बिहार के नए बजट में न कोई नया कर, न नोटबंदी का असर

बिहार की महागठबंधन सरकार का दूसरा बजट कई लुभावनी बातों के लिए याद रखा जाएगा, बशर्ते कि उन्हें अमलीजामा पहना दिया जाए। गौरतलब है कि शराबबंदी और नोटबंदी के बाद ये पहला बजट था। इस कारण हर आम और खास की नज़र इस बजट पर थी। बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में वित्तमंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए पेश किए गए इस बजट में पहली बार डेढ़ लाख करोड़ से अधिक (1 लाख 60 हजार करोड़) पूंजीगत व्यय का अनुमान है। बजट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय, पिछड़ों के कल्याण और कैशलेस टैक्स कलेक्शन पर खास जोर दिया गया है। सबसे अहम ये कि नए बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है।

वित्तमंत्री ने अपने 22 मिनट के अतिसंक्षिप्त भाषण में कहा कि नोटबंदी का बिहार पर कोई असर नहीं पड़ने देंगे। नोटबंदी के बाद के झंझावातों से उबरने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में बैंकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खाताधारियों को प्लास्टिक मनी देने पर जोर दिया जाएगा। अभियान चलाकर पीओएस मशीनें लगाई जाएंगी और कर की चोरी रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

वैसे देखा जाय तो कुल मिलाकर बजट मुख्यमंत्री के सात निश्चय कार्यक्रम पर केन्द्रित रहा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क और कृषि समेत सात निश्चय कार्यक्रम के तहत होने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। कुल बजट के विभागवार व्यय प्रतिशत की बात करें तो शिक्षा के मद में सर्वाधिक 17.93% व्यय होना है। शिक्षा के बाद ग्रामीण विकास हेतु 12.26% और ग्रामीण कार्य के लिए 10.74% बजट का प्रावधान किया गया है। अन्य विभागों की बात करें तो ऊर्जा के मद में 8.57%, पथ-निर्माण के मद में 7.19%, समाज-कल्याण के मद में 6.18%,  स्वास्थ्य के मद में 4.50%, जल संसाधन के मद में 3.57%, नगर विकास एवं आवास के मद में 3.45%, पंचायती राज के मद में 3.26%, कृषि के मद में 2.95% और योजना एवं विकास के मद में 2.66% बजट का प्रावधान किया गया है।

वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर आवास की व्यवस्था और कार्यरत सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए प्रभावशाली स्वास्थ्य योजना लागू करने की बात कही। उन्होंने महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर खास फोकस करने और बुनकरों की स्थिति बेहतर करने  के लिए उनके कौशल विकास की बात भी कही।

गौरतलब है कि बिहार का पिछले वित्तीय वर्ष का बजट 1,44,696.27 करोड़ रुपए का था। इस तरह पिछले साल के मुकाबले इस साल का बजट लगभग 15 हजार करोड़ अधिक का है। यह भी जानें कि इस वित्तीय वर्ष में 18,112 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान है जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (6,32,180 करोड़ रुपए) के मुकाबले 2.87% है।

बकौल सिद्दीकी केन्द्र सरकार की प्रतिकूल नीतियों जैसे विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने, फंड शेयरिंग का पैटर्न बदल देने, विशेष पैकेज नहीं देने और नोटबंदी के झंझावात के बावजूद राज्य सरकार का उत्साह बना रहा है। उन्होंने कहा कि हम चांद और सूरज की बात नहीं करते, दीये की बात करते हैं, यह आम आदमी के जुझारूपन का प्रतीक है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नीतीश के बेटे निशांत बिताएंगे आध्यात्मिक जीवन, नहीं करेंगे राजनीति

आज जबकि परिवारवाद की बात बेमानी हो चुकी है और छोटे-बड़े हर नेता की अगली पीढ़ी स्वयं को राजनीति में स्थापित करने में लगी है, ऐसे में राष्ट्रीय कद के एक नेता – जो किसी सत्ताधारी दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लगातार पांचवीं बार बिहार जैसे राज्य के मुख्यमंत्री हों – के पुत्र यह कहें कि उनकी राजनीति में जाने की कोई इच्छा नहीं है, तो क्या आप यकीन करेंगे? नहीं न? लेकिन हम ढूंढ़ें तो अवसारवाद की पराकाष्ठा के दौर में भी ‘अपवाद’ मिल जाते हैं। जी हाँ, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार ऐसे ही ‘अपवाद’ हैं।

