‘शत्रु’ का कहा ‘सच’ है या ‘शत्रुता’..?

बिहार में दो चरण के मतदान के बाद क्या सचमुच भाजपा नेताओं के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं..? पहले और दूसरे चरण की वोटिंग के बाद कोई ‘स्पष्ट रुझान’ ना देख क्या भाजपा के तमाम रणनीतिकारों को ‘दिल्ली’ जैसी कोई सम्भावना दिखने लगी है..? क्या उम्मीद के विपरीत परिणाम की आशंका से प्रधानमंत्री मोदी की बिहार की कई प्रस्तावित रैलियां रद्द की गई हैं..? इन सारे सवालों के जवाब तो खैर समय आने पर मिलेंगे लेकिन भाजपा के अपने ही ‘घर’ के भीतर से जो बयान सामने आया है वो ‘समय’ से पहले ‘समय’ को आमंत्रित करने जैसा है।

भाजपा के घर के भीतर से ये बयान बीच चुनाव में ‘शत्रु’ के अलावे कौन दे सकता है भला। जी हाँ, ‘शत्रु’ यानि शत्रुघन सिन्हा। बीते 17 अक्टूबर को चैनल न्यूज़ 18 के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “बिहार में पहले दो चरण के मतदान के बाद प्रदेश बीजेपी नेताओं के चेहरे की हवाईयां उड़ी हुई हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि अन्तिम समय में प्रधानमंत्री की जनसभाओं की संख्या कम करने से क्या नकारात्मक संदेश नहीं जा रहा है..? ‘शत्रु’ ने बिना रुके यह भी कहा कि भाजपा के नेता “हम तो डूबे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे” वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं।

पहले सिनेमा, फिर राजनीति में अलग पहचान रखने वाले और अब अलग-थलग पड़ गए भाजपा सांसद शत्रुघन सिन्हा की नाराज़गी कोई नई बात नहीं। अपनी पार्टी के निर्णयों और नेताओं को लेकर आए दिन अपने बयानों से वो पार्टी को असहज स्थितियों में डालते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने जो कहा है और वो भी बिहार के बीच चुनाव में, भाजपा को उससे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बहरहाल, शत्रुघन सिन्हा ने क्या कहा उसे भूल भी जाएं तो भी इस ‘थ्योरी’ को सिरे से नकारना मुश्किल है कि अगर ‘धुआँ’ है तो कम या ज्यादा कहीं ‘आग’ भी होगी ही। और फिर ‘शत्रु’ की बात की पुष्टि करते दिख रहे कुछ घटनाक्रम भी हैं जिन पर निगाह डालनी होगी। सबसे पहले तो ये कि ‘द वीक’ की ख़बर के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बिहार में प्रस्तावित रैलियों मे से छह रैलियाँ रद्द कर दी गई हैं। यही नहीं, प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बिहार में लगे बड़े-बड़े पोस्टरों को उतारा जा रहा है। माना जा रहा है कि ऐसा उम्मीद के विपरीत नतीजे आने की स्थिति में बड़े नेताओं को ‘बचाने’ के लिए किया जा रहा है। मोदी और शाह की जगह सुशील कुमार मोदी, नंदकिशोर यादव, मंगल पांडेय, सीपी ठाकुर, हुकुमदेव नारायण यादव, अश्विनी चौबे जैसे स्थानीय नेताओं के पोस्टर लगाए जा रहे हैं। और तो और पार्टी ने अपना चुनावी नारा तक बदल दिया है। पहसे नारा था “अबकी बार, मोदी सरकार”, फिर इसे बदलकर किया गया “बदलिए सरकार, बदलिए बिहार” और अब कहा जा रहा है “विकास की होगी तेज रफ्तार, जब केन्द्र-राज्य में एक सरकार।”

हालांकि चुनावी मामलों के कई जानकार इसे भाजपा की सोची-समझी रणनीति बता रहे हैं। दूसरे चरण के मतदान के ठीक पहले भाजपा ने एक नए तरीके का विज्ञापन दिया जिसमें किसी नेता का फोटो नहीं, सिर्फ 11 वादे थे और शीर्षक था “भाजपा का साथ, सबका विकास।”  इसके अलावे एक और पोस्टर है जिस पर एक ओर रामविलास-मांझी-कुशवाहा और दूसरी ओर सुशील कुमार मोदी-नंदकिशोर यादव-मंगल पांडेय की तस्वीरें हैं। कहा जा सकता है कि भाजपा प्रचार में अपने केन्द्रीय और स्थानीय नेताओं के बीच ‘संतुलन’ बनाए रखने के लिए ऐसा कर रही है। जहाँ तक रैलियों की बात है, तो कुछ रैलियां अगर रद्द भी कर दी गई हों, फिर भी अभी प्रधानमंत्री की लगभग 40 सभाएं होनी हैं।

राजनीति का तकाजा है कि शत्रुघन के बयान की व्याख्या भाजपा के विरोधी अपनी तरह से करेंगे और भाजपा उसका जवाब अपने तरीके से देगी। लेकिन ‘शत्रु’ ने जो कहा वो ‘सच’ था या ‘शत्रुता’ थी उनकी, ये देखने की बात होगी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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कोसी में बड़ी पार्टियों के बड़े नेताओं द्वारा की गई महिलाओं की उपेक्षा

