45 साल में पहली बार, हमने किया एलओसी पार

भारतीय जवानों ने उड़ी में शहीद हुए अपने 18 साथी जवानों की शहादत का बदला ले लिया। उड़ी हमले के 10 दिन बाद हमारे जवान अदम्य साहस का परिचय देते हुए एलओसी के पार करीब तीन किलोमीटर अंदर घुसे और चार घंटे में सात आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर 38 आतंकियों को मार गिराया। 45 साल में पहली बार ऐसा हुआ कि हमने पाकिस्तान को पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में घुसकर मारा। भारतीय सेना की तैयारी कितनी जबर्दस्त थी, इसका अंदाजा इस बात से लगता है कि इतनी बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के बाद हमारे सभी जवान सुरक्षित वापस लौटे। उनमें से किन्हीं को चोट तक नहीं आई।

भारतीय सेना के इस हमले की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल समिति की बैठक के बाद की गई। बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग और सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) रणबीर सिंह मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत 25 देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों को इन हमलों के बारे में सूचित किया। निश्चित रूप से यह उनके कूटनीतिक कौशल का परिचायक है। दूसरी ओर हमारे नैतिक बल की पराकाष्ठा यह कि इस हमले के बाद हमारे सैन्य अभियान महानिदेशक ने पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक से भी फोन पर बात की और उनसे इस अभियान का ब्योरा साझा किया।

इस हमले के बाद भारतीय सेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ (खास ठिकानों को लक्ष्य बनाकर गुप्त तरीके से हमला करना और यह सुनिश्चित करना कि सिर्फ लक्षित निशाने को ही नुकसान हो) की जानकारी दी गई। भारतीय सैन्य महानिदेशक ने बताया कि हमें अत्यन्त विश्वसनीय सूचना मिली थी कि आतंकी नियंत्रण रेखा पर बने आतंकी शिविरों में जम्मू-कश्मीर और अन्य महानगरों में हमले के उद्देश्य से एकत्र हुए हैं। इसी कारण बिना देर किए उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचा दिया गया।

भारत के इस मुँहतोड़ जवाब के बाद पाकिस्तान बौखलाहट में है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान पलटवार कर सकता है। हालांकि उड़ी के बाद अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर बुरी तरह घिर चुके (गौरतलब है कि भारत के कड़े रुख के कारण इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन भी रद्द हो चुका है) और अन्दरूनी तौर पर अत्यन्त ‘जर्जर’ पाकिस्तान के लिए ऐसा करना बहुत आसान नहीं है, और अगर वह कोई नापाक हरकत कर भी बैठता है तो भारत इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

सबसे अच्छी बात यह कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई पर सभी राजनीतिक दल एक हैं। नियंत्रण रेखा पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद सभी दलों ने सेना को मुबारकबाद दी और सरकार को यकीन दिलाया कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई में वे सरकार के साथ हैं। दूसरी ओर सरकार भी सभी दलों को विश्वास में लेकर चल रही है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में मनी शहीद भगत सिंह की जयन्ती

जिला इप्टा द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 109वीं जयन्ती इप्टा मधेपुरा के संरक्षक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में मनाई गई | सुभाष कंप्यूटर कोचिंग एवं अरविन्द रिजल्ट मेकर के छात्र-छात्राओं की अच्छी खासी उपस्थिति में डॉ.मधेपुरी ने शहीदे आजम भगत सिंह के साथ-साथ आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले खुदीराम बोस, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव व राजगुरू सहित अशफाक उल्ला खां आदि की चर्चा करते हुए कहा कि ये लोग ना सिर्फ निडर व निर्भीक क्रांतिकारी थे बल्कि ये सभी अच्छे विचारक, समाज सुधारक व शायर-कवि भी थे | ये सभी अहर्निश यही गुनगुनाते रहते कि “देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है” या फिर यही कि ‘मेरा रंग दे बसंती चोला……!’ डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि ये सभी क्रांतिकारी लगभग 19 से 30 वर्षों के अंदर ही अपनी-अपनी शहादत दे दी और अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला दी | 23 मार्च 1931 को हंसते हुए भगत सिंह – सुखदेव – राजगुरु ने फांसी के फंदे को चुम लिया और भारत के क्रांतिकारी युवजनों से कहा- “अब तुम्हारे हवाले वतन……..|”