बीते शनिवार को अपनी मां मंजू सिन्हा की जयंती के मौके पर निशांत ने राजनीति के प्रति केवल अपनी अनिच्छा ही नहीं जताई बल्कि यहां तक कहा कि वे राजनीति में कभी नहीं जाएंगे और आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में उन्होंने अपने पिता को बता दिया है। गौरतलब है कि निशांत, जो नीतीश की इकलौती संतान हैं, प्रारम्भ से कुछ अलग प्रकृति के हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश के शपथ-ग्रहण जैसे एकाध मौके को छोड़ दें तो राजनीति के गलियारे में वे शायद ही देखे जाते हैं। भीड़-भाड़ और किसी भी तरह के प्रचार से दूर उन्हें एकांत में समय बिताना अधिक पसंद है। बताया जाता है कि अपनी मां की असमय मृत्यु उनके एकांतप्रिय स्वभाव का एक बड़ा कारण है।

बहरहाल, निशांत कुमार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार के प्रमुख राजनेताओं की अगली पीढ़ी के सत्ता व पार्टी संभालने पर दिन-रात चर्चा और विमर्श का दौर चल रहा है। अभी हाल ही में राबड़ी देवी ने कहा है कि उनके उपमुख्यमंत्री बेटे तेजस्वी में मुख्यमंत्री बनने के सारे गुण हैं। वहीं, महागठबंधन के ‘अभिवावक’ लालू प्रसाद ने बच्चों के नेतृत्व के सवाल पर कहा है कि उनकी व नीतीश की उम्र हो चली है और अब भविष्य बच्चों का है।

लालू के दोनों बेटे तेजस्वी-तेजप्रताप और बेटी मीसा न केवल राजनीति में सक्रिय हैं बल्कि कई पद भी संभाल रहे हैं। उधर रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी राजनीति को पूरी तरह अपना करियर बना चुके हैं और जमुई से सांसद होने के साथ-साथ लोजपा संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। इन सबके बरक्स निशांत की राजनीति से इस कदर अरुचि सचमुच चौंकाने वाली है।

बता दें कि स्वर्गीय मंजू सिन्हा की जयंती के अवसर पर निशांत और उनके पिता नीतीश कुमार उनकी स्मृति में पटना के कंकड़बाग में बनाए गए पार्क में श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। इस दौरान पिता नीतीश के बारे में पूछे जाने पर निशांत ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा बिहार की सेवा की है। वे बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार बिहार के विकास के लिए काम करते रहे हैं और ईश्वर ने उन्हें इसके लिए आशीर्वाद दिया है। वहीं पिता नीतीश के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर निशांत का कहना था कि उनके पिता के पास विजन है। अगर देश की जनता चाहेगी और ईश्वर का आशीर्वाद होगा तो वे अवश्य प्रधानमंत्री बनेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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लालू ने मोदी से कहा, सिर्फ यादव का हो सकता है 56 इंच का सीना

ज्ञान का अद्भुत भंडार है लालूजी के पास। उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने एकदम नया ज्ञान बांटा कि 56 इंच का सीना सिर्फ यादव का ही हो सकता है। जी हाँ, उन्होंने भरी सभा में कहा कि मोदी कहते हैं कि मेरा सीना 56 इंच का है। उनको मालूम होना चाहिए कि 56 इंच का सीना सिर्फ यादव का ही हो सकता है। यही नहीं, इसके बाद अपने खास अंदाज में उन्होंने ये भी जोड़ दिया कि जब मैंने मोदी का सीना नापा तो 32 इंच का ही निकला।

प्रधानमंत्री मोदी के पीछे लालू जैसे हाथ धोकर पड़े थे। आगे उन्होंने कहा कि मोदी जब बनारस गए थे तो कहा कि हमें गंगा मईया ने बुलाया है। आप सभी को मालूम होगा कि गंगा मईया कब बुलाती हैं। मोदी यह भी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश ने हमें गोद ले लिया है। हम उनसे पूछते हैं कि उत्तर प्रदेश के लोग नि:संतानी हैं क्या कि आपको गोद लेंगे।

कालेधन के मुद्दे पर लालू ने तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि विदेश से कालाधन लाकर सबके खाते में 15-15 लाख डाल देंगे। सब लोगों ने खाता खोल लिया, लेकिन किसी के खाते में एक भी पैसा नहीं आया। हमसे हमारी पत्नी राबड़ी देवी ने पूछा कि क्या 15 लाख रुपया हमलोगों को भी मिलेगा। हमने कहा कि हमलोग भारत की जनसंख्या से बाहर हैं क्या कि हमें नहीं मिलेगा। हमारे घर में 15 लोगों की टीम है। 15 से हमने गुणा किया तो करोड़ों रुपए हो गए, लेकिन आज तक एक रुपया किसी के खाते में नहीं आया।

नोटबंदी पर लालू ने कहा कि भाजपा ने अपना काला धन सफेद करा लिया और आमलोगों को लाइन में लगवा दिया। कल-कारखाना और कारोबार चौपट हो गया। दो हजार रुपए ला दिए गए वो अलग, जिसे देखकर दुकानदार वैसे ही भड़क जाते हैं जैसे लाल कपड़ा देख सांड भड़क जाता है।

