एवरेस्ट विजेता संतोष यादव वोटर जागरूकता के लिए मधेपुरा में

निर्वाचन आयोग द्वारा वोटरों को जागरूक करने के लिए हरियाणा की बेटी एवं बिहार की बहु पदमश्री संतोष यादव को ब्रांड एम्बेसेडर बनाकर बिहार भेजा गया है | आज समस्त भारत उसे बेटी मानकर भरपूर सम्मान दे रहा है | विश्व के किसी भी कोने में वह परिचय का मोहताज नहीं | यही कारण है कि वैसे पर्वतारोही व पर्यावरणविद संतोष यादव को चुनाव आयोग द्वारा आइकॉन बनाया गया है |

मधेपुरा जिला प्रशासन द्वारा संतोष यादव का कार्यक्रम बालम-गढ़िया मध्य विद्यालय परिसर में शत प्रतिशत मतदाता जागरूकता के निमित्त शुक्रवार को आयोजित किया गया था | इस अवसर पर उनसे मिलने एवं उनका स्वागत करने के लिए उनके पूर्व परिचित स्थानीय समाजसेवी व साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी कार्यक्रम की सफलता के लिए घंटो पूर्व से वहाँ सक्रिय देखे गये |

सभा स्थल पर आते ही उपस्थित ग्रामीण वोटरों, नर-नारियों एवं बालक-बालिकाओं के बीच जा-जाकर, गले से गला मिला-मिलाकर बिना किसी झिझक के नाच-नाचकर उन्होंने ऐसी समा बांध दी कि सारा माहौल ऊर्जावान हो गया | सभी चेहरे प्रकाशमान दिखने लगे | सभी आत्मविश्वास से भर गये | ऐसा लगने लगा जैसे इस धरती के वोटरों को प्यास बुझाने के लिए जिला पदाधिकारी मो. सोहैल ने प्रशासन की ओर से डी.डी.सी. मिथिलेश कुमार, बी.डी.ओ. दिवाकर कुमार, सी.डी.पी.ओ. दर्शना कुमारी ( बिहारीगंज ) के साथ पुलिस के सुरक्षा बलों को सेलिब्रिटी संतोष यादव के इस वोटर जागरूकता कार्यक्रम में सहयोग के लिए भेजा था |

पदमश्री संतोष यादव ने वोटरों को जागरूक करने के क्रम में अपने एवरेस्ट विजय की कहानी सुनाते हुए इस बात की चर्चा की कि एवरेस्ट की चढ़ाई ने उसे जीने का सलीका सिखा दिया तथा बिना किसी भय के कदमों को आगे बढानें का रास्ता दिखा दिया | उन्होंने मतदाताओं से कहा कि आप भी बिना किसी भय एवं प्रलोभन के अपना वोट डालें और लोकतंत्र को मजबूत बनावें | लगे हाथ बालक-बालिकाओं से उन्होंने कहा कि वोट के दिन आप अपने लाचार-बीमार माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी को भी बूथ तक ले जाने में मदद करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भरपूर सहयोग ! सौ फीसदी वोट डालने से ही मजबूत बनेगा लोकतंत्र !

सभा के आरंभ में प्रशासन की ओर से डी.डी.सी. एवं अन्य पदाधिकारीगण द्वारा बुके देकर तथा डॉ. मधेपुरी द्वारा पुष्प-गुच्छ से साथ अपनी पुस्तक भेंटकर पदमश्री संतोष यादव का स्वागत किया गया | संतोष यादव को उसी दिन पटना से हवाई मार्ग द्वारा दिल्ली पहुचना अत्यावश्यक हो गया | इस कारण चंद मिनटों के लिए डॉ. मधेपुरी के ‘ वृन्दावन ’ निवास पर पारिवारिक सदस्यों से मिलकर , सिंहेश्वर में बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने के बाद उन्हें पटना होते हुए दिल्ली पहुचने में कोई व्यवधान नहीं हुआ जिसे वे देवाधिदेव महादेव की कृपा मानती हैं |

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बताइए अमित शाह..! बिहार में बीजेपी हारी तो पाकिस्तान में पटाखे क्यों जलेंगे..?

क्या बीजेपी ने बिहार में हार मान ली है और वो भी दो चरण शेष रहते..? पहले एक राज्य के चुनाव के लिए मोदी के कद के प्रधानमंत्री को तमाम जिलों और केन्द्र के दर्जनों मंत्रियों को गली-मुहल्लों तक उतार देना, दूसरे इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का ‘अति’ आक्रामक उपयोग और तीसरे लालू और नीतीश पर जाति की राजनीति का आरोप लगाते-लगाते स्वयं उससे भी आगे निकल धर्म के नाम पर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कुछ ऐसा ही बयां करती है।

भाजपा की ‘हिन्दूवादी’ छवि कोई छिपी हुई या छिपाई जाने वाली चीज नहीं। अब तक अपनी इस छवि को ‘भुनाने’ का शायद ही कोई मौका पार्टी ने छोड़ा हो। लेकिन सभाओं और बयानों में ‘राजनीतिक समझदारी’ और ‘सामाजिक जिम्मेदारी’ बरतने में कोई कोताही नहीं बरती जाती थी। भाजपा के ‘मोदीयुग’ में भी वाजपेयी का ‘संस्कार’ बहुत हद तक बचा था। पर अब उस ‘धरोहर’ की धज्जियां उड़ रही हैं। ये काम कोई भी करे, निन्दनीय होगा लेकिन जब ये काम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष करें तो बात निन्दा से आगे की हो जाएगी।

चौथे और पाँचवें चरण के प्रचार के क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कल 29 अक्टूबर को बिहार के बेतिया में थे। यहाँ एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर बिहार में बीजेपी हारती है तो पटाखे पाकिस्तान में जलेंगे। शाह का कहना था कि बीजेपी के हारने पर सबसे ज्यादा खुश जेल में बंद शहाबुद्दीन होगा। चलिए मान लेते हैं कि आपराधिक छवि वाले बाहुबली नेता शहाबुद्दीन लालू की पार्टी से सांसद रह चुके हैं और इस कारण यहाँ तक जबरन उनकी बात का तुक निकाल लें तो भी इस बात का तुक भला कौन निकालेगा कि 8 नवंबर को परिणाम भले ही पटना में निकलेंगे लेकिन पटाखे पाकिस्तान में जलाए जाएंगे..?

