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हवा में जहर घोल रही है अमेजन के जंगल की धधकती आग

अमेजन के जंगल के वृक्षों से धरती के लिए आवश्यक कुल ऑक्सीजन का 20 फ़ीसदी हिस्सा हमें मिलता है। किंतु, धरती का फेफड़ा कहलाने वाला अमेजन का वह जंगल आज धधक रहा है….. जिसके कारण समस्त संसार के पर्यावरणविद् चिंतित हो रहे हैं। भला क्यों नहीं, ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में अमेजन बेसिन का बहुत बड़ा योगदान है।

बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए फ्रांस में आयोजित G-7 सम्मेलन में भी अमेजन में लगी आग की गर्मी महसूस की गई तथा आग को बुझाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास जारी रखने की चर्चा बार-बार की जाती रही। यह भी कहा गया कि यह आग एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप की वायु को प्रभावित यानी प्रदूषित करने में सक्षम है। यह विषैला धुआँ अटलांटिक तट तक फैल गया है।

यह भी जानिए कि आसमान में एक ऐसी आंख (नासा का एक्वा सेटेलाइट) है जो टकटकी लगाए अमेज़न में लगी आग से प्रदूषित हो रहे वायुमंडल का आकलन कर रही है। इस आग से 228 मेगाटन कार्बन डाइऑक्साइड निकलने का अनुमान है। एक्वा सेटेलाइट द्वारा अमेजन के जंगलों में लगी आग से निकल रही जहरीली गैस कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा का भी आकलन किया जा रहा है जो गैस हवा के संग लंबी दूरी तय करने के साथ-साथ लगभग 1 महीने तक वायुमंडल में मौजूद रहती है। इसके बाद ही कार्बन मोनोऑक्साइड का असर समाप्त होता है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि फिलहाल यह गैस बहुत अधिक ऊंचाई लगभग 18 हजार फीट पर है लिहाजा जिस वायु को लोग सांस के साथ अंदर लेते हैं वह तत्काल इससे अछूती है… लेकिन यदि तेज हवा इसके प्रदूषक तत्वों को धरती की तरफ धकेल देगी तो दुनिया के अधिकांश हिस्से की वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है तब लोगों का जीना मुश्किल हो जाएगा।

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बीएनएमयू पीजी सेकेंड एवं थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा 23 सितम्बर से

ज्योंही भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर के सेकेण्ड एवं थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा 23 सितंबर से शुरू करने की अधिसूचना जारी की गयी त्योंही राजभवन ने बीएनएमयू के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय को टीएमबीयू के कुलपति का अतिरिक्त जिम्मेदारी दिये जाने की अधिसूचना जारी कर दी | अधिसूचना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय में हर्ष का माहौल बनता चला गया | कुछ शिक्षकों ने कहा कि कुलपति डॉ.राय के कार्यों को देखते हुए कुलाधिपति महामहिम फागू चौहान ने उन्हें अतिरिक्त प्रभाव दिया है |

बता दें कि बीएनएमयू ने पीजी सेकेण्ड सेमेस्टर (2017-19) व थर्ड सेमेस्टर (2016-18) की परीक्षा का कार्यक्रम एवं सेंटर लिस्ट जारी कर दिया है | बीएनएमयू के सभी कॉलेजों का एक ही परीक्षा केंद्र होगा- नॉर्थ कैंपस का परीक्षा भवन | सारी परीक्षाएं 23 सितंबर से 1 अक्टूबर तक आयोजित की जायेगी |

यह भी जानिये की पीजी के सभी विषयों को दो ग्रुपों A एवं B में बांटा गया है | ग्रुप-A में होगा- Physics, Chemistry, Botany, Zoology, Mathematics, Psychology, Geography, Home Science, Economics & Commerce.

ग्रुप B में होगा- English, Hindi, Urdu, Begali, Maithili, Sanskrit, History, Philosophy & Political Science.

