही बताया था कि बिहार को भूकंप, बाढ़, सुखाड़, आग आदि अन्य विभिन्न तरह की आपदाओं से सुरक्षित रखने एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए दो दिवसीय (20-21 मई) कार्यशाला का आयोजन राजधानी पटना के होटल पाटलिपुत्र अशोका में आयोजित किया जाएगा |

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी ने बताया कि कार्यशाला का उद्घाटन माननीय विभागीय मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर द्वारा किया जाएगा | उन्होंने यह भी कहा कि कार्यशाला में रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं पर चर्चाएं होंगी जिससे ‘सुरक्षित बिहार’ बनाने के कार्यक्रमों का निर्धारण एवं कार्यान्वयन द्रुत गति से किया जा सकेगा |

साथ ही नीतीश कुमार द्वारा ‘सुरक्षित बिहार’ बनाने हेतु जो कार्यक्रम निर्धारित किए जायेंगे उसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों श्री आर.के.जैन, कमल किशोर सहित संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो.संतोष कुमार व अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के मूल्यवान विचारों को बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा प्राथमिकता के आधार पर अमलीजामा पहनाने का संकल्प प्राधिकरण के अधिकारियों अनिल कुमार सिन्हा, डॉ.उदयकांत मिश्र व प्रो.आनंद स्वरुप आर्य आदि द्वारा लिया जाएगा |

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क्या कहते हैं पाँच राज्यों के परिणाम..?

पाँच राज्यों में हुए विधानसभा के नतीजों में पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ और तमिलनाडु में ‘अम्मा’ का डंका एक बार फिर बजा तो असम में सर्वानंद ने भाजपा को ‘आनंद’ से भर दिया। वहीं केरल ‘लाल’ होकर लेफ्ट के हाथों में चला गया। रहा पुडुचेरी तो वहाँ डीएमके और कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने बता दिया कि वो अकेले सब पर भारी हैं। वहाँ ना तो लेफ्ट और कांग्रेस का ‘अस्वाभाविक’ गठबंधन उनके सामने टिका, ना ही मोदी और उनके रणनीतिकारों की ‘मेहनत’ काम आई। यहाँ ममता अकेले 294 में से 211 सीटें ले उड़ीं और मुकाबले को एकतरफा कर दिया। कांग्रेस को 44, लेफ्ट को 32, भाजपा को 3 और अन्य को 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा।

असम में सत्ता की दौड़ भाजपा ने जीती और अब उत्तर-पूर्व में पहली बार उसकी सरकार बनने जा रही है। यहाँ कांग्रेस को 15 साल के शासन से बेदखल करना उसकी बड़ी उपलब्धि है। भाजपा को यहाँ अपने मुख्यमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल की साफ-सुथरी छवि का बड़ा लाभ मिला। यहाँ की 126 सीटों में से उसके गठबंधन ने 86 सीटें अपने नाम कर लीं, जबकि कल तक यहाँ शासन में रही कांग्रेस अपने साथियों के साथ महज 26 सीटों पर सिमट गई। आईयूडीएफ को 13 और अन्य को 1 सीट मिली।

तमिलनाडु में जयललिता ने जबरदस्त वापसी की। 27 सालों में यहाँ पहली बार ऐसा हुआ कि एक पार्टी सरकार लगातार दूसरी बार बनने जा रही है। यहाँ की 234 में से 134 सीटें एआईएडीएमके के खाते में गईं। डीएमके और कांग्रेस मिलकर भी एआईडीएमके का सामना नहीं कर पाईं। तमाम कोशिशों के बावजूद करुणानिधि की पार्टी को जहाँ 89 सीटें ही मिलीं, वहीं कांग्रेस किसी तरह 8 सीटों पर काबिज हो पाई। अन्य के खाते में 1 सीट गई।

