तुम ये कैसे जुदा हो गए… हर तरफ हर जगह हो गए..!

लिखने वाले बहुत हुए और बहुत होंगे पर ऐसे कितने हैं जिनकी दो पंक्तियां आप सुनें और आपके मुँह से बरबस निकल पड़े कि ये ‘फलां’ की ही हो सकती हैं। शब्दों पर अपनी छाप लगा देना सबके बस की बात नहीं। माँ सरस्वती ये कृपा अपने बिरले पुत्रों पर करती हैं और निदा फ़ाज़ली उन्हीं में एक थे। “कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता/ कहीं जमीं तो कहीं आस्मां नहीं मिलता” या “दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है/ मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है” या “तू इस तरह मेरी ज़िन्दगी में शामिल है” या फिर “होशवालों को ख़बर क्या, बेख़ुदी क्या चीज़ है” जैसी पंक्तियां आप सुनते हैं तो दिल और दिमाग पर बस एक अक्श उभरता है और वो है निदा फ़ाज़ली का जिन्होंने कल मुंबई में 78 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। नियति की विडंबना देखिए, लाखों दिलों को धड़कना सिखा देने वाले शायर ने ये दुनिया भी छोड़ी तो दिल का दौरा पड़ने से..!

निदा फ़ाज़ली का जन्म 1938 में दिल्ली में रहने वाले एक कश्मीरी परिवार में हुआ था। मुर्तुजा हसन और जमील फातिमा के पुत्र निदा का असली नाम मुक्तदा हसन था। शायर के तौर पर उन्होंने खुद को निदा फ़ाज़ली कहलाना पसंद किया। ‘निदा’ का अर्थ है ‘स्वर’ और उसके साथ ‘फाजली’ की मौजूदगी है दूर रहकर भी कश्मीर से हमेशा जुड़े रहने के लिए।

आधुनिक साहित्य में गंगा-जमुनी तहजीब को जिन्दा रखने वालों में निदा की कोई सानी नहीं। वो जितने उर्दू के थे उतने ही हिन्दी के। उन्हें शायरी की प्रेरणा सूरदास और कबीर से मिली थी। उन्हें जितना उनकी ग़जलों के लिए याद किया जाएगा उतना ही बेहद आसान भाषा में लिखे दोहों के लिए। 1990 के दशक में उनके दोहों का एलबम ‘इनसाइट’ बहुत लोकप्रिय हुआ था जिसे जगजीत सिंह ने आवाज़ दी थी। ये एलबम भारत की मिली-जुली संस्कृति, सादगी और इंसानियत का जैसे आईना था। जगजीत सिंह और निदा फ़ाज़ली जब-जब साथ आए दोनों ने हर बार मिलकर बस ‘जादू’ ही तो रचा।

पद्मश्री (2013) और साहित्य अकादमी (1998) जैसे पुरस्कारों से सम्मानित निदा फ़ाज़ली सच्चे अर्थों में आम जनता के शायर थे और उनका ‘आम’ होना उन्हें और भी ‘खास’ बना देता है। जहाँ एक ओर उन्होंने ‘सफर में धूप तो होगी’, ‘खोया हुआ सा कुछ’, ‘आँखों भर आकाश’, ‘मौसम आते-जाते हैं’, ‘लफ्जों के फूल’, ‘मोर नाच’, ‘आँख और ख़्वाब के दर्मियां’ और ‘शहर में गांव’ जैसी यादगार कृतियां दीं वहीं ‘आहिस्ता-आहिस्ता’, ‘आप तो ऐसे न थे’, ‘रजिया सुल्तान’, ‘इस रात की सुबह नहीं’, ‘सरफरोश’ और ‘सुर’ जैसी फिल्मों को अपने गीतों से अमर कर दिया। हिन्दी-उर्दू जुंबां की शायरी की बात करें तो हिन्दी सिनेमा में मजरूह सुल्तानपुरी के बाद निदा फ़ाज़ली का ही नाम आएगा।

मंदिर-मस्जिद के नाम पर जहाँ आज भी दंगे होते हों वहाँ ये लिखने का साहस निदा फ़ाज़ली ही कर सकते थे कि “बच्चा बोला देखकर मस्जिद आलीशान, एक खुदा के पास इतना बड़ा मकान”। निदा ने ताउम्र बस एक धर्म जाना और वो था इंसानियत का धर्म। “घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें/ किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए” – धर्म के मर्म को इस तरह बस निदा ही बयां कर सकते थे। आज जबकि वो हमारे बीच नहीं हैं, उन्हीं के शब्दों में बस इतना कहा जा सकता है “तुम ये कैसे जुदा हो गए… हर तरफ हर जगह हो गए”। इस अजीमोशान शायर को मधेपुरा अबतक की श्रद्धांजलि।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मोदी मिले दाऊद से… ये क्या कह दिया आजम ने..?