यह भी जान लें कि ग्रुप A की परीक्षा 23, 25, 27 एवं 30 सितंबर को तथा ग्रुप B की परीक्षा 24,26, 28 सितंबर व 01 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी | यह भी याद रख लें कि प्रतिदिन प्रथम पाली में सेकेण्ड सेमेस्टर एवं द्वितीय पाली में थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित की जाएगी | चलते-चलते यह भी कि दोनों परीक्षा के लिए छात्र अब ₹200 विलम्ब शुल्क के साथ 18 सितंबर तक परीक्षा फार्म भर सकेंगे |

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हिन्दी दिवस पर ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ की गृह मंत्री ने की वकालत

हिन्दी दिवस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्र को शुभकामनाएं देते हुए “एक राष्ट्र: एक भाषा” की जमकर वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है तथा प्रत्येक भाषा का अपना महत्व है, परंतु संपूर्ण राष्ट्र की भाषा एक होना अत्यंत आवश्यक है जिससे विश्व में भारत की पहचान बनेगी।

बता दें कि गृह मंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम यदि कोई एक भाषा कर सकती है तो वह हिन्दी ही है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जो देश अपनी भाषा खो देता है वह अपना अस्तित्व भी खो देता है।

Students attending Hindi Diwas Function at B.P.Mandal Engineering, Madhepura.
Students attending Hindi Diwas as well as Annual Function Day at B.P.Mandal Engineering College, Madhepura.

वहीं बी.पी.मंडल अभियंत्रण महाविद्यालय मधेपुरा के वार्षिकोत्सव पर हिन्दी दिवस के दिन संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित किया बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.अवध किशोर राय, मुख्यअतिथि के रूप में समाजसेवी साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, प्राचार्य ई.अरविन्द कुमार अमर, डॉ.एस.डी.सिंह, पीआरओ सुधांशु शेखर आदि ने। कुलपति डॉ.राय ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप जीवन में ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करें और उसे सफल बनाने हेतु स्मार्टफोन एवं मोबाइल का दुरुपयोग कदापि नहीं करें। इंटरनेट के ज्ञान पक्ष से समुचित मित्रता बनाये रखें।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने हिन्दी दिवस पर अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि देश की एकता और अखंडता के पांच तत्वों में एक है हिन्दी और शेष चार हैं- रेल, खेल, सिनेमा और गांधी। उन्होंने हिन्दी को राष्ट्र की भाषा बनाने की वकालत करते हुए कहा कि भारतीय शीर्ष नेतृत्व में तुर्की के मुस्तफा कमाल पाशा (अतातुर्क) का संकल्प जब गूंजने लगेगा तब हिन्दी राष्ट्र की भाषा बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने लगेगी। डॉ.मधेपुरी ने अभियंत्रण छात्र-छात्राओं से यही कहा-

हिन्दी भारत की भाषा है।

हिन्दी हम सब की आशा है।।

हिन्दी भारत की शान है।

हिन्दी हम सब की पहचान है।।

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आस्था की न कोई जाति होती और न कोई मजहब होता…

सद्भावना की ऐसी मिसाल भारत के अलावे दुनिया के किसी दूसरे मुल्क में देखने को नहीं मिलेगी….. मुहर्रम के अवसर पर 106 ताजिये के लाइसेंस में 57 हिंदुओं के नाम हो- इसे बेमिसाल नहीं तो क्या कहेंगे आप | जहाँ ताजिया का निर्माण भी हिन्दू ही करते हैं |

बता दें कि बिहार के नवादा जिले के सिरदला में जहाँ 49 ताजिये का निर्माण एवं लाइसेंस मुस्लिम परिवार के लोगों के नाम है वहीं 57 हिंदुओं के नाम। सिरदला के कुशाहन निवासी सचिन कुमार रेलवे में कर्मचारी हैं और विगत 10 दिनों से वे मुहर्रम की छुट्टी लेकर गाँव आये हैं | जहाँ ग्रामीणों के साथ में मिलकर ताजिये का पहलाम किया उन्होंने |

यह भी बता दें कि सचिन के लिए यह कोई पहला अवसर नहीं है बल्कि 35 वर्षीय सचिन कुमार विगत कई वर्षों से इमाम हुसैन-हसन की शहादत की याद में मोहर्रम के अवसर पर हर बार घर आते रहे हैं | सचिन के परिवार वालों की आस्था वर्षों से मोहर्रम से जुड़ी है |

