श्री कृष्ण भक्ति में डूबा मधेपुरा

भारतीय अध्यात्म के सिंहावलोकन से यह साफ लगने लगता है कि राम यदि मर्यादा पुरुषोत्तम है तो कृष्ण सोलहो कला से पूर्ण ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषुकदाचन’ का प्रतीक |

यह भी बता दें कि 7 फरवरी की पूरी रात मधेपुरा श्रीकृष्ण की भक्ति-वंदना में डूबा रहा | जीवन सदन का विशाल हाल भी छोटा पड़ गया | क्या बच्चा, क्या बड़ा ! सभी कृष्ण वंदना में लीन ! वस्तुतः कृष्ण की भक्ति में लीन होने से अंतर्मन में कर्मों की खुशबू फ़ैलने लगती है और भीतर प्रकाशमय होने लगता है | अंतर्मन का अंधेरा विलीन होने लगता है | कर्म का दीप जलने लगता है | परंतु, कर्मों के दीप को सदैव जलते रहने के लिए उसमें ज्ञान की बाती और संकल्प का तेल दोनों डालना पड़ता है |

राजस्थान के भजन गायक सज्जन दाधीच एवं गायिका अनीता राठौड़ के साथ सूरजगढ़ के गायक मनोज ठठेरा एवं गायिका राधारानी की टीम द्वारा श्रीकृष्ण के बहुआयामी स्वरूप को अत्यंत करीने से लयबद्ध होकर दर्शकों के समक्ष परोसा गया | यूं तो कृष्ण की 30 अनजानी लीलाएं हैं जिनमें उनकी बाल-लीला और रास-लीला भक्तों को घंटों बांधकर रखती हैं |

मौके पर कृष्ण-सुदामा की मित्रता का ऐसा अद्भुत प्रदर्शन इन कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया कि शायद ही कोई ऑंखें बची होंगी जो नम ना हुई हों | यह भी जानिये कि जिस निर्माणाधीन 4 मंजिले जीवन सदन की दूसरी मंजिल पर सभी दर्शकों के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई थी उनमें से अधिकाधिक कृष्ण भक्ति में डूबे दर्शक ऐसे पाये गये जो ऊपर जाकर भोजन तक करना भूल गये  | सूर्योदय होने तक दर्शक डटे रहे |

यह भी बता दें कि प्रत्येक साल एक बार कृष्ण की संस्कृति और संस्कार से मधेपुरा को गीतमय एवं रसमय बनाने वाले खासकर मारवाड़ी समाज के युवाओं एवं गणमान्यों का मधेपुरा का समाज अभिनंदन करता है, बंदन करता है | भला क्यों नहीं, अधिकांश गणमान्य तो इस कार्यक्रम को सफल करने में सारा कुछ करते हुए भी अपनी उपस्थिति सार्वजनिक करना नहीं चाहते, फिर भी जिन्हें कार्यक्रम की सफलता की जवाबदेही दी जाती है उन्हें तो विवश होकर सामने आना ही पड़ता है……..| धन्यवाद के पात्र वे श्याम सखा के सदस्यगण हैं- राम भगत सर्राफ, मनीष कुमार सर्राफ, राजेश सर्राफ, अशोक संचेती, आनंद प्राणसुखका, पप्पू सुल्तानियां, संजय सर्राफ, संजय सुल्तानियां, श्रवन सुल्तानियां आदि |

सम्बंधित खबरें


मधेपुरा के जीवन सदन में श्री श्याम वन्दना महोत्सव !!

