संयुक्त राष्ट्र पहली बार मनाएगा ‘भारतरत्न’ अंबेडकर की जयंती

डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिनका जीवन ही दलित अधिकारों के लिए संघर्ष का पर्याय है और जो विश्व के किसी भी मंच से सर्वोच्च सम्मान के अधिकारी हैं, संयुक्त राष्ट्र ने उनके ‘निर्वाण’ (निधन) के 60 वर्षों के बाद उनकी जयंती मनाने का फैसला किया है। इस वर्ष बाबा साहब की 125वीं जयंती है और इस तरह देर से ही सही लेकिन पहली बार उनकी जयंती मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने बड़ा यादगार मौका चुना है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र बाबा साहब की जयंती से एक दिन पहले 13 अप्रैल को अपने मुख्यालय में उनकी जयंती मनाएगा। इस अवसर पर “सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए असमानता से मुकाबला” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैय्यद अकबरुद्दीन ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन ‘सरोज फाउंडेशन’ और ‘फाउंडेशन फॉर ह्यूमन होराइजन’ के साथ मिलकर करेगा।

इस मौके पर भारतीय मिशन द्वारा जारी किए गए एक नोट में कहा गया कि भारत अपने ‘राष्ट्रीय प्रेरणास्रोत’ की 125वीं जयंती मना रहा है जो करोड़ों भारतीयों और दुनिया भर में समानता एवं सामाजिक न्याय के समर्थकों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। इसमें आगे कहा गया, “हालांकि यह एक संयोग है, हम गरीबी, भुखमरी और सामाजिक-आर्थिक असमानता के 2030 तक खात्मे के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाए गए सतत विकास लक्ष्यों में उपयुक्त रूप से बाबा साहब की उज्जवल दृष्टि के निशान देख सकते हैं।”

भारतीय संविधान के रचयिता बाबा साहब अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था और 1956 में वे ‘निर्वाण’ को प्राप्त हुए थे। दलितों अधिकारों के इस सबसे बड़े ‘प्रवक्ता’ को 1990 में मरणोपरान्त ‘भारतरत्न’ से सम्मानित किया गया था।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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50 साल बाद प्रोफेसर बनकर लौटेंगे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

भारतीय राजनीति में विद्वता, शालीनता और सौम्यता के चंद प्रतीकों में एक पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह 50 साल बाद अपने पुराने संस्थान पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में वापसी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस विश्वविद्यालय में 50 साल पहले अपना आखिरी लेक्चर देने वाले डॉ. मनमोहन सिंह ने यहाँ के जवाहरलाल नेहरू चेयर के लिए प्रोफेसर बनने की पेशकश स्वीकार कर ली है।

पंजाब विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरुण कुमार ग्रोवर ने बताया कि मनमोहन सिंह यहाँ आने और छात्रों से होने वाले संवाद को लेकर बहुत खुश हैं। चंडीगढ़ यात्रा के दौरान छात्रों को लेक्चर देने के साथ-साथ वे विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी उन्हें पढाएंगे। सारे जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं।

बता दें कि मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय से 1954 में अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रैजुएशन किया था। तीन साल बाद 1957 में वे यहाँ सीनियर लेक्चरर होकर आए और बाद में उन्होंने प्रतिष्ठित दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी पढ़ाया। मनमोहन सिंह ने पीएच.डी. की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से तो डी. फिल. की उपाधि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ली थी।

डॉ. सिंह का इससे आगे का सफर अब इतिहास है। 1971 में उन्हें भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया। इसके तुरन्त बाद 1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य सलाहकार बनाया गया। बाद के वर्षों में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक के गवर्नर, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष रहे। इसके बाद वे भारत के वित्त मंत्री और फिर प्रधानमंत्री हुए। भारत के आर्थिक सुधारों के इस प्रणेता के व्यक्तित्व का ही प्रभाव था कि जवाहरलाल नेहरू के बाद वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिसे पाँच वर्षों का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला।

प्रोफेसर के रूप में अपनी पारी फिर से शुरू कर रहे डॉ. मनमोहन सिंह को हमारी शुभकामनाएं। ये निर्णय लेकर उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की याद ताजा कर दी। सच है, भारत की मिट्टी ऐसे सपूतों से कभी खाली नहीं होगी।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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पूर्ण नशाबंदी का श्रेय महिलाओं को दिया नीतीश सरकार ने