यह भी बता दें कि इप्टा के लिए समर्पित कामरेड रमण जी, सुभाष चंद्रा एवं तुर्वसु उर्फ बंटी आदि ने भी विस्तार से उन क्रांतिदूतों के विचारों एवं जीवन शैली की चर्चाएं की और अपने-अपने संबोधन के जरिये युवा छात्र-छात्राओं से यही कहा कि भगत सिंह एवं साथी क्रांतिकारियों के सपनों का भारत बनाने के लिए सबों को अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी होगी एवं निरंतर संघर्ष करना होगा | आरंभ में भगत सिंह की तस्वीर पर पुष्पांजलि एवं अंत में दुष्यंत के गीतों के साथ समारोह का समापन किया गया |

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सौ भारतीय अमीरों में दो बिहारी

अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स की 100 सबसे अमीर भारतीयों की वार्षिक सूची में बिहार के दो उद्योगपतियों – संप्रदा सिंह और अनिल अग्रवाल – ने अपनी जगह बनाई है। धनकुबेरों की इस सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी (कुल सम्पत्ति 1.52 लाख करोड़) लगातार नौवें साल शीर्ष पर हैं। सनफार्मा के दिलीप सांघवी (कुल सम्पत्ति 1.13 लाख करोड़) दूसरे और हिन्दूजा बंधु (कुल सम्पत्ति 1 लाख करोड़) तीसरे स्थान पर हैं। बता दें कि फोर्ब्स की सूची में इस साल छह नए अरबपतियों को पहली बार स्थान मिला है, जिनमें सबसे उल्लेखनीय नाम योगगुरु बाबा रामदेव के सहयोगी और पतंजलि आयुर्वेद के सह संस्थापक आचार्य बालकृष्ण का है। 16 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ बालकृष्ण 48वें स्थान पर हैं।

बहरहाल, फोर्ब्स द्वारा जारी सूची के अनुसार भारत की पाँचवीं सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल्स कम्पनी एल्केम लैबोरेट्रिज के मालिक संप्रदा सिंह सबसे अमीर बिहारी हैं और 17.9 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ सौ अमीर भारतीयों में 42वें स्थान पर हैं। 25 जनवरी 1926 को बिहार के जहानाबाद जिले में जन्मे संप्रदा पिछले साल इस सूची में 47वें स्थान पर थे। संप्रदा ने अपने भाई नरेन्द्र के साथ 1973 में एल्केम लैबोरेट्रिज की स्थापना की थी। उनकी कम्पनी इस वक्त भारत समेत यूरोप, एशिया, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका में संचालित होती है। एल्केम फार्मास्युटिकल्स को फार्मा लीडर अवार्ड मिल चुका है। अपने कार्यक्षेत्र में भीष्म पितामह का दर्जा रखने वाले 91 वर्षीय संप्रदा सिंह वर्तमान में सपरिवार मुंबई में रहते हैं।

7.4 हजार करोड़ की सम्पत्ति के साथ खनन व्यापारी अनिल अग्रवाल इस सूची में स्थान बनाने वाले दूसरे बिहारी हैं। इस साल अनिल को 63वां स्थान मिला है, जबकि पिछले साल वे 53वें पायदान पर थे। 2003 में शुरू हुई अनिल की वेदांता रिसोर्सेस लंदन स्टॉक एक्सचेंज में दर्ज होने वाली पहली भारतीय कम्पनी थी। 24 जनवरी 1954 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा और पुणे में अपने पिता के एल्युमीनियम कंडक्टर बनाने के व्यापार में लग गए। 19 साल की उम्र में वे पुणे से मुंबई आए और अपना व्यापार शुरू किया। स्क्रैप मेटल का काम उन्होंने 1970 में शुरू किया और 1976 में शैमशर स्टेर्लिंग कार्पोरेशन को खरीदा। उसके बाद के उनके सफर से दुनिया भलीभांति परिचित है।