जहाँ 35 वर्ष पूर्व इसी जीवन सदन में मधेपुरा जिला के उद्घाटन के बाद जिला कार्यालय का श्री गणेश हुआ था, वहीं 10 वर्षों से लगातार श्री श्याम सखा संघ परिवार, मधेपुरा द्वारा प्रतिवर्ष लाखों रुपये खर्च कर “श्री श्याम वंदना महोत्सव” का एक दिवसीय भव्य आयोजन किया जाता रहा | परंतु, आज दिनांक 7 फरवरी, 2017 को संध्या 6:00 बजे से प्रभु इच्छा तक अद्भुत भव्यता के साथ विधान पार्षद ललन कुमार सर्राफ, मनीष सर्राफ, मंटू जी, व्यापार संघ के अध्यक्ष योगेंद्र प्राणसुखका आदि अन्य श्याम सखा से जुड़े हुए गणमान्यों के सहयोग से नवनिर्मित जीवन सदन में “श्री श्याम वंदना के 11 वां वार्षिकोत्सव की जीवंत झांकी प्रस्तुत की जायेगी | इस अवसर पर समस्त श्याम सखा प्रेमी सादर आमंत्रित हैं |

यह भी जानिये और मानिये कि इस कराल कलिकाल में ऐसे यज्ञ-अनुष्ठान का आयोजन सर्वाधिक कष्टसाध्य है | फिर भी, प्रभु कृपा से ही यह निर्विघ्न संपन्न होता चला आ रहा है | वर्तमान समय के भौतिक “तापों एवं पापों” के निवारण के लिए “श्रीश्याम भजन संध्या” ही अमोध अस्त्र है |

बता दें कि भजन संध्या में जहां राजस्थान-झुंझुनू से श्री सज्जन दाधीच, एवं सूरजगढ़ से श्री मनोज ठठेरा पधार रहे हैं वहीं भजन गायिका द्वय श्रीमती केमिता राठौड़ उदयपुर से तो श्रीमती राधारानी, टाटा नगर से आपके बीच आ रही हैं |

स्थानीय श्याम सखा संघ के सदस्यगण आनंद जी, पप्पू सुल्तानियां जी, संजय सर्राफ जी, संजय सुल्तानिया जी आदि सभी धन्यवाद के पात्र हैं जिनके अथक परिश्रम के चलते ही 11 वर्षों से यह आयोजन राधाकृष्ण की विविधताओं को संगीत संध्या के माध्यम से हमारे बीच परोसते रहे हैं |

सम्बंधित खबरें


ऊर्जा के नये आयाम को छूता मधेपुरा

बिहार की नीतीश सरकार द्वारा जहाँ सात निश्चयों में एक- युवाओं को “उच्च शिक्षा का हल: आर्थिक बल” सहित स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग देने की सोच है वहीं ‘हर घर : नल का जल’, सभी घरों में शौचालय………… आदि निश्चयों के माध्यम से विकसित बिहार बनाने के प्रावधान किये जा रहे हैं वहीं इस जिले के प्रभारी मंत्री (ऊर्जा मंत्री) बिजेन्द्र प्रसाद यादव के इस बाबत दिये गये निदेशों को डायनेमिक डीएम मो.सोहैल (भा.प्र.से.) की टीम पूरी तन्मयता के साथ अमलीजामा पहनाने हेतु प्रयासरत देखे जा रहे हैं |

इन निश्चयों को ऊंचाई प्रदान करने हेतु विद्युत आपूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए जिले के डीएम मो.सोहैल द्वारा 30 करोड़ की लागत से मधेपुरा, मुरलीगंज, उदाकिशुनगंज, बिहारीगंज एवं आलमनगर में छह नये पावर स्टेशनों के निर्माण के बाबत जगहें चयनित भी कर ली गयी हैं | मधेपुरा में दो स्थानों मानिकपुर एवं धुरगाँव के अतिरिक्त शेष 4 स्थान क्रमशः परमानंदपुर, शहजादपुर, बभनगामा, गंगापुर चुन लिया गया है | प्रत्येक पावर स्टेशन के निर्माण में 5 करोड़ रुपये की लागत आयेगी |

यह भी बता दें कि पावर स्टेशन के निर्माण को लेकर जहां जिला प्रशासन द्वारा जगहों को चिन्हित कर राज्य सरकार को सूची भेज दी गयी है और जिसकी स्वीकृति भी प्रदान कर दी गयी है वहीं विद्युत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पावर सब स्टेशन का निर्माण कार्य स्वीकृत राशि 30 करोड़ के आवंटन प्राप्त होते ही अप्रैल माह से निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया जायेगा | बता दें कि सभी छह स्टेशनों का निर्माण कार्य दो वर्षों के अंदर पूरा कर लिया जायेगा |