सचिन कहते हैं कि तीन पीढ़ियों से उसके परिवार वाले ताजिया बनाते आ रहे हैं | इसे सचिन के पूर्वज जेठू राजवंशी ने शुरुआत की थी | सचिन के अनुसार इमाम साहब की इबादत से जेठू राजवंशी को संतान हुआ था | तब से ही इमाम साहब की याद में वह परिवार ताजिये बनाते आ रहे हैं…… प्रार्थना करते हैं तथा परिवार की सलामती की दुआ मांगते हैं | ग्रामीण लोग आपस में सहयोग कर इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं |

चलते-चलते बता दें कि नारदीगंज में हिन्दू महिला ही ताजियेदार हैं | ताजिये के समीप औरत-मर्द सभी बैठकर मातम मनाते हैं……. मर्सिया गाते हैं | हजार से अधिक आबादी वाली भटविगहा गाँव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं फिर भी वहां इमाम साहब की इबादत की जाती है | वहाँ के लोग कहते हैं कि इमाम साहब से हमारी आस्था जुड़ी है……. आस्था की कोई जाति और मजहब नहीं होता |

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सिंहेश्वर प्रमुख चन्द्रकला देवी जिले के गुड सॅमैरिटन के रूप में हुई सम्मानित

दुनिया के देशों में सबसे अधिक भारत में लगभग 15 लोग रोड एक्सीडेंट में प्रति घंटे मरते हैं तथा प्रतिदिन 60 से अधिक लोग घायल होते हैं | परंतु घायलों को मदद करने या हॉस्पिटल तक पहुंचाने में प्रायः नेक आदमी कतराते रहे…… क्योंकि होम करते हाथ जलने का भय हमेशा उन्हें बना रहता | यहाँ तक कि घायलों के खून लग जाने पर सॅमैरिटन (नेक व्यक्ति) को कभी-कभी 302 दफा के तहत जेल जाना पड़ता था |
बता दें कि मार्च 2016 में भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा समैरिटन को सुरक्षा देने के साथ-साथ सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने वाले कानून को सबल बनाए जाने के फलस्वरूप लोग अब घायलों की मदद करने में मुस्तैदी से लग जाते हैं |
यह भी बता दें कि उक्त आशय का पत्र परिवहन सचिव द्वारा भी जारी किया गया है | तब से जिले के विभिन्न थानों के सहयोग से सात गुड सॅमैरिटन की सूची बनाई गई है जिसमें छह मुरलीगंज थाने से हैं और एक अकेली महिला सिंहेश्वर थाना से- सिंहेश्वर प्रमुख चंद्रकला देवी | सबों को परिवहन विभाग द्वारा 4 सितंबर को सम्मानित किया गया |
जिला परिवहन पदाधिकारी रजनीश लाल ने बताया कि सम्मानित होने वाले सात सॅमैरिटन है- (1) चंद्रकला देवी (2) शिवनंदन यादव (3) मिथिलेश कुमार (4) टुनटुन यादव (5) विनोद पासवान (6) मनोज कुमार यादव और (7) अंकेश कुमार …… जिन्हें 4 सितंबर को शाल, प्रमाणपत्र एवं एक-एक हज़ार रूपये देकर सम्मानित किया गया जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला द्वारा |

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शिक्षक दिवस पर सम्मानित हुए बिहार के 20 शिक्षक

गुरुवार, 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में मुख्य राजकीय समारोह का आयोजन हुआ। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिमोट के माध्यम से बिहार उन्नयन कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर को और यादगार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले बिहार के विभिन्न जिलों के 20 शिक्षकों तथा वर्ष 2018 में शिक्षक कल्याण कोष में अधिकतम राशि जमा करने वाले नालंदा, पश्चिम चंपारण एवं पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, मुख्य सचिव श्री दीपक कुमार एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आरके महाजन समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।

CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh_012
CM Nitish Kumar in Shikshak Diwas Samaroh.

