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शहीद चुल्हाय के खून का कुछ कर्ज चुकाया मधेपुरा ने

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अगस्त क्रांति के अमर शहीद चुल्हाय मंडल की 98वीं जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गाँव मनहरा-सुखासन में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया- बिहार सरकार के पूर्व आपदा प्रबंधन मंत्री सह वर्तमान लोकप्रिय विधायक प्रो.चन्द्रशेखर ने | इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शहीद चुल्हाय ने आजादी के लिए अपनी जान तक की कुर्बानी दी जिसे हम सबों को मिलकर अक्षुण्ण रखना होगा तथा उनके सपनों का भारत बनाना होगा |

मंचासीन होने के साथ उद्घाटनकर्ता विधायक प्रो.चन्द्रशेखर, मुख्यवक्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी , मुख्य अतिथि पूर्व विधान पार्षद विजय कुमार वर्मा,  विशिष्ट अतिथि डॉ.नरेश कुमार तथा अध्यक्षता कर रहे प्रो.श्यामल किशोर यादव सहित ई.प्रभाष आदि ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का सम्मिलित रूप से उद्घाटन किया |

उद्घाटनकर्ता एवं मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद चुल्हाय वसूल के पक्के आदमी थे, उन्होंने जान गवां दी लेकिन अंग्रेजों से समझौता नहीं किया | उन्होंने यह भी कहा कि गरीबों एवं दलितों की आवाज को उठाने वाले राजद सुप्रीमो लालू यादव एवं मंडल मसीहा का प्रतीक शरद यादव को नीचे दिखाने के लिए एक से बढ़कर एक षड्यंत्र किया जा रहा है | विशिष्ट अतिथि सिनेट सदस्य डॉ.नरेश कुमार ने चुल्हाय मंडल एवं शिक्षा जगत के लोक नायक कीर्ति नारायण मंडल के अवदानों की भूरि-भूरि प्रसंशा की,सराहना की |

समारोह के मुख्यवक्ता डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने अपने विस्तृत संबोधन में यहीं से आरंभ किया कि यूँ तो मधेपुरा सामाजिक परिवर्तन की धरती रही है लेकिन आज से क्रान्तिवीर शहीदों की धरती भी कही जायेगी | उन्होंने कहा कि अगस्त क्रांति में मधेपुरा-सहरसा के कुल 9 शहीदों में केवल दो शहीदों- चुल्हाय मंडल और धीरो राय का शव उनके परिवार को नहीं उपलब्ध कराया गया |

Former Minister Prof.Chandrashekhar, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Former MLC Vijay Kumar Verma , Prof.S.K.Yadav, Dr.Naresh Kumar , Er.Prabhash & others inaugurating Shahid Chulhai Pratima Anawaran Samaroh.
Former Minister Prof.Chandrashekhar, Samajsevi Dr.Bhupendra Madhepuri, Former MLC Vijay Kumar Verma , Prof.S.K.Yadav, Dr.Naresh Kumar , Er.Prabhash & others inaugurating Shahid Chulhai Pratima Anawaran Samaroh.

आगे डॉ.मधेपुरी ने कहा कि नेपाल के ‘बकरो के टापू’ पर डॉ.लोहिया और जयप्रकाश क्रमशः ट्रांसमीटर ऑपरेटर एवं आजाद दस्ते को ट्रेनिंग देने में लगे थे | इनसे निर्देश प्राप्त कर 25 जनवरी 1943 का मनहरा गांव आये प्रखर सेनानी कमलेश्वरी प्रसाद मंडल | उन्हीं के मशविरानुसार एक धोती ओढ़े-पहने 26 जनवरी को सवेरे मधेपुरा के ट्रेजरी बिल्डिंग परिसर में पहुंच गये क्रांतिवीर शहीद चुल्हाय और ज्योंहि तिरंगा लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ बोले कि गोरे सिपाहियों ने उन्हें दबोच लिया | पहले तो रस्सी से पैरों को छान दिया और मार-मारकर लहू-लुहान कर दिया | फिर डाकबंगला रोड होकर घसीटते हुए डाकबंगला परिसर के ऊंचे दरख्त में उन्हें उल्टा लटका दिया गया और दो दिन-दो रात तक उस कड़ाके की ठंड में बिना वस्त्र के लाठियों की वर्षा में नहाता रहा चुल्हाय | उस क्रांतिवीर चुल्हाय की नाक-आँख-कान और मुँह से खून निकलता रहा……. और वह हमेशा बन्दे मातरम……. बोलता ही रह गया | अधमरा हो जाने पर जब चुल्हाय को 29 जनवरी को जेल ले जाया जा रहा था तब रास्ते में तीन जगह उसके मुंह से खून का ‘थक्का’ गिरा……..| 30 जनवरी की रात को कदाचित वह शहीद हो गया था फिर भी इलाज  कराने के बहाने बाहर लेकर चला गया | उसकी लाश भी घरवालों को नहीं मिली | जब देश 16 अगस्त को आजादी का जश्न मना रहा था तब मधेपुरावासियों ने वहाँ-वहाँ शहीद चुल्हाय द्वार बनाकर श्रद्धांजलि निवेदित किया, जहाँ-जहाँ खून का थक्का गिरा था………| और उसके बाद से लगभग चार दशक तक वह शहीद इतिहास के पन्नों से गायब हो गया | मधेपुरा उसकी शहादत को भी भूल गया |

