कभी नहीं मरेगी कोसी की उड़नपरी गीतांजलि

जन्म लेने के बाद जिसने चलना सीखा ही नहीं बल्कि हमेशा दौड़ती ही रही उसी उड़नपरी का नाम है – गीतांजलि | प्रतिदिन दस किलोमीटर दौड़ना, दो मंजिले घर की सीढियों पर ननस्टॉप सेंचुरी मारना और फिर आगे पटना के गोलघर की सीढ़ियों पर दौड़ते हुए चढ़ते-उतरते चौका-छक्का जिसके लिए आम बात हो वह भला क्यों नहीं जीतेगी – राज्यस्तरीय सौ गोल्ड मेडल और राष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों गोल्ड एवं सिल्वर मेडल |

दुनिया को अल्पायु में ही अलविदा कहने वाली उस उड़नपरी, कोसी की बेटी, गीतांजलि को यहाँ के जजवाती धावक-धाविकाएँ मरने नहीं देंगे | सौ से ऊपर धावक एवं पचास से ऊपर धाविकाएँ क्रमशः दस किलोमीटर और तीन किलोमीटर की दौड़ पूरी कर गीतांजलि को श्रद्धांजलि दी और स्वयं वे गीतांजलि फाउंडेशन की ओर से पुरस्कृत भी हुए |

Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.
Madhepura DM. L.P.Chauhan paying homage to Geetanjali.

कार्यक्रम का आरम्भ गीतांजलि की तस्वीर पर जिला पदाधिकारी एल.पी.चौहान, जिला परिषद अद्यक्षा मंजू देवी, समाजसेवी डॉ. भूपेन्द्र मधेपुरी सहित अन्य गणमान्य द्वारा पुष्पांजलि अर्पण से किया गया | आगे धावकों को हरी झंडी दिखाकर “गीतांजलि रोड रेस” का श्री गणेश और गणमान्य लोगों द्वारा उद्गार व्यक्त किया गया |

सर्वप्रथम डॉ.मधेपुरी ने गीतांजलि का स्मरण करते हुए नोबेल पुरस्कार प्राप्त रवीन्द्रनाथ टैगोर की गीतांजलि की प्रथम पंक्ति से लोगों को रू-ब-रू कराते हुए यही कहा – हे देव ! बहा दो अहंकार, मेरे ही आँसू जल में !! यही संकल्प हम सभी आज के दिन लें | उन्होंने यह भी कहा कि गीतांजलि जिस मधेपुरा की धूल भरी सड़कों पर दौड़कर ऊंचाई पायी है वह मधेपुरा उसके नक़्शे कदम पर चलकर न जाने कितनी गीतांजलि पैदा करेंगी जो राष्ट्रीय स्तर की धाविकाएँ बनकर उसी की गीत सदा गाती रहेंगी |

अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार निराला, अंचलाधिकारी उदय कृष्ण यादव, हिन्दुस्तान ब्यूरो चीफ अमिताभ, जागरण ब्यूरो चीफ धर्मेन्द्र भारद्वाज, प्राचार्य अशोक कुमार, पूर्व कुलसचिव डॉ.गणेश कुमार एवं जिला परिषद की अद्यक्षा मंजू देवी, प्राचार्या चन्द्रिका यादव, डॉ. अरुण कुमार, परमेश्वरी प्र.यादव, आई.एम.ए.अद्यक्ष डॉ.मिथिलेश कुमार, डॉ.आर.के.पप्पू, डॉ.पी.के.मधुकर, डॉ.अमित कुमार, ललन कुमार अद्री सहित परिवार के लोग अरविन्द कुमार, सुशील कुमार, पृथ्वीराज यदुवंशी एवं खेल से जुड़े संतकुमार, अनिल कुमार राज आदि ने अपने संस्मरण व उद्गार व्यक्त किये तथा गीतांजलि के बहाने नारी सशक्तिकरण की दिशा में कुछ करने का संकल्प दुहराया |

कार्यक्रम के आखिरी दौर में समस्त पुरुष-महिला प्रतिभागियों को “रनिंग शूज़ एवं जर्सी” पुरस्कार स्वरुप दिए गये | मंच संचालन हर्षवर्धन सिंह राठौर एवं डॉ. अलोक कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संजीव ने किया |

सम्बंधित खबरें