नीतीश के साहसिक फैसले को सारा बिहार सलाम करता है | चार दिनों में ही शराब न पीने की एक करोड़ सतरह लाख शपथ-पत्र तथा बारह लाख अनठावन हजार लीटर देसी शराब नष्ट किये जाने की जानकारी मिलते ही जहाँ सी.एम. के सचिव चंचल कुमार द्वारा मुख्यमंत्री सचिवालय, आवास एवं बिहार विकास मिशन के पदाधिकारियों-कर्मियों को आजीवन शराब न पीने की शपथ दिलाई गई, वहीँ मधेपुरा जिले के डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल ने बी.एन.मंडल स्टेडियम में मंगलवार को पुलिस एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों को आजीवन नशापान नहीं करने की शपथ दिलाई | सबों के द्वारा शराब नहीं पीने का शपथ पत्र पढ़ा गया |

डी.एम. मो.सोहैल ने शपथ पत्र पढाये जाने के बाद अपने संक्षिप्त संबोधन में यही कहा कि एक भी पुलिस अथवा प्रशासन के कर्मचारी यदि शराब पीकर ड्यूटी पर आते हैं और जाँच के दौरान सही पाये जाते हैं तो उन्हें अविलम्ब नौकरी से निलंबित कर दिया जायेगा तथा अन्य कठोर दण्ड देने की अग्रेतर करवाई आरम्भ कर दी जाएगी | डी.एम. ने यह भी कहा कि जो कर्मचारी उचित कारण के बिना जानबूझकर शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुए – उन पर भी करवाई की जाएगी |

नीतीश सरकार की पूर्ण नशाबन्दी से दलित बस्तियों की महिलाओं में सर्वाधिक प्रसन्नता देखी जा रही है | सारी महिलाएं चहक-चहक कर नीतीश को दुआएं दे रही हैं |

कहीं शहरों में शराब नहीं पीने का संकल्प लिया जा रहा है तो कहीं गाँव को नशामुक्त गाँव बनाने का ग्रामीणों द्वारा शपथ लिया जा रहा हैं | वस्तुतः देसी-विदेशी शराब पर पूर्ण प्रतिबंध से बिहार के सामाजिक जीवन और सभ्यता-संस्कृति में बड़ा बदलाव होगा | अब ना तो शरीर का नाश होगा और ना आत्मा पथभ्रष्ट होगी | तभी तो शराब बंदी के पक्ष में सात लाख नारे लिखे गये और 84 हजार नुक्कड़ नाटक हुए |

जब नीतीश कुमार के पूर्ण शराबबंदी पर मधेपुरा अबतक द्वारा समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी से प्रतिक्रिया माँगी गई तो उन्होंने बस यही कहा कि अब बिहार अपनी खोई विरासत वापस पा लेगा और हर मायने में देश का अव्वल राज्य बनेगा |

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36 साल की हुई भाजपा, ‘मोदीयुग’ में क्या है आगे का एजेंडा..?

आज भाजपा की स्थापना के 36 साल पूरे हो गए। स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जहाँ ट्वीट के जरिए कार्यकर्ताओं को बधाई दी और विभिन्न राज्यों में पार्टी के नेतृत्व वाली सरकारों की जमकर तारीफ की वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रवाद को भाजपा की पहचान बताया और स्पष्ट किया कि पार्टी फिलहाल राष्ट्रवाद के एजेंडे पर ही आगे बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भावुक ट्वीट में कहा कि “भाजपा के स्थापना दिवस पर मैं पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं को सलाम करता हूँ जिन्होंने हमेशा भाजपा की सेवा उत्साह और समर्पण के साथ की।… भारत के लिए अपने प्रेम और देश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता से कार्यकर्ताओं की पीढ़ियों ने अपना जीवन पार्टी के लिए समर्पित कर दिया।”

भाजपाशासित राज्यों की सरकारों के काम को ‘शानदार’ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी को अपने मेहनती मुख्यमंत्रियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि जहाँ भी भाजपा ने सरकार बनाई है वहाँ शानदार ढंग से काम किया है और लोगों की अभूतपूर्व सेवा की है। यही कारण है कि कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल प्रदेश तक लोगों ने भाजपा में विश्वास व्यक्त किया है और पार्टी को अपने सपनों को पूरा करने वाली पार्टी के रूप में देखा है।

