राज्य के 800 कबड्डी खिलाड़ियों से गुलजार हुआ मधेपुरा !

बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय सब जूनियर कबड्डी (अंडर-18) प्रतियोगिता-2018 का तीन दिवसीय (29-30 जून एवं 1 जुलाई) भव्य आयोजन किया गया है | यह भी जानिए कि मधेपुरा वार्ड न.-1 के डॉ.मधेपुरी मार्ग पर अवस्थित दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल इस कबड्डी प्रतियोगिता का मुख्य प्रायोजक है तथा संचालक जिला कबड्डी संघ एवं सचिव अरुण कुमार |

बता दें कि इस प्रतियोगिता का उद्घाटन किया लोकप्रिय युवा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने | उद्घाटन भाषण में सांसद ने कहा कि ग्रामीण इलाके का यह खेल कबड्डी महाभारत काल से ही खेला जाता रहा है | कबड्डी जल्द ही ओलंपिक में शामिल किया जायेगा |

यह भी बता दें कि बालक वर्ग से राज्य के 30 जिले और बालिका वर्ग से 25 जिले के रंग-बिरंगे जर्सियों में सजे-धजे खिलाड़ीगण पहुंच चुके हैं मधेपुरा | खिलाड़ीगण उद्घाटन मैच के समय बी.पी.मंडल इंडोर स्टेडियम में चार सेट के मैटों पर सज-धज कर मौजूद दिखते रहे |

जानिए कि जहाँ बालक वर्ग में मधेपुरा और शिवहर के बीच उद्घाटन मैच खेला गया वहीं बालिका वर्ग में मधेपुरा और वैशाली के बीच मुकाबला हुआ | दोनों वर्गों में मधेपुरा ने जीत का परचम लहराया और दिन भर जहाँ एक ओर भोजपुर-भागलपुर, पूर्णिया-दरभंगा, वैशाली-खगड़िया, लक्खीसराय-सारण…….. आदि जीत के लिए संघर्ष करते रहे वहीं पटना-बाँका, बेगूसराय-रोहतास, बक्सर-सीतामढ़ी, कैमूर-गया, भोजपुर-नालंदा, लक्खीसराय-भागलपुर, कटिहार-दरभंगा, रोहतास-मुजफ्फरपुर आदि की टीमें जीत के लिए पसीना बहाती रही |

जहाँ खेल के दरमियान रेफरी के रूप में सीटी बजाते रहे- आनंद शंकर तिवारी, जय शंकर चौधरी, पंकज कुमार सिंह, राजेश कुमार, शंभू कुमार……… आदि वहीं रेफरी बोर्ड के चेयरमैन की जवाबदेही निभाते रहे मुंगेर के कन्हैया तांती |

मधेपुरा जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार ने जहाँ यह जानकारी दी कि 30 जून की सुबह लीग मैच होगा और शाम में क्वार्टर फाइनल मैच खेला जायेगा | जुलाई की पहली तारीख को सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबला के साथ……. पुरस्कार एवं प्रमाण पत्रों का वितरण करते हुए शानदार समापन समारोह आयोजित किया जाएगा जिसमें मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे सदर एसडीएम वृंदालाल, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जिला खेल पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं कबड्डी संघ के अध्यक्ष जयकांत यादव एवं अन्य खेल प्रेमीगण |

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लालू की जमानत अवधि छह हफ्ते और बढ़ी

चारा घोटाला मामले में सजा झेल रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी औपबंधिक जमानत अ‍वधि छह हफ्तों के लिए बढ़ा दी है। गौरतलब है कि उन्‍होंने जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल की  थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया।

शुक्रवार को लालू की ओर से पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता चितरंजन सिन्हा ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद यादव गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका इलाज मुंबई के एशियन हार्ट अस्पताल में चल रहा है। वह प्लेटलेट्स की कमी, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी व डिप्रेशन सहित कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका फिस्टुला का ऑपरेशन हुआ है और अभी जख्म भरा नहीं है। शुगर लेवल बढ़ा होने के कारण हर दिन उन्हें 70 यूनिट इंसुलिन दिया जा रहा है। इस तरह उनकी विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इसके बाद अदालत ने औपबंधिक जमानत की अविध छह सप्ताह के लिए बढ़ा दी। बता दें कि लालू प्रसाद यादव की जमानत की अवधि तीन जुलाई को समाप्त हो रही थी।

