मधेपुरा औद्योगिक क्रान्ति की राह पर

राज्य की नई औद्योगिक नीति के प्रावधानुसार डीएम मो.सोहैल ने मधेपुरा के स्वरुप को बदलने तथा विकास की राह पर आगे ले जाने हेतु पूरी रणनीति तैयार कर ली है | तभी तो 8 जुलाई को आयोजित ‘Investors Meet’ में देश-विदेश के लगभग 65 निवेशकों को आमंत्रित किया जा सका है |

अधिक संख्या में निवेशकों से प्रस्ताव प्राप्त होने की संभावनाओं के मद्देनजर डायनेमिक डीएम मो.सोहैल ने 11 सदस्यीय कमिटी का गठन भी कर दिया है | डीएम की अध्यक्षता वाली उक्त कमिटी में एसपी विकास कुमार उपाध्यक्ष होंगे और सदस्य होंगे- डीडीसी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, उपायुक्त वाणिज्यिक कर पदाधिकारी, वन प्रमंडल पदाधिकारी सहित अनुमंडल पदाधिकारी मधेपुरा एवं उदाकिशुनगंज | साथ ही टेक्निकल साइड से 5 सदस्य बनाए गए हैं- वे हैं, विद्युत विभाग, पथ निर्माण विभाग, उच्च पथ प्रमंडल विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग एवं लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता | डीएम द्वारा जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक को इस कमिटी का सदस्य सचिव बनाया गया है | इस कमिटी की बैठक आवश्यकतानुसार आहुत की जाएगी |

यह भी जान लें कि आमंत्रित किए गए प्रमुख निवेशकों के नाम हैं- इम्पीरियल ट्यूब्स प्रा.लि., सिकेम नेक्सन, नॉर ब्रेम्स, टिकमेन इंडिया लि., मयूर ग्लास इंडस्ट्रीज लि., आर.के. फोम्स, स्टोन इंडिया लि., हिन्दुस्तान फाइबर्स ग्लास वर्क्स, वी. इंटर टेक्नोलॉजी, वी.ओ. मेटलस प्रा.लि., ए.इंजीनियर्स, ए. इक्यूपमेंट्स सहित अन्य ढेर सारे |

यहाँ यह भी बता देना जरूरी है कि जो कोई भू-धारी न्यूनतम 2 एकड़ से अधिक अविवादित जमीन निवेशकों के हाथ बेचना चाहते हैं उन्हें भी 8 जुलाई की बैठक में आमंत्रित किया गया है | साथ ही विकास के लिए समर्पित जिला पदाधिकारी मो.सोहैल द्वारा निवेशक एवं भू-दाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उद्योग केन्द्र में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ स्थापित करा दिया गया है ताकि समस्याओं का त्वरित निष्पादन किया जा सके |

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मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद की सुरक्षा में जुटा है पाक..!

पाकिस्तान की कथनी-करनी में फर्क एक बार फिर सामने आया है। अपने कूटनीतिक बयानों में वो चाहे लाख आतंक के खिलाफ होने की बात करे लेकिन वास्तव में वो आतंकियों को ना केवल पनाह देता है बल्कि उनकी ‘सुविधा’ और ‘सुरक्षा’ का ख्याल ऐसे रखता है जैसे कोई देश अपने विशिष्टतम नागरिक का रखा करता है। जी हाँ, अनैतिकता की सारी हदें पार करते हुए पाकिस्तान ने लश्कर ए तैयबा के सरगना हाफिज मोहम्मद सईद पर नकेल कसने की बजाय उसकी सुरक्षा बढ़ा दी है।

भारत के खिलाफ जहर उगलने वाले हाफिज सईद को पाकिस्तान में सुरक्षा पहले भी हासिल थी लेकिन अब उसके सुरक्षा गार्डों की संख्या दोगुनी कर दी गई है और उसके घर से 300 मीटर दूर चार बैरीकेड लगाए गए हैं। लाहौर के जौहर टाउन के ई ब्लॉक स्थित उसके घर में अब 48 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं जो 16-16 की संख्या में तीन पालियों में काम करते हैं। सरकारी सुरक्षा के अतिरिक्त जमात उद दावा के हथियारबंद सदस्य भी सईद की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सईद से उसकी गतिविधियों को भी सीमित करने को कहा गया है। यही नहीं, सईद के साले अब्दुल रहमान मक्की की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