आगे डॉ.मधेपुरी ने इतने लम्बे अंतराल के बाद मधेपुरा जिला उद्घाटन की तिथि 9 मई 1981 को सामाजिक न्याय के पुरोधा बी.पी.मंडल के अध्यक्षीय भाषण में “शहीद चुल्हाय मंडल” का नाम पहली बार सुना और तब से इस शहीद के क्रिया-कलापों को बुद्धिजीवियों तक पहुंचाने हेतु उन्होंने कलम उठाई | भू .ना.मंडल विश्वविद्यालय में “शहीद चुल्हाय उद्यान” बनाकर एवं डाक बंगला रोड का नामकरण “शहीद चुल्हाय मार्ग” कराकर तत्कालीन कुलपति डॉ.आर.के.चौधरी एवं तत्कालीन  जिप अध्यक्षा श्रीमती मंजू देवी से उद्घाटित हो जाने के बाद ही उन्होंने चैन की सांस ली, परन्तु वे संतुष्ट नहीं हुए | डॉ.मधेपुरी की अभी भी बलवती इच्छा यही है कि शहीद चुल्हाय की भव्य प्रतिमा मधेपुरा डाक बंगला परिसर में वहाँ बने जहाँ उसके शरीर का बूंद-बूंद खून गिरा था तथा मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेला उस मनहरा ग्राम में लगे जहाँ शहीद चुल्हाय ने जन्म ग्रहण किया था |

समारोह को संबोधित करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में प्रमुख रहे हैं- ई.प्रभाष, डॉ.आलोक कुमार, परमेश्वरी प्रसाद यादव, तेज नारायण यादव, आलोक कुमार मुन्ना, राज किशोर यादव, डॉ.रवि शंकर, पंकज कुमार, योगेन्द्र यादव, वीरेंद्र यादव, डॉ.राजेश रतन मुन्ना, लड्डू कुमार एवं ग्रामीण आदि |

अंत में जहाँ अध्यक्षता कर रहे प्रो.श्यामल किशोर यादव ने बच्चों से कहा- सूरज की तरह तभी चमकोगे जब सूरज की तरह जलोगे, वहीं मंच संचालन किया प्रो.जय कृष्ण यादव और डॉ.नरेश कुमार ने अतिथियों एवं गणमान्यों को धन्यवाद ज्ञापित किया |

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मधेपुरा अब तेजी से आगे बढ़ रहा है

मधेपुरा में जबकि 1992 में ही बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय की स्थापना हुई और कुलपति व कुलसचिव सहित केवल 8 पदों पर कार्य करने की अनुमति भी दी गई | तब से हाल तक पद सृजन से संबंधित कोई कार्य न तो सफलतापूर्वक किया गया और न पैतृक विश्वविद्यालय (LNMU) से किसी अधिकारी या कर्मचारी को भेजा या लाया जा सका | यह बी.एन.मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा 25 वर्षों तक फकत कारसेवकों द्वारा ही चलता रहा |

बता दें कि हाल ही में आये 23वाँ कुलपति डॉ.ए.के.राय के कार्यकाल में 86 कारसेवकों की विधिवत स्थायी नियुक्ति की गई और कारसेवक संस्कृति की सदा के लिए समाप्ति हो गई | विश्वविद्यालय अब कुपोषण मुक्त दिखने लगा है तथा शैक्षिक कार्य निरंतर पटरी पर आने लगा है |

दूसरी ओर नई उम्मीद एवं कलेवरों के साथ नये साल में मधेपुरा सँवरने लगा है | रेल इंजन कारखाना एवं मेडिकल कॉलेज ये दोनों मधेपुरा के विकासरथ को रफ्तार देने हेतु दो पहिए का काम करने लगा है | एक बार नव वर्ष के प्रथम माह में विकास की समीक्षा करने सीएम आते हैं तो दूसरे माह फरवरी में दो हजार करोड़ की लागत से बन रहे रेल इंजन कारखाने में बने इलेक्ट्रिक रेल इंजन का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री आने वाले हैं |