बहरहाल, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने 10 अगस्त को अगली सुनवाई निर्धारित करते हुए आरजेडी सुप्रीमो को मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसी अदालत ने डॉ जगन्नाथ मिश्र की औपबंधिक जमानत की अवधि भी 25 जुलाई तक बढ़ा दी है। डॉ. मिश्र को 20 जुलाई को अपनी मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का आदेश कोर्ट ने दिया है।

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शिष्टाचार पर राजनीति ना करें तेजस्वी

आज की राजनीति में शिष्टाचार निभाना भी आफत है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अस्वस्थ चल रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से उनकी तबीयत क्या पूछ ली, इस पर भी बयानबाजी शुरू हो गई। शिष्टाचार संस्कार का हिस्सा होता है और पारिवारिक जीवन हो या सार्वजनिक, उसे अनिवार्य रूप से निभाया जाना चाहिए। पर आज के ‘ट्विटरवीर’ इसे समझे तब ना..!

जैसा कि सब जानते हैं रविवार को लालू जी का फिस्टुला का ऑपरेशन हुआ था। इस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिष्टाचारवश मंगलवार को लालू जी को फोन कर कुशल उनका क्षेम पूछा था। लेकिन उनके उत्तराधिकारी तेजस्वी इस ‘मर्यादा’ को समझ ही नहीं सके (या समझना नहीं चाहते) और ट्विटर पर तपाक से लिख दिया, देर से ही सही उनको लालू जी की याद तो आई। तेजस्वी ने आगे लिखा, आश्चर्य है कि नीतीश जी ने पिछले चार महीने से बीमार लालू जी का हालचाल नहीं लिया, लेकिन आज फोन कर पूछा। शायद उन्हें पता चला कि भाजपा और एनडीए के लोग अस्पताल जाकर हालचाल ले रहे हैं तो उन्होंने भी फोन कर लिया। यही नहीं, वे इसका विशेषार्थ तक ढूंढ़ने लगे और वे स्वयं और उनकी पार्टी के बाकी धुरंधर इसे महागठबंधन में उनके शामिल होने की ‘तथाकथित इच्छा’ से जोड़ने लगे। बड़बोले शिवानंद तिवारी तो यहां तक कह बैठे कि नीतीश किस मुंह से सोच रहे हैं कि उन्हें महागठबंधन में जगह मिल जाएगी।

उधर जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि शिष्टाचार के तौर पर की गई बातचीत को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजद से नजदीकी बढ़ने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने भी इस मामले में राजनीति करने पर विपक्षी दलों को घेरते हुए कहा कि यह एक सामान्य व्यवहार है, व्यक्तिगत रिश्ता के नाते नीतीश ने पूछा हाल, इसका कोई राजनीतिक मायने नहीं है। जदयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने भी कहा कि नीतीश जी ने शिष्टाचार के नाते लालू जी को फोन किया था और यह भी कि तेजस्वी को बयानबाजी से परहेज करना चाहिए। त्यागी ने स्वाभाविक तल्खी से कहा, राजनीति में शिष्टाचार सीखना भी जरूरी है।

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‘पहले तोलो, फिर बोलो’ मंत्र ने ब्रम्हाकुमारी जगदम्बा को सर्वश्रेष्ठ बनाया !

प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की मधेपुरा शाखा में मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती की 53वीं पुण्यतिथि समारोह श्रद्धापूर्वक मनाया गया जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों की ब्रम्हाकुमारियों की उपस्थिति देखी गईं | कार्यक्रम की अध्यक्षता जहाँ संचालिका राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी रंजू दीदी ने की वहीं उद्घाटनकर्ता रहे समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं मुख्य अतिथि सिविल सर्जन डॉ.गदाधर पाण्डेय |

बता दें कि उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी सहित उपस्थित गणमान्यों द्वारा सर्वप्रथम जगदंबा सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित की गई और तत्क्षण दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया | मुख्यवक्ता के रूप में उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने उद्गार प्रकट करते हुए यही कहा-

प्रेम, पवित्रता व निर्भयता की मूरत तथा सादगी, शालीनता व स्वच्छता की प्रतिमूरत मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती को श्रेष्ठता की ऊंचाइयों तक ले जानेवाला बस यही एक मंत्र रहा है- “पहले तोलो, फिर बोलो” | इसी मंत्र को समाज में प्रतिष्ठापित करने हेतु आज विश्व के 143 देशों में स्थापित प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय की शाखाओं में मातेश्वरी जगदंबा की 53वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है |

