मदन मोहन झा का सपना: कलक्टर और ड्राइवर की बेटी का एक साथ पढ़ना

बिहार राज्य के मानव संसाधन विकास विभाग के तत्कालीन आयुक्त सह सचिव मदन मोहन झा के 7 सितंबर, 2007 को हुए आकस्मिक निधन पर सारा बिहार ठहर सा गया था | सूबे बिहार के समाहरणालय से लेकर सभी शिक्षण संस्थान भी पल भर में ही शोक में डूब गया | चारों ओर श्रद्धांजलियां व शोक सभाएं ! सारा बिहार गूंज उठा- हे ईश्वर ! बिहार के शिक्षा सुधार में लगे इस क्रांतिदूत का अचानक यह कैसा महाप्रयाण ! चल पड़े कोटि पग उसी ओर | उनकी आत्मा की शांति के लिए ना जाने कितने करोड़ हाथों ने दुआएं मांगी थी |

और आज यह भी जानें कि 9 साल बीत जाने के बाद यानि 7 सितंबर, 2016 को श्री झा की 9वीं पुण्य तिथि के अवसर पर राजधानी के ए.एन.सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान में विधान पार्षद डॉ.केदार पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित व्याख्यान माला का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया जिसमें सूबे के मुख्यमंत्री ने मदन मोहन झा द्वारा किये गये कार्यों को याद किया |

मौके पर मुख्य वक्ता प्राध्यापिका मनीषा प्रियम ने कहा कि मदन जी स्कूली शिक्षा की बेहतरी के लिए अहर्निश सोचा करते, चिंतन किया करते | उनकी पुत्री निहारिका झा ने मौके पर यही कहा –

“पापा हमेशा यही कहा करते थे कि मैं बिहार में वह दिन देखना चाहता हूं, जब किसी कलक्टर और उसके ड्राइवर की बेटी एक ही विद्यालय में पढ़े क्योंकि सभी बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है |”

यह भी जानें कि जहां राजधानी में उनकी 9 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति बी.एन.सिन्हा, श्रीमती निशा झा, मनीष कुमार वर्मा आदि गणमान्यों ने श्री झा को भावभिनी श्रद्धांजलि दी वहीं मधेपुरा के ‘वृंदावन’ में समाजसेवी शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने बच्चों के बीच श्री मदन मोहन झा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शिक्षा के उन्नयन के क्षेत्र में मदन बाबू हमेशा क्रांतिदूत के रुप में सदा याद किये जाएंगे क्योंकि सत्कर्म कभी मरता नहीं | वह बुद्ध की तरह ठहरा रहता है- यहीं पर कहीं……!!

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तीन सर्वे में हिलेरी, एक में ट्रंप आगे

8 नवंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए होने वाला चुनाव खासा दिलचस्प हो गया है। अब तक हिलेरी के पक्ष में एकतरफा-सा दिखने वाला मुकाबला अब कड़ा होता जा रहा है। ना केवल अलग-अलग सर्वे में अपने प्रतिदंवंद्वी ट्रंप के ऊपर दिखने वाली हिलेरी की बढ़त कम हो गई है बल्कि एक सर्वे के अनुसार तो ट्रंप हिलेरी से आगे तक निकलने में कामयाब हो गए हैं। जी हाँ, लॉस एंजिलिस टाइम्स/ यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के ताजा सर्वे में उन्हें हिलेरी पर तीन प्रतिशत की बढ़त मिली है। हालांकि तीन अन्य राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में अभी भी हिलेरी आगे चल रही हैं।

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को पीपीपी (डी) के सर्वे में पाँच, एनबीसी न्यूज सर्वे में छह और मानमाउथ यूनिवर्सिटी के सर्वे में सात प्रतिशत की बढ़त बताई गई है। सभी सर्वेक्षणों पर नजर रखने वाली रियल क्लियर पॉलिटिक्स ने उनकी औसत बढ़त नौ प्रतिशत बताई है। लेकिन ये सभी सर्वेक्षण हिलेरी की लोकप्रियता में गिरावट का भी संकेत दे रहे हैं। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में ट्रंप पर उन्हें 13 प्रतिशत की बढ़त मिली थी।

