एक दीया शहीदों के नाम

स्थानीय दैनिक जागरण के धर्मेन्द्र भारद्वाज की पूरी टीम द्वारा ‘एक दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का श्रीगणेश एक पखवारे पूर्व यहां के बुद्धिजीवियों द्वारा कराई गई | बाद में स्कूल-कॉलेज एवं सांस्कृतिक संगठनों द्वारा सर्वाधिक भावनाओं को समेटा गया |

यह भी जानिए कि दीपावली की शाम में स्थानीय भूपेन्द्र चौक स्थित प्रखर स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र नारायण मंडल के प्रतिमा-मंडप पर “वृन्दावन नर्सिंग होम” के चिकित्सक दम्पति डॉ.वरुण कुमार एवं डॉ.रश्मि भारती की पूरी टीम द्वारा परंपरागत ढंग से मनाये चले आ रहे इस ज्योतिपर्व को उड़ी के उन 17 शहीदों एवं तमाम सैनिकों के नाम दीये जलाकर सर्वाधिक प्रकाशमान कर दिया गया |

Dr.Rashmi Bharti (D/o Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri ) paying tributes to Udi Martyrs on the eve of Depawali at Madhepura , Bhupendra Narayan Mandal Chowk.
Dr.Rashmi Bharti (D/o Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri ) paying tributes to Udi Martyrs on the eve of Deepawali at Madhepura , Bhupendra Narayan Mandal Chowk.

सर्जन डॉ.वरुण कुमार सहित डॉ.रश्मि भारती एवं कर्मचारी जंगबहादुर, दिलीप कुमार, शिव किशोर, गजेंद्र, ललन यादव व प्रो. डॉ.अर्जुन कुमार आदि सभी उपस्थित जनों ने उड़ी के 17 शहीदों एवं देश के लिए लड़ रहे जवानों के नाम एक-एक दीप जलाये और कहा कि ये दीप वैसे सभी जवानों के लिए है जो अपनी जिंदगी की परवाह किये बगैर देश के लिए अपनी जान गंवा देते हैं |

यह भी कि इस अवसर पर गरीब मरीजों की जिंदगी में रंग भरने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.रश्मि भारती ने कहा कि मुसीबत के समय हमारे सैनिक भाई अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान को बचाते हैं | वे देश की रक्षा एवं हर आम व खास की सुरक्षा करते हैं | डॉ.भारती ने कहा कि उन सैनिकों के नाम जलाया गया एक-एक दीया न केवल बाहर का अंधेरा दूर करता है बल्कि हमारे मन को भी उल्लास के उजाले से भर देता है |

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हमारी दीपावली से अब सारा संसार जगमगाता है

दीपों का उत्सव, प्रकाश का पर्व, तमाम आसुरी वृत्तियों पर विजय का उद्घोष – दीपावली। ब्रह्मपुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या की इस अधेरी रात्रि में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और प्रत्येक सद्गृहस्थ के घर में विचरण करती हैं। जो घर हर प्रकार से स्वच्छ, शुद्ध, सुसज्जित और प्रकाशयुक्त होता है, वहां लक्ष्मी अंश रूप में ठहर जाती हैं। पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ दीपावली पर उनका आह्वान करें तो प्रसन्न होकर सद्गृहस्थों के घर वो स्थायी रूप से निवास करती हैं। लक्ष्मी की विशेष कृपा पाने के लिए ही व्यापारियों में आज ही के दिन बही-खाता बदलने की परंपरा है।

धर्मग्रंथों के अनुसार कार्तिक अमावस्या को भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास काटकर तथा रावण का संहार कर अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने राम के आगमन और उनके राज्यारोहण पर दीपमालाओं का महोत्सव मनाया था। अद्भुत संयोग है कि आगे चलकर इसी दिन सम्राट् विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ। बता दें कि विक्रम संवत् का आरम्भ भी इसी दिन माना जाता है। यह भी मान्यता है कि दीपावली की अमावस्या से ही पितरों की रात्रि प्रारम्भ होती है। कहीं वे मार्ग भटक न जाएं, इसलिए भी सर्वत्र दीप व आतिशबाजी के माध्यम से प्रकाश की व्यवस्था की जाती है। इस तरह कहा जा सकता है कि अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक साथ प्रकाश-पथ पर अग्रसर करने का पुनीत पर्व है दीपावली।

हमारे वेदों-उपनिषदों ने हमें ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का जो पाठ पढ़ाया उसे भारत समेत दुनिया भर में फैलाने का श्रेय दीपावली को ही जाता है। आज दीपावली केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है। इसे संसार के हर कोने में मनाया जाता है। सच तो यह है कि क्रिसमस और ईद की तरह आलोक का यह पर्व भी अब विश्वपर्व कहलाने का अधिकारी है।