उत्तर प्रदेश के कद्दावर कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान प्रभावशाली मुस्लिम नेता माने जाते हैं। हालाँकि मुस्लिम वोट बैंक पर उनकी कितनी पकड़ है ये विवाद का विषय हो सकता है लेकिन ये बात निर्विवाद रूप से कही और मानी जा सकती है कि राज्य की राजनीति और खास तौर पर समाजवादी पार्टी की राजनीति पर उनकी पकड़ बहुत गहरी है। इतनी गहरी कि वो जब जो चाहें कर दें, जो चाहें बोल दें… उन्हें रोकने और टोकने वाला कोई नहीं। उन्हें ‘चाचा’ कहने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश की तो छोड़ें, सपा सुप्रीमो मुलायम भी उनके मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे रहते हैं।

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के साथ उनके कथित ‘दुर्व्यवहार’ का मामला सामने आया था। ये तो एक बानगी भर है। वैसे भी आजम आए दिन अपने बयानों से अपनी पार्टी को ‘असहज’ स्थिति में डालते रहे हैं। लेकिन इस बार तो उन्होंने हद ही कर दी। परसों उन्होंने एक सनसनीखेज बयान दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब पाकिस्तान में नवाज शरीफ और उनके परिवार से मुलाकात कर रहे थे तब उस दौरान कमरे में दाऊद इब्राहिम भी था। हालांकि सरकार ने बिना देर किए इस बयान का पुरजोर खंडन किया। सरकारी प्रवक्ता फ्रैंक नरोन्हा ने आजम के बयान को पूरी तरह आधारहीन, तथ्यहीन और झूठा बताया। लेकिन तब तक आजम ‘सुर्खियां’ बटोर चुके थे।

कहने को आजम खान यहाँ तक कहते हैं कि बादशाह (मोदी) कहें तो सबूत के तौर पर तस्वीर भी दिखा सकता हूँ। नवाज शरीफ के यहाँ उनकी माँ से मोदी की मुलाकात के दौरान साथ में अडानी और जिन्दल भी थे। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे पीएम पाक के पीएम को पश्मीना शॉल और मलीहाबादी आम भेजते हैं तो वहाँ से सींक कबाब आता है। इसके भी मेरे पास सबूत हैं। उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि कबाब लौकी से नहीं बनते हैं।

यहाँ एक साथ कई प्रश्न उठते हैं। पहला, अगर आजम ओछी राजनीति और सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा नहीं कर रहे हैं और उनके पास सचमुच कोई ‘सबूत’ है तो उसे सामने लाने में देर किस बात की..? दूसरा, अगर किसी प्रदेश का मंत्री बिना किसी ‘सबूत’ के देश के प्रधानमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगा रहा है तो ऐसे में संविधान, संसद, सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की क्या भूमिका रह जाती है..? तीसरा, क्या सचमुच ऐसे बयानों से उन्हें या उनकी पार्टी को लाभ हो सकता है..? और चौथा, ऐसे में हमारे लोकतंत्र का क्या भविष्य रह जाएगा..?

सच तो ये है कि ऐसे सवालों के जवाब ढूँढ़ने के लिए जैसा ‘नैतिक बल’ चाहिए वो आज की तारीख में किसी दल और किसी नेता के पास सौ फीसदी मिलना नामुमकिन-सा है। हमाम में कमोबेश सब नंगे दिखाई देते हैं। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और वहाँ चुनाव सिर पर है। देश की दिशा तय करने में इस राज्य ने हमेशा से बड़ी भूमिका निभाई है। क्या ये उम्मीद की जाय कि उत्तर प्रदेश इस चुनाव से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा की नई लकीर खींच पाने की सफल शुरुआत करेगा..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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आईपीएल में गुजरात लायंस की ओर से खेलेगा बिहार का ‘शेर’ ईशान

क्रिकेट की दुनिया में बिहार की उम्मीदों को पर देने वाले ईशान किशन आईपीएल के नौवें सत्र में गुजरात लायंस की ओर से खेलेंगे। आईसीसी अंडर-19 विश्व कप में भारत की जूनियर टीम के कप्तान ईशान आईपीएल के लिए चुने जाने वाले पटना के पहले और बिहार के दूसरे खिलाड़ी हैं। उनसे पहले नालंदा के तेज गेंदबाज वीर प्रताप सिंह का चयन आईपीएल की टीम सनराइजर्स हैदराबाद के लिए हुआ था। हालाँकि नौवें सत्र के लिए वीर प्रताप को किसी टीम नहीं खरीदा। अब बिहार की अपेक्षाओं का सारा भार ईशान के कंधों पर होगा। बता दें कि महेन्द्र सिंह धोनी को आदर्श मानने वाले ईशान उन्हीं की तरह विकेटकीपर बल्लेबाज हैं।