इसके बावजूद हिलेरी की जीत की संभावना प्रबल है। इसका कारण पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा, ओहायो, आयोवा, नेवादा, न्यू हेम्पशायर, मिशिगन, वर्जीनिया, जॉर्जिया और नार्थ कैरोलिना जैसे मह्तवपूर्ण राज्यों में उनकी बढ़त बरकरार रहना है। इन राज्यों में उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी पर औसत दस प्रतिशत की बढ़त प्राप्त है। वैसे तमाम ‘विरोधों’ और ‘विरोधाभासों’ के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने से लेकर अब तक ट्रंप ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली मुल्क की राजनीति में जिस तरह अपनी जगह बनाई है और देश-विदेश में जितनी चर्चा पाई है उससे उनके कटु आलोचक भी हतप्रभ हैं और ये कतई छोटी बात नहीं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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शिक्षक दिवस पर गूंज उठा 5 सितंबर

चाहे जिले के किसी कोने का प्राईवेट चिल्ड्रेन स्कूल हो या सरकारी प्राथमिक – मध्य विद्यालय, या फिर उत्क्रमित +2 विद्यालय ही क्यों ना हो…… भारतीय संस्कृति के संवाहक व सर्वोत्कृष्ट दार्शनिक भारतरत्न डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन 5 सितंबर की अनुगूंज तीन सितंबर की शाम से ही गूंजने लगी |

यह बता दें कि 3 सितंबर की शाम को ही प्राइवेट स्कूल्स एण्ड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सह दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, मधेपुरा के निदेशक किशोर कुमार एवं एसोसिएशन के सचिव सह माया विद्या निकेतन, शहीद चुल्हाय मार्ग, मधेपुरा की निदेशिका चंद्रिका यादव ने जिले के लगभग 100 शिक्षकों को हरी झंडी दिखाकर ‘अमन रथ’ से पटना एस.के.मेमोरियल हॉल में 4 सितंबर को नीतीश सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ.अशोक चौधरी के द्वारा सम्मानित होने हेतु रवाना किया |

सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद एवं मुख्य अतिथि अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री प्रो.डॉ.अब्दुल गफूर की उपस्थिति में सभी जिले के शिक्षकों को मोमेंटो आदि देकर सम्मानित किया शिक्षा मंत्री डॉ.अशोक चौधरी ने | राज्य के डायनेमिक शिक्षा मंत्री डॉ.चौधरी इस परंपरा को और अधिक मजबूती प्रदान करने जा रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि दक्षिण कोरिया में शिक्षकों को वे सारे अधिकार प्राप्त हैं जो अधिकार भारत में मंत्रियों को है | और फ्रांस के न्यायालयों में केवल शिक्षकों को ही कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया गया है |

Retired H.M. & Presently Member of Syndicate ( B.N.M.U.) Sri Vidyanand Yadav honoured by Bharat Sahitya Sangam in presence of Dr.Madhepuri, Dr.Amol Ray (President) , Dr.Ashok kumar, Dr.Ram Naresh Singh & others onTeachers' Day .
Retired H.M. & Presently Member of Syndicate ( B.N.M.U.) Sri Vidyanand Yadav honoured by Bharat Sahitya Sangam in presence of Dr.Madhepuri, Dr.Amol Ray (President) , Dr.Ashok kumar, Dr.Ram Naresh Singh & others onTeachers’ Day .

जहाँ मधेपुरा के सभी शिक्षण संस्थानों में राधाकृष्णन जयंती पर दिनभर उत्सवी माहौल के बीच शिक्षकों को सम्मानित किया जाता रहा वहीं शाम में  डॉ.अमोल राय की अध्यक्षता में भारत साहित्य संगम के बैनर तले वयोवृध्द शिक्षक, सिंडिकेट सदस्य विद्यानंद यादव को अंगवस्त्रम व पाग तथा प्रशस्ति-पत्र देकर शिक्षकों व साहित्यकारों द्वारा सम्मानित किया गया |

इस अवसर पर डॉ.विनय कुमार चौधरी के एकल काव्यपाठ का उद्घाटन डॉ.मधेपुरी, डॉ.अमोल राय, डॉ.अशोक कुमार, डॉ.इंद्र नारायण यादव, प्रो.श्यामल किशोर, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, डॉ.रामनरेश सिंह, डॉ.आर.के.पी.रमण, डॉ.अरुण कुमार, डॉ.आलोक कुमार, विकास, सुभाष आदि ने   सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया |

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ग्यारह लाख नि:शक्तों को प्रतियोगिता परीक्षा शुल्क में छूट

