एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा के सम्मान में हर साल 7 अगस्त को “जेवलिन थ्रो डे”

नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त को टोक्यो- 2020 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। अब भारतीय एथलेटिक्स महासंघ द्वारा इस दिन को “राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस” के रूप में मनाएगा।

बता दें कि एएफआई के योजना आयोग के अध्यक्ष ललित भनोट ने कहा है कि चोपड़ा सहित अन्य एथलीटों के सम्मान में पूरे भारत में भाला फेंक को बढ़ावा देने के लिए हम 7 अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस के रूप में मनाएंगे।

जानिए कि एएफआई के ऐसे निर्णय पर टिप्पणी करते हुए गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने कहा कि कभी भी सुपरस्टार वाली मानसिकता अपने ऊपर हावी नहीं होने दूंगा। भाला फेंक के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा का लक्ष्य फिलहाल 2022 में 15 से 24 जुलाई तक अमेरिका में होने वाले “विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप” में स्वर्ण पदक जीतना है।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण मधेपुरी ने गुजरात के उस पेट्रोल पंप के मालिक एवं अन्य को धन्यवाद दिया जिन्होंने नीरज के गोल्ड जीतने की खुशी में 24 घंटे के लिए नीरज नाम के सभी वाहन चालकों/मालिकों को मुफ्त में पेट्रोल देने का काम किया और ऐसा करके भारतीय युवाओं में खेल के प्रति उन्होंने अद्भुत आकर्षण पैदा कर दिया। साथ ही डॉ.मधेपुरी ने सफलता का खुमार कभी हावी नहीं होने देने के लिए नीरज चोपड़ा को जन्म देने वाले एवं परवरिश करने वाले उस देशभक्त माता-पिता सरोज देवी व सतीश कुमार को नमन करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया है।

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सभी खिलाड़ियों को केंद्रीय खेल मंत्रियों ने किया सम्मानित

टोक्यो- 2020 का समापन 8 अगस्त 2021 को हुआ और 9 अगस्त को दिल्ली के अशोका होटल में गोल्डन ब्वाय नीरज चोपड़ा, चांदी की चमक के साथ आई चानू और रवि तथा चार कांस्य पदक विजेताओं- सिंधू, लवलीना, पूनिया और पुरुष हॉकी के साथ-साथ महिला हॉकी टीम को बुलाकर सम्मान दिया खेल मंत्री अनुराग ठाकुर एवं पूर्व खेल मंत्री किरण रिजीजू।

बता दें कि महिला हॉकी टीम को इसलिए बुलाया गया कि ऑस्ट्रेलिया की जिस पुरुष हॉकी टीम ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को हरा दिया वहीं भारतीय महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलियाई महिला हॉकी टीम को धूल चटा दिया। भारतीय महिला टीम हार कर भी अपने प्रदर्शन से सभी हिंदुस्तानियों का दिल जीत लिया।

जानिए कि नीरज ने तो स्वर्ण पदक जीतकर देश का मौसम बदल दिया। नीरज ने कहा जहां देश का प्रधानमंत्री खिलाड़ी से फोन पर बात करें इससे बड़ी बात और क्या होगी। नीरज ने देशवासियों की खुशियों का इजहार करते हुए कहा-

ना खा पाता हूं, ना सो पाता हूं… इतने लोग आते हैं मिलने कि मेडल को पॉकेट में लेकर घूम रहा हूं। जब भी इसे निकाल कर देख लेता हूं….. तो सब ठीक रहता है। यह मेरा नहीं पूरे देश का मेडल है। इस प्रकार के समर्थन के लिए सबको धन्यवाद ! जब हम लोग खेल रहे थे तो पूरा भारत खिलाड़ियों के साथ खड़ा था।

मौके पर खेलप्रेमी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि टोक्यो- 2020 के चैंपियनों का सतरंगी सत्कार ही भारत को आने वाले दिनों में बनाएगा- खेलों की महाशक्ति ! उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक- 2024 से पूर्व भारत के शेष सभी राज्यों में खेल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं।।

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कीर्ति नारायण मंडल को जानने के लिए बुद्ध, नानक और कबीर को जानना जरूरी- डॉ.मधेपुरी

समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कोरोना प्रोटोकाॅल के नियमों का पालन करते हुए अपने निवास ‘वृंदावन’ में शिक्षा के महान पुजारी कीर्ति नारायण मंडल को नमन करते हुए उनकी 106वीं जयंती मनाई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल ताजिंदगी कबीर की तरह जीवन जीते रहे….. बिल्कुल उसी तरह जैसे कबीर कहा करते थे- जो घर जारे आपनो…. चले हमारे साथ।

डॉ.मधेपुरी ने कहा कि कीर्ति बाबू भगवान बुद्ध की तरह घर-परिवार को त्याग कर लोक कल्याणार्थ सब कुछ न्योछावर करते रहे। उन्होंने पिताश्री के नाम पर ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय की स्थापना की जिसमें 50 बीघे जमीन और ₹25000 दान में दिए। माताश्री के नाम पार्वती विज्ञान महाविद्यालय स्थापित करने में करोड़ों रुपए की कीमती जमीन दान में दी। मिडिल स्कूल, हाई स्कूल और दर्जनों कॉलेजों के निर्माता बन गए कीर्ति बाबू। कितने गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता देकर पढ़ाया उन्होंने। कितनों को नौकरी देकर उनके घरों में रोशनी जला दी उन्होंने।

डॉ.मधेपुरी ने उपस्थित बच्चों को कीर्ति बाबू के बारे में यह भी कहा कि कीर्ति बाबू तपस्वी थे। वे वर्षों नमक नहीं खाते तो कभी कई महीनों तक केवल दूध पीकर ही रह जाते। वे जहां भी रहते हमेशा साफ-सफाई करते रहते। वे कृष्ण की तरह जूठे पत्तल उठाने में भी संकोच नहीं करते।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने नानक को संदर्भित करते हुए कीर्ति बाबू का एक संस्मरण बच्चों को सुनाकर बच्चों में काम करने का संस्कार भरा। उन्होंने कहा कि एक बार मैंने कीर्ति बाबू को पार्वती कॉलेज में ईंट की दीवार जोड़ते हुए देखा। फिर उन्होंने नानक के बारे में कहा कि नानक उन हाथों का पानी ग्रहण नहीं करते जिनके हाथ में काम करने का कोई ठेला कीर्ति बाबू की तरह नहीं होता। कीर्ति बाबू सचमुच महान हैं। उनकी जयंती हर घर में मनाई जानी चाहिए।

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टोक्यो- 2020 का समापन और भारत

टोक्यो ओलंपिक- 2020 के समापन से एक दिन पूर्व नीरज चोपड़ा के ‘पानीपत’ का पानी ओलंपिक में रंग दिखा दिया। जब नीरज ने जैवलिन को 87.58 मीटर पर गाड़ा और भारत के लिए गोल्ड जीता कि 137 करोड़ भारतीय के भीतर खुशियों की लहर दौड़ गई। हुआ यही कि टोक्यो से दिल्ली तक सिर्फ इंडिया… इंडिया सुनाई देने लगा। सभी भारतवासियों के भरोसे को नीरज ने जीत लिया। 23 वर्षीय हरियाणवी छोड़ा की मेहनत ने रंग ला दी। सभी भारतीयों के चेहरे खिल उठे। टोक्यो के पोडियम में नीरज ने तिरंगा को ऊंचाई प्रदान की और राष्ट्रगान बजवा दिया। इसलिए तो टोक्यो- 2020 के समापन से पहले ही नीरज के लिए 13-14 करोड़ के इनाम का ऐलान हो चुका है।

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक के समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक बजरंग पूनिया ने कहा कि 2024 के पेरिस ओलंपिक में गोल्ड के लिए होगी कोशिश। अभी विश्व के 200 से अधिक देशों में भारत 47वें स्थान पर है जबकि टोक्यो ओलंपिक में नंबर 4 पर रही महिला हॉकी टीम वरना……!