दरअसल भारत से दशकों पहले (1834 से 1884 के बीच) सात समंदर पार चले गए भारतीय अपने तीज-त्योहारों को आज तक नहीं भूले। उदाहरण के तौर पर त्रिनिदाद और टोबैगो की ही बात करें। यहाँ भारतवंशियों की पहली टुकड़ी पहुँची थी। आज यहाँ की एक चौथाई आबादी हिन्दू है। दीपावली के पर्व पर यहाँ राष्ट्रीय अवकाश होता है। भारत में हमलोग भले ही मोमबत्ती को दीये के विकल्प के तौर पर अपनाने लगे हों, लेकिन इस दिन यहाँ हर घर को आप मिट्टी के दीये से ही सजा पाएंगे। इस कैरिबियाई टापू देश के पास स्थित देश गुयाना में भी आलोक के इस पर्व को बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है।

त्रिनिदाद और टोबैगो तथा गुयाना की तरह ही फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, बर्मा, बंगलादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, केन्या, तंजानिया, दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड्स, कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और यहाँ तक कि पाकिस्तान में भी दीपावली की छटा देखी जा सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी को फोन कर दीपावली की बधाई दी थी। उसके बाद हमारे प्रधानमंत्री ने कहा था कि यह जानकर अच्छा लगा कि व्हाइट हाउस में भी दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। बता दें कि वर्ष 2009 में पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर ओबामा ने व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में दीपोत्सव का परंपरागत दीया जलाया था। अब तो आलम यह है कि अमेरिका में चल रहे वर्तमान राष्ट्पति चुनाव के दोनों उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप दीपावली के पहले से ही भारतवंशियों के बीच जाकर दीये जला रहे हैं।

आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दीपावली के दिन सरकारी छुट्टी होती है, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टूडो दीपावली पर आयोजित कार्यक्रम में कुर्ता-पायजामा पहनकर पंजाबी गाने पर डांस करते हैं और हिन्दुओं को दोयम दर्जा देने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ तक इस दिन हिन्दुओं को संबोधित करते हैं। दक्षिण अफ्रीका के जोहांबर्ग के निकट लेनासिया और चैट्सवर्थ और डरबन के फोनेक्स में तो दीपावली बहुत ही भव्य तरीके से मनाई जाती है। इतना ही नहीं, पड़ोसी देश नेपाल में दीपावली का पर्व पांच दिनों तक मनाया जाता है और लक्ष्मीपूजा के दिन से ही नेपाल संवत् शुरू होता है।

सच तो यह है कि दीपावली का यह प्रसार अकारण नहीं है। दीपावली में छिपा संदेश है ही इतना व्यापक कि इसमें समूचे संसार की संवेदना समा जाय। तो आईये, इस बार हम बाकी दीयों के साथ-साथ एक दीया विश्वपर्व दीपावली के निमित्त अपने गौरव के लिए भी जलाएं। और हां, हर दीये से पहले एक दीया हमारे लिए शहीद हुए उड़ी के वीर जवानों के लिए जलाएं। ये जवान न हों तो कैसी होली, कैसी ईद, कैसी बैसाखी, कैसा क्रिसमस और कैसी दीपावली? शुभ दीपावली!

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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जरूरी है मुलायम और अखिलेश की ‘जंग’ को समझना

कहने की जरूरत नहीं कि अर्थवाद, अवसरवाद और अधिकारवाद के दौर में समाजवाद अब अन्तिम सांसें ले रहा है, लेकिन आज भी तथाकथित समाजवाद का नाम लेकर राजनीति करने वालों की बात करें तो मुलायम सिंह यादव एक बड़ा नाम है। राममनोहर लोहिया होते तो राजनीति में आ चुकी गिरावट पर अपना सिर धुनते लेकिन कुछ लोग हैं जो आज भी सीना ठोक कर उनका नाम लेते हैं और उन्हें वोट भी मिलते हैं। हां, नाम की छौंक के साथ और भी कई मसाले मिलाए जाते हैं, वो बात अलग है। जो भी हो, मुलायम समाजवादी पार्टी के संस्थापक, सर्वमान्य नेता और सर्वेसर्वा रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं। देश की राजनीति की धुरि कहलाने वाले उत्तर प्रदेश में अपने बूते उन्होंने एक नहीं कई बार सरकार बनाई है, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन ढलती उम्र में उन्होंने अपनी विरासत बेटे अखिलेश यादव को सौंपी और वक्त ने ऐसी करवट ली कि आज अपनी बनाई पार्टी में वे स्वयं ही हाशिए पर हैं। कम-से-कम समाजवादी कुनबे में कलह के बाद का सर्वे तो यही कहता है।