बुरे वक्त से गुजर रही कांग्रेस को केरल में भी निराश होना पड़ा। यहाँ की 140 सीटों में से 91 सीटें लेफ्ट गठबंधन के हिस्से में गईं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ 47 सीटें ही मिल पाईं। 1 सीट के साथ भाजपा ने यहाँ अपना खाता खोला। बची 1 सीट अन्य को मिली।

30 सीटों वाले पुडुचेरी ने डीएमके और कांग्रेस के जख्म पर थोड़ा मरहम जरूर लगाया। इन दोनों ने मिलकर यहाँ 17 सीटें अपने नाम कीं। एआईएनआरसी को 9, एआईएडीएमके को 4 और अन्य को 1 सीट मिली।

इन राज्यों के परिणाम आने के बाद स्वाभाविक रूप से कांग्रेस खेमे में मायूसी है और भाजपा उत्साहित दिख रही है। देखा जाय तो भाजपा का उत्साह अकारण भी नहीं है। अगर इन पाँच राज्यों की सीटों को मिलाकर देखें तो भाजपा ने 670 सीटों पर चुनाव लड़ा और 65 सीटों पर दर्ज की, जबकि 2011 में पार्टी ने 771 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे बस 5 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार उसकी सीटों में जहाँ 13 गुना इजाफा हुआ वहीं असम भी झोली में आ गिरा। लेकिन इन परिणामों ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय दलों का युग अभी समाप्त होने वाला नहीं। दिन-ब-दिन कमजोर होती कांग्रेस से देश भर में भाजपा को जितना भी लाभ मिला हो, सच यही है कि उससे कहीँ अधिक फायदे में क्षेत्रीय दल रहे हैं।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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यू.वी.के. कॉलेज कड़ामा में 12 दिवसीय यू.जी.सी. स्पोन्सर्ड अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

यू.जी.सी. प्रायोजित 12 दिवसीय एजुफेस्ट का शुभारम्भ 16 मई को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ | राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष कामेश्वर झा एवं मंडल वि.वि. के कुलपति डॉ.विनोद कुमार व सिंडीकेट सदस्य, एमएलसी डॉ.संजीव कुमार सिंह के कृपापूर्ण आशीर्वचनों से युक्त प्रधानाचार्य सह आयोजन समिति के चेयरमेन डॉ.माधवेन्द्र झा आदि द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया |

सेमिनार में आतंकवाद, आपदा-प्रबंधन……महात्मा गाँधी के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरुप, क्लीन एंड ग्रीन इंडिया…..सोलर विंड पॉवर आदि विषयों पर शोधपूर्ण चर्चा करने के लिए पधारे त्रिभुवन वि.वि.काठमांडू नेपाल के डॉ.कुशेश्वर झा, बिहार विश्वविद्यालय के डॉ.अमर नाथ झा, राष्ट्रभाषा परिषद् के निदेशक डॉ.जयकृषण मेहता, सम्बन्धन प्राप्त महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य संघ के संयोजक डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्या डॉ.पूनम यादव आदि को आयोजन समिति के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ.माधवेन्द्र झा द्वारा स्वागत में पाग, चादर, माला व बुके दिया गया | साथ ही कॉलेज की छात्राओं द्वारा पीले वस्त्र में मंत्रोच्चारण करते हुए सेमिनार स्थल को सुशोभित किया गया तथा अपने सुरीले स्वागत गान से अतिथियों का स्वागत किया गया|

