1 मई से 18 पार वालों को टीका नहीं लगेगा बिहार में

बिहार में 1 मई से नहीं होगा 18 साल से अधिक वालों का टीकाकरण। ऐसा इसलिए कि कई राज्यों ने दिए ऑर्डर तो सिरम ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि एक साथ सबों को आपूर्ति करना संभव नहीं।

बता दें कि बिहार की नीतीश सरकार ने पुणे की सिरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया को एक करोड़ वैक्सीन सप्लाई करने का आर्डर दिया है। जबकि सूबे बिहार में 18 से 44 वर्ष की उम्र वालों की संख्या 5 करोड़ 47 लाख है।

जानिए कि राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने यह जानकारी दी है कि वैक्सीन की डोज निर्धारित होने और प्राप्त होने के बाद 18 से 44 आयु वालों के टीकाकरण की नई तिथि का ऐलान किया जाएगा। इस बीच 18 से 44 वर्ष की आयु वाले युवजनों का रजिस्ट्रेशन चलता रहेगा, परंतु उन्हें रजिस्ट्रेशन के वक़्त सेंटर और टीका लगने की संभावित तिथि की सूचना नहीं दी जाएगी…..  फिलहाल 1 मई से नहीं शुरू होगा 18 साल से अधिक उम्र वालों का टीकाकरण…..  बिहार में।

 

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कोरोना सरीखे राष्ट्रीय आपदा के समय मूकदर्शक बन नहीं बैठा सुप्रीम कोर्ट

भारत को कोरोना की दूसरी लहर के दरमियान खतरनाक दौर से गुजरते देख सुप्रीम कोर्ट चुप नहीं रह सका। शीर्ष अदालत ने कहा कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन कर नहीं रह सकते। शीर्ष अदालत ने कहा-

“कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए राष्ट्रीय संकट की घड़ी में हम मूकदर्शक बन बैठे नहीं रह सकते। राष्ट्रीय मुद्दे पर हमारा दखल देना महत्वपूर्ण है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी जानकारी देने की बात कही कि देश की जनता को दिए जाने वाली मेडिकल सुविधाएं, ऑक्सीजन सप्लाई और वैक्सीनेशन प्रोग्राम आदि की विस्तृत जानकारियां सार्वजनिक की जाए। कोविड टीकों की अलग-अलग कीमतों के तर्क के बारे में भी जानकारी मांगी। राज्यों से भी इस महामारी से निपटने हेतु बुनियादी व्यवस्था की रूपरेखा के बारे में अविलंब बताने को कहा। जानिए कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि इस कोरोना महामारी से निपटने के लिए आपकी राष्ट्रीय योजना क्या है ? सुनवाई की शुरुआत में ही न्यायालय ने कहा कि हमें लोगों की जिंदगी बचाने की जरूरत है। जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एसआर भट्ट ने यह भी कहा कि सेना एवं रेलवे के डॉक्टर्स जो केंद्र के अंतर्गत आते हैं, को क्वारंटीन, वैक्सीनेशन व अन्य कार्यो में इस्तेमाल में लिया जा सकता है। इस पर कोई राष्ट्रीय योजना होने की जानकारी भी मांगी कोर्ट ने। अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।

अंत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र व राज्यों के लिए वैक्सीन की कीमतें अलग-अलग रखने पर सवाल उठाने एवं कोविड प्रबंधन मामले में मदद करने हेतु वरिष्ठ एडवोकेट जयदीप गुप्ता एवं मीनाक्षी अरोड़ा को न्याय मित्र के रूप में नियुक्त करने पर मधेपुरा के अदालत में कार्यरत एडवोकेट सुधांशु शेखर एवं मधेपुरा के संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने देश के सुप्रीम अदालत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की है।

चलते-चलते यह भी घोषणा अदालत ने की कि कोरोना ने देश में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मार्च- 2021 तक समाप्त हो रहे “पीरियड ऑफ लिमिटेशन” को अगले आदेश तक बढ़ाया जाता है।

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देश के सभी जिला अस्पतालों में लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट

कोरोना की दूसरी लहर की लड़ाई में जीत दर्ज कराने के लिए जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी ‘पीएम केयर्स फंड’ से 551 करोड़ और आॅक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी, वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए तत्काल सभी 534 ब्लॉक में एक-एक एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति का फैसला किया है।