बकौल लालू मोदी ने देश के लोगों को झांसा दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी और उनकी पार्टी अखिलेश यादव के राज को गुंडाराज बता रहे हैं। बिहार में जब मेरी सरकार थी तो जंगलराज बोलते थे। मोदी अपनी जनसभा में बोल रहे हैं कि भाजपा की सरकार बनने जा रही है। यह कहकर लोगों को भ्रम में डाल रहे हैं। मैं आज वादा करता हूं कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार तीनों एकजुट हैं और 2019 में हम सब इन्हें मिलकर जवाब देंगे।

इतना सब बोलने के बाद जाहिर है कि लालू भाजपा की परिभाषा भी बताएंगे। सो उन्होने वो काम भी कर दिया और भाजपा को ‘भारत जलाओ पार्टी’ बताया। और लगे हाथ मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जुड़वा भाई बना दिया। मोदी को तानाशाह की संज्ञा देते हुए लालू ने कहा कि अटलजी अच्छे नेता हैं, लेकिन भाजपा के पोस्टर में एक जगह भी उनका फोटो देखने को नहीं मिल रहा।

बता दें कि लालू ने आजकल सपा और काग्रेस के समर्थन में मोर्चा खोल रखा है और इन दिनों उत्तर प्रदेश में एक बाद एक चुनावी सभा कर रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं कि इन सभाओं में उनकी जुबान कितनी बार फिसली है। सच तो यह है कि ये ‘फिसलन’ ही आज की राजनीति का ‘ट्रेडमार्क’ बन गई है। और जब ‘कुएं’ में ही ‘भांग’ पड़ी हो तो आप कर भी क्या सकते हैं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप      

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महाशिवरात्रि शिव के ‘दिव्य अंतरण’ का उद्घाटन है

इस धरती पर जहाँ जीव होगा वहाँ शिव होगा। क्योंकि सारी शक्तियों का स्रोत है शिव। योग का जनक है शिव। निर्विकार एवं निर्विचार योगी है शिव।

उसी कल्याणकारी शिव की नगरी सिंहेश्वर स्थान में इस महाशिवरात्रि के अवसर पर जिला प्रशासन की देखरेख में एक माह तक चलने वाला, सोनपुर के बाद बिहार का दूसरा सबसे बड़ा मेला, शुक्रवार से शुरू हो गया, जिसके उद्घाटन कार्यक्रम की शुरुआत सिंहेश्वर विधानसभा के माननीय विधायक तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के माननीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव ने ‘धन्यवाद गेट’ पर डीएम मो. सोहैल, एसपी विकास कुमार, एएसपी राजेश कुमार, एसडीएम संजय कुमार निराला एवं समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित सिंहेश्वर के गणमान्यों की उपस्थिति में रिबन काटकर की।

तत्पश्चात् इन्हीं गणमान्यों की उपस्थिति में शिवभक्तों की भारी भीड़ के बीच और डायनेमिक डीएम मो. सोहैल की अध्यक्षता में भव्य मंच से मेला का विधिवत् शुभारंभ माननीय विधायक प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव, डीएम, एसपी, एएसपी, एसडीएम सहित मंदिर न्यास समिति के सचिव डीडीसी मिथिलेश कुमार व सदस्यगण डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी, सरोज सिंह, कन्हैया ठाकुर, मुन्ना ठाकुर आदि द्वारा सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

Dr. Bhupendra Narayan Madhepuri along with MLA Dr. Ramesh Rishideo & DM Md.Sohail inaugurating Agriculture Stall at Singheshwar Mela.
Dr. Bhupendra Narayan Madhepuri along with MLA Dr. Ramesh Rishideo & DM Md.Sohail inaugurating Agriculture Stall at Singheshwar Mela.

उद्घाटन भाषण में माननीय विधायक प्रो. (डॉ.) रमेश ऋषिदेव ने कहा कि ऋष्य श्रृंग की पावन भूमि पर आयोजित इस मेले की बड़ी महत्ता है। उन्होंने कहा कि मेला का उद्घाटन माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा होना था परन्तु अपरिहार्य कारणवश वे नहीं आ सके। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को नाम के साथ संबोधित करते हुए अनुरोध किया कि बाहर के जिले और नेपाल आदि से आए हुए श्रद्धालुओं का अतिथियों की तरह स्वागत करें, सम्मान करें। सिंहेश्वर स्थान को पर्यटन के मानचित्र पर ऊँचाई प्रदान करने वाली नीतीश सरकार की उपलब्धियों को विधान परिषद् चुनाव की आचार संहिता के कारण वे चाहकर भी नहीं गिना पाए। उन्होंने केवल इतना ही कहा कि इस पावन धरती को उच्च स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए नीतीश सरकार गंभीर है।