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आज शिक्षकों के सम्मान का दिन है। शिक्षकों को पूरा देश सम्मान की दृष्टि से देखता है, यह बात शिक्षकों को भी याद रखनी चाहिए। बिहार के नियोजित शिक्षकों द्वारा मांगों के समर्थन में शिक्षक दिवस नहीं मनाने तथा पटना में प्रदर्शन करने को लेकर उन्होंने कहा कि वे मांग जरूर करें, लेकिन अपने मूल दायित्व को भी नहीं भूलें। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहण करेंगे, पढ़ाते रहेंगे तो उनकी मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे ही उनकी मांगों को पूरा करेंगे।
अब चलिए एक नज़र उन शिक्षकों पर डालें जिन्हें शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया। उनके नाम इस प्रकार हैं: डॉ. नम्रता आनंद (पटना), शालिनी सिन्हा (पटना), कुमारी खुशबू कुशवाहा (मधुबनी), सुनैना कुमारी (नालंदा), सबीहा फैज (भागलपुर), डॉ. अभय कुमार रमण (पूर्वी चंपारण), डॉ. गणेश शंकर पांडेय (नालंदा), संत कुमार सहनी (बेगूसराय), मनोज कुमार यादव (सीतामढ़ी), अवधेश पासवान (भागलपुर), डॉ. देवेन्द्र सिंह (गया), जितेन्द्र सिंह (पश्चिम चंपारण), ललिता कुमारी (पूर्णिया), सत्यनारायण राय (सीतामढ़ी), संगीता कुमारी (सीतामढ़ी), अमरनाथ त्रिवेदी (मुजफ्फरपुर), मो. सनाउल्लाह शाह (पश्चिमी चंपारण), बबीता कुमारी (सुपौल), सुमन सिंह (बांका) एवं कविता प्रवीण (नालंदा)। सभी सम्मानित शिक्षकों को ‘मधेपुरा अबतक’ की ओर से ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं।

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शिक्षक ही बनेंगे बदलाव के सारथी- डॉ.मधेपुरी

शिक्षक दिवस डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मोत्सव के रूप में प्रतिवर्ष 5 सितंबर को समस्त भारत में मनाया जाता है। आज के दिन, भौतिकी के प्रोफेसर (डॉ.) भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी से शुभाशीष प्राप्त करने आए छात्रों से उन्होंने यही कहा कि आज नहीं तो कल शिक्षक ही बनेंगे बदलाव के सारथी…. भले ही अब शिक्षक दिवस के दिन विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डॉ.राधाकृष्णन की जीवनी पर शिक्षकों द्वारा विस्तार से चर्चा नहीं की जाती, बल्कि प्रायः शिक्षण संस्थानों में शिक्षक दिवस के मंच को महोत्सव के मंच की तरह सजा कर केवल ‘कोरम’ पूरा कर लिया जाता है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि असली शिक्षक वे हैं जो आंखें खराब होने पर भी हार नहीं मानते, बल्कि तब भी पेड़ के नीचे बैठकर बांट रहे होते हैं- शिक्षा। वही आदर्श शिक्षक गिने जाते हैं जो शिष्यों को अपनी चारित्रिक ऊर्जा से सकारात्मक होना सिखाते हैं… जो शिष्य की प्रतिभा को अपने अनुभवों से तराशते व निखारते हैं। वैसे ही अनुभवी व ज्ञानी शिक्षक आजकल के छात्रों व अभिभावकों के बीच जागरूकता फैलाकर एक दिन शिक्षा के स्तर में सुधार अवश्य लाएंगे। मधेपुरा के वैसे ही शिक्षकों में प्रातः स्मरणीय कुछ नाम हैं- लक्ष्मी प्रसाद सिंह, रतन चन्द, डॉ.महावीर प्रसाद यादव, युगल शास्त्री प्रेम, सत्य नारायण पोद्दार ‘सत्य’, लाला सुरेंद्र प्रसाद, जलधर झा जलदेव, रंजीत कुमार सरकार, लक्ष्मी नारायण मंडल, नंदकिशोर मंडल, परमानंद झा, सीपी सिंह, शिव कुमार प्रसाद यादव….. आदि।

Dr.Bhupendra Madhepuri (Professor of Physics) having deep discussion with Bharat Ratna DR.APJ Abdul Kalam.
Dr.Bhupendra Madhepuri (Professor of Physics) having deep discussion with Bharat Ratna DR.APJ Abdul Kalam.