यह भी जानिए कि जहां प्रधानमंत्री के पीएम केयर्स फंड से प्लांट लगाने की मंजूरी तो दे दी गई, परंतु ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए जमीन का आवंटन तो राज्य सरकारों को ही करना होता है।

वहीं कोरोना से फाइट करने के लिए सीएम नीतीश कुमार ने तकनीकी सेवा आयोग से आग्रह किया है कि पूर्व से घोषित जिन पदों की परीक्षा पूरी हो चुकी है और सिर्फ काउंसलिंग बाकी है उसे शीघ्र पूरा करें ताकि डॉक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की जा सके। कोरोना को परास्त करने हेतु विभाग द्वारा डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। डॉक्टरों के साथ-साथ 861 एएनएम की बहाली होगी।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

 

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कोरोना महामारी में भारत की मदद करने आए मित्र देश

कोरोना की दूसरी लहर ने भारत को चिंता में डाल दिया है। ना तो अस्पतालों में बेड खाली है और ना ही मरीजों के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई है। ऑक्सीजन के नाम पर आधा सिलेंडर भरा हुआ ब्लैक में दोगुने दाम पर लोग खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

बता दें कि वसुधैव कुटुंबकम का भाव रखने वाला भारत विश्व के अनेक देशों को भारतीय निर्मित वैक्सीन देने में सदा दरियादिली दिखाई। इसलिए तो अचानक ऑक्सीजन की कमी की जानकारी मिलते ही कोरोना के खिलाफ जंग में भारत की मदद को दुनिया के कई देश आगे आए हैं।

जानिए कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अब यूरोपीय संघ जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस समेत दुनिया के कई देशों ने मदद की पेशकश की है।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

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बिहार विधान सभा सचिवालय में आज से कोरोना कंट्रोल रूम काम करने लगा

बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के निर्देशानुसार सचिवालय में एक कोरोना कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कोरोना कंट्रोल रूम अहर्निश क्रियाशील रहेगा।

बता दें कि सचिवालय स्थित कोरोना कंट्रोल रूम विधानसभा के सदस्यों सहित सभी पूर्व सदस्यों, सचिवालय में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त सभी कर्मियों व परिजनों से जुड़े कोरोना से संबंधित प्राप्त काॅल के आधार पर बिहार के सभी जिलों के डीएम एवं वहां के कंट्रोल रूम तथा स्वास्थ्य विभाग से समन्वय स्थापित कर उन्हें सुविधा मुहैया कराने की पहल करेगा।

चलते-चलते यह भी जानिए कि लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला के परामर्शानुसार यह कंट्रोल रूम खोलने का निर्णय लिया गया है। विधानसभा के डिप्टी डायरेक्टर संजय सिंह ने कहा कि इस कंट्रोल रूम से विधानसभा चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ को भी जोड़ा जाएगा।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

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श्रद्धांजलि: और दिनकर के मुंह से ‘रश्मिरथी’ को सुन बीमार होने के बावजूद उठकर बैठ गए थे युवा शलभ

कोशी के साहित्य का पितामह चला गया: डॉ. रवि

अपनी साहित्य-साधना से कई दशकों तक मधेपुरा समेत पूरे कोशी अंचल को समृद्ध और गौरवान्वित करने वाले मूर्धन्य साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ के निधन से मधेपुरा के साहित्यिक, शैक्षणिक एवं बुद्धिजीवी समाज के लोग ही नहीं बल्कि आमजन भी शोकाकुल और मर्माहत हैं। सहरसा के सूर्या अस्पताल में 90 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। कोरोना से कई दिनों तक लड़कर उसे लगभग परास्त ही कर चुके थे शलभ जी। उम्मीद बंधने लगी थी कि वेंटिलेंटर से वे वापस घर लौट आएंगे लेकिन नियति को यह मंजूर न था। घड़ी की सुई ने अभी 23 तारीख की दहलीज पार ही की थी कि दूसरी ओर कोरोना का वेश धर कर बैठे काल ने उन्हें ग्रस लिया। सूर्य ने अभी दस्तक नहीं दी थी लेकिन कैलंडर की तारीख बदल कर 24 हो चुकी थी। अब इस संयोग को आप क्या कहिएगा कि इसी 24 अप्रैल के दिन हिन्दी साहित्य के सूर्य दिनकर ने भी अंतिम सांस ली थी। और यह तो संयोग से कुछ अधिक लगेगा आपको कि शलभजी को स्वनामधन्य दिनकर का अपार स्नेह प्राप्त था। स्नेह कुछ ऐसा कि एक बार मुजफ्फरपुर में इनके बीमार होने की खबर सुन वे जानकीवल्लभ शास्त्री, कलक्टर सिंह केशरी समेत कई अन्य साहित्यकार मित्रों के साथ यह कहते हुए उनके पास जा पहुंचे कि रश्मिरथी के कुछ छंद सुनाऊंगा तो शलभ उठकर बैठ जाएगा। बता दें कि ओज की अद्भुत कृति रश्मिरथी उन दिनों रची जा रही थी और उसके कुछ छंद सुनकर शलभ जी सचमुच उठकर बैठ गए थे।

हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ जी के निधन पर राज्यसभा एवं लोकसभा के पूर्व सदस्य तथा बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने अवरुद्ध कंठ से कहा कि आज कोशी के साहित्य का पितामह चला गया। शलभजी ने मधेपुरा की कई पीढ़ियों में साहित्य का संस्कार भरा था। वे जितने बड़े कवि थे उतने ही बड़े शोधकर्ता भी। अर्चना, आनंद, एक बनजारा विजन में जैसी काव्य-कृतियों के साथ ही उन्होंने मधेपुरा में स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास, शैव अवधारणा और सिंहेश्वर, अंग लिपि का इतिहास जैसी पुस्तकें भी दीं। उनका साहित्यिक अवदान कितना बड़ा था इसका मूल्यांकन आने वाला समय करेगा। व्यक्तिगत जीवन में भी उन जैसा आला दर्जे का इंसान अपने सम्पूर्ण जीवन में मैंने गिने-चुने ही देखे हैं।

मधेपुरा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि शलभजी के रूप में मैंने अपना साहित्यिक गुरु और स्वयं से भी अधिक मेरी चिन्ता करने वाला अभिभावक खो दिया। धाराप्रवाह आंसुओं के बीच उन्होंने कहा कि इस साल 1 जनवरी को नए साल और उनके 90वें जन्मदिवस की दोहरी खुशी के उपलक्ष्य में रसगुल्ले से उनका मुंह मीठा कराते हुए मैंने उनसे वादा लिया था कि बिना सेंचुरी मारे आप हमलोगों को अलविदा नहीं कहिएगा। लेकिन एकमात्र यही वादा था जिसे वे बिना निभाए चले गए। डॉ. मधेपुरी ने कहा कि उनके बिना मधेपुरा की साहित्यिक गतिविधियों का केन्द्र कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन का आंगन ही नहीं बल्कि मधेपुरा के साहित्य का आकाश भी सूना हो गया। उनकी कमी की भरपाई मुमकिन नहीं।

ध्यातव्य है कि हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन, मधेपुरा के अध्यक्ष थे, जबकि डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि इसके संरक्षक और डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी इसके सचिव हैं। कौशिकी को सिरजने वाले शलभ जी के निधन के बाद इससे जुड़े साहित्यप्रेमियों के शोक-संदेश का जैसे तांता लगा हुआ है। उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में डॉ. शांति यादव,  प्रोफ़ेसर सचिंद्र महतो, डॉ. विनय कुमार चौधरी, प्रो, श्यामल किशोर यादव, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ. विश्वनाथ विवेका, श्री दशरथ प्रसाद सिंह, प्रो. मणिभूषण वर्मा, फर्जी कवी प्रो.(डॉ.)अरुण कुमार, डॉ. अमोल राय, डॉ. आलोक कुमार, श्री सियाराम यादव मयंक, श्री संतोष कुमार सिन्हा,  श्यामल कुमार सुमित्र, राकेश कुमार द्विजराज, प्रमोद कुमार सूरज सहित दर्जनों साहित्यकार व बुद्धिजीवी शामिल हैं।  इसके अलावा पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा और आरएम कॉलेज सहरसा के पूर्व प्राचार्य  डॉ विनय कुमार चौधरी ने भी उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित की है और परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया है। हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ अपने पीछे साहित्यकार पुत्र अरविन्द श्रीवास्तव, मुन्ना जी समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं.