बता दें कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड सईद ने हाल ही में भारत पर एटमी हमले की धमकी दी थी। स्वाभाविक तौर पर इसके बाद भारत में तीव्र प्रतिक्रिया होनी थी। पर ऐसी नापाक हरकत के बाद जिस कुख्यात आतंकी को रौंद देना चाहिए था उसे पाक ने अब पलकों पर बिठा लिया है। हथेली पर तो वो पहले से था ही।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत समेत कई देशों के प्रतिबंध के बावजूद पाकिस्तान सईद पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने दिसंबर 2008 में जमात को आतंकी संगठन और सईद को मोस्ट वांटेड आतंकी घोषित किया था, अमेरिका ने उसके सिर पर दस लाख डॉलर का इनाम रखा है और भारत तो सईद को सौंपने की मांग करता ही रहा है। इसके बावजूद सईद ना केवल पाकिस्तान में खुलेआम सभाएं करता है बल्कि भारत और अमेरिका को धमकियां देने से भी बाज नहीं आता। काश, बारूद की ढेर पर बैठे पाक को कोई समझा पाए कि वह लगातार ‘आग’ से खेल रहा है, जबकि उसकी ‘विनाशलीला’ के लिए बस एक ‘चिंगारी’ ही काफी है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव का इस्तीफा, अब जाएंगे जेल..?

बिहार बोर्ड पर रिजल्ट घोटाले की कालिख लगने के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शिक्षा मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार ने लालकेश्वर प्रसाद को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था। यही नहीं, अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है। उधर बोर्ड के सचिव हरिहर नाथ झा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर बिहार बोर्ड के नए अध्यक्ष और अनूप सिन्हा नए सचिव हो सकते हैं।

बता दें कि पटना के एसएसपी मनु महाराज की अगुआई में एसआईटी की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लालकेश्वर प्रसाद के निजी सचिव सहित सात लोगों को हिरासत में लिया और अब सबसे पूछताछ कर रही है। हिरासत में लिए गए लोगों में हाजीपुर के जीए इंटर कॉलेज की केन्द्राधीक्षक शैल कुमारी, कॉलेज के हेडक्लर्क, चपरासी और पटना के राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। बता दें कि जीए इंटर कॉलेज में ही विशुनराय कॉलेज के छात्रों की परीक्षा ली गई थी और कॉपियों का मूल्यांकन राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल में किया गया था।

चर्चा का केन्द्र बन चुके टॉपर्स घोटाले में एक नया मोड़ उस वक्त आया जब राजेन्द्र नगर ब्वायज हाईस्कूल के प्राचार्य सह मूल्यांकन केन्द्र के निदेशक विशेश्वर यादव ने यह खुलासा किया कि विशुनराय कॉलेज की कॉपियों का बंडल टूटे सील में मिला था, जबकि अन्य जिलों की कॉपियां सुरक्षित मिली थीं। प्रारम्भिक जाँच में इस बात के स्पष्ट सबूत मिले हैं कि अयोग्य छात्रों की कॉपियां बदलकर उन्हें टॉपर बना दिया गया।

बहरहाल, पुलिस ने लालकेश्वर प्रसाद के घर पर छापेमारी भी की। इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन के सख्त रवैये को देखते हुए उनकी या किसी भी आरोपी के बचने की सम्भावना नगण्य है। अध्यक्ष और सचिव के साथ ही बोर्ड के दूसरे अधिकारियों पर भी गाज गिरनी तय है। जिस तरह बिहार को शर्मसार करने वाले इस घोटाले में बोर्ड अधिकारियों की संलिप्तता सामने आ रही है, उसे देखते हुए इस बात की प्रबल सम्भावना है कि बोर्ड की पूरी टीम ही बदल दी जाय।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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अहम पदों पर ओबीसी आरक्षण हटाने की जल्दी में क्यों केन्द्र सरकार?