यही मधेपुरा है जहाँ 800 करोड़ का मेडिकल कॉलेज बन रहा है और लगभग 100 करोड़ का इंजीनियरिंग कॉलेज | एनएच 106 एवं एनएच 107 के साथ-साथ एएनएम ट्रेनिंग सेंटर, जीएनएम स्कूल, पॉलिटेक्निक कॉलेज, आई टी आई कॉलेज आदि जल्द ही बन रहा है | वस्तुतः मधेपुरा तकनीकी शिक्षा का हब बनने जा रहा है |

तो तीसरी ओर राज्य सरकार के सात निश्चयों को अमलीजामा पहनाने हेतु प्रखंड स्तर तक “समाज सुधार वाहिनी रथ” चंद दिनों में चालू होने वाला है जिसके माध्यम से विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शैक्षणिक जागरूकता हेतु संकल्प दिलाया जायेगा | कर्मकांड एवं धर्मांधता से मुक्ति दिलाने हेतु डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा गाँव-गाँव जा-जाकर किये जा रहे प्रयास से सामाजिक अंधविश्वासों में कमी आयेगी | मधेपुरा के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल की टीम द्वारा नशाबंदी के तर्ज पर बालविवाह बन्दी व दहेज़ बन्दी हेतु मानव श्रृंखला की करिश्माई तैयारी पुनः मधेपुरा को पुरस्कृत कराने में सफल होगी | मधेपुरा तेजी से आगे बढ़ता नजर आयेगा और यह धरती वन्दनीय होती चली जायेगी |

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मधेपुरा में ऐतिहासिक मानव श्रृंखला होगी बाल विवाह व दहेज के खिलाफ

मधेपुरा जिला के डायनेमिक डीएम मो.सोहैल, एसपी विकास कुमार, एसडीएम  द्वय संजय कुमार निराला व एस जेड हसन की पूरी टीम गत वर्ष के शराबबंदी के पक्ष में आयोजित मानव श्रृंखला के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त करने में लगी है | क्योंकि, नीतीश सरकार का यह आह्वान है कि बाल विवाह एवं दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों को दूर किये बिना प्रदेश और देश का विकास संभव नहीं | उन्होंने कहा कि इन कुरीतियों को दूर करने के लिए जन जागरण आवश्यक है | साथ ही समाज में जागरूकता लाने के लिए जनता की सहभागिता सर्वाधिक जरूरी भी |

यह भी जानिये कि बाल विवाह और दहेज जैसी कुरीतियाँ समाज का कोढ़ है जिससे सर्वाधिक प्रभावित होता है- शिक्षा | इन कुरीतियों से मुक्ति पाने तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए इस धरती के शलाका पुरुष बाबू रास बिहारी लाल मंडल द्वारा 1911 ई. में ही दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें सारे भारत से 16000 जनप्रतिनिधि आये थे जिसकी अध्यक्षता नेपाल के तुलसी सिंह ने की थी |

उन दिनों 5 वर्ष की उम्र में ही लड़के की शादी हो जाती थी | इस उम्र सीमा को एक बारगी 10 वर्ष करने पर नेपाल से आये प्रतिनिधिगण विरोध में खड़े हो गये | तब जाकर 6 वर्ष की उम्र पर सहमति बनी | यह भी जान लीजिए कि स्थानीय टी.पी. कॉलेज के प्रधानाचार्य, विधायक, सांसद, उपकुलपति व कुलपति रह चुके डॉ.महावीर प्रसाद यादव की शादी मात्र 6 वर्ष की उम्र में हुई थी | उन दिनों छोटे लड़के को शादी कराने के लिए गोद में या पालकी में ले जाया जाता था और सबसे पहले बच्चे को दूध पिलाया जाता | आज 30 वर्ष के पार भी शादी करने वाले लड़के को ‘विद्य’ के रूप में दूध पिलाया जाता है | इस अंधविश्वास को भी हटाना होगा |

यह भी बता दें कि दहेज खत्म करने को लेकर भी कानून बने हैं, फिर भी पुलिस-हाकिम सभी असमर्थ हैं | कानून कोर्ट में रुके-पड़े हैं | अपनी बेटी के वर खातिर उनके भी सिर झुके हुए हैं | तब से आज तक प्रयास किया जा रहा है लेकिन समाज को सफलता नहीं मिल पाई है | सिक्ख समुदाय में तो कुछ सुधार नजर आता है लेकिन अन्य वर्गों के लोग तो शादियों में दहेज लेकर लाखों रुपये रोशनी एवं पटाखे में बर्बाद कर देते हैं | परंतु, बेटियों को अच्छी शिक्षा देने के समय उनका हाथ खाली रहता है |