उत्तर प्रदेश की सत्ता के केन्द्र में बैठे यादव परिवार के हाई वोल्टेज विवाद के बाद सी वोटर द्वारा किए गए सर्वे की मानें तो लोकप्रियता के मामले में अखिलेश अपने पिता और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से आगे निकल गए हैं। 403 सीटों पर लगभग 11 हजार लोगों के बीच किए गए इस सर्वे का मकसद यह जानना था कि पार्टी में चल रहे विवाद में किस नेता को लोगों का अधिक समर्थन मिला। इस सर्वे के अनुसार यादव वोटरों में 70.3% लोग अखिलेश को नेता और मुख्यमंत्री के रूप में चाहते हैं, जबकि मुलायम को 26.1% लोगों ने अपनी पसंद माना। मुसलमानों के बीच भी कमोबेश यही स्थिति है। 75.6% मुसलमानों ने अखिलेश को अपनी पसंद कहा, जबकि इस समुदाय के 19.4% लोग अब भी मुलायम में आस्था रखते हैं। शिवपाल यादव की बात करें तो इस सर्व में वे अखिलेश के आसपास भी नहीं दिखते। सपा समर्थकों के बीच अखिलेश की लोकप्रियता 88.1 प्रतिशत जबकि शिवपाल की लोकप्रियता मात्र 4.6 प्रतिशत है।

गौर से देखें तो मुलायम और अखिलेश के बीच की जंग दो पीढ़ी, दो सोच और राजनीति की दो अलग शैली की जंग है। मुलायम उम्र के इस पड़ाव पर बदलने को तैयार नहीं और अखिलेश उनके सांचे में ढलने को तैयार नहीं। मुलायम के लिए शिवपाल यादव, अमर सिंह और आजम खान जैसे नाम आज भी जरूरी और प्रासंगिक हैं लेकिन अखिलेश इन प्रतीकों को लेकर नहीं चलना चाहते। हां, जरूरत के हिसाब से नए प्रतीक वे गढ़ जरूर रहे हैं। सहारा तो ऐसे प्रतीकों का वे भी लेंगे लेकिन अपना और अपने काम का चेहरा आगे रखकर, नए तौर-तरीकों के साथ।

यहां यह रेखांकित करना भी जरूरी है कि लाख असहमति के बावजूद अपने पिता और राजनीतिक गुरु के प्रति आज भी सार्वजनिक तौर पर असम्मान व्यक्त करने का दुस्साहस अखिलेश न तो कर रहे हैं, न कर सकते हैं और न उन्हें करना चाहिए। कारण ये कि मुलायम अपने निर्माता स्वयं हैं, जबकि अखिलेश की नींव मुलायम ने रखी थी। बदले संदर्भों और हालातों में मुलायम भले ही कमजोर दिख रहे हों लेकिन आज भी उनकी जड़ें इतनी मजबूत जरूर हैं कि अखिलेश की स्थिति आने वाले चुनाव में असहज हो जाए। अखिलेश को पता है कि चुनाव का बाज़ार चाहे जितना बदल गया हो, मुलायम नाम के सिक्के को खोटा बताकर वो खुद को ही कटघरे में खड़ा करेंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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दीपावली नहीं, धनतेरस है धन का पर्व

आज धनतेरस है – एक अनोखा पर्व जो न केवल दीपावली आने की पूर्व सूचना देता है बल्कि समृद्दि के लिए स्वास्थ्य का महत्व भी रेखांकित करता है। आम धारणा के अनुसार धन का पर्व दीपावली है, जो सही नहीं है। दीपावली तो धन के साथ-साथ अन्य सिद्धियों का दिन भी है। धन का दिन तो असल में धनतेरस है। साथ ही यह दिन औषधि और स्वास्थ्य के स्वामी धन्वंतरि का भी दिन है, जो इस बात का संदेश देता है कि धन का भोग करने के लिए लक्ष्मी की कृपा जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरत उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की होती है। बता दें कि आर्युवेद, जिसकी रचना ब्रह्मा ने की थी, को प्रकाश में लाने का श्रेय धन्वंतरि को ही जाता है और इसी पृष्ठभूमि में धनतेरस को ‘आर्युवेद दिवस’ मनाने का निर्णय केन्द्र की वर्तमान सरकार ने लिया है।

धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है। दीपावली की महानिशा से दो दिन पहले इसी खास दिन यक्ष-यक्षिणियों का जागरण होता है। यक्ष-यक्षिणी इस स्थूल जगत के उन सभी चमकीले तत्वों के नियंता कहे जाते हैं, जिन्हें दुनिया ‘दौलत’, ‘सम्पत्ति’, ‘वैभव’, ‘ऐश्वर्य’ जैसे नामों से जानती है। जानना दिलचस्प होगा कि कुबेर को यक्ष और लक्ष्मी को यक्षिणी का रूप माना जाता है। कुबेर और लक्ष्मी यक्ष-यक्षिणी के रूप में हमारे जीवन की उस ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं, जिससे हमारी जीवन-शैली निर्धारित और नियंत्रित होती है।