चलते-चलते यह भी बता दें कि वर्तमान में भौतिकी के लोकप्रिय शिक्षक डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी हर विधा के छात्रों की मदद कर उसे मंजिल हासिल करने में सहयोग  दे-देकर अपनी पहचान एक संवेदनशील शिक्षक के रूप में बना ली है। डॉ.मधेपुरी ने साहित्य के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। शिक्षक के पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद भी वे छात्रों को मदद करने में पीछे नहीं रहे हैं। भारतरत्न डॉ.कलाम पर डॉ.मधेपुरी द्वारा लिखी गई पुस्तक झारखंड सरकार के छठे वर्ग के पाठ्यक्रम में शामिल कर ली गई है। डॉ.कलाम हमेशा मधेपुरी से यही कहा करते- “मैं दिल से शिक्षकों का सम्मान करता हूँ,  क्योंकि शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है।”

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चन्दा मामा को छूने चला भारतीय चन्द्रयान- 2 का लैंडर “विक्रम”

आज 3 सितंबर  है और  दिन मंगलवार। आज से पहले यही हुआ कि चन्द्रयान-2 ने चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग की दिशा में एक और मील का पत्थर पार करने का रिकॉर्ड बना लिया है। सितंबर 2 को दोपहर दिन में आधे घंटे के दरमियान ‘विक्रम’ आर्बिटर से सही सलामत अलग हो गया और फिलहाल दोनों पांचवी कक्षा में घूम रहे हैं- चंद्रमा से जिसकी न्यूनतम दूरी 119 किलोमीटर तथा अधिकतम 127 किलोमीटर है।

बता दें कि आज यानी 3 सितंबर के बाद अगले दो दिन विक्रम अपनी कक्षा को छोटी करता जाएगा… 4 सितंबर को इसकी कक्षा में अंतिम बार बदलाव होगा…  5-6 सितंबर को लैंडर में लगे उपकरणों को मिशन डायरेक्टर बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ की टीम द्वारा (इसरो के अध्यक्ष के.शिवन के निर्देशन में) जांच की जाएगी।

भारत ही नहीं सारा संसार 7 सितंबर को सिर ऊपर करके बिहार के वैज्ञानिक अमिताभ के कारनामे को देखता रह जाएगा जब लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेगा…. जबकि ऑर्बिटर अगले 1 वर्ष तक चंद्रमा की कक्षा में ही चक्कर लगाता रहेगा….. और चाँद की मैपिंग के साथ-साथ उसके बाहरी वातावरण का भी अध्ययन करता रहेगा।

चलते-चलते यह भी बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने सॉफ्ट लैंडिंग सरीखे जटिल कार्य को रूस द्वारा नकारे जाने के बाद खुद करने की ठान ली जो 6-7 सितंबर की दरमियानी भारत के लिए बेहद अहम रात होगी… लगभग 1:40 पर लैंडर विक्रम चंद्रमा पर उतरेगा तथा 5:00 बजे तड़के रोवर चाँद की सतह पर मॉर्निंग वॉक करना शुरू कर देगा और इसी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा भारत !!!

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मधेपुरा को आगे बढ़ाने में बहुतों का योगदान

आंखें छोटी भले हो लेकिन इसमें ताकत आसमान देखने की होती है। मधेपुरा आरंभ में छोटा सा सबडिवीजन था भागलपुर जिले के अंदर, सदर कचहरी भागलपुर ही हुआ करता। तब बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के सिमुलिया गांव से आकर आशुतोष मुखर्जी (बी.ए.) मधेपुरा के तत्कालीन सीरीज इंस्टिट्यूट (वर्तमान एसएनपीएम+2 स्कूल) में सकेंड टीचर बन शिक्षा दान करना आरंभ किए थे। उनके पौत्र पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रह चुके सुरेश चन्द्र मुखर्जी की प्रथम वार्षिकी (1 सितंबर 2019) को झारखंड हाई कोर्ट से न्यायमूर्ति आर.मुखोपाध्याय (भातीज), लंदन से उनके बड़े पुत्र डॉ.कौशिक मुखोपाध्याय एवं छोटे पुत्र ई.अर्निवान मुखोपाध्याय सहित मधेपुरा के समाजसेवी-साहित्यकार डॉ. भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी, डॉ अरुण कुमार मंडल, डॉ.दिवाकर सिंह, प्राचार्य डॉ.शिव नारायण यादव व डॉ.सुरेश प्रसाद यादव, उद्दालक घोष, इंद्रनील घोष आदि गणमान्यों द्वारा निष्ठापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम आशुतोष मुखर्जी पथ वाले लालकोठी निवास एवं स्थानीय जीवन सदन में आयोजित किया गया था।