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में सिविल सर्जन डॉ.पाण्डेय एवं विशिष्ट जन के रुप में पूर्व उप प्रमुख विनयवर्धन उर्फ खोखा यादव ने उद्गार व्यक्त करते हुए माँ जगदंबा सरस्वती को सभी श्रद्धालु ब्रह्मा वत्सों की ओर से कोटि-कोटि नमन अर्पित किया तथा उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प भी लिया |

अंत में ब्रम्हाकुमारी विश्वविद्यालय मधेपुरा शाखा की संचालिका राजयोगिनी रंजू दीदी ने भावुक होकर विस्तार से अपने अध्यक्षीय भाषण में उद्गार प्रकट किया | अंदर-बाहर से पवित्र परंतु बिजी रहनेवाली मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की पुण्यतिथि पर ब्रह्मा बाबा को स्मरण करते हुए रंजू दीदी ने यही कहा-

मम्मा सरस्वती को सर्वाधिक सम्मान देने वाले बाबा ने हमें यही सिखाया है कि हमारे सकारात्मक सोच वाले वाइब्रेशन से ही सारे विश्व में एक-न-एक दिन परिवर्तन आयेगा | अम्मा के लिए रंजू दीदी ने यह भी कहा कि फरिश्ते जैसी चाल वाली तथा सबों को सदा उत्साह-उमंग के पंख प्रदान करने वाली मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती में रूहानी आकर्षण भरी पड़ी थी | सादगी और पवित्रता का आकर्षण…….! अंत में पवित्र प्रसाद वितरण के साथ समापन की घोषणा की गई |

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आईफा 2018: इरफान, श्रीदेवी और ‘तुम्हारी सुलु’ सर्वश्रेष्ठ

भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (आईफा) 2018 में विद्या बालन अभिनीत ‘तुम्हारी सुलु’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के पुरस्कार से नवाजा गया। इस फिल्म ने ‘न्यूटन’ और ‘हिन्दी मीडियम’ जैसी फिल्मों को पछाड़कर यह सम्मान पाया। वहीं न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी से जूझ रहे अभिनेता इरफान खान को फिल्म ‘हिंदी मीडियम’ में उनकी अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और श्रीदेवी को उनकी फिल्म ‘मॉम’ के लिए मरणोपरांत सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया। इरफान के लिए यह पुरस्कार जहां फिल्म ‘हैदर’ की उनकी सहकलाकार श्रद्धा कपूर ने स्वीकार किया, वहीं श्रीदेवी का पुरस्कार बड़े भावुक क्षण में उनके पति बोनी कपूर ने ग्रहण किया।

‘हिन्दी मीडियम’ और ‘मॉम’ के खाते में एक-एक और महत्वपूर्ण पुरस्कार गया। ‘हिंदी मीडियम’ के लिए साकेत चौधरी ने जहां सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार हासिल किया, वहीं नवाजुद्दीन सिद्दीकी को ‘मॉम’ के लिए सर्वक्ष्रेष्ठ सहकलाकार (पुरुष) का पुरस्कार दिया गया। सर्वश्रेष्ठ सहकलाकार (महिला) का पुरस्कार ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के लिए अभिनेत्री मेहेर विज ने जीता।

अन्य पुरस्कारों की बात करें तो ऑस्कर में भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर नामित की गई ‘न्यूटन’ को सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार मिला। वहीं अरिजीत सिंह को फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ के गीत ‘हवाएं’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक, मेघना मिश्रा को ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ के गीत ‘मैं कौन हूं’ के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका और फिल्म ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ के लिए अमाल मलिक, तनिष्क बागची और अखिल सचदेवा की तिकड़ी को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के पुरस्कार से नवाजा गया। इस साल का ‘आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवार्ड’ 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके अनुपम खेर को दिया गया। वहीं इस खास मौके पर बॉलीवुड अपने तीन दिग्गज कलाकारों – श्रीदेवी, विनोद खन्ना और शशि कपूर – को याद करना और उन्हें श्रद्धांजलि देना भी नहीं भूला।

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सऊदी अरब में आज से महिलाएं भी चला सकेंगी गाड़ी