‘धनतेरस’ में ‘धन’ शब्द को धन-संपत्ति और धन्वंतरि दोनों से ही जोड़कर देखा जाता है। भगवान धन्वंतरि को हिन्दू धर्म में देव वैद्य का पद हासिल है। कुछ ग्रंथों में इन्हें विष्णु का अवतार भी माना गया है। मान्यता है कि समुद्र-मंथन के दौरान धन्वंतरि चांदी के कलश और शंख के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस के दिन शंख और चांदी का कोई पात्र, बर्तन या सिक्का खरीदना शुभ माना जाता है। सामर्थ्य के अनुसार कुछ लोग चांदी की जगह सोना तो कुछ लोग पीतल या स्टील की चीज खरीदते हैं, लेकिन ये रस्म लोग निभाते जरूर हैं। दीपावली के लिए इसी दिन लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा और पूजन सामग्री खरीदना भी शुभ माना गया है।

तंत्र शास्त्र में इस दिन लक्ष्मी, गणपति, विष्णु और धन्वंतरि के साथ कुबेर की साधना की जाती है। धनतेरस की रात्रि में कुबेर यंत्र, कनकधारा यंत्र, श्री यंत्र तथा लक्ष्मी स्वरूप श्री दक्षिणावर्ती शंख के पूजन को अचूक माना गया है। इस दिन अपने मस्तिष्क को स्वर्ण समझकर ध्यानस्थ होने से धन अर्जित करने की आन्तरिक क्षमता सक्रिय होती है, जो सही मायने में समृद्धि का कारक बनती है।

एक बात और, ‘धनतेरस’ में ‘धन’ से जुड़े ‘तेरस’ शब्द को लेकर एक बड़ी महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि इस दिन खरीदे गए धन, विशेषकर सोना या चांदी, में तेरह गुना वृद्धि हो जाती है। ईश्वर करे आपके धन में भी तेरह गुना की वृद्धि हो और हर धनतेरस को हो। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से इस दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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नये वर्ष में नहीं करेंगे खुले में शौच

डॉ.राम मनोहर लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत सदर प्रखंड के सुखासन पंचायत में डॉ.शांति यादव की अध्यक्षता में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें खुले में शौच से पंचायत को मुक्त करने हेतु शौचालय निर्माण कार्य का श्रीगणेश किया गया | प्रखंड समन्वयक राजेश कुमार द्वारा पंचायत में सर्वेक्षित घरों की कुल 2453 में 794 घरों में शौचालय बना हुआ है यानि 1659 घर शौचालय विहीन पाये गये |

यह भी बता दें कि कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डायनेमिक डी.एम. मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने कहा कि इस योजना के तहत जिले का हर गांव हर टोला खुले में शौचालय से शीघ्र ही मुक्त होगा | डी.एम.  मो.सोहैल ने उपस्थित जनों से कहा कि जो शौचालय नहीं बना पाये हैं वे यही मानकर चलें कि वे अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाये ! उन्होंने कहा कि रुढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए अपने-अपने घरों में जगह के अनुसार शौचालय का निर्माण अनिवार्य रूप से कराने में सहयोग करें |

यह भी जानिए कि महिलाओं की सर्वाधिक उपस्थिति वाली कार्यशाला में डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, ई.ओ. संजय कुमार, सदर बी.डी.ओ. दिवाकर कुमार, जिला समन्वयक बी.के.सिंह, जीविका प्रभारी अरुण कुमार, मनरेगा पीओ प्रमोद प्रियदर्शी, डी.आर.डी.ए. डायरेक्टर मनोज कुमार पवन, पैक्स अध्यक्ष हेमंत सिंह, सरपंच अरुण कुमार मंडल, प्रधानाध्यापक अशोक कुमार, उपमुखिया विजय महतो आदि की उपस्थिति में डी.एम. मो.सोहैल ने कहा कि संपूर्ण देश को मिथिला और कोसी ने उत्कृष्ट संस्कृति दी है और बिहार ने देश को सर्वोत्कृष्ट नेतृत्व दिया है | बावजूद इसके हमारा दुर्भाग्य है कि अभी भी हम खुले में शौच कर अनेक प्रकार की बीमारियों को आमंत्रण देते चले आ रहे हैं |