विद्युत विभाग ने माननीय मुख्यमंत्री के सात निश्चयों को शीघ्रातिशीघ्र धरती पर उतारने हेतु निर्माण की जिम्मेदारी गोपी कृष्णा एजेंसी को सौंप दिया है | विद्युतिकरण से वंचित गांव में विद्युत आपूर्ति करने के लिए इन नये सब-स्टेशनों के निर्माण को जल्दबाजी में पूरा किया जाना जरूरी है | ऐसा होगा तभी ‘हर घर में नल का जल’ पहुंचेगा और बिहार विकसित बिहार की ओर कदम बढ़ायेगा |

सम्बंधित खबरें


‘अम्मा’ की पार्टी ही नहीं, अब सरकार भी संभालेंगी ‘चिनम्मा’

पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के संकेत मिल रहे थे। अनुमान जताया जा रहा था कि जल्द ही मौजूदा मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम को हटाकर ‘चिनम्मा’ शशिकला नटराजन उनकी जगह मुख्यमंत्री बनेंगी। इस परिवर्तन से जुड़ी अटकलें रविवार को सच साबित हुईं। पार्टी विधायकों की रविवार को हुई अहम बैठक में शशिकला को विधायक दल की नेता चुन लिया गया और मुख्यमंत्री के पद पर उनकी ताजपोशी का रास्ता साफ करते हुए पन्नीरसेल्वम ने राज्यपाल को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के बाद एक बार फिर विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें शशिकला को मुख्यमंत्री घोषित करने की औपचारिकता पूरी की जाएगी।

बहरहाल, इस घटनाक्रम के बाद शशिकला ने कहा कि अम्मा (जयललिता) के निधन के बाद ‘भाई’ पन्नीरसेल्वम ने ही मुझसे महासचिव का पद लेने को कहा और अब उन्होंने ही मुझसे सीएम बनने के लिए भी कहा। उन्होंने पन्नीरसेल्वम की जमकर तारीफ की और कहा कि जब भी पार्टी ने किसी मुश्किल हालात का सामना किया या अम्मा को दिक्कत हुई तो हमारे प्रिय भाई पन्नीरसेल्वम ही विश्वसनीय रहे।

बता दें कि शशिकला के पार्टी और सरकार का सर्वेसर्वा बनने का कई जगहों पर विरोध भी हो रहा है। साथ ही, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आय से अधिक संपत्ति का मामला भी चल रहा है। लेकिन इससे फिलहाल शशिकला के बढ़ते आभामंडल पर कोई असर होगा, ऐसा फिलहाल तो नहीं लगता क्योंकि इससे इनकार नहीं किया सकता कि छिटपुट विरोध के बावजूद एआईएडीएमके के आम कार्यकर्ता उनमें ‘अम्मा’ जयललिता की छवि देखने लगे हैं।

चलते-चलते बता दें कि 62 वर्षीया शशिकला अगले एक से दो दिनों में मुख्यमंत्री पद की शपय़ लेंगी और वे जानकी रामचंद्रन और जयललिता के बाद तमिलनाडु की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी।

 

सम्बंधित खबरें


जीने की लगन लगी है तो पहले मरना स्वीकार करो

डीएम द्वय गोपाल मीणा और मो.सोहैल की चाहत के अनुरूप “सच्ची शिक्षा के लिए कदाचारमुक्त परीक्षा” में निरंतर जन सहयोग प्राप्त होने पर शनै:-शनै: शिक्षा की सेहत में सुधार होते देखकर सामाजिक ऋण से उऋण होने के लिए बाबा भोलेनाथ की नगरी सिंहेश्वर की धरती पर त्रिमूर्ति रुपेश-राजेश और कुंदन द्वारा वर्ल्ड किड्स स्कूल की स्थापना 2 वर्ष पूर्व की गई थी |