सऊदी अरब की महिलाओं के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। आज से वहां महिलाएं भी गाड़ी चला सकेंगी। 28 साल के अनवरत संघर्ष के बाद हमेशा यात्री सीट पर बैठने वाली महिलाएं भी गाड़ी की स्टियेरिंग थाम सकेंगी, जो कल तक उनके लिए ‘गुनाह’ था वहाँ। गौरतलब है कि सऊदी अरब महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने वाला दुनिया का अंतिम देश है। बाकी देशों में महिलाओं को यह ‘आजादी’ पहले से हासिल थी।

आज राजधानी जेद्दा में महिलाएं जश्न मना रही हैं। उनके चेहरे की चमक और खुशी से उनके भीतर जगा आत्मविश्वास झांक रहा है। लेकिन यह अधिकार उन्हें ऐसे ही नहीं मिला। इसके पीछे लंबे संघर्ष का इतिहास है। 1990 में 47 महिलाओं ने नियम तोड़ते हुए शहर में वाहन चलाए थे। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया था। सर्वोच्च धार्मिक संस्था ने अध्यादेश लाकर प्रतिबंध को सख्त किया, जिससे उन्हें जेल तक जाना पड़ा। इसी तरह महिला सामाजिक कार्यकर्ता मानल अल शरीफ को ड्राइविंग का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करने की वजह से जेल जाना पड़ा था। 2014 में लॉउजैन अल-हथलौल ने यूएई से सऊदी अरब तक ड्राइव करने की कोशिश की, जिसकी वजह से उन्हें 73 दिन तक जेल में रहना पड़ा। 70 साल की कार्यकर्ता अजीजा-अल यूसुफ को भी जेल जाना पड़ा था।

बहरहाल, सऊदी अरब में महिलाओं को मिली इस आजादी के मूल में वहाँ के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन 2030 कार्यक्रम है, जिसके तहत वे सऊदी अरब की तेल-गैस और हज यात्रा से होने वाली आमदनी पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। साथ ही वे अर्थव्यवस्था को विविधता देने के लिए अलग-अलग तरह के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर्स को बढ़ावा भी देना चाहते हैं। हाल ही में सऊदी ने देश में महिलाओं को अपनी मर्जी से बिजनेस शुरू करने के अधिकार दिए हैं। इसके अलावा महिलाओं के स्टेडियम में जाने पर लगे प्रतिबंध को भी सऊदी शासन हटा चुका है। माना जा रहा है कि प्रिंस ज्यादा से ज्यादा लोगों को अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहते हैं। इससे देश की उत्पादकता में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, देश के कई कट्टरपंथी संगठनों ने प्रिंस के इन कदमों की आलोचना भी की है।

देखा जाय तो सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। महिलाओं के प्रति होने वाली घरेलू हिंसा और यौन शोषण को रोकने के लिए वहाँ कोई कानून नहीं है। सऊदी में महिलाएं अकेले प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकतीं, विदेश यात्रा नहीं कर सकतीं, रहने की पसंदीदा जगह नहीं चुन सकतीं और ना ही पासपोर्ट या नेशनल आईडी कार्ड के लिए अप्लाई कर सकती हैं। सऊदी अरब में पुरुषों की तरह महिलाओं को कानूनी तौर पर बराबरी हासिल नहीं है। ऐसे कई काम जिन्हें पुरुष कर सकते हैं, वो महिलाओं के लिए प्रतिबंधित हैं वहाँ। यहाँ तक कि पुरुष गवाह के बिना महिलाओं की पहचान की पुष्टि तक नहीं हो सकती। ऐसे में वहाँ महिलाओं को मिली यह आजादी क्या मायने रखती है, समझना मुश्किल नहीं।