क्या ‘पाकिस्तान’ से शाह का मतलब ‘मुसलमान’ से है..? अगर हाँ, तो क्या भाजपा के अध्यक्ष मान चुके हैं कि उनकी पार्टी को मुस्लिम मत बिल्कुल नहीं मिल रहे..? क्या ये हताशा नहीं है भाजपा की..? हाँ, इसे हताशा ही कहेंगे क्योंकि शाह का बयान जुबान फिसलने की सीमा से बहुत आगे की बात है।

सार्वजनिक मंच की एक अलग ‘गरिमा’ और ‘सीमा’ होती है और जब आप एक बड़े दल के बड़े नेता हों तो आपसे इन बातों की अतिरिक्त अपेक्षा होती है। अगर गरिमा और सीमा किसी कारण आप भूल भी रहे हों तब भी मूलभूत ‘समझदारी’ और ‘सभ्यता’ की उम्मीद तो आपसे की ही जाती है। पर ना जाने अमित शाह कैसे इस तरह की भूल कर बैठे..?

शाह उत्तर प्रदेश को दुहराने की प्रत्याशा में लम्बे समय से बिहार में कैम्प कर रहे हैं। पर अब लगता है कि उन्हें ‘दिल्ली’ की आशंका सताने लगी है। पिछले तीन चरणों में मतदान का जो प्रतिशत रहा है तथा जातियों की जिस तरह की गोलबंदी देखने को मिली है उससे भाजपा कुछ ज्यादा ही सशंकित हो गई है। भाजपा का खेल बिहार में अगर बिगड़ता है तो वो स्थानीय कारणों से कम और मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए बयान और अब शाह के पाकिस्तान में पटाखे छूटने वाले बयान से ज्यादा बिगड़ेगा। अमित शाह इस तरह के बयानों से गुजरात के अपने ‘दागदार अतीत’ की याद बिहार को ना दिलाएं तो ही बेहतर होगा उनके लिए और उनकी पार्टी के लिए भी।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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तीसरे चरण में नज़रें भाजपा के ‘हाल’ और लालू के दोनों ‘लाल’ पर

बिहार चुनाव के पाँच चरणों में सर्वाधिक ‘महत्वपूर्ण’ (और कदाचित् निर्णायक भी) तीसरा चरण कल सम्पन्न हुआ। मतदान का प्रतिशत 53.32 रहा जिससे कोई स्पष्ट संकेत या रुझान नहीं मिलता और इस तरह 8 नवंबर का ‘रहस्य’ और गहरा गया है। बहरहाल, इस चरण के ‘महत्व’ पर बात करने से पहले कुछ तथ्यों पर निगाह डाल लें।

तीसरे चरण में छह जिलों की 50 सीटों के लिए वोट डाले गए। इन छह जिलों में राजधानी पटना भी शामिल है। पटना के अलावे शेष पाँच जिले भोजपुर, बक्सर, नालंदा, सारण और वैशाली हैं। 2010 के चुनाव में इन छह जिलों में मतदान का प्रतिशत 50.08 था। पिछले दो चरणों की तरह इस चरण में भी बाजी महिला मतदाताओं के नाम रही। 52.05 प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले लगभग 54 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इन छह जिलों में 53.62 प्रतिशत मतदान के साथ बक्सर सबसे आगे रहा, जबकि 51.82 प्रतिशत मतदान के साथ पटना सबसे पीछे।

तीसरे चरण में उम्मीदवारों की कुल संख्या 808 थी जिनमें 737 पुरुष और 71 महिला उम्मीदवार शामिल हैं। मतदाताओं की कुल संख्या एक करोड़ 45 लाख 18 हजार सात सौ पाँच और मतदान केन्द्रों की संख्या 13,648 थी। जिन 50 सीटों पर कल मतदान हुआ उनमें से 2010 में 23 सीटें जेडीयू, 19 सीटें भाजपा और 8 सीटें राजद ने जीती थीं। इस बार महागठबंधन की ओर से राजद 25, जेडीयू 18 और कांग्रेस सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एनडीए की तरफ से भाजपा के 34, लोजपा के 10, हम के चार और रोसोसपा के दो उम्मीदवार मैदान में हैं।

अब बात इस पर करें कि ये चरण महत्वपूर्ण और बहुत हद तक ‘निर्णायक’ भी क्यों है। इसके कई कारण स्पष्ट तौर पर दिखते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों व समीक्षकों की मानें तो पहले दो चरणों में एनडीए का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है। अगर इस चरण में भी मतदान उसके पक्ष में नहीं हुआ तो आगे के दो चरणों में उसकी राह और कठिन हो जाएगी। खास कर पाँचवें चरण में जिसमें सीमांचल का इलाका है और मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में हैं। कहने की जरूरत नहीं कि मुस्लिम मतदाताओं का स्पष्ट झुकाव महागठबंधन की ओर है।

इस चरण के महत्वपूर्ण होने का दूसरा बड़ा कारण लालू के दोनों ‘लाल’ का चुनाव मैदान में होना है। तेजप्रताप महुआ से और तेजस्वी राघोपुर से भाग्य आजमा रहे हैं। तेजप्रताप का मुकाबला हम के रवीन्द्र राय से है तो तेजस्वी के सामने पिछले चुनाव में उनकी माँ राबड़ी को हराने वाले सतीश कुमार हैं। सतीश तब जेडीयू के उम्मीदवार थे और इस बार भाजपा की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं। ये दोनों सीटें ना केवल लालू बल्कि उनकी पार्टी के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।