इस अवसर पर यूवीके कॉलेज कड़ामा का ध्वजा रोहन करने के बाद विधान पार्षद डॉ.संजीव कुमार सिंह ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि जो भी वित्तरहित महाविद्यालय क्रियाशील हैं उनके संस्थापकों द्वारा करोड़ों रूपये लगाये गये हैं, सरकार का एक पैसा भी नहीं लगा है | उन्होंने रूसा के चेयरमेन व वायस चेयरमेन से भी ऐसे शिक्षकों को सरकार द्वारा वेतन देने के बाबत प्रयास करने की चर्चा की | डॉ.संजीव ने अपना हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि शिक्षकों की सेवा का सामंजन सबसे पहली बाधा है जिसे कॉलेज प्रबंधक द्वारा संवेदनशील होकर करने की जरुरत है | विधान पार्षद ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में इतना बड़ा सेमिनार आयोजित करने के लिए कॉलेज के शिक्षकों-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों सहित आयोजन समिति के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ.माधेवेंद्र झा को हृदय से कोटि-कोटि शुभकामनाएँ अर्पित की|

आगत अतिथियों द्वारा प्रथम दिन के विषय-‘21वीं सदी में आतंकवाद’ पर विचार व्यक्त करते हुए यही कहा गया कि आतंकवाद का कोई धर्म और मजहब नहीं होता | जहाँ किसी ने यह कहा कि आतंकवाद के कई पहलू हैं– सामाजिक आतंकवाद, धार्मिक आतंकवाद एवं राजनैतिक आतंकवाद तो वहीँ अन्य विद्वान् वक्ताओं ने आतंकवाद की जड़ को धर्म, राजनीति एवं आधुनिकता से जुडी हुई बताया |

इस अवसर पर आतंकवाद पर आधारित देश-विदेश के विद्वानों एवं शोध कर्मियों द्वारा दिये गये आलेखों से तैयार की गई स्मारिका का भी विमोचन किया गया |

मौके पर ललन झा, डॉ.प्राण मोहन सिंह, सुशीला कुमारी, श्याम किशोर यादव एवं कॉलेज शिक्षकों सहित छात्र-छात्राओं की भारी उपस्थिति अंत तक बनी रही| सेमिनार का सफल संचालन डॉ.अरुण कुमार ने किया |

 

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बिहार रचेगा इतिहास, राज्य में दौड़ेगी स्काई ट्रेन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चयों में एक निश्चय पाँच घंटे में बिहार के किसी भी कोने से पटना पहुँचना है। पर बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग की कोशिश इस समय को और कम करने की है। इतना कम कि शायद आप यकीन ना करें। जी हाँ, अगर विभाग की ये कोशिश रंग लाई तो बहुत जल्द बिहार में स्काई ट्रेन दौड़ती दिखाई देगी जो बिहार के जिला मुख्यालयों से पटना को 240 से 260 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जोड़ेगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। सरकार इस योजना को पीपीपी मोड (सार्वजनिक-निजी सहभागिता) पर चलाएगी। विभाग के मंत्री माहेश्वर हजारी ने स्काई ट्रेन का निर्माण करने वाली कम्पनी ‘नाईटशेड ग्लोबल इंफ्रा’ से विचार-विमर्श के बाद अधिकारियों से इस दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। जल्द ही विभाग इस प्रोजेक्ट की तकनीकी जाँच कराएगा। रिपोर्ट में सब कुछ ठीक रहा तो सरकार इस योजना को अमलीजामा पहनाने में लग जाएगी।

बता दें कि स्काई ट्रेन को नासा ने डिजाईन किया है। पोल के सहारे चलने वाली यह ट्रेन छोटी-छोटी बोगियों का समूह होगी। एक बोगी में चार लोग बैठ सकेंगे। मेट्रो ट्रेन से तुलना करें तो स्काई ट्रेन रफ्तार में उससे लगभग चार गुना तेज और लागत में लगभग चार गुना कम होगी। मेट्रो की रफ्तार 55 से 80 किमी प्रति घंटा होती है, जबकि स्काई ट्रेन की 240 से 260 किमी प्रति घंटा। इसी तरह मेट्रो की लागत 250 से 500 करोड़ प्रति किमी होती है, जबकि स्काई ट्रेन की 90 से 120 करोड़ प्रति किमी।