आईपीएल के लिए बेटे के चयन से फूले नहीं समा रहे पिता प्रणव किशन पांडेय कहते हैं कि ईशान का क्रिकेट के इस लोकप्रिय फॉर्मेट के लिए चुना जाना बिहार के लिए गौरव की बात है। दुनिया भर के बेहतरीन क्रिकेटरों के साथ खेलने से उसके खेल में और निखार आएगा। उन्होंने बताया कि यह ईशान के लिए खुद को साबित करने का शानदार मौका है। बता दें कि पटना के डीपीएस के छात्र रहे ईशान को क्रिकेट खेलने की वजह से एटेंडेंस पूरा नहीं कर पाने के कारण स्कूल से निकाल दिया गया था। लेकिन पिता ने हार नहीं मानी और बेटे की खेल प्रतिभा पर भरोसा कर उसका दाखिला अश्विनी पब्लिक स्कूल में कराया जहाँ उसे क्रिकेट खेलने की सुविधा मिली और वो अपने ‘गन्तव्य’ की ओर कदम बढ़ा पाया।

बिहार के प्रसिद्ध क्रिकेटर अमीकर दयाल के शिष्य ईशान ने क्रिकेट की बारीकियां पटना में ही सीखीं। तीन साल पहले क्रिकेट खेलने वे रांची गए जहाँ सेल के कप्तान अरुण विद्यार्थी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और सेल के लिए खेलने का मौका दिया। ईशान ने अपने करियर की शुरुआत रणजी ट्रॉफी ग्रुप सी (प्रथम श्रेणी क्रिकेट) में 2014 में की। इसके बाद इस होनहार खिलाड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले भारत की जूनियर टीम के कप्तान और अब आईपीएल के लिए चुने जाकर इस खिलाड़ी ने अपनी नैसर्गिक प्रतिभा साबित की है। बता दें कि गुजरात लायंस ने उनके लिए 35 लाख की बोली लगाई।

ईशान किशन जिस रफ्तार से सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं उसे देखते हुए ये आशा की जानी चाहिए कि वे बहुत जल्द भारतीय टीम के सदस्य बनेंगे। ना केवल बिहार बल्कि झारखंड भी इस विकेटकीपर बल्लेबाज में अगले ‘धोनी’ को देख रहा है। ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से क्रिकेट के इस ‘भविष्य’ को भविष्य के लिए ढेर सारी मंगलकामनाएं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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महादेव की नगरी सिंहेश्वर में सर्वधर्म महासम्मेलन का त्रिदिवसीय महाप्रवचन

अखिल भारतीय सर्वधर्म महासम्मेलन का त्रिदिवसीय महाप्रवचन आगामी 26 से 28 फरवरी तक सिंहेश्वर स्थित मवेशी हाट मैंदान में होने जा रहा है | इस महासम्मेलन की तैयारी आरम्भ कर दी गई है |

महासम्मेलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता सह भूपेन्द्र ना.मंडल विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के वरीय प्राध्यापक डॉ.अनिल कुमार ने मधेपुरा अबतक को बताया कि यह महासम्मेलन महर्षि मेंहीं गुरुधाम के संस्थाप्रधान स्वामी विमलानंद महाराज की देख-रेख व निर्देशन में आयोजित होगी |

श्री कुमार ने कहा कि इस सर्वधर्म महासम्मेलन में देश के विभिन्न सम्प्रदायों के धर्मवक्ता, मौलवी, पादरी, दार्शनिक, सामाजिक चिन्तक, विचारक एवं विभिन्न विषयों के विद्वानों  का महासंगम होगा | उन्होंने कहा कि इस त्रिदिवसीय महासम्मेलन में विशेषकर धर्म के स्वरुप एवं अवधारणा पर चर्चाएँ होगी | समयानुसार प्रातः काल में भजन-कीर्तन, स्तुति-प्रार्थना आदि भी समायोजित किये जायेंगे |

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जहाँ निखिल मंडल बने जदयू के प्रदेश प्रवक्ता वहीं दोबारा मधेपुरा जिलाध्यक्ष मनोनीत हुए सियाराम यादव

सामाजिक न्याय के पुरोधा, मंडल कमीशन के अध्यक्ष, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके बी.पी.मंडल के पौत्र हैं निखिल मंडल, मधेपुरा के विधायक रह चुके मणीन्द्र कुमार मंडल उर्फ़ ओम बाबू के सुपुत्र हैं निखिल एवं आलमनगर के अनेकों बार विधायक रहे व वर्षों विभिन्न विभागों में बिहार सरकार के मंत्री रह चुके नरेन्द्र नारायण यादव के दामाद निखिल मंडल को जनता दल (यूनाईटेड)के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा जदयू प्रदेश प्रवक्ता मनोनीत किये जाने तथा मधेपुरा जिला जदयू अध्यक्ष के रूप में संतोषप्रद कार्यों एवं कार्यकर्ताओं में अपनी विशिष्ठ पहचान बनानेवाले सियाराम यादव को उक्त पद पर दोबारा मनोनीत किये जाने पर जिला जदयू कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गयी |