भाजपा के दिग्गज नेता और विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष नंदकिशोर यादव (पटना साहिब), विधान सभा उपाध्यक्ष अमरेन्द्र प्रताप सिंह (आरा), विधान सभा में भाजपा के मुख्य सचेतक अरुण कुमार सिन्हा (कुम्हरार), भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी ठाकुर के सुपुत्र विवेक ठाकुर (ब्रह्मपुर) और नीतीश कुमार के मुखर समर्थक से मुखर विरोधी बने ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू (बाढ़) के भाग्य का फैसला भी इसी चरण में होना है। जेडीयू के मंत्रियों श्याम रजक (फुलवारीशरीफ) और श्रवण कुमार (नालंदा) और जेल में बंद पूर्व जदयू विधायक और इस बार निर्दलीय प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह (मोकामा) का चुनाव भी इसी चरण में है।

तीसरे चरण की राजनीतिक अहमियत इस कारण भी है कि नालंदा नीतीश कुमार का गृहक्षेत्र है, सारण लालू प्रसाद यादव का और हाजीपुर रामविलास पासवान का। इस तरह इन तीनों कद्दावर नेताओं का कद भी अन्य चरणों की तुलना में इस चरण में कहीं ना कहीं दांव पर अधिक लगा हुआ है।

कल सम्पन्न हुए तीसरे चरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार की जनता सारे दलों को ‘भरमा’ कर रखने में पूरी तरह सफल रही है। पहले जनता नहीं जान पाती थी कि चुनाव के बाद नेता क्या करेंगे और आज कोई भी नेता यह कहने की स्थिति में नहीं है कि जनता क्या करने जा रही है। यह अपने आप में एक बड़ा परिवर्तन है। इस चरण के मतदान में 2010 की तुलना में तीन प्रतिशत का इजाफा जरूर हुआ है और इस इजाफे पर महागठबंधन और एनडीए दोनों अपनी-अपनी मुहर भी लगा रहे हैं पर सच यही है कि ‘जश्न’ मनाने की स्थिति में कोई खेमा नहीं है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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लालू ‘शैतान’, शाह ‘नरभक्षी’, मोदी ‘ब्रह्मपिशाच’… ये किस ‘नरक’ में आ गए हम..?

बिहार चुनाव की ताजा ख़बर। प्रधानमंत्री मोदी ‘ब्रह्मपिशाच’ तो थे ही अब ‘गली के गुंडे’ भी हो गए हैं और इस उपाधि से उन्हें नवाजा ‘शैतान’ लालू की ‘बेचारी’ बेटी मीसा ने जिसे बकौल मोदी उसके पिता पिछले चुनाव में ‘सेट’ नहीं कर पाए थे। कैसा लगा पढ़कर..? हंसी आई, क्रोध हुआ, शर्मिंदगी महसूस की आपने या फिर गालियां निकलीं आपके श्रीमुख से..? चाहे जैसा लगा हो आपको, यही ‘सच’ और यही ‘हासिल’ है बिहार चुनाव का। सिर्फ बिहार को ही बदनाम क्यों करें, कमोबेश हर राज्य का और इस तरह पूरे देश का यही हाल है। ‘अपशब्दों’ के लिए ‘प्राथमिकियां’ दर्ज होना और चुनाव आयोग का ‘संज्ञान’ लेना अब आम बात हो चली है।

लालू ‘चाराचोर’, नीतीश ‘अहंकारी’, अमित शाह ‘मोटे’ और नरेन्द्र मोदी ‘जुमलेबाज’ तो थे ही लेकिन ज्यों-ज्यों चुनाव आगे बढ़ा लालू ‘शैतान’, नीतीश ‘खराब डीएनए वाले’, अमित शाह ‘नरभक्षी’ और नरेन्द्र मोदी ‘ब्रह्मपिशाच’ हो गए। हाय री राजनीति..! गिरावट की भी कोई हद होती है कि नहीं..? राजनीति में आलोचना की जगह है, व्यंग्य की जगह है, कटाक्ष की जगह है लेकिन क्या अब इन शब्दों के लिए भी जगह बनानी होगी..? स्वस्थ लोकतंत्र में विरोध तो होना ही चाहिए, थोड़ी-बहुत तल्खियां भी बर्दाश्त की जा सकती हैं लेकिन क्या इन अपशब्दों की वकालत किसी तरह भी की जा सकती है..?

यहाँ चार नेताओं को मिली ‘उपाधियों’ की ही चर्चा की गई है। इनमें दो महागठबंधन के तो शेष दो एनडीए के सबसे बड़े चेहरे हैं। इसका ये मतलब कतई नहीं कि बाकी बचे ‘बेदाग’ हैं। सच तो यह है कि हमाम में सब नंगे हैं और इस कदर नंगे हैं कि उनका बस चले तो एक-दूसरे की चमड़ियां उतारकर ओढ़ लेने से भी परहेज ना करें। बहरहाल, बिहार चुनाव में ऐसे शब्दों और उपाधियों का पूरा ‘कोश’ तैयार हो रहा है और इसमें नई इंट्री हुई है ‘गली के गुंडे’ की जिसका प्रयोग किसी और के लिए नहीं प्रधानमंत्री मोदी के लिए किया गया है और वो भी लालू की बड़ी बेटी मीसा के द्वारा।