कोसी अंचल में विधानसभा की तेरह सीटें हैं जिनमें तीनों जिले मधेपुरा, सहरसा और सुपौल में एक-एक सीट सुरक्षित है | नारी सशक्तिकरण के इस दौर में तेरह सीटों में केवल तीन महिलाओं को प्रत्याशी बनाया गया है | तुर्रा तो यह है कि तीनों के तीनों सुरक्षित क्षेत्रों से ही |

मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर सुरक्षित सीट से हम पार्टी द्वारा उम्मीदवार बनाया गया है मंजू सरदार को | सहरसा जिले के सोनवरसा सुरक्षित सीट से प्रत्याशी बनी है लोजपा नेत्री सरिता पासवान | कोसी के तीसरे जिले सुपौल के त्रिवेणीगंज सुरक्षित सीट से महागठबंधन की ओर से उम्मीदवार बनाया गया है वीणा देवी को | याद करें, 2010 के चुनाव में तीन महिलाओं में दो को सामान्य सीट से उम्मीदवार बनाया गया, केवल एक को ही सुरक्षित सीट से टिकट दिया गया था |

कितनी विडंबना है ! आज की तारीख में भी महिलाओं को अबला मान कर सुरक्षित क्षेत्र की ओर ढकेलने में लगी है ये राजनीतिक पार्टियाँ ! जबकि सभी जानते हैं कि आज बिना हाथ वाली 32 वर्षीया जेसिका कोक्स हवाई जहाज उड़ाती है और महिलाएं फाइटर विमानों में पायलट भी बनती हैं | बहरहाल नारी सशक्तिकरण की दुहाई देने वाली पार्टियों के बड़े-बड़े राजनेताओं की सोच को दीमक क्यों चाटने लगा है ?

चुनाव आयोग के द्वारा जारी किये गये आंकड़े बताते हैं कि कोसी अंचल के तेरहो विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों की कुल संख्या 33 लाख 20 हजार 678 है, जिसमें महिला मतदाताओं की संख्या 15 लाख 76 हजार 265, यानी महिला वोटरों की संख्या 48% है | सोचिये तो सही 13 में तीन महिलाएं और तीनों सुरक्षित सीट पर ही- कहाँ चला गया संविधान प्रदत्त समानता का अधिकार और नर-नारी को बराबरी का दर्जा ….!!!

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एक ओर दुर्गा-काली…… जैसी पूजी जानेवाली देवियाँ और दूसरी ओर भ्रूण हत्याएं झेल रही बेटियाँ !

“ संवदिया ” के बैनर तले स्थानीय एम.एस.पब्लिक स्कूल के परिसर में मंजरी श्रीवास्तव के नाटक “खौफ” की प्रस्तुति की गई जिसका सफल निर्देशन मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षण प्राप्त मो.शहंशाह द्वारा किया गया | सम्पूर्ण प्रस्तुति में भ्रूण-हत्या, दहेज़ व बलात्कार को ही चित्रित नहीं किया गया बल्कि सम्पूर्ण भारतीय वांगमय की संस्कृति को उकेरते हुए तेजी से विलोपित हो रहे नारी सम्मान को भी दर्शाया गया |

नाटक ‘खौफ’ को केवल तीन कलाकारों द्वारा मंचित किया गया | मुख्य भूमिका में निर्देशक मो.शहंशाह के साथ-साथ रवि वर्मा एवं मास्टर शिवम् ने शानदार अभिनय की प्रस्तुति से दर्शकों को हिलने नहीं दिया, बल्कि अन्त तक बांधे रखा |

रंग मंच की व्यवस्था, वेश-भूषा, प्रकाश-ध्वनि, अभिनेताओं की भाव-भंगिमा एवं गीत-रचना सहित मंच सज्जा, रूप-सज्जा एवं सुर-संगीत के लिए सजग होकर अन्त तक लगे रहे- सोनीराज, कार्तिक कुमार, अमित कुमार अंशु, मो.आतिफ, रुपेश-मिथुन-रौशन, प्रीती-रवि-प्रिया, राजकुमार एवं दिलखुश |

आरम्भ में स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा आगत अतिथियों के लिए स्वागत गान प्रस्तुत किया गया | फिर कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी सहित प्रो.श्यामल किशोर, डॉ.विनय चौधरी, डॉ.आलोक कुमार, प्राचार्य शिव नारायण मंडल, सचिव मकेश्वर यादव ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया |

Dr.Bhupendra Madhepuri delivering inaugural speech.
Dr.Bhupendra Madhepuri delivering inaugural speech.