बिहार सरकार द्वारा नि:शक्त परीक्षार्थियों को सभी प्रतियोगिता परीक्षा शुल्क में छूट दी जायेगी | निशक्तों को गैर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित शुल्क का एक चौथाई ही देना होगा |

यह भी जान लें कि बिहार सरकार ने नि:शक्त व्यक्ति अधिनियम, 1995 पारित कर उसके तहत नि:शक्त अभ्यर्थियों के परीक्षा शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया है | इस अधिनियम के तहत राज्य के 23 लाख नि:शक्तजनों में से उन्हीं 11लाख नि:शक्तजनों को परीक्षा शुल्क में छूट मिलेगी जिन्हें राज्य सरकार की ओर से नि:शक्तता प्रमाण-पत्र प्रदान किया जा चुका है |

बता दें कि नि:शक्तता प्रमाण-पत्र चाहने वाले नि:शक्तजन सरकार के समाज कल्याण विभाग के नि:शक्तता निदेशालय द्वारा चलाये जा रहे शिविर में जाकर अथवा सरकारी अस्पतालों की अधिकृत चिकित्सकों से संपर्क कर ‘नि:शक्तता प्रमाण-पत्र’ अभी भी प्राप्त कर सकते हैं |

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मधेपुरा कॉलेज में भव्य शिक्षक दिवस सह सम्मान समारोह

कॉलेज, कौशल्या ग्राम के विशाल सभा भवन में डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन ( 5 सितंबर ) पर प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार की अध्यक्षता में “शिक्षक दिवस सह शिक्षक सम्मान दिवस” समारोह का भव्य आयोजन किया गया | समारोह के उद्घाटनकर्ता थे भौतिकी के विद्वान, साहित्यकार व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, मुख्य अतिथि टी.पी. कॉलेज में राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष रहे डॉ.के.एन.ठाकुर, विशिष्ट अतिथि पूर्व प्राचार्य डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, पीजी मैथिली के विभागाध्यक्ष सह भारत सरकार के हैवी इंडस्ट्री के निदेशक डॉ.राम नरेश सिंह सहित पूर्व सीसीडीसी डॉ.अमोल राय, डॉ. विनय कुमार चौधरी, डॉ. उदयकृष्ण, डॉ. विज्ञानानन्द सिंह आदि |
समारोह के प्रथम चरण में छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वागत गान के बाद पुष्पगुच्छ देकर अतिथियों का स्वागत किया गया | इस अवसर पर डॉ.के.एन.ठाकुर, डॉ.रामनरेश सिंह एवं डॉ.सुरेश प्रसाद यादव को पाग व अंगवस्त्रम के साथ सम्मानित किया गया |
डॉ. राधाकृष्णन की जयन्ती ‘शिक्षक दिवस’ का उद्घाटन डॉ. मधेपुरी सहित अन्य अतिथिगण द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया तथा उनके तैल चित्र पर सबों ने पुष्पांजलि किया |
उद्घाटनकर्ता डॉ. मधेपुरी ने सर्वप्रथम अपने उद्घाटन भाषण में डॉ.एस.राधाकृष्णन के साथ बिताए लम्हों की विस्तारपूर्वक चर्चाएं की | अपने संबोधन में डॉ. मधेपुरी ने कहा कि वे सर्वाधिक सौभाग्यशाली रहे हैं  जिन्हें भारत के उन महामहिम राष्ट्रपति त्रय- डॉ.राधाकृष्णन, डॉ.जाकिर हुसैन एवं डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के दिव्य दर्शन, अमरवाणी श्रवण एवं श्री गुरु चरण सरोज रज के स्पर्शन का अवसर भी परमपिता परमेश्वर ने दिया जिन्हें महामहिम राष्ट्रपति बनने से पूर्व महान शिक्षक होने के चलते ही ‘भारत रत्न’ जैसे सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया | यूं प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ.राजेंद्र प्रसाद के दर्शन-स्पर्शन के अतिरिक्त राजधानी पटना के सदाकत आश्रम से मुख्य सड़कों पर निकाली गई उनकी अंतिम यात्रा बांस घाट तक जाने और पंचतत्व में विलीन होते देखने का अवसर भी प्राप्त हुआ था |
डॉ.मधेपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात दार्शनिक, महान शिक्षाविद, उत्कृष्ट वक्ता एवं आस्थावान विचारक डॉ.राधाकृष्णन का नाम लेते ही प्रत्येक शिक्षक का सिर श्रद्धा से झुक जाता है | उन्होंने कहा कि डॉ.राधाकृष्णन दर्शनशास्त्र जैसे गंभीर विषय को भी अपनी शैली की नवीनता से इस कदर सरल और रोचक बना देते थे जिस कारण वे अपने छात्रों का स्नेह और आदर सदेव अर्जित करते रहे |
मुख्य अतिथिगण डॉ.के.एन.ठाकुर, विशिष्ट अतिथि गण डॉ.रामनरेश सिंह, डॉ.सुरेश प्र.यादव, डॉ.अमोल राय, डॉ.उदयकृष्ण, डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.विज्ञानानंद सिंह आदि ने अपने-अपने संबोधन में विस्तार से शिक्षकों की महत्ता पर प्रकाश डाला, डॉ.राधाकृष्णन के विभिन्न आयामों की चर्चाएं की तथा राष्ट्रवादी सोच की आवश्यकता पर बल दिया | साथ ही वक्ताओं ने जहाँ शिक्षक दिवस की महत्ता की चर्चाएं की वहीं कालेज के बेहतरीन प्रबंधन के लिए प्राचार्य डॉ.अशोक कुमार सहित कॉलेज कर्मियों की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की | मौके पर डॉ.मुस्ताक मोहम्मद,  डॉ.अभय कुमार, सोनम कुमारी, डॉ.भगवान कुमार, किरण कुमारी, डॉ.सिद्देश्वर काश्यप, सचिव सच्चीदानंद, ब्रजेश मंडल आदि मौजूद थे |
अंत में अध्यक्षता कर रहे प्रधानाचार्य डॉ.अशोक कुमार ने विनम्रतापूर्वक कहा कि जो कुछ सर जमीन पर देखा जा रहा है वह उनके और महाविद्यालय परिवार के समर्पण एवं प्रतिबद्धता का फल है | मंच संचालन गौतम कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अध्यक्ष के निदेशानुसार समापन की घोषणा की गई |