पूरा वाक्या कुछ यों है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी एक चुनावी रैली में कह दिया कि लालू प्रसाद ने पिछली बार ‘बेचारी’ बेटी को ‘सेट’ करने की कोशिश की थी और अब अपने बेटों को ‘सेट’ करने की कोशिश में पूरे बिहार को ‘अपसेट’ कर रहे हैं। इस पर मीसा ने अपने फेसबुक पेज पर पूछा कि यह ‘सेट’ करने की कोशिश क्या है..? क्या एक बाप अपनी बेटी को ‘सेट’ करने की कोशिश करता है..? मीसा ने लिखा कि किस तरह की बाजारू भाषा है ये..? वह भी एक महिला के लिए..?  देश का प्रधानमंत्री होकर एक सार्वजनिक मंच से एक महिला को ‘बेचारी’ कहने पर मीसा ने सख्त आपत्ति की और कहा कि एक तरफ आप ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ का नारा देकर स्वांग रचते हैं और दूसरी तरफ महिलाओं के लिए सरेआम अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते हैं। और इस तरह मोदी को ‘गली का गुंडा’ करार देते हुए मीसा कहती हैं कि जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल प्रधानमंत्री अपने भाषणों में करते हैं वैसा कोई सभ्य व्यक्ति नहीं कर सकता।

खैर ये तो मोदी के घोर समर्थक भी मानेंगे कि चुनावी रैलियों में उनकी भाषा और शैली वो नहीं रहती जो ‘लालकिले’ या ‘सिलिकॉन वैली’ में रहती है। मीसा के लिए कहे गए शब्द भी प्रधानमंत्री की गरिमा के अनुरूप नहीं थे। दुनिया भर में उन्होंने अपनी जो छवि बनाई उसे वो बिहार में दांव पर क्यों लगा रहे हैं, ये भी समझ से परे है। पर मीसा अपने पिता द्वारा प्रधानमंत्री को ‘ब्रह्मपिशाच’ कहे जाने पर क्या बोलेंगी..? और जब उनके पिता ‘करिया कबूतर’ और ‘एक बोतल दारू’ से ‘मोदी के भूत’ को ‘झाड़’ रहे होते हैं और ‘भूत’ फिर भी ना भागे तो ‘करिया हड़िया’ में ‘सरसों’ और ‘लाल मिर्च’ जला रहे होते हैं, तब वो चुप क्यों रहती हैं..?

बिहार में चुनाव अपने चरम पर है। दो चरण हो चुके हैं और तीसरे चरण का मतदान आज हो रहा है। चौथा और पाँचवां चरण भी आ ही जाएगा… 8 नवंबर को मतगणना होगी… और फिर अगले कुछ दिनों में चाहे जिसकी भी हो, सरकार का गठन भी हो जाएगा। जीतने वाले सीना तानकर चलेंगे और हारने वाले गरदन झुकाकर। चुनाव है तो जीत-हार भी होनी ही है, सो हो जाएगी। लेकिन क्या सारी कहानी इसी जीत-हार पर आकर खत्म हो जाती है..? नहीं… बिल्कुल नहीं। सच तो ये है कि चुनाव चाहे जो जीते, ‘मनुष्यता’ की लड़ाई दोनों ही पक्ष – महागठबंधन और एनडीए (शेष दल भी अपवाद नहीं हैं) – हार चुके हैं। मनुष्यता की लड़ाई मर्यादा और संस्कार के ‘शस्त्रों’ से लड़ी जाती है पर बिहार चुनाव में सभी दलों के नेता इन शस्त्रों का ‘संधान’ भूल चुके हैं। वे सचमुच भूल बैठे हैं कि मर्यादा खोकर, संस्कार लुटाकर आपने ‘सिंहासन’ क्या पूरा संसार भी पा लिया तो भी ‘कंगाल’ ही कहलाएंगे।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जिले के गम्हरिया प्रखंड में कबड्डी द्वारा मतदाता जागरूकता

मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड में मधेपुरा जिलापदाधिकारी मो.सोहैल के निदेशानुसार मतदाता जागरूकता कार्यक्रम कबड्डी के माध्यम से पारसमणि उच्चविद्यालय बभनी में आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार द्वारा किया गया | खिलाड़ियों से परिचय करने से लेकर पारितोषिक वितरण तक सचिव अरुण कुमार ने खिलाड़ियों एवं उपस्थित ग्रामीण दर्शकों से अपील किया कि वे मतदान के दिन (5 नबम्बर) अपने एवं पड़ोसियों के घर के सभी वृद्धजनों को मतदान केंद्र तक ले जाने में सहयोग करेंगे ताकि मतदान प्रतिशत में इस चुनाव में काफी वृद्धि हो पाये|

Secretary Kabaddi Sangh meeting with Players .
Secretary Kabaddi Sangh Arun Kumar meeting with Players .

खेल के दरमियान निर्णायकों की भूमिका बखूबी निभाने वालों में प्रमुख रहे प्रवीण कुमार, मनीष कुमार, अविनाश कुमार, हरिश्चन्द्र मंडल, आनन्द, रीतेश, रुपेश एवं मो.मोईन | सहयोग मिला प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार सहित शिक्षकगण दिनेश कर्ण, रुपेश कुमार एवं अन्य का |

सचिव ने मधेपुरा अबतक को बताया कि बालक वर्ग के फाइनल में पारसमणि उच्च विद्यालय 36 अंक प्राप्त कर विजेता और 33 अंकों के साथ मध्य विद्यालय बभनी उपविजेता बना | बालिका वर्ग में 45 अंक प्राप्त कर पारसमणि उच्चविद्यालय बभनी जहाँ विजेता बना वहीं मध्य विद्यालय बभनी 44 अंक प्राप्त कर उपविजेता | अन्त में उपस्थित दर्शकों को यह कहते हुए कि वोट आपका हथियार है, अधिकार है | वोट करें | बिना किसी दवाब एवं प्रलोभन के वोट अवश्य करें !!