Samajsevi Dr.Madhepuri discussing with Honourable Justice Rongon Mukhopadhyay of Jharkhand High Court regarding the history of Kosi Region & the history of Singheshwar Sthan along with Director Uddalak Ghosh at Lal Kothi Campus, Ashutosh Mukherjee Path, Madhepura.
Samajsevi Dr.Madhepuri discussing with Honourable Justice Rongon Mukhopadhyay of Jharkhand High Court regarding the history of Kosi Region & the history of Singheshwar Sthan along with Director Uddalak Ghosh at Lal Kothi Campus, Ashutosh Mukherjee Path, Madhepura.

इस अवसर पर खोजी प्रवृत्ति के न्यायमूर्ति आर.मुखोपाध्याय देर तक डॉ.मधेपुरी से मधेपुरा के भूले-बिसरे अतीत को जानने में लगे रहे। ऋष्यश्रृंग के सिंहेश्वर स्थान के इतिहास के प्रति न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय की अभिरुचि को देख कर ही तो डॉ.मधेपुरी ने स्वरचित दो पुस्तकें- रास बिहारी लाल मंडल : पराधीन भारत में स्वाधीन सोच एवं इतिहास पुरुष शिवनंदन प्रसाद मंडल तथा एक पुस्तक हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ रचित शैव अवधारणा और सिंहेश्वर स्थान…. ये तीनों पुस्तकें ससम्मान भेंट की।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पुण्यतिथि पर आयोजित प्रथम वार्षिकी के धार्मिक अनुष्ठानों में संपूर्ण समर्पण के साथ सपरिवार संलग्न देखे गए मिसेज डॉ.नंदिता मुखर्जी, डॉ.कौशिक, डॉ.नीलांजना, आकाश, अभिलाष सहित ई.अर्निवान, रूमिला, आयुष, तनीषा एवं अन्य शुभेच्छुगण।

 

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गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा वेदों में- पीएम नरेन्द्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की जनता से यही कहा कि हमारे पास हजारों वर्ष पुराना वेदों का भंडार है जिसमें एक-से-एक गंभीर बीमारियों से जुड़े इलाज की चर्चा है। लोग उधर ध्यान नहीं दिए हैं।

बता दें कि पीएम मोदी के अनुसार हम अपने प्राचीन अनुसंधानों को आधुनिकता से जोड़ने में बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाए बल्कि आधुनिकता की चकाचौंध में उन्हें भूलते चले गए। नमो ने देशवासियों से कहा कि इसी स्थिति को बीते 5 वर्षों में हमने लगातार बदलते रहने का भरसक प्रयास किया है।

यह भी बता दें कि ये सारी बातें पीएम मोदी ने दिल्ली में आयोजित “योग पुरस्कार समारोह” को संबोधित करते हुए उपस्थित लोगों के बीच कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आयुष मंत्रालय के जरिए बीते 5 वर्षों से इस स्थिति को बदलने का काम अनवरत जारी है।

इस अवसर पर नमो द्वारा उद्घोषणा की गई कि प्राचीन शोधों को प्रयोगशालाओं में मान्यता दी जा रही है। साथ ही उन मान्यताओं को इस तरह पेश किया जा रहा है जिससे चिकित्सा विज्ञान भी उन्हें समझ सके। मोदी ने स्वीकार किया कि वेदों के पुराने ज्ञान को सफलतापूर्वक आधुनिकता के साथ जोड़ने में बहुत कम सफलता मिली है, फिर भी देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास पर तेजी से काम चल रहा है।

चलते-चलते यह भी बता दें कि पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि केवल आधुनिक चिकित्सा ही नहीं, आयुष की शिक्षा में भी अधिक व बेहतर पेशेवर आएं, इसके लिए भी आवश्यक सुधार किए जा रहे हैं। जब हम देश में और डेढ़ लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र खोलने जा रहे हैं तो भला आयुष को कैसे भूलेंगे।

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