बता दें कि एक ओर जहाँ दहेज एवं बाल विवाह बन्दी को लेकर मधेपुरा के डीएम,एसपी, एसडीएम द्वय एवं तेरहो प्रखंडों के बीडीओ, सी.ओ. से लेकर शिक्षा विभाग के सभी संस्थानों व समस्त पदाधिकारियों, शिक्षकों सहित सभी मिलकर मानव श्रृंखला हेतु रूट चार्ट तैयार कर रहे हैं | तैयारी यह भी की जा रही है कि गत वर्ष 21 जनवरी को शराब बन्दी को लेकर बनी मानव श्रृंखला में प्रदर्शन करने वाले 11 लाख 34 हजार की संख्या को इस बार बहुत पीछे छोड़ देना है और सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रौशन करना है |

वहीं दूसरी और राज्य के मुखिया नीतीश कुमार में आस्था-विश्वास रखने वाले जदयू, युवा जदयू एवं सभी प्रकोष्ठों से जुड़े सारे सदस्यगण 21 जनवरी 2018 को इन कुरीतियों द्वय के विरुद्ध आयोजित की जाने वाली मानव श्रृंखला को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्राइवेट एवं सरकारी-प्राइमरी, मिडिल स्कूलों से लेकर उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के छात्रों को इस अभियान में जोड़ने हेतु जगाने में अहर्निश लगे हैं |

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BNMU से कट कर अगले सत्र 2018-19 से चालू होगा पूर्णिया विश्वविद्यालय

जहाँ मधेपुरा का भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय स्थापना काल से वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार सहित मात्र 8 स्वीकृत पदों के साथ 25 वर्षों तक पदहीनता का अभिशाप झेलता रहा वहीं इससे अलग होकर बन रहे नये पूर्णिया विश्वविद्यालय को नीतीश सरकार ने दिया 68 पदों का तोहफा |

बता दें कि नये बने पूर्णिया विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र 2018-19 से आरंभ हो जायेगा | महामहिम कुलाधिपति द्वारा 16 अगस्त 2016 को इसकी मंजूरी प्रदान कर दी गयी है तथा 21 नवंबर तक वीसी, प्रोवीसी पद के लिए आवेदन देने की तिथि भी निर्धारित कर दी गयी है | अभ्यर्थियों के साक्षात्कार के लिए सर्चकमिटी भी गठित कर दी गई है |

जानिये कि इतनी तेजी से पूर्णिया विश्वविद्यालय के लिए सारे कार्यों का निष्पादन बिहार के शिक्षा विभाग, माननीय मुख्यमंत्री एवं महामहिम राज्यपाल के राज भवन द्वारा किया जा रहा है, परंतु कुछ महीने पूर्व ही मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी द्वारा इस विश्वविद्यालय का नाम महान आंचलिक साहित्यकार, पद्मश्री फणीश्वर नाथ रेणु के नाम करने वाले ‘अनुरोध’ पर अबतक विचार नहीं किया जाना- राज्य के समस्त कलमजीवी साहित्यकारों के लिए दु:ख की बात है |

यह भी बता दे कि हिन्दी के आंचलिक कथाकार एवं प्रख्यात साहित्यकार ‘रेणु’ पूर्व में भी प्रासंगिक रहे हैं और आगे भी रहेंगे | तभी तो 51 वर्ष पूर्व उनकी कहानी पर “तीसरी कसम” फिल्म बनी थी और पुनः इतने दिनों बाद उनकी कहानी पर एक फिल्म बनकर तैयार है जो आगामी 17 नवंबर को रिलीज होने वाली है जिसका नाम है- “पंचलैट”| रेणुजी की यह कहानी भी गांव-गंवई, जात-पात तथा तत्कालीन सामाजिक वर्जनाओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित एवं प्रतिध्वनित करता है | रेणु जी की यह कहानी आज भी हमारे समाज में विद्यमान है- अतः यह फिल्म हिंदी सिनेमा जगत में फिर से एक नये युग की शुरुआत होगी |

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यह केवल नीतीश का नहीं, 11 करोड़ बिहारियों का सम्मान

सोमवार को जम्मू के जोरावर सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री व जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को प्रथम ‘मुफ्ती अवार्ड फॉर प्रोबिटी इन पॉलिटिक्स एंड पब्लिक लाइफ’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली जेएंडके पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (जेकेपीडीपी) की ओर से पार्टी के संस्थापक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मुहम्मद सईद की स्मृति में दिया गया। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एएन वोहरा के हाथों मिले इस पुरस्कार को नीतीश कुमार ने वहां की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, भारतीय मूल के ब्रिटिश अर्थशास्त्री व नेता लॉर्ड मेघनाद देसाई, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एवं जेडीयू नेता संजय झा समेत कई गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में ग्रहण किया।