यह भी बता दें कि आयोजित वार्षिकोत्सव के अवसर पर वर्ल्ड किड्स स्कूल के शैक्षणिक माहौल, व्यवस्था तथा बच्चों के पठन-पाठन में अभूतपूर्व प्रगति से संतुष्ट अभिभावकों ( विशेष रुप से माताओं ) की भीड़ इतनी हो गई कि जगह ही कम पड़ गयी | तभी तो अधिकांश पुरुषवर्ग के अभिभावकगण जहां-तहाँ खड़े रहकर भी अपने बच्चों के उमदा परफ़ोरमेंस का रसास्वादन करते देखे गये |

Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, Principal Dr.Ashok Kumar, Dr.H.L.S.Jauhari, BEO Dr.Yaduvansh, Dr.Chetan, Mr.Kundan and others standing on the stage during National Anthem Presenting by a small kid from Kids World School, Singheshwar , Madhepura.
Educationist Dr.Bhupendra Madhepuri, Principal Dr.Ashok Kumar, Dr.H.L.S.Jauhari, BEO Dr.Yaduvansh, Dr.Chetan, Mr.Kundan and others standing on the stage during National Anthem Presenting by a small kid from Kids World School, Singheshwar , Madhepura.

बता दें कि उद्घाटन समारोह का श्रीगणेश छोटे-छोटे किड्स के welcome ! सॉन्ग से किया गया | लगे हाथ उद्घाटन कार्यक्रम का आगाज समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, प्राचार्यत्रय डॉ.अशोक कुमार, डॉ.एच.एल.एस. जौहरी, डॉ.माधवानंद सहित रुपेश-राजेश…… आदि गणमान्यों द्वारा सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर किया गया | जहां आगत अतिथियों का किड्स के नन्हे हाथों ने बुके प्रदान कर स्वागत किया वहीं विद्यालय-प्राचार्य एवं डॉ.चेतन व कुंदन द्वारा वसंत पंचमी के लाल-गुलाबी शब्दों से अतिथियों का भरपूर स्वागत किया गया | एक नन्हा बच्चा द्वारा राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया |

सर्वाधिक कार्यव्यस्तता के कारण प्राचार्यत्रय डॉ.जौहरी, डॉ.माधवानंद, डॉ.अशोक कुमार एवं बी.इ.ओ. डॉ.यदुवंश यादव द्वारा अपनी-अपनी अतिसंक्षिप्त संबोधनों में बच्चों का प्रथम गुरु माता-पिता को बताते हुए यही कहा गया कि बच्चे लगभग 6 घंटे ही स्कूल में रहते हैं, शेष 18 घंटे तो अपने मां-बाप के साथ ही समय बिताते हैं | माता-पिता की जवाबदेही शिक्षक से कहीं तीन गुणा ज्यादा होती है | वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल एवं टी.वी. से दूर रखने की सलाह दी प्राचार्यों ने |

अंत में भौतिकी के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ.मधेपुरी ने बच्चों की सर्वाधिक संख्या में उपस्थित माताओं को संबोधित करते हुए तथा डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के विचारों को परोसते हुए यही कहा कि आप कभी भी अपने आप को असहाय न समझें | आप मातृशक्ति सर्वशक्तिमान हैं | आपको पता है दुनिया के पुरुषवर्ग की चाहत क्या होती है ? शक्ति, संपत्ति और सशक्त ज्ञान चाहिए उन्हें | इन तीनों को पाने के लिए पुरुषवर्ग को कहां जाना पड़ता है- शक्ति के लिए ‘दुर्गा’, संपत्ति के लिए ‘लक्ष्मी’ और ज्ञान के लिए ‘सरस्वती’ की आराधना करनी पड़ती है, उनसे गुहार करना पड़ता है, उसके पास जाना पड़ता है |

डॉ.मधेपुरी ने माताओं से कहा कि प्रत्येक बच्चे में देवीय शक्ति है तथा ईश्वरीय तेज छिपा है | आप उसमें पंख लगा दें ताकि बच्चा चारों ओर अच्छाइयों का प्रकाश फैलाता रहे | उन्होंने 4 वर्षीय लकवा ग्रस्त बच्ची ‘विल्मा’ एवं नेत्रहीन बच्ची ‘कंचन गावा’ की कहानी विस्तार से सुनाते हुए खासकर माताओं से यही कहा कि ना तो आप डरिये और ना बच्चों को डराईये | अपने बच्चों को बड़े-बड़े सपने देखने हेतु प्रोत्साहित कीजिए | अंत में डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित माताओं कों संदेश में ये पंक्तियां कहीं:-

