पश्चिम बंगाल में जीत हुई तृणमूल व बीजेपी की और हार हुई सीपीएम व कांग्रेस की

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पूर्व और बाद में भी हिंसा का तांडव देश देखता रह गया। चुनाव आयोग तक को न्यायालय ने दोषी करार कर दिया। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में पीएम और सीएम से लेकर गृह मंत्री तक की सभाओं व रोडशोज में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ती हुई दुनिया देखती रही। देश के सभी न्यायमूर्तिगण भी देखते रह गए। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने मुंह खोला।

कुल 292 विधानसभा वाले बंगाल विधानसभा की सभी सीटों के रिजल्ट दे दिए गए। ममता बनर्जी का तृणमूल 213 सीटों पर और बीजेपी 77 सीटों पर विजयी हुई। अन्य के खाते में 2 सीटें गई।

बता दें कि इस चुनाव में इन्हीं दोनों मुख्य पार्टियों टीएमसी व बीजेपी की जीत हुई। जीत इस मायने में कि तृणमूल कांग्रेस एंटीइंकम्वेंसी को पीछे छोड़ एक जोड़ा सीटों पर अपना जोड़ा फूल खिलाया, वहीं बीजेपी ने 3 सीटों से चलकर 74 अधिक सीटों पर कमल खिलाने में सफलता पाई। यदि इस चुनाव में हार हुई है तो केवल इन दो पार्टियों- सीपीएम और इंडियन नेशनल कांग्रेस की। ये दोनों पार्टियां तो पतन की अंधेरी खाई में गिर गई पश्चिम बंगाल में। भला इतने लंबे अर्से तक पश्चिम बंगाल और पूरे देश में राज करने वाला सीपीएम और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुलना ही तो इनकी शर्मनाक हार है।

चलते-चलते महामहिम डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी व साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने पश्चिम बंगाल के रिजल्ट पर यही कहा कि कलाम साहब तो बराबर यही कहते रहे कि भारत को विकसित देश बनाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को दो प्रमुख दलों में एकाकार होकर चुनाव में उतरना चाहिए, जिसमें एक ओर कर्म पर आधारित सभी पार्टियां हो तो दूसरी ओर धर्म पर। यदि ऐसा हुआ होता तो सीपीएम और कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा नहीं होती।

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