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तो अब एक साथ होंगे राज्य और देश के चुनाव..!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चुनाव आयोग के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने के मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी सहमति जताई है। शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में एक छात्र के सवाल के जवाब में राष्ट्रपति ने कहा कि सभी पार्टियों को इस मुद्दे पर एक साथ आना चाहिए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस साल मार्च में भाजपा नेताओं की बैठक के दौरान यह विचार सबसे पहले सामने रखा था। उन्होंने कहा था कि बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लग जाती है, जिसके चलते विकास के काम रुक जाते हैं। इसलिए पंचायत, विधानसभा और संसद के चुनाव एक साथ होने चाहिएं जिससे कि समय और पैसा बचाया जा सके।

देश के प्रथम नागरिक ने आज इस विचार को आगे बढ़ाते हुए कहा कि लगातार चुनाव होते रहने और इस दौरान आचार संहिता लागू होने से सरकार का सामान्य कामकाज रुक जाता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए राजनीतिक दलों को विचार करना होगा। लोग और राजनीतिक दल सामूहिक रूप से इस पर विचार करें तो हम आचार संहिता पर चर्चा करेंगे कि यह किस तरह की होनी चाहिए। इसमें चुनाव आयोग को भी शामिल किया जाना चाहिए।

इस संदर्भ में महामहिम ने आगे कहा कि संसदीय लोकतंत्र में अनिश्चितता रहती है। भारत में चार बार विभिन्न प्रधानमंत्रियों ने संसद को भंग करने की सिफारिश की और इसे स्वीकार किया गया। इस समस्या का समाधान करने को सभी को मिलकर विचार करना होगा।

बता दें कि चुनाव आयोग भी विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ कराने पर सहमति दे चुका है। आयोग ने कहा था कि वह दोनों चुनाव एक साथ कराने में सक्षम है। हालांकि राजनीतिक दलों का मानना है कि यह प्रस्ताव व्यावहारिक नहीं है। उनका तर्क है कि राज्यों मे अलग-अलग समय पर  चुनाव होते हैं तो उन्हें एक साथ कैसे किया जा सकता है? साथ में यह भी कि बीच में सरकार गिरने पर क्या किया जाएगा?