जदयू मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमरदीप ने इस मौके पर कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन को भेजे अपने शोक-संदेश में कहा कि शलभजी उन बिरले साहित्यकारों में थे जिनके कारण साहित्य की गरिमा और सृजनकर्म में लोगों की आस्था बची हुई है। वे सही मायने में सरस्वती के वरदपुत्र थे, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य की साधना में लगा दिया। वे मेरे ही नहीं साहित्यप्रेमियों की कई पीढ़ियों के मार्गदर्शक थे। सच तो यह है कि आज कोशी और मधेपुरा ने अपने ‘दिनकर’ को खो दिया।

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कोविड-19 के दरमियान कुछ लोगों की बुद्ध दृष्टि तो कुछ की गिद्ध दृष्टि

विश्व कोरोना से युद्धरत है और दूसरी ओर भारत में कोरोना की दवाइयों की कालाबाजारी और नकली दवाइयों का फ्रॉड आदि टॉप पर है। 3 लाख 52 हजार नए संक्रमितों की संख्या हो गई है। हजारों-हजार लोग कोरोना के कारण मौत को गले लगा रहे हैं। यह देखकर कुछ लोगों के अंदर का बुद्ध तो जाग उठता है वहीं इस अवस्था में भी कुछ गिद्ध दृष्टि गड़ाए कुछ कमाने में लगे रहते हैं। पूरे देश से यह शिकायत क्यों आ रही है कि टेस्ट नहीं हो रही है। टेस्टिंग के बाद भी बंगाल में कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़ती क्यों जा रही है?

हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और चुनावी राज्यों में कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई जा रही है। ऐसा लगता है कि भारतीय निर्वाचन आयोग कभी-कभी दूसरे ग्रह पर चले जाते हैं। जहां से उन्हें कोरोना प्रोटोकॉल से संबंधित बहुत कुछ नहीं दिखता है। देश में सांसो पर सियासत क्यों हो रही है ?ऑक्सीजन की लूट आखिर कब तक चलेगी ?? आखिर कब तक हवा पर पुलिस पहरा करती रहेगी ??? नकली इंजेक्शन यानि दवा की जगह पानी देकर 30-30 हजार रुपये में बेचे जा रहे हैं जिसे देखने वाला कोई नहीं। ऑक्सीजन सिलेंडर भी आधी भरी फिर भी कीमत दोगुनी पर बेची जा रही है।

कोरोना की खतरनाक दौर तो अब रिश्तो को भी शर्मसार करने लगा है। लोग अपनों की मौत के बाद शव लेने से इनकार भी करने लगे हैं। यहां तक की बेटे भी मां का शव छोड़कर भागने लगे हैं। कोई-कोई तो शवों को दूसरे जिले की नदियों में फेंक कर अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आने लगे हैं।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

 

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अस्पताल से लेकर शमशान तक वेटिंग चल रहा है

कोविड-19 के दूसरे चरण में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के कारण अस्पतालों में बेड की कमी और ऑक्सीजन के ना होने की चर्चा सरेआम हो रही है। कितने अस्पतालों में तो बाहर बोर्ड लगा दिया गया है- यहाँ बेड खाली नहीं है। कहीं-कहीं ऑक्सीजन ना होने का भी बोर्ड दिख जाता है। चारों ओर अस्पतालों में वेटिंग चल रहा है। रिकवरी रेट भी घटकर 81% से भी नीचे जाने लगा है।

कोरोना के दूसरे चरण में हो रही मौतों के कारण भारत में ही नहीं विदेशों के श्मशान और कब्रिस्तान में भी वेटिंग दिखाया जा रहा है। इसे सरकारी लापरवाही कहेंगे या फिर कोविड की सुनामी। जिसे हम लोग हल्के में ले रहे हैं। हम सभी अपनी-अपनी जवाबदेही का शत-प्रतिशत निर्वहन करें। सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए विपक्ष और मीडिया संयुक्त रूप से अपने-अपने कर्तव्यों का पालन कर ही रहा है।

अंत में संवेदनशील समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने बिहार वासियों के साथ-साथ देशवासियों से भी विनम्र अनुरोध किया है कि कोरोना के इस महायुद्ध में कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से अनुपालन करें यानि मास्क लगाएं, दो गज की दूरी बनाए रखें और साबुन व सैनिटाइजर का निरंतर इस्तेमाल करने के अलावा वैक्सीन लगाने में लापरवाही ना करें।

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मधेपुरा, मुंगेर, बक्सर, छपरा, वैशाली, दरभंगा, सीतामढ़ी का मर्यादा पुरुषोत्तम राम से गहरा नाता