जिले के सभी प्रखंड अध्यक्षों एवं विभिन्न प्रकोष्ठों के अध्यक्ष-सचिवों द्वारा बधाइयाँ दी जा रही है | जदयू के सभी वरीय/कनीय कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त महागठबंधन के अन्य दलों के कार्यकर्ताओं द्वारा भी खुशियाँ जताई जा रही हैं | सभी ओर से इसके लिए जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हार्दिक बधाइयाँ दी जा रही है |

बधाई देने वालों तथा हर्ष व्यक्त करने वालों में प्रखंड जदयू अध्यक्ष शैलेन्द्र यादव, प्रखंड युवा अध्यक्ष अमित कुमार, मुखिया-मो.मोबीन, मो.मुस्ताक, प्रखंड अध्यक्ष राजीव यादव, राजद के प्रदेश महासचिव बाबा दिनेश मिश्र, युवा प्रखंड अध्यक्ष प्रभात रंजन, राजद प्रखंड अध्यक्ष रूद्र ना.यादव, पवन केडिया, विकाश झा, बिनोद काम्बली, सुनील सिंह राठोर, विजय सिंह राठोर, डॉ.विजेन्द्र कुमार, नरेश पासवान, कमल राम, क्रान्ति यादव, मानेश्वर मेहतर, विकाश झा, मधुलता देवी, मीना देवी, रीना देवी, रानी सहित मो.जुबेर, मो.जहीर आदि शामिल |

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धबौली ने दी प्रतिभावान खिलाड़ी समीर को सच्ची श्रद्धांजलि

धबौली की माटी का वह बेटा समीर किशोरावस्था में ही क्रिकेट के बॉल को ग्रीन पार्क की हवा में लहराने वाला ऐसा बेजोड़ प्रतिभावान खिलाड़ी निकला जिसने कई अवसर पर हारे हुए खेल को जीत कर दिखाया और गाँव के छोटे-बड़े सबके दिल पर राज करने लगा | परन्तु, असमय में ही माता आभा की ममता एवं पिताश्री सुशील के शील व संस्कार से आँखे चुराकर दुनिया के बाउंड्री के पार चला गया | अचानक जाते वक्त उस हवा (समीर) को तो कोई रोक नहीं सका, परन्तु धबौली की संवेदनशील माटी के सचेतन लोगों एवं शिवदत्त महराज के बहादुर बेटों ने समीर को पुनः बुलाकर आरम्भ कर दिया-

Sameer will remain alive in his deeds !
Sameer will remain alive in his deeds !

“समीर मेमोरियल क्रिकेट टूर्नामेंट”– जिसके उद्घाटनकर्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने हृदय से अपने कर्मठ शिष्य इन्द्रभूषण सिंह उर्फ़ इन्दु बाबू जिला पार्षद सहरसा, छात्रनेता श्रीकान्त राय, मुखिया रामशंकर सिंह, प्राणमोहन सिंह, जानकीशरण सिंह, सुधीर सिंह, पूर्व मुखिया-बैद्यनाथ सिंह, राणा रंधीर, विजय कुमार सिंह, गौतम इन्फोटेक के निदेशक अमित गौतम, रणजीत सिंह, निरंजन सिंह, जवाहर सिंह, एच.एम.ब्रजमोहन सिंह सहित अध्यक्ष आयोजन समिति ललित सिंह, चंद्रभानु सिंह एवं मिडियाकर्मी संजय परमार, अंजन सिंह, महादेव, राजेश आदि को साधुवाद दिया, अभिनन्दन किया और इस माटी को बार-बार नमन किया |

आयोजन समिति एवं इनफोटेक के अमित गौतम की ओर से उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सहरसा प्रभात खबर ब्युरो चीफ दीपांकर को पुष्पगुच्छ के साथ गिफ्ट सहित शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया | लगे हाथ उपस्थित खिलाड़ियों एवं दर्शकों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने कहा कि खेल सदा से सामाजिक समरसता एवं सामाजिक सौहार्द बनाये रखने में अग्रणी रहा है | उन्होंने खेल की महत्ता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जब कुछ तथाकथित लोगों द्वारा समाज में विद्वेष फैलाया जाता है तब खिलाड़ी ही खेल के माध्यम से विद्वेष को मिटाकर भाईचारे का माहौल कायम करते हैं | इस खेल में निर्णायक भूमिका निभाने वाले अम्बुज सिंह, रमणजीत सिंह, प्रकाश बुलबुल, प्रशांत प्रीतम, श्रीराम, सानुराज आदि की डॉ.मधेपुरी ने हृदय से सराहना की |

Dr.Madhepuri and Mr.Deepankar elevating Organisers and Players at Green Park, Dhabauli .
Dr.Madhepuri and Mr.Deepankar elevating Organisers and Players at Green Park, Dhabauli .