यह भी बता दें कि अध्यक्षता कर रहे डायनेमिक डीएम मो. सोहैल ने अपने संबोधन से पूर्व समस्त श्रद्धालुओं के साथ देवाधिदेव महादेव का जयकारा लगाया। उन्होंने लोगों से शांति और सद्भाव के साथ मेले में शामिल होने की अपील की। डीएम ने सांकेतिक रूप से इशारे में कहा कि मंदिर जीर्णोद्धार एवं अन्य कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा। डीएम मो. सोहैल (भा.प्र.से.) ने शिव के प्रति श्रद्धा निवेदित करते हुए कहा कि यहाँ भी सावन में देवघर की तरह एक महीने का मेला लगेगा।

इस अवसर पर अनुभवी एसपी विकास कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल जो खामियां रह गई थीं, उन्हें दूर करते हुए इस बार के इस महामेला में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक तैयारी कर ली गई है। जहाँ एसपी द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई वहीं एसडीएम संजय कुमार निराला ने कहा कि मेला में किसी प्रकार का अश्लील प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए समारोह की शुरुआत में डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने ऋष्य श्रृंग की इस पावन तपोभूमि को नमन किया और फिर उपस्थित तमाम श्रद्धालुओं का किया अभिनन्दन और हृदय से वंदन। डॉ. मधेपुरी ने रामायण काल एवं महाभारत काल की चर्चा करते हुए कहा कि आज ही के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था जिसे उत्सव के रूप में हजारों हजार श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिवर्ष मनोरम झांकियों द्वारा सम्पन्न किया जाता है। उन्होंने कहा कि तपोभूमि सिंहेश्वर की पावन माटी समस्त श्रद्धालुओं को ‘शिवमय’ होने की प्रेरणा देती है। देहधारी होते हुए विदेह भाव से रहना ही तो ‘शिवत्व’ को पाना है।

अंत में मंच संचालन करते हुए डीडीसी ने मेले की सफलता के लिए स्थानीय लोगों से सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया तथा माननीय विधायक सहित प्रशासन एवं ट्रस्ट की टीम को विभिन्न सरकारी व गैर सरकारी स्टालों सहित जयकृष्ण यादव, स्काउट गाईड आयुक्त द्वारा आयोजित शिविर का उद्घाटन करने हेतु अनुरोध किया। एसडीएम संजय कुमार निराला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

शुरू से अंत तक समारोह को सफल बनाने में सहयोग देते रहे बीडीओ अजीत कुमार, सीओ जेके सिंह, जदयू नेता भुवनेश्वरी प्रसाद यादव, प्रखंड जदयू अध्यक्ष हरेन्द्र मंडल, व्यापार संघ के अध्यक्ष अशोक भगत, मुखिया प्रतिनिधि राजेश रंजन, प्रखंड प्रतिनिधि जयप्रकाश यादव, हरि प्रसाद टेकरीवाल, विश्वनाथ प्राणसुखका, उपप्रमुख कृष्ण यादव, दिनेश सिंह, विजय सिंह, प्रमोद चौधरी, प्रकाशचन्द्र जायसवाल, शंभू मंडल, दीपक यादव, अशोक गुप्ता, प्रभाष मल्लिक, मुकेश यादव, राजीव कुमार बबलू, पंकज भगत आदि।

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महाशिवरात्रि के दिन हर शिवलिंग में मौजूद होते हैं शिव

आज हर शिवालय में शिवभक्तों की कतार लगी है। हर गांव, हर गली, हर नगर, हर डगर धूम है तो बस देवाधिदेव महादेव की। उत्तर प्रदेश में शिव की नगरी काशी हो या उत्तराखंड में उनकी जटा से निकली गंगा की धरती हरिद्वार, मध्यप्रदेश का उज्जैन हो या गुजरात का सोमनाथ, झारखंड का देवघर हो या बिहार का सिंहेश्वर या फिर पड़ोसी देश नेपाल का विश्वप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर… हर जगह आस्था की अजस्त्र लहरें कलकल-छलछल करती देखी जा सकती है। और ऐसा हो भी क्यों न! महाशिवरात्रि का महत्व ही कुछ ऐसा है। आज ही के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। कहते हैं कि फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानि फरवरी-मार्च के महीने में पड़ने वाले इस त्योहार के दिन भगवान शिव का अंश प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहता है।

शिवपुराण के अनुसार सृष्टि के निर्माण के समय महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में शिव अपने रुद्र रूप में प्रकट हुए थे। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि में चन्द्रमा सूर्य के समीप होता है। इसी समय जीवनरूपी चन्द्रमा का मिलन शिवरूपी सूर्य के साथ होता है। अत: महाशिवरात्रि परमात्मा शिव के दिव्य ‘अवतरण’ की रात्रि है। देखा जाय तो यह त्योहार सम्पूर्ण सृष्टि को उनके निराकार से साकार रूप में आने की मंगल सूचना है। महाशिवरात्रि के दिन ग्रहों की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है।