जानिए कि 125 वर्ष में एथलेटिक्स में पहला गोल्ड जीतकर नीरज ने उसे मिल्खा सिंह को समर्पित किया। नीरज ने भाला फेंककर दुनिया को स्तब्ध और भारतीयों को जश्न में डुबो दिया। भारत ने इस बार कुल 7 पदक जीते जिसमें एक नीरज का गोल्ड, 2 सिल्वर- चानू और रवि का तथा 4 कांस्य है- सिंधू, लवलीना, पूनिया एवं पुरुष हॉकी का। भारत यह सातों पदक 17 दिनों तक 205 देशों के 11000 से अधिक एथलीटों के साथ जद्दोजहद करके जीता है। टोक्यो- 2020 ओलंपिक में 33 खेल और 339 इवेंट्स हुए।

बता दें कि टोक्यो में नीरज का गोल्ड भारत का दसवां स्वर्ण पदक है। भारत ने इससे पहले हॉकी में 8 स्वर्ण और शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने एक स्वर्ण जीता था। अद्वितीय जोश एवं अतुलनीय धैर्य से खेलने वाले ही गोल्ड मेडल जीतते हैं।

जब नीरज ने भारत के लिए गोल्ड जीता तो राष्ट्रपति से लेकर खेल मंत्री सहित सभी भारतीयों ने उनके लिए हृदय से बधाइयों का तांता लगा दिया। भारतीय क्रिकेट की शान सुनील गावस्कर ने ताली बजाते हुए खड़े होकर अपने अद्भुत अंदाज में कहा- “टोक्यो के हीरो”।

सुविख्यात कवि कुमार विश्वास ने कहा कि कुश्ती और हॉकी में उम्मीद थी गोल्ड की जो चूक गई। परंतु, नीरज ने गोल्ड के लिए भाला गाड़ दिया।

अंत में ऐन मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने टीवी पर गोल्ड मेडल पहने बीच में खड़े नीरज को देख उस लम्हे को याद करते हुए यूं बयां किया है- राष्ट्रगान का धुन बज रहा था। भारतीय तिरंगा धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा था। मैं भावुक हो रहा था। मेरे अंदर उठ रहे जोश मेरे आंसू को कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे… कदाचित उस घड़ी सभी भारतीयों के रोंगटे खड़े हो रहे होंगे… सबों की यही दशा रही होगी… सभी यही कह रहे होंगे- नीरज पर नाज है…! और यह भी कि… “भारत का भाला… है सबसे आला !!”

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गोल्डन ब्वॉय नीरज ने ओलंपिक में भाला गाड़कर भारतीय राष्ट्रगान बजा दिया

हरियाणा पानीपत के गोल्डन ब्वॉय नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक- 2020 में जैवलिन थ्रो में 87.58 मीटर जैवलिन फेंककर पहला गोल्ड जीतकर पोडियम में राष्ट्रगान बजवा दिया। राष्ट्रगान की धुन को सुनकर 137 करोड़ भारतीयों के अंदर खुशियों की लहर उठने लगी। नीरज देखते-देखते देश के नायक बन गए। नीरज पर भारत को गर्व इस कदर हुआ कि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, खेल मंत्री, रक्षा मंत्री सहित सभी खेल प्रेमियों ने इस गोल्डन ब्वॉय को बधाइयां दी।

बता दें कि हरियाणा के मुख्यमंत्री ने इनाम में 6 करोड़ की राशि नीरज को देने का ऐलान किया है। श्री खट्टर ने कहा कि नीरज के गले में गोल्ड नहीं बल्कि आगे आने वाले युवा खिलाड़ियों का भविष्य है। देश भर में जश्न का माहौल है। नीरज की उपलब्धि को देश याद रखेगा। नीरज की कामयाबी पर देश को गर्व है।

जानिए कि 13 साल बाद भारत को गोल्ड मेडल मिलने पर प्रधानमंत्री मोदी ने नीरज से फोन पर बातें की, बधाइयां दी और उनके माता-पिता को प्रणाम किया। पीएम ने कहा कि हिले हुए विश्वास को बल दिया है नीरज चोपड़ा ने। ग्यारह खिलाड़ियों को पछाड़कर नीरज ने गोल्ड जीता है। पीएम ने चानू व रवि को चांदी के लिए एवं सिन्धु, लवलीना, पूनिया और पुरुष हॉकी को कांस्य के लिए बधाइयां दी और कहा- “खेलो इंडिया, जीतो इंडिया”।

ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा ने नीरज को बधाई देते हुए कहा कि नीरज ने देश का सपना पूरा किया। नीरज ने इस बार वह कर दिखाया जो किसी ने नहीं किया। कृषक पिता सतीश कुमार ने कहा कि पानीपत का 23 वर्षीय बेटा नीरज ने टोक्यो ओलंपिक में सब को पानी पिला दिया और तिरंगा को गौरवान्वित कर सिर पर उठा लिया। नीरज के कोच नसीम अहमद ने कहा कि नीरज ने युवाओं के लिए नई खिड़कियां खोल दी है।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी ने कहा कि ओलंपिक में देश को गौरवान्वित करने वाले खिलाड़ियों को ऑनरेरी एसपी, डीएसपी… आदि अवश्य बनाया जाए ताकि आने वाली युवा पीढ़ी को खेल के प्रति रुझान पैदा हो तथा खिलाड़ी गोल्ड दिलाकर भारत को गौरवान्वित करता रहे… और भारतीय राष्ट्रगान ओलंपिक में बार-बार बजता रहे।

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शरीर का धर्म प्राण की रक्षा करना है- डॉ.मधेपुरी

वेदान्ता आर्थो केयर सेन्टर, जजहट-सबैला (मधेपुरा) के डायरेक्टर डॉ.बीएन भारती ने आज अपने सेंटर पर इंडिया ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के बैनर तले “बाॅन एंड ज्वाइंट दिवस” मनाने के क्रम में विषय रखा था- “Save Self, Save One”.

बता दें कि इस सेमिनार में स्थानीय सीनियर चिकित्सकों डॉ.डीके सिंह, डॉ.एसएन यादव, डॉ.आरपी गुप्ता, डॉ.आरके पप्पू , डॉ.अमित आनंद सहित आरआर ग्रीन फील्ड के निदेशक राजेश कुमार व छात्रगण उपस्थित थे। इसमें गांव व शहर के कुछ सोशल एक्टिविस्ट भी मौजूद थे.

जानिए कि इस सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में भारतरत्न डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम के अत्यंत करीबी रहे समाजसेवी-शिक्षाविद्  प्रो.(डॉ.) भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को आमंत्रित किया गया था। सेमिनार में सभी चिकित्सकों ने दुर्घटनाग्रस्त लोगों की सांसो की निरंतरता को बनाए रखने हेतु हार्ट को पंप करने की विविध क्रियाओं को विस्तार से समझाया।

अंत में मुख्य अतिथि डॉ.मधेपुरी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में भारतरत्न डॉ.कलाम को संदर्भित करते हुए यही कहा-

“शरीर का धर्म प्राण की रक्षा करना है। समाज का धर्म लोगों की रक्षा करना है। राजा का धर्म देश की रक्षा करना है।”

डॉ.मधेपुरी ने डॉ.कलाम की सहजता के बाबत संस्मरण सुनाते हुए कहा कि हम सभी जीवन को सहज बना कर जिएं। हम कार में सफर करते वक्त सीट बेल्ट अवश्य लगाएं, मोटरसाइकिल पर चलते वक्त हेलमेट जरूर पहनें और कोरोना काल में ‘दो गज दूरी, मास्क है जरूरी’ का पालन करें। तभी हम खुद की सुरक्षा कर सकते हैं और दूसरों की रक्षा भी कर सकते हैं।

 

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भारतीय पुरुष हॉकी 40 वर्षों के बाद कमबैक कर इतिहास रचा

भारतीय हॉकी का जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद के जमाने में ओलंपिक में अनेक गोल्ड मेडल भारत को मिले। टोक्यो ओलंपिक- 2020 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने जर्मनी को 5-4 से हराकर 40-41 वर्ष बाद ब्रॉन्ज मेडल जीत कर नया इतिहास रचा है।

बता दें कि रेसलिंग में रवि दहिया को 57 किलोग्राम फाइनल में पहुंचकर भी सिल्वर पदक पाकर ही संतोष करना पड़ा, वहीं 22 वर्षीय दीपक पूनिया पहले राउंड में आगे बढ़ते हुए अंतिम सेकंड में ब्रॉन्ज जीतने से चूक गए। विनेश फोगाट एवं अंशु मलिक ने भी निराश किया भारतीय खेल प्रेमियों को।