डॉ.मधेपुरी ने इस धरती के उन लोगों को बार-बार नमन किया जिनके कारण धबौली की महिमामयी विरासत आज भी जीवित है | भारतरत्न डॉ.कलाम को याद करते हुए उन्होंने युवाओं के बीच डॉ.कलाम का खूबसूरत सन्देश परोसा- ये आँखें दुनिया को दोबारा नहीं देख पाएगी, इसलिए तुम्हारे अन्दर जो बेहतरीन है उसे दुनिया को देकर जाना—— यह आयोजन समाज को एक नयी दिशा प्रदान करेगी |

मुख्यअतिथि दीपांकर ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले लोगों ने धबौली में समीर की याद में खेल का आयोजन कर एक अच्छी परम्परा कायम की है | उन्होंने खिलाड़ियों को अनुशासनप्रिय होने की अपील की | मधेपुरा एवं धबौली के बीच होने वाले समीर क्रिकेट मेमोरियल के T-20 फाइनल मैच का श्रीगणेश झंडा फहराकर उद्घाटनकर्ता व अतिथियों द्वारा किया गया |

मास्टर बैंड के द्वारा राष्ट्रीय धुन के साथ दोनों टीम के सभी खिलाड़ियों एवं गणमान्य मैदान के चारो ओर ध्वज को सलामी देते हुए टॉस के लिए मैदान के मध्य में एकत्र हुए जहाँ डॉ.मधेपुरी द्वारा टॉस उछाला गया | धबौली टीम के कप्तान सोना सुधीर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी किया लेकिन मधेपुरा के गेंदबाजों के सामने 20 ओवर में 162 रन बना पाये जबकि मधेपुरा की टीम के कप्तान रोहन ने सूझ-बूझ से खेला और 13 ओवर 2 गेंद पर ही जीत दर्ज कर ली | मैन आफ द मैच का खिताब मधेपुरा के अभिनव को मिला | मैन आफ द सीरीज एवं सर्वश्रेस्ठ बल्लेवाज का खिताब धबौली टीम के विनीत को एवं सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षण सोना सुधीर को मिला |

Former MLA Kishore Kumar Munna, SDM Md.Jahangir Aalam, H.M Braj Mohan Singh LalBaba along with players and audiences celebrating the memories of Sameer at Green Park Dhabauli.
Former MLA Kishore Kumar Munna, SDM Md.Jahangir Alam, H.M Braj Mohan Singh LalBaba along with players and audience celebrating the memories of Sameer at Green Park Dhabauli.

खेल के समापन के साथ विजेता एवं उपविजेता टीम को पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना एवं सहरसा एस.डी.एम. मो.जहाँगीर आलम द्वारा अम्पायरों एवं समस्त खेल प्रेमियों के बीच कप और मेडल प्रदान किया गया | ग्रीनपार्क में दिनभर उत्सवी माहौल बना रहा | प्रो. संजय परमार ने मंच संचालन करते हुए खूब तालियाँ बटोरी |

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इतनी जल्दी खुल गई ‘महागठबंधन’ की गांठ..?

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब लालू ने कहा था कि नीतीश बिहार में शासन चलाएंगे और वे खुद महागठबंधन की ‘मशाल’ लेकर देश भर में घूमेंगे। महागठबंधन के ‘भीतर’ और ‘बाहर’ “ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे” का माहौल दिख रहा था। पर ये क्या बिहार का बॉर्डर पार कर यूपी पहुँचते-पहुँचते उस ‘मशाल’ की लौ धीमी पड़ गई। अब ख़बर ये आ रही है कि यूपी चुनाव में ‘बड़े भाई’ और ‘छोटे भाई’ की राह अलग-अलग होगी। इस बात का संकेत और किसी ने नहीं स्वयं जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने दिया है।

मंगलवार को वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि बिहार जैसा महागठबंधन उत्तर प्रदेश में भी बने, ऐसा जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि यूपी के कई दलों ने नीतीश कुमार से सम्पर्क किया है। पार्टी की सोच है कि वहाँ नीतीश कुमार के ‘नेतृत्व’ में महागठबंधन बने। इस बाबत कई सामाजिक संगठन भी सम्पर्क में हैं। सिंह ने कहा कि यूपी में हमारा ‘हस्तक्षेप’ होगा। हम वहाँ चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेंगे। आने वाले दिनों में नीतीश कुमार वहाँ राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। वैसे बता दें कि नीतीश कल भी गाजीपुर के एक कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

यूपी चुनाव को लेकर जेडीयू का ये स्टैंड अकारण नहीं है। सूत्रों के अनुसार आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बीच पारिवारिक रिश्ता होने के कारण इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आरजेडी यूपी में समाजवादी पार्टी के खिलाफ सक्रिय नहीं होगी। दूसरी ओर, बिहार चुनाव से ठीक पहले महागठबंधन से सपा के अलग हो जाने के कारण जेडीयू मुलायम के साथ किसी भी प्रकार के राजनीतिक तालमेल के पक्ष में नहीं है।