कहने की जरूरत नहीं कि शिव इस सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं। योग परम्परा में वे दुनिया के पहले गुरु माने जाते हैं जिनसे ज्ञान की उत्पत्ति हुई थी। इस मार्ग पर चलने वाले उनकी पूजा ईश्वर के रूप में नहीं बल्कि उन्हें आदिगुरु मानकर करते हैं। इतनी विशाल हैं इस ‘कैलाशवासी’ की बांहें कि उनमें सुर ही नहीं असुर भी समा जाएं। उदार इतने कि बेलपत्र और भांग-धतूरा चढ़ाकर जो चाहे मांग लो। देखा जाय तो एकमात्र शिव हैं जो सच्चे अर्थों में आपकी श्रद्धा देखते हैं केवल। आज भी संसार के हर मंदिर में उनकी पूजा, उनके भोग और उनके श्रृंगार में केवल प्रकृति-प्रदत्त और घर में सहज उपलब्ध चीजें ही चढ़ती हैं। फल न हो न सही, साग-सब्जी ही चढ़ा दो, दूध-दही-मधु न सही, लोटा भर जल ही उड़ेल दो।

शिव यूं ही नहीं हैं देवों के देव। ‘महादेव’ होने के लिए गले में विषधर और कंठ में सारे जगत का विष धारण करने की सामर्थ्य होनी चाहिए। व्यक्तित्व आपका ऐसा हो कि ‘सत्यं-शिवं-सुन्दरं’ को परिभाषा मिल जाए, हर दिशा से ठुकराए हुए को जीने की आशा मिल जाए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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राबड़ी ने कहा, जनता की इच्छा है कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बने

लीजिए, अभी ये चर्चा थमी भी नहीं थी कि लालू को पहले अपने बेटों को और ‘परिपरक्व’ होने देना चाहिए था और तब उन्हें उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री जैसा पद सौंपना चाहिए था कि अब उनके छोटे साहबजादे तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठाई (या उठवाई) जा रही है। अरे भाई, ये राजनीति की ‘पाठशाला’ है, पढ़ने बैठो तो पूरी उम्र भी कम है और ये ‘पाठशाला’ देने बैठे तो महज कुछ पाठ पढ़कर सारी डिग्रियां ले लो!

बहरहाल, इधर हाल ही में आरजेडी के कई विधायकों और कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की ताजपोशी की तर्ज पर बिहार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। हालांकि बाद में तेजस्वी ने समझदारी दिखाते हुए यह कहकर इससे किनारा कर लिया था कि अभी महागठबंधन की सरकार ठीक ढंग से चल रही है और मुख्यमंत्री पद के लिए कोई ‘वैकेंसी’ नहीं है। पर अब तेजस्वी की मां और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने विधायकों की इस ‘मांग’ का समर्थन कर मामले को नई हवा दे दी है।

दरअसल गुरुवार को बिहार विधानसभा के बजट सत्र का पहला दिन था और राबड़ी विधानसभा परिसर में पत्रकारों से मुखातिब थीं। पत्रकार उनसे पूछ बैठे कि आरजेडी विधायकों और कार्यकर्ताओं की मांग पर उनकी क्या राय है? इस पर राबड़ी ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायकों की मांग सही है। लोकतंत्र में जनता मालिक होती है। जनता की यह इच्छा है कि तेजस्वी बिहार का मुख्यमंत्री बने। जो जनता चाहती है, वही होना चाहिए।

राबड़ी के इस बयान पर जेडीयू के महासचिव श्याम रजक ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की सबको स्वतंत्रता है। महागठबंधन के सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं। वहीं, कांग्रेस ने इसे आरजेडी का अंदरूनी मामला बताया। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मुद्दे पर अपने विधायकों को चुप रहने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि विधायक कोई ऐसी बात न बोलें जिससे महागठबंधन की सेहत पर असर पड़े। वैसे नीतीश को जानने वालों को यह अच्छी तरह पता है कि नीतीश ऐसी बातों पर अनावश्यक अपनी ऊर्जा खपाने की जगह मौके पर चौका मारने में कैसी महारत रखते हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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साहित्य आन्दोलन खड़ा करेगा पिछड़ा वर्ग……!!