उधर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रवाद की अलख जगाने का आह्वान किया और अगले 25 वर्षों में पंचायत से संसद तक पार्टी की जीत सुनिश्चित करने की अपील की। कार्यकर्ताओं की शहादत का हवाला देते हुए शाह ने एक कार्यक्रम में कहा कि भाजपा की पहचान राष्ट्रवादी पार्टी की है। हमें अपनी इस पहचान को और मजबूत करना है। ‘भारत माता की जय’ पर छिड़ी बहस के संदर्भ में उन्होंने साफ कर दिया कि पार्टी इस मुद्दे को भटकने नहीं देगी। पार्टी अध्यक्ष ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि आक्रोश के साथ भारत माता की जय के नारे लगाएं।

प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के संदेशों को एक जगह कर देखें तो स्पष्ट हो जाता है कि ‘मोदीयुग’ में भाजपा ‘विकास’ और ‘राष्ट्रवाद’ पर स्वयं को केन्द्रित करना चाहती है। विकास के साथ राष्ट्रवाद की ‘खुराक’ दी जाय तो जातिवाद जैसे मुद्दे अस्तित्वविहीन हो जाते हैं। साम्प्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहस भी यहाँ आकर फीकी पड़ जाती है। जाहिर है कि इस आजमाए ‘नुस्खे’ को पार्टी आगे भी आजमाना चाहती है। हाँ, जरूरत के मुताबिक स्थानीय ‘जरूरतों’ का ध्यान रखना पड़ता है और पार्टी ने कश्मीर से लेकर असम तक ये काम बखूबी किया भी है।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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अब बिहार में नशा पर ‘पूर्ण विराम’… नीतीश के ‘साहस’ को सलाम..!

बिहार में देसी के बाद विदेशी शराब पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब राज्य में किसी भी तरह की शराब बेचना, रखना और पीना पूरी तरह गैरकानूनी होगा। बिहार सरकार ने आज राज्य में पूर्ण शराबबंदी का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस आदेश का उल्लंघन करने वालों पर नई उत्पाद नीति के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस साहसिक और सराहनीय निर्णय के बाद बिहार अब गुजरात, नगालैंड और मिजोरम के बाद देश का चौथा ‘ड्राई स्टेट’ होगा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि शराबबंदी के लिए बिहार पूरे देश में उदाहरण बनेगा। उन्होंने शराबबंदी के लिए राज्य के नागरिकों की भागीदारी के लिए उनका धन्यवाद किया। खासकर राज्य की महिलाओं को उन्होंने तहेदिल से शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी का बेहतर माहौल है और अब तक एक करोड़ पच्चीस लाख अस्सी हजार लीटर शराब को नष्ट किया जा चुका है।

बता दें कि एक अप्रैल से राज्य में देसी और मसालेदार शराब पर पाबंदी लगाई गई थी। सरकार के इस निर्णय का स्वागत तो हुआ लेकिन ये आवाज़ भी उठी कि विदेशी शराब पर मेहरबानी क्यों..? अब विदेशी शराब पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा कर नीतीश ने तमाम आलोचकों का मुँह बंद कर दिया है। अब बिहार में होटलों और बार में शराब नहीं मिलेगी। यह केवल मिलिट्री कैंटीन में उपलब्ध होगी।

पूर्ण शराबबंदी के दायरे में ताड़ी को भी रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ताड़ी में भी मादक गुण होते हैं। वह भी नशीला पेय है। उस पर भी प्रतिबंध लागू होगा। अब हाट-बाज़ार या सार्वजनिक जगहों पर ताड़ी की दुकानें नहीं खुलेंगी। ताड़ी की जगह नीरा को प्रोत्साहित किया जाएगा। नीरा स्वास्थ्यवर्द्धक होता है और उसमें मादकता भी नहीं होती।

पूर्ण शराबबंदी के फैसले का हर तबके के लोगों ने दिल खोलकर स्वागत किया है। राज्य में खुशी के साथ ही जैसे नई ‘ऊर्जा’ का प्रवाह भी हो रहा हो। ये ‘ऊर्जा’ उस विश्वास को बल मिलने से उपजी है जिसने नीतीश को पाँचवीं बार बिहार की बागडोर दिलाई थी। नीतीश ने बिहारवासियों के विश्वास की लाज तो रखी ही, उनकी अपेक्षाओं को नए पंख भी दे दिए। इन पंखों की उड़ान बिहार को नई पहचान दिलाएगी, इस उम्मीद के साथ नीतीश और उनकी टीम को हमारी शुभकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शरद यादव की जगह नीतीश कुमार होंगे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष..!