आज देश-दुनिया में बिहारी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह निश्चित रूप से गौरव का विषय है। इन सामर्थ्यवान बिहारियों की उपलब्धियों में तब चार चाँद लग जाएंगे, जब इनमें से आगे बढ़कर कोई बिहार में नए-नए उद्योगों के विकास के लिए सार्थक पहल करे। जिस दिन बिहार को ‘अमीर’ बनाते हुए कोई बिहारी अमीरों की सूची में शामिल होगा, वो दिन नि:संदेह बिहार के इतिहास में मील का पत्थर कहलाएगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप 

 

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आईये, ऑस्कर के द्वार तक पहुँची ‘विसारनाई’ के लिए दुआ करें

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता तमिल फिल्म ‘विसारनाई’ 2017 के ऑस्कर पुरस्कारों की विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में भारत की आधिकारिक प्रविष्टी होगी। विसारनाई ने दौड़ में शामिल ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘सुल्तान’, ‘एयरलिफ्ट’ और ‘उड़ता पंजाब’ समेत कुल 29 फिल्मों को पीछे छोड़ यह उपलब्धि हासिल की है। एम चन्द्रकुमार के उपन्यास ‘लॉक अप’ पर आधारित इस फिल्म के निर्माता दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता धनुष हैं। फिल्म का लेखन और निर्देशन वेट्रिमारन ने किया है और मुख्य भूमिकाएं दिनेश रवि, आनंदी और आदुकलाम मुरूगदेश ने निभाई हैं।

‘विसारनाई’ पुलिस की बर्बरता, भ्रष्टाचार और अन्याय को दिखाती है। फिल्म अपना काम इतनी सहजता और बारीकी से करती है कि आप इसके दृश्यों को जीने लग जाएंगे और सचमुच भूल जाएंगे कि आप  फिल्म देख रहे हैं। इस साल 63वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में इसने तीन पुरस्कार – सर्वेश्रेष्ठ तमिल फिल्म, सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (समुतिराकनी) और सर्वश्रेष्ठ संपादन (किशोर ते) – हासिल किए थे। 72वें वेनिस फिल्म महोत्सव में भी ‘विसारनाई’ ने झंडे गाड़े थे और एमनेस्टी इंटरनेशनल इटालिया अवार्ड अपने नाम किया था।

ऑस्कर मिलना ना मिलना बाद की बात है। भारत में हर साल बनने वाली हजारों फिल्मों की भीड़ में अपनी ओर ध्यान खींचना और दुनिया भर की चुनिंदा फिल्मों के साथ जा खड़ा होना भी कम बड़ी बात नहीं। इस फिल्म ने साबित किया है कि अच्छे काम को किसी ताम-झाम की जरूरत नहीं। बड़े बजट, बड़े स्टार, बड़ी पब्लिसिटी के बिना भी लोगों के दिल-दिमाग को छुआ और झकझोरा जा सकता है।

छोटी-छोटी उपलब्धियों पर शोर मचाने वालों को यह बता देना भी जरूरी है कि ‘विसारनाई’ से पहले आठ और तमिल फिल्में ऑस्कर में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। आईये, ऑस्कर के द्वार तक बड़ी शालीनता से पहुँचने वाली ‘विसारनाई’ की सफलता के लिए दुआ करें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बारिश की फुहारों के बीच कबड्डी के महाकुंभ का समापन

बी.एन.मंडल स्टेडियम में कबड्डी प्रेमियों की बेशुमार भीड़ द्वारा जहां एक ओर बालक-बालिकाओं के सेमी-फाइनल एवं फाइनल मैच देखने के लिए बारिश की बूंदो की परवाह नहीं की गई वहीं दूसरी ओर फाइनल मैच में मधेपुरा-पूर्णिया (बालक) टीम और मधेपुरा-खगड़िया (बालिका) टीम के खिलाडियों ने अपनी-अपनी जीत दर्ज कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी | इस महोत्सव में एक-एक अंक के उतार-चढ़ाव का दर्शकों ने खूब लुत्फ लिया | इसी बीच कई बार खेल में रोमांचक स्थितियां भी आती रही लेकिन क्लाइमेक्स तो तब आया जब दर्शक दीर्घा में बालिका खिलाड़ियों की बैठी हुई माताओं ने जोरदार आवाज लगायी- जीतो बेटी ! जीत लो….!!