डॉ.मधेपुरी ने उद्घाटन भाषण के क्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं अभिभावकों से कहा- आप अपने बच्चों को जो भी बनाना चाहें वो बनायें, लेकिन रंग कर्म से उन्हें विमुख नहीं होने दें ……| उन्होंने यह भी कहा कि मो.शहंशाह अपने नाटकीय कौशल एवं संवादों के जरिये दर्शकों पर अपने अभिनय का गहरा प्रभाव छोड़ता रहा है |

डॉ.मधेपुरी ने मधेपुरा अबतक को बताया कि शहंशाह के साथ-साथ रवि और शिवम् के अभिनय का प्रवाह उपस्थित दर्शकों को क्षण-दो-क्षण के लिए व्रह्मा-विष्णु-महेश की यादें दिला जाती हैं एवं माँ की यादों को तरोताजा कर जाती हैं | इसके अलावे इन कलाकारों के स्वरों के उतार-चढ़ाव एवं प्रस्तुति के लहजे, यह कि – माँ चाहिए, बहन चाहिए, बहु चाहिए……. लेकिन बेटी नहीं चाहिए…. को सुन-सुनकर नाटकीय प्रदर्शन के दौरान श्रोताओं की आँखें नम हो गई | अभिनय के इन्हीं रूपों एवं स्वरूपों के प्रयोग से ही तो चतुर्दिक रसानुभूति उत्पन्न होने लगी जिसे इन नवोदित कलाकारों की सफलता मानी जा सकती है |

उपस्थित गणमान्यों प्राचार्य श्यामल किशोर यादव, डॉ.आलोक कुमार, डॉ.विनय कुमार चौधरी आदि ने भी अपने-अपने संबोधन में कलाकारों को खूब प्रोत्साहित किया |

Artists of Samvadiya Group.
Amit Kumar Anshu introducing Artists of Samvadiya Group.

अन्त में संवदिया के सचिव सुकेश राणा ने अपने सभी कलाकारों अंजलि-इमरान-आदित्य एवं कुणाल-अमल-उज्जवल सहित शिवानी-शाहनवाज-शकील के साथ मतदाता जागरण गीत की प्रस्तुति देकर कलाकारों को अच्छे प्रदर्शन हेतु साधुवाद दिया | मंच संचालन अमित कुमार अंशु एवं धन्यवाद ज्ञापन अमल कुमार सिंह द्वारा किया गया |

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ये हैं मधेपुरा से विधानसभा की चार सीटों के लिए 61 उम्मीदवार

मधेपुरा जिला में चार विधानसभा क्षेत्र हैं – आलमनगर, बिहारीगंज, सिंहेश्वर (सुरक्षित) एवं जिला मुख्यालय मधेपुरा। 16 अक्टूबर को स्क्रूटनी के दिन दो लोगों की उम्मीदवारी रद्द होने के साथ इन चारों क्षेत्रों के लिए कुल 61 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। अब देखना ये है कि नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक इनमें से कौन-कौन ‘रणछोड़’ बनेंगे और कितने उम्मीदवार 20 अक्टूबर को अपना-अपना चुनाव-चिह्न लेकर 5 नवंबर तक मैदान में डटे रहेंगे।

आलमनगर (क्षेत्र संख्या 70)

इस क्षेत्र से कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। नरेन्द्र नारायण यादव (जदयू), चंदन सिंह (लोजपा), रामदेव सिंह (सीपीआई), जयप्रकाश सिंह (जनअधिकार पार्टी), रविन्द्र सिंह (बसपा), संदीप कुमार (जनता दल राष्ट्रवादी), रचना कुमारी (बहुजन मुक्ति पार्टी) और मो. मुख्तार आलम (जनता दल सेक्यूलर) के अलावे सात निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इन उम्मीदवारों के नाम हैं – गोपाल कुमार, बनारसी मंडल, श्यामदेव पासवान, प्रशांत कुमार सिन्हा, राजेन्द्र महतो, शशिभूषण सिंह एवं निर्मल पासवान।

बिहारीगंज (क्षेत्र संख्या 71)

इस क्षेत्र से कुल 16 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। निरंजन कुमार मेहता (जदयू), डॉ. रविन्द्र चरण यादव (भाजपा), प्रतिभा कुमारी (बसपा), श्वेत कमल (जन अधिकार पार्टी), निखिल कुमार झा (सीपीआई), अभय चन्द्र झा (शिवसेना), कौशल कुमार (भारतीय जन क्रांति दल) और नवीन कुमार मेहता (भारत विकास मोर्चा) जहाँ विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वहीं आठ निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। इनके नाम हैं – मनोज कुमार यादव, ब्रह्मचारी विष्णु प्रभाकर, कमलेश मेहता, मिथिलेश मेहता, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, बेबी कुमारी मंडल एवं मो. गुलाम हुसैन।

सिंहेश्वर (क्षेत्र संख्या 72/ सुरक्षित)

बाबा सिंहेश्वर की नगरी से कुल 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। रमेश ऋषिदेव (जदयू), मंजू सरदार (हम), राजकिशोर सरदार (सीपीएम), अमित भारती (जन अधिकार पार्टी), इंदो देवी (बसपा), संजय पासवान (भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक), ललन पासवान (जनता दल राष्ट्रवादी), उपेन्द्र राम (गरीब जनता दल सेक्यूलर) और दिनेश ऋषिदेव (नेशनल रोडमैप ऑफ इंडिया पार्टी) के अतिरिक्त तीन निर्दलीय उम्मीदवार हैं। ये हैं – अच्छे लाल शर्मा, अगमलाल ऋषिदेव एवं जगदेव राम।

मधेपुरा (क्षेत्र संख्या 73)