जेडीयू ने यूपी में अपनी जमीन तलाशने को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और प्रधान महासचिव केसी त्यागी पहले से ही ‘मिशन यूपी’ पर थे। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद यूपी की किलेबंदी की कवायद में कूद पड़े हैं। नीतीश अभी दिल्ली प्रवास पर हैं और बताया जा रहा है कि इस प्रवास का मूल उद्देश्य यूपी चुनाव से जुड़ी सम्भावनाओं पर काम करना है। उनकी मुलाकात पूर्वी उत्तर प्रदेश में मजबूत पकड़ रखने वाली ‘पीस पार्टी’ के नेता अय्यूब अंसारी और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजीत सिंह से तय है। इसके अतिरिक्त जेडीयू ‘अपना दल’ के सम्पर्क में भी है।

ये तो हुई ‘बड़े भाई’ और ‘छोटे भाई’ की पार्टियों की बात। यूपी चुनाव को लेकर बिहार के महागठबंधन में शामिल तीसरी पार्टी कांग्रेस का रुख देखना भी कम दिलचस्प नहीं होगा। फिलहाल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वैसे असम में नीतीश कांग्रेस को आगे कर जिस तरह ‘भाजपाविरोधी’ महागठबंधन की कोशिश में लगे हुए हैं उसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यूपी में भी नीतीश के प्रस्तावित महागठबंधन से देर-सबेर कांग्रेस का ‘जुड़ाव’ हो जाय। ऐसे में सबकी निगाह ‘अकेली’ पड़ गई आरजेडी की प्रतिक्रिया पर होगी और साथ में इस पर भी कि क्या उस ‘प्रतिक्रिया’ का बिहार पर भी कोई ‘असर’ होगा..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा ने पूरे उत्साह के साथ मनाई मनीषी भूपेन्द्र की जयंती

समाजवाद को ताजिन्दगी ओढ़ने-पहनने व बिछाने वाले मनीषी भूपेन्द्र नारायण मंडल की राजकीय जयन्ती पटना में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव द्वारा, मधेपुरा के भूपेन्द्र चौक पर डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की अध्यक्षता में बिहार सरकार के आपदा प्रबन्धन मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर द्वारा तथा उनके पैतृक गाँव रानीपट्टी में प्रो.श्यामल किशोर यादव की अध्यक्षता में समस्त जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों द्वारा और अन्त में बी.एन.मंडल वि.वि. के ऑडिटोरियम में सम्पदा पदाधिकारी डॉ.शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में संस्थापक कुलपति डॉ.रमेन्द्र कुमार यादव रवि द्वारा अनेक शिक्षाशास्त्रियों- पूर्व कुलपति डॉ.जयकृष्ण प्र.यादव, पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, प्रतिकुलपति डॉ.जे.पी.एन.झा, अभिषद सदस्य विद्यानन्द यादव, डॉ.परमानंद यादव सहित समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी एवं शिक्षक संघ के महासचिव डॉ.अशोक कुमार की उपस्थिति में दिनभर उत्सवी माहौल में मनायी गई |

Honourable Minister Prof.Chandrashekhar along with Dr.Madhepuri and Teachers, Students with Social Activists celebrating Bhupendra Jayanti at Bhupendra Chauk, Madhepura .
Honourable Minister Prof.Chandrashekhar along with Dr.Madhepuri and Teachers, Students with Social Activists celebrating Bhupendra Jayanti at Bhupendra Chauk, Madhepura .

सर्वप्रथम भूपेन्द्र चौक पर गाजे-बाजे एवं ढ़ोल-नगाड़े के साथ आये दर्जनों सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों के बच्चे जिसमें दार्जिलिंग पब्लिक स्कूल के निदेशक किशोर कुमार, तुलसी पब्लिक स्कूल के श्यामल कुमार सुमित्र, ज्ञानदीप निकेतन के निदेशक चिरामणि यादव, यू.के.इंटरनेशनल सहित अन्य स्कूली बच्चों के बीच मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर एवं डॉ.मधेपुरी ने सर्वप्रथम उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और मंत्री प्रो.चन्द्रशेखर ने कहा कि हमलोग भूपेन्द्र बाबू के विशाल चारित्रिक गुणों में से एक भी गुण को अपना लें तो समाज का भारी कल्याण होगा | वहीं डॉ.मधेपुरी ने कहा कि जो खुद के लिए जीता है वह मर जाता है, जो औरों के लिए जीता है वह कभी नहीं मरता ! भूपेन्द्र बाबू सदा औरों के लिए जीते रहे- वे कभी नहीं मरेंगे, सदा अमर रहेंगे——!! श्रद्धांजलि देने वालों में उनके परिवार के सदस्यों सहित दशरथ प्र.सिंह, इन्द्र ना.प्रधान, परमेश्वरी प्र.यादव, सचिन्द्र महतो, प्रो.विजेन्द्र ना.यादव, तेज ना.यादव, प्रो.एन.के.निराला, डॉ.अरुण कुमार, संतोष कुमार प्राणसुखका, योगेन्द्र महतो आदि प्रमुख थे |

Leading Schools of Madhepura Participating in Bhupendra Jayanti at Bhupendra Chauk, Madhepura .
Leading Schools of Madhepura Participating in Bhupendra Jayanti at Bhupendra Chauk, Madhepura .