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Balika Team of Khagadia District receiving the Kabbadi Championship Cup from Ex-Minister & MLA Shri Narendra Narayan Yadav , DM Madhepura Md.Sohail in graceful presence of SP Vikas Kumar , SDM Sanjay Kumar Nirala , NDC Mukesh kumar and others .

यहाँ यह भी जान लें कि डायनेमिक डी.एम.  मो.सोहैल एवं जाँबाज एसपी विकास कुमार की पूरी टीम की चुस्त-दुरुस्त व्यवस्था, ‘आवाज’ के संरक्षकों डॉ.डी.के.सिंह, पूर्व प्रमुख उपेंद्र प्रसाद यादव, श्री चंद्रशेखर, डॉ.बी.एन. भारती, जयकांत यादव, डी.पी.एस.के किशोर कुमार व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की हौसला अफजाई तथा खेलों के प्राण संत कुमार, अरुण कुमार, जय कृष्ण प्रसाद के सतत उत्साहवर्धन के बावजूद भले ही मधेपुरा की दोनों टीमें मैदान में मात खा गई लेकिन खेल के श्रेष्ठ प्रदर्शन से जिले के सभी खेल-प्रेमियों के दिलों को जीत लिया | जीत के जुनून में चोट के बावजूद खेल के जज़्बे में कमी नहीं देखी गई | आयोजन किसी मायने में राष्ट्रीय स्तर से कम नहीं था,  जिसे ऐतिहासिक स्वरुप प्रदान किया- डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला और एन.डी.सी.मुकेश कुमार सहित ए.एस.पी.राजेश कुमार, थाना अध्यक्ष मनीष कुमार आदि ने |

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L to R- Dr.D.K.Singh, Dr.Bhupendra Madhepuri , DDC Mithilesh Kumar, DM Md.Sohail (IAS), SP Vikas Kumar (IPS) and others observing the final match of Madhepura and Purnia District of Boys Group at Ground No- 2 of B.N.Mandal Stadium Madhepura .

बता दें कि तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कबड्डी के महाकुंभ का समापन शनिवार को देर शाम होली क्रॉस स्कूल की श्रीमीराज की सुरीली आवाज, मनमोहक रंग-बिरंगी आतिशवाजियों के नजारे व आकाश में गूंजती पटाखों की आवाज और रिम-झिम बारिश की बूंदों की मधुर संगीतमयी आवाज के साथ हुआ तो सही लेकिन डॉ.मधेपुरी ने आयोजन के अध्यक्ष डी.एम.  मो.सोहैल तथा ‘आवाज’ के संरक्षक वरीय चिकित्सक डॉ.दिलीप कुमार सिंह से यही कहा- “खिलाड़ियों के विदा होने पर मधेपुरा सूनापन और हरदिल खालीपन महसूस करेगा | खासकर बालिका खिलाड़ियों की विदाई बेटी की विदाई की तरह हृदय को झकझोर देगा……. और हां ! महाभारत काल से खेले जाने वाला यह खेल कबड्डी (चक्रव्यूह) अब इतनी ऊंचाई को पा लिया है कि अब इसे जल्द ही ओलंपिक में शामिल कर लिया जाना चाहिए |”

अंत में मुस्तैदी से काम करने वाले सभी कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों सहित लाईट, माईक एवं टेंट वाले से लेकर आतिशबाजी करने वालों को इस त्रिदिवसीय राज्य स्तरीय कबड्डी महोत्सव के अध्यक्ष सह जिला पदाधिकारी मो.सोहैल ने ह्रदय से साधुवाद ज्ञापित किया और मंच संचालनकर्ता अरुण कुमार, किशोर कुमार एवं जय कृष्ण यादव को हृदय से धन्यवाद देते हुए खुशी जाहिर किया कि मधेपुरा अपनी शालीनता एवं स्वस्थ परंपरा को इसी तरह कायम रखेगा और निरंतर हर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा |

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सोशल रिफॉर्मर बी.पी.मंडल को भी मिले भारतरत्न !