वैचारिक धरातल को मजबूत करने तथा सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए पिछड़ा वर्ग साहित्यिक आंदोलन खड़ा करेगा | भला क्यों नहीं, कभी साहित्यकारों द्वारा यह कहा जाता था कि साहित्य समाज का दर्पण है वहीं अब कुछ गंभीर साहित्यकारों द्वारा यह कहा जाने लगा कि साहित्य समाज का दर्पण नहीं, धड़कन है |

इसे महसूसते हुए डॉ.मधेपुरी मार्ग पर अवस्थित भारतीय जनलेखक संघ के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अपने उद्घाटन भाषण में प्राचार्य प्रो.श्यामल किशोर यादव ने कहा कि आज समाज को ऐसे लेखकों, रचनाकारों एवं विचारकों की आवश्यकता है जो सामाजिक असमानता के विरुद्ध रचना कर सके |

Special Guest Prof.(Dr.) R.K.P. Raman & Dr.Gajendra Nr.Yadav, Chief Guest Dr.Madhepuri, Udghatankarta Prof. S.K. Yadav, Prashikashak Er.Harishchandra Mandal & Rastriya Mahasachiv M.N.Pankaj attending Prashikshan Shivir of Bhartiya Jan Lekhak Sangh Central Office located at Dr.Madhepuri Marg, Madhepura.
From L to R :- Special Guest Prof.(Dr.) R.K.P. Raman & Dr.Gajendra Nr.Yadav, Chief Guest Dr.Madhepuri, Udghatankarta Prof. S.K. Yadav, Prashikashak Er.Harishchandra Mandal & Rashtriya Mahasachiv M.N.Pankaj attending Prashikshan Shivir of Bhartiya Jan Lekhak Sangh Central Office located at Dr.Madhepuri Marg, Madhepura.

मुख्य अतिथि डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्यिक आंदोलन खड़ा करने के लिए साहित्यकारों की संख्या में वृद्धि करने की आवश्यकता है | मौके पर डॉ.मधेपुरी ने युवा साहित्यकारों से आह्वान किया कि कथाकार महेन्द्र नारायण पंकज द्वारा चलाये गये इस अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दें तथा इसे सफल बनाने में सहयोग करते रहें | उन्होंने इस धरती के साहित्यकारों के कार्यों को याद करते हुए कहा कि- अपने अतीत को याद किये बगैर ना तो हम अपने भविष्य को गढ़ सकते हैं और ना हीं वर्तमान में एक कदम आगे बढ़ सकते हैं |

इस अवसर पर जहां डॉ.आर.के.पी. रमण, डॉ.सीताराम शर्मा व डॉ.आलोक कुमार ने सामाजिक परिवर्तन के लिए लेखनी को मजबूत बनाने की बातें कही वहीं साहित्यकार-कुलानुशासक डॉ.विश्वनाथ विवेका ने कहा कि पिछड़ा वर्ग तभी आगे बढ़ सकता है जब वह पुस्तक एवं पुस्तकालय से संबंध बनावे और ज्ञानार्जन करे |

प्रशिक्षक के रूप में जहां ई.हरीशचंद्र मंडल ने विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए भारतीय जन लेखक संघ की स्थापना के लक्ष्य एवं उद्देश्य की चर्चा की वहीं भारतीय जन लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक-साहित्यकार महेन्द्र नारायण पंकज ने अपने संबोधन में विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में जो दबा-कुचला और पिछड़ा है वही अपना हक पाने के लिए साहित्यिक आंदोलन खड़ा करेगा तथा जन आंदोलन के माध्यम से अपना अधिकार प्राप्त करेगा |

कार्यक्रम को सरस बनाने के लिए जहां सुकवि राकेश द्विजराज एवं प्रो.भूपेन्द्र भूप आदि ने व्यंग्यात्मक काव्य पाठ किया वहीं डॉ. अरुण कुमार साह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की | जिला सचिव डॉ.गजेन्द्र कुमार ने मंच संचालन किया और डॉ.सुरेश ने यह गीत गा-गाकर कार्यक्रम को जानदार बनाया- हम होंगे कामयाब… एक दिन…!!

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तो मुसलमान मोदी के कारण अधिक बच्चे पैदा करते हैं!

अब जबकि यूपी चुनाव अपने चरम पर है, छोटे-बड़े सारे नेता अपनी जुबान पर नियंत्रण खोते दिख रहे हैं। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भाषणों में भी इन दिनों ‘हल्कापन’ आ गया है। कई अवसरों पर उनकी भाषा में भी अपेक्षित गरिमा का अभाव दिख जाता है। ऐसे में सपा नेता आजम खान के तो कहने ही क्या। विवादास्पद भाषणों और बयानों से तो उनका चोली-दामन का साथ रहा है। अब बीते शुक्रवार का ही वाकया लीजिए, सपा के इस कद्दावर नेता ने हजारों की भीड़ में कुछ ऐसा कह दिया जो न केवल हमें चौंकाता है बल्कि राजनीति में ‘विवेक’ और ‘मर्यादा’ के गिरते स्तर को लेकर चिंतित भी करता है।