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डी.एम. मो.सोहैल का निर्देश- वोटिंग के लिए 31 अक्टूबर तक जिले के सभी प्रखंडों में कबड्डी करेगी मतदाताओं को जागरूक

मतदाताओं को मतदान करने हेतु जागरूक करने के एक नहीं अनेक उपाय लगाये जा रहे हैं | मधेपुरा के जिला निर्वाची पदाधिकारी सह जिला पदाधिकारी मो.सोहैल द्वारा एक नायाब तरीका का श्री गणेश किया गया है ( 25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर ) तक जिले के सभी प्रखंडों में कबड्डी के खेल को आयोजित कर मतदाताओं को जागरूक करने का निदेश दिया गया है | मो.सोहैल ने खेल के संचालन के लिए जिला कबड्डी संघ के सचिव अरुण कुमार सहित सम्बन्धित प्रखंड के बी.डी.ओ. एवं बी.ई.ओ. तथा आवश्यकतानुसार अन्य पदाधिकारियों को भी यह दायित्व सौंपा है |

25 अक्टूबर को स्थानीय एस.एन.पी.एम.हाई स्कूल के मैदान में खेल में अभिरुचि रखनेवाले शिक्षक अविनाश कुमार, शिक्षिका मीरा कुमारी, प्रवीण कुमार, मनीष कुमार, संजीव कुमार, रामकृष्ण यादव आदि की सक्रिय सहभागिता देखी गई |

Secretary Arun Kumar introducing Players to Chief Guest Dr.Bhupendra Madhepuri .
Secretary Arun Kumar introducing Players to Chief Guest Dr.Bhupendra Madhepuri .

आरम्भ में एस.एन.पी.एम.हाई स्कूल के खेल मैदान में मुख्यरूप से समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी की उपस्थिति में जिला नजारत उप समाहर्ता मुकेश कुमार द्वारा नारियल फोड़कर खेल का श्री गणेश किया गया और अद्यक्ष के रूप में प्रखंड विकास पदाधिकारी दिवाकर कुमार मौजूद थे | डॉ.मधेपुरी खेल के अन्त तक खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते रहे तथा यही कहते रहे कि कीर्तिमान स्थापित करनेवाले खिलाड़ियों को सरकार भी खेलनीति के तहत नौकरियां देकर प्रोत्साहित करेंगी |

बालिकाओं की चार टीमें जो मलिया, जीबछपुर, भर्राही एवं राजपुर मध्य विद्यालयों से आई तथा बालकों की चार टीमें जो मलिया, मधुवन, राजपुर एवं भर्राही मध्य विद्यालयों से आई- इन टीमों में से एक नहीं अनेक बार नेशनल खेलने वाले खिलाड़ी मौजूद देखे गये | खेल का परिणाम यही हुआ कि मध्य विद्यालय भर्राही की खेल शिक्षिका मीरा कुमारी के कुशल नेतृत्व में लड़के-लड़कियों की दोनों टीमें बाजी मार गई | द्वितीय स्थान पर रही मध्य विद्यालय मलिया की बालिका टीम एवं बालक वर्ग में मध्य विद्यालय मधुवन द्वितीय स्थान पर रहे |

Kabaddi Players in their best Performances .
Kabaddi Players of Boys Group with their best Performances .

जिले के सभी प्रखंडों में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ियों द्वारा कबड्डी खेल कर मतदाताओं को जागरूक किया जा रहा है | एक भी मतदाता बूथ तक जाने से पहले अकारण कहीं रुक नहीं जाय इसके लिए उन्हें खेल-खेल कर जागरूक किया जा रहा है |

अनेकों बार नेशनल खेलने वाले कबड्डी खिलाड़ी संजीव कुमार, खुशबू एवं लूसी ने मधेपुरा अबतक को बताया कि चुनाव के दिन सभी मतदाता बूथ तक चलकर जायेंगे और वोट डालेंगे क्योंकि लोकतंत्र में सबसे बड़ा हथियार उनका अपना वोट है | आप भी वोट करें ! वोट जरूर करें !!

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अब ‘ज्ञान’ मिला नागमणि को कि भाजपा के ‘एजेंट’ हैं मुलायम-पप्पू..!

राजनीति में और वो भी आज की राजनीति में पाला बदलना कोई आश्चर्य की बात नहीं। ‘मौसम’ और ‘अवसर’ के हिसाब से प्रतिबद्धता ‘बदल लेना’ और यहाँ तक कि ‘बदलते ही रहना’ भी किसी को अब चौंकाता नहीं। लेकिन पाँच में से दो चरणों के चुनाव के बाद अगर आपको ये ‘ज्ञान’ मिले कि कल तक आप जिनके साथ खड़े थे उनके कारण सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता ‘खतरे’ में थी और जिन्हें आप कोसते नहीं थक रहे थे दरअसल वही सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता नाम की दोनों ‘चिड़िया’ को तथाकथित ‘खतरे’ से बाहर निकाल सकते हैं, तो इसे क्या कहेंगे आप..? जाहिर तौर पर राजनीतिक अवसरवादिता की ये पराकाष्ठा है और पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा वर्तमान में समरस समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नागमणि बिहार में सम्भवत: इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। लालू प्रसाद यादव से ‘मौसम वैज्ञानिक’ का खिताब पा चुके रामविलास पासवान से भी बड़े। अब तक कोई ऐसी पार्टी नहीं है जिसमें नागमणि जाकर ना हो आए हों।

नागमणि ने कल 24 अक्टूबर को प्रेस कांफ्रेंस कर बिहार चुनाव के अगले तीन चरणों में जदयू-राजद-कांग्रेस के महागठबंधन को समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने ‘संकेत’ में कुछ कहने की जगह सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के संरक्षक पप्पू यादव भाजपा के ‘एजेंट’ हैं। उन्होंने कहा कि दोनों दल भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। दोनों दलों ने ज्यादातर टिकट यादव और मुसलमानों को दिया है ताकि उनके मतों का बिखराव हो और भाजपा को इसका लाभ मिले। बकौल नागमणि भाजपा के कारण बिहार में सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ गई है, ऐसे में उन्होंने महागठबंधन का साथ देने का निर्णय लिया है।