पिछड़ा वर्ग राष्ट्रीय आयोग ने सोशल रिफॉर्मर के रूप में ‘भारतरत्न’ जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान हेतु जिन दो नामों की अनुशंसा दो दिन कबल की है- वे दो नाम हैं- समाज सुधारक ज्योतिबा फूले एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल |

यह भी बता दें कि वही समाज सुधारक बी.पी.मंडल  जिन्होंने समस्त भारतीय समाज के सभी धर्मों (हिन्दू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई, जैन-पारसी,  बौद्ध आदि) एवं उन धर्मों के हजारों जातियों-उपजातियों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र….. सिया-सुन्नी आदि) के बीच जा-जाकर वैसे लोगों की सूची बनाई जो विकास की दौर में सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़ रहे थे |

Shri BP Mandal submitting Copies of Mandal Report to The then Home Minister Shri Gyani Zail Singh in Accordance with the direction of Mahamahim Rashtrapati Honourable Neelam Sanjeeb Reddy.
Shri B.P. Mandal submitting Copies of Mandal Report to the then Home Minister Shri Gyani Zail Singh in accordance with the direction of Mahamahim Rashtrapati Neelam Sanjeeb Reddy.

तभी तो वे कश्मीर से कन्याकुमारी और राजस्थान से बंगाल की खाड़ी तक घड़ी की सूई की तरह अहर्निश चलते रहे तथा वैसे समस्त भारतवासियों को विकास की रोशनी पहुंचाने में लगे रहे जिन्हें समुचित रोशनी नहीं मिल पा रही थी | मंडल कमीशन के उसी रिपोर्ट को उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति महामहिम नीलम संजीब रेड्डी के निदेशानुसार गृहमंत्री माननीय ज्ञानी जैल सिंह को हस्तगत करा दिया |

अस्तु समाज के सभी अंगो पर सम्यक दृष्टि रखनेवाले सामाजिक न्याय के रक्षक रहवर व रखवाला श्री मंडल को भी ‘भारतरत्न’ सरीखे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए जिसकी मांग बी.पी.मंडल राजकीय समारोहों के अवसर पर समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी व अन्य बुद्धिजीवियों के द्वारा भी की जाती रही है |

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बजट पर केन्द्र के निर्णय को नीतीश ने नकारा

1924 से चली आ रही परम्परा टूट गई। अगले साल से रेलमंत्री संसद की सीढ़ियों पर ‘बजट’ का ब्रीफकेस उठाए फोटो खिंचाते नहीं दिखेंगे। 2017 से अलग पेश नहीं होगा रेल बजट। केन्द्रीय कैबिनेट ने ‘एक देश एक बजट’ के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी। कैबिनेट के इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही रेल बजट इतिहास बन गया। उसे अब आम बजट के साथ ही पेश किया जाएगा। हालांकि रेलवे की अपनी पहचान आगे भी बरकरार रहेगी।

कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और कहा कि अगले साल से रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। रेलवे संबंधी सभी प्रस्ताव आम बजट में शामिल होंगे। जेटली ने कहा कि आज स्थिति अलग है, सिर्फ परम्परा के आधार पर अलग से रेल बजट पेश किए जाने की जरूरत नहीं है। अब एक बजट और एक विनियोग विधेयक होगा। इससे संसद का मूल्यवान समय बचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्णय से रेलवे की स्वायत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर साल रेलवे पर चर्चा हो।

इस फैसले के मद्देनज़र संसद का बजट सत्र अब 25 जनवरी से पहले बुलाया जा सकता है। फिलहाल फरवरी के अन्तिम सप्ताह में बजट सत्र शुरू होता है। इस प्रकार, अब बजट की तैयारियां अक्टूबर के प्रारंभ में ही शुरू हो जाएंगी। जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का अग्रिम अनुमान सात जनवरी को उपलब्ध होगा जो फिलहाल सात फरवरी को प्रस्तुत किया जाता है। अब तक बजट को संसद की मंजूरी मई के मध्य तक दो चरणों में मिलती थी और जून में मानसून दस्तक दे देता था, जिससे राज्य अधिकतर योजनाओं का क्रियान्वयन और खर्च अक्टूबर तक शुरू नहीं कर पाते थे। ऐसे में योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए छह महीने का ही समय बचता था। बजट को पहले पेश किए जाने का मतलब है कि पूरी प्रक्रिया 31 मार्च तक सम्पन्न हो जाएगी और व्यय के साथ-साथ कर प्रस्ताव नए वित्त वर्ष की शुरुआत में ही अमल में आ जाएगा। इससे बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सकेगा।