केन्द्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नौकरी के लिए मिलने वाले आरक्षण के लाभ को समाप्त कर दिया है। अब इन पदों के लिए नौकरी पाने की इच्छा रखने वालों को सामान्य वर्ग के साथ कदमताल करना पड़ेगा। केन्द्र सरकार ने अचानक लिए इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है।

बता दें कि इस फैसले से पहले प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित था लेकिन यूजीसी द्वारा देश के सभी 40 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में भेजे गए नोटिस के मुताबिक प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर इस वर्ग को मिलने वाला आरक्षण तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। अब इस वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ केवल असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए मिलेगा। जबकि एससी (अनुसूचित जाति) और एसटी (अनुसूचित जनजाति) को पूर्व की भँति इन तीनों पदों पर आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा।

ओबीसी को इन पदों पर आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं या फिर आरक्षण सही है या गलत, यहाँ ये मुद्दा नहीं। मुद्दा ये है कि आखिर केन्द्र सरकार ने किस ‘मजबूरी’ या ‘दबाव’ में ये फैसला लिया? और लिया भी तो इतना अहम फैसला इस कदर ‘अचानक’ और ‘आनन-फानन’ में क्यों? बिना किसी चर्चा या रायशुमारी के लिए गए इस फैसले से ना केवल ओबीसी वर्ग में गलत संदेश जाएगा बल्कि इस फैसले के बाद केन्द्र सरकार पर ‘आरक्षणविरोधी’ होने के आरोप भी स्वाभाविक रूप से लगेंगे। और कुछ ना सही, केन्द्र सरकार को कम-से-कम इतने बड़े फैसले के पीछे रहा कोई एक बड़ा कारण तो बताना ही चाहिए।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप    

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सिर्फ खेती के लिए ही सूबे में बनेंगे 480 पावर सबस्टेशन

राज्य के अनुभवी एवं डायनेमिक ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने जिले के हरैली गांव के निकट “ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग फैक्ट्री” का उद्घाटन करते हुए कहा कि सूबे में किसानों के लिए अलग से 480 पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे |

पंजाब के प्रताप सिंह कैरो के नक्शे कदम पर चलने वाले ऊर्जा मंत्री श्री यादव ने कहा कि 2017 तक बिहार बिजली के मामले में आत्मनिर्भर हो जायेगा और हर खेत को पानी मिलने लगेगा | उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि तीन फसलों के लिए विख्यात उत्तर बिहार के किसानों के घर में तभी तो खुशहाली आएगी और चेहरे पर लाली होगी | बता दें कि 2005 में मात्र 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला बिहार आज 4000 मेगा वाट बिजली उत्पन्न  कर रहा है |

समारोह की अध्यक्षता करते हुए जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मधेपुरा के पूर्व सांसद व वर्तमान राज्यसभा सांसद शरद यादव ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड में पावर सब स्टेशन बनाए जाएंगे जिसके लिए अलग से एक हजार करोड़ की राशि दी जाएगी | उन्होंने कहा कि हर घर और हर खेत में बिजली पहुंचने से संपन्नता आएगी, बहुत बड़ा बदलाव आएगा- तभी तो राज्य में बिजली के क्षेत्र में हुए बेहतर काम की तारीफ प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं |

समारोह में उपस्थित सूबे के आपदा प्रबंधन मंत्री प्रो.चंद्रशेखर, विधायक प्रो.रमेश ऋषिदेव एवं पूर्व विधानसभा पार्षद विजय कुमार वर्मा ने भी विचार व्यक्त किए | मौके पर डायनेमिक डी.एम. मोहम्मद सोहैल ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जिले में हो रहे समस्त विकास कार्यो की चर्चा की | इस अवसर पर एसपी विकास कुमार, एसडीएम मुकेश कुमार, डीएसपी रहमत अली सहित जदयू एवं राजद के नेतागण उपस्थित थे |

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महिलाओं ने 10-10 रुपए जमा कर 33 करोड़ बनाये

‘स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी कोसी अंचल के मधेपुरा, सहरसा एवं सुपौल जिले की महिलाओं ने तो कमाल कर दिया है | कोसी के 36 हजार 700 समूहों से जुड़े 42 हजार परिवार की महिलाएं प्रति सप्ताह Rs.10 जमा करती है | आपको बता दें कि प्रत्येक समूह में न्यूनतम 8 और अधिकतम 10 महिलाएं होती हैं |

अब भी तो मानेंगे आप कि “बूंद-बूंद से घड़ा भरने वाली कहावत” में कितना दम है | सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां कोसी प्रमंडल की महिलाओं ने 2 वर्षों में 33 करोड़ की बचत की है वहीं सूबे में 4 लाख 70 हजार ‘स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ी महिलाओं ने 250 करोड़ से अधिक की बचत की है | इतना ही नहीं, जहां महिलाओं द्वारा जमा की गई राशि से सामूहिक रोजगार शुरू किया जाता है वही सर्वाधिक जरूरतमंद महिलाओं को जमा राशि से ऋण भी दी जाती है और बैंक की तरह उसकी वसूली सूद के साथ भी की जाती है |

यह योजना महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड में सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 2009 को शुरू की गई थी | साल लगते-लगते मधेपुरा के 5, सहरसा के 3 एवं सुपौल के 3 प्रखंडों को इस से जोड़ा गया | और आज ! पूछिए मत !!