बिहार के महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक एवं महावीर मंदिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने जहां राम नवमी के अवसर पर यह कहा कि भगवान राम के पराक्रम, दैवीय गुणों और ज्ञानमय समतावादी आचरणों के चलते बिहार का कण-कण राममय है और देखा जाए तो बिहार बिना रामकथा अधूरी है, वहीं विश्व के महान समाजवादी चिंतक डॉ.राम मनोहर लोहिया ने कभी संसद में कहा था कि राम और कृष्ण को भगवान मानकर पूजनीय की कोटि में रखने के बजाय यदि अनुकरणीय माना गया होता तो समाज का सर्वाधिक भला हुआ होता।

बकौल आचार्य किशोर कुणाल यह जानिए कि  चैत्र माह की नवमी तिथि को राम का जन्म श्रृंगी ऋषि द्वारा कराए गए पुत्रेष्टि यज्ञ का प्रतिफल था। उन्हीं के द्वारा स्थापित शिवलिंग मधेपुरा (सिंहेश्वर) में है और तपोभूमि मुंगेर यानि अंग प्रदेश रही है। बक्सर में ऋषियों को मुक्ति दिलाई राम ने। वहीं ताड़का वध हुआ। कभी राम-लक्ष्मण दोनों भाई गंगा-सरयू के संगम पर छपरा जिले के विशुनपूरा गांव में एक रात गुजारे तो वहीं नदी पार करने पर विशाला नगरी (वैशाली) के राजा ने राम का स्वागत किया। जनकपुर जाते समय दरभंगा के अहीरौली में अहिल्या को श्राप मुक्त कर पत्थर से नारी बनाया। विवाहोपरांत राम-परशुराम संवाद सीतामढ़ी के पंथपाकर स्थान पर हुआ… अंत में राम पुत्रेष्टि यज्ञ कराने वाले ऋषि के प्रति आभार व्यक्त करने मुंगेर और मधेपुरा (सिंहेश्वर) भी आए।

चलते-चलते यह भी कि समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को उसी सिंहेश्वर मंदिर न्यास का सदस्य मधेपुरा के डीएम गोपाल मीणा के कार्यकाल में बिहार धार्मिक न्यास के अध्यक्ष आचार्य कुणाल किशोर द्वारा मनोनीत किया गया था। डॉ.मधेपुरी ने अपने कार्यकाल में सिंहेश्वर टेंपल ट्रस्ट द्वारा एक ‘आई हॉस्पिटल’ और दूसरा ‘वृद्धाश्रम’ निर्माण हेतु प्रस्ताव लाते रहे, परंतु सदस्यों द्वारा प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने में गहरी अभिरुचि नहीं देखी गई।

 

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मास्क पहनो इंडिया !!

भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 24 घंटे में पहली बार 2 लाख के पार और बिहार में पहली बार एक दिन में 10 हजार के पार। तुर्रा तो यह है कि कोरोना तेजी से बढ़ती चली जा रही है। फिर ऐसा लगने लगा है कि सब कुछ बंद होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में चारों ओर से आवाज उठने लगी है- “मास्क पहनो इंडिया !!”

जानिए कि सूबे बिहार में कोरोना वनडे क्रिकेट की तरह तेजी से 10455 संक्रमितों तक पहुंच गया है और 51 लोगों को दुनियावी रंगमंच के बाउंड्री से बाहर ले जाकर दफन भी कर दिया है। सूबे बिहार के लिए ये दोनों आंकड़े अब तक के सर्वाधिक हैं। राज्य में  कोरोना संक्रमण दर लगभग 10% तक पहुंच गई है। रिकवरी रेट घटकर 82.9% तक आ गई है। पहली बार 10 जिलों में 300 से अधिक केस मिले हैं।

चलते-चलते यह भी जानिए कि सूबे के सभी 13 ऑक्सीजन प्लांट पूरी क्षमता से काम करने लगे तो प्रतिदिन 104 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी जिससे राज्य के अस्पतालों के अधिकतम मांग को पूरा किया जा सकेगा। फिर भी जरूरत के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र से प्रतिदिन 72 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन की मांग की है।

मौके पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में अंधकार को कोसने से बेहतर है एक दीप जलाना। हम सभी कोविड प्रोटोकॉल के नियमों का सख्ती से पालन करें।  संवेदनशील डीएम श्याम बिहारी मीणा की बातों को मानें- बिना मास्क के घर से नहीं निकलें। डबल मास्क पहनें…. और जोर से बोलें-

   “मास्क पहनो इंडिया !!”

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