बहरहाल, केन्द्र सरकार ने अपने तई भले ही एक बड़ा कदम उठाया हो, पर बिहार के मुख्यमंत्री और अटल सरकार में रेल मंत्री रहे नीतीश कुमार इस पर जमकर बरसे। स्वतंत्र रूप से रेल बजट पेश करने की परम्परा खत्म करने पर नीतीश ने कहा कि इससे स्पष्ट हो गया कि आमलोगों की रेलवे केन्द्र सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। इससे रेलवे की स्वायत्तता पर भी खतरा मंडराने लगा है।

कई बार रेल बजट पेश कर चुके नीतीश का मानना है कि इस फैसले से किसी भी रूप में रेलवे का भला नहीं होगा। रेलवे के सुचारू संचालन के लिए रेल बजट का अलग रहना जरूरी था। उन्होंने कहा कि रेल बजट आमलोगों की आकांक्षा और भावनाओं से सीधे जुड़ता है और सरकार को चाहिए कि इसे उसके पुराने स्वरूप में ही रहने दे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

 

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मधेपुरा में राज्यस्तरीय कबड्डी का महाकुम्भ

बिहार के 38 जिलों से आये बालक-बालिकाओं की टीम के रंग-बिरंगे ड्रेसों, पताकों एवं तिरंगों से उत्प्लावित बी.एन.मंडल स्टेडियम में कबड्डी के त्रि-दिवसीय (22-24 सितंबर) भव्य समारोह की अध्यक्षता कर रहे मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने उद्घाटनकर्ता के रूप में राष्ट्रीय नेता व सांसद शरद यादव सहित अन्य विधायकगण व मान्यजन सहित उपस्थित खिलाड़ियों-दर्शकों का स्वागत किया | इस अवसर पर डीएम मो.सोहैल एवं एस.पी.विकास कुमार ने कहा कि सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था है | यहां कानून का राज है | देर रात तक कबड्डी का आनंद लें | जमकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करें |

National Leader and M.P. Sri Sharad Yadav honoured by D.D.C. Mithilesh Kumar in the inaugural function of Inter District State Kabaddi Competition at BN Mandal Stadium Madhepura .
National Leader and M.P. Sri Sharad Yadav honoured by D.D.C. Mithilesh Kumar in the inaugural function of Inter District State Kabaddi Competition at B.N. Mandal Stadium Madhepura .

सर्वप्रथम उद्घाटनकर्ता सांसद शरद यादव सहित विधायक नरेन्द्र नारायण यादव, प्रो.रमेश ऋषिदेव, निरंजन मेहता, डी.एम.  मो.सोहैल, एस.पी. विकास कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, जेडीयू जिलाध्यक्ष प्रो.विजेन्द्र प्रसाद यादव को अंगवस्त्रम-पाग व पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया | पुनश्च, अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कबड्डी के इस महाकुंभ का विधिवत उद्घाटन किया गया |

Dr.Madhepuri honoured by a popular C.D.P.O. of Madhepura District during State Kabaddi Competition at BN Mandal Stadium.
Dr.Madhepuri honoured by a popular C.D.P.O. of Madhepura District during State Kabaddi Competition at BN Mandal Stadium.

उद्घाटनकर्ता शरद यादव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में खिलाड़ियों से यही कहा कि खेलों में अच्छे प्रदर्शन से देश का मान बढ़ता है तथा देश को गौरव प्राप्त होता है | उन्होंने खिलाड़ियों से अन्य बातों के अलावा यही कहा कि अव्वल रहने पर गौरव मिलेगा और हार जाने पर फिर से जीतने की तैयारी का जज्बा हासिल होगा……….!