अब तो मुख्यमंत्री कोसी मलबरी परियोजना के तहत कोसी की महिलाओं द्वारा 199 एकड़ भूमि पर शहतूत की खेती शुरू कर दी गई है | क्या इसे हम महिला सशक्तिकरण योजना के तहत् उन्नत कृषि कार्य की संज्ञा नहीं देंगे ? बिहार आगे बढ़ रहा है नहीं कहेंगे ?

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मोदी को मिला अफगानिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अफगानिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘अमीर अमानुल्ला खान अवार्ड’ से नवाजा गया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने आज उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया। इससे पहले दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त रूप से ‘अफगान-भारत मैत्री बांध’ का उद्घाटन किया। हेरात प्रांत में स्थित यह बांध पूर्व में ‘सलमा बांध’ के नाम से जाना जाता था। बता दें कि इस बांध को भारत की सहायता से बनाया गया है। चिश्त ए शरीफ नदी के ऊपर बने इस बांध से 75 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकेगा और साथ ही 42 मैगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा।

पूर्वी, मध्य और दक्षिण एशिया के प्राचीन कारोबारी मार्ग पर पड़ने और यहाँ से ईरान, तुर्कमेनिस्तान तथा अफगानिस्तान के अन्य हिस्सों की सड़कें होने के कारण हेरात प्रांत का विशेष रणनीतिक महत्व है। पिछले महीने भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने ईरान के चाबहार में एक कारोबार एवं परिवहन गलियारा स्थापित करने के लिए एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

ज्ञातव्य है कि अफगानिस्तान पाँच राष्ट्रों की यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी का पहला पड़ाव है। अफगानिस्तान के बाद मोदी कतर, स्विटजरलैंड, अमेरिका और मैक्सिको जाएंगे। स्मरणीय है कि मोदी पिछले साल दिसंबर में भी अफगानिस्तान की यात्रा पर आए थे और इस दौरान उन्होंने नौ करोड़ डॉलर की कीमत से भारत द्वारा निर्मित संसद भवन परिसर का उद्घाटन किया था।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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निर्विरोध चुने गए शरद, मीसा, राम जेठमलानी, आरसीपी और गोपाल

आज नाम वापसी की समयसीमा खत्म होने के साथ बिहार से राज्य सभा के पाँचों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। जेडीयू से शरद यादव और रामचंद्र प्रसाद सिंह, आरजेडी से मीसा भारती और राम जेठमलानी और बीजेपी से गोपाल नारायण सिंह संसद के उच्च सदन में पहुँचे। बता दें कि महाठबंधन के चारों उम्मीदवारों ने 30 मई और बीजेपी के उम्मीदवार ने 31 मई को नामांकन दाखिल किया था।

उधर बिहार विधान परिषद के सात उम्मीदवार भी निर्विरोध चुने गए। इनमें महागठबंधन के तीन और बीजेपी के दो उम्मीदवार थे। जेडीयू ने गुलाम रसूल बलियावी और सीपी सिन्हा, आरजेडी ने कमर आलम और रणविजय सिंह, कांग्रेस ने तनवीर अख्तर और बीजेपी ने अर्जुन सहनी और विनोद नारायण झा को उम्मीदवार बनाया था।

राज्य सभा के लिए निर्वाचित होने वाले अन्य राज्यों के प्रमुख उम्मीदवारों में रेल मंत्री सुरेश प्रभु और कांग्रेस नेता अंबिका सोनी शामिल हैं। बीजेपी ने प्रभु को आंध्र प्रदेश से तो कांग्रेस ने अंबिका को पंजाब से उम्मीदवार बनाया था। निर्विरोध चुनाव जीतने वाले अन्य प्रमुख उम्मीदवार हैं – पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, केन्द्र के वर्तमान और तेजतर्रार मंत्री पीयूष गोयल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री और एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल तथा शिवसेना के संजय राउत। ये सभी महाराष्ट्र से उम्मीदवार थे।