हुआ यूं कि यूपी चुनावों के मद्देनज़र इलाहाबाद में रैली कर रहे आजम खान मुसलमानों की बदहाली पर बात करते हुए बोल पड़े कि मुसलमान ज्यादा बच्चे इसलिए पैदा करते हैं क्योंकि उनके पास करने को कोई और काम ही नहीं है। मुसलमानों की बेरोजगारी पर ‘फिक्रमंद’ आजम का कहना था कि बादशाह (मोदी) अगर काम देता तो मुसलमान कम बच्चे पैदा करता। हमारे यहां (मुसलमानों की) आबादी ज्यादा हो जाती है और काम कम है, इसलिए बच्चे ज्यादा पैदा हो जाते हैं। मुसलमान खाली बैठेगा तो बच्चे ही पैदा करेगा। हिन्दू ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करते हैं क्योंकि उनके पास रोजगार है।

आजम खान यहीं नहीं रुके। मोदी पर तंज कसने पर आमादा आजम ने आगे कहा कि अपने दो साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ने 80 करोड़ रुपए के कपड़े पहने। वह खुद को फकीर कहते हैं लेकिन फकीर इतने महंगे कपड़े नहीं पहनता। जिस देश का प्रधानमंत्री इतने महंगे कपड़े पहनेगा वह देश कैसा होगा।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 15 लाख वाले बयान को जुमला बताने पर निशाना साधते हुए आजम खान ने कहा कि बादशाह ने हसीन ख्वाब दिखाया, लफ्फाजी की और बड़े सिर वाले (अमित शाह) ने कहा कि बादशाह ने मजाक किया था। यही नहीं, आजम ने लगे हाथ दावा भी किया कि एक बार हमें गद्दी देकर देखो, हम सबको 15 की जगह 25-25 लाख रुपए देंगे। देश आज भी सोने की चिड़िया है, यहाँ पैसे की कमी नहीं है। 25-25 लाख देकर भी देश सोने की चिड़िया बना रहेगा।

अब भला ये आजम खान से कौन पूछे कि 25-25 लाख वो किस ‘खजाने’ से देंगे? मोदी ने 80 करोड़ के कपड़े पहने, ये हिसाब उन्हें किसने बताया? और, ये भी कि क्या मुसलमानों की आबादी मौजूदा बादशाह (मोदी) के महज दो साल में ही इस कदर बेलगाम हो गई? आजमजी, मुसलमानों का नेता होना अच्छी बात है। आप मोदी को नापसंद करते हैं, जरूर करें, किसी को अधिकार नहीं कि आपको ऐसा करने से रोके। आप मुसलमानों के लिए फिक्रमंद हैं, इसमें भी कोई दो राय नहीं। लेकिन भोले-भाले लोगों को बरगलाएं नहीं। किसी का विरोध करना हो तो करें, लेकिन तर्क पर तौलकर। विवेक और मर्यादा को ताक पर रखकर नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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और सफलतम कप्तान से छीन ली गई आईपीएल की कप्तानी

सितारा चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, वक्त के साथ ढलता है। अब महेन्द्र सिंह धोनी को ही देखिए। पूरी दुनिया उनकी कप्तानी का लोहा मानती है। उनकी गिनती न केवल भारत के बल्कि दुनिया के सफलतम कप्तानों में होती है। विराट की सेना आज टेस्ट, वनडे और टी-20 में जिस विजय-रथ पर सवार है उसके ‘पहिए’ धोनी ने तैयार किए थे, इसमें कोई दो राय नहीं। पर अब वही धोनी क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में बतौर कप्तान नहीं खेल रहे होंगे। जी हाँ, आईपीएल टीम राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के कप्तान के तौर पर भी नहीं।

अगर धोनी ने भारतीय टीम की तरह इस आईपीएल टीम की कप्तानी भी छोड़ दी होती तो एक बात थी, हद तो यह है कि उन्हें टीम की कप्तानी से हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि पुणे टीम का मैनेजमेंट पिछले सीजन में उनकी कप्तानी से खासा नाखुश था। इसीलिए इस सीजन के ऑक्शन से पहले बतौर कप्तान उन्हें हटाने का बड़ा निर्णय लिया गया।

वैसे आईपीएल की ही बात करें तो धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपरकिंग्स का सुनहरा सफर कौन भूल सकता है? लेकिन पिछले सीजन में आईपीएल की तस्वीर बदली और चेन्नई सुपरकिंग्स की जगह नई टीम राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स की कप्तानी उन्हें मिली। ये वो दौर था जब धोनी अपने ‘रंग’ में नहीं थे और ज्यादातर मौकों पर उनकी कप्तानी ‘क्लिक’ नहीं हो पा रही थी। नतीजा यह हुआ कि 2016 में धोनी की मौजूदगी के बावजूद पुणे को 14 में से 9 मैचों में हार मिली। हालांकि ऐसा दौर हर खेल में और हर बड़े खिलाड़ी के करियर में आता है लेकिन अब जबकि ‘बाज़ार’ खेल को नियंत्रित कर रहा है, आपको दूसरा मौका नहीं मिलता। आप चाहे धोनी ही क्यों न हों। इस बाज़ार में प्रासंगिक बने रहने के लिए हर दिन परफॉर्म करना आपकी ‘मजबूरी’ होती है।

बहरहाल, धोनी की जगह पुणे की कमान ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ को दी गई है, जिन्हें 2014-15 में ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम की कप्तानी मिली थी। धोनी का स्थान लेने के बाद अब इस सीजन में उन पर अच्छा प्रदर्शन करने का अतिरिक्त दबाव होगा। स्पष्ट कर दें कि धोनी टीम का हिस्सा पूर्ववत बने रहेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कोई अखिलेश को ‘सौतेला’ न कहे!