जिलाधिकारी मो.सोहैल, अध्यक्षता कर रही डॉ.शांति यादव, स्वागताध्यक्ष मुखिया कमलेश्वरी सिंह एवं अन्य पदाधिकारी सहित उपस्थित गणमान्यों ने उद्गार व्यक्त करते हुए इन्हीं बातों पर फोकस किया कि 2019 तक हर पंचायत के हर घर में शौचालय, नल का शुद्ध जल और बिजली पहुंचाने का संकल्प पूरा तभी किया जा सकेगा जब हम सभी मिलकर इस लक्ष्य को पूरा करने में पसीना बहायेंगे |

अंत में सुखासन पंचायत के वार्ड संख्या-7 की वार्ड सदस्या सारिका देवी द्वारा डी.एम.  मो.सोहैल, अध्यक्षा डॉ.शांति यादव, स्वागताध्यक्ष मुखिया कमलेश्वरी सिंह व अन्य गण्यमान्यों की उपस्थिति में शौचालय निर्माण हेतु शिलान्यास कार्य का श्रीगणेश किया गया |

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भारत लगातार तीसरी बार बना कबड्डी का विश्वचैम्पियन

भारत ने कबड्डी वर्ल्ड कप में एक बार फिर से इतिहास रचते हुए खिताब पर अपना कब्जा कायम रखा। शनिवार को अहमदाबाद के ‘द एरेना बाय ट्रांसस्टेडिया’ पर ईरान की टीम को 38-29 से रौंद कर भारत लगातार तीसरी बार विश्वचैम्पियन बना। हालांकि मैच की शुरुआत में ईरानी टीम ने भारत पर दबाव बना दिया था और मैच के दूसरे हाफ में भी वह बहुत देर तक भारत से आगे चल रही थी, पर भारत की इस जीत के नायक रहे अजय ठाकुर ने शानदार खेल दिखाते हुए न केवल मैच में भारत की वापसी कराई बल्कि जीत की यादगार हैट्रिक की मुश्किल दिख रही राह भी आसान कर दी।

सांस रोक देने वाले फाइनल मुकाबले में एक समय 19-14 से पिछड़ रही भारतीय टीम ने अजय ठाकुर की शानदार रेड के बाद वापसी की और एक ही बार में ईरान के दो खिलाड़ियों को बाहर कर दिया। इसके बाद भारत ने मैच में पकड़ बनाए रखी। एक वक्त पर 5 अंकों से पिछड़ रही टीम इंडिया ने स्कोर को 20-20 से बराबर कर दिया और ईरान की टीम को ऑल आउट कर मैच में 24-21 की बढ़त ले ली। इसके बाद भारत ने कोई गलती नहीं कि और मैच अपने नाम कर लिया। अजय ठाकुर के साथ ही प्रदीप, अनूप, सुरजीत समेत बाकी खिलाड़ियों ने भी शानदार खेल दिखाया।

जो जीता वही सिकंदर – इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन ईरान की टीम को भी दाद देनी होगी कि उसने मैच में फेवरेट मानी जा रही भारतीय टीम को कड़ी चुनौती पेश की। अपनी रेड और मजबूत डिफेंस से ईरान ने जता दिया कि इस खिताब के लिए वह सब कुछ झोंक देने के इरादे से उतरा है। पर अंत में भारतीय टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हुए विश्वविजेता का खिताब बरकरार रखा।

भारत की इस जीत ने बता दिया कि क्यों उसे कबड्डी का पर्याय माना जाता है। आज पूरा देश टीम इंडिया की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हो रहा है। पर यहाँ एक सवाल पूछने को दिल करता है कि क्या कबड्डी का विश्वविजेता कहलाना क्रिकेट या बाकी खेलों का विश्वविजेता कहलाने से कमतर है? क्या ऐसी उपलब्धियों पर होने वाली खुशियों में कोई फर्क है? अगर नहीं तो हम क्रिकेट के सामने बाकी खेलों का दर्जा दोयम क्यों कर देते हैं?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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मधेपुरा मॉडल पर ही संथालों के विकास की बनी योजनाएँ

और फिर एक बार नीतीश सरकार की नजर में डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल का ‘मधेपुरा जिला’ नंबर वन पर | आदिवासी समुदाय के लोग होंगे प्रशिक्षित और बनेंगे आत्मनिर्भर – इसे योजनाबद्ध तरीके से लागू करके संथालों के उत्थान की नजीर ‘मधेपुरा’ को बनाने हेतु जिलापदाधिकारी मो.सोहैल (भा.प्र.से) ने मुख्यमंत्री संथाल सुनिश्चित रोजगार योजना के लिए पहल की थी जिसके फलस्वरूप फिलहाल सिर्फ मधेपुरा जिले का चयन राज्य सरकार द्वारा इस योजना के निमित्त किया गया है | बहरहाल, मधेपुरा मॉडल पर ही राज्य भर में संथालों के उत्थान के लिए बन रही है योजनाएँ |