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नहीं रहे झारखंड के गांधी

झारखंड की राजनीति में जीते जी किंवदंती बन जाने वाले बागुन सुम्ब्रुई नहीं रहे। पूरी ज़िन्दगी केवल आधे शरीर को कपड़ा से ढंकने वाले सुम्ब्रुई ‘झारखंड के गांधी’ कहे जाते थे। आज शायद ही कोई यकीन करे लेकिन ये सच है कि पांच बार सांसद, चार बार विधायक और उससे पहले पांच बार मुखिया रहने वाले पूर्व मंत्री और कांग्रेस के अत्यंत वरिष्ठ नेता वस्त्र के नाम पर केवल एक धोती से काम चला लेते थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके निधन के बाद अपने ट्वीट में बिल्कुल सही कहा कि वे झारखंड की सच्चाई, सादगी और विनम्रता के प्रतीक, आदिवासी समाज की आवाज और गांधीजी के विचारों के सच्चे शिष्य थे। शुक्रवार शाम 96 वर्ष की उम्र में टाटा मेमोरियल अस्पताल में उनका निधन हो गया।
बागुन सुम्ब्रुई का जन्म 1924 में पश्चिम सिंहभूम जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के एक छोटे से गांव भूता में हुआ था। प्रारंभिक जीवन भूख, अभाव व गरीबी के बीच गुजरा। प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से प्राप्त की और फिर जिला स्कूल में पढ़ाई की, लेकिन गरीबी के कारण बीच में ही स्कूल छोड़ दर्जी का काम शुरू करना पड़ा। इसी बीच 1946 में  22 वर्ष की उम्र में गांव के मुंडा बन गये। यहीं से शुरू हुई राजनीतिक जीवन में कभी न रुकने वाली उनकी यात्रा।
लगभग 50 वर्षों से भी अधिक समय तक सिंहभूम की राजनीति का केन्द्र रहे सुम्ब्रुई की पहचान झारखंड से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक रही। जयपाल सिंह के बाद इन्होंने झारखंड पार्टी की कमान संभाली और झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए चले आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के नेता रहे। उनके नेतृत्व वाली झारखंड पार्टी ने 1969 के चुनाव में बिहार में 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वर्ष 1989 तक उनकी छवि एक ऐसे अपराजेय नेता की थी जिसे चुनाव में हरा पाना असंभव-सा था। सिंहभूम से पांच बार सांसद और चार बार विधायक रहे सुम्ब्रुई वर्ष 1999 में बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद वे झारखंड का पहले विधानसभा उपाध्यक्ष चुने गए।
सादा जीवन उच्च विचार का आजीवन अनुसरण करने वाले बागुन सुम्ब्रुई ने डायन प्रथा जैसी कुरीतियों के खिलाफ सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत की थी। अपनी धुन और अपने सिद्धांत के इतने पक्के थे वे कि 1970 में अविभाजित बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय, जिनकी सरकार सुम्ब्रुई की झारखंड पार्टी के 11 विधायकों के समर्थन से चल रही थी, द्वारा बिहार राज्य पथ परिवहन में काम करने वाले एक आदिवासी कंडक्टर के निलंबन को वापस लेने के अपने अनुरोध के नहीं सुने जाने के कारण उन्होंने अपना समर्थन वापस ले लिया था। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसके बाद कर्पूरी ठाकुर की सरकार बनी, जिसमें सुम्ब्रुई परिवहन एवं वन कल्याण मंत्री बने और मंत्री बनते ही उन्होंने सबसे पहले उस कंडक्टर का निलंबन वापस लिया। उन्हें हमारी विनम्र श्रद्धांजलि।

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शोधकर्ता श्री सुभाशीष को कोसी नदी में मिला 120 डॉल्फिन !

कल तक सोंस के रूप में प्रचलित कोसी के इलाके का यह जलीय जीव स्वतंत्र शोधकर्ता श्री सुभाशीष डे को कोसी नदी में 120 डॉल्फिन का मिल जाना कोई आम बात नहीं; बल्कि एक खास बात मानी जा रही है | इलाके के लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि इस जलीय जंतु की सुरक्षा एवं संवर्धन की नितांत आवश्यकता है | लगभग 2 वर्ष के अथक प्रयास के बाद कोसी नदी बेसिन गांगेय डॉल्फिन के रूप अब स्थापित होने जा रहा है |

बता दें कि 41 प्रजातियों वाली डॉल्फिन की केवल 5 प्रजातियां साफ पानी में और शेष सभी समुद्री पानी में पायी जाती है | डॉल्फिन का मनुष्य के साथ बरसो से अधिक मित्रतापूर्ण रिश्ता रहा है तथा व्यवहारों एवं भावनाओं में समानता भी |

यह भी जानिए कि प्रो.सुनील कुमार चौधरी, विभागाध्यक्ष- वनस्पति विभाग (टीएम विश्वविद्यालय भागलपुर) के निर्देशन में एक 6 सदस्यीय टीम गठित की गई | अत्याधुनिक कैमरों एवं अन्य आधुनिक यंत्रों के साथ टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य संपन्न किया गया है |