जिला मुख्यालय से सबसे ज्यादा 18 उम्मीदवार दो-दो हाथ कर रहे हैं। प्रो. चन्द्रशेखर (राजद), विजय कुमार विमल (भाजपा), गणेश मानव (सीपीआई-एम), डॉ. अशोक यादव (जनअधिकार पार्टी), कपिलदेव पासवान (बसपा), ओमप्रकाश भारती (मानववादी जनता पार्टी), मो. ताहिर (नेशनल रोडमैप ऑफ इंडिया पार्टी), दिनेश यादव फौजी (गरीब जनता दल सेक्यूलर), विजेन्द्र यादव (जनता दल राष्ट्रवादी), कमल कुमार (सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी), मनीष कुमार (बहुजन मुक्ति पार्टी), विनोद कुमार (हिन्द कांग्रेस पार्टी) और प्रो. कामेश्वर यादव (भारतीय जनक्रांति दल डेमोक्रेटिक) के साथ-साथ पाँच निर्दलीय उम्मीदवार भी हैं। इनके नाम हैं – डॉ. विशाल कुमार बबलू, ज्योति मंडल, मो. अलाउद्दीन, मो. अली एवं सुरेश यादव।

यह भी जानें कि मधेपुरा जिले के इन चारों विधान सभा क्षेत्रों में मतदान केन्द्रों की कुल संख्या 1107 तथा मताधिकार का प्रयोग करने वाले मतदाताओं की कुल संख्या 11 लाख 86 हजार 978 है। चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तिथि 5 नवंबर (सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक) तथा मतगणना की तिथि 8 नवंबर (सुबह 8 बजे से) तय की गई है।

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बिहार चुनाव का दूसरा चरण : भय पर उत्साह की जीत

55 प्रतिशत मतदान के साथ बिहार चुनाव का दूसरा चरण भी पूरा हुआ। छह जिलों – रोहतास, जहानाबाद, कैमूर, अरवल, औरंगाबाद और गया – की जिन 32 सीटों के लिए कल मतदान हुआ उनमें 23 सीटें नक्सल प्रभावित थीं। इसके बावजूद मतदाताओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। लोकतंत्र के पर्व पर कहीं भी भय हावी नहीं हुआ। महिला मतदाताओं ने इस चरण में भी बढ़-चढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2010 में इन्हीं सीटों पर 52 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस बार इसमें 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी स्वागत योग्य है।

वोटों के प्रतिशत की बात करें तो कैमूर में सबसे ज्यादा 57.86 प्रतिशत और अरवल में सबसे कम 52 प्रतिशत मत पड़े। वहीं रोहतास में 54.66 प्रतिशत, जहानाबाद में 56.49 प्रतिशत, औरंगाबाद में 52.50 प्रतिशत और गया में 55.54 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

दूसरे चरण में कुल 456 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें 32 महिलाएं शामिल हैं। इस चरण में 86,13,870 मतदाताओं के लिए 9,119 मतदान केन्द्र बनाए गए थे और सुरक्षा की जबरदस्त व्यवस्था की गई थी। शान्तिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए अर्द्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस की कुल 993 कम्पनियां तैनात थीं।

इस चरण के प्रमुख उम्मीदवारों में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (इमामगंज और मखदुमपुर), विधान सभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी (इमामगंज) और भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के तीन सम्भावित उम्मीदवार – पूर्व मंत्री और छह बार विधायक रहे प्रेम कुमार (गया), पूर्व राष्ट्रीय सचिव रामेश्वर चौरसिया (नोखा) और हाल ही में चर्चा में आए और झारखंड में संघ का चेहरा रहे राजेन्द्र सिंह (दिनारा) – शामिल हैं। भाजपा की राज्य इकाई के पूर्व प्रमुख गोपाल नारायण सिंह (नवीनगर), नीतीश सरकार के सहकारिता मंत्री जय कुमार सिंह (दिनारा), पंचायती राज मंत्री विनोद यादव (शेरघाटी) और मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन (कुटुम्बा) के भविष्य का फैसला भी इसी चरण में होना है। नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे रामधनी सिंह (करगहर) भी इसी चरण में चुनाव मैदान में हैं। बता दें कि जेडीयू से टिकट कटने पर इस बार वो सपा की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं।

हालांकि सभी 32 सीटों पर कांटे का मुकाबला देखने को मिल रहा है लेकिन जिस सीट पर सबसे ज्यादा निगाहें लगी हैं वो है ‘सुरक्षित’ सीट इमामगंज। यहाँ दो दिग्गज आमने-सामने हैं। इस सीट के लिए हम के नेता जीतन राम मांझी का मुकाबला जेडीयू के वरिष्ठ नेता उदय नारायण चौधरी से है। चौधरी इस सीट को पाँच बार जीत चुके हैं। दोनों उम्मीदवारों के कद और ‘सांकेतिक महत्व’ को देखते हुए एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए ये सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है। हालांकि मांझी जहानाबाद की मखदुमपुर सीट से भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

महागठबंधन के लिए इस चरण में बहुत कुछ दांव पर लगा है क्योंकि पिछले चुनाव में 32 में से 19 सीटें जेडीयू ने जीती थीं। तब उसकी सहयोगी रही भाजपा के खाते में 10 सीटें गई थीं, जबकि दो सीटें राजद और एक सीट निर्दलीय के हिस्से में गई थी। इस बार महागठबंधन की ओर से जेडीयू और राजद ने 13-13 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। शेष 6 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। वहीं एनडीए की ओर से भाजपा के 16, हम के 7, रालोसपा के 6 और लोजपा के तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा में मनाई गई कलाम की भव्य जयन्ती

भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति भारतरत्न डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के 79वें जन्म दिवस पर यूनाइटेड नेशन्स द्वारा 2010 में ही यह घोषणा की गई थी कि उनकी जयंती 15 अक्टूबर को “वर्ल्ड स्टूडेंट्स डे” के रूप मनाई जाय | फिर 27 जुलाई 2015 को शिलांग में जब गाँधीयन मिसाइल मैन डॉ.कलाम ने व्याख्यान देते समय ही हृदयाघात के कारण दुनिया को अलविदा कह दिया तो 29 जुलाई 2015 को पुन: यूनाइटेड नेशन्स द्वारा कलाम के जन्म दिन 15 अक्टूबर को ‘इंटरनेशनल स्टूडेंट्स डे’ के रूप में मनाने की घोषणा कर दी गई |

Dr. Bhupendra Madhepuri addressing teachers and students on the occasion of International Students Day.
Dr. Bhupendra Madhepuri addressing teachers and students on the occasion of International Students Day.

स्थानीय तुलसी पब्लिक स्कूल द्वारा ऋषिओं की तरह जीवन जीने वाले भारत के अमूल्य रत्न डॉ.कलाम की 85वीं जयंती को मनाने हेतु भव्य समारोह का आयोजन किया गया | इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.कलाम पर लिखी कई पुस्तकों के लेखक एवं समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी के द्वारा दिए गये व्याख्यान को सुनकर शिक्षकों की ही नहीं बल्कि छात्रों की आँखें भी नम हो गई | डॉ. मधेपुरी ने कहा- मेरे प्यारे छात्रो ! भारत की पुण्य भूमि पर खोदा गया एक कुआँ है तेरा कलाम !! तुम विश्वास की बाल्टी में संघर्ष की डोरी लगाकर उस कुँए से गंगा-जमजम का जितना पानी चाहो निकालते रहना- वह कभी नहीं खाली होगा | तुम्हारा कलाम कल्पतरु है, कामधेनु है |” डॉ.मधेपुरी ने घंटों सामनेवाले को बांधे रखा और शून्य से शिखर तक यानी रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक की चित्रमय कहानी सुना-सुनाकर नयनों से अश्रुकण टपकाते रहे |

Dr. Madhepuri paying tribute to Dr. APJ Abdul Kalam.
Dr. Madhepuri paying tribute to Dr. APJ Abdul Kalam.

आरम्भ में जयन्ती समारोह का उद्घाटन डॉ. मधेपुरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया | फिर अतिथियों-शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा डॉ.कलाम की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ | लगे हाथ मुख्य अतिथि डॉ. मधेपुरी को बुके एवं माला से निदेशक व प्राचार्य द्वारा स्वागत किया गया |

इस कार्यक्रम की विशेषता यही रही कि वर्ग एक से सात तक की कुल 23 छात्र-छात्राओं द्वारा कलाम के बाबत हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में भाषण दिया गया | जो जितना छोटा था वह उतना बेहतरीन भाषण देता गया | शुभम स्टालिन हिन्दी में तथा अंकुश कुमार अंग्रेजी में भाषण देकर सबों को मन्त्रमुग्ध कर दिया | शेष छात्रों में सुमन कुमार, अभिमन्यु, ज्ञानेंद्र गौरव, विकास कुमार, ज्ञानेंद्र गौतम, शाश्वत, अभिनव, आशुतोष आर्यन, अमन, सत्यमेव, नवनीत, सोनू आदि में अधिकांश अंग्रेजी में ही अपना उद्गार व्यक्त किया | छात्राओं में कृष्णा, अदिति परमार, नैना कुमारी, डिम्पल, काजल, शिवानी, आस्थाप्रिया, जिया आदि संभावनाओं से भरी नजर आती रही |

Dr. Madhepuri distributing sweets among students.
Dr. Madhepuri distributing sweets among students.

सभी बच्चों को पुरस्कार देने के बाद मुख्य अतिथि डॉ. मधेपुरी ने मिठाइयाँ बांटी और टी.पी.एस. के निदेशक श्यामल कुमार सुमित्र सहित निर्मल कुमार, मनीषा सिंह, रेणु, रोजी, गजाला, प्रियंका, रिया, शबनम, मनोज, विभीषण, मनु, वरुण, संतोष आदि शिक्षक-शिक्षिकाओं को बच्चों की बेहतरीन तैयारी कराने हेतु हृदय से साधुवाद दिया | अन्त में प्राचार्य हरिनंदन यादव द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया |

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मधेपुरा विधान सभा के लिए अन्तिम दिन सात और नामांकन

मधेपुरा विधान सभा (क्षेत्र सं. 73) के लिए आज नामांकन के अन्तिम दिन 15 अक्टूबर को सात नामांकन भरे गए। निर्वाची पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला ने मधेपुरा अबतक को बताया कि महागठबंधन की ओर से खड़े राजद प्रत्याशी प्रो. चन्द्रशेखर ने आज भी दो सेट में नामांकन के पर्चे दाखिल किए। ज्ञातव्य है कि प्रो. चन्द्रशेखर ने कल यानि 14 अक्टूबर को भी दो सेट में नामांकन दाखिल किया था।