यह भी बता दें कि जिले के आदिवासी बाहुल्य मुरलीगंज प्रखंड के रजनी पंचायत में इस महत्वाकांक्षी स्वरोजगार योजना का शुभारंभ डी.एम.  मो.सोहैल एवं एसपी विकास कुमार द्वारा सम्मिलित रूप से डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार सहित प्रशासनिक टीम की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया | आगे संथालों को महुआ शराब के कारोबार की जगह दूसरे स्वरोजगार योजना से जोड़ने के लिए इस जिले में मुख्यमंत्री संथाल सुनिश्चित स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया गया और अब बिहार के अन्य आदिवासी आबादी वाले जिलों में भी शुरू कर संथालों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा | हाँ! इस योजना के तहत आदिवासी नर-नारियों को उनकी अभिरुचि के अनुसार अलग-अलग व्यवसाय हेतु प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जायेगी | साथ ही आदिवासी समुदाय की महिलाओं को खासतौर पर जीविका समूह से जोड़कर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था तथा बैंक से लोन लेने की सुविधा भी होगी | प्रशिक्षण के बाद व्यवसाय हेतु 90% तक का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा और मात्र 10% की लागत लाभुकों को देना होगा |

यह भी जानें कि प्रशिक्षण में उन आदिवासियों को गाय, बकरी, मछली, मधुमक्खी, मुर्गी पालन के साथ-साथ मोमबत्ती बनाने, डेयरी खोलने, ब्यूटी पार्लर खोलने या मशरूम की खेती, वर्मी कंपोस्ट व साईकिल मरम्मती आदि करने से भी जोड़ा जायेगा | एससी-एसटी कल्याण संघ एवं महादलित मिशन के तहत भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जायेगा | विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जायेगा जिसकी बैठक प्रतिमाह होगी | मुख्यमंत्री विकास योजना में उपलब्ध राशि से भी इस योजना में व्यय किया जा सकता है |

अंत में यह बता देना अनिवार्य है कि आदिवासियों को प्रशिक्षण देकर, बैंक से लोन एवं अनुदान दिलाकर उनके बच्चों के अच्छे भविष्य के निर्माण के लिए जो प्रस्ताव बनाकर मधेपुरा जिला के डाययेमिक डी.एम.  मो.सोहैल ने बिहार की नीतीश सरकार के पास भेजा जिसे मामूली संशोधन के साथ राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया | प्रारूप में बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजगार तक की गारंटी का विस्तार से वर्णन किया गया है |

चलते-चलते यह भी कि डी.एम.  की पूरी टीम पुनः हरिपुरकला पंचायत के तीनकोनमा गाँव पहुंचकर वहाँ भी इस योजना का उद्घाटन किया जहाँ के उत्साहित आदिवासियों ने परंपरागत संथाली नृत्य के अलावे चादर भेंट कर डी.एम.  मो.सोहैल, एस.पी. विकास कुमार एवं डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार आदि का हृदय से स्वागत किया | अन्य पदाधिकारियों में अमृत शेखर पाठक, विवेक कुमार, मनोज कुमार पोद्दार, पारस कुमार, सुशील प्रसाद, सुरेन्द्र कुमार आदि मौजूद थे |

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समाज का दर्पण नहीं, धड़कन है साहित्य !

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिन्दी के विभागाध्यक्ष डॉ.इन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया | जहां उद्घाटनकर्ता अंबेडकर विश्वविद्यालय के श्री नंदकिशोर नंदन, मुख्यवक्ता दिल्ली दूरदर्शन के निदेशक रह चुके वरिष्ठ साहित्यकार – कथाकार डॉ.गंगाधर मधुकर, झारखंड रांची से आये चन्द्रिका ठाकुर, संपादक डॉ.शिवनारायण, दूरदर्शन के पूर्व निदेशक डॉ.रमेश, कवि व आलोचक डॉ.वरुण कुमार तिवारी, वरीय कथाकार चन्द्र किशोर जायसवाल, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.रेणु सिंह आदि ने दीप प्रज्वलित कर सेमिनार का उद्घाटन किया वहीं मंडल विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ.विनय कुमार चौधरी एवं विभागीय प्राध्यापक डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप को मंच संचालन व सहयोग करते देखे गये |

इस द्विदिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में लगभग डेढ़ सौ डेलीगेट्स एवं शहर के साहित्यानुरागियों, कवि-लेखकों की अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई | समारोह की सफलता तो तब मान ली गयी जब इतनी भीड़ के बावजूद चारों ओर मरघटी सन्नाटा विराजमान देखा गया और डॉ.मधेपुरी, डॉ.नरेश कुमार (सीनेटर) सरीखे विज्ञान के अनेक शिक्षकों को भी “हिन्दी कथा साहित्य के बदलते परिदृश्य” पर राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ कथाकारों- डॉ.मधुकर गंगाधर, चन्द्रकिशोर जायसवाल, डॉ.शिवनारायण आदि द्वारा वाणी से वर्षा कर रहे सुधारस में घंटों नहाते देखा गया |