Exibition of grand Jhanki by the students of Tulsi Public School, Madhepura .
Exibition of grand Jhanki by the students of Tulsi Public School, Madhepura .

यह भी बता दें कि सभी जिले की टीम के कप्तान तिरंगे को थामे मंच से गुजरते रहे | स्थानीय स्कूलों द्वारा नगाड़े की चोट से उत्पन्न उत्साहवर्धक धुन बजते रहे | स्काउट-गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव पूरे माहौल को सजाते रहे | हॉली क्रॉस एवं तुलसी पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा उच्च स्तरीय झांकियां प्रस्तुत किये गये | फिर भी लोगों ने श्यामल कुमार सुमित्र एवं विकास कुमार के निर्देशन में तुलसी पब्लिक स्कूल की कुछ अधिक सराहना की |

यह भी जानें कि उद्घाटन मैच के रुप में जमुई की टीम एवं मधेपुरा की टीम के बीच भिड़ंत हुई | देर रात तक चले अन्य मैचों में दर्शकों के साथ-साथ डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, एस.डी.एम. संजय कुमार निराला, एस.पी. विकास कुमार, एन.डी.सी. मुकेश कुमार, कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार, स्काउट एवं गाइड के आयुक्त जयकृष्ण यादव, थानाध्यक्ष मनीष कुमार, डी.पी.एस.  के निदेशक किशोर कुमार आदि बेहतर व्यवस्था में लगे रहे |

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शिक्षक शिव कुमार की मनी जयन्ती

अनुशासनिक प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्धि प्राप्त विज्ञान के प्रसिद्ध शिक्षक रहे शिव कुमार प्रसाद की 79 वीं जयंती समारोह का आयोजन उनके आवासीय परिसर में संपन्न हुआ | समारोह की अध्यक्षता जहां साहित्यकार व समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी ने की वहीं दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन टी.एम. भागलपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रतिकुलपति डॉ के.के. मंडल ने किया |

समारोह में डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि सरीखे ख्यातिप्राप्त हिन्दी के शिक्षक, प्रधानाचार्य एवं संस्थापक कुलपति को उद्घाटनकर्ता डॉ.के.के.मंडल एवं डॉ. मधेपुरी ने अंगवस्त्रम व कलम देकर सम्मानित किया | डॉ.रवि ने शिवकुमार बाबू की बहुआयामी प्रतिभाओं को उजागर करते हुए कहा कि वे भी विधायक, सांसद कहलाने के बजाय ताजिंदगी शिक्षक ही कहलना चाहते हैं |

Founder V.C. Dr.R.K.Yadav Ravi honoured by Dr.K.K.Madal & Dr.Madhepuri .
Founder V.C. Dr.R.K.Yadav Ravi honoured by Dr.K.K.Madal & Dr.Madhepuri .

शिवकुमार प्रसाद यादव मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्षा करुणा कुमारी एवं सचिव प्रो. रीता द्वारा आयोजित क्विज प्रतियोगिता में सफलतम तीन प्रतिभागियों- अमन राज, हेमंत राज एवं कोमल कुमारी को पुरस्कृत किया गया | इस कार्यक्रम में सहयोगी रहे प्रो. चंद्रशेखर-किशोर, रीना कुमारी आदि |

उद्घाटनकर्ता डॉ.के.के. मंडल सहित मुख्य अतिथि डॉ.अरुण कुमार मंडल, मंच संचालक डॉ. विनय कुमार चौधरी, प्रो. श्यामल किशोर यादव, स्वागताध्यक्ष दशरथ प्रसाद सिंह, डॉ. इंद्र नारायण यादव, डॉ. आलोक कुमार, हरिनंदन यादव, रघुनाथ यादव, आनंद मंडल, अनिल कुमार, डॉ. विभा कुमारी आदि ने शिवकुमार बाबू की कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासनिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ उनके आदर्श विचारों की जमकर चर्चाएं की तथा स्तुत्य बताया |