आज 15 अक्टूबर को सात नए उम्मीदवारों ने भी नामांकन भरा। इनमें जन अधिकार पार्टी से डॉ. अशोक कुमार, बहुजन मुक्ति पार्टी से मनीष कुमार, भारतीय जनक्रांति दल (डेमो.) से कामेश्वर यादव तथा हिन्द कांग्रेस पार्टी से विनोद कुमार शामिल हैं। इन चारों के अतिरिक्त तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी आज पर्चे दाखिल किए। इनके नाम हैं – मो. अल्लाउद्दीन, मो. अली एवं सुरेश यादव।

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मधेपुरा विधान सभा के लिए नामांकन ने पकड़ी रफ्तार

पाँचवें चरण के नोटिफिकेशन के पाँचवें और नवरात्रि के प्रथम दिन यानि 13 अक्टूबर से मधेपुरा विधान सभा (क्षेत्र सं. 73) के लिए नामांकन कार्य में रफ्तार आई है। इस दिन महादलित व दलित परिवार के दो प्रत्याशियों ने नामांकन का पर्चा दाखिल किया। इनमें एक हैं पूर्व मंत्री नवल किशोर भारती के पुत्र ओम प्रकाश भारती जिन्होंने मानववादी जनता पार्टी से नामांकन का पर्चा भरा है और दूसरे प्रत्याशी हैं कपिलदेव पासवान जिन्होंने बहुजन समाज पार्टी से नामांकन का पर्चा दाखिल किया है। ये दोनों ही इंटर पास हैं। बड़े-से-बड़े दलित नेता भी जहाँ ‘सुरक्षित’ क्षेत्र की तलाश में दूरियां नापते कहीं से कहीं चले जाते हैं, वहाँ इन दोनों का ‘सामान्य’ क्षेत्र से किस्मत आजमाना सचमुच बड़ी बात है। इन दोनों ने शायद “मंगल मुखी सदा सुखी” सोच कर नामांकन के लिए मंगलवार का दिन चुना। अब ये कितने ‘सुखी’ हो पाएंगे ये तो 8 नवंबर यानि मतगणना के दिन ही पता चल पाएगा।

नवरात्रि के दूसरे दिन यानि 14 अक्टूबर, बुधवार को उन दो प्रत्याशियों ने नामांकन के पर्चे दाखिल किए जिनके बीच इस चर्चित सीट के लिए सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है। ये दोनों हैं मधेपुरा के निवर्तमान विधायक और महागठबंधन के उम्मीदवार प्रो. चन्द्रशेखर तथा नगर परिषद् के निवर्तमान मुख्य पार्षद् और एनडीए प्रत्याशी डॉ. विजय कुमार विमल। अपने नामांकन से ‘असर’ पैदा करने में इन दोनों ने कोई ‘कसर’ नहीं छोड़ी लेकिन जनता के दरबार में किसकी फरियाद सुनी जाती है और बुधवार किसके लिए जीत का द्वार खोलता है, ये देखने की बात होगी।

निर्वाची पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला से मधेपुरा अबतक को मिली जानकारी के अनुसार 14 अक्टूबर को इन दोनों के अलावे एक निर्दलीय ज्योति मंडल एवं चार अन्य प्रत्याशी जो कि अमान्यताप्राप्त दलों से ताल्लुक रखते हैं, ने भी नामांकन के पर्चे भरे हैं। इनके नाम हैं – मो. ताहिर, दिनेश यादव उर्फ फौजी, कमल कुमार एवं विजेन्द्र यादव।

बता दें कि पाँचवें चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर है। स्क्रूटनी के लिए 16 अक्टूबर का दिन निश्चित है तथा 19 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। मतदान 5 नवंबर को होना है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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बिहार चुनाव के पहले चरण में 57 प्रतिशत मतदान : कौन खुश, कौन परेशान..?

बिहार में पहले चरण का चुनाव सम्पन्न हुआ। 10 जिलों की 49 सीटों पर कल हुए मतदान में 57 प्रतिशत वोट डाले गए। 2010 की तुलना में ये 6 प्रतिशत ज्यादा है। सबसे ज्यादा मतदान खगड़िया में 61 प्रतिशत और सबसे कम नवादा में 53 प्रतिशत रहा। वोट के मामले में महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं। पुरुषों के 54.5 प्रतिशत मतदान के मुकाबले महिलाओं के मतदान का प्रतिशत 59.5 रहा।

सभी 49 सीटों पर महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला है। महागठबंधन की बात करें तो इनमें से जेडीयू 24, राजद 17 और कांग्रेस 8 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। एनडीए की ओर से भाजपा के 27, लोजपा के 13, रालोसपा के 6 और हम के 3 उम्मीदवार मैदान में हैं।