जेडीयू के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे। वैसे भी नीतीश पार्टी के ‘स्वाभाविक’ और ‘सर्वमान्य’ नेता हैं और अब जबकि वर्तमान अध्यक्ष शरद यादव ने चौथी बार अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से ‘इनकार’ कर दिया है, इस बात की केवल औपचारिक घोषणा ही शेष है। सूत्रों की मानें तो स्वयं शरद ने नीतीश के नाम का प्रस्ताव दिया है। हालांकि सब कुछ ‘तय’ है फिर भी ‘औपचारिकतावश’ अध्यक्ष के चुनाव पर विचार करने के लिए दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक भी बुला ली गई है।

बता दें कि शरद यादव लगातार तीन बार से जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते आ रहे हैं जबकि पार्टी संविधान किसी को भी दो बार से अधिक अध्यक्ष बनने की इजाजत नहीं देता। पिछली बार उन्हें पार्टी के संविधान में संशोधन कर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन इस बार शरद ने अध्यक्ष बनने से यह कहते हुए मना कर दिया कि पार्टी संविधान में दूसरी बार संशोधन करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि वे भले ही अध्यक्ष नहीं रहें, लेकिन पहले की तरह ही सक्रिय रहेंगे।

जेडीयू के निर्माण और उत्थान में शरद यादव की बड़ी भूमिका रही है। वे साफ-सुथरी छवि वाले, मुद्दों के लिए लड़ने वाले, सुलझे हुए और संघर्ष में यकीन रखने वाले नेता रहे हैं। मंडल कमीशन को धरातल पर उतारने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आज बिहार के दिग्गज नेताओं – लालू, नीतीश या रामविलास – का कद जितना भी बड़ा हो, इसमें कोई दो राय नहीं कि राष्ट्रीय राजनीति में इन सबके उभरने के बहुत पहले से शरद की पहचान राष्ट्रीय स्तर की रही है। लेकिन समय ने ‘करवट’ ली और अब पार्टी की कमान नीतीश के हाथों में जा रही है।

देखा जाय तो नीतीश लम्बे समय से राष्ट्रीय राजनीति में अपना ‘कद’ और ‘कैनवास’ बढ़ाने की कोशिश में लगे रहे हैं। ऐसे में जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर उनका सामने आना और भी अहम हो जाता है। देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश की ताजपोशी के बाद जेडीयू के ‘आन्तरिक समीकरण’ और ‘भाजपाविरोधी ध्रुवीकरण’ में क्या और कितना नया होगा..?

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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जब सीआरपीएफ के सात जवान एक कुत्ते के लिए शहीद हो गए..!

आज जहाँ एक इंसान दूसरे इंसान के काम नहीं आता, वहाँ सीआरपीएफ के सात जवान एक कुत्ते के लिए शहीद हो गए। चौंकिए नहीं, बिल्कुल सही पढ़ा है आपने। आज जबकि हमारी संवेदना भी लगभग यंत्रवत हो चुकी है, तब भी कुछ मिसालें सामने आती हैं और मरती मानवता को ‘ऑक्सीजन’ दे जाती हैं। घटना छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की है जहाँ कल सीआरपीएफ के सात जवान नक्सलियों के बारूदी सुरंग का शिकार हो गए। ये जवान जिस कुत्ते की जान बचाने जा रहे थे वो पहले कई बार अपनी सूंघने की ताकत से जवानों की जान बचा चुका था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘स्काउट’ नाम का यह कुत्ता सीआरपीएफ का स्निफर डॉग (सूंघने की क्षमता वाला कुत्ता) था। बेल्जियन मेलिनॉइस नस्ल का यह कुत्ता जंगल की परिस्थितियों में रहने की वजह से डिहाइड्रेशन का शिकार हो गया था। बीमार ‘स्काउट’ को ये जवान जानवरों के अस्पताल में भर्ती कराने के लिए जा रहे थे। बड़ी बात ये कि वे सभी जानते थे कि रास्ते में नक्सली उन पर हमला कर सकते हैं।  एहतियात के तौर पर वे सीआरपीएफ की गाड़ी की बजाय एक टेम्पो में और सफेद कपड़ों में निकले। पर नियति को कुछ और मंजूर था। नक्सली रास्ते में उनकी मौत का सामान पहले ही बिछा चुके थे। उन्होंने करीब 50 किलो विस्फोटक का इस्तेमाल कर बारूदी सुरंग से जवानों के टेम्पो को उड़ा दिया।