बता दें कि बिहार के साथ ही महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब के सभी उम्मीदवार निर्विरोध संसद के उच्च सदन पहुँच रहे हैं। बस उत्तर प्रदेश में आखिरी क्षणों में निर्दलीय प्रीति महापात्र के 12वां उम्मीदवार बनने के कारण वहाँ की 11 सीटों का चुनाव जरूर दिलचस्प हो गया है। यहाँ अब अगले हफ्ते 11 जून को चुनाव होना तय है। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी होगी क्योंकि यूपी में कांग्रेस के केवल 29 विधायक हैं और राज्य सभा पहुँचने के लिए जरूरत 34 वोटों की है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार में एक लाख की आबादी पर सत्ताइस की जगह हैं सात कॉलेज..!

बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के टॉपर्स रूबी राय (आर्ट्स) और सौरभ श्रेष्ठ (साइंस) की ख़बर अखबार, टीवी चैनल और तमाम सोशल साइट्स पर चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई उनके ‘खोखले’ रिजल्ट की आलोचना कर रहा है और बिहार की शिक्षा-व्यवस्था कठघरे में है। ऐसी किसी घटना पर तत्काल अपनी राय देना और भड़ास निकाल लेना हमारी आदत बन चुकी है। होता ये है कि इधर भड़ास निकली नहीं कि उधर हम पूरे वाकये को भूल जाते हैं क्योंकि तब तक भड़ास निकालने को और कई ख़बरें हमारे सामने आ चुकी होती हैं। बहरहाल, यहाँ ये सब कहने का तात्पर्य ये है कि जब इन छात्रों को लेकर बहस छिड़ी ही है तो उसे सही अंजाम तक पहुँचाया जाय। और अंजाम तक हम तब पहुँचेंगे जब समस्या को जड़ से समझेंगे।

सच तो यह है कि जिस ‘रूबी’ और ‘सौरभ’ पर हम अपनी भड़ास निकाल रहे हैं वे स्वयं हमारी ‘अव्यव्स्था’ और हमारे नीति-निर्देशकों की ‘अदूरदर्शिता’ के शिकार हैं। चलिए हम कुछ आँकड़ों की मदद से इसे समझने की कोशिश करें। आपको ये जानकर हैरत होगी कि बिहार में एक लाख की आबादी पर मात्र सात कॉलेज हैं जबकि राष्ट्रीय औसत 27 कॉलेज का है। यही नहीं, बिहार में प्रति कॉलेज 2098 विद्यार्थियों का नामांकन होता है, जबकि राष्ट्रीय औसत 764 है। ऐसे में आप कैसी शिक्षा और कैसे परिणाम की उम्मीद कर सकते हैं भला..?

खैर, ये तो बात हुई पढ़ने वालों की। अब जरा पढ़ाने वालों की बात करें। यहाँ तो स्थिति और भी भयावह है। क्या आप यकीन करेंगे कि बिहार में कई ऐसे कॉलेज हैं जिनमें कई-कई विषयों में एक भी प्राध्यापक नहीं हैं लेकिन ना केवल ‘जादुई’ तरीके से परीक्षा फॉर्म भरने के लिए जरूरी छात्रों की 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी हो जाती है बल्कि वे छात्र ‘रूबी’ और ‘सौरभ’ की तरह जादुई अंक भी पा लेते हैं।

मजे की बात तो यह कि ये सब कुछ सरकार की नाक के नीचे हो रहा होता है और सरकार कभी गांव-गांव में शराब के ठेके खुलवाने में व्यस्त होती है तो कभी बंद कराने में। माना कि शराब जहर है और उसे बन्द करना चाहिए लेकिन इन छात्रों के जीवन में जो ‘विष’ घुल रहा है उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा..? महज खानापूरी करने वाले उपायों के बदले ठोस पहल कब होगी..? क्यों नहीं इस बात की कोशिश करें कि राज्य में छात्रों की संख्या और आज की जरूरत के मुताबिक कॉलेज हों, उनमें पढ़ाने वाले शिक्षक हों और सबसे अहम बात ये कि आधारभूत ढाँचा भी हो। अगर अब भी हम नहीं चेते तो बिहार से हर साल होने वाले लाखों छात्रों का पलायन रुकने की बजाय बढ़ता ही चला जाएगा।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..?