जाहिर है कि प्रधानमंत्री, चुनाव आयोग और अब राष्ट्रपति ने जो प्रश्न उठाया है वो कतई साधारण नहीं। राष्ट्रहित में हमें इसके लिए तैयार होना ही चाहिए, छोटी-मोटी कठिनाईयों की परवाह किए बिना।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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‘मदर’ ने पूरा किया ‘सिस्टर’ से ‘संत’ का सफर

आज सारी दुनिया एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए जीवन समर्पित करने वाली ‘भारतरत्न’ मदर टेरेसा को वेटिकन सिटी में संत की उपाधि दी गई। ईसाइयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने लगभग एक लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी में उन्हें ‘संत’ की उपाधि से नवाजा। इस दौरान पीटर्स बेसीलिका पर मदर टेरेसा की एक बड़ी तस्वीर लगाई गई थी, जिसमें वह नीचे लोगों की ओर मुस्कराती प्रतीत हो रही थीं। गौरतलब है कि मदर टेरेसा को ‘संत’ की उपाधि उनकी 19वीं पुण्यतिथि से एक दिन पहले दी गई है। अब वो ‘संत मदर टेरेसा ऑफ कोलकाता’ के नाम से जानी जाएंगी।

मदर टेरेसा ने सिस्टर से संत बनने का सफर भारत में पूरा किया था। यहीं से उनकी ममता और करुणा की ज्योति पूरे संसार में फैली। स्वाभाविक है कि इस बेहद खास मौके पर वहाँ भारत का प्रतिनिधित्व हो। लिहाजा भारत की महानतम शख्सियतों में शुमार ‘मदर’ को संत की उपाधि दिए जाने के समय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वेटिकन सिटी में मौजूद थीं। केन्द्रीय प्रतिनिधिमंडल के अलावा दिल्ली और पश्चिम बंगाल से दो राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी रोम में थे, जिनका नेतृत्व क्रमश: अरविन्द केजरीवाल और ममता बनर्जी ने किया। मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की सुपीरियर जनरल सिस्टर मेरी प्रभा के नेतृत्व में देश के विभिन्न हिस्सों से आईं लगभग 50 ननों का एक समूह भी इस समारोह के दौरान मौजूद रहा।

मेसेडोनिया की राजधानी स्कोप्ये में कोसोवर अल्बेनियाई माता-पिता के घर जन्मी मदर टेरेसा का मूल नाम गोंक्जा एग्नेस था। 1928 में महज 18 साल की उम्र में नन बनने की खातिर उन्होंने अपना घर छोड़ दिया था। घर छोड़ने के बाद वो आयरलैंड स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लेस्ड वर्जिन मेरी (सिस्टर्स ऑफ लोरेटो) के साथ जुड़ गईं। यहाँ उन्हें नया नाम मिला – सिस्टर मेरी और वो कोलकाता के लिए निकल पड़ीं। वर्ष 1931 में वो कोलकाता की लोरेटो एन्टाली कम्यूनिटी से जुड़ीं और लड़कियों के सेंट मेरी स्कूल में पढ़ाने लगीं। बाद में वो प्रिंसिपल बनीं। 1937 के बाद से उन्हें मदर टेरेसा के नाम से पुकारा जाने लगा। कहा जाता है कि 1941 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान ईश्वर ने उन्हें गरीबों के लिए काम करने को प्रेरित किया। इसके बाद वो लोरेटो से इजाजत लेकर 1948 में मेडिकल ट्रेनिंग के लिए पटना आईं।

ये कम लोगों को पता है कि मदर टेरेसा ने पटना सिटी में होली फैमिली अस्पताल में मेडिकल ट्रेनिंग ली थी। पटना में ये अस्पताल पादरी की हवेली (सेंट मेरी चर्च) से सटा है। तीन महीनों की ट्रेनिंग के दौरान मदर इस हवेली के एक छोटे से कमरे में रहती थीं। उनकी याद में इस कमरे को अब तक सहेज कर रखा गया है। कहने की जरूरत है कि मदर को संत घोषित किए जाने के बाद ये जगह किसी तीर्थ से कम नहीं होगी। बहरहाल, 1948 के बाद ही मदर टेरेसा ने मिशनरीज ऑफ चैरिटीज की स्थापना की और उसके बाद की कहानी से पूरी दुनिया वाकिफ है। 1979 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था और 1980 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ से नवाजा गया था।