यह भी बता दें कि दो चरणों में किये गये सर्वे में जहां नदी के बहाव के विपरीत दिशा में 12 अप्रैल से 20 अप्रैल तक सर्वे का काम किया गया वहीं नदी के बहाव की दिशा में 21 अप्रैल से 23 अप्रैल तक पूर्व में किये गये सर्वे का क्रॉस चेकिंग भी किया गया |

वर्ष 2018 में अबतक जहाँ सहरसा-सुपौल क्षेत्र की कोसी नदी में 168 किलोमीटर सर्वे के दरमियान 120 डॉल्फिन मिली वहीं उसके विकास के साथ-साथ अन्य वन्य जीवों के विकास हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार ने सहरसा एवं सुपौल दोनों 1 प्रमंडलों को अलग-अलग क्रमशः 11 लाख 62 हज़ार एवं 7 लाख 74 हज़ार की राशि आवंटित की है | साथ ही वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की सभी धाराओं को सख्ती से लागू करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है |

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगमय हुआ मधेपुरा !

जिला मुख्यालय मधेपुरा के समाहरणालय परिसर से दूर हरे-भरे दरख़्तों से घिरे प्रदूषण रहित कीर्ति नारायण क्रीडा मैदान में आज 21 जून को प्रातः 6:00 से 9:00 बजे तक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साह पूर्वक मनाया गया | सवेरे 5:00 बजे से ही योग प्रेमी बच्चे-बूढ़े, माता व बहनें क्रीडा मैदान में पहुंचने लगे जिसे खेल गुरु संत कुमार की देख-रेख में विभिन्न रंगों के झंडों तथा योग से संबंधित बैनरों से सजाया गया था |

Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri giving inaugural speech on the occasion of Vishwa Yoga Diwas at Madhepura Kirti Krida Maidan.
Udghatankarta Dr.Bhupendra Madhepuri giving inaugural speech on the occasion of Vishwa Yoga Diwas at Madhepura Kirti Krida Maidan.

बता दें कि जिला पतंजलि समिति द्वारा आयोजित विश्व योग दिवस समारोह का उद्घाटन समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने किया | इस अवसर पर जहाँ डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित पूर्व मुखिया जनार्दन प्रसाद यादव, डॉ.नंदकिशोर, राजेश कुमार, डॉ.देवप्रकाश, प्रो.रीता कुमारी, किरण कुमारी, डॉ.एन.के.निराला, दीपक कुमार, परमेश्वरी प्रसाद, पशुपति चौरसिया आदि ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया वहीं डॉ.मधेपुरी ने नारियल फोड़कर स्वयं प्रशिक्षक असंग स्वरुप के योगासन-प्राणायाम क्लास में शामिल गये तथा घंटों उस मनभावन वातावरण में पतंजलि द्वारा आपूर्ति की गई सफेद टी-शर्ट व दुपट्टों को पहन-ओढ़कर सभी “करो योग रहो निरोग” को चरितार्थ करते रहे | नेहरू युवा केंद्र के साथ-साथ पतंजलि जिला संरक्षक सुरेश प्रसाद यादव भी इस कार्यक्रम में सहयोगी बने |

Dr.Madhepuri giving certificates to the three best performers of Social Activities from the team of Khelguru Sant Kumar at the end of function.
Dr.Madhepuri giving certificates to the three best performers of Social Activities from the team of Khelguru Sant Kumar at the end of function.

जानिए कि डॉ.मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इतिहास को विस्तार से बताते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जब 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र की महासभा में दुनिया के सभी देशों को योग करने एवं योग दिवस मनाने हेतु प्रस्ताव दिया गया तो उस प्रस्ताव को 11 दिसंबर 2014 के दिन राष्ट्र संघ के 193 राष्ट्रों में से 177 सदस्यों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की सहमति प्रदान कर दी गयी | उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष का सबसे बड़ा दिन होने के कारण 21 जून को ही पहली बार 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस संपूर्ण विश्व में इसलिए मनाया गया कि योग करने से लोग इसी दिन की तरह बहुत लंबी अवधि तक जीवित रहेंगे, क्योंकि मन-मस्तिष्क और शरीर की मजबूत एकता का प्रतीक है- योग | अंत में अध्यक्षीय भाषण में डॉ.नंदकिशोर एवं धन्यवाद |

यह भी बता दें कि आज के दिन जिले के सर्वाधिक प्रखंडों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा स्वामी रामदेव व आचार्य बालकृष्ण के योग को विभिन्न रूपों में उल्लास पूर्वक मनाया गया | विश्व योग दिवस पर योग महुआ मधेपुरा |

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जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने क्यों बदली राह ?