अंत में अध्यक्षीय भाषण में डॉ. मधेपुरी ने अपने आदिगुरु लक्ष्मी प्रसाद सिंह से लेकर लाला सुरेंद्र प्रसाद, जलधर झा जलदेव, युगल राम प्रेम, लक्ष्मी बाबू, नंदकिशोर बाबू, सी.पी. सिंह साहब, गोविंद बाबू आदि शिक्षकों का स्मरण करते हुए तथा अपने प्रिय शिक्षक शिवकुमार बाबू को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए यही कहा कि कर्तव्य निष्ठा एवं आदर्श चरित्र व व्यक्तित्व के बल पर ही इन्होंने समाज में अपनी अमिट पहचान बनाई, राष्ट्र निर्माता बने और समाज का रक्षक-रहवर व रखवाला बने |

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भजन-संध्या का आयोजन किया गया जिसमें अरुण कुमार बच्चन, राम अवध सिंह, प्रो. रीता कुमारी, रवि रंजन आदि के गायन-वादन ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा | डॉ. विनय कुमार चौधरी ने मंच संचालन किया और प्रो. रीता ने धन्यवाद ज्ञापन किया |

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मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर : 17 शहीदों को दी गयी श्रद्धांजलि

‘उड़ी’ में भारतीय सैनिकों की छावनी पर नापाक आतंकवादियों द्वारा किये गये हमले में 17 जवानों के शहीद होने पर 20 सितंबर की शाम में स्थानीय भूपेन्द्र चौक पर मधेपुरा इप्टा द्वारा उन शहीदों के सम्मान में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया | शहीद जवानों की शहादत को याद करने हेतु आयोजित सभा में मुख्यरूप से सम्मिलित दिखे- इप्टा के संरक्षक व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी, इप्टा के वर्तमान अध्यक्ष डॉ.नरेश कुमार, सचिव अंजलि, पूर्व अध्यक्ष डॉ.आलोक कुमार, तुर्वसु-सुभाषचंद्र सहित इप्टा के रक्षक डॉ.विनय कुमार चौधरी, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, शिवजी साह, डॉ.नाथेन्द्र गुप्ता, ऑडिटर कौशल मंडल, आनन्द कुमार, संत कुमार उर्फ़ दरोगा जी, संगीतज्ञ रोशन कुमार एवं पारोजी सहित शहर के बुद्धिजीवी-व्यापारी व संवेदनशील युवजन आदि |

आयोजनकर्ता रोशन कुमार द्वारा उपस्थित इप्टा- धर्मियों के हाथों में 17 मोमबत्ती जलाकर दिया गया तथा संरक्षक डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी के हाथों में संबोधन के चन्द शब्दों के लिए ‘माइक’ | डॉ.मधेपुरी ने कहा कि सियाचिन जैसी बर्फिली पहाड़ियों में हमारे जवान जब रात भर जागते हैं तभी सारा देश चैन की नींद सो पाता है | व्यक्तिगत सुख-चैन को गवांकर कोई भी जवान ना तो हिलते हैं और ना डोलते हैं |

Udi Attack Martyrs
Udi Attack Martyrs

यह भी बता दें कि डॉ.मधेपुरी ने उन सभी सतरह शहीदों- बिहार के अशोक कुमार (आरा), एस.के. विद्यार्थी (गया), राकेश सिंह (कैमूर)…… यू.पी.  के आर.के.यादव (बलिया), गणेश शंकर (कबीरनगर), राजेश कुमार सिंह (जौनपुर), हरिंदर यादव (गाजीपुर)….. महाराष्ट्र के उईके जनराव (अमरावती), जी. शंकर (सतारा), टी.एस.सोमनाथ (नासिक)…… झारखंड के नायमन कुजूर (गुमला), जावरा मुंडा (खूंटी)….. वेस्ट बंगाल के विश्वजीत गोराई (24 परगना), जी.दलाई (हावड़ा)…… जम्मू-कश्मीर के करनैल सिंह (जम्मू), रविपाल (जम्मू)…… राजस्थान के एन.एस.रावत (राजसमंद)- के नाम स्मरण करते हुए उन्हें सामूहिक रुप से श्रद्धांजलि समर्पित की तथा दो मिनट का मौन रखकर ईश्वर से यही प्रार्थना की कि इन शहीदों की आत्मा को शांति दें तथा परिजनों को अपार कष्ट सहने की शक्ति |

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