मदर टेरेसा को संत की उपाधि दिए जाने के लिए जरूरी था कि वैटिकन मदर टेरेसा से मदद के लिए की गई प्रार्थनाओं के परिणामस्वरूप हुए दो चमत्कारों को मान्यता दे। इस संबंध में स्मरणीय है कि 2002 में पोप ने एक बंगाली आदिवासी मोनिका बेसरा के ट्यूमर ठीक होने को मदर का पहला चमत्कार माना था। इसके बाद 2015 में ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त एक ब्राजीलियन पुरुष के ठीक होने को उनका दूसरा चमत्कार माना गया। दूसरे चमत्कार को मान्यता मिलने के साथ ही उन्हें ‘संत’ घोषित करने का रास्ता साफ हो गया था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बी.एन.एम.यू. का हिन्दी पी.जी. सर्वाधिक जीवंत

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय परिसर स्थित पी.जी. हिन्दी विभाग में शुक्रवार को प्रधानमंत्री के ‘एक कदम स्वच्छता की ओर’ कार्यक्रम के तहत विभागाध्यक्ष डॉ. इन्द्र नारायण यादव के नेतृत्व में विभागीय छात्र-छात्राओं द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया | स्वच्छता कार्यक्रम में मुख्य रुप से विभागीय प्राध्यापक-आचार्य-प्राचार्य डॉ. विनय कुमार चौधरी, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप सहित युवा रंगकर्मी विकास कुमार, कृष्ण मुरारी, अशोक, राजेश, सियाराम, राजकिशोर, सुनीला आदि दर्जनों छात्र-छात्राएं सम्मिलित होती गयीं |
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि परिसर को स्वच्छ रखना हम सब की जिम्मेदारी है | उन्होंने कहा कि स्वच्छ शरीर में ही स्वच्छ मानसिकता का विकास होता है | इस प्रकार का स्वच्छता अभियान सभी विभागों में चलाते रहना चाहिए तथा आगे बढ़-चढ़ कर सभी लोगों को सहयोग करना चाहिए | इससे पर्यावरण की स्वच्छता कायम रखी जा सकेगी तथा हमारा शरीर स्वस्थ रहेगा | डी.डी.टी. का छिड़काव तो सावन-भादव में सोने पे सुहागा ही माना जाएगा | सफाई के बाद डी.डी.टी. का छिड़काव भी किया गया |

Dr.Sidheshwar Kashyap receiving Aarsi Rajat Smriti Samman Certificate and Momento etc.
Dr.Sidheshwar Kashyap receiving Aarsi Rajat Smriti Samman Certificate and Momento etc.

चलते चलते यह भी बता दें कि विभागीय प्राध्यापक डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप को ‘आदमखोर’ कविता संग्रह के लिए हाल ही में आरसी रजत स्मृति सम्मान से उनके रचनाशील कर्म के लिए सम्मानित किया गया है | डॉ.काश्यप ने पत्रकारिता पर भी कई पुस्तकों की रचना की है | कर्मनिष्ठ प्राध्यापक डॉ. काश्यप एवं पूर्व विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ. विनय कुमार चौधरी डी.लीट. सरीके रचनाकारों की अपनी पहचान के कारण बी.एन.एम.यू का हिन्दी विभाग अन्य स्नातकोत्तर विभागों में सर्वाधिक जीवंत माना जाने लगा है |

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दाना के कंधों पर पत्नी की लाश नहीं, समाज है हमारा

पिछले दिनों भारतीय अखबारों और टेलीविजन चैनलों ने ओडिशा के एक गरीब आदिवासी दाना मांझी की एक ऐसी तस्वीर से हमें रू-ब-रू कराया जो लम्बे समय तक मन और विवेक को सालती रहेगी। वो तस्वीर थी एक विवश और लाचार पति की जिसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि अपनी पत्नी का मृत शरीर ढोने के लिए किसी गाड़ी या ठेले तक की व्यवस्था कर सके और अस्पताल इतना संवेदनशून्य कि उसने एंबुलेंस मुहैया कराना अपना धर्म नहीं समझा। दाना मांझी के पास कोई विकल्प नहीं था सिवाय इसके कि अपनी पत्नी की लाश अपने कंधे पर उठाए लगभग बारह किलोमीटर की दूरी पैदल तय करे।

टीवी चैनलों पर दाना मांझी को एक चादर में लिपटी हुई लाश को अपने कंधे पर लेकर चलते हुए दिखाए जाने का दृश्य बेहद दर्दनाक था। पत्नी की लाश कंधे पर और साथ में चलती रोती-बिलखती बेटी… फट क्यों नहीं जाता हमारा हृदय! देश की राजधानी दिल्ली में सड़क के किनारे गैंगरेप के बाद लहूलुहान और निर्वस्त्र फेंक दी गई निर्भया हो या दाना के कंधे पर हमेशा के लिए सोई उसकी पत्नी… हमारी आत्मा मर चुकी है, क्या इसमें कोई संशय रह जाता है?