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ भाजपा का तीन साल पुराना बेमेल गठबंधन आखिरकार टूट गया। भाजपा ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत गठबंधन से अलग होने का कड़ा फैसला लिया और बड़ी सफाई से ठीकरा पीडीपी के सिर फोड़ा। वहां विधानसभा में राजनीतिक दलों की जो शक्ति है उसे देखते हुए यह तयप्राय है कि परिस्थिति सामान्य होने तक राज्य में राज्यपाल शासन ही रहेगा और फिर से चुनाव के बाद ही कोई नई सरकार दिखेगी।
देखा जाय तो जम्मू-कश्मीर में चार महीने के असमंजस और मशक्कत के बाद सरकार गठन के साथ ही उसकी उलटी गिनती भी शुरू हो गई थी लेकिन भाजपा विपरीत विचारधारा के साथ भी सरकार चलाकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाह रही थी। यही कारण है कि संघ की असहमति के बावजूद वह पीडीपी के साथ सरकार में थी। लेकिन तीन साल में जिस तरह मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और पीडीपी ने अपना आधार मजबूत करने के लिए अलगाववादियों के प्रति नरमी और जम्मू या लद्दाख की बजाय घाटी पर ध्यान केंद्रित रखा उसने भाजपा को परेशान कर दिया।
भाजपा जम्मू-कश्मीर में किस कदर परेशान हो चली थी इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गठबंधन तोड़ने की घोषणा करने आए राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के तेवर कुछ ऐसे थे जैसे कश्मीर के बारे में विपक्षी दलों के हुआ करते हैं। उन्होंने एक तरफ से आतंकी घटनाएं बढ़ने, कानून व्यवस्था ध्वस्त होने, जम्मू और लद्दाख क्षेत्र को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाया। जबकि तीन साल तक भाजपा सरकार का हिस्सा भी रही है और केंद्र सरकार की ओर से आतंकियों के सफाए का दावा भी होता रहा है। यही नहीं कश्मीर में माहौल बदलने के लिए पीठ भी थपथपाई जाती रही है। लेकिन अब राग एकदम अलग है।
दरअसल भाजपा को अपनी गलती का अहसास उस वक्त पूरी तरह हो गया था जब रमजान के वक्त ऑपरेशन रोके जाने के बावजूद आतंकियों ने अपनी बंदूक नहीं छोड़ी और महबूबा इससे ऐतराज जताने की बजाय सस्पेंशन आफ ऑपरेशन को लागू करने की बात करती रहीं। महबूबा एक तरफ पत्थरबाजों को माफ करती रहीं और दूसरी तरफ सेना के मेजर गोगोई पर एफआइआर कर अपने कट्टरपंथी समर्थकों को खुश करने में जुटी रहीं। इतना ही नहीं हाल में कठुआ की घटना के बाद महबूबा सरकार पर सवाल उठा रहे मंत्रियों को भी जाना पड़ा। बताते हैं कि इन घटनाओं के कारण खासतौर से जम्मू क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं व समर्थकों में बेहद रोष था।
एक अटकल यह है कि देर सबेर पीडीपी भी गठबंधन तोड़ने के बारे में सोच रही थी। ऐसे में भाजपा के लिए इससे उपयुक्त समय नहीं हो सकता था। गठबंधन तोड़ने के साथ ही भाजपा की ओर से यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि केंद्र से प्रदेश को 80 हजार से एक लाख करोड़ रुपये का विकास पैकेज दिया गया। लेकिन महबूबा इसका लाभ प्रदेश को नहीं पहुंचा पाई। बताते हैं कि भाजपा में गठबंधन तोड़ने का फैसला एक दिन पहले ही हो गया था लेकिन शीर्ष नेतृत्व स्थानीय नेतृत्व से औपचारिक चर्चा के बाद ही इसकी घोषणा करना चाहता था। बहरहाल, अब भाजपा वहां खुलकर अपना राष्ट्रवाद का एजेंडा अपनाएगी और उसका फायदा 2019 में देश भर में उठाना चाहेगी।

 

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