भय जिसे शूल चुभ जाने का, वह फूल भला कब पाता है |
जो ज्वार देख घबराता है, वह इसी पार रह जाता है ||
सोचो मत साधन क्या होगा, पहले मन को तैयार करो |
जीने की लगन लगी है तो, पहले मरना स्वीकार करो ||

यह भी जानिये कि उद्घाटन सत्र के बाद स्कूल के सैकड़ों बच्चों द्वारा एक-से-एक बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन देर तक किया जाता रहा | हास्य प्रस्तुति से लेकर लघुनाटक का मंचन भी दर्शकों की तालियां बटोरता रहा | प्रस्तुति की गुणवत्ता के कारण दर्शकों ने खुद को देर तक बांधे रखा | अंत में स्कूल परिवार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम समापन की घोषणा की गई |

सम्बंधित खबरें


प्रवासियों के बिना आप अमेरिका को नहीं पहचानेंगे !

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सात मुस्लिमबहुल देशों – सीरिया, सूडान, इराक, ईरान, सोमालिया, यमन और लीबिया – के प्रवासियों और शरणार्थियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी है। ट्रंप की ओर से जारी आदेश के अनुसार सीरियाई शरणार्थियों के अमेरिका आने पर अनिश्चित काल के लिए रोक लग गई है, जबकि अन्य छह देशों के शरणार्थियों पर 120 दिनों तक रोक रहेगी। और तो और इन देशों के सामान्य नागरिकों को भी 90 दिनों तक अमेरिकी वीजा नहीं मिलेगा। उनके इस फैसले का अमेरिका समेत दुनिया भर में विरोध हो रहा है।

ट्रंप का यह फैसला निहायत हैरतअंगेज है। साथ ही हास्यास्पद और आत्मघाती भी। कारण यह कि जिस अमेरिका के तथाकथित हित के लिए उन्होंने यह विवादास्पद कदम उठाया है, वो अमेरिका आज महाशक्ति न कहलाता अगर वहां प्रवासी न होते। आपको आश्चर्य होगा कि अमेरिका की जो हस्तियां आज वहां की पहचान बन चुके हैं, उनमें से अधिकतर प्रवासी ही हैं। ऐसी हस्तियों की फेहरिस्त खासी लंबी है। फिलहाल यहां चर्चा कुछ चुनिंदा लोगों की।

शुरुआत करते हैं ऐपल के स्टीव जॉब्स से। स्टीव जॉब्स मूलत: सीरिया के रहने वाले मुसलमान अब्दुल फतह जंदाली और जर्मन प्रवासी महिला कैरोले शिबेल की संतान थे। यही नहीं, ऐपल की स्थापना में एक और स्टीव – स्टीव वोज्नियाक – का योगदान था और वे भी जॉब्स की तरह यूक्रेनी प्रवासी के बेटे थे। इसी तरह दिग्गज अमेरिकी कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी कंपनी ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी इलिससन इटली के एक प्रवासी के जैविक बेटे थे। उन्हें अविवाहित यहूदी महिला ने जन्म दिया था।

अब बात करते हैं गूगल की। रूस में जन्मे सेरगे ब्रिन ने लैरी पेज के साथ मिलकर दुनिया के इस सबसे बड़े सर्च इंजन की स्थापना की थी। वे फिलहाल गूगल की पैरंट कंपनी अल्फाबेट के प्रेसिडेंट हैं। और जनाब, गूगल के मौजूदा सीईओ सुंदर पिचाई को तो आप जान ही रहे होंगे। भारतीय मूल के पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया था और 2015 में वे गूगल के सीईओ बने थे।