यूपी की चुनाव-प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अबतक चैनलों के प्राइम टाइम और अखबारों की सुर्खियों में जिस मामले को सबसे अधिक जगह मिली वो है समाजवादी पार्टी में चल रहा परिवार का ‘दंगल’। कभी शिवपाल-अखिलेश की तनातनी, कभी मुलायम-अखिलेश का मतभेद, कभी इन सबमें ‘चाणक्य’ रामगोपाल की भूमिका तो कभी सारी लड़ाई के मूल में मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता का हाथ बताया जाना – जैसे मीडिया को और कोई काम ही न रह गया हो। वैसे देखा जाय तो सपाइयों की इस अन्दुरूनी लड़ाई से अखिलेश को नुकसान कम और लाभ ज्यादा मिला। उन्हें न केवल पार्टी के भीतर और बाहर की सहानुभूति मिली बल्कि सारे घटनाक्रम से दिनोंदिन उनके कद में इजाफा भी होता गया और अंतत: वो सपा के नए ‘सर्वेसर्वा’ के तौर पर सामने आए।

बहरहाल, आज की तारीख में यूपी चुनाव अपने परवान पर है। पहले दो दौर का चुनाव होते-होते और तीसरे दौर का मतदान आते-आते इस चुनाव में भाग्य आजमा रहे सत्तासीन यादव परिवार के सारे सदस्य ये अच्छी तरह समझ चुके थे कि उनकी चुनावी वैतरणी के लिए अखिलेश की पतवार किस कदर जरूरी है। तभी तो तीसरे दौर के मतदान में सारे लोगों की ‘भाषा’ से लेकर संबंधों की ‘परिभाषा’ तक ‘फील गुड’ वाली थी।

गौरतलब है कि तीसरे दौर की वोटिंग के दौरान रविवार को यादव परिवार ने अपने गढ़ सैफई में पूरी एकजुटता दिखाने की कोशिश की। वोट डालने आए पार्टी के संस्थापक और अब मार्गदर्शक की भूमिका में आ चुके मुलायम ने अपनी सारी ‘नाराजगी’ ताक पर रखते हुए बकायदा राज्य में सपा की सरकार बनने का दावा किया और खुलकर कहा कि अखिलेश यादव राज्य के सीएम होंगे। हां, अपने भ्रातृप्रेम को भी वे नहीं भूले और साथ में ये भी जोड़ दिया कि शिवपाल यादव मंत्री होंगे। मुलायम के साथ उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता (अब यादव) और छोटी बहू अपर्णा यादव भी थीं। अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव इससे पहले अलग-अलग वोट डाल चुके थे।

मजे की बात देखिए कि अखिलेश जहाँ तमाम अटकलों के बावजूद चाचा शिवपाल के लिए अपना वोट डालने आए, वहीं शिवपाल ने भी पार्टी और परिवार में किसी प्रकार की कलह से इनकार करते हुए जोर देकर राज्य में सपा की सरकार बनने की बात कही। रामगोपाल ने तो खैर 300 सीटों का दावा किया ही। साथ में ये दोहराना भी नहीं भूले कि परिवार में कोई अंदरूनी कलह नहीं है।

सबसे दिलचस्प वाकया मुलायम की दूसरी पत्नी साधना यादव का रहा। मुलायम के साथ आईं साधना ने न केवल परिवार में कलह की ख़बरों का खंडन किया बल्कि चार कदम आगे जाकर अखिलेश और प्रतीक को अपनी ‘दो आँखें’ बताईं। उन्होंने कहा – “कोई अखिलेश को सौतेला बोलता है तो मुझे बुरा लगता है। हमलोगों में कोई सौतेलापन नहीं है। हमने अखिलेश की शादी कराई, उसके बच्चे हैं, हमारी बहू है। अखिलेश हमारा बड़ा बेटा है।” वहीं चुनाव लड़ रहीं मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भी राज्य में पार्टी की जीत का दावा किया और कहा – “कलह की बात लोगों को कहने दीजिए। हम राज्य में सरकार बनाने जा रहे हैं। माहौल शानदार है।”

काश कि सबके ऐसे ही बोल चुनाव से पहले भी होते! तब शायद सत्ता के आईने में संवेदना और संबंध नंगे नहीं होते और एक परिवार अपवाद के तौर पर सामने आ पाता!

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

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