भला क्यों नहीं, जहां उद्घाटनकर्ता डॉ.नंदन ने समाज के लोगों की सोयी चेतना को जगाने हेतु विस्तार से उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि मानव जीवन के यथार्थ का चित्रण फाईव स्टार होटल में बैठकर कदापि नहीं हो सकता, वहीं मुख्यवक्ता के रुप में वरिष्ठ कथाशिल्पी डॉ.मधुकर ने बेवाकी से साहित्य सेवियों पर सतरंगे प्रहार करते हुए कहा कि हिन्दी साहित्याकाश में बिहारी साहित्यकारों की पहचान इसलिए नहीं बन पा रही है क्योंकि यहां साहित्य में खेमेबाजी, राजनीति और पालकी ढोने की प्रवृत्ति हावी हो गयी है | उन्होंने शोधार्थियों व छात्रों से कहा कि साहित्य को श्रेष्ठता प्रदान करने के लिए उसमें समाज के सच को संवेदनाओं के साथ उकेरना होगा क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण नहीं बल्कि धड़कन होता है |

यह भी बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अनूप लाल मंडल की चर्चा के साथ दु:ख व्यक्त करते हुए ख्याति प्राप्त साहित्यकार चन्द्र किशोर जायसवाल ने बदलते साहित्यिक परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए जहां यह कहा कि आज के साहित्य से किसान गायब हो गये हैं वहीं सम्पादक डॉ.शिवनारायण ने कहा कि साहित्य अंततः और तत्वत: भाषा की साधना है जबकि आज की पीढ़ी में भाषा की साधना कहीं दिखाई नहीं देती !

इस अवसर पर कथा साहित्य के सिद्ध-प्रसिद्ध व सशक्त हस्ताक्षर डॉ.वरुण कुमार तिवारी, डॉ.सुनील कुमार, डॉ.रमेश एवं डॉ.रेणु सिंह आदि ने कथा साहित्य के बदलते परिदृश्य पर अपने-अपने विचार-उद्गार व्यक्त किये | इस मौके पर विश्वविद्यालय प्रोक्टर डॉ.बी.एन.विवेका, सिंडीकेट सदस्य डॉ.जवाहर पासवान, प्राचार्य अशोक कुमार, पूर्व प्राचार्य आर.के.पी.रमण व डॉ.वीणा कुमारी, प्राचार्य अशोक कुमार आलोक व डॉ.नूतन आलोक, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.अरुण कुमार, महासचिव डॉ.अशोक कुमार, प्राचार्य डॉ.एच.एल.एस जौहरी और महासचिव मुस्टा डॉ.नरेश कुमार आदि प्रमुखरुप से उपस्थिति बनाये रखे | धन्यवाद ज्ञापन  डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप ने किया |

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अब नहीं होगी इंटर में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की बाध्यता

बिहार बोर्ड ने इंटरमीडिएट परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स की बाध्यता खत्म कर दी है। यानि अब स्ट्रीमवाइज पढ़ाई नहीं होगी, सिर्फ इंटरमीडिएट होगा। छात्र अब मनचाहा विषय लेकर इंटर कर सकेंगे और उन्हें ‘इंटरमीडिएट’ की डिग्री दी जाएगी। आईए, आईएससी और आईकॉम के संकायों में उन्हें बांटा नहीं जाएगा। यह महत्वपूर्ण फैसला शनिवार को बोर्ड की गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिया गया। अब इस आशय का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार से मंजूरी मिलते ही वर्ष 2018 से इसे लागू कर दिया जाएगा।
गौरतलब कि इंटर का नया सिलेबस 2007-09 में ही तैयार किया गया था, जिसमें पहले से ही उक्त व्यवस्था है। इस व्यवस्था को शिक्षा विभाग से अनुमोदन भी प्राप्त है, पर इसे लागू नहीं किया जा सका था। नए सिलेबस के अनुसार छात्रों को भाषा समूह से कोई दो तथा वैकल्पिक विषयों में से कोई तीन विषय रखना होगा। साथ ही एक ऐच्छिक विषय रखने की सुविधा होगी, जो अनिवार्य नहीं होगा।
बता दें कि भाषा समूह में कुल 12 भाषाएं – हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत, भोजपुरी, बांग्ला, मैथिली, मगही, अरबी, फारसी, पाली तथा प्राकृत – होंगी, जबकि वैकल्पिक विषयों की संख्या 19 होगी। ये वैकल्पिक विषय हैं – गणित, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान, रसायनशास्त्र, कम्प्यूटर साइंस, इतिहास, राजनीतिशास्त्र, भूगोल, संगीत, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, बिजनेस स्टडीज, एकाउंटेंसी, इंटरप्रेन्योरशिप, मल्टीमीडिया एवं वेब टेक्नोलॉजी तथा योग एवं शारारिक शिक्षा।
बिहार बोर्ड ने देर से ही सही लेकिन दुरुस्त निर्णय लिया है। सीबीएसई और आईसीएसई में यह व्यवस्था पहले से ही थी। आज पूरी दुनिया में इसी पैटर्न पर पढ़ाई हो रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि बोर्ड के इस बड़े बदलाव से बिहार के छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी। अब लकीर का फकीर बनने की कोई बाध्यता नहीं होगी उनके सामने। अपनी रुचि, प्रतिभा और आवश्यकता के अनुरूप वे विषयों का चयन कर सकेंगे। तेज रफ्तार ज़िन्दगी और गलाकाट प्रतियोगिता के इस दौर में उनकी क्षमता और श्रम का समुचित उपयोग होगा, ये बड़ी बात है।
‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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द्विदिवसीय बिहार कला दिवस का समापन