नागमणि ने यह भी कहा कि पिछड़ा, अतिपिछड़ा, दलित एवं अल्पसंख्यकों के हक-हुकूक के लिए नीतीश कुमार और लालू प्रसाद की जोड़ी ने शहीद जगदेव की नीति और सिद्धांतों पर चलने का वादा किया है। लेकिन नागमणि ये नहीं कह पाए कि ये ‘वादा’ वो नीतीश-लालू से चुनाव शुरू होने के पूर्व क्यों नहीं ले पाए। खैर, जो ‘डील’ तब नहीं हुई, वो अब हो गई। वैसे बता दें कि नागमणि शहीद जगदेव के पुत्र हैं और अब तक के राजनीतिक करियर में उन्होंने जो भी हासिल किया है वो इसी कारण। 2005 में नीतीश कुमार की पहली सरकार में इनकी पत्नी मंत्री भी रह चुकी हैं।

गौरतलब है कि नागमणि से पहले एनसीपी के महासचिव तारिक अनवर ने तीसरे मोर्चे से अलग होने की घोषणा की थी। तारिक अनवर तीसरे मोर्चे की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे लेकिन मुलायम ने बिहार आकर भाजपा के पक्ष में लहर होने की बात कह दी और ऐसे में तारिक के लिए मोर्चे से अलग होने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।

पहले तारिक अनवर (एनसीपी) और अब नागमणि (समरस समाज पार्टी) के अलग होने के बाद जो चार पार्टियां तीसरे मोर्चे में रह गई हैं, वो हैं मुलायम की समाजवादी पार्टी, पप्पू यादव की जनअधिकार पार्टी, देवेन्द्र यादव की समाजवादी जनता पार्टी और पीए संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी। इसमें कोई दो राय नहीं कि मुलायम की अगुआई वाले इस तीसरे मोर्चे में शामिल पार्टियों की ‘तैयारी’ और ‘तालमेल’ की बात अब हास्यास्पद हो चली है।

 मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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मोदी अब दुनिया के सबसे बड़े ‘स्टाईल आइकॉन’, 42 राष्ट्राध्यक्ष पहनेंगे उनका परिधान

नरेन्द्र मोदी के विरोधी चाहे जो बोलें उनका जादू ना केवल दिन-ब-दिन बढ़ रहा है बल्कि अब तो लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। मोदी की विदेश नीति कितनी सफल है इस पर भले ही ‘विवाद’ की गुंजाइश हो लेकिन भारत समेत दुनिया भर में उनका कैसा ‘असर’ है ये देखने के लिए एक ही दृश्य काफी होगा। जी हाँ, कल्पना करें उस दृश्य की जब एक नहीं, दो नहीं पूरे 42 राष्ट्राध्यक्ष उनके परिधान में दिखेंगे।

दरअसल, 26 से 29 अक्टूबर तक नई दिल्ली में इंडो-अफ्रीकन फोरम समिट (आईएएफएस) – 2015 का आयोजन होने जा रहा है। इस समिट में शामिल होनेवाले सभी 42 राष्ट्राध्यक्षों को प्रधानमंत्री मोदी बहुत खास उपहार देने जा रहे हैं। ये उपहार है मोदी स्टाईल की बंडी (मोदी जैकेट) और ‘इक्कत’ कुर्ते का जिस पर अब उनकी छाप लग चुकी है।

जरा रुकिए, अभी ख़बर पूरी नहीं हुई। असली ख़बर तो ये है कि समिट के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए जानेवाले भोज में सभी राष्ट्राध्यक्ष ‘मोदी जैकेट’ में दिखेंगे। यही नहीं, अपने प्रवास के दौरान सभी राष्ट्राध्यक्ष मोदी स्टाईल के कुर्ते में भी दिखाई देंगे। इसके लिए सभी राष्ट्राध्यक्षों की पसंद को देखते हुए अलग-अलग रंग के कुर्ते बनाए जा रहे हैं। इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी अपनी भारत-यात्रा के दौरान मोदी जैकेट में दिखे थे। बताया जाता है कि अफ्रीकी देशों के कई राजनेता मोदी के इस डिप्लोमेसी स्टाईल के कायल हो गए हैं।

यह पहला मौका है जब अफ्रीकी देशों के राष्ट्राध्यक्ष इतनी बड़ी संख्या में यहाँ मौजूद होंगे। राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ इसमें अफ्रीकी देशों के 400 उद्योगपति भी शामिल हो रहे हैं। मोदी भविष्य की सम्भावनाओं के मद्देनज़र इस अवसर का महत्व जानते हैं। यही कारण है कि बिहार चुनाव को लेकर अपने अति व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद वो इस अवसर को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।

भारत और अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। भारत अफ्रीका में एक बड़ा निवेशक है और हाल के वर्षों में वहाँ इसका व्यापार बहुत तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में अफ्रीका के साथ भारत का कारोबार 75 अरब डॉलर का है और भारत ने पिछले चार सालों में अफ्रीकी महाद्वीप को 7.4 अरब डॉलर का कर्ज दिया है जिसका उपयोग 41 देशों की 137 परियोजनाओं मे हो रहा है।

यह भी जानें कि तंजानिया, सूडान, मोजांबिक, केन्या, युगांडा समेत कई अफ्रीकी देशों के पास बड़े पैमाने पर तेल और गैस के भंडार हैं। भारत अपने आर्थिक विकास के लिए ईंधन में विशेष रूप से निवेश चाहता है। इसके अलावा भारत समुद्र क्षेत्र से जुड़े कारोबार में भी अहम साझेदारी चाहता है। यही नहीं, भारत अफ्रीकी देशों के साथ कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य क्षेत्र, आधारभूत ढाँचे और तकनीक में विस्तार के लिए भी काम करने की इच्छा रखता है।

इन तमाम तथ्यों की पृष्ठभूमि में इंडो-अफ्रीकन फोरम समिट का महत्व सहज ही समझा जा सकता है। बहरहाल, कूटनीतिक सम्भावना अपनी जगह है, फिलहाल तो मोदी की ‘पर्सनल डिप्लोमेसी’ के कारण ये समिट पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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जानिये मधेपुरा जिले के चार विधानसभाओं के साठ उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह

निर्वाची पदाधिकारी सह मधेपुरा एस.डी.एम.संजय कुमार निराला ने मधेपुरा अबतक को बताया कि विधानसभा चुनाव क्षेत्र- 73 के चुनावी मैदान में कुल 18 प्रत्याशी रह गये हैं तथा एक इ.वी.एम. में 16 बटन ही होते हैं | अत: मधेपुरा विधानसभा के 272 मतदान केन्द्रों के हर एक बूथ पर दो-दो इ.वी.एम.मशीन लगाये जायेंगे | उन्होंने यह भी कहा कि एक मशीन में 16 उम्मीदवारों के नाम व चुनाव चिन्ह होंगे तथा दूसरे में NOTA (यानी None of the Above) सहित दो उम्मीदवारों के नाम व चुनाव चिन्ह रहेंगे | जिन मतदाताओं को एक भी प्रत्याशी को नहीं चुनने की इच्छा हो तो वे NOTA का बटन दबायेंगे |

पुन: श्री निराला ने बताया कि मधेपुरा विधानसभा के सभी 272 बूथों पर VVPat (Voter Verified Paper audit trail) Machine लगाये जायेंगे ताकि मतदाता अपने दिए गये मत की संपुष्टि भी कर लें कि उनका मत चाहने वाले उम्मीदवार को मिल गया |

बहरहाल, मधेपुरा अबतक को मतदाताओं से प्राप्त जानकारियों के अनुसार यह कहा जा सकता है कि कोसी के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन, जन अधिकार पार्टी एवं एन.डी.ए. के बीच ही त्रिकोणात्मक संघर्ष होने की उम्मीद है | विशेष यह कि अब तो जिले के चारो विधानसभा क्षेत्रों में महागठबंधन को चुनौती दिए जाने की संभावना को लेकर जहाँ-तहाँ गांवों में जन अधिकार पार्टी की चर्चा भी आरम्भ हो गई है |

तभी तो बिहारीगंज विधानसभा क्षेत्र- 71 के ग्रामीण मतदाताओं के बीच जन अधिकार पार्टी के युवा उम्मीदवार श्वेतकमल फिलहाल हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की तरह अपने चुनाव चिन्ह हॉकी स्टिक व बॉल के साथ तेजी से आगे बढ़ने की चर्चा में आने लगे हैं |

वहीं सिंहेश्वर सुरक्षित क्षेत्र (256 बूथ)के निर्वाची पदाधिकारी रवि शंकर शर्मा, बिहारीगंज क्षेत्र (255 बूथ)के निर्वाची पदाधिकारी मुकेश कुमार एवं आलमनगर क्षेत्र (279 बूथ)के निर्वाची पदाधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि सभी उम्मीदवारों को प्रतीक चिन्ह आवंटित कर दिए गये हैं – जो निम्न प्रकार हैं :-

मधेपुरा विधानसभा

कुल – 18 प्रत्याशी

नाम – दल – चुनाव चिन्ह

1. प्रो. चंद्रशेखर – राजद – लालटेन

2. कपिलदेव पासवान – बीएसपी – हाथी

3. गणेश मानव – सीपीआई(एम)- हथौड़ा, हंसिया और सितारा

4.विजय कुमार विमल – भाजपा – कमल

5. अशोक कुमार – जनअधिकार पार्टी – हॉकी और बॉल

6.ओमप्रकाश भारती- मानववादी जनता पार्टी – मोतियों का हार

7. कमल कुमार – सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी – आदमी व पाल युक्त नौका