दाना की पत्नी का देहांत टीबी से हुआ था। हम अच्छी तरह जानते हैं कि टीबी आज की तारीख में असाध्य नहीं है और बहुत कम खर्च में इसका इलाज संभव है। अब जरा सोचिए भारत की उस एक तिहाई आबादी के बारे में जो गरीबी रेखा से नीचे है, समय पर टीबी का इलाज तक कराने में असमर्थ है और जिसके पास पत्नी या परिजन की लाश ढोने के लिए अपने कंधे के सिवाय कुछ भी नहीं है। गौर करने की बात यह कि इन अभागों में अधिकांश आबादी दलित और आदिवासियों की है जो देश की आबादी का एक चौथाई हिस्सा हैं।

भारत की सामाजिक व्यवस्था का सबसे मजबूत पहलू यह है कि यह एक लोकतंत्र है और इसका सबसे कमजोर पहलू यह है कि आज़ादी के इतने सालों बाद भी देश की राजनीति और संसाधन एक विशेषाधिकार प्राप्त उच्च वर्ग की गिरफ्त में है। इस वर्ग ने एक ऐसा समाज बनाया है जिसमें गरीब और कमजोर के लिए सोचने की जगह सीमित होती जा रही है। इस स्वकेन्द्रित समाज में इंसानी रिश्तों का निर्धारण बस आपसी हित, जाति और धर्म के आधार पर होता है।

इस समाज की एक बड़ी खासियत है कि यहाँ संवेदना भी ‘फैशन’ की तरह दिखाई जाती है। इस समाज में दशरथ मांझी पर फिल्म बनाई जा सकती है लेकिन फिर किसी मांझी को किसी निर्मम ‘पहाड़’ से आजीवन लड़ना ना पड़े यह सोचने की फुरसत किसी को नहीं। दशरथ की पत्नी के जीवन के रास्ते में जो ‘पहाड़’ आया था उस पहाड़ का सीना चीरने में उसने पूरी ज़िन्दगी लगा दी और ‘रास्ता’ बना दिया। पर वो रास्ता खुला भी नहीं कि बन्द हो गया। कल दशरथ था, आज दाना आ गया। पर ‘मांझी’ की कहानी वहीं की वहीं है।

दाना मांझी की पत्नी को चंद रुपयों में बचाया जा सकता था, पर समाज ने जीवन से ही नहीं, इस गरीब को मौत के बाद भी इज्जत से महरूम रखा। यह तस्वीर बहुत लम्बे समय तक मानवता की आत्मा को झकझोरती रहेगी क्योंकि दाना अपनी पत्नी की लाश नहीं भारतीय लोकतंत्र और समाज की जड़ हो चुकी संवेदना का बोझ अपने कमजोर कंधों पर उठाए हुए थे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कौशिकी के अम्बिका सभागार में तुलसी जयन्ती का भव्य आयोजन

कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन संस्थान के अम्बिका सभागार में कोसी के वरिष्ठ साहित्यकार-इतिहासकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ की अध्यक्षता में तुलसी जयन्ती का भव्य आयोजन किया गया | इस अवसर पर मुख्य अतिथि रहे पूर्व सांसद, साहित्यकार एवं संस्थापक कुलपति डॉ. रमेंद्र कुमार यादव रवि, मुख्य वक्ता योगेंद्र प्राणसुखका, नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष तथा विशिष्ट अतिथि डॉ.के.के.मंडल प्रतिकुलपति |
आरम्भ में गोस्वामी तुलसीदास के तैल चित्र पर गणमान्यों के द्वारा पुष्पांजलि की गई | श्रद्धांजलि के चन्द शब्दों के साथ अध्यक्ष श्री शलभ ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस से जो शील, शक्ति और भक्ति की पवित्र धारा निकलती है उसके सभी प्रसंगों में राम के आदर्श और मर्यादा का प्रतिबिंब दृष्टिगोचर होता है |

Mukhya Vakta Mr.Yogendra Pransukhka addressing Tulsi Jayanti Samaroh at Ambika Sabhagar in presence of Kaushiki President Mr.Shalabh, Sanrakaskha Dr.Ravi and Secretary Dr.Madhepuri and audience too.
Mukhya Vakta Mr.Yogendra Pransukhka addressing Tulsi Jayanti Samaroh at Ambika Sabhagar in presence of Kaushiki President Mr.Shalabh, Sanrakaskha Dr.Ravi and Secretary Dr.Madhepuri and audience too.