अगर आप सोच रहे हैं कि ये सूची खत्म हो गई है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अभी तो कई महारथी बाकी हैं। अब अमेरिका की दिग्गज ऑटोमेकर और एनर्जी स्टोरेज कंपनी टेस्ला के फाउंडर एलन मस्क को ही लीजिए। मस्क दक्षिण अफ्रीका में जन्मे थे और कनाडा से अमेरिका प्रवासी के तौर पर आए थे। इसी तरह विश्वप्रसिद्ध ई-कॉमर्स और ऑक्शन साइट ई-बे के संस्थापक पियरे ओमिड्यार मूलत: ईरान के थे और यू-ट्यूब के सह-संस्थापक स्टीव चेन का जन्म ताइवान में हुआ था। फेसबुक के सह-संस्थापकों में एक एडुअर्डो सेवरिन भी ब्राजीली प्रवासी हैं।

थोड़ा पीछे चलकर देखें तो बैंक ऑफ अमेरिका के संस्थापक एमेडियो गियान्निनी के माता-पिता इटली के प्रवासी नागरिक थे। इसी तरह दुनिया की दिग्गज विमानन कंपनियों में से एक बोइंग एयरोस्पेस की स्थापना करने वाले विलियम बोइंग ऑस्ट्रिया और जर्मनी से आए प्रवासियों की संतान थे। दुनिया की दिग्गज कंप्यूटिंग कंपनियों में एक इंटल के संस्थापक एंड्रयू ग्रो, जिनका पिछले साल देहांत हुआ, हंगरी से आकर अमेरिका में बसे थे।

सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि प्रवासियों पर रोक लगाने का फैसला सुनाने वाले ट्रंप स्वयं स्कॉटिश महिला और जर्मन मूल के पिता की संतान हैं। उऩके ग्रैंडपैरेंट्स जर्मनी के कालस्टैड शहर से अमेरिका गए थे। यही नहीं, बराक ओबामा – ट्रंप से ठीक पहले लगातार आठ वर्षों तक व्हाइट हाउस जिनका पता रहा था – के पिता भी केन्याई मूल के मुस्लिम थे, जबकि उनकी मां अमेरिकी ईसाई थीं।

अब आप ही बतायें, क्या इन प्रवासियों के बिना अमेरिका की कल्पना भी की जा सकती है? कहने की जरूरत नहीं कि ट्रंप ने अगर समय रहते अपनी भूल नहीं सुधारी तो अमेरिका की पहचान ही संकट में पड़ जाएगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


बिहार का कसूर बताएं, जेटलीजी!

2017-18 के केन्द्रीय बजट में आश्चर्यजनक ढंग से बिहार की अनदेखी हुई है। इस बार भी बिहार का हाथ खाली का खाली रह गया। क्या ये बिहार विधानसभा चुनाव में मनोनुकूल परिणाम न मिलने की सजा है? अगर नहीं, तो जेटलीजी बिहार का कसूर बताएं। वे बताएं कि इस बार के बजट में अगर झारखंड और गुजरात में एम्स दिया जा सकता है, तो फिर बिहार की उपेक्षा का क्या आधार है? क्या ये महज संयोग है कि इन दो राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं और बिहार में नहीं?

कम-से-कम वित्तमंत्री अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वादे की लाज ही रख लेते, जिन्होंने अपनी चुनावी सभाओं में बिहार को विशेष पैकेज और विशेष दर्जा देने की बात कही थी। मगर, दूसरी बार भी बिहारवासियों के हिस्से में निराशा ही क्यों? क्या बिहार को महाराष्ट्र, गुजरात जैसे विकसित राज्य के समकक्ष लाने के लिए केन्द्रीय बजट में यहाँ के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान जरूरी नहीं?