मौर्यकालीन ‘चामर ग्राहिणी यक्षिणी’ की कलात्मक मूर्ति की प्राप्ति के सौवें वर्ष के आरंभ यानि 18 अक्टूबर 2016 को एक दिवसीय बिहार कला दिवस के रूप में बिहार के सभी जिलों में मनाये जाने हेतु नीतीश सरकार द्वारा दिये गये निर्णय के बावजूद मधेपुरा के डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल (भा.प्र.से.) ने डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में एक आयोजन समिति का गठन कर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के चाक्षुष एवं प्रदर्श कला के विभिन्न विधाओं की वैसी छिपी प्रतिभाओं को मंच देने के लिए दो दिवसीय आयोजन करने का निश्चय किया |

जिन विधाओं में निर्णायक मंडली के सदस्यगण प्रो.रीता कुमारी, प्रो.अरुण कुमार बच्चन, प्रो.रवि रंजन, प्रो.अविनाश सहित, प्रो.दिलीप, प्रो.कन्हैया यादव आदि के द्वारा प्रतिभागियों में एक-को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया गया वे हैं-

लोकनृत्य में स्वर शोभिता संगीत महाविद्यालय की छात्रा- रुचिका सिन्हा, शास्त्रीय संगीत में कुमारी पुष्पलता, लोकगीत में तनूजा, सुगम संगीत में रौशन कुमार, तबला वादन में सूर्यवंशी, गजल में सुमन कुमार, पेंटिंग में रीना कुमारी, मूर्तिकला में अक्षय कुमार और क्राफ्ट में गोपाल नंदी जिन्हें प्रमाण-पत्र एवं मोमेंटो देकर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पुरस्कृत व सम्मानित किया जिला उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार, आयोजन समिति के सदस्य रेखा यादव, मो.शौकत अली, प्रो.प्रदीप कुमार झा, तुरबसु, प्रो.अविनाश, माया विद्या निकेतन, शहीद चुल्हाय मार्ग, मधेपुरा की निदेशिका चंद्रिका यादव, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव एवं दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल, डॉ.मधेपुरी मार्ग, मधेपुरा के निदेशक सह प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशोर कुमार आदि ने |

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं सदस्य सह उद्घोषक एवं जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा नाटक में नवाचार रंगमंडल के शहंशाह की टीम एवं सर्वधर्म समन्वय पर  रंगकर्मी विकास के निर्देशन में बेहतरीन प्रस्तुति देने के उपलक्ष्य में तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र को मोमेंटो व प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया गया | साथ ही दर्शकों की अपील पर 3 कलाकारों को विशेष रुप से पुरस्कृत किया गया- पेंटिंग में संतोष कुमार एवं आफरीन उद्दीन, चन्दा रानी (नृत्य) में | सबसे अधिक सराहना मिली- दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल के छात्रों- शिव कुमार एंड ग्रुप द्वारा तैयार किये गये मिसाइल को- जिसके लिए उस ग्रुप को स्काउट एंड गाइड आयुक्त जयकृष्ण यादव एवं सीनियर सिटीजन शिवराज यादव द्वारा प्रमाण-पत्र मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया |

अंत में इस दो दिवसीय कार्यक्रमों में अहर्निश सहयोग करते रहने वाले किशोर कुमार (निदेशक) के धन्यवाद ज्ञापन के बाद अध्यक्ष डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कार्यक्रम समापन की घोषणा की |

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