मानवीय संवेदना की कितनी अद्भुत मिसाल है ये। यही वो देश है जहाँ चलती बस में छह-छह दरिंदे ‘निर्भया’ का गैंगरेप करते हैं और नग्न अवस्था में उसे सड़क के किनारे फेंक देते हैं। पराकाष्ठा ये कि वो सड़क देश की राजधानी की होती है जहाँ सैकड़ों लोग उसे नग्न-निढ़ाल देखते हैं और चलते बनते हैं। ‘कृष्ण’ के इस देश की बेटी को दो गज कपड़ा भी घंटों बाद नसीब होता है और यही वो देश है जहाँ सात-सात जवान एक कुत्ते के लिए शहीद हो जाते हैं। ऐसा अनजाने में हुआ होता तो इसे ‘दुर्घटना’ कहा जाता। लेकिन अपने साथी कुत्ते के लिए उन सबने सब कुछ जानते हुए भी अपनी जान को जोखिम में डाला और अंतत: शहीद हो गए।

उन सात जवानों के नाम शायद ही हम याद रख पाएं लेकिन उनकी ये अनोखी शहादत सदियों तक मानवता के पथ से भटके हर राही को राह दिखाएगी। आइए, बहुत-बहुत आदर से उन शहीदों को सलाम करें और श्रद्धा से झुका दें अपने शीश।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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खुशहाल बिहार का वादा किया नीतीश कुमार ने

जानकारी के अभाव में लोग नारी को अबला कहते हैं और नारी सशक्तिकरण की चर्चा भी करते हैं | यूँ हर व्यक्ति को क्या चाहिए – शक्ति, विद्या और धन | इन तीनों के लिए हम पूजा करते हैं – माँ दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की | इतना ही नहीं, बिहार की बेटी ‘मैत्रैयी’ की ये पंक्तियाँ भारतीय चेतना का आलोक स्तम्भ और युग-युग तक प्रकाश स्तम्भ बना रहेगा –

तमसो मा ज्योतिर्गमय… असतो मा सद्गमय…!

पटना का एस.के.मेमोरियल हॉल ! वर्ष 2015, तारीख 9 जुलाई और दिन गुरुवार | भाषण समाप्त कर अपने सीट पर बैठने जा रहे थे नीतीश कुमार कि महिलाओं ने जोरदार आवाज लगाई – खुशहाल बिहार बनाने के लिए शराब पर प्रतिबंध लगाने हेतु कुछ तो करिये….| नीतीश ने तत्क्षण कहा कि अगली बार सरकार बनी तो शराब बंद कर देंगे……| उसी का परिणाम है कि एक अप्रैल 2016 से बिहार में, प्रथम चरण में, देशी शराब पूर्णतः बंद है |नीतीश एक बार जो ठान लेता है उसे पूरा करके ही रहता है | नीतीश का संकल्प है –

  • नशापान से अरे बिहारी, हमें दूर ही रहना है |
  • बहुरेंगे अब दिन बिहार के, हर बच्चे को पढ़ना है ||

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने के लिए मधेपुरा जिले के डी.एम. मो.सोहैल, एस.पी. विकास कुमार, डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला आदि सहित शहर के बुद्धिजीवियों ने जागरूकता रैली निकाली जो मेन रोड से होते हुए रासबिहारी उच्च वि. मैदान में पहुँची  | रैली को संबोधित करते हुए डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि 01 अप्रैल 2016 से पूरे बिहार में शराब बंदी लागू हो गयी है | शराब का सेवन करने वाला इंसान हैवान हो जाता है | शराब से शरीर नष्ट होने से साथ-साथ आत्मा भी पथ भ्रष्ट होने लगती है | डी.एम. ने परिवार के सदस्यों के सम्मान के लिए शराब से दूर रहने का संकल्प दिलाया |