वहीं वि.वि.ऑडिटोरियम में भूपेन्द्र जयंती समारोह सह वि.वि.स्थापना दिवस का उद्घाटन करते हुए संस्थापक कुलपति डॉ.रवि ने कहा कि भूपेन्द्र बाबू सरीखे लोग कभी-कभी अवतरित होते हैं, उनका प्रादुर्भाव होता है—- उन्होंने भूपेन्द्र बाबू के समाजवाद पर विस्तार से चर्चा करते हुए लोगों से उनके आदर्शों के अनुरूप काम करने की बातें कही |

Honourable Founder Vice-Chancellor Dr.R.K.Ravi and Dr.J.k.Yadav (ex-V.C) along with Pro.vice-chancellors and Syndicate Members----- Celebrating Bhupendra Jayanti at B.N.Mandal University Auditorium, Madhepura .
Honourable Founder Vice-Chancellor Dr.R.K.Ravi and Dr.J.k.Yadav (ex-V.C) along with Pro.vice-chancellors and Syndicate Members—– Celebrating Bhupendra Jayanti at B.N.Mandal University Auditorium, Madhepura .

पूर्व कुलपति डॉ.जयकृष्ण प्रसाद यादव ने कहा कि वि.वि. के सबसे बड़े पर्व पर भी ऐसी उदासीनता इसके कार्य दक्षता पर सवाल खड़ा करता है | प्रतिकुलपति डॉ.जे.पी.एन.झा ने भूपेन्द्र बाबू के आचरण को अपने-अपने मन में उतारने को ही सच्ची श्रद्धांजलि कही |

जहाँ पूर्व प्रतिकुलपति डॉ.के.के.मंडल, अभिषद सदस्य विद्यानंद यादव, प्रो.परमानंद यादव, शिक्षक संघ के महासचिव डॉ.अशोक कुमार आदि ने विस्तार से भूपेन्द्र बाबू के आचरण को उजागर करते हुए वि.वि. की वर्तमान स्थिति पर आक्रोश व्यक्त किया वहीं डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने वि.वि. स्थापना दिवस के बाबत खुलासा करते हुए कहा कि 1991 के 4 फरवरी को ही भूपेन्द्र चौक वाले उनकी प्रतिमा का उद्घाटन करने आये थे राष्ट्रीय नेता शरद-लालू-नीतीश | तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के द्वारा यह कहने पर कि प्रतिमा मंडप तो सुन्दर बना है परन्तु मूर्ति का साइज़ बहुत छोटा है- के जवाब में डॉ.मधेपुरी ने कहा- आप चाहेंगे तो साइज़ तुरंत बढ़ जाएगा सर ! मधेपुरा के लोग बहुत दिनों से वि.वि. के लिए संघर्ष कर रहे हैं…… आज ही घोषणा कर दीजिए ना सर !!…….. और संध्या पांच बजे उस प्रतिमा से प्रेरित होकर रासबिहारी विद्यालय के ऐतिहासिक मैदान में घोषणा कर दी मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने | इसके अतिरिक्त डॉ.मधेपुरी ने कई संस्मरणों के सहारे उनके व्यक्तित्व एवं चरित्र की ऊँचाइयों को सामने लाया |

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए डॉ.ललितेश मिश्रा, डॉ.राम भजन मंडल, रघुनाथ यादव आदि अन्य बुद्धिजीवियों ने कहा कि समाजवादी चिंतक भूपेन्द्र बाबू के आदर्शों से हम दूर होते जा रहे हैं | मौके पर वित्तीय सलाहकार सी.आर.डीगवाल, वित्त पदाधिकारी हरिकेश नारायण सिंह, डॉ.इन्द्र ना.यादव, डॉ.अब्दुल लतीफ़, डॉ.सिद्धेश्वर काश्यप, डॉ.हीराकांत मंडल, डॉ.प्रज्ञा प्रसाद, डॉ.कुशेश्वर यादव, डॉ.रामेश्वर प्रसाद, डॉ.आलोक कुमार, मनोज भटनागर, डॉ.बैद्यनाथ साह, सचिव अखिलेश्वर नारायण आदि ने पुष्पांजलि-श्रद्धांजलि दिया |

प्रभारी कुलसचिव प्रो.विश्वनाथ विवेका ने अतिथियों का स्वागत किया, प्रो.दयानन्द ने मंच संचालन एवं डॉ.आर.के.पी.रमण ने धन्यवाद ज्ञापन किया |

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जी हाँ, आपके प्रधानमंत्री के पास नहीं है अपनी गाड़ी..!