संरक्षक एवं मुख्य अतिथि डॉ.रवि के शिष्य योगेन्द्र प्राणसुखका ने इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रुप में विस्तार से अनेक प्रमुख प्रसंगों के बाबत उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि तुलसीदास तो युगद्रष्टा थे ही, साथ ही उन्होंने रामचरित मानस में सभी सम्प्रदायों के प्रति समन्वयकारी दृष्टिकोण अपनाकर समाज को एकता के सूत्र में बांधने का अद्भुत प्रयास किया | उन्होंने तुलसी के मानस में ज्ञान और भक्ति, शील और सौंदर्य, सगुण और निर्गुण आदि के अद्भुत समन्वय की तथा अद्वितीय व्यक्तित्व एवं कृतित्व के प्रसंगानुसार भूरि-भूरि प्रशंसा की | प्रतिकुलपति रह चुके श्री मंडल ने सुन्दर कांड को रामचरितमानस का सर्वश्रेष्ठ कांड साबित किया तथा मणि भूषण वर्मा ने चन्द पंक्तियों का बेजोड़ विश्लेषण किया |
अंत में संस्थान के संरक्षक डॉ.रवि ने अपने शिष्य योगेन्द्र को आशीर्वचन देते हुए यही कहा कि तुलसी ने अपने साम्यवादी दृष्टिकोण तथा विराट व्यक्तित्व के कारण धर्म, दर्शन,समाज, साहित्य के साथ-साथ लोकनीति एवं राजनीति आदि में इतनी ऊँचाई को पा लिया जिन्हें शब्दों में बांध पाना असंभव नहीं तो कठिन जरुर है | उन्होंने यह भी कहा कि तुलसी के रामचरितमानस को समाज एवं मानवता की व्याख्या कहना सर्वाधिक उचित है |
यह भी बता दें कि सम्मेलन के सचिव डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने इस अवसर पर मुख्यवक्ता सह अध्यक्ष नगर व्यापार मंडल योगेंद्र प्राणसुखका उर्फ लड्डू बाबू को कलम, अंगवस्त्रम एवं पाग देकर सम्मानित किया और कहा कि तुलसी विश्व साहित्य का अमूल्य धरोहर है | डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि तुलसी मर रही मानवता व टूट रहे समाज के लिए संजीवनी है |
समारोह के दूसरे सत्र में डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप के संयोजकत्व में तथा सुकवि परमेश्वरी प्रसाद मंडल दिवाकर, सत्यनारायण पोद्दार सत्य एवं भगवान चन्द्र विनोद की पुण्य स्मृति में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें सुकवि राकेश द्विजराज, कुमारी विजयालक्ष्मी, डॉ.आलोक डॉ.अरविंद, उल्लास मुखर्जी, संतोष सिन्हा, राजू भैया,डॉ. इन्द्र नारायण यादव, प्रो.मणिभूषण वर्मा, प्रो.ऐन.के. निराला, डॉ.अरुण कुमार फर्जी कवि, विकास कुमार, दशरथ प्रसाद सिंह आदि ने अपनी प्रतिनिधि कविताओं से दर्शकों को देर तक बांधे रखा | हास्य कवियों ने खूब हंसाया भी |
समारोह में साहित्यनुरागी रघुनाथ यादव, शिवजी साह, डॉ.हरिनंदन यादव, प्राण मोहन, उपेन्द्र प्रसाद यादव, पारो बाबू, वरुण कुमार वर्मा, मंजू कुमार सोरेन, आनंद कुमार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे | तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक एवं कौशिकी के उपसचिव श्यामल कुमार सुमित्र के स्वागत सत्कार एवं आतिथ्य के बाबत किसी तरह की कमी नहीं रहने दी गई | अन्त में सचिव ने धन्यवाद ज्ञापित किया |

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