सड़क, पुल और परिवहन के मामले में भी बिहार की उपेक्षा हुई है। बजट में राज्य के लिए इस क्षेत्र में कोई नई योजना नहीं दिखी। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित सवा लाख करोड़ पैकेज में पहले से चल रही जिन योजानाओं की चर्चा थी, उनकी भी गति तेज करने का कोई प्रयास नहीं दिखा।

किसी से छिपा नहीं है कि बिहार को हर साल नेपाल से आने वाली नदियों से भारी तबाही झेलनी पड़ती है और साथ ही सूखे का प्रकोप भी झेलना पड़ता है। फिर भी इस बजट में नदियों को जोड़ने की परियोजना, गाद प्रबंधन नीति और फरक्का बराज से पैदा हुए संकट से उबरने के उपाय नहीं किए गए।

और तो और, इस बजट में बिहार को बीआरजीएफ (Backward Regions Grant Fund) मद की बकाया राशि केन्द्र से मिलने की उम्मीद थी, मगर वो भी नहीं मिली। क्या ये बिहार के साथ भेदभाव नही? आश्चर्य तो ये है कि प्रधानमंत्री तो प्रधानमंत्री, केन्द्र में बैठे बिहार के आधा दर्जन मंत्री भी इस मसले पर चुप हैं।

ये तो हुई बिहार की बात। वैसे भी इस बजट में आर्थिक सुधार के लिए कोई रणनीतिक तैयारी की झलक नहीं मिलती है, जबकि यह निजी निवेश में बढ़ोतरी की अनिवार्य शर्त है। सार्वजनिक निवेश में बढ़ोतरी के लिए भी खास नीति का जिक्र नहीं है। जो भी इन्सेंटिव दिया गया है, वह कुछ मायनों में हाउसिंग सेक्टर के लिए है। पर क्या देश का विकास सिर्फ इसी से हो जाएगा?

विकास के दो मुख्य आधार हैं – कृषि और उद्योग। लेकिन न तो कृषि को बढ़ावा देने की रणनीति पर कोई काम हुआ है, न ही उद्योग के नए क्षेत्रों के विकास पर बजट में कुछ खास कहा गया है। बजट में वैश्विक आधारभूत आय का जिक्र नहीं है, जबकि आर्थिक सर्वेक्षण में इसका उल्लेख है। आमतौर पर बजट और आर्थिक सर्वेक्षण में तालमेल रहता है, मगर इस बार इसका ख्याल नहीं रखा गया है। क्या वित्तमंत्री इस पर रोशनी डालने की जहमत उठाएंगे?

अंत में माननीय वित्तमंत्री से एक सवाल और। उन्होंने अपने दो घंटे से भी ज्यादा लंबे भाषण में ये क्यों नहीं बताया कि नोटबंदी के क्या-क्या फायदे हुए? उन्होंने इससे भविष्य में बेहतर परिणाम की बात तो कही, लेकिन नोटबंदी से जिनका रोजगार छिन गया उनकी क्षतिपूर्ति के लिए सरकार वर्तमान में क्या कर रही है, इस पर क्या उन्हें कुछ बोलना नहीं चाहिए?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

सम्बंधित खबरें


डॉ.लोहिया बार-बार मधेपुरा क्यों आते थे ?

भारत में समाजवाद को नया आयाम देने वाले डॉ.लोहिया के हमसफ़र, क्रांतिकारी विचारक व समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल की 114वीं जयंती आज जिले के हर कोने से लेकर प्रदेश की राजधानी के विभिन्न संस्थानों एवं संगठनों में तथा चौक-चौराहे पर भी श्रद्धा के साथ मनायी जा रही है | उनके नाम स्थापित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) के अंतर्गत प्रायः सभी महाविद्यालयों में आज उस समाजवादी चिंतक के जीवन दर्शन की विस्तृत चर्चाएं हो रही हैं |

Udghatankarta Founder Vice-Chancellor Dr.Ravi, Adhyaksh Dr.Madhepuri, Shaukat Ali, S.K.Yadav & others garlanding the statue of Great Socialist Leader B.N.Mandal on the 114th Birth Anniversary
Udghatankarta Founder Vice-Chancellor Dr.Ravi, Adhyaksh Dr.Madhepuri, Shaukat Ali, S.K.Yadav & others garlanding the statue of Great Socialist Leader B.N.Mandal on the 114th Birth Anniversary.

