मई दिवस को भी कोरोना वायरस ने संक्रमित कर दिया

यूं तो श्रम एवं श्रमिकों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का अंग है। जिसे आरंभ में मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाता था और बाद में 1 मई को मई दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। परंतु, कोरोना ने गांव से लेकर संपूर्ण प्रदेश एवं देश के साथ-साथ संसार के श्रमिकों की रीढ़ तोड़ दी है।

बता दें कि कोरोना काल से पहले पूरे प्रदेश एवं देश में ‘मई दिवस’ भव्यता के साथ मनाया जाता था। बेहतर काम करने वाले श्रमिकों को प्रखंड स्तर से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक सम्मानित भी किया जाता था। विद्यालय एवं महाविद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक में छुट्टियों के साथ-साथ कार्यक्रमों की धूम मची रहती थी।

इस वर्ष कोरोना की दूसरी लहर के कारण सीएम से लेकर पीएम तक मई दिवस के अवसर पर प्रदेश व देश के सभी श्रमिक भाई बहनों को शुभकामनाएं दी है। श्रमिकों को शहर छोड़कर अपने अपने गांव की ओर लंबी दूरियां तय कर आने-जाने में भीषण कष्ट उठाना पड़ता है।

चलते-चलते अंत में यह भी जानिए कि विकास, औद्योगिक विकास एवं उत्पादकता को बढ़ाने में श्रमिकों की मेहनत, संघर्ष एवं ताकत की बड़ी भूमिका रही है। संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी कोरोना काल से पहले अपने आवासीय परिसर वृंदावन में बेहतर काम करने वाले श्रमिक को बुके व शाॅल देकर सम्मानित भी किया करते थे।

 

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