भारतीय महिला हॉकी टीम ने तो पहली बार 130 करोड़ भारतीयों के अंदर उत्साह की लहर पैदा कर दी। इस बार ओलंपिक के रंगमंच पर महिला हॉकी टीम ने हार कर भी सभी भारतीयों के दिलों को जीत लिया।

मौके पर खेलप्रेमी-समाजसेवी डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने भरपूर विश्वास जताते हुए यही कहा कि आगे पुरुष एवं महिला हॉकी टीम भारत को पूर्व की भांति गोल्ड जीतकर गौरवान्वित करेगी।

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सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की राजकीय जयंती कोविड प्रोटोकॉल के तहत मनेगी- डीडीसी

मधेपुरा के उप विकास आयुक्त विनोद कुमार सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय के पुरोधा बीपी मंडल की 103वीं जयंती समारोह राजकीय सम्मान के साथ आगामी 25 अगस्त को मनाए जाने हेतु झल्लू बाबू सभागार में 1 बजे अपराहन से एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में समाहरणालय, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य, विद्युत, भवन निर्माण आदि के पदाधिकारियों के अतिरिक्त शहर के गणमान्य सुधीजनों यथा चिकित्सक डॉ.एके मंडल, शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, डॉ.शांति यादव, डॉ.सुरेश भूषण, डॉ.आलोक कुमार, मोहम्मद शौकत अली, आनंद मंडल, प्रो.श्यामल किशोर यादव, स्काउट आयुक्त जयकृष्ण यादव आदि मौजूद देखे गए।

बता दें कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर के मद्देनजर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बीपी मंडल की राजकीय जयंती समारोह के अवसर पर बच्चों द्वारा प्रभात फेरी नहीं होगी और किसी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी नहीं होगा। सादगी के साथ उनकी प्रतिमा एवं समाधि स्थल पर पुष्पांजलि एवं सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन होगा।

सर्वसम्मति से बीपी मंडल की जीवनी एक फोल्डर में प्रिंट कराने का निर्णय लिया गया। जीवनी लेखन हेतु समाजसेवी-साहित्यकार डॉ.भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी को अधिकृत करते हुए अनुरोध किया गया कि इस कार्य को पूरा कर इसे प्रिंट कराने हेतु नजारत उप समाहर्ता को शीघ्र ही हस्तगत करा देंगे। यह भी निर्णय लिया गया कि समारोह में डॉ.मधेपुरी द्वारा बीपी मंडल की जीवनी का वाचन किया जाएगा और मधेपुरा एवं मुरहो में बीडीओ मधेपुरा द्वारा उसे वितरित भी किया जाएगा।

अंत में गणमान्यों द्वारा स्थानीय बीपी मंडल चौक स्थित प्रतिमा स्थल पर 103 दीये जलाने की बातें कही गई। साफ-सफाई, रंग-रोगन आदि विभिन्न प्रकार के उद्गार व्यक्त किए गए। डॉ.एके मंडल ने प्रो.श्यामल बाबू के आरंभिक योगदान व सम्मान की विस्तार से चर्चा की जिसका सबों ने करतल ध्वनि के साथ समर्थन किया।

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सिंधु ने की घोषणा… पेरिस ओलंपिक में आएगा सोना

आज  टोक्यो ओलंपिक (2020) के बैडमिंटन में विश्व के तीसरे नंबर की खिलाड़ी बनकर काँस्य पदक के साथ दोपहर बाद 3:00 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरी पीवी सिंधु का शानदार स्वागत किया गया। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए सिंधु ने यही कहा-  “मैं खुश हूं, स्वागत और समर्थन के लिए धन्यवाद !!

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक पर भी नजर रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि 8 अगस्त को टोक्यो से लौटने वाले 127 भारतीय ओलंपिक खिलाड़ियों को लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के जश्न मनाने के दिन यानि 15 अगस्त का न्योता दिया जाए। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त पर खास मेहमान होंगे ओलंपिक के खिलाड़ीगण। लाल किले पर ओलिंपिक खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी। शाम में प्रधानमंत्री आवास पर प्रत्येक खिलाड़ी से मिलेंगे पीएम और उनके कंधे पर हाथ रखकर यही कहेंगे-