पिछले चुनाव की तुलना में मतदान में हुए 6 प्रतिशत इजाफे को एनडीए ‘परिवर्तन की बयार’ कह रहा है तो महागठबंधन इसे नीतीश का ‘मेहनताना’ बता रहा है। दोनों दावों में कौन सही है, ये तो खैर आने वाला वक्त बताएगा लेकिन वोटों में ऐसा इजाफा भी नहीं हुआ कि उसे ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ कह दिया जाय। खास तौर पर तब जबकि मुकाबला सीधा हो और थोड़ा भी ‘त्रिकोण’ बनने की स्थिति में पलड़ा किसी भी तरफ झुक जाने की गुंजाइश बन रही हो। हाँ, अगले चरणों में मतदान प्रतिशत और बढ़ता है तो उसे महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी जरूर मान सकते हैं क्योंकि वर्तमान ‘समीकरण’ को देखते हुए ऐसा होना ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ या ‘मोदी फैक्टर’ का असर माना जाएगा। कुल मिलाकर कल के आंकड़ों से ना तो एनडीए पूरी तरह ‘आश्वस्त’ हो सकता है, ना ही महागठबंधन के लिए ‘हताश’ हो जाने की स्थिति है।

बहरहाल, कल जिन 10 जिलों में चुनाव हुए, वे हैं समस्तीपुर, बेगुसराय, खगड़िया, भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नवादा और जमुई। इन 10 जिलों की 49 सीटों के लिए कुल 583 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें 54 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। इस चरण में मतदान केन्द्रों की कुल संख्या 13 हजार 212 और मतदाताओं की कुल संख्या एक करोड़ 35 लाख 72 हजार 339 थी।

पहले दौर में जिन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है उनमें समस्तीपुर जिले की सरायरंजन सीट से चुनाव लड़ रहे जेडीयू विधायक दल के नेता और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी प्रमुख हैं। उनका मुकाबला भाजपा के रंजीत निर्गुणी से है। जहाँ विजय चौधरी की गिनती राज्य के बड़े नेताओं में होती है वहीं निर्गुणी अभी जिला परिषद् के सदस्य हैं केवल। इस दौर के एक अन्य प्रमुख उम्मीदवार हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी हैं जो तारापुर से चुनाव लड़ रहे हैं। शकुनी का मुकाबला जेडीयू के मेवालाल चौधरी से है जो कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वीसी रह चुके हैं।

कहलगांव से कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और अलौली से लोजपा के प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस भी इसी चरण में चुनाव मैदान में हैं। सदानंद सिंह का मुकाबला लोजपा के नीरज मंडल से है और पारस का मुकाबला राजद के चंदन राम से। ये दोनों अपनी-अपनी पार्टी के कद्दावर नेता हैं और इनकी जीत-हार से क्रमश: कांग्रेस और लोजपा की साख पर असर पड़ना तय है।

पहले दौर के अन्य महत्वपूर्ण उम्मीदवारों में नीतीश सरकार में मंत्री रहीं और इस बार भाजपा से किस्मत आजमा रहीं रेणु कुशवाहा (समस्तीपुर), जेडीयू सरकार के मंत्री दामोदर राउत (झाझा), युवा राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक मेहता (उजियारपुर) और राजद सांसद जय प्रकाश यादव के भाई विजय प्रकाश (जमुई) शामिल हैं।

राज्य के तीन नेताओं की अगली पीढ़ी की किस्मत भी कल इवीएम में बंद हो गई। भागलपुर से सांसद अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत (भाजपा), जेडीयू के पूर्व मंत्री और वर्तमान में हम के नेता नरेन्द्र सिंह के बेटे अजय प्रताप (भाजपा) और कल्याणपुर से लोजपा सांसद रामचन्द्र पासवान के बेटे प्रिंस राज (लोजपा) चुनाव मैदान में हैं। अब इन पिता-पुत्रों की धड़कनें 8 नवंबर तक तेज रहेंगी।

 मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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स्वेतलाना एलेक्सिएविच ने बढ़ाया साहित्य, नोबेल और नारी का दायरा

इतिहास केवल समय के बहाव और उस पर अंकित तारीखों में नहीं होता, इतिहास मानव-मन के भीतर हिलोड़ें लेती भावनाओं का भी हो सकता है। अगर भीतर के इस इतिहास को आकार लेते देखना हो तो एक बार स्वेतलाना एलेक्सिएविच को जरूर पढ़ें जिन्हें 2015 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वेतलाना साहित्य का नोबेल पानेवाली चौदहवीं महिला और पहली पत्रकार हैं। उन्हें यह सम्मान भावनाओं के इतिहास को संकलित करने वाली उनकी खोजी किताबों के लिए दिया गया है जिनमें पूर्व सोवियत संघ के लोगों के जीवन को उन्होंने गजब की बारीकी से उकेरा है। आज जबकि पत्रकारिता ‘सेंशेसन’ में खोती जा रही है, स्वेतलाना हमें बहुत शिद्दत से बताती हैं कि उसे कैसे सृजन से नया आयाम दिया जा सकता है।

दुनिया के इस सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए इस साल 198 लोगों को नामांकित किया गया था लेकिन चुना गया 67 साल की स्वेतलाना एलेक्सिएविच को। स्वेतलाना के नाम की घोषणा करते हुए नोबेल कमिटी ने तीन चीजों को खास तौर से रेखांकित किया। स्वेतलाना को भीड़ से अलग करने वाली  वे तीन चीजें हैं – ‘विविधता से भरा लेखन’, ‘पीड़ा का स्मारक’ और ‘हमारे समय में साहस’। प्रत्यक्षदर्शियों की जुबान से कहानी कहने में महारत रखने वाली स्वेतलाना की कृतियां ‘वॉयसेस ऑफ यूटोपिया’ कही जाती हैं। स्वीडिश अकादमी, स्टॉकहोम की सचिव सैरा डैनियुस ने बिल्कुल सही चिह्नित किया है कि उनके लेखन में ‘ऐतिहासिक घटनाएं नहीं’ बल्कि ‘भावनाओं का इतिहास’ है।