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस पुरस्कार की बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि “मैं पूरी ईमानदारी से यह बात कह रही हूं कि राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन की शुचिता के मामले में देश में आपसे बेहतर कोई नहीं जिसे इस सम्मान से नवाजा जाए।” उनकी यह टिप्पणी ना केवल नीतीश कुमार के लिए बल्कि 11 करोड़ बिहारियों के लिए सम्मान की बात है। इस टिप्पणी का महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब ठीक इसी समय राज्य के एक बड़े नेता को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा मिली हो और एक दलविशेष द्वारा उस सजा को ‘शहादत’ की तरह पेश करने की कोशिश की जा रही हो।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में नीतीश कुमार के जम्मू-कश्मीर कनेक्शन की भी याद दिलाई। उन्होंने लिखा, मुझे याद है कि आपने रेल मंत्री के रूप में घाटी के लिए पहल की थी और बारामूला तथा अनंतनाग के लिए रेल लाइन का शिलान्यास किया था। ध्यान दिला दें कि केन्द्र में वीपी सिंह सरकार के दौरान मुफ्ती मोहम्मद सईद और नीतीश कुमार ने साथ काम किया था।

बहरहाल, बिहार में न्याय के साथ विकास के अपने संकल्प को शतप्रतिशत समर्पण और तन्मयता से जमीन पर उतारने में जुटे नीतीश कुमार ने गुड गवर्नेंस का एक नया मानक स्थापित किया है। इसके साथ ही बिहार में चलाए जा रहे शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाहबंदी और कन्या-सुरक्षा जैसे समाज-सुधार अभियानों ने उनके व्यक्तित्व को ‘राजनीतिक संत’ जैसा आयाम दे दिया है। आज वो निर्विवाद रूप से राजनीतिक शुचिता के शिखर और उसके पर्याय हैं। इस सम्मान के लिए उनके चयन ने बिहार की छवि को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

नीतीश कुमार को यह सम्मान मिलना साबित करता है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बिहार में आज संभावना देखी जा रही है। गठबंधन सरकार की जटिल परिस्थितियों और विपक्ष के तौर पर ठीक ‘कंट्रास्ट’ से जूझते हुए भी नीतीश कुमार का राज्य के लिए एक के बाद उपलब्धियां हासिल करना और उसे संभावना के साथ ही सराहना के योग्य बनाना उनके कद को और बढ़ा देता है। कभी जातिवाद, अपराध और भ्रष्टाचार के अंधेरे में सफर करने वाला बिहार आज भोर की किरण देख रहा है। हाल के दिनों में शराबबंदी की सफलता ने राज्यवासियों में यह आत्मविश्वास भर दिया है कि नीतीश कुमार जैसा नेतृत्वकर्ता हो तो असंभव दिखना वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। अब जरूरत बात की है कि इस माहौल को गतिमान रखा जाए और ‘पॉजिटिव एप्रोच’ के साथ सरकार, समाज और मीडिया एक साथ कदम बढ़ाए।

‘मधेपुरा अबतक’ के लिए डॉ. ए. दीप

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मधेपुरा-सहरसा-मानसी 63कि.मी. डबल रेल लाइन बनेगी

मधेपुरा-मानसी 63कि.मी. रेल विद्युतीकरण कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है | यह कार्य डबल रेल लाइन होने की बात को ध्यान में रखकर किया जा रहा है |

बता दें कि समस्तीपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता श्री प्रवीण कुमार सक्सेना एवं सीनियर सेक्शन इंजीनियर श्री हरेन्द्र कुमार सिंह ने मधेपुरा अबतक को बताया कि मधेपुरा-मानसी भाया सहरसा रेल लाइन के दोहरीकरण का प्रस्ताव भारतीय रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है | इंजीनियर द्वय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रूट में हो रहे विद्युतीकरण कार्य एवं सहरसा स्टेशन पर प्लेटफार्म की संख्या बढ़ने के बाद ट्रेनों की संख्या में इजाफा होने की संभावना को देखकर रेल लाइन दोहरीकरण की दिशा में तेज कदम आगे बढ़ाया गया है | उन्होंने कहा कि सावन-भादो में बाढ़-बरसात की मार से अबरुद्ध आवागमन से जूझ रहे कोसी क्षेत्र की लाइफ लाइन का दोहरीकरण यदि हो गया तो क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगा | तब ट्रेन लेट नहीं होगी | ट्रैफिक लोड भी घटेगा |

यह भी बता दें कि 28 फरवरी 2018 से पूर्व हर हाल में मधेपुरा-मानसी विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया जायेगा | अब तक 80% फाउंडेशन और 60% पोल लगा बिजली तार जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है |