आज जबकि भ्रष्टाचार पर्याय बन गया हो राजनीति का और ‘बड़े’ स्तर पर होने वाले ‘छोटे’ घोटाले भी अरबों के होते हों, ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री के पास अपनी गाड़ी तक ना हो तो क्या कहेंगे आप..? आज जबकि नेताओं के लिए ये याद रखना तक मुश्किल हो कि उनके कितने बैंकों में कितने खाते हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री के पद पर आसीन व्यक्ति का दिल्ली में कोई खाता ही ना हो और कैश के नाम पर हों केवल 4700 रुपये तो यकीनन ये बात विस्मय से भर देगी। यकीन मानें हम यहाँ कोई पहेली नहीं बुझा रहे, ये सोलह आने सच है। जी हाँ, ये ब्योरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सम्पत्ति का है जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने जारी किया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा घोषित ताजा जानकारी के मुताबिक मोदी के हाथ में पिछले वित्त वर्ष के अन्त में मात्र 4700 रुपया कैश था। वित्त वर्ष के मध्य में यानि 18 अगस्त 2014 को घोषित विवरण में यह राशि 38,700 रुपये की थी। ये जानकारी भी सामने आई कि प्रधानमंत्री मोदी अब भी अपने पुराने बैंक का खाता ही बरकरार रखे हुए हैं। दिल्ली में उनका कोई बैंक खाता नहीं है। इस घोषणा के मुताबिक प्रधानमंत्री के पास कोई मोटर वाहन भी नहीं है।

चल सम्पत्ति की बात करें तो प्रधानमंत्री के पास सोने की चार अंगूठियां हैं जिनका कुल वजन करीब 45 ग्राम और मार्च 2015 के अनुसार कुल मूल्य करीब 1.19 लाख रुपये था। 18 अगस्त 2014 को इन अंगूठियों की कीमत 1.21 लाख रुपये आंकी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी के पास 20 हजार रुपये का एलएंडटी इन्फ्रा बॉन्ड (टैक्स सेविंग), करीब 5.45 लाख रुपये के राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र तथा 1.99 रुपये की जीवन बीमा पॉलिसी है। बता दें कि उनकी कुल चल सम्पत्ति 41.5 लाख रुपये की है।

अचल सम्पत्ति के रूप में मोदी के पास गांधीनगर स्थित एक आवासीय परिसम्पत्ति का चौथाई हिस्सा है। उनके हिस्से में इस परिसम्पत्ति का 3531.45 वर्गफुट का दायरा है जिसमें निर्मित क्षेत्र 169.81 वर्गफुट है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह विरासत में मिली परिसम्पत्ति नहीं है। घोषणा के मुताबिक इसे उन्होंने अक्टूबर 2002 में खरीदा था और उस समय इसका मूल्य एक लाख 30 हजार 488 रुपये था। इस जमीन पर निर्माण आदि के तौर पर 2 लाख 47 हजार 208 रुपये का निवेश किया गया। इस तरह इस परिसम्पत्ति की कुल लागत 3 लाख 77 हजार 696 रु. हुई। 13 साल में इसकी कीमत लगभग 26 गुना बढ़ गई और 2015 में इसका बाज़ार मूल्य एक करोड़ आंका गया।

इस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास कुल चल-अचल सम्पत्ति एक करोड़ 41 लाख 50 हजार की है। स्पष्ट है कि इसमें मुख्य योगदान एक रिहायशी प्रॉपर्टी का है और वो भी 13 साल की अवधि में मूल्य बढ़ जाने के कारण।

हमें याद रखना होगा कि हम यहाँ उस शख़्स की बात कर रहे हैं जो प्रधानमंत्री होने से पूर्व गुजरात जैसे राज्य का मुख्यमंत्री भी रह चुका है और वो भी लगातार चार बार। गुजरात दंगों के कारण उन्हें आरोपों और आलोचनाओं का सामना बेशक करना पड़ा लेकिन उनके धुर विरोधी भी उन पर किसी घोटाले का आरोप नहीं लगा सके। प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सम्पत्ति का जो ब्योरा सामने आया है उससे उनकी इस ‘शुचिता’ पर मुहर लगती है। ‘अर्थ’ के युग में वो ‘अनर्थ’ से बचे हुए हैं तो ये सचमुच बड़ी बात है। भौतिकता के पीछे आँख पर पट्टी बांध दौड़ने वालों को क्या अपने प्रधानमंत्री से सीख नहीं लेनी चाहिए..? थोड़ी देर के लिए राजनीति से ऊपर उठकर..?

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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