एस.पी. विकास कुमार ने कहा कि आज से इस रैली मे शामिल सभी सज्जन शराब सेवन नहीं करने का संकल्प तो ले ही रहे हैं साथ ही दूसरे लोगों को भी शराब से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की सबों ने शपथ भी ली | सभी पदाधिकारियों सहित राजद नेता विजेंद्र प्रसाद यादव, जदयू नेता अनिल कुमार तथा काँग्रेसी नेता विष्णुदेव यादव विक्रम सहित शामिल शिक्षकों ने भी आजीवन शराब सेवन नहीं करने का संकल्प लिया |

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सबको जगाने वाली ‘बालिका वधु’ आखिर क्यों सो गई इस तरह..?

गुस्सैल दादी सास का मन अपने संस्कार से जीत लेने वाली, पति जगिया को जीना सिखाने वाली, पूरे गांव को जगाने वाली ‘बालिका वधु’ आनंदी यानि प्रत्युषा बनर्जी नहीं रही। जाना तो एक दिन सबको है लेकिन 25 साल की उम्र किसी भी लिहाज से जाने की नहीं होती। कोई दुर्घटना हो तो कहा जा सकता है कि उस पर किसी का वश नहीं लेकिन आत्महत्या करना और वो भी शोहरत की बुलंदियों पर… क्या सारे तर्क यहाँ बेकार नहीं हो जाते..? जी हाँ, दुख की ये खबर और भी दुखद हो गई है क्योंकि प्रत्युषा ने आज शाम आत्महत्या कर ली।

जानकारी के मुताबिक कलर्स चैनल के बहुचर्चित धारावाहिक ‘बालिका वधु’ में आनंदी का किरदार निभाने वाली प्रत्युषा ने आज शाम चार से पाँच बजे के बीच आत्महत्या की कोशिश की। उन्हें अपने घर में फांसी से लटका पाया गया। अत्यंत गंभीर हालत में उन्हें कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हालाँकि अभी किसी नतीजे पर पहुँचना उचित नहीं लेकिन बताया जाता है कि एक दिन पहले प्रत्युषा की लड़ाई अपने ‘ब्वायफ्रेंड’ से हुई थी। उन्हें शक था कि उनके ‘ब्वायफ्रेंड’ का अफेयर किसी और से चल रहा है। बहरहाल, उनके एक पुराने ‘ब्वायफ्रेंड’ के हवाले से यह भी पता चला है कि एक बार किसी बात पर बहस के बाद प्रत्युषा ने पहले भी चलती कार से कूदकर जान देने की कोशिश की थी।

10 अगस्त 1991 को जमशेदपुर में जन्मी प्रत्युषा को प्रसिद्धि ‘बालिका वधु’ से मिली। इस धारावाहिक के बाद लाखों लोग उन्हें अपने घर की बहू-बेटी की तरह देखने के आदी हो गए थे। इस धारावाहिक के बाद प्रत्युषा ‘झलक दिखला जा 5’ और ‘बिग बॉस 7’ में भी नज़र आईं। आखिरी बार वो धारावाहिक ‘ससुराल सिमर का’ में दिखीं।

प्रत्युषा बनर्जी की आत्महत्या झकझोर देने वाली है। केवल इसलिए नहीं कि हमने एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री को असमय खो दिया बल्कि इसलिए भी कि ये घटना हमें चकाचौंध भरी दुनिया के ‘स्याह सच’ से रूबरू कराती है। ग्लैमर की दुनिया भले ही कम उम्र और कम समय में पैसा और प्रसिद्धि दे दे लेकिन ज्यादातर मौकों पर बदले में जिस तरह की जीवन-शैली में आपको ढलना पड़ता है वो कहीं ना कहीं वास्तविक खुशी और शान्ति छीन भी लेती है। अपवादों की बात छोड़ दें तो परवीन बॉबी से लेकर जिया खान और अब प्रत्युषा का ‘अन्त’ उसी जीवन-शैली की परिणति है। नहीं तो ‘बालिका वधु’ में हर मुसीबत का सामना मुस्करा कर करने वाली आनंदी का किरदार निभाने वाली प्रत्युषा इस तरह का कदम हरगिज ना उठातीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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