स्काई ट्रेन की एक बड़ी खूबी यह है कि इसके लिए भूमि अधिग्रहण की ज्यादा जरूरत नहीं होगी। यही नहीं, इसके रखरखाव पर भी ज्यादा खर्च नहीं होगा और ध्वनि प्रदूषण भी काफी कम होगा। वर्तमान में इस ट्रेन का परिचालन इजरायल में हो रहा है। जहाँ तक भारत की बात है तो बिहार स्काई ट्रेन चलाने वाला पहला राज्य होगा। बिहार सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत बुद्ध सर्किट से करना चाहती है। पहले चरण में इस योजना के तहत गया, बोधगया, राजगीर, वैशाली, केसरिया, अरेराज और लोरिया जैसे शहर पटना से जुड़ेंगे।

संसार के पहले गणतंत्र की स्थापना से लेकर सम्पूर्ण क्रांति की उद्घोषणा तक बिहार हमेशा देश और दुनिया का अगुआ रहा है। आज भी महिलाओं को समान अधिकार देने से लेकर शराबबंदी का अभियान चलाने तक बिहार बाकी राज्यों से आगे है। अगर स्काई ट्रेन जैसी यातायात की नई तकनीक का इस्तेमाल कर बिहार मूलभूत सुविधा के क्षेत्र में भी देश की अगुआई करे तो बढ़ते बिहार को बढ़ते भारत की पहचान बनने से कोई रोक नहीं सकेगा।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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पत्रकारों की हत्या लोकतंत्र की हत्या है

अच्छी सड़कें एवं अच्छी बिजली की व्यवस्था, परन्तु खराब हो रहे लॉ एंड आर्डर से बिहार की छवि कलंकित होने लगी है जबकि बिहार के हर कोने से प्रतिवर्ष आई.ए.एस. व आई.पी.एस. निकलने लगे हैं- यहाँ तक कि टॉप टेन में भी दो स्थान पाने लगे हैं | अर्द्धशतक बना बनाकर अब शतक बनाने की कोशिश में कदम बढ़ाने लगे हैं |

‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जार्नलिस्ट’ के शोधानुसार भारत में 1992 से अबतक लगभग 100 पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी हैं | सवाल यह नहीं कि कितने मामलों में इन्साफ मिला और कितने अपराधियों को माफ़ी मिल गई ! सवाल यह है कि वैसे सैकड़ों आहत परिवार की तरह और कबतक इस लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ की हत्याएं होती रहेंगी | सीवान में हिन्दुस्तान के ब्यूरोचीफ राजदेव रंजन और झारखंड के पत्रकार इन्द्रदेव यादव के बच्चों के सपने कब तक भूलुंठित होते रहेंगे ! कब तक विदेशों में भी ऐसी मर्माहत करने वाली हत्याओं की भर्त्सनाएँ की जाती रहेंगी ! तथा देश के कोने-कोने में पत्रकारों द्वारा काले बिल्ले लगा-लगाकर धरना दिये जाते रहेंगे ?

वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र भारद्वाज की अध्यक्षता में जिले के प्रतिष्ठित पत्रकार अमिताभ एवं रुपेश कुमार सहित प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी पत्रकारों ने राजदेव एवं इन्द्रदेव की दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए सम्मिलित रूप से दो मिनट का मौन रखा | श्रधांजलि सभा में पत्रकारों द्वारा सुरक्षा की मांग के साथ-साथ इन दोनों पत्रकारों को राजकीय शहीद का दर्जा देते हुए उसके तहत मिलने वाली सुविधाएँ उनके परिजनों को मुहैया कराने की मांग भी की गई |

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वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं गांधीजी के सबसे प्रिय पोते..!