जानिए कि 12 वर्ष पहले 12 जून 2005 को मानसी से सहरसा बड़ी रेल लाइन से जुड़ा था | रेल ट्रैक दोहरीकरण से 50 लाख की आबादी को तुरंत फायदा होना शुरू हो जायेगा | दोहरीकरण के लिए लगभग एक दर्जन बड़ा पुल और आधा दर्जन छोटा पुल बनाना होगा |

इस इलाके को फिलहाल दो कर्मठ सांसद पप्पू यादव एवं रंजीत रंजन तो हैं जो मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री की अहमियत की जोरदार चर्चा कर बजट सत्र में रेल दोहरीकरण के भेजे गये प्रस्ताव को मंजूरी दिला ही सकते हैं |

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मधेपुरा में खोल गए मुख्यमंत्री संभावनाओं के द्वार

समीक्षा यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बृहस्पतिवार को मधेपुरा पहुंचे। शीतलहर के बावजूद उनके लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। योजनाओं की समीक्षा के साथ ही उन्होंने जिले के लिए संभावनाओं के कई नए द्वार भी खोल दिए। सिंहेश्वर के मवेशी हाट में आयोजित सभा के दौरान उन्होंने मधेपुरा को 658 करोड़ रुपए की सौगात दी और जिले के लिए 1565 योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद लोगों में मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मंत्री रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद व बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति डॉ. रमेन्द्र कुमार यादव रवि, विधायक व पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव, विधायक निरंजन मेहता, कमिश्नर टीएन बिंधेश्वरी, डीएम मोहम्मद सोहैल आदि प्रमुख हैं।

अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंहेश्वर के गौरीपुर पंचायत के वार्ड नं. 9 एवं 10 में ‘सात निश्चय’ के तहत हुए कार्यों को देखा। सात निश्चय से गांव और शहर के फर्क को मिटाने के अपने सपने को जमीन पर उतरता देख वे खुश नजर आए। विकास कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 250 की आबादी वाले हर टोले और गली को मुख्य सड़क से जोड़ा जाएगा। पेयजल, बिजली, शौचालय आदि की सुविधाएं वहां उपलब्ध होंगी। यही नहीं, चार साल के अंदर ये सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे खूब पढ़ें और आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि पढ़ने में अब पैसा बाधक नहीं बनेगा। 12वीं के बाद राज्य सरकार सभी बच्चे को चार लाख तक का स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करा रही है। युवाओं के कौशल विकास पर पूरा फोकस किया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के तहत कुशल युवा कार्यक्रम चलाकर युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा में जहां दक्ष बनाया जा रहा है, वहीं कम्यूनिकेशन स्किल और रहन-सहन को लेकर भी उनके व्यक्तित्व का विकास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विकास के साथ ही समाज-सुधार भी जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए आमलोगों के जागरुक होने की जरूरत है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि 21 जनवरी को दहेजप्रथा व बालविवाह के विरुद्ध बनाई जाने वाली मानव-श्रृंखला में शामिल होकर उसे ऐतिहासिक बनाएं।

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पहले स्वयं को फिर समय को जीतें

विश्व विख्यात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय माउंट आबू के बैनर तले स्थानीय राजयोग सेवा केंद्र जयपालपट्टी, मधेपुरा में नववर्ष के उपलब्ध में आयोजित स्नेही श्रद्धालुओं के “स्नेह मिलन समारोह” का उद्घाटन प्रखर शिक्षाविद व समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने किया और ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी तपस्विनी रंजू दीदी ने अध्यक्षता की |

बता दें कि कार्यक्रम का श्री गणेश ॐ शांति गीत से किया गया | गीत समापन के साथ ही उपस्थित जनों ने दीदी के साथ विश्व शांति के लिए ध्यान किया एवं तत्पश्चात सम्मिलित रुप से दीप प्रज्वलित कर पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा बाबू, विनोद कुमार, विजय वर्धन आदि द्वारा “तमसो माज्योतिर्गमय” का उद्घोष किया गया | सबों को टीका लगाकर अपने संक्षिप्त संबोधन में ब्रम्हा कुमारी रंजू दीदी ने यही कहा- बीते वर्ष में सभी प्रकार के नेकी-बदी किए गये कार्यों की विदाई करें तथा अपने अंतर्मन की स्वच्छता के लिए अपने अंदर में बच रही बुराई को भी विदा कर दें | उन्होंने नये वर्ष में बुरा काम नहीं करने का सबों को संकल्प दिलाया |

यह भी बता दें कि उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी में पुराने और नये वर्ष के सन्धिकाल की विस्तृत चर्चा करते हुए एवं ‘समय’ के संबंध में चेतावनी देते हुए अपनी ही पंक्तियों को यूँ गुनगुनाया-

न आदि न अंत, न टूट कहीं ! न रुके न झुके, शाश्वत है गमय है !!

तेज धार बख्शे न किसी को ! सुनो बंधुओ, वही समय है !!