स्वेतलाना का जन्म 31 मई, 1948 को यूक्रेन के शहर स्तानिस्लाव में हुआ। उन्होंने यूक्रेन, फ्रांस और बेलारूस में लम्बा समय बिताया। उनके पिता बेलारूस के थे और माँ यूक्रेन की। 1962 में स्वेतलाना अपने माता-पिता के साथ बेलारूस आ गईं और यहीं पर अपनी पढ़ाई पूरी की। इस नोबेल पुरस्कार विजेता ने एक स्थानीय अखबार में रिपोर्टिंग करने के लिए स्कूल की पढाई छोड़ दी थी। खैर, स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकार व शिक्षिका के रूप में कार्य किया। इसी दौरान उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध, सोवियत-अफगान युद्ध, सोवियत संघ के पतन और चेरनोबिल आपदा जैसे विषयों पर लिखा। 1985 में उनकी पहली किताब ‘वॉर्स अनवुमेनली फेस’ आई जिसकी अब तक 20 लाख प्रतियां बिक चुकी हैं। खोजी प्रकृति की स्वेतलाना ने इस किताब के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध में भाग लेने वाली सैकड़ों महिलाओं का इंटरव्यू लिया था।

विषय-चयन और पूर्वतैयारी की बात करें तो स्वेतलाना एलेक्सिएविच सधी हुई पत्रकार हैं और जब वो ‘ट्रीटमेंट’ और विश्लेषण पर आती हैं तो करुणा से ओतप्रोत साहित्यकार दिखेंगी। यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु संयंत्र में 1986 में हुए हादसे पर लिखी गई उनकी बहुचर्चित किताब ‘वॉयसेस ऑफ चेरनोबिल’ इसका लाजवाब उदाहरण है। उनकी एक और किताब है ‘सेकैंड हैंड टाइम’ जिसमें वो बड़ी संवेदना के साथ पड़ताल करते दिखेंगी कि सोवियत संघ के विघटन के बाद सोवियतकालीन पीढ़ियों ने खुद को नई दुनिया में कैसे ढाला। ‘जिंकी ब्वॉयज’, ‘द लास्ट विटनेसेज : द बुक ऑफ अनचाइल्डलाइक स्टोरीज’ तथा ‘एनचांटेड विथ डेथ’ उनकी अन्य कृतियां हैं।

स्वेतलाना की रचनाओं का कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। कई अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें मिल चुके हैं। उनकी स्वीकार्यता आज दुनिया भर में है लेकिन ये तथ्य हैरान करता है कि रूसी भाषा में लिखी उनकी कुछ किताबें ‘विवादों’ का शिकार होकर उनके अपने ही देश में प्रकाशित नहीं हो पाईं। कारण जो भी हो, अभिव्यक्ति पर इस तरह की ‘बंदिश’ बताती है कि आज भले ही चाँद के बाद मंगल पर भी दस्तक दे दी हो हमने, पर सच ये है कि धरती पर रहना भी हम ठीक से नहीं सीख पाए अब तक। स्वेतलाना एलेक्सिएविच, सलमान रश्दी या तसलीमा नसरीन जैसों का महत्व इस कारण भी है कि वे हमें इस बात की याद दिलाते रहते हैं।

साहित्य में पत्रकारिता की इतनी प्रांजल और संवेदनशील उपस्थिति स्वेतलाना से पहले नहीं थी, स्वेतलाना से पहले किसी पत्रकार को साहित्य का नोबेल नहीं मिला था और लेखकीय प्रतिबद्धता के लिए किसी नारी के ऐसे संघर्ष का उदाहरण भी कदाचित् नहीं दिखता। कहने की जरूरत नहीं कि स्वेतलाना एलेक्सिएविच ने अकेले अपने दम पर साहित्य, नोबेल और नारी तीनों का दायरा एक साथ बढ़ाया है।

चलते-चलते

अगर आप जानने को उत्सुक हैं कि स्वेतलाना एलेक्सिएविच से पहले किन तेरह महिलाओं को साहित्य का नोबेल मिला तो ये रही पूरी सूची – 1909 में सेल्मा ओटालिया लोविसा लाजरोफ (स्वीडन), 1926 में ग्रेजिया डेलेड्डा (इटली), 1928 में सिगरिड उंडसेट (नॉर्वे), 1938 में पर्ल एस. बक (अमेरिका), 1945 में गेब्रिएला मिस्त्राल (चिली), 1966 में नेली साक्स (स्वीडन-जर्मनी), 1991 में नेडिन गोर्डिमर (दक्षिण अफ्रीका), 1993 में टोनी मॉरिसन (अमेरिका), 1996 में विस्लावा सिम्बोर्सका (पोलैंड), 2004 में एल्फ्रीड जेलिनेक (ऑस्ट्रिया), 2007 में डोरिस लेसिंग (इंग्लैंड), 2009 में हर्टा म्यूलर (जर्मनी-रूमानिया), 2013 में एलिस मुनरो (कनाडा) और 2015 में स्वेतलाना एलेक्सिएविच (बेलारूस)।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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