कहने को हमारा देश महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चल रहा है पर उनके परिवार को देखने की फुरसत आज किसी को नहीं है। सुनकर शायद हैरानी हो आपको पर राष्ट्रपिता के सबसे प्रिय पोते वृद्धाश्रम में रहने को विवश हैं। जी हाँ, कभी महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी की गोद में खेले कनु रामदास गांधी पिछले एक सप्ताह से अपनी पत्नी सहित दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर स्थित गुरु विश्राम वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। पर उनका हालचाल पूछने ना राज्य सरकार की ओर से कोई गया है, ना केन्द्र सरकार की ओर से और ना ही पिछली तीन पीढ़ियों से ‘गांधी’ उपनाम इस्तेमाल करने वाले परिवार और उनकी पार्टी की ओर से।

एमआईटी से शिक्षा प्राप्त कर नासा में काम कर चुके कनु गांधी इसके लिए किसी को दोषी नहीं ठहराते और ना ही गुजरात छोड़कर यहाँ आने का कारण खुलकर बताते हैं। लेकिन यह जरूर कहते हैं कि वो किसी के आगे मदद के लिए हाथ नहीं फैला सकते। सरल स्वभाव के वयोवृद्ध कनु कहते हैं कि “मेरी गलती है कि मैं भीख मांगने से शर्माता हूँ। प्रधानमंत्री वर्धा के सेवाश्रम गए थे, मैंने उन्हें घूम-घूम कर वहाँ के हालात दिखाए थे, उन्होंने मुझसे कहा था कि आप जब चाहें मेरे पास आ सकते हैं, आपके लिए कुछ करूँगा, लेकिन मैं नहीं गया, क्योंकि मुझे हाथ फैलाना पसंद नहीं।”

महात्मा गांधी के बेटे रामदास के बेटे कनु 20 साल की उम्र में गांधीजी की मदद करने सेवाग्राम चले गए थे। बाद के दिनों में वो नासा गए। 40 साल अमेरिका में रहकर भारत लौटे कनु आज अपने नासा में बीते दिनों को याद कर वो भावुक हो उठते हैं। वो कहते हैं कि “मैं याद करता हूँ कि मैंने कैसे काम किया था और आज यह क्या हो गया। मैं अपनी पत्नी की हालत देखता हूँ तो रो पड़ता हूँ।”

कनु गांधी के वृद्धाश्रम आने के बाद से यहाँ ‘आम’ लोगों का आना बढ़ गया है लेकिन किसी ‘खास’ के पैर यहाँ नहीं पड़े। वृद्धाश्रम के मालिक विश्राम मानव बिल्कुल सही कहते हैं कि “यह पूरे देश के लिए शर्म की बात है कि गांधीजी के पोते इस हाल में हैं। मुझे लगता है कि नेताओं से ज्यादा आम लोगों को उनकी कद्र है और वह उनसे मिलने आते हैं।“ ऐसे में कनु गांधी की पत्नी अपना दर्द भला कैसे छिपाएं..? वो यह कहने से खुद को नहीं रोक पातीं कि जिस देश की कल्पना लेकर वापस आए थे, देश वैसा नहीं है।

बहरहाल देखते हैं कि महात्मा गांधी के नाम के बिना जिन नेताओं के भाषण पूरे नहीं होते वे कनु गांधी के लिए कब और क्या करते हैं..! कनु गांधी, जिन्हें हाथ फैलाना पसंद नहीं पर चाहते हैं कि लोग उनकी इस प्रकार से मदद करें कि (उम्र के इस पड़ाव पर भी) उनकी ‘मजबूती’ का इस्तेमाल हो।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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तस्लीमुद्दीन ने कहा ‘दारू की बोतल’ से बाहर निकलें नीतीश..!