मधेपुरा में उनकी जयंती समारोह का श्रीगणेश उनके नामवाले “ भूपेन्द्र चौक ” पर उनकी ही प्रतिमा के सामने, विभिन्न स्कूली बच्चे-बच्चियों द्वारा तख्तियों पर उनकी तस्वीरों एवं बैंड बाजे-गाजे के साथ प्रभात फेरियां पूरी करते हुए, उन्हीं के परमशिष्य डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में प्रातः 7:30 बजे से 9:00 बजे तक शहर के गणमान्यों के बीच उद्घाटनकर्ता के रूप में संस्थापक कुलपति व पूर्व सांसद डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि के कर कमलों द्वारा सर्वप्रथम माल्यार्पण से किया गया |

इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता डॉ.रवि ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि भूपेन्द्र बाबू समाजवाद के सिद्धांतों को गढ़ते ही नहीं थे बल्कि उन्हें जीते थे और ताजिंदगी समाजवाद को ओढ़ते, पहनते और बिछाते भी रहे | उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सोयी हुई चेतना को जगानेवाले एवं विभिन्न धर्मों एवं जातियों के बीच की दीवारों को तोड़नेवाले शूरमा थे भूपेन्द्र बाबू | मौके पर पूर्व प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव, शिक्षक नेता परमेश्वरी प्रसाद यादव, डॉ.आलोक कुमार, समाजसेवी शौकत अली, डॉ.नीलाकांत, पूर्व कुलसचिव सचिंद्र महतो, संजय कुमार आदि ने पुष्पांजलि अर्पित किया तथा सबों ने बच्चों को उनके जीवन से यही सीख लेने हेतु संदेश दिया कि बच्चे भी सामाजिक कुरीतियों को दूर करें तथा दबे-कुचले को ऊपर उठाने की कोशिश |

Director Mr.Ashish Mishra of "Sure Success Study Campus" working at Dr.Madhepuri Marg, receiving prize-gift by Founder Vice-Chancellor Dr.R.K. Yadav Ravi (BN Mandal University ) Madhepura
Director Mr.Ashish Mishra of “Sure Success Study Campus” working at Dr.Madhepuri Marg, receiving prize-gift by Founder Vice-Chancellor Dr.R.K. Yadav Ravi (BN Mandal University ) Madhepura.

बता दें कि अध्यक्षीय संबोधन में डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने यही कहा कि वे समाजवादी मनीषी के साथ बैलगाड़ी से रेलगाड़ी तक और सड़क से संसद भवन तक छाया की तरह साथ रहकर मात्र यही जान पाया कि उनका व्यक्तित्व आकाश से ऊंचा और समाजवादी विचार सागर से भी गहरा था | डॉ.मधेपुरी ने संक्षेप में डॉ.लोहिया की वाणी को उद्धृत किया-

“हे मधेपुरा-वासियो ! जानते हो मैं बार-बार मधेपुरा क्यों आता हूं ? बस इसीलिए कि मधेपुरा की धरती ने भूपेन्द्र नारायण मंडल जैसे समाजवादी को जन्म दिया है जो सदा निर्भीक होकर संसद में गरीबों की समस्याओं के लिए लड़ता है और भविष्य में भी लड़ता रहेगा………!”   

और अन्त में यह भी बता दें कि इस ठंड में वसंत पंचमी के पूजनोत्सव के बावजूद इस जयंती कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले यू.के. इंटरनेशनल, तुलसी पब्लिक स्कूल, शांति आदर्श स्कूल एवं डॉ.मधेपुरी मार्ग स्थित “स्योर सक्सेस स्टडी कैंपस” के निदेशक आशीष मिश्रा सहित निदेशक त्रय को उद्घाटनकर्ता डॉ.रवि द्वारा पुरस्कृत किया गया | अन्य वर्षों की तरह इस वर्ष भी गरीबों के हमदर्द समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र बाबू की आत्मा की संतुष्टि के लिए डॉ.मधेपुरी ने 3 निर्धन लोगों को वस्त्रदान किया | कार्यक्रम का संचालन स्काउट एंड गाइड के आयुक्त जय कृष्ण ने यादव तथा धन्यवाद ज्ञापित किया रंगकर्मी विकास कुमार ने |

सम्बंधित खबरें