“हार-जीत जीवन का हिस्सा है। देश अपने खिलाड़ियों पर गर्व करता है। ओलंपिक में सभी खिलाड़ी श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। हॉकी में भारत पुनः वापसी करेगा…।”

चलते-चलते यह भी जानिए की न्यूज़-24 के एंकर ऋषभ शर्मा द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सिंधु ने की घोषणा- पेरिस ओलंपिक में आएगा सोना, तब तक शादी के बारे में नहीं कुछ सोचना।

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने केंद्रीय खेल मंत्री से विनम्र अनुरोध किया है कि बिहार सहित अन्य 7 विश्वविद्यालय  वाले राज्यों के अतिरिक्त भारत के शेष बचे हुए सभी राज्यों को हर तरह की मदद देते हुए एक-एक खेल विश्वविद्यालय खोलने एवं सुविचारित ढंग से एक-एक राज्य को ओलंपिक के एक-एक खेल के लिए खिलाड़ियों को तैयार करने हेतु आवश्यक संसाधन मुहैया कराएं । प्रत्येक वर्ष एक बार उसकी समीक्षा बैठक में सभी राज्यों के खेल मंत्रियों के साथ प्रत्येक खेल के विशेषज्ञों को भी बुलायें।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने यह भी कहा कि ओलंपिक में भाग ले चुके खिलाड़ियों को खेल विश्वविद्यालयों की गतिविधियों में अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।

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सिंधु ने टोक्यो- 2020 ओलंपिक में पुनः जीता पदक

टोक्यो ओलंपिक- 2020 में भारत की बेटियों ने कमाल कर दिखाया। ओलंपिक पदक तालिका में सर्वप्रथम वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने सिल्वर और फिर बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित कराया और भारतीय तिरंगा को भी गौरवान्वित किया। जहाँ चानू ने चांदी की चमक से भारत का नाम चमकाया, वहीं सिंधु ने कांस्य पदक जीतकर भी भारतीय खेल प्रेमियों को निराश ही किया।

बता दें कि टोक्यो- 2020 में पीवी सिंधु का डबल धमाका तो हुआ सही, क्योंकि इससे पहले वाले रियो ओलंपिक में सिंधु भारत को सिल्वर पदक दिलाने में सफल हुई थी और इस बार के टोक्यो- 2020 में उसने भारत को ओलंपिक में कांस्य पदक देकर ही गौरवान्वित किया।

जानिए कि पीवी सिंधु ने इतिहास तो सही में रचा, परंतु संपूर्ण भारत सिंधु से गोल्ड की आशा लगाए बैठा रहा था। सिंधु के पिताश्री की भी यही तमन्ना थी, तभी तो उन्होंने पूछे जाने पर बस इतना ही कहा- “आइसक्रीम से मुझे परेशानी नहीं….. परंतु, वजन तो कंट्रोल में रखे……!”

मौके पर समाजसेवी-शिक्षाविद् डॉ.भूपेन्द्र मधेपुरी ने समस्त भारतीय खेल प्रेमियों से सकारात्मक सोच को बढ़ाते रहने का विनम्र अनुरोध करते हुए यही कहा कि पीवी सिंधु रियो ओलंपिक में सिल्वर और टोक्यो- 2020 में ब्रोंज मेडल जीती है….. अब अगले ओलंपिक के लिए तो बचा है केवल ‘गोल्ड’….. वह जीत कर भी भारतीय तिरंगा को ऊंचाई प्रदान करेगी बशर्ते हमारा विश्वास….. और आत्मविश्वास बना रहे।

अंत में डॉ.मधेपुरी ने खेल प्रेमी बच्चे-बच्चियों से यह भी कहा कि पुसर्ला वेंकट सिंधु का जन्म पिता पी वी रमन एवं माता पी विजया के घर हैदराबाद (तेलंगाना) में 5 जुलाई 1995 को हुआ था। सिंधु के माता-पिता वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। सिंधु ने मात्र 8 वर्ष की उम्र से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। सिंधु के गुरु आरंभ में महबूब अली और बाद में गोपीचंद रहे हैं। सिंधु के खेल के प्रति समर्पण इस बात से आँकी जा सकती है कि कोचिंग कैंप सिंधु के घर से 56 किलोमीटर दूर होने के बावजूद भी वे रोज समय पर आ जाती थी…।

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