डॉ.मधेपुरी ने जहाँ समय को विजय कहा वहीं इसे पराजय भी बताया | समय को मित्र कहा तो उसे शत्रु भी कह सुनाया | उन्होंने कहा- “बच्चो ! जीवन-सरिता में सुख-शांति व सद्भाव का सुन्दर कमल खिलाना चाहते हो तो समय के पल-पल को सकारात्मक कर्मों से बांधो | भूल करनेवालों को समय कभी नहीं बख्शेगा |”

मौके पर ओमशांति संस्थान के उन्नयन में लगे पूर्व प्रमुख विनय वर्धन उर्फ खोखा यादव, सिल्लीगुड़ी से पधारी कुसुम मातेश्वरी, ओम प्रकाश यादव, विजय वर्धन, संजय वर्धन, बैजनाथ यादव एवं अयोध्या बाबू सहित अन्य गणमान्यों ने अपने संबोधन के दरमियान सार रूप में यही कहा कि हीरा-मोती देकर भी कोई बीता हुआ समय वापस नहीं ला सकता !

अंत में नव वर्ष पर आयोजित स्नेह-मिलन-समागम का समापन स्नेहिल सहभोज के साथ संपन्न हुआ |

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गाँधी के गाँवों में सशक्त ग्रामीण ही बदलाव ला सकता है

मधेपुरा जिला मुख्यालय के प्राथमिक विद्यालय नौलखिया वार्ड न:-1 में नागेश्वर प्रसाद की धर्मपत्नी प्रथमवती देवी की दूसरी पुण्य तिथि पर भारतीय जन लेखक संघ द्वारा “कर्मकांड और धर्मांधता” विषय पर जिला स्तरीय परिसंवाद एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया | सम्मेलन का उद्घाटन समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने फीते को कैंची से काटकर नहीं बल्कि अपने हाथ से खोलकर किया | इस दौरान डॉ.मधेपुरी ने “कैंची और सूई” के महत्व पर अपनी लम्बी काव्यकृति प्रस्तुत करते हुए विस्तार से कैंची को बांटने का प्रतीक एवं सूई को जोड़ने का प्रतीक बताया |

गाँधी के इस गाँव में माताओं-बच्चों व बड़े-बूढ़ों की भीड़ को संबोधित करते हुए डॉ.मधेपुरी ने अपने उद्घाटन भाषण में विस्तार से ‘कर्मकांड व धर्मांधता’ की व्याख्या की और कहा कि अंधविश्वास मिटाये बिना समाज का कल्याण संभव नहीं | उन्होंने कहा कि इस रूढ़िवादी परंपराओं को ढोने के चलते आर्थिक रुप से कमजोर लोग एक बड़े कर्ज में डूब जाते हैं | बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं दे पाते हैं | विवश होकर उन्हें अपनी जमीन जायदाद तक बेचनी पड़ती है |

डॉ.मधेपुरी ने ग्रामीणों को बताया कि हिन्दू धर्म शास्त्र में मुक्ति के जो उपाय बताये गये हैं उन्हें ही कर्मकांड कहा जाता है तथा इसकी रूढ़िवादिता को ही कहा जाता है- धर्मांधता ! श्राद्धकर्म की विविधता का निरूपण करते हुए उन्होंने कहा कि राजा से लेकर गरीब लोगों के लिए भी विष्णुपुराण में पितरों के श्राद्ध करने की चर्चा है जिसमें गरीबों के लिए भी व्यवस्था की गई है | वे हथेली पर तिल के कुछ दाने रखें और जल के साथ सूर्य देव को अर्पित करें या वह भी नहीं हो तो सपरिवार गाय को चारा काटकर खिला दें तथा हाथ जोड़कर अपने पितर से कहें- यही मेरी ओर से किया गया श्राद्ध है इसे मेरी श्रद्धायुक्त प्रार्थना के साथ स्वीकार करें (विष्णुपुराण पृष्ठ संख्या- 248-49)

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित जनसमूह से यह भी कहा कि आडंबर में लोगों को हैसियत से अधिक धन का व्यय करना उसकी मजबूरी बन जाती है | समाज में बदलाव लाने के लिए हमें संकल्पित और संगठित होकर कर्मकांड को त्यागना पड़ेगा | बिना कर्मकांड को त्यागे समाज तरक्की के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ेगा | आप गाँठ बांध लें कि यहाँ जूता-छाता-कम्बल…… आदि दान करने से वहाँ पितर को कभी नहीं मिलता है |