क्या आप जानते हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है..? अगर आप नहीं जानते तो  जानना जरूरी है आपके लिए क्योंकि ये जाने बिना आप बिहार में इंटर की परीक्षा में टॉप नहीं कर सकते। जी हाँ, चौंकिए नहीं। मैं पूरे होशो-हवास में ये लिख रहा हूँ और लिखने का कारण भी है। अरे जनाब, अगर बिहार के इंटर आर्ट्स की टॉपर कह रही हैं कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है तो जरूर होती होगी। इस एक जवाब को गलत कहकर हम अपने ‘इंजीनियर’ मुख्यमंत्री, ‘नौंवी पास’ उपमुख्यमंत्री और नाम के पहले ‘डॉ.’ लगाने वाले शिक्षा मंत्री समेत अपनी पूरी शिक्षा-व्यवस्था को कठघरे में क्यों खड़ा कर दें भला..?

मैं कतई मजाक के मूड में नहीं। बहुत तकलीफ हो रही है आज तमाम सोशल साइट्स पर बिहार की किरकिरी होते देख। आज पूरी दुनिया हमारी शिक्षा-व्यवस्था का मजाक उड़ा रही है। बिहार में प्रतिभा के धनी छात्रों की कमी हो ऐसा हरगिज नहीं। लेकिन आज बिहार के इंटर बोर्ड की परीक्षा में आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स के टॉपर्स पर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं वो शर्मसार करने वाला है।

बिहार के शिक्षामंत्री डॉ. अशोक चौधरी के निष्पक्ष और कदाचारमुक्त परीक्षा के दावों की पोल उस वक्त खुल गई जब एक स्टिंग ऑपरेशन का विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इस विडियो के अनुसार इंटर आर्ट्स की टॉपर (रूबी राय) को यह पता है कि पॉलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है और साइंस टॉपर (सौरभ श्रेष्ठ) इस बात से अनभिज्ञ हैं कि इलेक्ट्रॉन और प्रोटोन में क्या अन्तर होता है..?

मजे की बात तो यह कि तीनों संकाय के टॉपर एक ही कॉलेज के हैं। यह कॉलेज है वैशाली जिले के पास भगवानपुर का विशुनराय कॉलेज। बता दें कि इस कॉलेज का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले साल भी यह कॉलेज रिजल्ट में गड़बड़ियों के कारण चर्चा में रहा था और शिक्षा मंत्री ने इस कॉलेज का रिजल्ट रोक दिया था। अब जब कि इस साल इस कॉलेज ने अनियमितता की सारी सीमा पार कर दी है, यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा विभाग ने इस पर ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई थी। आज नतीजा सामने है।

बहरहाल, बिहार के शिक्षा मंत्री ने यह विडियो देखने के बाद कहा कि विडियो देखकर उन्हें भी धक्का लगा है। यह भी बता दें कि बिहार बोर्ड ने आर्ट्स और साइंस के पहले पाँच टॉपर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया है। यही नहीं, इनकी लिखित परीक्षा भी होगी और जरूरत पड़ने पर कॉपियों का मिलान भी किया जाएगा। बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने कहा कि इंटरव्यू में फेल होने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई होगी और उनका रिजल्ट रद्द भी किया जा सकता है।

यहाँ बोर्ड के अध्यक्ष, उनके शिक्षा मंत्री, सरकार के उपमुख्यमंत्री और सर्वेसर्वा मुख्यमंत्री से एक सीधा सवाल है कि क्या केवल उन छात्रों पर कार्रवाई से ही ये समस्या हल हो जाएगी, जबकि हम जानते हैं कि ये छात्र उस पेड़ की छोटी-छोटी टहनियां भर हैं जिसकी विशाल जड़ में ‘घुन’ बहुत पहले लग चुका था और हमने कुछ करने की जहमत नहीं उठाई..?

चलते-चलते…

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि कोई कदाचार या भ्रष्टाचार केवल सरकार या प्रशासन के चाहने से दूर नहीं हो सकता। ऐसा तभी सम्भव है जब हमारे प्रथम तीन शिक्षक माता-पिता और गुरु ह्रदय से ऐसा चाहें।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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