8. कामेश्वर यादव – भारतीय जनक्रांति दल(डेमो.)- मोमबत्ती

9. मु.ताहिर- नेशनल रोड मेप पार्टी ऑफ इंडिया – गैस का चूल्हा

10.दिनेश यादव उर्फ फौजी – गरीब जनता दल(सेकुलर) – ऑटो रिक्शा

11. मनीष कुमार -बहुजन मुक्ति पार्टी – फ्राक

12.बिजेंद्र यादव – जनता दल राष्ट्रवादी – डोली

13. विनोद कुमार – हिंद कांग्रेस पार्टी- प्रेशर कूकर

14. अलाउद्दीन – निर्दलीय -कांच का गिलास

15.मु. अली – निर्दलीय – एअरकंडीशनर

16. ज्योति मंडल – निर्दलीय – कप और प्लेट

17. विशाल कुमार – निर्दलीय – अलमीरा

18.सुरेश प्रसाद यादव- निर्दलीय- फूलगोभी

सिंहेश्वर विधानसभा – सुरक्षित

कुल – 12 प्रत्याशी

नाम – दल – चुनाव चिन्ह

1. मंजू देवी – हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा – टेलीफोन

2. इंदो देवी – बहुजन समाज पार्टी – हाथी

3. रमेश ऋषिदेव- जदयू – तीर

4. राजकिशोर सरदार – सीपीआई (एम) – हथौड़ा, हसिया और सितारा

5. अमित कुमार भारती – जनअधिकार पार्टी – हॉकी और बॉल

6. उपेंद्र राम – गरीब जनता दल सेकुलर – ऑटो रिक्शा

7.: दिनेश ऋषिदेव- नेशनल रोड मेप पार्टी ऑफ इंडिया – गैस का चूल्हा

8. ललन पासवान – जनता दल राष्ट्रवादी- डोली

9. संजय पासवान – भारतीय जनक्रांति दल -मोमबत्ती

10. आगमलाल ऋषिदेव – निर्दलीय – अलमीरा

11. अच्छेलाल शर्मा – निर्दलीय – बाल्टी

12. जगदेव राम – निर्दलीय- एअर कंडीशनर

बिहारीगंज विधानसभा

कुल – 15

नाम – दल – चुनाव चिन्ह

1. नवीन कुमार मेहता – भारत विकास मोर्चा – कप और प्लेट

2. कौशल कुमार – भारतीय जनक्रांति दल (डेमो.)- मोमबत्ती

3. निरंजन कुमार मेहता – जदयू – तीर

4. कमलेश मेहता – निर्दलीय- ऑटो रिक्शा

5. प्रतिभा कुमारी – बसपा – हाथी

6. रविंद्र चरण यादव – भाजपा – कमल

7. ब्रह्माचारी विष्णु प्रभाकर – निर्दलीय- मोतियों का हार

6. अभय चंद्र झा – शिवसेना – अलमीरा

9. मनोज कुमार यादव – निर्दलीय – सिलाई मशीन

10. मिथिलेश कुमार मेहता – जेएमएम – एयरकंडीशनर

11. निखिल कुमार झा – भाकपा – हंसिया एवं गेहूं की बाली

12. श्वेत कमल – जन अधिकार पार्टी – हॉकी और बॉल

13. बेबी देवी – निर्दलीय – गुब्बारा

14. ख्वाजा गुलाम हुसैन – निर्दलीय – बांसुरी

15. शांति देवी – निर्दलीय – चूड़ियां

आलमनगर विधानसभा

कुल – 15

नाम – दल – चुनाव चिन्ह

1. गोपाल कुमार – निर्दलीय – अलमीरा

2. नरेंद्र नारायण यादव – जदयू – तीर

3. संदीप कुमार – जनता दल राष्ट्रवादी – डोली

4. चंदन सिंह – लोजपा – बंगला

5. प्रशांत कुमार सिन्हा – निर्दलीय – चूड़ियां

6. श्यामदेव पासवान – निर्दलीय – एयरकंडीशनर

7. रचना कुमारी – बहुजन मुक्ति पार्टी – चारपाई

8. बनारसी मंडल – निर्दलीय – गुब्बारा

9. रामदेव सिंह – भाकपा – बाल और हंसिया

10. जयप्रकाश सिंह – जनअधिकार पार्टी  – हॉकी और बॉल

11. मुख्तार – गरीब जनता दल सेकुलर – ऑटो रिक्शा

12. निर्मल पासवान – जेएमएम – तीर कमान

13. राजेंद्र प्रसाद महतो – निर्दलीय – फलों से युक्त टोकरी

14. रविंद्र सिंह – बसपा – हाथी

15. शशिभूषण सिंह – निर्दलीय – बल्ला

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नोबेल विजेता सत्यार्थी बने ह्यूमैनिटेरियन अवार्ड पाने वाले पहले भारतीय

कैलाश सत्यार्थी के काम को एक और ‘सलाम’ मिला है। शांति के इस नोबेल पुरस्कार विजेता के नाम एक और प्रतिष्ठित पुरस्कार जुड़ गया है। पिछले सप्ताह उन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित ‘हार्वर्ड ह्यूमैनिटेरियन ऑफ द ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान बाल अधिकारों की रक्षा में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है। बता दें कि सत्यार्थी इस पुरस्कार को पाने वाले पहले भारतीय हैं।

‘ह्यूमैनिटेरियन’ पुरस्कार ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है जिसने लोगों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया हो और लोगों को अपने काम से प्रेरित किया हो। सत्यार्थी ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में बाल संरक्षण एवं कल्याण संबंधी प्रावधानों को शामिल कराने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। इन प्रावधानों का लक्ष्य बच्चों की दासता, तस्करी, जबरन श्रम और हिंसा को समाप्त करना है।

सत्यार्थी ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा- उन लाखों वंचित बच्चों की ओर से विनम्रतापूर्वक यह पुरस्कार स्वीकार करता हूँ जिनके अधिकारों की रक्षा के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। आओ, हम सब मिलकर विश्व से बाल दासता को समाप्त करने का प्रण लें। इस अवसर पर उन्होंने एक बड़े ‘सत्य’ को रेखांकित किया कि अमेरिका समेत विकसित देशों में भी सैकड़ों गुलाम बच्चे हैं जिन्हें श्रम करने के लिए मजबूर किया जाता है, देह व्यापार में धकेला जाता है या घरेलू श्रम के लिए उनकी तस्करी की जाती है। कहने का अर्थ ये है कि आज ये समस्या विश्वव्यापी है। तीसरी दुनिया कहे जाने वाले देश ही नहीं अपने ‘ऐश्वर्य’ पर इतराने वाले देश भी इससे अछूते नहीं। ऐसे में सत्यार्थी के काम की क्या अहमियत है, ये कहने की जरूरत नहीं।

कैलाश सत्यार्थी आज बालश्रम के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक बन चुके हैं। 1980 में उनके द्वारा शुरू किया गया ‘बचपन बचाओ आन्दोलन’ आज किसी परिचय का मोहताज नहीं। अपने इस आन्दोलन की बदौलत वो अब तक अस्सी हजार मासूमों की ज़िन्दगी संवार चुके हैं। कितनी बड़ी बात है कि इस ‘साधक’ ने इतनी बड़ी साधना अकेले अपने दम पे की, बिना किसी शोर-शराबे के। आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी जो पहचान और स्वीकार्यता है उसके मूल में सिर्फ और सिर्फ उनका काम है, कोई सरकार, कोई सिफारिश, सोशल मीडिया पर चलाया गया कोई कैम्पेन या प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कोई चकाचौंध नहीं। ‘विज्ञापन’ के युग में ये बातें उन्हें भीड़ से एकदम अलग करती हैं। नोबेल के बाद ‘हार्वर्ड ह्यूमैनिटेरियन ऑफ द ईयर’ पुरस्कार इस बात की एक और तस्दीक है।

इस पुरस्कार के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सत्यार्थी से पहले यह पुरस्कार मार्टिन लूथर किंग सीनियर, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिवों कोफी अन्नान, बुतरस बुतरस-घाली और ज़ेवियर पेरिज डी कुईयार, नोबेल पुरस्कार विजेताओं जोस रामोस-होर्ता, बिशप डेसमंड टूटू, जॉन ह्यूम और एली वेसल तथा संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान महासचिव बान की मून जैसी हस्तियों को मिल चुका है।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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