राजद सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मोहम्मद तस्लीमुद्दीन ने बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर आज कुछ ऐसा कह दिया जिसकी उम्मीद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हरगिज ना की होगी। खासकर तब जब कि राजद स्वयं उसी सरकार का हिस्सा है और उपमुख्यमंत्री स्वयं राजद सुप्रीमो के सुपुत्र हैं। बहरहाल, संदर्भ सीवान में दैनिक हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या का था। तस्लीमुद्दीन ने इस बाबत सीधा नीतीश पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में ‘जंगलराज’ कायम हो गया है। यहाँ पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं। अगर राज्य में अपराध रोकना है तो नीतीश को दारू (शराब) की बोतल (शराबबंदी) से बाहर निकलना होगा।

तस्लीमुद्दीन ने कथित जंगलराज के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि “सुशासन बाबू की सरकार में रोज सरेआम हत्याएं हो रही हैं। राज्य में अपराधियों का बोलबाला है और सरकार का अपराध पर कोई लगाम नहीं है।” राजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी तस्लीमुद्दीन के ही सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि “बिहार की स्टेयरिंग नीतीश कुमार के हाथ में है, उन्हें अपराध पर लगाम लगाना चाहिए। राज्य में हत्या और अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।”

जब साथी के बोल ऐसे हों तो भला विपक्ष चुप कैसे रहे..? बिहार भाजपा के अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि विपक्ष होने के नाते भाजपा चुप नहीं बैठेगी। अब पार्टी सड़क पर उतरकर अपना विरोध जताएगी। उधर ‘हम’ के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए यहाँ तक कह डाला कि बिहार में ‘जंगलराज’ नहीं, ‘महाजंगलराज’ की शुरुआत हो चुकी है।

बहरहाल, विपक्ष की आलोचना तो समझ में आती है लेकिन राजद नेताओं के बदले सुर समझ से परे हैं। दिलचस्प पहलू यह भी है कि ये नेता उसी राजद के हैं जिसको लेकर विपक्ष ‘जंगलराज’ की बात करता है और जिससे गठबंधन के बाद से नीतीश लगातार निशाने पर हैं..!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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सिविल सेवा में कोसी और मैथिली का परचम

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में इस साल कोसी और मैथिली ने अपना परचम लहराया है। सिविल सेवा हेतु चुने गए अभ्यर्थियों में ऋषभ कुमार झा (सहरसा), गोविन्द झा (सहरसा), संतोष कुमार (सुपौल) और आदित्य आनंद (मधेपुरा) ने क्रमश: 162वां, 236वां, 692वां और 863वां स्थान हासिल किया है। वहीं मैथिली विषय से सफल अभ्यर्थियों की बात करें तो इस विषय से कुल 18 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।

162वें स्थान पर चुने गए सहरसा के ऋषभ कुमार झा स्थानीय कायस्थ टोला वार्ड नं. 29 निवासी और राजेन्द्र मिश्र महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. किशोर नाथ झा एवं किरण झा के छोटे पुत्र हैं। ऐच्छिक विषय के रूप में मैथिली को चुनने वाले ऋषभ ने अपने पहले प्रयास में ही ये सफलता हासिल की है। सहरसा से ही सफल होने वाले और 236वें स्थान पर चुने गए गोविन्द झा का वैकल्पिक विषय मानवशास्त्र था। उनके पिता महेश झा मधेपुरा के मुरहो हाईस्कूल से सेवानिवृत्त हैं। वहीं 692वां स्थान पाने वाले सुपौल के होनहार छात्र संतोष कुमार के पिता किसान हैं।

863वें स्थान के लिए चुने गए मधेपुरा के आदित्य कुमार आनंद ने यह सफलता अपने पाँचवें प्रयास में पाई है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने पिछले साल यूपीएससी में 980वां स्थान हासिल किया था। आदित्य फिलहाल रेलवे विभाग में ट्रेनिंग ले रहे हैं। 863वें रैंक के साथ इस बार उन्हें कस्टम विभाग मिलने की उम्मीद है।

