नहीं रहीं भारत की प्रथम महिला शुभ्रा मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की धर्मपत्नी और भारत की प्रथम महिला शुभ्रा मुखर्जी का निधन हो गया। आज सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर दिल्ली स्थित सेना अस्पताल में उनका निधन हुआ। शुभ्रा मुखर्जी पिछले नौ दिनों से वेंटिलेटर के सहारे जीवित थीं। आज सुबह डॉक्टरों ने वेंटिलेटर हटाने का निर्णय लिया और उन्हें मृत घोषित किया।

बता दें कि शुभ्रा मुखर्जी लम्बे समय से बीमार चल रही थीं और पिछले कुछ दिनों से उनकी हालत नाजुक हो चली थी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में उनकी महती भूमिका तथा उनके मृदु स्वभाव और मानवीय सरोकारों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। स्मृतिशेष शुभ्रा मुखर्जी को मधेपुरा अबतक की भावभीनी श्रद्धांजलि..!

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‘महा’रैली और ‘महा’पैकेज ने ‘महागठबंधन’ की नींद उड़ाई

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के सहरसा में परिवर्तन रैली की। ये एक बड़ी रैली थी। मुजफ्फरपुर और गया के बाद ये तीसरी परिवर्तन रैली है। मोदी को सुनने और देखने को जैसी भीड़ जुटी और सहरसा समेत आसपास के बड़े इलाके में जो माहौल था उससे बीजेपी और एनडीए के तमाम रणनीतिकार गदगद होंगे। एक तरफ ‘महागठबंधन’ के गढ़ कोशी में ‘महा’रैली और दूसरी तरफ यहाँ आने से पूर्व आरा में बिहार के लिए ‘महा’पैकेज। बिहार जीतने की तैयारी में मोदी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। उम्मीद की जा रही थी कि सहरसा में ही वे बिहार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा करेंगे लेकिन उन्होंने इस ‘बहुचर्चित’ और ‘बहुप्रतीक्षित’ घोषणा के लिए आरा को चुना और बिहार के लिए एक लाख पच्चीस हजार करोड़ के बड़े पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में बिहार को बिजली संयंत्र के लिए दिए जानेवाले चालीस हजार करोड़ शामिल नहीं हैं। इस तरह देखा जाय तो बिहार को दिया जानेवाला ‘तोहफा’ कुल एक लाख पैंसठ हजार करोड़ का है। आरा से प्रधानमंत्री मोदी ने और भी कई विकास योजनाओं की शुरुआत की।

प्रधानमंत्री द्वारा पैकेज की घोषणा के तत्काल बाद जेडीयू ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘राजनीतिक रिश्वत’ करार दिया। जाहिर है कि जेडीयू और उसके महागठबंधन के साथी राजद और कांग्रेस को ये पैकेज रास नहीं आएगा। जेडीयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने को लेकर बड़ा और लम्बा अभियान चलाया है और आसन्न विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के विरुद्ध भुनाने की कोशिश भी वो जोरशोर से करती लेकिन मोदी और उनकी पार्टी ने विशेष पैकेज से इस मुद्दे की धार कुंद करने की जबरदस्त कोशिश की है।

बिहार का जंग जीतने के लिए मोदी की ये तमाम कोशिशें कितनी ‘प्रभावी’ होंगी ये तो आनेवाला वक्त बताएगा लेकिन इनके ‘लुभावी’ होने में कोई संदेह नहीं। इसमें कोई दो राय नहीं कि भाजपा इस पैकेज का चुनावी लाभ लेना चाहती है। बहुत सोच-समझकर इस पैकेज की रूपरेखा तय की गई और घोषणा के लिए चुनाव से ठीक पहले का समय चुना गया। लेकिन कौन-सी पार्टी और केन्द्र व राज्य की कौन-सी ऐसी सरकार है जो ऐसी घोषणाओं का चुनावी लाभ नहीं लेना चाहेगी..? इस ‘महा’पैकेज से भाजपा का राजनीतिक हित भी सधता है तो सधे, बिहार का हित भी इससे सध रहा है इससे क्या इनकार करना सम्भव है..? जेडीयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर जो अभियान चलाया वो क्या केवल बिहार के हित के लिए था..? क्या उससे जेड़ीयू का राजनीतिक हित जुड़ा हुआ नहीं था..? अगर दलों की आपसी स्पर्द्धा में राज्य और देश का हित हो रहा हो तो ऐसी स्पर्द्धा हमेशा स्वागत योग्य है। हाँ, ये भी देखना होगा कि इस पैकेज को देने और चुनाव का मौसम बीत जाने के बाद मोदी सरकार की तत्परता बिहार के लिए कम ना हो।

मधेपुरा अबतक के लिए डॉ. ए. दीप

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