अंत में जब डॉ.मधेपुरी ने नौलखियावासी नर-नारियों से कहा कि परिवार व समाज को आगे बढ़ाने के लिए ब्राह्मणवादी ढोंग यानि अंधविश्वास को खत्म करना ही होगा तो सबों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ डॉ.मधेपुरी को पुनः आने का निमंत्रण भी दे डाला | इसी दौरान उद्घाटनकर्ता डॉ.मधेपुरी ने प्रथमवती देवी मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से भीषण ठंड को लेकर विकलांग और विधवा को कंबल भेंट किया |

इस कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप में राष्ट्रीय महासचिव महेन्द्र नारायण पंकज, राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर, ई.हरिश्चन्द्र मंडल, डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, डॉ.इन्द्र ना.यादव व कामेश्वर राय, पंकज कुमार, सुभाष चन्द्र प्रभाकर, गणेश मानव आदि ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर देते रहे कि मृत्यु भोज जैसी कुरीति का सामूहिक बहिष्कार जरूरी है क्योंकि यह एक सामाजिक कोढ़ है……….!

दूसरे सत्र में सामाजिक कुरीतियों पर चोट करने वाली कविताओं का पाठ किया सुकवि उल्लास मुखर्जी, डॉ.अरुण कुमार, प्रमोद कुमार, राकेश द्विजराज, योगेंद्र प्रसाद आदि ने | सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ.इन्द्र नारायण यादव ने तथा संचालन किये गजेंद्र कुमार और मिथिलेश कुमार ने | सम्मेलन की सफलता के लिए अनीता जी, रमण जी आदि सहित सबों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री रमेश यादव ने अध्यक्ष के निदेशानुसार कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा की | अंत में  सुकवि सुरेंद्र स्निग्ध के आकस्मिक निधन पर 1 मिनट का मौन रखकर शोक जताया गया |

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नव वर्ष में कोसी के तीनों जिले वाई-फाई से होंगे लैस

जहाँ एक ओर सभी अपने सगे-संबंधियों व परिजनों को बीते वर्ष के 31 दिसंबर के 12:00 बजे रात के बाद से ही ‘नव वर्ष मंगलमय हो’ की शुभकामनाएँ प्रेषित करने में लगे हैं वही BSNL के वरिष्ठ उपमंडल अभियंता श्री डी.सी.दास कोसी के तीनों जिले मधेपुरा-सहरसा-सुपौल के मुख्यालयों की दर्जनों जगहों पर वाई-फाई लगाने में जुट गये हैं | श्री दास ने मधेपुरा अबतक को बताया कि 31 दिसम्बर 2018 तक तीनों जिला मुख्यालयों में वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा | उन्होंने कहा कि 00 मीटर के रेडियस में इन तीनों जिले वासियों को वाई-फाई की सेवा मिलेगी जिस सुविधा के लिए आरंभ में कोई शुल्क नहीं लगेगा | श्री दास ने यह भी कहा कि वाई-फाई हॉट स्पॉट BSNL के टावड़ो पर लगेगा और जहाँ टावर नहीं होगा वहाँ जगह की व्यवस्था की जायेगी |

बता दें कि वाई-फाई रेडियो तरंगों की मदद से नेटवर्क और इंटरनेट तक पहुंचने की एक युक्ति है जिसके इर्द-गिर्द मौजूद मोबाइल फोनों को वायरलेस इंटरनेट उपलब्ध कराने का काम करता है | जानिए कि इसकी गति सामान्य सेवा प्रदाताओं की ओर से दी जाने वाली गति से काफी तेज होती है | यह तकनीक आजकल के नए स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर में आसानी से पाई जाती है | एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक जानकारी भेजने के लिए वाई-फाई I.E.E.E 802.11 मानक का प्रयोग करता है |

जानकारी के लिए जहाँ मधेपुरा जिला मुख्यालय के बी.पी.मंडल चौक, कर्पूरी चौक, स्टेशन चौक, पूर्णिया गोला चौक, मस्जिद चौक, भूपेन्द्र चौक आदि सहित अन्य जगहों पर वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाये जायेंगे वहीं सहरसा के डी.बी.रोड, डीएम-एसपी ऑफिस, कोर्ट परिसर, सर्किट हाउस, कायस्थ टोला, पॉलिटेक्निक, शंकर चौक, दहलान चौक, महावीर चौक, तिवारी टोला, प्रोफेसर कॉलोनी आदि जगहों पर और सुपौल जिला मुख्यालय के राजेंद्र नगर, चकला निर्मली, कलेक्ट्रेट, नगर परिषद, स्टेशन रोड सहित अन्य जगहों पर वाई-फाई हॉट स्पॉट लगाये जायेंगे |

चलते-चलते यह भी बता दें कि सहरसा जिला टेलीकाम मैनेजर श्री बी.के.सिंह ने बताया कि सहरसा, मधेपुरा व सुपौल मुख्यालय की जगहों की सूची तैयार कर पटना स्वीकृति हेतु भेज दी गई है |

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