ये तो हुई कोसी के सपूतों की बात। अब बात करें मैथिली विषय से सफल अभ्यर्थियों की। इस विषय से इस साल 18 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इन अभ्यर्थियों में सहरसा के ऋषभ (162वां स्थान), सुपौल के संतोष (692वां स्थान) और मधेपुरा के आदित्य (863वां स्थान) के अतिरिक्त अंजनी कुमार झा (165वां स्थान), रौशन कुमार (352वां स्थान), सोनम कुमार (626वां स्थान), कुमार गौरव (831वां स्थान) तथा पहली बार चुनी गई महिला अभ्यर्थी रजनी झा (591वां स्थान) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के अमित कुमार आनंद ने भी मैथिली को विषय बनाया था। उन्हें 763वां स्थान मिला है।

इस बार के परिणाम से कोसी के होनहारों ने अपनी मिट्टी का मान बढ़ाने के साथ-साथ मैथिली के लिए भी उम्मीद जगा दी। ऋषभ, संतोष और आदित्य ने कोसी के साथ-साथ मैथिली का झंडा भी बुलंद किया। मैथिली से 18 अभ्यर्थियों का सफल होना इस विषय के सुखद भविष्य का संकेत है।

चलते-चलते ये भी बता दें कि यूपीएससी की परीक्षा में इस साल बिहार से 77 अभ्यर्थी सफल हुए हैं जबकि पिछले साल यहाँ से 88 अभ्यर्थी सफल हुए थे। पर बिहार के लिए अच्छी ख़बर ये रही कि टॉप टेन में इस बार यहाँ के दो अभ्यर्थी हैं। पिछली बार केवल एक अभ्यर्थी ने टॉप टेन में जगह बनाई थी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा अब विकास की नई इबारत लिखने लगा है

जिला स्थापना के दिन व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने नीतीश सरकार के सात निश्चयों में से- ‘अवसर बढे, आगे बढ़ें’ के तहत जिले में रोजगारोन्मुखी छह शिक्षण संस्थानों के निर्माण हेतु समय निकालकर टीम के साथ स्थल निरीक्षण हेतु चल दिये | जिलाधिकारी की टीम में सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पाण्डेय सहित जिला शिक्षा पदाधिकारी बद्री नारायण मंडल, अंचलाधिकारी मिथिलेश कुमार एवं भवन निर्माण के अभियंता मधुसूदन कुमार कर्ण भी मौजूद थे|

निरीक्षोपरान्त डी.एम. मो.सोहैल ने मधेपुरा अबतक को बताया कि जिले में दो आई.टी.आई., एक महिला आई.टी.आई., एक एएनएम स्कूल, एक जेएनएम स्कूल और एक पारा मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान यानी कुल छह संस्थान खोले जाने हैं | उन्होंने यह भी बताया कि पड़रिया गाँव में केशव कन्या गर्ल्स स्कूल की 22 बीघे जमीन के कुछ हिस्से में एएनएम कॉलेज, जीएनएम (एग्रेड नर्स) कॉलेज तथा पारा मेडिकल कॉलेज खुलेगा|

इसके अलावे उन्होंने कहा कि धुरगाँव पंचायत के नरसिंहबाग़ गाँव में 4 एकड़ 23डी. सरकारी भूमि पर महिला एवं पुरुष आईटीआई के लिए दो मंजिला भवन के साथ-साथ छात्राओं का हॉस्टल भी बनेगा- जिसके लिए सरकारी स्वीकृति भी मिल चुकी है| डी.एम. मो.सोहैल ने बताया कि एक साल के अंतर्गत दोनों जगह भवन निर्माण का कार्य पूरा का लिया जायगा|

विकास के लिए चौकस रहने वाले डी.एम. मो.सोहैल के अनुसार चौसा में बनेगा आईटीआई संस्थान और मधेपुरा प्रखंड के मछबखरा गाँव में रासबिहारी उच्च विद्यालय की 29बीघे जमीन पर उक्त विद्यालय के नाम का सरकारी कॉलेज भवन बनाये जाने हेतु प्रस्ताव बनाने के लिए डी.ई.ओ. बद्री नारायण मंडल को कहा गया है |

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